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उज्जैन में दशहरे पर महाकाल की शाही सवारी, शमी वृक्ष और शस्त्रों का होगा विधिवत पूजन

उज्जैन  धर्मधानी उज्जयिनी में विजयादशमी पर इस बार राजाधिराज भगवान महाकाल की सवारी इतिहास रचने जा रही है। राजसी ठाठ-बाट, वेद मंत्रों की मंगल ध्वनि, लोक संस्कृति के अनुपम रंग और आकाश से बरसते पुष्पों के बीच जब अवंतिकानाथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे, तो समूची उज्जयिनी राजसी वैभव से आलोकित नजर आएगी। सड़कों पर कहीं वेदों की ऋचाएं गूंजेगी, तो कहीं जनजातीय कलाकारों के पारंपरिक नृत्य भारतीय संस्कृति की विविधता का दर्शन कराएंगे। चित्रकार अपनी तूलिका से उज्जयिनी के गौरव को कैनवास पर उकेरते चलेंगे। विभिन्न बैंडों की सुमधुर स्वर लहरियां वातावरण में उत्सव का उल्लास घोलेंगी। ज्ञात इतिहास में विजयादशमी पर भगवान महाकाल की ऐसी भव्य सवारी पहले कभी नहीं निकली है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी को ऐतिहासिक स्वरूप दिया जा रहा है। आयोजन में धर्म, अध्यात्म, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम दिखाई देगा। इसके लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। सवारी शाम चार बजे महाकाल मंदिर से राजसी वैभव के साथ प्रारंभ होगी। भगवान महाकाल नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नए शहर फ्रीगंज स्थित दशहरा मैदान पहुंचेंगे। यहां कलेक्टर रौशन कुमार सिंह भगवान महाकाल, शमी वृक्ष और शस्त्रों का विधिवत पूजन करेंगे। इसके पश्चात सवारी परंपरागत मार्ग से पुनः महाकाल मंदिर लौटेगी। 200 वेदपाठी बटुक करेंगे राजाधिराज का स्वागत दशहरा मैदान पर इस बार भगवान महाकाल का स्वागत अत्यंत विशिष्ट होगा। 200 से अधिक वेदपाठी बटुक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राजाधिराज की अगवानी करेंगे। वेद मंत्रों की गूंज के बीच भगवान महाकाल का पूजन होगा। सवारी मार्ग पर ड्रोन से पुष्पवर्षा भी की जाएगी। कलाकारों के साथ सड़कों पर उतरेगा लघु भारत सवारी का सबसे बड़ा आकर्षण जनजातीय लोक संस्कृति का प्रदर्शन होगा। विभिन्न अंचलों के 500 कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीतों और लोकधुनों पर नृत्य करते चलेंगे। विविध नृत्य शैलियों, रंग-बिरंगे परिधानों और लोकवाद्यों की थाप से ऐसा प्रतीत होगा, मानो लघु भारत उज्जयिनी की सड़कों पर उतर आया हो। चलते-चलते तूलिका से उकेरेंगे उज्जयिनी का वैभव पहली बार भगवान महाकाल की सवारी में चित्रकला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। नगर के कलाकार सवारी के साथ चलते हुए लाइव पेंटिंग करेंगे। अपनी तूलिका और रंगों के माध्यम से वे उज्जयिनी की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को कैनवास पर साकार करेंगे। बैंडों की स्वर लहरियों से गूंजेगा नगर राजाधिराज की सवारी में पुलिस बैंड, महाकाल मंदिर बैंड, स्काउट बैंड सहित नगर के प्रतिष्ठित बैंड दल शामिल होंगे। विभिन्न बैंडों की मनोहारी प्रस्तुतियां सवारी की भव्यता में चार चांद लगाएंगी। इसलिए निकलती है नगर सीमा लंघन सवारी उज्जैन में भगवान महाकाल को राजा माना जाता है। विजयादशमी पर राजाधिराज के नगर सीमा लंघन की प्राचीन परंपरा है। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए भगवान महाकाल वर्ष में एक बार विजयादशमी पर पुराने शहर से निकलकर नए शहर फ्रीगंज पहुंचते हैं। यहां शमी वृक्ष और शस्त्र पूजन के साथ विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। यह सवारी उज्जयिनी की धार्मिक परंपरा और राजसी गौरव का प्रतीक है।

चीन की राजधानी में बढ़ेगी बुजुर्ग आबादी, पेंशन व्यवस्था पर बढ़ेगा दबाव; जन्म दर बनी चुनौती

बीजिंग  चीन की राजधानी बीजिंग तेजी से बूढ़ी होती आबादी की चुनौती का सामना कर रही है. अनुमान है कि 2035 तक शहर में रहने वाला हर तीसरा व्यक्ति 60 साल या उससे ज्यादा उम्र का होगा. चीन में आबादी का तेजी से बूढ़ा होना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, घरेलू खपत और पेंशन व्यवस्था पर पड़ सकता है।  बीजिंग डेली के मुताबिक, पिछले साल के अंत तक राजधानी में 60 साल या उससे अधिक उम्र के 52.9 लाख स्थायी निवासी थे. यह शहर की कुल आबादी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है. अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ेगी और 2035 तक बीजिंग की आबादी का करीब एक-तिहाई हिस्सा बुजुर्गों का हो जाएगा।  इस चुनौती से निपटने के लिए बीजिंग की सरकार बुजुर्गों को दी जाने वाली सुविधाओं और आर्थिक मदद को बढ़ा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें बुनियादी पेंशन बढ़ाना भी शामिल है. आबादी में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ने के साथ पेंशन और दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च का दबाव भी बढ़ सकता है।  घटती जन्मदर से चीन की चिंता बढ़ी चीन की आबादी 2022 से लगातार घट रही है और देश तेजी से उम्रदराज हो रहा है. इससे सरकार की घरेलू खपत बढ़ाने और कर्ज पर नियंत्रण पाने की कोशिशों को मुश्किल हो सकती है. आने वाले वर्षों में करोड़ों लोगों के कामकाजी उम्र से बाहर होने की आशंका है. ऐसे समय में पेंशन बजट पर पहले से दबाव बना हुआ है।  कम जन्मदर का असर सिर्फ आबादी की संख्या तक सीमित नहीं है. जनसांख्यिकी विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आज कम बच्चे पैदा होने का मतलब भविष्य में कम परिवार और खपत की धीमी बढ़ोतरी भी हो सकता है. इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार प्रभावित होने का खतरा है।  जन्म बढ़ाने के लिए बड़ा खर्च चीन की सरकार आबादी बढ़ाने की योजना को आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है. रॉयटर्स के अनुमानों के मुताबिक, इस साल जन्मदर बढ़ाने के उपायों पर संभावित खर्च करीब 180 अरब युआन यानी लगभग 26.92 अरब डॉलर हो सकता है. सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह जन्मदर में गिरावट को कैसे रोके और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की जरूरतों को कैसे पूरा करे। 

मां दुर्गा विसर्जन को लेकर भोपाल में सुरक्षा अलर्ट, रानी कमलापति से बैरागढ़ तक पुख्ता व्यवस्था

भोपाल  मां दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन में सिर्फ एक दिन शेष है। आज मंगलवार को शहर में अलग-अलग स्थानों पर स्थापित मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन निर्धारित घाटों पर किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने सात विसर्जन स्थलों पर व्यवस्थाएं की हैं।इनमें रानी कमलापति घाट, प्रेमपुरा घाट, खटलापुरा घाट, शाहपुरा घाट, मालीखेड़ी घाट, हथाईखेड़ा डेम और संत हिरदाराम नगर-बैरागढ़ विसर्जन घाट शामिल हैं।विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही और भीड़ को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा, सफाई, रोशनी और पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। मूर्तियों को पानी में उतारने के लिए क्रेन और सुरक्षा के लिए गोताखोरों और नाव भी तैनात रहेंगी। इसके साथ ही घाटों तक पहुंचने वाले मार्गों पर सफाई, गड्ढों की मरम्मत और रास्ते में बाधा बनने वाली अस्थायी दुकानों को हटाने की तैयारी की गई है। अधिकारी करेंगे मॉनीटरिंग विसर्जन के बाद घाटों पर जमा पूजन सामग्री और मूर्तियों के अवशेष भी हटाए जाएंगे। निगम ने प्रत्येक घाट पर अधिकारियों की तैनाती के साथ सफाई, प्रकाश, पेयजल, बैरिकेडिंग और सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। नगर निगम ने सभी विसर्जन स्थलों पर अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई है, ताकि व्यवस्था संभालने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। प्रत्येक घाट पर प्रभारी अधिकारी और सहायक प्रभारी भी तैनात रहेंगे। फायर, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और जोनल अमले की ड्यूटी तीन शिफ्ट में लगाई जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम में भी निगम अधिकारी तैनात रहेंगे। विसर्जन के बाद तत्काल निकाले जाएंगे मूर्तियों के अवशेष मां दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन के लिए नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने रविवार को विसर्जन घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि चल समारोह मार्गों और विसर्जन घाटों पर पर्याप्त मात्रा में प्रकाश व्यवस्था की जाए। विसर्जन के लिए क्रेन सहित अन्य संसाधन, साफ-सफाई एवं पेयजल की व्यवस्था को निरंतर उच्च स्तरीय बनाए रखें। विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेष तत्काल हटाए जाएंगे। चल समारोह मार्गों से अस्थायी दुकानें और ठेले हटाने, सड़कों के गड्ढों की मरम्मत, पेड़ों की छंटाई और आवारा पशुओं को हटाया जाए। सात विसर्जन घाटों पर इन अधिकारियों की जिम्मेदारी – रानी कमलापति घाट – तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अपर आयुक्त – हथाईखेड़ा डेम – वरुण अवस्थी, अपर आयुक्त – शाहपुरा घाट – अमन मिश्रा, अपर आयुक्त – संत हिरदाराम नगर-बैरागढ़ घाट – अभिषेक सिंह, अपर आयुक्त – मालीखेड़ी घाट – वरुण बडेरिया, अपर आयुक्त – प्रेमपुरा घाट – संतोष गुप्ता, मुख्य अभियंता – खटलापुरा घाट – भुवन गुप्ता, उपायुक्त और विजय तिवारी, सहायक आयुक्त त्योहारों पर सुरक्षा के लिए निगम अलर्ट, एडवाइजरी जारी नवरात्रि, गरबा-डांडिया, दशहरा और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने एडवाइजरी जारी की है। निगम आयुक्त द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, आठ अक्टूबर को न्यू मार्केट में हुई अग्नि दुर्घटना जैसी घटनाओं की पुनर्रावृत्ति को रोकने के लिए सभी फायर स्टेशन अलर्ट मोड पर रहेंगे और फायर अमले के अवकाश त्योहार अवधि में निरस्त कर दिए हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में फायर हाइड्रेंट सिस्टम की जांच एवं फायर माकड्रिल की जा रही है। रावण दहन स्थल के चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग कर दर्शकों को सुरक्षित दूरी पर रखें। बिजली की लाइन, आवासीय भवनों, पेट्रोल पंप एवं संकरी गलियों के निकट दहन न करें। विसर्जन जुलूस निर्धारित मार्ग एवं समय-सीमा में ही निकालें। घाटों पर गहरे पानी में न उतरें, निगम द्वारा तैनात दल एवं क्रेन की सहायता लें। घरों एवं दुकानों में दीपक, मोमबत्ती व सजावटी बिजली की लड़ियों का उपयोग सावधानी से करें। आपात स्थिति में 101, 112 या निगम फायर कंट्रोल रूम 0755-2542222 पर सूचना दें।     मां दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन के दौरान बैरिकेडिंग, क्रेन, गोताखोर और नावों की व्यवस्था रहेगी। विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेष तत्काल हटाए जाएंगे। चल समारोह मार्गों पर सफाई, रोशनी और यातायात सुचारु रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।– संस्कृति जैन, आयुक्त, नगर निगम  

भारत आने से पहले ट्रंप के मंत्री का बड़ा बयान, India-US ट्रेड डील अंतिम चरण के करीब

 नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के मंत्री मार्को रुबियो आज भारत आ रहे हैं और यहां आने से पहले ही उन्होंने एक बड़ी खुशखबरी दे दी है. ये भारत-अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील से जुड़ी हुई है. अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा है कि India-US Trade Deal फाइनल होने वाली है और दोनों देश इसके बेहद करीब पहुंच गए हैं।  इस दौरान रुबियो ने अमेरिका द्वारा ग्राहम एक्ट के तहत रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों में छूट को लेकर भी बात की और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, कीमतों और राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश नीति के फैसलों में कई कारकों पर विचार किया जाता है।  'India-US डील होने वाली है!' अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन भारत के साथ एक व्यापार समझौता फाइनल करने के बहुत करीब है. इसके साथ ही उन्होंने भारत के साथ अमेरिका की व्यापार वार्ता को डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा छूट संबंधी फैसलों से भी जोड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, 'हम अभी भारत के साथ एक व्यापार समझौता फाइनल करने की कोशिश कर रहे हैं. हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं।  US के मंत्री ने बताया- क्यों दी रूस को छूट?  रूसी तेल (Russian Oil) और गैस के मुद्दे पर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हमें वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर की वजह से प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी है. हमें इन सभी चीजों को संभालना पड़ता है. अभी हम भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं. जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या इस तरह के अन्य मामलों पर कोई फैसला लेते हैं, तो हम इन बातों को भी ध्यान में रखते हैं।  रुबियो ने आगे कहा कि हर देश के सामने कई जटिल कारक होते हैं, जिन्हें ध्यान में रखना जरूरी होता है. अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, भौगोलिक स्थिति एक वास्तविकता है. कुछ देशों के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत खोजना बहुत मुश्किल होता है और यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन विदेश नीति तय करते समय इन सभी बातों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।  Trump के फैसले पर दिया था ये बयान गौरतलब है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने बीते शनिवार को अचानक रूसी तेल खरीदारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले को रोक दिया था और इसके पीछे तर्क दिया कि यह फैसला सुरक्षा कारणों की वजह से लिया गया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ट्रंप के इस फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि Donald Trump 60 दिनों का समय लेना चाहते हैं, ताकि वे यह समझ सकें कि रूस पर प्रतिबंध लगाने और अन्‍य देशों पर टैरिफ लगाने का ग्‍लोबल इकोनॉमी पर क्‍या असर होगा।  इसके साथ ही रुबियो ने भारत की रूसी तेल खरीद पर भी बात की थी और कहा कि भारत जैसे देश ने अपनी एनर्जी जरूरतों के सोर्स में विविधता लाई है, लेकिन वे अभी भी रूस से काफी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं, जिसका कारण है कि कोई भी देश रातों-रात पूरी तरह से दूसरे सोर्स पर निर्भर नहीं हो सकता है।   

FD से बेहतर रिटर्न का विकल्प हो सकता है VPF, जानें कैसे बढ़ेगी आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स

नई दिल्ली नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है सही जगह निवेश करना. अगर आप एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) में हर महीने पैसा जमा करते हैं, तो वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) के जरिए अपनी बचत और बढ़ा सकते हैं. इसमें कर्मचारी अपनी अनिवार्य पीएफ कटौती से अतिरिक्त रकम जमा कर सकते हैं. EPF पर वर्तमान में 8.25% सालाना ब्याज मिलता है. लेकिन VPF में निवेश बढ़ाने से पहले यह समझना जरूरी है कि इस पर टैक्स कैसे लगता है, पैसा कब निकाला जा सकता है और क्या यह आपकी वित्तीय जरूरतों के हिसाब से सही विकल्प है।  क्या है VPF और कैसे करता है काम? वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड, एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड से जुड़ी एक स्वैच्छिक बचत व्यवस्था है. कर्मचारी अपने नियमित पीएफ कंट्रीब्यूशन के अलावा, और ज्यादा रकम इसमें जमा करने का विकल्प चुन सकते हैं. इससे रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाला कुल फंड बढ़ सकता है. इसका एक बड़ा फायदा यह है कि पैसा नियमित रूप से वेतन से कटकर पीएफ खाते में जमा होता है. इससे हर महीने अलग से निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि, VPF का मकसद लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए बचत बढ़ाना है, न कि कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाना. इस पर EPF के लिए सरकार द्वारा निर्धारित ब्याज दर ही लागू होता है।  VPF किनके लिए फायदेमंद हो सकता है? VPF खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो लंबी अवधि के लिए नियमित बचत करना चाहते हैं और अपनी बचत का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ी योजनाओं में नहीं लगाना चाहते। 1. FD में बड़ी रकम रखने वाले कर्मचारी: अगर आपकी बचत का बड़ा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में है, तो VPF के संभावित रिटर्न की तुलना FD के टैक्स बाद मिलने वाले रिटर्न से की जा सकती है. तुलना करते समय दोनों की निकासी शर्तें और टैक्स नियम भी देखें।  2. रिटायरमेंट के करीब पहुंच रहे कर्मचारी: 40 या 50 की उम्र में ऐसे कर्मचारी, जो रिटायरमेंट के लिए नियमित रूप से फंड बढ़ाना चाहते हैं, VPF पर विचार कर सकते हैं. हालांकि, फैसला रिटायरमेंट तक बचे समय, मौजूदा बचत और आने वाले खर्चों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।  3. नियमित बचत नहीं कर पाने वाले कर्मचारी: जिन लोगों के लिए हर महीने अलग से निवेश करना मुश्किल होता है, उनके लिए वेतन से सीधे कटने वाली VPF रकम सेविंग की आदत बनाए रखने में मदद कर सकती है।  लेकिन अगर आपके ऊपर महंगा कर्ज है, इमरजेंसी फंड नहीं है या आने वाले कुछ वर्षों में बड़ी रकम की जरूरत पड़ सकती है, तो पहले इन जरूरतों का ध्यान रखें।  ₹2.5 लाख की सीमा का क्या है मतलब? VPF में अतिरिक्त पैसा जमा करने से पहले एक अहम टैक्स नियम समझना जरूरी है. अगर कर्मचारी और नियोक्ता दोनों पीएफ में योगदान करते हैं, तो कर्मचारी के EPF और VPF अंशदान को मिलाकर सालाना ₹2.5 लाख से अधिक के अंशदान से जुड़े ब्याज पर टैक्स लग सकता है. यह टैक्स पूरी अतिरिक्त जमा रकम पर नहीं, बल्कि तय नियमों के अनुसार उससे जुड़े ब्याज पर लागू होता है. यहां ध्यान देने वाली बात है कि ₹2.5 लाख की सीमा कर्मचारी के अपने अंशदान से जुड़ी है. इसमें नियोक्ता का अंशदान नहीं जोड़ा जाता।  यदि किसी कर्मचारी के पीएफ खाते में नियोक्ता योगदान नहीं करता है, तो कर्मचारी के अंशदान पर ब्याज के लिए ₹5 लाख की अलग सीमा लागू हो सकती है. ₹2.5 लाख सालाना का मतलब औसतन करीब ₹20,833 प्रति माह है. हालांकि, वास्तविक गणना पूरे वित्त वर्ष में हुए कुल कर्मचारी अंशदान के आधार पर करनी चाहिए. अनिवार्य EPF कटौती और VPF में जमा रकम को जोड़कर ही यह देखना होगा कि सीमा पार हो रही है या नहीं।  उदाहरण से समझें, कैसे लगेगा टैक्स मान लीजिए, किसी कर्मचारी का एक वित्त वर्ष में कुल पीएफ अंशदान ₹3 लाख है. ऐसे में ₹2.5 लाख की सीमा से ₹50,000 ज्यादा अंशदान हुआ. इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे ₹50,000 पर टैक्स लगेगा. टैक्स की गणना नियमों के मुताबिक इस अतिरिक्त अंशदान से जुड़े ब्याज पर होगी. अब मान लीजिए, इस टैक्स योग्य ब्याज पर कर्मचारी का मार्जिनल टैक्स रेट 30% है और ब्याज दर 8.25% है।  ऐसी स्थिति में टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न लगभग 5.78% रह सकता है. यह एक अनुमानित गणना है, जिसमें सेस और अन्य लागू प्रभाव शामिल नहीं हैं. वास्तविक टैक्स कर्मचारी की स्थिति और लागू नियमों के मुताबिक तय होगा. इसलिए VPF में अतिरिक्त पैसा जमा करने से पहले केवल घोषित ब्याज दर न देखें. यह भी समझें कि आपकी कितनी रकम पर ब्याज टैक्स के दायरे में आ सकता है।  VPF में जमा रकम पर टैक्स छूट भी है? VPF में जमा रकम पर टैक्स छूट का फायदा अपने आप नहीं मिलता. कर्मचारी के अंशदान पर कटौती का लाभ लागू टैक्स व्यवस्था और संबंधित शर्तों पर निर्भर करता है. इसलिए निवेश बढ़ाने से पहले यह देखना जरूरी है कि आप किस टैक्स व्यवस्था के तहत रिटर्न दाखिल कर रहे हैं और आपके लिए कौन-सी कटौती उपलब्ध है. साथ ही, अंशदान से जुड़े ब्याज पर टैक्स और निवेश के समय मिलने वाली कटौती दो अलग-अलग बातें हैं. इन दोनों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।  VPF से पैसा कब निकाल सकते हैं? VPF की रकम EPF खाते का हिस्सा होती है, इसलिए इसे सामान्य बचत खाते की तरह किसी वक्त भी निकालने की सुविधा नहीं है. निकासी के लिए लागू EPF नियमों, पात्रता, सेवा अवधि और निकासी के कारण को देखना पड़ता है. अक्टूबर 2025 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने आंशिक निकासी के नियमों को सरल बनाने और पात्रता से जुड़ी न्यूनतम सेवा अवधि को 12 महीने करने की मंजूरी दी थी।  इस ढांचे में बीमारी, शिक्षा, शादी, मकान और विशेष परिस्थितियों जैसी जरूरतों के लिए निकासी के प्रावधानों को आसान बनाने की बात कही गई. साथ ही, खाते में कुल अंशदान का 25% न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया. हालांकि, किसी निकासी के लिए आवेदन करने से पहले लागू नियमों … Read more

Dussehra 2026: विजयादशमी पर कब करें शस्त्र पूजा? जानें शुभ समय, नियम और धार्मिक महत्व

  Dussehra 2026 : दशहरे पर शस्त्र पूजा करने की परंपरा आज भी कई परिवारों में निभाई जाती है। विजयादशमी के दिन लोग अपने पारंपरिक शस्त्रों की साफ-सफाई करके उनकी पूजा करते हैं। तलवार और दूसरे शस्त्रों के अलावा कई जगहों पर कामकाज में इस्तेमाल होने वाले औजारों की भी पूजा होती है। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को है। ऐसे में शस्त्र पूजा करने वाले लोग शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं। शस्त्र पूजा का शुभ समय पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस समय शस्त्र पूजा की जा सकती है। हालांकि, स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। घर पर कैसे करें शस्त्र पूजा शस्त्र पूजा के लिए सबसे पहले पूजा की जगह साफ कर लें। शस्त्रों को सावधानी से साफ करके सुरक्षित स्थान पर रखें। पूजा के लिए रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीपक रख लें। भगवान गणेश और मां दुर्गा का स्मरण करके पूजा शुरू करें। शस्त्रों पर रोली से तिलक लगाएं। इसके बाद फूल और अक्षत चढ़ाकर धूप-दीप दिखाएं। पूजा के बाद भोग लगाएं और प्रसाद बांट दें। विजयादशमी पर क्यों होती है शस्त्र पूजा? दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की कथा भी विजयादशमी से जुड़ी है। पुराने समय में राजा और योद्धा अपने शस्त्रों की पूजा करते थे। युद्ध और आत्मरक्षा में शस्त्रों की अहम भूमिका थी। इसी परंपरा के तहत आज भी कई परिवार दशहरे पर शस्त्र पूजा करते हैं। कुछ जगहों पर इस दिन औजारों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की पूजा भी की जाती है। दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा विजयादशमी पर शमी के पेड़ की पूजा भी की जाती है। महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने शस्त्र शमी के पेड़ पर छिपाए थे। बाद में उन्होंने इन्हें वापस प्राप्त किया। इसी वजह से कई जगहों पर दशहरे के दिन शमी पूजन किया जाता है।