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फेस्टिव सीजन में बाहर खाना पड़ेगा महंगा, रेस्टोरेंट बढ़ा सकते हैं मेन्यू के दाम

 नई दिल्ली

दिवाली से पहले बाहर खाना खाने और ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने के लिए लोगों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है. बेंगलुरु, मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में रेस्टोरेंट मालिक खाने के मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रहे हैं। 

दूध और दही के दाम बढ़ने, कमर्शियल एलपीजी महंगा होने, खाद्य महंगाई और कर्मचारियों की बढ़ती सैलरी के कारण रेस्टोरेंट कारोबार पर लागत का दबाव बढ़ गया है. होटल एसोसिएशन के मुताबिक, कर्नाटक के रेस्टोरेंट भी खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. अगर यह बढ़ोतरी लागू होती है, तो इस साल दूसरी बार रेस्टोरेंट में खाने के दाम बढ़ेंगे. इससे त्योहारों के मौसम में लोगों का खर्च और बढ़ सकता है। 

 खबर के मुताबिक, महाराष्ट्र में रेस्टोरेंट के मेन्यू की कीमतों में बढ़ोतरी दिवाली तक लागू किए जाने की तैयारी है। पुणे में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) की प्रतिनिधि सैली जहागीरदार ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण रेस्टोरेंट मेन्यू की समीक्षा कर रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है बिल?
इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) के अध्यक्ष विजय के. शेट्टी के मुताबिक, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी, दूध और डेयरी उत्पादों की महंगाई, कर्मचारियों की सैलरी और कमर्शियल किराये जैसे खर्च रेस्टोरेंट पर दबाव डाल रहे हैं। ऐसे में कीमतों में बदलाव डाइन-इन रेस्टोरेंट, क्विक-सर्विस आउटलेट और ऑनलाइन फूड डिलीवरी के मेन्यू में भी देखने को मिल सकता है।

बिगड़ सकता है महीने का बजट
रेस्टोरेंट के बिल में 10-15% की बढ़ोतरी पहली नजर में कम लग सकती है। हालांकि रोजाना बाहर खाने पर महीने का बजट बढ़ सकता है। अगर कोई ग्राहक नाश्ते और दोपहर के खाने पर रोजाना ₹200 खर्च करता है, तो 10-15% की बढ़ोतरी के बाद यही खर्च ₹220 से ₹230 तक पहुंच सकता है। यानी रोजाना ₹20-30 अतिरिक्त खर्च होंगे। अगर वह महीने में 26 दिन बाहर खाना खाते हैं, तो उसका अतिरिक्त खर्च ₹520 से ₹780 तक हो सकता है।

रेस्टोरेंट के खर्च क्यों बढ़ रहे हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) ने बताया है कि कच्चे माल की बढ़ती लागत, कमर्शियल LPG, किराया, डेयरी उत्पादों की कीमतों और साफ-सफाई से जुड़े खर्चों के कारण यह बढ़ोतरी की जा रही है। उम्मीद है कि दिवाली से पहले ही कीमतों में यह बदलाव लागू हो जाएगा। इसका असर सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर में लंच की थाली और रात में डिनर की प्लेट पर दिख सकता है।

ग्राहकों की जेब पर असर
दरअसल, त्योहारों के दौरान लोग परिवार और दोस्तों के साथ बाहर खाना पसंद करते हैं, इसके अलावा घरों में होने वाली पार्टियों और मेहमानों के लिए ऑनलाइन खाना मंगाने का चलन भी बढ़ जाता है. ऐसे में रेस्टोरेंट के मेन्यू में होने वाली बढ़ोतरी का असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। 

रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि पिछले कुछ समय में कारोबार की लागत लगातार बढ़ी है. दूध और दही जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से कई व्यंजनों को तैयार करना महंगा हो गया है. वहीं, कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी से रसोई का खर्च भी बढ़ा है. इसके साथ ही कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्चों में इजाफा हुआ है। 

ऐसे में रेस्टोरेंट संचालकों के सामने बढ़ी हुई लागत का कुछ बोझ ग्राहकों पर डालने का विकल्प बचा है. अगर 10 से 15 फीसदी तक कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सिर्फ रेस्टोरेंट में बैठकर खाने वालों पर ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी कराने वाले ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। 

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