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बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का 62.16% निर्माण पूरा, गुजरात में काम तेज

अहमदाबाद मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का कुल निर्माण कार्य जुलाई 2026 के अंत तक 62.16% पूरा हुआ था. सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने यह जानकारी दी।  परियोजना के पूरा होने की संभावित तारीख या वर्ष पूछे जाने पर NHSRCL ने कहा, 'सभी ठेके दिए जाने और ट्रेनसेट की आपूर्ति के बाद ही परियोजना के पूरा होने की संभावित समयसीमा का आकलन किया जा सकेगा. 21 सितंबर 2026 का यह जवाब 17 अगस्त 2026 को दाखिल आरटीआई आवेदन पर दिया गया।  NHSRCL के मुताबिक, 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के लिए आवश्यक 1,389.49 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहित की जा चुकी है. इसमें गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली की 959.04 हेक्टेयर तथा महाराष्ट्र की 430.45 हेक्टेयर ज़मीन शामिल है।  निर्माण कार्य कहां तक पहुंचा? आरटीआई जवाब के अनुसार, 366 किलोमीटर वायाडक्ट पर गर्डर लगाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 380 किलोमीटर के लिए गर्डर ढाले जा चुके हैं. 459.90 किलोमीटर में नींव का काम पूरा हो चुका है और 455.10 किलोमीटर में पियर तैयार किए जा चुके हैं. गुजरात के सभी स्टेशनों पर नींव और ऊपरी ढांचे का काम पूरा हो चुका है. वहां फिनिशिंग का काम चल रहा है. महाराष्ट्र में स्टेशनों का निर्माण जारी है।  सुरंग, डिपो और ट्रैक की स्थिति परियोजना में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग शामिल है, जिसका सात किलोमीटर हिस्सा समुद्र के नीचे होगा. NHSRCL के मुताबिक, टनल बोरिंग मशीन से सुरंग बनाने का काम चल रहा है. न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से बनाई जा रही सुरंग का 4.88 किलोमीटर हिस्सा पूरा हो चुका है. आठ पहाड़ी सुरंगों में से चार की खुदाई आर-पार पूरी हो गई है. आरटीआई जवाब के अनुसार, साबरमती डिपो का 32.28% और ठाणे डिपो का 17.23% काम पूरा हुआ था. 27 अगस्त 2026 तक CAM इंजेक्शन सहित 97 रूट किलोमीटर में ट्रैक स्लैब बिछाए जा चुके थे।  पहले ट्रेनसेट का निर्माण शुरू चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने कॉरिडोर के लिए दो हाई-स्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन, निर्माण और कमीशनिंग का ऑर्डर BEML को दिया है. NHSRCL के मुताबिक, पहले ट्रेनसेट का निर्माण शुरू हो गया है. NHSRCL ने यह भी कहा कि मुंबई–अहमदाबाद लाइन फिलहाल उसकी एकमात्र स्वीकृत हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जिस पर निर्माण कार्य चल रहा है।   

बुलेट ट्रेन की तैयारी पूरी, अगले साल पटरियों पर दौड़ने की रेलवे ने दी पुष्टि

अहमदाबाद देश की पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) को चलाने की तैयारियां जोर-शोर पर चल रही है. हाई स्पीड रेल ट्रैक से लेकर स्टेशनों, ब्रिज और सुरंगों का काम युद्धस्तर पर जारी है. बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी और अगले साल यानी 2027 से इसकी शुरुआत होने वाली है. रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से इसे कन्फर्म कर दिया गया है।  Railway Ministry की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर वीडियो शेयर किया गया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो के कैप्शन में मिनिस्ट्री की ओर से लिखा गया है, 'बुलेट ट्रेन अगले साल पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार!' इसमें रेलवे की ओर से बुलेट ट्रेन ट्रैक से लेकर स्टेशनों तक पर जारी काम की झलक दिखाई गई है।  वायरल वीडियो में क्या-क्या?  बात करें रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से Social Media पर शेयर किए वीडियो की, तो इसमें भारतीय रेलवे द्वारा Bullet Train Project में किए जा रहे कामों की झलक देखने को मिल रही थी. सूरत-वापी ट्रैक पर रेलवे ब्रिज, स्टेशन, सुरंगों में काम करते हुए रेलवे के कर्मचारी नजर आ रहे हैं, जो इस बात को साफ कर रहे हैं, कि अगले साल 2027 में बुलेट ट्रेन को पटरियों पर दौड़ाने के लिए किस स्तर पर काम पूरा किया जा रहा है।   सूरत-वापी बुलेट ट्रेन सेक्शन कितना लंबा? भारत की पहली बुलेट ट्रेन अगले साल संभावित 15 अगस्त 2027 (First Bullet Train From 15t August 2027) से ट्रैक पर तेज रफ्तार से दौड़ती हुई नजर आएगी. रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से किए गए एक्स पोस्ट से पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इसके संकेत दे चुके हैं. बता दें कि देश की अपनी पहली Bullet Train के पहले चरण की शुरुआत 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर होगी. इसका 348 किलोमीटर का हिस्सा गुजरात में आता है और जिस वापी-सूरत सेक्शन का वीडियो रेलवे मिनिस्ट्री ने शेयर किया है, वो करीब 100 किलोमीटर का है।     2 घंटे में मुंबई से अहमदाबाद, 12 स्टॉपेज बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी, जबकि अहमदाबाद से मुंबई के बीच औसतन 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बुलेट ट्रेन अगले साल से दौड़ेगी. इस हिसाब से देखें, तो अभी तक सबसे हाई स्पीड ट्रेनों के जरिये मुंबई से अहमदाबाद का सफर करीब 6 घंटे में पूरा होता है, लेकिन बुलेट ट्रेन के जरिए ये महज 2 घंटे के आसपास में पूरा होगा।  अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में रेलवे की ओर से बुलेट ट्रेन के 12 स्टॉपेज तय किए गए हैं. पहला Bullet Train स्टेशन साबरमती रखा गया है, तो वहीं आखिरी मुंबई है. इनमें साबरमती-मुंबई (BKC) के अलावा ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद शामिल हैं। 

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर बड़ा अपडेट, ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा हुई लागत; 2030 तक दौड़ेगी B35 ट्रेन

नई दिल्ली  भारत 2030 तक 350 किमी/घंटा (B35) की डिजाइन स्पीड वाली स्वदेशी हाई-स्पीड या बुलेट ट्रेन बनाएगा। ये ट्रेनें जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज की ट्रेनों जैसी होंगी, जिनका प्रोडक्शन भी उसी साल शुरू होना है। यह प्रस्ताव मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट की बदली हुई लागत को मंजूरी देने के लिए था। रेलवे मंत्रालय के कैबिनेट ने प्रोजेक्ट की बदली हुई लागत को मंजूरी दे दी है और ये लागत 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह 2015 में तैयार किए गए शुरुआती अनुमान से लगभग दोगुना है। बढ़ी हुई लागत में से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का खर्च बजट से पूरा किया जाएगा। ट्रेनें बनाने की प्रक्रिया शुरू कैबिनेट को बताया है कि उसने B35 ट्रेनें बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम तब उठाया गया जब जापान ने दिसंबर 2024 में बताया कि मौजूदा E5 सीरीज की ट्रेनों का प्रोडक्शन धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है। इसमें बताया गया है कि जापान ने संकेत दिया है कि E10 ट्रेनों का प्रोडक्शन 2030 में शुरू होगा और वे 2034 तक ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि E10 ट्रेनों के उपलब्ध होने पर उन्हें चलाने पर विचार किया जाएगा। भारत खुद डेवलप करेगा अपना सिस्टम मंत्रालय ने कहा है कि देश में बनी B28 हाई-स्पीड ट्रेनों का मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी गई है और भारत अपना खुद का भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) भी विकसित करेगा। यह कदम चीन के अपने CTCS सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम जैसा ही है, जो पारंपरिक और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पर स्पीड, ट्रेनों के बीच की दूरी और सुरक्षा को मैनेज करता है। लागत में बढ़ोतरी की वजह क्या है? मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट की लागत में पहले के 1.1 लाख करोड़ रुपये से जो भारी बढ़ोतरी हुई है, उसकी मुख्य वजहें-     जमीन अधिग्रहण की लागत का तीन गुना से ज्यादा बढ़कर लगभग 19,700 करोड़ रुपये हो जाना।     इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत में लगभग 50% की बढ़ोतरी के साथ यह 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाना।     2015 के अनुमान की तुलना में ट्रेनों और सिग्नलिंग सिस्टम पर होने वाले खर्च में लगभग 100% की बढ़ोतरी। शुरुआत में चलेंगी बी28 ट्रेनें भविष्य में आने वाली जापानी ट्रेनों को छोड़कर, प्रोजेक्ट की मौजूदा लागत लगभग 399 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर बैठती है। शुरुआत में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर B28 ट्रेनें चलेंगी जिनकी डिजाइन स्पीड 280 kmph होगी, जबकि उनकी ज्यादा से ज्यादा ऑपरेटिंग स्पीड 249 kmph होगी। BEML को 32 B28 ट्रेनें बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। उम्मीद है कि 2027 की पहली तिमाही तक ट्रायल रन के लिए दो प्रोटोटाइप ट्रेनें तैयार हो जाएंगी। BEML ने शुक्रवार को BSE को बताया कि उसे 15 और B28 ट्रेनें बनाने के लिए 5,400 करोड़ रुपये का एक अलग कॉन्ट्रैक्ट मिला है। पूरे 508 किमी. लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर तेजी से काम, तैयार हो रहे शानदार स्टेशन और सुरंगें

अहमदाबाद देश में पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) चलाने की तैयारी जोरों पर है. इसके लिए जो रेलवे स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं उनपर काम रॉकेट की रफ्तार से चल रहा है. रेलवे मंत्रालय से लेकर रेल मंत्री तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब एक्स) पर इससे जुड़े अपडेट शेयर करते रहते हैं. Ministry Of Railway ने वापी-सूरत सेक्शन में बनाए जा रहे बुलेट ट्रेन रेलवे स्टेशन से लेकर इस ट्रैक पर सुरंगों के निर्माण से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया है, जो तेजी से वायरल (Railway Viral Video) हो रहा है।  रेलवे के Video में क्या खास?  मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे की ओर से एक एक्स पोस्ट में वापी-सूरत सेक्शन पर बुलेट ट्रेन के ट्रैक और स्टेशन पर जारी काम का वीडियो शेयर किया है. इसमें साफ देखने को मिल रहा है कि कैसे इस हाई स्पीड रेल रूट में ट्रैक पर तेज रफ्तार से बुलेट ट्रेन को चलाने के लिए पहाड़ों को काटकर सुरंगें बनाने का काम किया जा रहा है, कैसे नदी के ऊपर ब्रिज ट्रैक बिछाया जा रहा है और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम युद्धस्तर पर जारी है. इसके साथ ही बुलेट ट्रेन के मल्टी स्टोरी स्टेशन (Multi Story Bullet Train Station) की भी झलक रेलवे ने दिखाई है. इस वीडियो के कैप्शन में रेलवे ने लिखा, 'बुलेट ट्रेन का काम बहुत तेजी के साथ चल रहा है।  सूरत-वापी बुलेट ट्रेन सेक्शन कितना लंबा?  भारत की पहली बुलेट ट्रेन अगले साल संभावित 15 अगस्त से ट्रैक पर तेज रफ्तार से दौड़ती हुई नजर आएगी और इसके संकेत रेल मंत्री ने भी दिए हैं. ये देश की अपनी पहली Bullet Train होगी और ये पहली बार 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर शुरू की जाएगी. इसका 348 किलोमीटर का हिस्सा गुजरात में आता है और जिस वापी-सूरत सेक्शन का वीडियो रेलवे मिनिस्ट्री ने शेयर किया है, वो करीब 100 किलोमीटर का है।  बुलेट ट्रेन रूट पर 12 स्टॉपेज  अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर जहां 508 किलोमीटर लंबा है, तो वहीं इस सेक्शन में रेलवे की ओर से बुलेट ट्रेन के 12 स्टॉपेज तय किए गए हैं. पहला Bullet Train स्टेशन साबरमती रखा गया है, तो वहीं आखिरी मुंबई है. इनमें साबरमती-मुंबई (BKC) के अलावा ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद शामिल हैं।  इस स्पीड से चलेगी बुलेट ट्रेन बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी, जबकि अहमदाबाद से मुंबई के बीच औसतन 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बुलेट ट्रेन अगले साल से दौड़ेगी. बता दें, फिलहाल सबसे हाई स्पीड ट्रेनों के जरिये मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा करने में लगभग 6 घंटे का समय लगता है. बुलेट ट्रेन की शुरुआत के बाद यह दूरी महज 2 घंटे में पूरी की जा सकेगी. इससे न केवल यात्रियों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ने वाली हैं। 

बुलेट ट्रेन चलाने वाले ड्राइवरों की होगी खास ट्रेनिंग, 2027 में शुरू होगी सेवा; जानें कितनी मिलेगी सैलरी

मुंबई  भारत  की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के रूप में आगे बढ़ रही है. इसके साथ ही लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि इसके लिए किस तरह से ड्राइवरों का चयन किया जाएगा. सामान्य लोको पायलट से वह किस तरह अगल होगा और उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी. बुलेट ट्रेन का संचालन नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के माध्यम से किया जाएगा. ऐसा भी माना जा रहा है कि बुलेट ट्रेन के लिए ड्राइवरों का चयन कड़े मानकों के साथ किया जाएगा. उम्मीदवारों को मेडिकल फिटनेस, अच्छी दृष्टि, तेज प्रतिक्रिया क्षमता और साइकोमेट्रिक टेस्ट से गुरना पड़ सकता है. इसके लिए ट्रेन की संचालन की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।  सामान्य ट्रेनों से कितना अलग  बुलेट ट्रेन सामान्य ट्रेन से काफी अलग होता है. इसके आधुनिक टेक्नोलॉजी, हाई स्पीड ब्रेकिंग सिस्टम और सुरक्षा के भी कई अनिवार्य सुरक्षा के इंतजाम किया गया है, जिसके लिए चयनित उम्मीदवारों को लंबा तकनीकी ट्रेनिंग और प्रैक्टिस कराया जाएगा. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें बुलेट ट्रेन  चलाने की अनुमति मिलेगी।  कितनी होगी सैलरी?  हालांकि, बुलेट ट्रेन ड्राइवरों की सैलरी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. मौजूदा रेलवे के अनुभवी मेल, एक्सप्रेस लोको पायलट कई तरह के भर्तों को मिलाने के बाद से 60 से 90 हजार रुपये होती है. हालांकि, बुलेट ट्रेन के ड्राइवरों को इससे ज्यादा सैलरी मिलने की संभावना है. कई मीडिया रिपोर्ट की माने तो, इनको 40 हजार से लेकर 1, 25,000 रुपये तक की सैलरी मिल सकती है।    कौन बन सकता है ड्राइवर?  भारत में पहली बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी तेज हो गई है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलने वाली इन ट्रेनों के लिए ड्राइवर यानी HSR Pilot की जरूरत होगी. यह जिम्मेदारी सामान्य ट्रेनों के लोको पायलट से अलग और ज्यादा तकनीकी होगी. बुलेट ट्रेन का ड्राइवर बनने के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या डिग्री होनी चाहिए. इसके साथ भारतीय रेलवे या सरकारी मेट्रो में ट्रेन चलाने का कम से कम 3 साल का अनुभव जरूरी रखा गया है. इसका मतलब साफ है कि कोई व्यक्ति सीधे फ्रेशर के तौर पर बुलेट ट्रेन का ड्राइवर नहीं बन सकता।   

Bullet Train: मुंबई-अहमदाबाद सफर होगा महज 2 घंटे का, रेल मंत्री ने बताया कब दौड़ेगी पहली ट्रेन

अहमदाबाद  भारत की पहली बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल अगले साल मई और जून में शुरू होने की उम्मीद है. बुलेट ट्रेन के ट्रायल शुरू होने के दो से चार महीनों के बाद इसे आम यात्रियों के लिए खोला जाएगा. पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद रूट के एक सेक्शन पर शुरू होगी. यहां निर्माण कार्य अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है।  अगले साल मई-जून में शुरू होगी पहली बुलेट ट्रेन वडोदरा में 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाई-स्पीड ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम हाल ही में बनकर तैयार हुआ है और उसे स्क्वीज टेस्टिंग के लिए भेजा गया है. उन्होंने कहा, 'अगले साल मई या जून तक, भारत की अपनी बुलेट ट्रेन टेस्टिंग के लिए पटरियों पर होगी. 2-4 महीने की टेस्टिंग के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुलेट ट्रेन का उद्घाटन करेंगे।  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन के तहत तैयार किया जा रहा है और इससे वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा. उन्होंने कहा, 'जब आप वडोदरा से बुलेट ट्रेन में सफर करेंगे, तो आप सिर्फ डेढ़ घंटे में मुंबई पहुंच जाएंगे।  तेजी से चल रहा निर्माण कार्य वैष्णव ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और सूरत-वापी सेक्शन के इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है. रेलवे सेक्टर में बड़े सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे के ऑपरेटिंग सिस्टम, रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म और निर्माण से जुड़े नियमों को आधुनिक बना रही है. उन्होंने कहा, 'हम ऑपरेटिंग सिस्टम और रिजर्वेशन सिस्टम से लेकर पुराने कंस्ट्रक्शन प्रोटोकॉल तक, हर चीज में सुधार और आधुनिकीकरण कर रहे हैं।  सेक्शन में शुरू होगी बुलेट ट्रेन     सूरत-बिलिमोरा सेक्शन: सबसे पहले शुरू होगा     वापी-सूरत सेक्शन: दूसरे चरण में शुरू होगा     वापी-अहमदाबाद सेक्शन: तीसरे चरण में शुरू होगा      अहमदाबाद-ठाणे सेक्शन: चौथे चरण में शुरू होगा      अहमदाबाद-मुंबई: ठाणे के बाद मुंबई वाला सेक्शन शुरू होगा और बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुबंई तक शुरू हो जाएगी।  वैष्णव ने बताया कि हाल के वर्षों में रेलवे के कई लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं. उन्होंने चिनाब ब्रिज और मिजोरम को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाले रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का जिक्र किया. केंद्रीय मंत्री के अनुसार, 280 रेलवे स्टेशनों को फिर से विकसित किया गया है और 36,000 किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वंदे भारत टेक्नोलॉजी वाली कार्गो ट्रेनें भी विकसित की जा रही हैं।  उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की रफ्तार तेज हुई है. उन्होंने बताया कि 2020 में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का पहला सेक्शन पूरा होने के बाद, अगले सेक्शन पर काम में तेजी आई. वैष्णव ने कहा, 'भारतीय रेलवे का जो आधुनिक स्वरूप उभर रहा है, उससे आने वाली कई पीढ़ियों को फायदा होगा।  ये 7 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भी हैं प्रस्तावित     दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन     वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी      मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन     पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर      बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर      बेंगलुरु-हैदराबाद कॉरिडोर      चेन्नई-हैदराबाद कॉरिडोर 

दक्षिण भारत में बुलेट ट्रेन का मेगा प्लान, बेंगलुरु-हैदराबाद-चेन्नई समेत 20+ शहर होंगे कनेक्ट

बेंगलुरु मुंबई, हैदराबाद की तरह बेंगलुरु भी बुलेट ट्रेन का बड़ा हब बनेगा. बेंगलुरु से निकलने वाले ये हाईस्पीड रेल कॉरिडोर साउथ इंडिया के तीन राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के बड़े शहरों को हाई स्पीड रेल कनेक्टिविटी देंगे. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRCL) मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद अन्य रूट की डीपीआर, अलाइनमेंट की औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है. अभी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रूट पर काम चल रहा है. इसके अलावा दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन और दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन रूट पर भी मंथन चल रहा है।  चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूरु हाईस्पीड रेल कॉरिडोर चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूरु दक्षिण भारत का सबसे अहम बुलेट ट्रेन रूट है, जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक को जोड़ता है. 463 किलोमीटर के कॉरिडोर में चेन्नई से बेंगलुरु 306 किमी और बेंगलुरु से मैसूरु 157 किमी का रूट है. इससे बेंगलुरु से चेन्नई का सफर 5–6 घंटे के बजाय सिर्फ सवा घंटे का रह जाएगा. बेंगलुरु से मैसूरु का सफर 2 घंटे से घटकर लगभग 30-45 मिनट रह जाएगी. ये कॉरिडोर बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे के समानांतर चलेगा. इसमें चेन्नई सेंट्रल, पूनमल्ली, चित्तूर (आंध्र प्रदेश), कोलार, कोडिहल्ली, व्हाइटफील्ड, बयप्पनहल्ली (बेंगलुरु), इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी, कैंगेरी, मांड्या और मैसूरु स्टेशन हो सकते हैं।  हैदराबाद-बेंगलुरु हाईस्पीड रेल कॉरिडोर यह भारत के दो सबसे बड़े आईटी हब बेंगलुरु और हैदराबाद को जोड़ेगा. 610 किमी के इस रूट पर 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ेंगी. अभी ट्रेन से 10 से 12 घंटे का सफर घटकर सिर्फ 2.5 घंटे रह जाएगा. ये रूट तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के रायलसीमा इलाके और उत्तरी कर्नाटक से होकर जाएगा. हैदराबाद (शमशाबाद एयरपोर्ट), महबूबनगर, करनूल, अनंतपुर, चिकबल्लापुर और बेंगलुरु का कैंपेगौड़ा एयरपोर्ट इसका स्टेशन प्रस्तावित है।  बेंगलुरु-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरिडोर  बेंगलुरु को सीधे पुणे और मुंबई से भी जोड़े जाने की तैयारी है. ये 850 से 900 किलोमीटर लंबा रूट होगा. अभी रेल से 18–20 घंटे का सफर लगता है तो 4 से 5 घंटे रह जाएगा. कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा सीमा से सटे इलाके इसके दायरे में आएंगे. बेंगलुरु, तुमकुरु, दावणगेरे, हुबली-धारवाड़, बेलगावी, कोल्हापुर, पुणे और मुंबई भी बुलेट ट्रेन के स्टेशन होंगे।  DPR और अलाइनमेंट पर काम ये हाईस्पीड कॉरिडोर जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन टेक्नोलॉजी और स्टैंडर्ड गेज पर बनाए जाएंगे. NHSRCL इन बुलेट ट्रेन रूट के लिए  LiDAR सर्वे, अलाइनमेंट ड्राफ्टिंग और ट्रैफिक से जुड़े अध्ययन कर रहा है.घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों जैसे बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद शमशाबाद में सुरंगें और बाकी मैदानी भागों में एलिवेटेड वायडक्ट बनाए जाएंगे। 

वंदे भारत से भी तेज रफ्तार! दिल्ली-पटना बुलेट ट्रेन से बदलेगा बिहार-UP का सफर

पटना / नई दिल्ली देश के कई हिस्‍सों में हाई-स्‍पीड यानी बुलेट ट्रेन का जाल बिछाने का काम पूरे जोरशोर से चल रहा है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ाने की तैयारी अपने चरम पर है. साल 2027 में इस रूट के कुछ हिस्‍सों पर हाई-स्‍पीड ट्रेन ऑपरेट करने का प्रयास है. भारत सरकार ने बिहार और उत्‍तर प्रदेश में भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है. अब दिवाली-छठ से पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इसपर बड़ा अपडेट दिया है. उन्‍होंने बताया कि दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. बता दें कि दिल्‍ली से पटना का रेल रूट सबसे व्‍यस्‍ततम रेल मार्गों में से एक है, ऐसे में इस सेक्‍शन में बुलेट ट्रेन चलने से हजारों-लाखों लोगों को काफी राहत मिलेगी. रेल मंत्री ने बताया कि हाई-स्‍पीड ट्रेन से दिल्‍ली से पटना महज 4.5 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. फिलहाल यह सफर 12 घंटों का है. इस तरह जो काम राजधानी, वंदे भारत और दुरंतो जैसी प्रीमियम सुपरफास्‍ट ट्रेनें नहीं कर सकीं वो बुलेट ट्रेन से संभव हो सकेगा. साथ ही बिहार-यूपी वालों का सपना भी पूरा होगा।  बिहार-यूपी वालों का सपना साकार करने की दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है. आने वाले कुछ सालों में दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन के दौड़ने का सपना साकार होने वाला है. देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है. इस हाई-स्‍पीड रेल कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब दो घंटे और राष्ट्रीय राजधानी से पटना की यात्रा महज साढ़े चार घंटे में पूरी की जा सकेगी. दिल्‍ली से पटना की दूरी 1000 किलोमीटर है. इस तरह बुलेट ट्रेन की संभावित रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहने की संभावना है. प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा।  बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कौन से बड़े शहर रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे. इससे दिल्ली और इन शहरों के बीच मौजूदा रेल यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है. वैष्णव के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना के तहत दिल्ली से आगरा की करीब 200 किलोमीटर दूरी केवल 58 मिनट में तय की जा सकेगी. वहीं 455 किलोमीटर दूर कानपुर पहुंचने में करीब 1 घंटे 50 मिनट लगेंगे. दिल्ली से लखनऊ की करीब 495 किलोमीटर दूरी 2 घंटे 12 मिनट में पूरी होने का अनुमान है. इसी तरह 750 किलोमीटर दूर प्रयागराज तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे और 945 किलोमीटर दूर वाराणसी तक करीब 3 घंटे 33 मिनट लग सकते हैं. दिल्ली से पटना की करीब 1,170 किलोमीटर की दूरी लगभग 4.5 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य होगा।  हाई-स्‍पीड रेल नेटवर्क का बढ़ता दायरा बुलेट ट्रेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है. रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना के साकार होने पर यह मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के बाद देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का अगला बड़ा चरण होगा. साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला पहला व्यापक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बन सकता है. इससे दिल्ली-उत्तर प्रदेश-बिहार बेल्ट में रहने वाले लाखों यात्रियों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है. आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और पटना जैसे धार्मिक और पर्यटन केंद्रों तक तेज कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है. इसके अलावा कारोबार, निवेश और रीजनल इकोनोमिक एक्टिविटीज में भी तेजी आने की उम्मीद है।  180 किलोमीटर वाली सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन फिलहाल भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन स्पीड वाली सेमी हाई स्पीड सर्विसेज ऑपरेट हो रही हैं. इसके मुकाबले मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे और परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है. इस परियोजना के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय घटकर करीब 1 घंटे 58 मिनट होने की उम्मीद है. देश की पहली हाई स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की संभावना है और शुरुआती चरण में सूरत-वापी सेक्शन खोले जाने की योजना है। 

भारत में बुलेट ट्रेन का विस्तार, 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी

 नई दिल्ली देश को अगले साल के मध्य में पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस बुलेट ट्रेन के लिए काम कई सालों से जारी है। इस बीच, देश के सात नए बुलेट ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत, दिल्ली से वाराणसी एक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनेगा, जिसमें बुलेट ट्रेन महज दो घंटे में ही दिल्ली से लखनऊ पहुंचा देगी। वहीं, दिल्ली से वाराणसी के लिए महज तीन घंटे 15 मिनट का ही समय लेगा। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और यह हवा से बातें करेगी। मुंबई से अहमदाबाद ( एक घंटे 57 मिनट), मुंबई से पुणे (48 मिनट), बेंगलुरु से चेन्नई (73 मिनट्स), बेंगलुरु से हैदराबाद (2 घंटे 10 मिनट), पुणे से हैदराबाद (2 घंटे 8 मिनट), दिल्ली से लखनऊ (2 घंटे), दिल्ली से वाराणसी (3 घंटे 15 मिनट), दिल्ली से सिलिगुड़ी (6 घंटे) का समय लेगा। इन सात रूट्स पर हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलेगी। दिल्ली से वाराणसी तक लगभग 812 किलोमीटर लंबा रूट होगा। इस पर हाईस्पीड बुलेट ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि संचालन की स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्ण्व ने कहा, ''पीएम मोदी ने सात नए कॉरिडोर का फैसला लिया है। इसके तहत मुंबई से पुणे 170 किलोमीटर के कॉरिडोर पर सफर सिर्फ 48 मिनट में पूरा होगा। अच्छा इकनॉमिक कॉरिडोर बन जाएगा। पुणे से हैदराबाद जोकि 500 किलोमीटर है लगभग, दो घंटे 8 मिनट में पूरा हो जाएगा। महाराष्ट्र में दो लाख करोड़ का निवेश हो रहा है।'' वहीं, लखनऊ से अयोध्या हाईस्पीड रूट की लंबाई 124 किलोमीटर होगी। दिल्ली से वाराणसी रूट पर चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए राज्य में कई शहरों में स्टेशन रखे गए हैं, ताकि आसपास के रहने वाले लोगों को फायदा मिल सके। दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी में स्टेशन का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा। जापान की मदद से बन रही बुलेट ट्रेन बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है। 508 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। यह परियोजना जापान की शिंकान्सेन तकनीक और आर्थिक मदद से बनाई जा रही है। शुरुआत में इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और अन्य मंजूरियों में देरी की वजह से इसमें तय समय से ज्यादा लग गया। वर्तमान में निर्माण तेजी से चल रहा है और अधिकांश भूमि अधिग्रहण तथा वैधानिक मंजूरियां पूरी हो चुकी हैं। अगले साल अगस्त में शुरू हो सकती है बुलेट ट्रेन रेल मंत्रालय के अनुसार, गुजरात में कई हिस्सों पर ट्रैक, स्टेशन और वायाडक्ट का काम तेजी से चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि भारत को 15 अगस्त 2027 को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है। पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक होगा, उसके बाद वापी से सूरत तक का सेक्शन होगा। वहीं, मुंबई तक पूरी लाइन 2028-29 तक चालू किए जाने की संभावना है। पूरी तरह शुरू होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब 2 से 3 घंटे रह जाएगा, जो अभी 6-7 घंटे से अधिक है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान, दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से जुड़ेंगे कई प्रमुख शहर

कोलकाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में बुलेट ट्रेन लाने का वादा किया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठक के दौरान यह जानकारी दी. रेल मंत्री ने बताया कि 42 वर्षों में कोलकाता मेट्रो नेटवर्क का केवल 28 किलोमीटर हिस्सा ही पूरा हो पाया था, जबकि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से 45 किलोमीटर मेट्रो लाइनें जोड़ी गई हैं।  रेल मंत्री ने शनिवार को कहा कि राज्य के लिए बुलेट ट्रेन शुरू करने का फैसला किया गया है. यह ट्रेन दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और पटना होते हुए सिलीगुड़ी को जोड़ेगी. इस सफर में सिर्फ छह घंटे लगेंगे और यह आरामदायक होगा. अगले पांच सालों में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें शुरू की जाएंगी और उम्मीद है कि 'डबल-इंजन' सरकार के तहत पश्चिम बंगाल में रेलवे प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार मिलेगी।  अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'अगले पाँच सालों में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें शुरू की जाएंगी. आज मैंने कोलकाता मेट्रो में सफर किया. हम कोलकाता मेट्रो को नया रूप देंगे.' मंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन सेवाओं का उद्देश्य यात्रा के समय को तेजी से कम करना है. उन्होंने कहा, 'ये हाई-स्पीड कॉरिडोर छह घंटे में सिलीगुड़ी को नई दिल्ली से जोड़ देंगे।  बैठक में शामिल होने के लिए वह शनिवार को  दमदम हवाईअड्डे पर पहुंचे. हवाईअड्डे से निकलने के तुरंत बाद रेल मंत्री मेट्रो में चढ़े और यात्रियों से बातचीत की. उन्होंने ऑटो रिक्शा में भी सवारी की. उनके साथ राज्य के मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय और पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो भी थे।  इसके बाद मुख्यमंत्री और रेल मंत्री ने मीडिया को संबोधित किया और राज्य के लिए कई रेल परियोजनाओं को शुरू करने की घोषणा की. बुलेट ट्रेन के बारे में बात करते हुए रेल मंत्री ने कहा, 'इस पर काम जल्द ही शुरू होगा. रेल परियोजना का रास्ता साफ हो गया है और सभी विधायकों ने सहयोग का भरोसा दिया है.' उन्होंने नए स्टेशनों और अतिरिक्त ट्रेनों को शुरू करने का भी वादा किया. साथ ही, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने केंद्रीय मंत्री से राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र पर ध्यान देने का आग्रह किया।