samacharsecretary.com

सिविल जज से साध्वी बनने जा रहीं प्रखरश्री जैन, बोलीं- कोई सांसारिक पद बड़ा नहीं

बैतूल
 पिता का सपना पूरा करने के लिए बैतूल की प्रखरश्री दीदी ने पहले जज की परीक्षा पास की। चयन होने के बाद ज्वाइनिंग से पहले ही उन्होंने संयम का मार्ग चुन लिया है। इसके बाद उन्होंने जैन धर्म की दीक्षा लेने का फैसला किया है। इसके बाद परिवार और समाज की ओर से उन्हें विशेष विदाई दी गई है।बैतूल में समाज की ओर से इनकी भव्य बिनौली निकाली गई।

उदयपुर से आए बैंड ने आयोजन को बना दिया खास
दरअसल,  बैतूल में प्रखरश्री दीदी सहित पांच दीक्षार्थी बहनों की भव्य बिनौली निकाली गई। विंटेज कारों, शाही बग्घियों और उदयपुर से आए बैंड ने इस आयोजन को खास बना दिया। शहर में निकले इस चल समारोह में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग और श्रद्धालु शामिल हुए। नगर गौरव ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी के साथ चार अन्य बहनें भी दीक्षा लेने जा रही हैं। सभी पांचों दीक्षार्थियों की दीक्षा 22 नवंबर को प्रस्तावित है। इससे पहले आयोजित बिनौली में परिवारजनों और समाज के लोगों ने उन्हें सम्मान और भावनाओं के साथ विदाई दी।

न्यायिक सेवा की परीक्षा पास कर पिता का सपना पूरा किया
प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता चाहते थे कि वह न्यायिक सेवा की परीक्षा पास करें। उन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल कर उनका सपना पूरा किया। हालांकि, बचपन से ही उनके मन में वैराग्य का भाव रहा है। उनका मानना है कि जज या वकील के रूप में काम करते हुए वह समाज की वैसी सेवा नहीं कर पाएंगी, जैसी भगवान महावीर के सिद्धांतों पर चलकर कर सकती हैं।

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से की पढ़ाई
वहीं, प्रखरश्री जैन काफी पढ़ी लिखी हैं। उनकी स्कूलिंग भोपाल के नामी स्कूल से हुई है। इसके बाद एलएलबी अहमदाबाद से किया है। अपने बैच की गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में चली गईं। 2023 में प्रखरश्री जैन का सिविल जज के लिए चयन हो गया लेकिन उन्होंने अध्यात्म की ओर जाने का फैसला किया है।

नौकरी ज्वाइन करने से पहले संयम को चुनाव
उन्होंने सिविल जज की नौकरी ज्वाइन करने से पहले ही संयम का मार्ग चुन लिया है। प्रखरश्री के इस फैसले ने परिवार और परिचितों को भावुक कर दिया है। बिनौली समारोह में लोग भावुक मन से शामिल हुए थे। खुशी-खुशी अपनी बेटी को विदाई दे रहे थे।

पांच दीक्षार्थियों की बिनौली निकली
पांचों दीक्षार्थी बहनों की बिनौली को यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। शोभायात्रा में पुरानी विंटेज कारों का काफिला और सजी-धजी शाही बग्घियां शामिल रहीं। उदयपुर से पहुंचे बैंड ने अपनी प्रस्तुति से आयोजन की रौनक बढ़ाई। रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर समाजजनों ने बहनों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया। जयकारों और धार्मिक उत्साह के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति के साथ विदाई का भावुक माहौल भी नजर आया।

दीक्षा के बाद सफेद वस्त्रों में शुरू होगा नया जीवन
इस अवसर पर सहारनपुर की बाल ब्रह्मचारिणी रंगोली दीदी ने बताया कि यह पांचों बहनों के सांसारिक जीवन की अंतिम विदाई का अवसर है। फिलहाल उन्होंने रंगीन वस्त्र धारण किए हैं, जबकि दीक्षा के बाद वे सफेद वस्त्रों में संयम का जीवन अपनाएंगी। उन्होंने प्रखरश्री दीदी के परिजनों की ओर से आयोजित भव्य विदाई समारोह की सराहना की।

जैन दादावाड़ी में पूरी हुई पारंपरिक रस्म
बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से निकाली गई बिनौली का समापन जैन दादावाड़ी में हुआ। यहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म निभाई गई। परिवार के सदस्यों और समाजजनों ने इस दौरान उन्हें शुभकामनाएं दीं।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here