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ट्रांसफर एक्सप्रेस: सरकार ने जारी की तबादला सूची, कई अधिकारियों को मिली नई पोस्टिंग

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल की सूचना मिली है। यहां एक साथ 12 तहसीलदार डिप्टी कलेक्टर बने है। इन अधिकारियों को पदोन्नत करते हुए तबादला आदेश जारी किया है। 3 वर्ष के लिए अधिकारी एक ही जगह पर टिके रह सकते है। यह पदोन्नत अधिकारियों की सेवाएं छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा नियम, 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत शासित होगी।

19 जून से 5 जुलाई तक तबादलों की मंजूरी, सभी विभागों में प्रक्रिया तेज

जयपुर राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर लगा बैन हट गया है. सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने आदेश जारी कर 19 जून से ट्रांसफर-पोस्टिंग की अनुमति दी है. इसके साथ ही लंबे समय से बैन हटने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों को राहत मिली है. आदेश के मुताबिक, तबादलों की अनुमति 5 जुलाई तक रहेगी. इस दौरान सभी विभाग अपने स्तर पर तबादला प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. अब तेज होगी ट्रांसफर की प्रक्रिया सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. ऐसे में आदेश जारी होने के साथ ही तबादलों को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है. अब विभिन्न विभागों में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, मंडलों, बोर्डों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा. चिकित्सा विभाग में बैन, थर्ड ग्रेड टीचर्स का इंतजार लंबा हालांकि, थर्ड ग्रेड टीचर्स को अभी लंबा इंतजार करना होगा. इस बार भी शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रृंखला के अध्यापकों को तबादलों की प्रक्रिया से बाहर रखा गया है. इसके अलावा संभावित वर्षाकाल को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों पर तबादला प्रतिबंध अगले आदेश तक यथावत रहेगा. इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि तबादलों में एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, मेडिकल बोर्ड या सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े और किडनी सहित अन्य प्राणघातक रोगों से पीड़ित कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके साथ ही दिव्यांग कर्मचारी, दीर्घावधि सेवा वाले कर्मचारी तथा राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी प्राथमिकता मिलेगी.

मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा तबादला आदेश, 101 अधिकारियों की बदली; हुजूर, कोलार और बैरसिया में नई नियुक्तियां

भोपाल राज्य सरकार ने देर रात प्रदेशभर में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए 101 तहसीलदारों और प्रभारी तहसीलदारों के तबादले कर दिए। इस व्यापक तबादला सूची में राजधानी भोपाल की तीनों प्रमुख तहसीलों हुजूर, कोलार और बैरसिया के तहसीलदार भी बदल दिए गए हैं। भोपाल से जुड़े साइबर तहसील में पदस्थ तीन अपर तहसीलदारों को भी अन्य स्थानों पर भेजा है। राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। भोपाल की तीनों तहसीलों को मिले नए तहसीलदार जारी आदेश के अनुसार, प्रतिभा चौरसिया को पचमढ़ी से तबादला कर भोपाल में पदस्थ किया है। हुगना अवस्थिया को खजुराहो से भोपाल भेजा है, जबकि बृजेन्द्र जैन को जबलपुर से स्थानांतरित कर भोपाल में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को राजधानी की प्रमुख तहसीलों का प्रभार दिया जाएगा। साइबर तहसील से भी हटाए गए तीन अधिकारी राजस्व विभाग ने साइबर तहसील में पदस्थ अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया है। साइबर तहसील से जुड़े तीन अपर तहसीलदारों का स्थानांतरण अन्य जिलों में किया गया है। विभाग का मानना है कि प्रशासनिक कार्यों में गति और बेहतर समन्वय के लिए यह बदलाव आवश्यक था। इन अधिकारियों का भी हुआ तबादला     नरेन्द्र परमार को भोपाल (कोलार) से रायसेन भेजा गया।     अनुराग त्रिपाठी को भोपाल (हुजूर) से सागर भेजा गया।     दिलीप कुमार चौरसिया को भोपाल (बैरसिया) से विदिशा भेजा गया।     प्रीतिरानी चौरसिया को सागर से भोपाल स्थानांतरित किया गया।     कुणाल अवस्थ्या को खरगोन से भोपाल भेजा गया है।     आदित्य जंघेला को जबलपुर से भोपाल भेजा गया है।     राजेस राम को भू संसाधन प्रबंधन, रायसेन से भोपाल भेजा गया है।     सुजाता विश्वकर्मा को साइबर तहसील भोपाल से रायसेन भेजा गया।     नेहा दुबे को साइबर तहसील भोपाल से नर्मदापुरुम स्थानांतरित किया गया।     सोनम मौर्य को साइबर तहसील भोपाल से रायसेन भेजा गया है।  

e-HRMS पोर्टल पर कर सकेंगे ट्रांसफर आवेदन, शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना

मध्यप्रदेश में शिक्षकों व कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन 3 से 8 जून तक e-HRMS पोर्टल पर होगी प्रक्रिया भोपाल  राज्य शासन की स्थानांतरण नीति 2026-27 के तहत जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग ने स्थानांतरण आवेदनों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण के आवेदन 3 जून से 8 जून तक e-HRMS पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदक स्थानांतरण के लिए अधिकतम 15 कार्यालयों/संस्थाओं का चयन कर सकेंगे। आवेदन में दर्शाए गए कारणों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज पीडीएफ स्वरूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिनका आकार अधिकतम 2 एमबी निर्धारित किया गया है। एक बार आवेदन सबमिट होने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि आवेदन में गलत जानकारी देने या सत्यापन में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी एवं सत्यापन अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्तियां अस्थायी (टेंटेटिव) होंगी और समय-समय पर अपडेट की जा सकेंगी। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों के स्थानांतरण केवल उनके विषय की रिक्तियों पर ही किए जाएंगे। वहीं प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक संवर्ग के प्रशासनिक एवं स्वैच्छिक स्थानांतरण परिवीक्षा अवधि के दौरान नहीं किए जाएंगे। जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 5 जून 2026 तक e-HRMS पोर्टल पर सभी रिक्त पदों की सही जानकारी दर्ज एवं सत्यापित करें। रिक्तियों की एंट्री और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख, डीडीओ एवं ऑफिस एडमिन की होगी। केवल ऑनलाइन आवेदन करने मात्र से स्थानांतरण का अधिकार सुनिश्चित नहीं होगा। आवेदनों को स्वीकार या अस्वीकार करने का अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा और इस संबंध में शासन का निर्णय अंतिम माना जाएगा। यह आदेश प्रदेश के जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा शिक्षकों पर लागू होगा।  

MP में तबादला सीजन की शुरुआत, अधिकारी-कर्मचारी 15 जून तक होंगे इधर से उधर

 भोपाल  मध्य प्रदेश में आज से तबादलों पर लगा प्रतिबंध हटने जा रहा है। यानी आज प्रदेश में सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के ट्रांसफर होने लगेंगे। विभाग 15 जून तक प्रशासनिक और स्वैच्छिक आधार पर तबादले कर सकेंगे। खास बात ये है कि, उन स्थानों को इस बार विशेष प्राथमिकता दी गई है, जो फिलहाल रिक्त पड़े हैं। ऐसे स्थानों को पहले भरा जाएगा। इसमें खास बात ये है कि, जनगणना कार्य में जुटे कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं होगा। बता दें कि, जिले के अंदर होने वाले तबादले का अधिकार प्रभारी मंत्री के पास रहेगा। जबकि, प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री मोहन यादव के समन्वय से अनुमति लेकर ही किए जा सकेंगे। नीति के दायरे से बाहर रखी गई सेवाएं मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा और मंत्रालय के कर्मचारियों के तबादले इस नीति के दायरे के बाहर रखे गए हैं। शिक्षकों के तबादलों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की अलग नीति है। वहीं, पुलिस कर्मियों के स्थानांतरण तबादला बोर्ड के माध्यम से किए जाएंगे। तृतीय, चतुर्थ श्रेणी और राज्य स्तर के स्थानांतरण की प्रक्रिया जिले के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला कलेक्टर के अधिकार में होंगे। हालांकि, इसमें संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी होना अनिवार्य होगा। वहीं प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी अधिकारियों – कर्मचारियों के राज्य स्तर के तबादले संबंधित विभाग के मंत्री की अनुमति से संबंधित प्रशासनिक विभाग ही करेगा। जबकि, डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की पदस्थापना भी प्रभारी मंत्री की सलाह पर की जाएगी। पुलिस विभाग में बढ़ी हलचल पुलिस मुख्यालय की ओर से 5 जून तक आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक स्तर तक के तबादले करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बाद विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों ने स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की गई है। कई विभागों ने मांगा कर्मचारियों का विवरण शिक्षा विभाग के साथ साथ कई अन्य विभागों ने जिलों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की विस्तृत जानकारी तलब की है। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों से 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नई नीति लागू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में तबादला नीति को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 मई को साल 2026 की तबादला नीति जारी की थी। नीति जारी होने के बाद विभागों को 9 दिन में अपनी विभागीय तबादला नीति तैयार करने के साथ – साथ जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए थे। अब सभी विभाग नीति के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे। विभागवार तय की गई तबादलों की सीमा -नई तबादला नीति के तहत विभागों में कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तबादलों की अधिकतम सीमा तय हुई है। -200 तक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 20 फीसदी तबादले हो सकेंगे। -200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 15 फीसदी स्थानांतरण किये जा सकेंगे। -1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 10 फीसदी तबादलों की अनुमति। -2001 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 5 फीसदी तबादलों की अनुमति दी गई है। 15 जून तक जारी रहेगी प्रक्रिया मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश के मुताबिक, 15 जून तक सभी विभाग स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे। इसके बाद तबादलों पर फिर से रोक लगा दी जाएगी।

मध्य प्रदेश में ट्रांसफर सीजन शुरू, स्कूल शिक्षा विभाग ने मांगी स्कूलवार पदों की जानकारी

भोपाल  प्रदेश  में तबादलों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सरकार द्वारा लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की तैयारी तेज कर दी गई है। खासतौर पर राजस्व विभाग और पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। विभागीय स्तर पर अधिकारियों की सूचियां तैयार होना शुरू हो गई हैं। तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही जिले और अनुभाग में पदस्थ अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों सहित कई अधिकारी प्रभावित होंगे। तबादले की अवधि नजदीक आने के साथ प्रदेश के अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्षों ने विभागीय तबादला नीति जारी करने के साथ जिलों में पदस्थ अलग-अलग कैडर के अफसरों का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है। लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग ने इंजीनियरों की वर्तमान पोस्टिंग, पदनाम और अतिरिक्त प्रभार की जानकारी मांगी है तो स्कूल शिक्षा विभाग ने हर विद्यालय में पदस्थ एक-एक शिक्षक का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों के तबादले के लिए 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन बुला लिए हैं, तो पीएचक्यू ने आरक्षक से सब इंस्पेक्टर तक के तबादले पांच जून तक करने की डेडलाइन तय कर दी है। मोहन कैबिनेट के फैसले के बाद 22 मई को सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के राज्य और जिला संवर्ग स्तर पर तबादले की पॉलिसी जारी कर दी है। इसमें तबादले की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर विभागों को ऑनलाइन आवेदन मंगाने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई अधिकारी कर्मचारी सरकार द्वारा तय टारगेट को अचीव नहीं कर पाता है तो उसे प्रशासनिक आधार पर तीन साल की अवधि के पहले भी स्थानांतरित किया जा सकता है। जल संसाधन विभाग ने मांगी इंजीनियरों की पदस्थापना, अतिरिक्त प्रभार की जानकारी जल संसाधन विभाग ने आयुक्त कमांड क्षेत्र और विकास संचालनालय, आयुक्त भू अर्जन और पुनर्वास बाणसागर रीवा, सभी मुख्य अभियंता, परियोजना संचालक, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि विभाग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के नाम, पदनाम, पदस्थापना स्थल, जहां से वेतन निकलता है वहां की जानकारी के साथ गृह जिला, सेवानिवृत्ति तिथि, जिन पदों के अतिरिक्त प्रभार में हैं उस पद और कार्यालय का नाम तथा तारीख की जानकारी शासन को भेजें। स्कूल शिक्षा विभाग ने तबादले के पहले मांगा हर टीचर की पोस्टिंग का ब्यौरा उधर स्कूल शिक्षा विभाग ने भी एजुकेशन 3.0 पोर्टल पर हर विद्यालय में विषय वार पदस्थ शिक्षकों का ब्यौरा एंट्री करने के लिए कहा है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि विद्यालय वार और विषय वार एंट्री कराएं और जिन शिक्षकों की मृत्यु हो गई है या रिटायर हो गए हैं, उनके नाम विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों की सूची से हटाएं ताकि जब विभाग द्वारा तबादले की कार्यवाही की जाए तो यह स्थिति न बने कि विद्यालय में पहले से पर्याप्त शिक्षक पदस्थ हों और अतिरिक्त पदस्थापना हो जाए या फिर पद भरे होने की जानकारी पोर्टल पर हो जबकि वास्तव में टीचर न हों तो वहां पोस्टिंग न हो पाए। लोक शिक्षण आयुक्त इसकी जिलावार समीक्षा 30 मई को करेंगे। जनगणना में लगे शिक्षकों के तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे लोक शिक्षण आयुक्त ने एक अन्य निर्देश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगी है उनके तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे। ऐसे शिक्षकों की संख्या 58 हजार से अधिक है जो जनगणना ड्यूटी में लगे हैं। इसलिए एक जून 2026 तक ऐसे सभी शिक्षकों की जानकारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर एंट्री करने के लिए कहा गया है जो जनगणना में लगे हैं। एनएचएम ने 2 जून तक मांगा संविदा कर्मचारियों की डिटेल दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की अपर मिशन संचालक दिशा नागवंशी ने एनएचएम में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों के स्वैच्छिक स्थानांतरण के ऑनलाइन प्रस्ताव 2 जून तक मांगे हैं। इसके लिए संविदा तबादले की पॉलिसी भी जारी कर दी गई है। ऑनलान आवेदन 27 मई से लेने का सिलसिला पोर्टल पर शुरू हुआ है और 2 जून की रात 12 बजे तक आवेदन किए जा सकेंगे। इसके बाद तबादले किए जाएंगे। निर्देशों में कहा गया है कि तबादले के लिए तीन माह की सार्थक एप की उपस्थिति भी अपलोड करनी होगी। आवेदन सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र से शहरी क्षेत्र के लिए किए जा सकेंगे। रिक्त पद पर तबादले के लिए कम से कम और अधिकम 5 संस्थाओं की एंट्री आवेदन में करनी होगी। ऐसे कर्मचारी जिनकी नियुक्त दो साल के भीतर हुई है तथा दो साल में जिनका तबादला हो चुका है, उनके तबादले पर प्रतिबंध रहेगा। 5 जून तक आरक्षक से एसआई तक के तबादले करेंगे पुलिस आयुक्त-एसपी इसी तरह गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस मुख्यालय ने भोपाल, इंदौर के पुलिस आयुक्त, एसपी रेल समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि किसी एक थाने में आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी की एक पद पर पदस्थापना पांच साल से अधिक नहीं होना चाहिए। साथ ही एक बार पोस्टिंग के बाद संबंधित कर्मचारी की पदस्थापना दोबारा उसी थाने में नहीं होनी चाहिए। अलग-अलग पदों पर पदस्थापना के मामले में किसी भी कर्मचारी की पोस्टिंग में तीन साल का अंतर होना चाहिए। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी को एक ही पुलिस अनुविभाग में दस साल से अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पुलिस मुख्यालय ने इस आधार पर पांच जून तक तबादला करके सूची मुख्यालय को भेजने कहा है। सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन जल्द ही तबादला नीति जारी कर सकता है। इसके पहले ही विभागों में अंदरखाने हलचल बढ़ गई है। कई अधिकारी अपने पसंदीदा जिलों में पदस्थापना के लिए राजनीतिक संपर्क साधने में जुट गए हैं। नेताओं और जनप्रतिनिधियों के यहां सिफारिशी पत्रों का दौर भी शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल से लेकर जिला मुख्यालयों तक तबादलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजस्व … Read more

योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 9 वरिष्ठ IPS अफसरों की नई तैनाती

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए गुरुवार को 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. इस प्रशासनिक बदलाव में चार वरिष्ठ एडीजी रैंक के अधिकारियों को पदोन्नति देकर डीजी पद पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. सरकार के इस फैसले को पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है आलोक सिंह PAC के नए DG होंगे इस फेरबदल में सबसे प्रमुख नियुक्तियों में आलोक सिंह को प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) का नया डीजी बनाया गया है. इससे पहले वे कानपुर जोन में एडीजी पद पर कार्यरत थे. वहीं बिनोद कुमार सिंह को सीआईडी एवं साइबर क्राइम का डीजी नियुक्त किया गया है. वे इसी विभाग में एडीजी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।  इसके अलावा जय नारायण सिंह, जो अब तक पावर कारपोरेशन में डीजी के पद पर थे, उन्हें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) का नया डीजी बनाया गया है. इसी तरह डीके ठाकुर को नागरिक सुरक्षा एवं विशेष सुरक्षा बल से स्थानांतरित कर होमगार्ड विभाग का डीजी नियुक्त किया गया है।  अनुपम कुलश्रेष्ठ को कानपुर जोन का ADG बनाया गया एडीजी स्तर पर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं. अनुपम कुलश्रेष्ठ, जो अब तक आगरा जोन की एडीजी थीं, उन्हें कानपुर जोन का नया एडीजी बनाया गया है. वहीं यातायात एवं सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे ए. सतीश गणेश को अब एडीजी क्राइम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।  एसके भगत ADG आगरा जोन बने इसी क्रम में आरके स्वर्णकार, जो एडीजी पीएसी के पद पर कार्यरत थे, उन्हें पावर कारपोरेशन का एडीजी नियुक्त किया गया है. इसके साथ ही एसके भगत को एडीजी क्राइम से हटाकर आगरा जोन का नया एडीजी बनाया गया है. आईजी स्तर पर भी बदलाव किया गया है, जिसमें गीता सिंह को अभियोजन निदेशालय से स्थानांतरित कर प्रशिक्षण निदेशालय का नया आईजी नियुक्त किया गया है।  यह व्यापक तबादला आदेश उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में दक्षता बढ़ाना, कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में कार्यक्षमता को नई दिशा देना है. सरकारी आदेश के बाद पुलिस महकमे में नई जिम्मेदारियों को लेकर अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है और सभी अधिकारी जल्द ही अपने-अपने नए पदभार संभालेंगे।  IPS अधिकारियों की तबादला सूची 1. जय नरायन सिंह (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, ई०ओ०डब्ल्यू० (EOW), उ०प्र०, लखनऊ 2. ध्रुव कान्त ठाकुर (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, नागरिक सुरक्षा, उ०प्र० (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल) नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक/महासमादेष्टा, होमगार्ड, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: नागरिक सुरक्षा, उ०प्र०) 3. बिनोद कुमार सिंह (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम, उ०प्र०) नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम और यू०पी०-112, लखनऊ)  4. आलोक सिंह (बैच: 1995) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल, उ०प्र०) 5. अनुपम कुलश्रेष्ठ (बैच: 1995) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर 6. ए० सतीश गणेश (बैच: 1996) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ) 7. डॉ० आर० के० स्वर्णकार (बैच: 1996) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र० नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ 8. एस० के० भगत (बैच: 1998) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा 9. गीता सिंह (बैच: 2007) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), अभियोजन, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), प्रशिक्षण निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ

बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव, कई IPS अधिकारियों की नई पोस्टिंग

 पटना  सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 16 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया है। गृह विभाग ने रविवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) सुधांशु कुमार को अब एडीजी विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नैयर हसनैन बीसैप भेजे गए वहीं, नैयर हसनैन खान को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से हटाकर बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीसैप) की जिम्मेदारी दी गई है। विकास वैभव को मगध क्षेत्र (गया) का पुलिस महानिरीक्षक (IG) बनाया गया है। अधिसूचना के अनुसार, असैनिक सुरक्षा के एडीजी और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी परेश सक्सेना को इसी विभाग में पुलिस महानिदेशक (DG) बनाया गया है। तकनीकी सेवाएं एवं संचार के एडीजी निर्मल कुमार आजाद को पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के एडीजी डॉ. अमित कुमार जैन अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के एडीजी होंगे। बजट, अपील एवं कल्याण के एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह को रेलवे में एडीजी बनाया गया है, जबकि एडीजी प्रोविजनिंग अजीताभ कुमार को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण की जिम्मेदारी दी गई है। एडीजी (प्रशिक्षण) संजय सिंह अब एडीजी (बजट, अपील एवं कल्याण) होंगे। चर्चित आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो से हटाकर एडीजी तकनीकी सेवाएं एवं संचार बनाया गया है। विकास वैभव बने मगध के आईजी एडीजी सुरक्षा अमृत राज को एडीजी साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई की जिम्मेदारी दी गई है। गृह विभाग (विशेष शाखा) के विशेष सचिव केएस अनुपम को अपराध अनुसंधान विभाग में एडीजी (कमजोर वर्ग) बनाया गया है। विकास वैभव को बिहार राज्य योजना परिषद के परामर्शी पद से हटाकर मगध क्षेत्र का पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है। रेलवे आईजी पी. कन्नन को आईजी प्रोविजनिंग बनाया गया है। वहीं, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के आईजी रंजीत कुमार मिश्र अब अपराध अनुसंधान विभाग के आईजी होंगे। बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के आईजी संजय कुमार को विशेष शाखा का पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है।

मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल में तबादला आदेश पर उठे सवाल

मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल में तबादला आदेश पर उठे सवाल वर्षों से जमे बाबुओं का नाम सूची से गायब मनेन्द्रगढ़  वनमण्डल कार्यालय में हाल ही में जारी किये गये कर्मचारियों के नवीन कार्य आबंटन (तबादला) आदेश के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। आदेश जारी होते ही जहां कई कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र बदले गये वहीं वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे कुछ बाबुओं का नाम सूची से गायब होने पर सवाल खड़े होने लगे हैं।            विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जिन बाबुओं का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है वे लंबे समय से विभाग की कथित “मलाईदार” कुर्सियों पर काबिज हैं। बताया जा रहा है कि इनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ है और वे अधिकारियों के भी खास माने जाते हैं जिसके चलते इन पर कार्यवाही नहीं हो पाती। सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि यदि इन कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाये तो विभाग में करोड़ों रुपयों के संभावित भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो सकते हैं। यही कारण है कि इनके नाम को सूची से बाहर रखा गया है।           गौरतलब है कि कुछ समय पहले मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल में कथित घोटालों को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों ने ही जोरदार तरीके से मुद्दा उठाया था। हालांकि अब मामला ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है।             ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वनमण्डल के डीएफओ इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष कार्यवाही करेंगे या फिर पूर्व की तरह प्रभावशाली बाबुओं को संरक्षण मिलता रहेगा। विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अब आम लोगों की निगाहें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।

हरियाणा में जनगणना कार्य के चलते शिक्षकों के तबादले पर रोक

चंडीगढ़. जनगणना से जुड़ी तैयारियों को लेकर हुई बैठक में अहम फैसले लिए गए है। जनगणना कार्य के दौरान शिक्षकों के तबादलों पर रोक रहेगी। निदेशक जनगणना ने बताया कि कर्मियों को व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनका डाटा सीएमएमएस पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। जनगणना अवधि में इन कर्मियों का तबादला न किया जाना जरूरी है। बैठक में तय हुआ कि शिक्षकों के तबादले 15 जून 2026 तक नहीं किए जाएंगे। साथ ही अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि फील्ड ट्रेनर्स की सूची स्कूल शिक्षा विभाग को भेजी जाए ताकि प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें परीक्षा या अन्य किसी ड्यूटी में न लगाया जाए। अधिकारियों ने कहा कि इन फैसलों से जनगणना कार्य समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकेगा।