चंडीगढ़
पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। पंजाब में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, जिससे चंडीगढ़ की पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है। सिटी ब्यूटीफुल में हवा की गुणवत्ता बनी रही और धुआं कहां से आ रहा इसके लिए अब सैटेलाइट के साथ-साथ ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी।
केंद्र सरकार की संस्था कमीशन फार एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) ड्रोन से निगरानी पंजाब के पटियाला से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करेगी। इसके बाद संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा आदि जिलों में ड्रोन से निगरानी की जाएगी।
वहीं, हरियाणा में इसकी शुरुआत करनाल से की जा सकती है। आयोग के अनुसार, अक्टूबर में इसकी टीमें पंजाब में मौके पर जाकर निगरानी और समीक्षा भी कर रही हैं।
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइ) की संयुक्त टीम सैटेलाइट डाटा के माध्यम से हर दिन आगजनी की घटनाओं पर निगरानी रख रही थी।
विशेषज्ञों के अनुसार सैटेलाइट के जरिए रात में होने वाली आगजनी की घटनाओं को सैटेलाइट के जरिए ट्रैक करने में दिक्कत आती है। ऐसे में रात के समय ड्रोन से आगजनी के मामलों की निगरानी होने से आंकड़े और अधिक सटीक होंगे।
इसके साथ ही ड्रोन से निगरानी करने के लिए विशेष टीमें भी गठित की जाएंगी। पीजीआई-पीयू की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार 18 तारीख की रिपोर्ट के अनुसार अब तक कुल 599 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें पंजाब में 421, हरियाणा में 178 मामले हैं।
पंजाब में पिछले साल के मुकाबले 14.71 प्रतिशत वृद्धि
पंजाब में पराली जलाने की 421 और हरियाणा में 178 घटनाएं दर्ज की गईं। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 14.71 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वहीं, हरियाणा में मामलों में 29.08 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इसके साथ ही (2012-2025) की तुलना में पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 89.59 प्रतिशत और हरियाणा में 88.34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, अक्टूबर के मध्य में घटनाओं में आई तेजी ने पराली प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पराली के धुएं से कमजोर होगी चंडीगढ़ वासियों की सांसों की डोर
हर वर्ष की तरह, पंजाब-हरियाणा की पराली का धुआं चंडीगढ़ वासियों के लिए परेशानी का कारण बनने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, पराली और दीवाली के धुएं के कारण शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 के पार पहुंच सकता है।
पराली के धुएं में जहरीले तत्व होते हैं, जो आंख, नाक, गले और सांस की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। जहरीली हवा बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चे वाले पराली का धुआं विशेष रूप से नुकसान पहुंचाता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई, त्वचा की समस्याएं, आंखों में जलन और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।'





