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भारत से तनाव पाकिस्तान पर पड़ा भारी, शहबाज सरकार को 40 अरब डॉलर की चपत

लाहौर  आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान (Pakistan Crisis) को भारत से पंगा लेना हमेशा ही भारी पड़ता है, फिर बात चाहे जंग के मैदान की हो या फिर बिजनेस की. इसका ताजा उदाहरण ये है कि भारत के साथ ट्रेड रुकने से पाकिस्तान को भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है, जो 40 अरब डॉलर (11 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये) का है. अब पाकिस्तानी इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों ने भारत के साथ व्यापार फिर से शुरू करने की गुहार लगाई है।    PAK का अब आई भारत की याद रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की बिजनेस कम्युनिटी ने देश में बढ़ते आर्थिक नुकसान, ज्यादा इम्पोर्ट कॉस्ट और घरेलू इंडस्ट्रीज पर दबाव का हवाला देते हुए भारत के साथ ट्रेड रिलेशन फिर से शुरू करने की डिमांड शहबाज शरीफ सरकार से की है।  PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल के चेयरमैन नूर मुहम्मद कसूरी ने कहा है कि लंबे समय से चल रही व्यापार रुकावट की वजह से पाकिस्तानी बिजनेस को जरूरी कच्चा माल और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट दूर के देशों से खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे माल ढुलाई का खर्च और डिलीवरी का समय काफी बढ़ गया है और लगातार घाटा हो रहा।  पुलवामा अटैक के बाद से इतना नुकसान  पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के मुताबिक, साल 2019 में बाइलेटरल ट्रेड रुकने के बाद से ही पाकिस्तान को लगातार नुकसान हो रहा है. एक बिजनेस एडवोकेसी ग्रुप के मुताबिक, 2019 में भारत के साथ ट्रेड रुकने के बाद से पाकिस्तान को लगभग अब तक 40 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।   यह सस्पेंशन  पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) और उसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद किया गया था. पाक इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि कमर्शियल रिश्ते फिर से शुरू करने से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, खेती और पेट्रोलियम में इंपोर्ट कॉस्ट कम हो सकती है।  भारत के साथ व्यापार से सिर्फ फार्मा इंडस्ट्री हर साल $3 अरब बचा सकती है. कसूरी के मुताबिक, अगर भारत से जरूरी कच्चे माल का आयात फिर से शुरू होता है, तो फिर बड़ा फायदा हो सकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय कच्चे माल तक पहुंच बहाल करने से पाकिस्तानी दवा कंपनियों को प्रोडक्शन खर्च कम करने और सप्लाई-चेन की क्षमता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।  कपड़ा मिलों पर $5 अरब का एक्स्ट्रा बोझ पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भी भारत से पंगा लेने का खामियाजा उठाना पड़ा है. इस ट्रेड रुकावट का नुकसान खासकर घरेलू कॉटन प्रोडक्शन में गिरावट से आयात पर डिपेंडेंसी बढ़ गई है. कसूरी ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका जैसे देशों से कपास मंगाने के बाद टेक्सटाइल बनाने वालों को लगभग 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है।  खाद, स्टील और पेट्रोल-डीजल आयात पर असर  फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल इंडस्ट्री के अलावा, भारत की अच्छी-खासी प्रोडक्शन कैपेसिटी के बावजूद पाकिस्तान कई जरूरी चीजें दूर के बाजारों से इंपोर्ट कर रहा है. इनमें चीनी, फर्टिलाइजर, सीमेंट, पेट्रोलियम प्रोडक्ट, लोहा और स्टील, सब्जियां और भारी मशीनरी शामिल हैं।  नूर मुहम्मद कसूरी ने कहा कि जियोग्राफिकल नजदीकी भारत को ज्यादा सस्ता सप्लायर बनाती है, खासकर उन प्रोडक्ट्स के लिए जिनमें ट्रांसपोर्टेशन का खर्च ज्यादा होता है. उदाहरण के लिए, भारतीय तेल रिफाइनरियां कई मौजूदा इंटरनेशनल सप्लायर्स की तुलना में पाकिस्तान के ज्यादा पास हैं, जिससे पेट्रोलियम की डिलीवरी तेज और सस्ती हो सकती है।  उन्होंने कहा है कि भारतीय खेती और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स तक पहुंच से पाकिस्तानी मैन्युफैक्चरर्स के लिए इनपुट कॉस्ट कम हो सकती है. इन सब चिंताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तान बिजनेस काउंसिल ने भारत के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग की मांग की है। 

दिवाली पर भक्तों को राहत, काशी विश्वनाथ धाम में जारी रहेगी ऑनलाइन टिकट बुकिंग

 वाराणसी वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दरवाजे दिवाली और धनतेरस के पावन अवसर पर भक्तों के लिए लगातार खुले रहेंगे. मंदिर के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी है कि इन बड़े पर्वों पर दर्शन के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा भी पूरी तरह जारी रहेगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।  हालांकि, मंदिर प्रशासन ने एक विशेष समय के लिए बुकिंग बंद रखने का फैसला लिया है. काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू शरण के अनुसार, आगामी 9 नवंबर को दोपहर के वक्त होने वाली 'श्रृंगार भोग आरती' के तुरंत बाद से लेकर 10 नवंबर की शाम को होने वाली 'सप्तऋषि आरती' तक सभी प्रकार की टिकट बुकिंग अस्थायी रूप से बंद रखी जाएगी।  न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यह निर्णय 'अन्नकूट' उत्सव से जुड़ी जरूरी तैयारियों को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए लिया गया है. इस निश्चित समयावधि को छोड़कर बाकी सभी दिनों में मंदिर की आम दर्शन व्यवस्था, ऑनलाइन सेवाएं और अन्य सभी प्रबंध हमेशा की तरह सुचारू रूप से चलते रहेंगे. श्रद्धालु बिना किसी बाधा के बाबा विश्वनाथ के दर्शन का लाभ उठा सकेंगे।   कपाट खुलना: धनतेरस और दिवाली के दौरान मंदिर खुला रहता है और भक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं. • ऑनलाइन टिकट बुकिंग: दर्शन के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध रहती है.  • विशेष सजावट: श्री काशी विश्वनाथ धाम में दिवाली और धनतेरस पर विशेष फूल-मालाओं और रोशनी की भव्य सजावट की जाती है. • अन्नपूर्णा मंदिर: पास स्थित माता अन्नपूर्णा मंदिर में भी दीवाली उत्सव और विशेष फूलों का श्रृंगार व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. • देव दीपावली (24 नवंबर 2026): दिवाली के कुछ दिनों बाद आने वाली देव दीपावली के अवसर पर काशी के गंगा घाटों और काशी विश्वनाथ मंदिर में लाखों दीपों का भव्य दीपोत्सव होता है.

WhatsApp पर वायरल हुआ फर्जी दिवाली बोनस मैसेज, PIB ने किया अलर्ट

नई दिल्ली दिवाली का त्योहार आने वाला है और ऐसे में लोग जमकर शॉपिंग कर रहे हैं. इसी बीच WhatsApp पर एक ऐसा मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें लोगों को ₹8,000 दिवाली बोनस देने का दावा किया जा रहा है. अगर आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आया है, तो सावधान हो जाइए. क्योंकि इस बोनस के नाम पर आपके साथ ऑनलाइन ठगी हो सकती है।  वॉट्सऐप पर भेजे जा रहे इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री की तरफ से दिवाली पर लोगों को ₹8,000 दिए जा रहे हैं. इसके लिए लोगों को एक लिंक भेजा जा रहा है. मैसेज में कहा जा रहा है कि लिंक पर क्लिक करके अपनी जानकारी भरें और ₹8,000 का बोनस पाएं।  लेकिन सच कुछ और ही है. PIB यानी प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ने इस मैसेज को फर्जी बताया है. सरकार की तरफ से ऐसे किसी दिवाली बोनस का ऐलान नहीं किया गया है. यानी अगर आपको भी यह मैसेज मिलता है, तो इसे सच समझने की गलती न करें।  कैसे होती है इस स्कैम में ठगी? इस तरह के स्कैम में ठग लोगों को पैसे मिलने का लालच देते हैं. इसके बाद वॉट्सऐप पर एक लिंक भेजते हैं. जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं, आपके सामने एक वेबसाइट खुल सकती है. यहां आपसे नाम, मोबाइल नंबर और बैंक से जुड़ी जानकारी मांगी जा सकती है।  कई बार ठग OTP और UPI PIN भी मांगते हैं. अगर आपने ये जानकारी दे दी, तो आपके बैंक अकाउंट से पैसे निकल सकते हैं. इसलिए ₹8,000 पाने के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई खतरे में न डालें।  इस स्कैम से कैसे बचें? अगर आपके WhatsApp पर भी ₹8,000 बोनस वाला मैसेज आता है, तो उस पर दिए गए लिंक पर क्लिक न करें. किसी को भी अपना OTP, UPI PIN या बैंक की जानकारी न दें. सरकारी योजनाओं की जानकारी हमेशा सरकारी वेबसाइट पर ही चेक करें।  अगर आपके साथ ऑनलाइन ठगी हो जाती है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करके शिकायत करें. इसके अलावा cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसलिए दिवाली पर मिलने वाले ₹8,000 के बोनस के लालच में न आएं. थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है। 

हवाई टिकटों पर एयरलाइंस कितना बढ़ा सकती हैं किराया? जानें क्या हैं नियम

 नई दिल्ली दिवाली और छठ को लेकर हवाई जहाज का किराया इन दिनों काफी ज्यादा हो गया है. पैसेंजर सोशल मीडिया पर इसकी शिकायत भी कर रहे हैं. साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या फ्लाइट की टिकटों की किराया कितना ज्यादा हो इसकी कोई लिमिट भी है या नहीं?  चलिए जानते हैं इसका क्या जवाब हो सकता है. क्या हवाई जहाज का भी मैक्सिमम किराया तय किया जा सकता है? भारत में एयरलाइन कंपनियों के पास नॉर्मल ऑपरेशन के लिए कोई परमानेंट, फिक्स्ड मैक्सिमम किराए की लिमिट नहीं है. इसके बजाय, कैरियर ऑपरेटिंग कॉस्ट, डिमांड, सीट की उपलब्धता और मार्केट की स्थितियों के आधार पर अपने टिकट के दाम डायनैमिकली तय होती है।   एयरलाइंस आमतौर पर डिमांड, सीटों की उपलब्धता, बुकिंग के समय और किराये की अलग-अलग क्लास के आधार पर कीमत तय करती हैं. ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत हवाई जहाज का अधिकतम किराया फिक्स किया जाए. हां, कुछ विशेष परिस्थितियों और आपात स्थिति में सरकार एयरलाइंस के किराये में हस्तक्षेप कर सकती है।  संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में इस साल फरवरी में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के राज्य मंत्री ने इस मुद्दे पर डिटेल में बताया था. उनके जवाब के मुताबिक, हवाई किराए सरकार के रेगुलेशन के दायरे में नहीं आते हैं. एयरलाइंस को 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' के नियम 135 का पालन करते हुए, अपनी ऑपरेशन जरूरतों के आधार पर हवाई किराए तय करने की छूट है।  हवाई किराए सप्लाई और डिमांड जैसे आर्थिक फैक्टर के आधार पर बदलते रहते हैं. सीटों की मौजूदा उपलब्धता, ईंधन की लागत, विमान की क्षमता, मौसमी बदलाव और अन्य संबंधित कारक टिकट की कीमतों पर काफी असर डालते हैं. साथ ही बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए सरकार आमतौर पर हवाई किराए को कंट्रोल नहीं करती है।    कब सरकार किराये में हस्तक्षेप कर सकती है हालांकि, सरकार स्थिति पर नजर रखती है और महामारी, महाकुंभ या पहलगाम हमले जैसी असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप करती है, ताकि यात्रियों के लिए हवाई यात्रा किफायती बनी रहे. जैसे दिसंबर 2025 की शुरुआत में एक घरेलू एयरलाइन की उड़ानों में भारी व्यवधान और हवाई किराए में अत्यधिक वृद्धि को देखते हुए, सरकार ने 6 दिसंबर 2025 के एक आदेश के जरिए, घरेलू एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले अधिकतम किराए को दूरी के आधार पर अस्थायी रूप से सीमित कर दिया था।  इसके अलावा, हवाई किराए में पारदर्शिता लाने के लिए, DGCA ने 'टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट' (TMU) भी बनाई है. यह यूनिट हर महीने एयरलाइंस की वेबसाइटों के जरिए 78 चुनिंदा रूटों पर हवाई किराए की रैंडम जांच करती है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइंस अपने द्वारा घोषित किराए की सीमा से बाहर जाकर पैसे न वसूलें।  जैसा कि 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' के नियम 135 के उप-नियम (2) में प्रावधान है।  जब दिसंबर 2025 में सरकार ने घरेलू हवाई किराए पर इमरजेंसी कैप लगाया था. तब 500 km तक के रूट पर एक तरफ का किराया 7500 रुपये से ज्यादा नहीं लेने की बात कही गई थी. वहीं 1000 से 1500 km के बीच के रूट जैसे दिल्ली-मुंबई के लिए अधिकतम किराया 15,000 रुपये तय किए गए थे।  नए नियम में क्या होगा अब सरकार ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे. नए नियमों के तहत भी सामान्य दिनों में हवाई किराए की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है. एयरलाइंस ऑपरेशन की लागत और दूसरे संबंधित कारकों को ध्यान में रखकर किराया तय करेंगी और इसकी जानकारी DGCA को देंगी।  DGCA इन किरायों की निगरानी करेगा. हालांकि, किसी असाधारण परिस्थिति में जनहित को देखते हुए केंद्र सरकार किराये में हस्तक्षेप कर सकेगी. नए नियमों में टिकट बुकिंग के दौरान किराया, टैक्स, फीस और कैंसिलेशन चार्ज जैसी सभी जानकारियां अलग-अलग बताना भी जरूरी होगा। 

अवैध शराब पर सख्ती की तैयारी, सीएम डॉ. यादव ने जताई प्राथमिकता

अवैध शराब के परिवहन, भण्डारण और क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देवास में हुए हादसे के प्रति संवेदनशील है राज्य सरकार खतरनाक कार्बाइड गन और प्रतिबंधित पटाखों से बचाएं बच्चों को मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में कानून व्यवस्था की स्थिति चाक-चौबंद रखने के दिए गए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति चाक-चौबंद रहना चाहिए। अपराधियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही का अभियान जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीपावली पर्व पर प्रतिबंधित पटाखे उपयोग में न लाने का आमजन से आह्वान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास में बुलाई गई बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से कानून व्यवस्था की स्थिति के संबंध में चर्चा करने के टीवी चैनल प्रतिनिधियों को जानकारी दी कि अवैध शराब के परिवहन, भण्डारण और क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एंटी ड्रग माफिया के खिलाफ वर्ष 2029 तक कठोर कार्रवाई करने का जो निर्णय लिया गया है उसके परिपालन में दीपावली पर्व के संदर्भ में लॉ एण्ड आर्डर से संबंधित जरूरी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दीपावली पर प्रतिबंध के बावजूद उपयोग की जाने वाली विस्फोटक सामग्री पर रोक लगाई गई है। अभिभावकों से भी अपने बच्चों को ऐसे पटाखों जिसमें कार्बाइड गन भी शामिल है, से बचाने का आहवान किया है। देवास हादसे के प्रति संवेदनशील है राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को बताया कि बीते दिन देवास के पास जो घटना हुई, उसे लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। देवास हादसे के प्रति राज्य सरकार संवेदनशील है। राज्य के अंदर एन्टी ड्रग्स से लेकर जिस प्रकार की गतिविधियों को लेकर भारत सरकार ने अपेक्षा की है, उसके अंतर्गत सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे के लिए हमारा अभियान सबसे सफल रहा। समय-सीमा में प्रदेश से नक्सलवाद का खात्मा किया गया। इसी प्रकार का पूरा मैकेनिज्म बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा समूह कार्य कर रहा है। इन्हें सभी आवश्यक साधन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध शराब के परिवहन, भण्डारण, अवैध शराब के क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगाकर पूरे राज्य में एक साथ कार्रवाई की जाए। जो लोग इन कृत्य में संलिप्त पाए जाएं, उन पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। देवास की घटना की जानकारी मिलते ही हमने मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा। देवास जिले में थाना प्रभारी से संबंधित दुखद घटना होते ही तत्काल राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल को मौके पर भेजा गया। स्पेशल डीजी उपेन्द्र जैन भी मेरे निर्देश पर मौके पर पहुंचे तथा उनके मार्गदर्शन में वर्तमान में जांच की जा रही है। मंगलवार को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भी शोकाकुल परिवार से मिले और सरकार की ओर से संदेवनाएं व्यक्त की गईं। उनके द्वारा देवास के कलेक्टर, एसपी द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शोकाकुल परिवार की सहायता के लिए वीर बलिदानी स्व. दिलीप पुरी की पत्नी को एसआई के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी जा रही है। पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता भी दी गई। अवैध कार्य करने वालों और शराब माफिया के खिलाफ पुलिस हमेशा डटकर खड़ी रहेगी। हमारे पुलिस जवान ऐसे लोगों के खिलाफ हमेशा खड़े रहते हैं। प्रदेश के जिलों में अपराधियों के विरूद्ध गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवास की घटना में शामिल अवैध शराब के नेटवर्क के मुख्य सरगना राहुल जायसवाल को गिरफ्तार किया गया है। वाहन चालक और वाहन मालिक को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस द्वारा दक्षता का परिचय देते हुए अपराधियों के विरूद्ध कार्रवाई की गई है। आबकारी अधिकारी अमर सिंह बघेल को निलंबित किया गया गया। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना को ऐसे मामलों के लिए योजना बनाकर निरंतर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।  

हैकर्स ने स्मार्ट फ्रिज सिस्टम को बनाया निशाना, क्या भारत पर भी मंडरा रहा खतरा?

 नई दिल्ली सोचिए, आप किसी सुपरमार्केट में जाते हैं और वहां रखे फ्रिज का तापमान अचानक इतना बढ़ जाता है कि उसमें रखा दूध, दही, सब्जियां और बाकी खाने-पीने का सामान खराब होने लगता है. आपको लगेगा कि फ्रिज में कोई तकनीकी खराबी आ गई है, लेकिन अगर इसके पीछे हैकर्स का हाथ हो तो? जी हां, यूरोप के कई देशों से ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां हैकर्स ने सुपरमार्केट के फ्रिज और फ्रीजर सिस्टम को निशाना बनाया है. इस घटना के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के स्मार्ट फ्रिज और कूलिंग सिस्टम भी सेफ हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में।  यूरोप के कई देशों में फ्रिज हुए हैक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीडन, बेल्जियम, लक्जमबर्ग और आयरलैंड समेत यूरोप के कई देशों में सुपरमार्केट के कूलिंग सिस्टम पर साइबर अटैक हुआ है. इस हमले में हैकर्स ने फ्रिज और फ्रीजर की सेटिंग्स के साथ छेड़छाड़ की. कुछ जगहों पर फ्रीजर का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।  इसका नतीजा यह हुआ कि फ्रिज में रखा दूध, मीट और दूसरी खाने-पीने की चीजें खराब हो गईं. कई सुपरमार्केट को अपना सामान फेंकना पड़ा. स्वीडन की ICA और Coop जैसी सुपरमार्केट चेन के स्टोर भी इस घटना की चपेट में आ गए हैं. बेल्जियम में Carrefour और IKEA के कुछ स्टोर में भी ऐसी परेशानी सामने आई।  . आखिर हैकर्स ने फ्रिज को कैसे हैक किया? अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर कोई फ्रिज को कैसे हैक कर सकता है? आजकल बड़े सुपरमार्केट में ऐसे स्मार्ट कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं, जिन्हें इंटरनेट के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है।  इनकी मदद से स्टोर में बैठे बिना भी फ्रिज का तापमान बदला जा सकता है. टेक्नीशियन दूर बैठकर ही सिस्टम की जांच और सेटिंग्स में बदलाव कर सकते हैं. लेकिन यही सुविधा अब साइबर सिक्योरिटी के लिए खतरा बन रही है।  अगर किसी हैकर को इन सिस्टम का एक्सेस मिल जाता है, तो वह तापमान बदल सकता है, कूलिंग बंद कर सकता है या डीफ्रॉस्ट मोड चालू कर सकता है. पुराने सॉफ्टवेयर और कमजोर सिक्योरिटी वाले सिस्टम में यह खतरा और बढ़ जाता है।  क्या भारत में भी हो सकता है ऐसा हमला? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत के सुपरमार्केट भी ऐसे साइबर अटैक का शिकार हो सकते हैं? फिलहाल भारत में इस तरह के किसी हमले की खबर सामने नहीं आई है. लेकिन देश में भी बड़े स्टोर और रिटेल चेन स्मार्ट कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं।  ऐसे में अगर इन सिस्टम की सिक्योरिटी कमजोर है, तो हैकर्स इनके लिए खतरा बन सकते हैं. इससे बचने के लिए कंपनियों को अपने सिस्टम का सॉफ्टवेयर अपडेट रखना चाहिए, मजबूत पासवर्ड लगाना चाहिए और रिमोट एक्सेस को सुरक्षित बनाना चाहिए।  यानी अब साइबर सिक्योरिटी सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रह गई है. सुपरमार्केट के फ्रिज और फ्रीजर भी हैकर्स के निशाने पर आ सकते हैं. भारत में फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। 

त्योहारी सीजन में यात्रियों को राहत, बांद्रा टर्मिनस से गोरखपुर तक साप्ताहिक ट्रेन

रतलाम   दीपावली और छठ पूजा के त्योहारों पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेल मंडल से गुजरने वाली बांद्रा टर्मिनस–गोरखपुर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इससे यात्रियों को सुविधा होगी और उनका सफर आसान होगा। इसके साथ ही अन्य ट्रेनों पर यात्रियों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार ट्रेन 05092 बांद्रा टर्मिनस से प्रत्येक बुधवार दोपहर 1:45 बजे रवाना होकर रात 11:30 से 11:35 बजे के बीच रतलाम पहुंचेगी और अगले दिन रात 11:55 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। यह ट्रेन 11 और 18 नवंबर 2026 को चलेगी। गलवार रात 10:25 से 10:30 बजे के बीच रतलाम पहुंचेगी वापसी में ट्रेन 05091 प्रत्येक सोमवार रात 9:55 बजे गोरखपुर से रवाना होकर मंगलवार रात 10:25 से 10:30 बजे के बीच रतलाम पहुंचेगी और बुधवार दोपहर 12 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन नौ और 16 नवंबर को चलेगी। दोनों दिशाओं में ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, भवानी मंडी, कोटा, गंगापुर सिटी, ईदगाह आगरा, टुंडला, कानपुर सेंट्रल, ऐशबाग, बादशाहनगर, गोंडा और बस्ती स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें एसी द्वितीय व तृतीय श्रेणी, शयनयान और सामान्य द्वितीय श्रेणी के डिब्बे होंगे। ट्रेन में चढ़ते समय महिला का मंगलसूत्र चोरी उज्जैन: रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय एक महिला के गले से अज्ञात बदमाश मंगलसूत्र चोरी कर ले गया। घटना का पता ट्रेन में बैठने के बाद चला। महिला ने जीआरपी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस प्लेटफार्म पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है।पुलिस के अनुसार शशि पत्नी ओमप्रकाश निवासी सीहोर अपने रिश्तेदार के यहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ग्राम लेकोड़ा गई थी। वहां से पैसेंजर ट्रेन के माध्यम से उज्जैन पहुंची थी। सोमवार सुबह उसे अन्य रिश्तेदारों के साथ काचीगुड़ा एक्सप्रेस से सीहोर जाना था। ट्रेन के जनरल कोच में सवार होने के दौरान अज्ञात व्यक्ति ने उनके गले से मंगलसूत्र चोरी कर लिया। ट्रेन में बैठने के बाद शशि को मंगलसूत्र गायब होने का पता चला। इसके बाद उन्होंने जीआरपी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाई। जीआरपी पुलिस स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच कर आरोपित की पहचान करने में जुटी है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में जीआरपी ने मंगलसूत्र चोरी के मामलों में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

शेयर बाजार निवेशकों के लिए खुशखबरी? सरकार LTCG टैक्स छूट पर कर रही विचार

 नई दिल्ली शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में राहत की मांग तेज हो गई है. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और शेयर बाजार में दबाव के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर निवेशकों की चिंता को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि बाजार से जुड़े लोग अब अपनी चिंताएं खुलकर उठा रहे हैं और सरकार इन पर विचार करेगी. ऐसे में सवाल है कि क्या आने वाले समय में शेयर निवेशकों को LTCG टैक्स में राहत मिल सकती है? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2 नवंबर को मुंबई में एक बिजनेस न्यूजपेपर के कार्यक्रम में शिरकत कर रही थीं. इसी दौरान उनसे LTCG टैक्स को लेकर सवाल पूछे गए. उन्होंने सवालों का जवाब देते हुए टैक्स में कटौती का सीधा आश्वासन तो नहीं दिया, लेकिन ये संकेत जरूर दिए कि सरकार इन मांगों पर विचार कर रही है. सीतारमण ने कहा कि रिटेल निवेशकों और शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों की चिंताओं को वह समझती हैं. सीतारमण ने कहा, 'सभी संबंधित पक्ष अपनी चिंताएं अब ज्यादा जोर से उठा रहे हैं. मैं इन सभी बातों पर विचार करूंगी.' उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी एक पक्ष का समर्थन किए बिना निवेशकों की चिंता को समझ रही हैं।  वित्त मंत्री से पूछा गया कि क्या सरकार विदेशी निवेशकों को भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाने के लिए विशेष रियायत दे सकती है. इस पर उन्होंने कहा कि अगर विदेशी निवेशकों को राहत देने की बात होती है, तो घरेलू निवेशकों के हितों को भी ध्यान में रखना होगा. उन्होंने सवाल किया, 'अगर आप डॉलर वाले निवेशकों की बात करते हैं, तो रुपये वाले यानी घरेलू निवेशकों का क्या होगा?' सरकार का स्टैंड है कि विदेशी निवेश आकर्षित करने के साथ देश के आम निवेशकों के हितों का भी ध्यान रखा जाए।  क्या होता है LTCG टैक्स? LTCG यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स का मतलब है किसी निवेश को लंबे समय तक रखने के बाद बेचने पर होने वाला मुनाफा. आसान भाषा में समझें तो अगर आपने कोई शेयर खरीदा और उसे एक साल से ज्यादा समय बाद ऊंची कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाया, तो उस कमाई को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स कहा जाता है. मौजूदा नियमों के मुताबिक, लिस्टेड शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 महीने से ज्यादा समय तक निवेश रखने के बाद बेचने पर हुए मुनाफे पर 12.5% LTCG टैक्स लगता है. उदाहरण के लिए, अगर आपने शेयरों में निवेश किया और उन्हें 12 महीने से ज्यादा समय बाद बेचकर 2 लाख रुपये का मुनाफा कमाया, तो मौजूदा नियमों के तहत 1.25 लाख रुपये की सालाना छूट घटाने के बाद बचे 75,000 रुपये पर 12.5% LTCG टैक्स लगेगा. यानी टैक्स की रकम 9,375 रुपये होगी. यह गणना लागू शर्तों के अधीन है।  STCG टैक्स क्या होता है? 12 महीने या इससे कम समय तक रखे गए शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर होने वाले मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) कहते हैं. इस तरह की इनकम पर 20% STCG टैक्स लगता है. इसके लिए तय सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तें पूरी होनी चाहिए. उदाहरण के लिए, अगर आपने शेयरों में निवेश किया और उन्हें 12 महीने से कम समय में बेचकर 2 लाख रुपये का मुनाफा कमाया, तो मौजूदा नियमों के तहत पूरी रकम पर 20% STCG टैक्स लगेगा. यानी टैक्स की रकम 40,000 रुपये होगी. यह गणना लागू शर्तों के अधीन है।  विदेशी निवेशक मांग रहे LTCG टैक्स में राहत शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली के कारण LTCG टैक्स पर बहस तेज हुई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 31 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं. विदेशी निवेशकों का मानना है कि टैक्स का बोझ कम होने से भारतीय बाजार में निवेश करना ज्यादा आकर्षक हो सकता है. इसी वजह से LTCG टैक्स की समीक्षा की मांग उठ रही है. सीतारमण ने कहा कि 2023-24 में भी कैपिटल गेन्स टैक्स का ढांचा लगभग ऐसा ही था और उस समय भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह काफी मजबूत था. लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के साथ बाजार से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ी हैं।  सेबी ने भी की टैक्स में बदलाव की सिफारिश इस बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भी सरकार को टैक्स में बदलाव के कुछ सुझाव दिए हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, सेबी ने विदेशी इक्विटी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स खत्म करने की सिफारिश की है. इसके अलावा घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को एक स्कीम से दूसरी स्कीम में पैसा ट्रांसफर करने पर LTCG टैक्स से छूट देने का सुझाव भी दिया गया है. हालांकि, इसके लिए जरूरी शर्त यह है कि निवेशक ने अपनी मौजूदा स्कीम में पैसा एक साल से ज्यादा समय तक रखा हो. ये सुझाव बजट से पहले सरकार को भेजी गई सिफारिशों का हिस्सा हैं. इन पर फैसला लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र में है. सेबी की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं।  इक्विटी बाजार को भी सपोर्ट की जरूरत वित्त मंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक विकास दर 7% या उससे ज्यादा बनाए रखने के लिए पूंजी की जरूरत है. इसमें इक्विटी निवेश की अहम भूमिका है. सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत बनाने पर काम किया है, लेकिन अब शेयर बाजार को भी जरूरी समर्थन देने की जरूरत है. सीतारमण के मुताबिक, सरकार निवेशकों की चिंताओं को समझ रही है और बाजार से जुड़े लोगों की मांगों पर ध्यान देगी. अगर आप शेयर बाजार में सीधे निवेश करते हैं या इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, तो फिलहाल पुराने नियम ही लागू रहेंगे. अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार बजट से पहले सेबी की सिफारिशों और निवेशकों की मांगों पर क्या फैसला लेती है। 

छोटे नोटों की किल्लत की खबरों पर RBI का बड़ा बयान, जानें क्या कहा

नई दिल्ली दिवाली के त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस दौरान लोग मिठाई, कपड़े और घर के सामान खरीदने के लिए नकद पैसों का भी इस्तेमाल करते हैं। छोटी-मोटी खरीदारी के लिए 10, 20 और 50 रुपये के नोट काफी काम आते हैं। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दिवाली पर इन छोटे नोटों की कमी हो सकती है। मैसेज में लोगों को UPI और कार्ड से पेमेंट करने की सलाह भी दी गई है। ऐसे में अगर आप भी इस दावे को लेकर परेशान हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। RBI ने इस वायरल मैसेज की सच्चाई बताते हुए साफ किया है कि देश में छोटे नोटों की कोई कमी नहीं है। क्या है छोटे नोटों की कमी का वायरल दावा सोशल मीडिया पर RBI के नाम और लोगो से एक फर्जी सर्कुलर वायरल हो रहा है। इसमें RBI गवर्नर के नाम और फर्जी हस्ताक्षर का भी इस्तेमाल किया गया है। इस सर्कुलर में दावा किया गया है कि दिवाली के दौरान बाजार में 10, 20 और 50 रुपये के नोटों की कमी हो सकती है। इसमें लोगों को सलाह दी गई है कि वे नकद पैसे की जगह UPI, कार्ड और दूसरे डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करें। फर्जी सर्कुलर में क्या लिखा है 27 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले इस फर्जी सर्कुलर में कहा गया है कि देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और नकदी का इस्तेमाल कम करने की योजना के तहत छोटे नोटों की छपाई धीरे-धीरे कम की जा रही है। इसमें दावा किया गया है कि दिवाली के दौरान 10, 20 और 50 रुपये के नए नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। सर्कुलर में लोगों को सलाह दी गई है कि वे UPI, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और दूसरे ऑनलाइन पेमेंट तरीकों का इस्तेमाल करें। साथ ही त्योहार के दौरान नकदी की जरूरत को देखते हुए पहले से तैयारी करने की बात भी कही गई है। RBI ने क्या बताया इस वायरल दावे पर RBI ने साफ कर दिया है कि यह सर्कुलर पूरी तरह फर्जी है और इसमें दी गई जानकारी गलत है। RBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि 10, 20 और 50 रुपये समेत सभी तरह के नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। RBI के मुताबिक, सभी कीमतों के नोट उसके वॉल्ट और करेंसी चेस्ट में पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं। ऐसे में दिवाली पर छोटे नोटों की कमी होने का दावा पूरी तरह भ्रामक है। बैंक ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे फर्जी मैसेज पर भरोसा न करें। लोगों से RBI की अपील RBI ने लोगों को सलाह दी है कि नोटों की उपलब्धता से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज पर भरोसा न करें। ऐसी जानकारी के लिए सिर्फ RBI की आधिकारिक वेबसाइट और उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी सूचनाओं को ही सही मानें।

भारत में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, जानें कैसी होगी इसकी हाईटेक पटरी

नई दिल्ली देश की पहली 'बुलेट ट्रेन' का काम बड़ी स्पीड से चल रहा है. कुछ ही सालों में स्वदेशी बुलेट ट्रेन पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी. बताया जा रहा है कि भारत की इस स्पीड ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 280 है, लेकिन ये पटरी पर 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी. अभी तक भारत में वंदे भारत 180 की स्पीड से चलती है. ऐसे में सवाल है कि ये ट्र्रेन क्या सामान्य पटरियों पर ही चलेगी या इसके लिए खास तरह की पटरियां डिजाइन होंगी।  क्या उस ट्रैक में भी नीचे पत्थर रखे जाएंगे और उसके बीच का गैप कितना होगा? साथ ही उस पटरी के बीच में लकड़ी या सीमेंट के ब्लॉक भी लगे होंगे या नहीं. तो समझते हैं जिस ट्रैक पर 250 की स्पीड से ट्रेन चलेगी, वो ट्रैक कैसा होगा और उसमें क्या खास होगा… कैसी होगी बुलेट ट्रेन की पटरी? ये नॉर्मल ट्रैक से काफी अलग होगी. इसमें सबसे बड़ा अंतर यह है कि पटरियों के नीचे गिट्टी (पत्थर) बिछाने के बजाय कंक्रीट की मजबूत स्लैब बनाई जाएगी. इसी वजह से इसे बैलेस्टलैस ट्रैकयानी बिना गिट्टी वाला ट्रैक कहा जाता है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित जे-स्लैब ट्रैक बनाया जाएगा. भारत में पहली बार इस तरह का जे-स्लैब सिस्टम इस्तेमाल हो रहा है।  कई लेयर में बनेगा ट्रैक?     इस खास ट्रैक में पहले नीचे काफी मजबूत बेस बनाया जाता है और उसके बाद उस पर पटरियां बिछाई जाती हैं. सबसे नीचे मजबूत कंक्रीट का बेस तैयार किया जाता है। यह ट्रैक को सहारा देता है।      फिर उसके बाद कंक्रीट बेस के ऊपर एक खास तरह का सीमेंट और डामर से तैयार मिश्रण इस्तेमाल होता है, इसे सीएएम कहा जाता है. इससे स्लैब सही लेवल और पोजिशन में रहता है।      फिर उसके ऊपर इसके ऊपर फैक्ट्री में पहले से तैयार की गई कंक्रीट की बड़ी-बड़ी स्लैब बिछाई जाती हैं. इन्हें मौके पर ढालने के बजाय फैक्ट्री में तय माप के अनुसार तैयार किया जाता है।      इसके बाद लोहे की दो पटरियां लगाई जाती हैं. इन्हें विशेष फास्टनर की मदद से कंक्रीट स्लैब से जोड़ा जाता है. इन्हीं पटरियों पर बुलेट ट्रेन दौड़ेगी।  इसके अलावा बुलेट ट्रेन की पटरी की चौड़ाई भी अलग होगी. रेलवे में दो पटरियों के बीच की दूरी को गेज कहते हैं. भारत में सामान्य रेलवे में ज्यादातर ब्रॉड गेज का इस्तेमाल होता है. इसकी चौड़ाई 1,676 मिलीमीटर यानी करीब 5.5 फीट होती है.लेकिन मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में स्टैंडर्ड गेज का इस्तेमाल होगा. इसकी चौड़ाई 1,435 मिलीमीटर यानी करीब 4.7 फीट होती है।  मेट्रो से मिलती जुलती होगी पटरी मेट्रो में भी एलिवेटेड और अंडरग्राउंड सेक्शन में अक्सर कंक्रीट के बेस पर बिना गिट्टी वाला ट्रैक बनाया जाता है. इसलिए देखने में यह बुलेट ट्रेन के ट्रैक जैसा लग सकता है. लेकिन, इसमें जे-स्लैब सिस्टम लगाया जाएगा और मजबूती के मामले में भी मेट्रो से काफी अलग होगा. बुलेट ट्रेन की पटरी में एक और खास बात है. इसमें पटरियों को सामान्य छोटे-छोटे टुकड़ों में जोड़कर नहीं छोड़ा जाएगा।  इसमें रेल सेक्शन को फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन की मदद से जोड़कर 200 मीटर लंबे पैनल बनाए जा रहे हैं. इस प्रक्रिया को फ्लैश बट वेल्डिंग कहते हैं. इसमें रेल के सिरों को गर्म करके दबाव के साथ जोड़ा जाता है. इससे मजबूत जोड़ तैयार होता है।