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सीएम भजनलाल शर्मा ने दी दीपावली की शुभकामनाएं, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना

राजस्थान
दीपावली भारतीय संस्कृति का अनुपम पर्व है। अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक यह महापर्व हमारी सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का परिचायक है। राजस्थान की धरा पर दीपावली का उल्लास विशेष रंगत लिए हुए है। दीपावली पर घरों में बनने वाले मांडने, रंगोली, पारंपरिक सजावट, लोकगीत और बाजारों की रौनक मरुधरा की जीवंत संस्कृति को अभिव्यक्त करते हैं। मेरी मंगलकामना है कि यह पंचदिवसीय दीपोत्सव प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि लेकर आए।

हमारी सनातन संस्कृति की शक्ति उदारता और प्रकृति के प्रति सम्मान में निहित है। अतः हम सभी दीपावली का उत्सव पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के साथ मनाएं। मिट्टी के दीपकों को प्राथमिकता दें, स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों के उत्पाद खरीदें तथा ग्रीन पटाखों का उपयोग कर वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित रखें।

यह पर्व स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का भी अवसर है। 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को अपनाकर स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देना आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में हमारा व्यावहारिक योगदान होगा।

आज देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर दृढ़ता से अग्रसर है। राजस्थान इस संकल्प की पूर्ति में सक्रिय और महत्वपूर्ण भागीदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश की अपार सौर एवं पवन ऊर्जा क्षमता, खनिज संपदा, कृषि सामर्थ्य, पर्यटन की संभावनाएं और मानव संसाधन हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। इनके समुचित उपयोग से राजस्थान देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

हमारा प्रयास है कि गांव और शहर, किसान और श्रमिक, युवा और महिला सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास के समान अवसर मिले। युवाओं को कौशल एवं रोजगार, किसानों को बेहतर सुविधाएं, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना हमारी प्रतिवद्धता है। आइए, इस दीपावली पर हम भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करते हुए अपने परिवारों में संस्कार, समाज में समरसता और शासन में लोक कल्याण की भावना को सुदृढ़ करने का संकल्प लें। दीपावली का यह प्रकाश हर घर में खुशहाली, हर मन में सद्भाव और विकसित राजस्थान से विकसित भारत की यात्रा में नई ऊर्जा का संचार करे।

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हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
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