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दिमाग में ब्लड फ्लो पर नजर रखेगा Temple वियरेबल, 6 कलर ऑप्शन में आएगा डिवाइस

 नई दिल्ली Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल का नया डिवाइस Temple जल्द ही खरीदने के लिए अवेलेबल होने वाला है. यह कोई आम स्मार्टवॉच या फिटनेस बैंड नहीं है. इसे हाथ में पहनने के बजाय सिर के कनपटी वाले हिस्से में लगाया जाता है. इसकी मदद से दिमाग में खून के बहाव से जुड़े बदलावों को ट्रैक किया जा सकता है. अब कंपनी ने इसकी प्री-बुकिंग की तारीख भी बता दी है. Temple की बुकिंग 1 नवंबर 2026 से शुरू होगी।  6 कलर में आएगा Temple Temple को शुरुआत में छह अलग-अलग कलर ऑप्शन में पेश किया जाएगा. इनमें True Gold, Rose Gold, Black Mirror, Real Jade, Deep Blue और Purple Funk शामिल हैं. इनमें Real Jade, Deep Blue और Purple Funk लिमिटेड एडिशन कलर होंगे।  इस डिवाइस को लेकर लोगों में काफी दिलचस्पी है, क्योंकि इसका डिजाइन और काम करने का तरीका दूसरे वियरेबल डिवाइस से काफी अलग है. कंपनी के मुताबिक, शुरुआती बैच में डिवाइस ऑर्डर मिलने के बाद तैयार किए जाएंगे. ऐसे में बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगी।  क्या करता है Temple डिवाइस? आमतौर पर स्मार्टवॉच से हार्ट रेट, स्टेप्स और नींद जैसी चीजों को ट्रैक किया जाता है. लेकिन Temple का फोकस दिमाग में खून के बहाव से जुड़े संकेतों पर है. कंपनी ने इस तकनीक को BrainFlow नाम दिया है।  यह डिवाइस सिर के किनारे, माथे और कान के बीच कनपटी के पास लगाया जाता है. इसमें ऑप्टिकल सेंसर का इस्तेमाल होता है, जो खून और टिश्यू में होने वाले बदलावों से जुड़े संकेतों को ट्रैक करते हैं।  इन संकेतों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि एक्सरसाइज, नींद और दूसरी गतिविधियों के दौरान दिमाग में ब्लड फ्लो से जुड़े बदलाव कैसे होते हैं. हालांकि, इसे दिमाग की पूरी सेहत जांचने वाला डिवाइस नहीं समझना चाहिए. यह किसी बीमारी की पहचान करने के लिए मेडिकल जांच का विकल्प भी नहीं है।  कितनी होगी कीमत? Temple की कीमत को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. कंपनी ने इसकी पूरी स्पेसिफिकेशन और डिलीवरी की तारीख का भी खुलासा नहीं किया है. ऐसे में खरीदने से पहले इन जानकारियों का इंतजार करना होगा।  फिलहाल, 1 नवंबर से शुरू होने वाली प्री-बुकिंग इस डिवाइस को लेकर सबसे बड़ा अपडेट है. अब देखना होगा कि दीपिंदर गोयल का यह नया वियरेबल बाजार में आने के बाद लोगों को कितना पसंद आता है। 

पंजाब के इस गांव में 165 साल से चली आ रही अनूठी परंपरा, सिर्फ 1000 रुपये में होता है रावण दहन

फतेहगढ़ साहिब जहां देशभर में विजयादशमी पर कागज और पटाखों से बने विशाल रावण का दहन होता है, वहीं फतेहगढ़ साहिब जिले के सबसे बड़े गांव चनारथल कलां (आबादी लगभग 7,000) में यह परंपरा अनोखी और पर्यावरण-अनुकूल है। यहां दशहरे के अगले दिन यानी एकादशी तिथि को रावण दहन का आयोजन किया जाता है। इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां प्रदूषण फैलाने वाले पुतलों की जगह लोहे के स्थाई रावण का इस्तेमाल होता है। परंपरा निभाने के लिए पुतले के सिर्फ मुकुट पर एक छोटा सा बम लगाकर रस्म पूरी की जाती है, जिससे पर्यावरण और संसाधनों की बचत होती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में प्रभु श्री राम ने इस गांव में छप्पड़ के पास एक पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम किया था। इसके अलावा, आयोजन स्थल के चौक पर 165 वर्ष पुराना कुंभकर्ण का सीमेंट निर्मित बुत स्थापित है। यह बुत गांव के ऐतिहासिक इतिहास को दर्शाने के साथ-साथ लोगों को बुराई के प्रति जागरूक करने का काम करता है। श्री रामलीला कमेटी हनुमान जी के झंडा मार्च से सवा महीने पहले ही तैयारियां शुरू कर देती है। अष्टमी की रात से रामायण के मुख्य अंशों पर आधारित झांकियां निकाली जाती हैं, नवमी से खेल मेले की शुरुआत होती है और एकादशी के दिन रावण दहन के साथ मेले का समापन होता है। लोहे का स्थाई रावण और मात्र 1000 का खर्च इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रदूषण फैलाने वाले कागज या लकड़ी के पुतलों की जगह लोहे के स्थाई पुतले का इस्तेमाल किया जाता है। परंपरा को जीवित रखने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए पुतले के सिर्फ सिर पर रंग-बिरंगे कागजों की टोपी बनाकर एक पटाखा लगाया जाता है। एकादशी के दिन भगवान श्री राम तीर चलाकर रस्म पूरी करते हैं। इस पूरे आयोजन में महज एक हजार रुपये का खर्च आता है और प्रदूषण भी नहीं फैलता। 165 साल पुराना दिलचस्प इतिहास गांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों हरिंदर सिंह, संजीव कुमार, कुलवंत सिंह, तरसाम सिंह, मनदीप सिंह के अनुसार, इस अनोखी परंपरा के पीछे 165 साल पुराना इतिहास है। करीब 157 वर्ष पहले वर्ष 1861 तक यहां दशमी के दिन ही दशहरा मनाया जाता था। उस समय गांव में करीब 100 परिवार रहते थे जो मुख्य रूप से पशुपालक थे। दशहरे वाले दिन गांव के करीब 400 पशु खेतों में चरते हुए रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए। काफी खोजबीन के बाद भी वे नहीं मिले, लेकिन अगले दिन एकादशी तिथि को सभी पशु सुरक्षित वापस लौट आए। पशुओं के सही-सलामत लौटने की खुशी में ग्रामीणों ने एकादशी के दिन उत्सव मनाते हुए रावण दहन की शुरुआत की, जो आज भी कायम है। कुंभकर्ण का सीमेंट से बना गांव में यह भी गहरी धार्मिक मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्री राम यहां आए थे और उन्होंने गांव के बाहर बने छप्पड़ के पास एक पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम किया था। श्री राम के आराम करने के बाद उस पीपल पर पतासे लगने लगे थे।इसके अलावा, गांव के चौक पर कुंभकर्ण का सीमेंट से बना 165 वर्ष पुराना बुत स्थापित है। इसका मकसद गांव के इतिहास को लोगों के समक्ष रखना और बुराई के प्रति जागरूक करना है। एक ही परिवार कर रहा निशुल्क सेवा रावण का पुतला और झांकियां तैयार करने में गांव के ही एक परिवार की 5 पीढ़ी निश्शुल्क सेवा निभा रही है। वर्तमान में सेवा संभाल रहे 25 वर्षीय कृष्ण गोपाल ने बताया कि उनके परदादा भगत पूर्ण चंद ने संतान प्राप्ति के आशीर्वाद के बाद इस परंपरा की शुरुआत की थी। उनके बाद फकीर चंद, रमेश कुमार और अब 5 पीढ़ी इस पावन परंपरा को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रही है।  

न्यू नोएडा के विकास की तैयारी तेज, पहले चरण में 37 गांवों की जमीन का होगा अधिग्रहण

नोएडा  उत्तर प्रदेश में न्यू नोएडा परियोजना का काम आगे बढ़ रहा है, पहले चरण में 37 प्राथमिकता वाले गांवों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने रविवार को यह जानकारी दी. प्रस्तावित न्यू नोएडा को NCR में एक बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, इसका उद्देश्य विनिर्माण, माल ढुलाई और भंडारण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है।  न्यू नोएडा को आधिकारिक तौर पर दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र (DNGIR) के नाम से अधिसूचित किया गया है. यह परियोजना गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर जिलों के 84 गांवों में लगभग 209 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित होगी।  अवनीश कुमार अवस्थी ने एक्स पर परियोजना की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बाद न्यू नोएडा पर ध्यान केंद्रित हो रहा है, उनके मुताबिक, इसका आकार मौजूदा नोएडा से भी बड़ा होगा।  यह प्रोजेक्ट दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC) ढांचे के तहत विकसित की जा रही है. इसका मकसद NCR में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए नई जगह उपलब्ध कराना है।  आवासीय विकास से ज्यादा उद्योगों पर जोर न्यू नोएडा की योजना पारंपरिक शहरी विकास मॉडल से अलग होगी. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आवासीय क्षेत्रों के साथ औद्योगिक गतिविधियों का विकास हुआ है, लेकिन न्यू नोएडा में विनिर्माण और माल ढुलाई से जुड़ी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा. मास्टर प्लान 2041 के तहत कुल क्षेत्रफल का करीब 40.27 प्रतिशत हिस्सा विनिर्माण और भारी लॉजिस्टिक्स के लिए निर्धारित किया गया है, इससे यहां औद्योगिक इकाइयों, गोदामों और माल के भंडारण एवं परिवहन से जुड़ी सुविधाओं के विकास का रास्ता खुलेगा।  इस औद्योगिक ढांचे से निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने की उम्मीद है, साथ ही, NCR में कारोबार करने वाली कंपनियों को अपनी गतिविधियां बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जगह मिल सकती है।  दो बड़े माल ढुलाई कॉरिडोर से जुड़ेगा न्यू नोएडा न्यू नोएडा की प्रमुख विशेषताओं में इसकी रेल माल ढुलाई नेटवर्क से कनेक्टिविटी शामिल है. दादरी के पास पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का मिलन होता है, ये दोनों कॉरिडोर देश में माल की तेज और व्यवस्थित आवाजाही के लिए विकसित किए गए हैं. इनसे जुड़ाव होने पर औद्योगिक इकाइयों को कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पादों को दूसरे बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है, इससे परिवहन की दक्षता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।  बोराकी में मल्टीमॉडल हब से बढ़ेगी कनेक्टिविटी न्यू नोएडा को बोराकी में प्रस्तावित दो प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से भी जोड़ने की योजना है, इनमें मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) शामिल हैं. इन सुविधाओं का उद्देश्य माल ढुलाई और यात्रियों के परिवहन को बेहतर तरीके से जोड़ना है. न्यू नोएडा के विकास के साथ इन परियोजनाओं का तालमेल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत कर सकता है। 

मध्यप्रदेश में IAS प्रमोशन की तैयारी तेज, दिल्ली में DPC बैठक; 39 अधिकारियों की सूची पर मंथन

भोपाल  मप्र को जल्द ही 13 आइएएस और मिल जाएंगे। दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्मिक विभाग में सोमवार को इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक होनी है, जिसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के 39 नामों पर विचार किया जाना है, इनमें वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे अफसरों को आइएएस अवार्ड होना है लेकिन इन 13 में से 4 नामों पर अलग-अलग विवाद है। यदि डीपीसी में उक्त विवादों को आधार दिया जाता है तो सूची में नीचे के 9 अन्य नामों पर विचार होगा। इस तरह 13 में से आइएएस बनने वाली 9 महिला अफसर हो सकती हैं। बता दें कि हर साल वरिष्ठता के आधार पर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आइएएस अवॉर्ड होता है। यानी राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर कहलाते हैं। यह अहम ओहदा होता है ये अफसर वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे, लेकिन… जीएडी के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों में जीएडी के उप सचिव जयेंद्र कुमार विजयवत, राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव मनोज मालवीय, परिवहन विभाग के उप सचिव कमल चंद्र नागर, शहडोल जिले में अपर कलेक्टर मिनिषा पांडेय, भोपाल जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी, इंदौर संभाग में उपायुक्त (राजस्व) सपना एम लोवंशी, बुरहानपुर अपर कलेक्टर नीता राठौर, शाजापुर जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी, लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में उप सचिव रानी पासी, आयुष विभाग की उप सचिव रंजना देवड़ा, महिला एवं बाल विकास विभाग की उप सचिव माधवी नागेंद्र, पर्यावरण विभाग में उप सचिव एवं पीसीबी मप्र की प्रभारी सदस्य सचिव वर्षा सोलंकी व माध्यमिक शिक्षा मंडल में अतिरिक्त सचिव प्रियंका गोयल का नाम वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे है लेकिन इन्हीं में से चार नाम ऐसे है, जिनके साथ विवाद जुड़ गए हैं। तेजस्वी व सपना के नाम पर इनको आपत्ति डीपीसी के लिए जिन 39 नामों की सूची तैयार की है, उनमें महीप किशोर तेजस्वी का नाम भी शामिल है। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने तेजस्वी के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई है। उधर, सपना एम लोवंशी के नाम का आरटीआइ कार्यकर्ता अजय दुबे ने सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। हालांकि जीएडी को इन नामों पर आपत्ति है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। सभी नामों पर होगा विचार जिन 39 नामों की सूची प्रस्तावित की है, उनमें से सभी पर विचार होगा। विचार के बाद नामों को वरिष्ठता व संबंधितों की सीआर के आधार पर आउट स्टैंडिंग, वैरी गुड, गुड और अनफिट श्रेणी में रखा जाएगा। सबसे पहले आउट स्टैंडिंग श्रेणी में शामिल अफसरों को आइएएस अवॉर्ड होंगे, यदि कोटा बचता है तो वैरी गुड श्रेणी में शामिल नामों को लिया जाएगा, इसके बाद भी कोटा बचा तो गुड श्रेणी से नाम उठाए जाएंगे। केंद्रीय कार्मिक विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह पदोन्नति नहीं, बल्कि मैरिट कम अपॉइंटमेंट है, इसलिए जो नाम इस बार अनफिट श्रेणी में डाले जाएंगे, वे अगली बार उस श्रेणी से बाहर भी आ सकते हैं, क्योंकि हर बार बीते 5 साल की सीआर का अवलोकन किया जाता है। ये चार नाम…इनमें से एक के लिए बनाई विशेष जगह जीएडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जिन चार नामों पर विवाद है, यदि डीपीसी में वे अटक जाते हैं तो वरिष्ठता के आधार पर हरदा जिला पंचायत सीईओ नरोत्तम प्रसाद भार्गव, मप्र लोक सेवा आयोग में अपर नियंत्रक निधि सिंह राजपूत, जीएडी (कार्मिक) में उप सचिव निमिषा जायसवाल व उज्जैन जिला पंचायत एवं उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप कुमार सोनी का नाम आगे बढ़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक इन चार नामों में से एक के लिए विशेष तौर पर जगह बनाए जाने की चर्चा सार्वजनिक हो चुकी है।

कर्नाटक में सरकारी डॉक्टरों-कर्मचारियों के लिए नया नियम, नाइट ड्यूटी की हाजिरी ‘कर्तव्य’ ऐप पर होगी दर्ज

बेंगलुरु  कर्नाटक सरकार ने अधिकारियों की लापरवाही पर लगाम कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अब राज्य के सरकारी कर्मचारियों और डॉक्टरों को अपने हेडक्वार्टर पर ही रहना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके लिए सरकार 'कर्तव्य' नाम का एक मोबाइल ऐप लेकर आई है, जिसके जरिए नाइट अटेंडेंस दर्ज की जाएगी।  राज्य सरकार की इस नई नीति का मकसद सरकारी अधिकारियों को अपनी कार्यक्षेत्र की सीमा में रखना है, ताकि जनता को समय पर सेवाएं मिल सकें और विकास कार्यों में कोई रुकावट न आए। इस व्यवस्था की शुरुआत सबसे पहले स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के तहत आने वाले तालुक अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) से होगी. इसे सभी डॉक्टरों पर 1 नवंबर 2026 से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा।  इसके तहत डॉक्टरों को हर दिन रात 9 बजे के बाद 'कर्तव्य' ऐप के जरिए अपनी हाजिरी लगानी होगी. इस दौरान उन्हें अपने मुख्यालय वाले शहर, कस्बे या गांव की सीमा के अंदर ही रहना अनिवार्य होगा।  अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने पर होगी कार्रवाई प्रजा सेवा विभाग के प्रधान सचिव हर्ष गुप्ता ने 17 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया था. इसके मुताबिक, जो अधिकारी या कर्मचारी छुट्टी पर हैं, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से कहीं बाहर ड्यूटी पर हैं, या जिन्होंने मुख्यालय छोड़ने की पूर्व अनुमति ली है, उन्हें इस नियम से छूट दी जाएगी. हालांकि, उन्हें ऐप पर अपनी छुट्टी या अनुमति की वजह दर्ज करना होगा।  जिला स्वास्थ्य अधिकारियों और आयुक्तों को हर महीने रात की हाजिरी की रिपोर्ट की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं. अगर कोई अधिकारी बिना अनुमति के अपने मुख्यालय से नदारद पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सिविल सेवा नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  ये कदम उप लोकायुक्त की कार्यवाही के बाद उठाया गया है. ये पाया गया था कि कई कर्मचारी मुख्यालय पर रहने के बजाय दूरदराज के इलाकों से काम संभाल रहे थे, जिससे जनता को काफी परेशानी होती थी।  संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी नियम सख्त एक अलग आदेश के तहत सरकार ने कई विभागों, बोर्डों और निगमों में काम करने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी 'कर्तव्य' ऐप के जरिए हाजिरी दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है. सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वो 25 नवंबर 2026 तक अपने अधीन आने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का रजिस्ट्रेशन इस ऐप पर करें।  1 दिसंबर 2026 से इन सभी कर्मचारियों की हाजिरी सिर्फ इसी ऐप के जरिए दर्ज की जाएगी. 1 जनवरी 2027 से संविदा कर्मचारियों का वेतन और आउटसोर्स एजेंसियों के बिल सिर्फ ऐप से जनरेट होने वाली अटेंडेंस रिपोर्ट के आधार पर ही पास किए जाएंगे। 

विंध्याचल में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, मां विंध्यवासिनी धाम के साथ अब विंध्य त्रिकोण की भी यात्रा

लखनऊ/मीरजापुर  विंध्याचल में धार्मिक पर्यटन का दायरा मां विंध्यवासिनी मंदिर से आगे बढ़कर संपूर्ण 'विंध्य त्रिकोण' तक विस्तारित हो रहा है। मां विंध्यवासिनी, मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिरों में वर्ष 2025 के दौरान कुल करीब 1.84 करोड़ दर्शनार्थी पहुंचे। वर्ष 2023 में यह संख्या लगभग 1.15 करोड़ थी। इस तरह दो वर्षों में तीनों मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सदियों पुरानी विंध्य त्रिकोण परिक्रमा अब धार्मिक पर्यटन की नई पहचान बन रही है। योगी सरकार भी शक्तिपीठ सर्किट विकसित कर इस आस्था पथ को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है। मां विंध्यवासिनी धाम श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र विंध्य त्रिकोण अंतर्गत मां विंध्यवासिनी धाम में दर्शनार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2023 में जहां करीब 73 लाख श्रद्धालु मां के दरबार पहुंचे थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 78.15 लाख और साल 2025 में करीब 1.20 करोड़ तक पहुंच गया। यानी दो साल में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 64 फीसदी का उछाल आया। आस्था का यह सिलसिला 2026 में भी तेजी से बढ़ रहा है। जनवरी से अगस्त तक ही करीब 90 लाख श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर चुके थे। यह संख्या पिछले पूरे साल के कुल दर्शनार्थियों की करीब 75 फीसदी है। खास बात यह है कि यह आंकड़ा शारदीय नवरात्र के पहले का है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की आमद बढ़ने के साथ धाम में दर्शनार्थियों की संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती है। काली खोह और अष्टभुजा मंदिरों में भी बढ़े श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी धाम के साथ मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ तेजी से बढ़ी है। विंध्याचल में धार्मिक पर्यटन के विस्तार का असर इन दोनों मंदिरों में दर्शनार्थियों की संख्या पर भी दिख रहा है। वर्ष 2023 में मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिरों में कुल करीब 42.36 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 64 लाख हो गया। यानी दो साल में श्रद्धालुओं की संख्या में 51 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़े बताते हैं कि विंध्याचल आने वाले श्रद्धालु अब मां विंध्यवासिनी के दर्शन के साथ मां काली खोह और मां अष्टभुजा के दरबार में भी हाजिरी लगा रहे हैं। इससे विंध्य त्रिकोण की परिक्रमा धार्मिक पर्यटन के प्रमुख आकर्षण के रूप में उभर रही है। विंध्याचल बनेगा शक्तिपीठ सर्किट का केंद्रः पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'विंध्याचल में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या विकास कार्यों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विंध्याचल धाम को संपूर्ण शक्ति पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। विंध्याचल प्रदेश के विस्तारित शक्तिपीठ सर्किट का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उत्तर प्रदेश की समृद्ध शक्ति उपासना परंपरा से जोड़ने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।' विकास कार्यों से मजबूत हो रहा आधारभूत ढांचा विंध्याचल में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक स्थलों के कायाकल्प पर करीब 208.09 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके तहत मां की पैड़ी, संपर्क मार्गों, परिक्रमा पथ, आसपास की सड़कों और मुख्य मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विंध्यवासिनी स्वरूप देवी मंदिर के आसपास के विकास के साथ अष्टभुजा और काली खोह क्षेत्र में भी बुनियादी सुविधाएं मजबूत की जा रही हैं। पहाड़ी मंदिरों तक पहुंच आसान बनाने में रोपवे ने अहम भूमिका निभाई है। इससे बुजुर्गों और परिवारों को विशेष सहूलियत मिली है। वहीं, त्रिकोण परिक्रमा योजना के तहत मां काली खोह क्षेत्र के विकास के लिए 35.50 करोड़ रुपये की परियोजना अक्टूबर में निविदा प्रक्रिया तक पहुंच गई। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि सरकार का जोर अब केवल मुख्य मंदिर तक सीमित न रहकर पूरे विंध्य त्रिकोण को सुविधायुक्त धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर है। यूपीएसटीडीसी ने शुरू किए दो धार्मिक टूर पैकेज विंध्याचल में सुविधाओं के विस्तार के साथ धार्मिक पर्यटन को संगठित रूप देने की पहल भी तेज हुई है। 'विजिट माय स्टेट' पहल के तहत उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने दो विशेष यात्रा पैकेज शुरू किए हैं। दो दिन और एक रात के पहले पैकेज में वाराणसी और विंध्याचल को जोड़ा गया है। इसके तहत पर्यटक काशी के मंदिरों व घाटों के साथ 'विंध्य त्रिकोण' के तीनों देवी मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे। वहीं, दो रात और तीन दिन का दूसरा पैकेज लखनऊ, वाराणसी, विंध्याचल और प्रयागराज को एक धार्मिक यात्रा सर्किट में पिरोता है। इससे श्रद्धालु मां के धाम में शक्ति उपासना की परंपरा से रूबरू होने के साथ काशी और संगम क्षेत्र के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन भी कर सकेंगे। धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि विंध्याचल में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या प्रदेश की सर्किट आधारित पर्यटन रणनीति को मजबूती दे रही है। प्रदेश सरकार का जोर बेहतर कनेक्टिविटी, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं, दर्शन और सुव्यवस्थित यात्रा पैकेजों के जरिए श्रद्धालुओं का सफर आसान बनाने पर है। इससे पर्यटकों का ठहराव बढ़ने के साथ स्थानीय कारोबारियों और समुदायों को भी पर्यटन से होने वाली आय का लाभ मिल सकेगा। विंध्य त्रिकोण परिक्रमा को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से होटल, परिवहन, गाइड और खानपान सेवाओं के साथ फूल-माला व प्रसाद कारोबार को विस्तार मिल सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन को गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

यूपी के बुजुर्गों के लिए पेंशन भुगतान का नया सिस्टम, तीन महीने की रकम दो किस्तों में मिलेगी

बलिया  वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले बुजुर्गों के लिए भुगतान व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब तीन माह की पेंशन एकमुश्त देने के बजाय दो किस्तों में भेजने की व्यवस्था की गई है। दोनों किस्तों के बीच 45 दिन का अंतराल रहेगा। प्रत्येक किस्त में लाभार्थियों के बैंक खाते में 1500 रुपये भेजे जाएंगे। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे खाते में पहुंचेगी। नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को बैंक खाते और आधार से जुड़ी जानकारी दुरुस्त रखनी होगी। खाता आधार से लिंक नहीं होने या नाम, खाता संख्या सहित अन्य विवरणों में गड़बड़ी होने पर भुगतान अटक सकता है। वृद्धावस्था पेंशन में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी लाभार्थी की उम्र के अनुसार निर्धारित है। दोनों सरकारों का अंश 1500-1500 रुपये है 80 वर्ष से कम आयु के लाभार्थियों को तीन माह में राज्य सरकार की ओर से 2400 रुपये और केंद्र सरकार की ओर से 600 रुपये मिलते हैं। वहीं, 80 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए दोनों सरकारों का अंश 1500-1500 रुपये है। जिला समाज कल्याण अधिकारी रमेश कुमार ने लाभार्थियों से बैंक खाते को आधार से लिंक कराने और बैंक विवरण सही रखने की अपील की है, ताकि भुगतान में परेशानी न हो। वृद्धावस्था पेंशन के लिए न्यूनतम आयु 60 वर्ष निर्धारित है। ग्रामीण क्षेत्र में वार्षिक आय 46,080 रुपये और शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक और परिवार रजिस्टर की नकल सहित आवश्यक दस्तावेज एसएसपीवाई पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। पात्र बुजुर्गों को आवेदन में सही जानकारी भरने और अभिलेख दुरुस्त रखने का निर्देश है।

सीहोर के रुठिया परिवार ने मांगा ब्रिटेन से पुराना कर्ज, जवाब मिला- रिकॉर्ड नहीं

सीहोर  ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध के समय लिए 35 हजार रुपये के कर्ज की देनदारी से इनकार कर दिया है। यह कर्ज सीहोर के प्रसिद्ध सेठ रुठिया के परिवार के सदस्य ने दिया था। रुठिया परिवार ने पिछले दिनों नोटिस भेजा था। अब ब्रिटेन (यूके) के ऋण प्रबंधन कार्यालय ने ईमेल भेजकर कहा है कि उनके पास इस कर्ज का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।  दरअसल सीहोर जिले के रुठिया परिवार ने दावा किया है कि उनके पूर्वज सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था। यह रकम ब्रिटिश सरकार ने कभी वापस नहीं की। इसकी वसूली के लिए कारोबारी विनय रुठिया ने अपने अधिवक्ता श्रेयांश रानीवाला के जरिए यूके (ब्रिटेन) सरकार को कानूनी नोटिस भेजा।  दस्तावेज भेजने के बाद भी नहीं मिला भुगतान का भरोसा तीन अगस्त को ब्रिटेन के ऋण प्रबंधन कार्यालय ने ईमेल भेजकर रुठिया परिवार से इस कर्ज से संबंधित दस्तावेज, शर्तें व आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा था। इसके बाद विनय रुठिया ने ब्रिटिश सरकार के पोलिटिकल एजेंट के हस्ताक्षरयुक्त लिखित दस्तावेज और प्रमाणित रिकॉर्ड भेजे थे।  ब्रिटिश सरकार ने देनदारी से झाड़ा पल्ला यूके ऋण प्रबंधन कार्यालय के संचार विभाग ने 16 अक्टूबर को ईमेल के जरिए अपना जवाब भेजा है। इसमें कहा गया कि दावे की गहन जांच की गई, लेकिन उनके विभाग में इस कथित कर्ज का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या प्रमाण मौजूद नहीं है। इस आधार पर यूके सरकार ने भुगतान की किसी भी कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।  विनय रुठिया इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यूके सरकार को इस ऐतिहासिक ऋण से संबंधित मामलों में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

उज्जैन में दशहरे पर महाकाल की शाही सवारी, शमी वृक्ष और शस्त्रों का होगा विधिवत पूजन

उज्जैन  धर्मधानी उज्जयिनी में विजयादशमी पर इस बार राजाधिराज भगवान महाकाल की सवारी इतिहास रचने जा रही है। राजसी ठाठ-बाट, वेद मंत्रों की मंगल ध्वनि, लोक संस्कृति के अनुपम रंग और आकाश से बरसते पुष्पों के बीच जब अवंतिकानाथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे, तो समूची उज्जयिनी राजसी वैभव से आलोकित नजर आएगी। सड़कों पर कहीं वेदों की ऋचाएं गूंजेगी, तो कहीं जनजातीय कलाकारों के पारंपरिक नृत्य भारतीय संस्कृति की विविधता का दर्शन कराएंगे। चित्रकार अपनी तूलिका से उज्जयिनी के गौरव को कैनवास पर उकेरते चलेंगे। विभिन्न बैंडों की सुमधुर स्वर लहरियां वातावरण में उत्सव का उल्लास घोलेंगी। ज्ञात इतिहास में विजयादशमी पर भगवान महाकाल की ऐसी भव्य सवारी पहले कभी नहीं निकली है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी को ऐतिहासिक स्वरूप दिया जा रहा है। आयोजन में धर्म, अध्यात्म, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम दिखाई देगा। इसके लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। सवारी शाम चार बजे महाकाल मंदिर से राजसी वैभव के साथ प्रारंभ होगी। भगवान महाकाल नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नए शहर फ्रीगंज स्थित दशहरा मैदान पहुंचेंगे। यहां कलेक्टर रौशन कुमार सिंह भगवान महाकाल, शमी वृक्ष और शस्त्रों का विधिवत पूजन करेंगे। इसके पश्चात सवारी परंपरागत मार्ग से पुनः महाकाल मंदिर लौटेगी। 200 वेदपाठी बटुक करेंगे राजाधिराज का स्वागत दशहरा मैदान पर इस बार भगवान महाकाल का स्वागत अत्यंत विशिष्ट होगा। 200 से अधिक वेदपाठी बटुक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राजाधिराज की अगवानी करेंगे। वेद मंत्रों की गूंज के बीच भगवान महाकाल का पूजन होगा। सवारी मार्ग पर ड्रोन से पुष्पवर्षा भी की जाएगी। कलाकारों के साथ सड़कों पर उतरेगा लघु भारत सवारी का सबसे बड़ा आकर्षण जनजातीय लोक संस्कृति का प्रदर्शन होगा। विभिन्न अंचलों के 500 कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीतों और लोकधुनों पर नृत्य करते चलेंगे। विविध नृत्य शैलियों, रंग-बिरंगे परिधानों और लोकवाद्यों की थाप से ऐसा प्रतीत होगा, मानो लघु भारत उज्जयिनी की सड़कों पर उतर आया हो। चलते-चलते तूलिका से उकेरेंगे उज्जयिनी का वैभव पहली बार भगवान महाकाल की सवारी में चित्रकला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। नगर के कलाकार सवारी के साथ चलते हुए लाइव पेंटिंग करेंगे। अपनी तूलिका और रंगों के माध्यम से वे उज्जयिनी की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को कैनवास पर साकार करेंगे। बैंडों की स्वर लहरियों से गूंजेगा नगर राजाधिराज की सवारी में पुलिस बैंड, महाकाल मंदिर बैंड, स्काउट बैंड सहित नगर के प्रतिष्ठित बैंड दल शामिल होंगे। विभिन्न बैंडों की मनोहारी प्रस्तुतियां सवारी की भव्यता में चार चांद लगाएंगी। इसलिए निकलती है नगर सीमा लंघन सवारी उज्जैन में भगवान महाकाल को राजा माना जाता है। विजयादशमी पर राजाधिराज के नगर सीमा लंघन की प्राचीन परंपरा है। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए भगवान महाकाल वर्ष में एक बार विजयादशमी पर पुराने शहर से निकलकर नए शहर फ्रीगंज पहुंचते हैं। यहां शमी वृक्ष और शस्त्र पूजन के साथ विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। यह सवारी उज्जयिनी की धार्मिक परंपरा और राजसी गौरव का प्रतीक है।

चीन की राजधानी में बढ़ेगी बुजुर्ग आबादी, पेंशन व्यवस्था पर बढ़ेगा दबाव; जन्म दर बनी चुनौती

बीजिंग  चीन की राजधानी बीजिंग तेजी से बूढ़ी होती आबादी की चुनौती का सामना कर रही है. अनुमान है कि 2035 तक शहर में रहने वाला हर तीसरा व्यक्ति 60 साल या उससे ज्यादा उम्र का होगा. चीन में आबादी का तेजी से बूढ़ा होना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, घरेलू खपत और पेंशन व्यवस्था पर पड़ सकता है।  बीजिंग डेली के मुताबिक, पिछले साल के अंत तक राजधानी में 60 साल या उससे अधिक उम्र के 52.9 लाख स्थायी निवासी थे. यह शहर की कुल आबादी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है. अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ेगी और 2035 तक बीजिंग की आबादी का करीब एक-तिहाई हिस्सा बुजुर्गों का हो जाएगा।  इस चुनौती से निपटने के लिए बीजिंग की सरकार बुजुर्गों को दी जाने वाली सुविधाओं और आर्थिक मदद को बढ़ा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें बुनियादी पेंशन बढ़ाना भी शामिल है. आबादी में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ने के साथ पेंशन और दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च का दबाव भी बढ़ सकता है।  घटती जन्मदर से चीन की चिंता बढ़ी चीन की आबादी 2022 से लगातार घट रही है और देश तेजी से उम्रदराज हो रहा है. इससे सरकार की घरेलू खपत बढ़ाने और कर्ज पर नियंत्रण पाने की कोशिशों को मुश्किल हो सकती है. आने वाले वर्षों में करोड़ों लोगों के कामकाजी उम्र से बाहर होने की आशंका है. ऐसे समय में पेंशन बजट पर पहले से दबाव बना हुआ है।  कम जन्मदर का असर सिर्फ आबादी की संख्या तक सीमित नहीं है. जनसांख्यिकी विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आज कम बच्चे पैदा होने का मतलब भविष्य में कम परिवार और खपत की धीमी बढ़ोतरी भी हो सकता है. इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार प्रभावित होने का खतरा है।  जन्म बढ़ाने के लिए बड़ा खर्च चीन की सरकार आबादी बढ़ाने की योजना को आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है. रॉयटर्स के अनुमानों के मुताबिक, इस साल जन्मदर बढ़ाने के उपायों पर संभावित खर्च करीब 180 अरब युआन यानी लगभग 26.92 अरब डॉलर हो सकता है. सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह जन्मदर में गिरावट को कैसे रोके और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की जरूरतों को कैसे पूरा करे।