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शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात का वीडियो वायरल, महाराष्ट्र में नए सियासी समीकरणों की चर्चा तेज

पुणे महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के बीच संभावित सुलह और भविष्य की रणनीति को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी वजह एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार और अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के बीच हुई मुलाकात और बातचीत का एक वीडियो है।  इस वीडियो में शरद पवार प्रफुल्ल पटेल से कहते सुनाई दे रहे हैं कि 10 नवंबर के बाद दोनों बैठकर बातचीत करेंगे. हालांकि, इस मुलाकात का असल एजेंडा क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।  दरअसल, शरद पवार इन दिनों मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज और मेडिकल जांच चल रही है. इसी दौरान अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे. पटेल ने शरद पवार का हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली. दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक मुलाकात हुई।  वायरल हुआ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों नेताओं के बीच बातचीत सुनाई दे रही है. शरद पवार कहते हैं, 'वहां रहना पड़ता है, यह मुझे पता है. लेकिन कब तक रहना है, यह बताइए. उसके बाद हम तय करेंगे.' इस पर प्रफुल्ल पटेल जवाब देते हैं, 'मैं 10 तारीख के बाद मुंबई में रहूंगा. आप बताइए, कब बैठकर चर्चा करनी है. मैं तैयार हूं।  शरद पवार की इस टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. खासकर एनसीपी के दोनों गुटों के बीच संभावित मेल-मिलाप और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि, 10 नवंबर के बाद होने वाली प्रस्तावित मुलाकात का एजेंडा अभी सामने नहीं आया है. इसलिए इस बातचीत को किसी राजनीतिक फैसले या गठबंधन की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।  प्रफुल्ल पटेल ने भी मुलाकात के बाद शरद पवार के साथ राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की बात स्वीकार की थी, लेकिन बातचीत के विस्तृत ब्योरे का खुलासा नहीं किया. उन्होंने कहा था कि वह शरद पवार का हालचाल जानने पहुंचे थे और उनकी तबीयत अच्छी है।  अब सबकी निगाहें 10 नवंबर के बाद होने वाली संभावित मुलाकात पर टिकी हैं. क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत संबंधों के तहत होने वाली मुलाकात होगी या महाराष्ट्र की राजनीति में कोई नया समीकरण आकार लेगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएगा।  पीएम मोदी ने भी की थी बात गौरतलब है कि शरद पवार को खांसी और सांस लेने के दौरान सीने में दर्द की शिकायत के बाद 2 नवंबर को पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया था. वहां से छुट्टी मिलने के एक दिन बाद बुधवार को उन्हें नियमित मेडिकल जांच और आगे के उपचार के लिए मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया।  शरद पवार के अस्पताल में भर्ती होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फोन कर उनका हालचाल जाना था. शरद पवार के करीबी और पारिवारिक मित्र विट्ठल मणियार के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने उनसे आराम करने और अपनी सेहत का ध्यान रखने को कहा था. उन्होंने सुप्रिया सुले और खुद के मिलकर देश संभालने की बात भी कही थी। 

सास को दामाद से हुआ प्यार! पति को छोड़कर फरार हुई महिला, घर में गड़ा सोना भी खोदा

उन्नाव यूपी के उन्नाव से ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर लोग हैरान हैं. यहां अपने बीमार पति को छोड़कर एक महिला अपने दामाद के साथ फरार हो गई. आरोप लगाया गया है कि महिला घर में गड़ी पुश्तैनी ज्वेलरी भी खोदकर ले गई है. अब इस मामले को लेकर बीमार पति और बेटा शिकायत करने एसपी के पास पहुंचा है।  मामला अजगैन थाना क्षेत्र के एक गांव का है. महिला के बेटे ने पुलिस से शिकायत करने के बाद एसपी जय प्रकाश सिंह से मुलाकात की और कार्रवाई की मांग की. परिवार का आरोप है कि महिला ने कुछ समय पहले 10 बिस्वा जमीन अपने नाती के नाम कर दी थी. अब एसपी ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।  बेटे ने शिकायत में कहा कि करीब 15 साल पहले उसकी बहन की शादी सोहरामऊ थाना क्षेत्र में हुई थी. आरोप है कि शादी के बाद उसके पति ने बहन की हत्या कर दी थी. बेटे का कहना है कि बहन की मौत के बाद उसके बच्चे की परवरिश को देखते हुए परिवार ने उस समय केस दर्ज नहीं कराया था. इसके बाद उसकी मां और बहनोई के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. बहनोई का घर आना-जाना शुरू हो गया था।  बेटे के मुताबिक, पिता ने जब इस बात का विरोध किया तो घर में झगड़े होने लगे. परिवार का दावा है कि मां और बहनोई की नजदीकियां बनी रहीं. अब मां उसी बहनोई के साथ घर छोड़कर चली गई है।  घर में जमीन के नीचे दबाकर रखे थे गहने इस मामले में पुश्तैनी ज्वेलरी को लेकर भी बड़ा आरोप लगाया गया है. बेटे और उसके बीमार पिता का कहना है कि घर के अंदर जमीन में एक गड्ढा खोदकर परिवार के पुश्तैनी गहने छिपाकर रखे गए थे. इन गहनों में करीब 2 किलो चांदी और 80 ग्राम सोना था. आरोप है कि महिला जमीन खोदकर ये गहने भी निकाल ले गई. परिवार का कहना है कि इन गहनों की कीमत लाखों रुपये है।  बेटे ने अपनी शिकायत में जमीन को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उसका आरोप है कि 14 सितंबर को उसकी मां ने अपने दामाद के कहने पर पिता की खरीदी हुई 10 बिस्वा जमीन अपने नाती के नाम कर दी. परिवार को इस जमीन के नाम किए जाने की जानकारी बाद में मिली. बेटे का कहना है कि मां ने यह काम चुपचाप किया और पिता को जानकारी नहीं दी।  बीमार पति गांव में चौकीदारी करता था शिकायत में महिला के बेटे ने कहा है कि पिता की तबीयत ठीक नहीं रहती. वह पहले गांव में चौकीदारी का काम करते थे. बेटे का आरोप है कि मां के घर छोड़ने के बाद बीमार पिता अकेले रह गए हैं. परिवार ने पहले अजगैन थाने में शिकायत दी थी. बेटे का कहना है कि वहां से कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए वह एसपी के पास पहुंचा. उसने मां और बहनोई के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है. एसपी जय प्रकाश सिंह ने शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है. अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है। 

राहुल गांधी से मुलाकात के लिए दिल्ली जाएंगे दिग्विजय सिंह, दीपावली तक स्थगित हुई यात्रा

भोपाल  कांग्रेस नेता व मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा रोक दी है। यात्रा से ब्रेक लेकर वे आज दिल्ली जा रहे हैं। शुक्रवार को ​दिग्विजय सिंह राहुल गांधी से मिलेंगे। वे दोपहर में भोपाल से विमान से दिल्ली रवाना होंगे। वहां कार्यक्रमों में शामिल होंगे। दिग्विजय सिंह दिल्ली में ही रात्रि विश्राम करेंगे। दिवाली को देखते हुए उन्होंने "सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा" को 5 दिन के लिए रोका है। "सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा" को कुछ दिनों के लिए रोक दिया गया है। अब यह यात्रा 11 नवंबर से प्रारंभ होगी। दिग्विजय सिंह और यात्रा से संबंधित अन्य लोगों ने सोशल मीडिया में भी इस बात की जानकारी दी। दिग्विजय सिंह शुक्रवार यानि आज दिल्ली जाएंगे। वे वहां राहुल गांधी के आवास पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे। ​दिग्विजय सिंह 6 नवंबर को दोपहर में भोपाल से विमान से दिल्ली जाएंगे और रात को भी वहीं ठहरेंगे। वे वहां अनेक कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। दिवाली महापर्व मनाने के लिए रोकी सत्य सनातन यात्रा "सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा" के ब्रेक के संबंध में सोशल मीडिया में जानकारी देते हुए दिग्विजय सिंह ने लिखा: "सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा" में सहभागी समस्त पदयात्रियों के लिए दिनांक 6 नवंबर से 10 नवंबर तक पांच दिवसीय दीपावली अवकाश रखा गया है, ताकि सभी यात्री अपने परिवारजनों एवं प्रियजनों के बीच रहकर पांच दिवसीय दीपोत्सव हर्षोल्लास के साथ मना सकें। दीपावली अवकाश के उपरांत 11 नवंबर 2026 को राघौगढ़ से पुनः पदयात्रा प्रारंभ होगी, जो श्रीरामराजा सरकार की पावन नगरी ओरछा धाम होते हुए प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या की ओर अग्रसर होगी। इस पावन अवसर पर मैं समस्त सनातन धर्मावलंबियों, पदयात्रियों एवं देशवासियों को दीपावली पर्व की हार्दिक बधाई एवं मंगलमयी शुभकामनाएं देता हूँ। बाबा महाकाल, प्रभु श्रीराम एवं माता लक्ष्मी जी से प्रार्थना है कि सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का प्रकाश बना रहे। दिनांक 6.11.2026 (शुक्रवार) का प्रस्तावित दौरा कार्यक्रम निम्नानुसार रहेगा… 13.15 बजे – भोपाल से दिल्ली के लिए प्रस्थान। (इंडिगो विमान संख्या 6E-5250) 14.50 बजे – दिल्ली आगमन। तत्पश्चात स्थानीय कार्यक्रमों में सहभागिता। रात्रि विश्राम – दिल्ली। बम बम भोले! जय सियाराम!

15 यात्री बसों की जांच में खुली पोल, परिवहन विभाग ने लगाया 1.87 लाख का जुर्माना

ग्वालियर त्योहारी सीजन में यात्रियों से निर्धारित किराए से अधिक वसूली, क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने तथा बिना परमिट और बिना फिटनेस के यात्री वाहन संचालित करने वालों के विरुद्ध परिवहन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देशानुसार क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी विक्रमजीत सिंह कंग के मार्गदर्शन में विभागीय टीम द्वारा 3 से 5 नवंबर तक विभिन्न थाना क्षेत्रों व प्रमुख मार्गों पर यात्री वाहनों की जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों से कुल 1 लाख 87 हजार 400 रुपये का शमन शुल्क वसूला गया तथा एक वाहन जब्त किया गया। 15 यात्री बसों की की गई जांच क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 3 नवंबर को झांसी रोड थाना क्षेत्र में 15 यात्री बसों की जांच की गई। इस दौरान वाहन क्रमांक एमपी 33 पी 1128 बिना फिटनेस और बीमा के तथा क्षमता से अधिक यात्रियों का परिवहन करते पाया गया। वाहन को जब्त किया गया। इसके अलावा एक अन्य वाहन द्वारा परमिट की शर्तों का उल्लंघन किए जाने पर चालानी कार्रवाई कर 10 हजार 500 रुपये का शमन शुल्क वसूला गया। अन्य वाहनों से नियमों के उल्लंघन पर 18 हजार रुपये का शुल्क वसूला गया। इसी क्रम में महाराजपुरा थाना क्षेत्र में यात्री वाहनों की जांच के दौरान 39 हजार रुपये का शमन शुल्क वसूला गया। विक्की फैक्ट्री चौराहे पर 22 यात्री वाहनों की जांच की गई। चालानी कार्रवाई कर 49 हजार रुपये का शमन शुल्क वसूला इस दौरान वाहन क्रमांक एमपी 07 पी 0254 बिना परमिट के यात्रियों का परिवहन करते पाया गया। इस पर चालानी कार्रवाई कर 49 हजार रुपये का शमन शुल्क वसूला गया। इसके अतिरिक्त दो वाहनों में क्षमता से अधिक यात्रियों का परिवहन पाए जाने पर 10 हजार 400 रुपये तथा अन्य वाहनों में मोटरयान अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन पर 50 हजार 500 रुपये का शमन शुल्क वसूला गया।  

पीएम जनमन योजना से बैगा बस्तियों में पहुंची बिजली, बच्चों की पढ़ाई और जीवनशैली में आया बड़ा बदलाव

पीएम जनमन योजना से बैगा बस्तियों में पहुंची बिजली की रोशनी, बच्चों की पढ़ाई से लेकर जीवनशैली तक आया बदलाव ग्राम सनौसी के 26 बैगा परिवारों के घर हुए रोशन ग्राम चंदेला के हितग्राही लालचंद बैगा बोले- अब बच्चे अच्छी तरह पढ़ पा रहे हैं जिले के 61 ग्रामों में विद्युतीकरण पूर्ण 1370 हितग्राहियों को मिले विद्युत कनेक्शन 137 ग्रामों के 1366 हितग्राहियों की कार्ययोजना वरिष्ठ कार्यालय को भेजी भोपाल जिले के दूरस्थ वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के बैगा परिवारों के जीवन में बिजली की रोशनी नई खुशियां लेकर आई है। वर्षों से बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित इन परिवारों के घर अब रोशन हो रहे हैं। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) योजना के माध्यम से सुदूर बैगा बस्तियों तक बिजली पहुंचने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कार्यों और दैनिक जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब बैगा परिवार भी बिजली की रोशनी में दीपावली सहित अन्य त्योहार मना सकेंगे। जिले के ग्राम सनौसी में लगभग 4 लाख 72 हजार रुपये की लागत से विद्युतीकरण कर 26 बैगा परिवारों को लाभान्वित किया गया है, वहीं ग्राम चंदेला के हितग्राही लालचंद बैगा ने बिजली मिलने के बाद बच्चों की पढ़ाई में आए बदलाव को साझा करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्राम सनौसी के 26 बैगा परिवारों के घर हुए रोशन ब्यौहारी जनपद पंचायत के दूरस्थ ग्राम सनौसी का बैगा टोला इसका उदाहरण है। यहां निवासरत बैगा परिवार लंबे समय से बिजली की सुविधा के अभाव में जीवनयापन कर रहे थे। सूर्यास्त होते ही पूरा टोला अंधेरे में डूब जाता था। बच्चों की पढ़ाई मिट्टी के तेल के दीयों की सीमित रोशनी तक सिमटी रहती थी। जंगल से लगे होने के कारण रात के समय सांप, बिच्छू और अन्य जंगली जीव-जंतुओं का भय भी बना रहता था। मोबाइल फोन चार्ज करने जैसी सामान्य सुविधा के लिए भी ग्रामीणों को दूसरे गांवों तक जाना पड़ता था। बैगा परिवारों की इन समस्याओं को दूर करने के लिए पीएम जनमन योजना के अंतर्गत ग्राम सनौसी के बैगा टोले का चयन किया गया। यहां लगभग 4 लाख 72 हजार रुपये की लागत से विद्युतीकरण का कार्य कराया गया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद विद्युत विभाग एवं प्रशासन के समन्वय से विद्युत खंभे स्थापित किए गए, तार बिछाए गए तथा घरों में मीटर और बल्ब लगाए गए। इस कार्य से लगभग 26 बैगा परिवार लाभान्वित हुए हैं। बच्चों की पढ़ाई से लेकर सुरक्षा तक मिला लाभ ग्राम सनौसी में बिजली पहुंचने से बच्चों को शाम और रात के समय भी पढ़ाई करने की सुविधा मिली है। पहले रोशनी के अभाव में सूर्यास्त के बाद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी, लेकिन अब घरों में बिजली के बल्ब की रोशनी में बच्चे आसानी से अध्ययन कर सकेंगे। घरों और आंगनों में रोशनी होने से ग्रामीणों को आवागमन तथा घरेलू कार्यों में भी सुविधा मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग के लिए दूसरे गांवों पर निर्भरता समाप्त होने के साथ ग्रामीण आसानी से अपने परिजन से संपर्क कर सकेंगे। विद्युत सुविधा से छोटे-मोटे घरेलू कार्यों और कुटीर उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं। वहीं कृषि गतिविधियों में बिजली की उपलब्धता से सिंचाई, सब्जी उत्पादन और अन्य सिंचित फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिल सकेगा। इससे परिवारों की आजीविका के अवसर बढ़ाने में सहायता मिलेगी। ग्राम चंदेला के लालचंद बैगा बोले- अब बच्चे अच्छी तरह कर रहे पढ़ाई पीएम जनमन योजना से आए बदलाव का अनुभव ग्राम चंदेला निवासी हितग्राही लालचंद बैगा ने भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले गांव में बिजली नहीं होने के कारण बहुत बड़ी समस्या होती थी। बिजली के अभाव में बच्चे ठीक से लिख-पढ़ नहीं पाते थे। शाम होने के बाद पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता था और परिवारों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लालचंद बैगा बताते हैं कि जब से पीएम जनमन योजना के तहत गांव में बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, तब से परिस्थितियां बदल गई हैं। अब बच्चे घरों में बिजली की रोशनी में अच्छी तरह पढ़ाई कर रहे हैं। पहले जो समस्याएं थीं, वे अब नहीं हैं और सब अच्छे से चल रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति जताया आभार हितग्राही लालचंद बैगा ने प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से उनके गांव तक बिजली की सुविधा पहुंची है। इससे बच्चों की पढ़ाई आसान हुई है और परिवारों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने शासन की इस पहल के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। पीएम जनमन योजना के तहत जिले के 61 ग्रामों में विद्युतीकरण पूर्ण जिले में पीएम जनमन योजना के अंतर्गत बैगा परिवारों तक विद्युत सुविधा पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। विद्युत विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहडोल जिले में पीएम जनमन योजना के तहत 61 ग्रामों में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसके अंतर्गत 1370 हितग्राहियों को विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 137 ग्रामों के 1366 हितग्राहियों की सूची तैयार कर संकलित कार्ययोजना वरिष्ठ कार्यालय को प्रेषित की गई है। इस प्रकार जिले के कुल 191 ग्रामों की कार्ययोजना वरिष्ठ कार्यालय को भेजी गई है। योजना के माध्यम से शेष पात्र बैगा परिवारों तक भी विद्युत सुविधा पहुंचाने के लिए कार्ययोजना के अनुसार आगामी कार्य किए जाएंगे। अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ रहे बैगा परिवार पीएम जनमन योजना के माध्यम से जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बैगा परिवारों तक बिजली पहुंचने से उनके जीवन में सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। ग्राम सनौसी के 26 बैगा परिवारों के घरों में पहुंची बिजली और ग्राम चंदेला के लालचंद बैगा के अनुभव इस बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। अब बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिल रहा है और परिवारों को दैनिक जीवन की परेशानियों से राहत मिल रही है। इन परिवारों के लिए बिजली केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, सुविधा और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद बनकर आई है। … Read more

CM विष्णु देव साय ने कवर्धा के किसान को भेजा दीपावली संदेश, सौर ऊर्जा पहल की सराहना की

कवर्धा के किसान को मुख्यमंत्री ने भेजा दीपावली का संदेश, सौर ऊर्जा की पहल को सराहा मुख्यमंत्री ने किसान ओंकार साहू को भेजी ‘विष्णु के पाती’ सूर्य घर योजना से बिजली बिल शून्य, घर की जरूरत से अधिक बिजली का हो रहा उत्पादन रायपुर,  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की ओर से दीपावली पर मिला आत्मीय संदेश छत्तीसगढ़ के कवर्धा निवासी किसान ओंकार साहू के परिवार के लिए खास बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा अपनाने वाले कवर्धा के रामनगर निवासी ओंकार साहू को मुख्यमंत्री ने ‘विष्णु का पाती’ भेजकर शुभकामनाएं दी हैं। पत्र में मुख्यमंत्री ने खेती-किसानी के साथ सौर ऊर्जा अपनाने की उनकी पहल की सराहना करते हुए इसे आर्थिक आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।            मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीएम सूर्य घर योजना से सौर ऊर्जा का लाभ परिवारों तक पहुंच रहा है। स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग न केवल आर्थिक बचत करता है, बल्कि आसपास के वातावरण को बेहतर बनाने में भी सहायक है। उन्होंने ओंकार साहू के परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की है। सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल किया शून्य              खेती-किसानी से जुड़े छत्तीसगढ़ के कवर्धा निवासी ओंकार साहू ने 28 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर में 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कराया। इसके लिए उन्होंने कुल 1 लाख 90 हजार रुपये खर्च किए, जिसमें उन्हें 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। उन्होंने बताया कि सोलर पैनल लगवाने से पहले उनके घर का हर महीने लगभग 1 हजार से 1500 रुपये तक बिजली बिल आता था, लेकिन अब सोलर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरतें पूरी हो रही हैं और उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। खपत से ज्यादा बिजली बन रही, ग्रिड में भेजकर मिले 9 हजार रुपए              ओंकार साहू ने बताया कि सोलर पैनल से घर की जरूरत से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। उपयोग के बाद बची बिजली विद्युत ग्रिड में भेजी जा रही है। इस अतिरिक्त बिजली के बदले अब तक करीब 9 हजार रुपए का आर्थिक लाभ मिल चुका है। यानी अब वे केवल बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ता नहीं, बल्कि अतिरिक्त बिजली का उत्पादन कर ग्रिड को देने वाले उत्पादक भी बन गए हैं। आर्थिक बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान               ओंकार साहू का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना उनके परिवार के लिए काफी लाभकारी साबित हुई है। पहले जहां हर महीने बिजली बिल के रूप में राशि खर्च करनी पड़ती थी, वहीं अब बिजली बिल शून्य हो गया है। इसके साथ ही अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने से आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा अपनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद होने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जरूरी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का ‘विष्णु का पाती’ मिलना उनके लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है।

भोपाल-मंदसौर से कटनी-सिंगरौली तक बनेंगे 5 नए हाईवे, 1,398 KM सड़क नेटवर्क पर खर्च होंगे ₹63,296 करोड़

भोपाल  प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए सरकार पांच बड़े ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने जा रही है। इन परियोजनाओं पर करीब 63,296 करोड़ रुपये खर्च होंगे और कुल 1,398 किलोमीटर लंबा चार लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड सड़क नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे प्रदेश के प्रमुख शहरों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों के बीच आवागमन तेज और सुगम होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की 49वीं बैठक में इन पांचों परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट (फीजिबिलिटी रिपोर्ट) तैयार करने की अनुमति दी गई। रिपोर्ट में परियोजनाएं उपयुक्त पाए जाने पर इनके विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। बैठक में कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को निगम के टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट देने का फैसला भी लिया गया। इन पांच रूट पर विकसित होंगे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर सरकार जिन पांच कॉरिडोर को विकसित करने की तैयारी कर रही है, उनमें भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, जबलपुर-आशापुर, भोपाल-ग्वालियर और कटनी-सिंगरौली मार्ग शामिल हैं। इनमें भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना और जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर के लिए सलाहकारों के माध्यम से व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वहीं, भोपाल-ग्वालियर और कटनी-सिंगरौली कॉरिडोर के लिए डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों के चयन की निविदा प्रक्रिया जारी है। निर्माणाधीन सड़कों को जल्द पूरा करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में निर्माणाधीन सड़क परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, ग्रामीण विकास, उद्योग और हाउसिंग बोर्ड जैसे विभाग आपसी समन्वय बनाकर सड़क निर्माण से जुड़े संभावित कार्यों पर एक साथ काम करें। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। राजमार्ग निधि का नाम बदलेगा, निगम में नए पद भी बनेंगे बैठक में सड़क विकास निगम से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। निगम की राजमार्ग निधि का नाम बदलकर 'विकसित मध्य प्रदेश संकल्प पथ' करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा जावरा-नयागांव फोरलेन परियोजना में 100 प्रतिशत इक्विटी के विनिवेश को स्वीकृति दी गई। निगम के कामकाज को मजबूत करने के लिए दो मुख्य अभियंता, तीन महाप्रबंधक और पांच उप महाप्रबंधक के नए पद सृजित करने की मंजूरी भी दी गई। साथ ही विधि सहायक का मानदेय बढ़ाने, पीएएम भवन के अधिग्रहण और स्वतंत्र संचालक की नियुक्ति को स्वीकृति मिली। ऋण के माध्यम से उन्नयन की जाने वाली सड़क परियोजनाओं का स्वामित्व सड़क विकास निगम को सौंपने का फैसला भी किया गया। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पांच प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई भोपाल-मंदसौर -258 किलोमीटर सागर-सतना -227 किलोमीटर जबलपुर-आशापुर -358 किलोमीटर भोपाल-ग्वालियर -320 किलोमीटर कटनी-सिंगरौली -235 किलोमीटर  

DRDO का बड़ा मिशन! भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल की रेंज बढ़ाने की तैयारी, चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता

 नई दिल्ली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO भारत की स्वदेशी लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल LR-ASHM की क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है. यह मिसाइल पहले ही करीब 1500 KM की रेंज साबित कर चुकी है. अब DRDO इसे 3500 KM तक ले जाने के लिए एक्सटेंडेड रेंज करने जा रहा है. उत्पादन मंजूरी से पहले 2 से 3 टेस्टिंग की योजना बनाई गई है. सफल होने पर यह मिसाइल 2028-29 तक उत्पादन चरण में प्रवेश कर सकती है।  LR-ASHM एक बूस्ट-ग्लाइड हाइपरसोनिक मिसाइल है. यह शुरू में ठोस ईंधन वाले रॉकेट बूस्टर से तेज गति पकड़ती है और फिर ग्लाइड चरण में वायुमंडल में उड़ान भरती है. इसकी गति 12348 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंचने की रिपोर्ट है जबकि औसत गति 6174 किलोमीटर प्रतिघंटा के आसपास रहती है।  यह स्थिर और चलते हुए दोनों तरह के समुद्री लक्ष्यों को निशाना बना सकती है. इसकी फ्लाइट पाथ में कई मैन्युवर और स्किप शामिल हैं जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए इसे इंटरसेप्ट करना काफी मुश्किल हो जाता है. स्वदेशी सेंसर टर्मिनल चरण में चलते जहाजों को सटीक तरीके से ट्रैक करने में मदद करते हैं।  रेंज बढ़ाने के लिए बड़े हार्डवेयर बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी. मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर अपग्रेड और नई ट्रैजेक्टरी प्रोफाइल से काम चल सकता है. मिसाइल के बूस्टर चरण पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल से लिए गए हैं जो खुद 3500 किलोमीटर तक मार कर सकते हैं. इसलिए मौजूदा डिजाइन में छिपे हुए क्षमता का इस्तेमाल किया जा रहा है।  रणनीतिक महत्व और समुद्री क्षमता 3500 किलोमीटर की रेंज मिलने पर भारत की समुद्री यानी मैरीटाइम डिनायल क्षमता हिंद महासागर क्षेत्र में काफी बढ़ जाएगी. तट से दूर दुश्मन के युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप और अन्य समुद्री ठिकानों को निशाना बनाया जा सकेगा. यह ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों के साथ मिलकर बहुस्तरीय स्ट्राइक क्षमता प्रदान करेगी।  हाइपरसोनिक गति और मैन्युवरेबिलिटी के कारण आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बन जाएगी. DRDO ने इस सिस्टम को थल सेना और वायुसेना को भी प्रस्तावित किया है. ग्राउंड अटैक वेरिएंट विकसित होने पर यह जमीनी लक्ष्यों पर भी लंबी दूरी से हमला कर सकेगी. इससे तीनों सेनाओं के पास एक मजबूत पारंपरिक लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता उपलब्ध होगी।  मिसाइल के पहले परीक्षण 2023 और 2024 में हुए थे जिनमें 1500 किलोमीटर की रेंज पर समुद्री लक्ष्य को भेदने की क्षमता साबित हुई. मई 2026 में भी सफल परीक्षण हुआ. अब एक्सटेंडेड रेंज के लिए नए परीक्षणों की तैयारी है. सफल सत्यापन के बाद उत्पादन मंजूरी मिलेगी. यह स्वदेशी हाइपरसोनिक तकनीक में भारत की प्रगति दिखाता है।  यह विकास भारत की आत्मनिर्भरता और हिंद महासागर में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम है. सफल होने पर LR-ASHM भारत के पारंपरिक स्ट्राइक आर्सेनल का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकती है। 

ग्वालियर के 31 स्कूलों में अब पढ़ाई जाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ICT लैब की कमी बनी चुनौती

 ग्वालियर  प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में एआई असिस्टेंट को व्यावसायिक पाठ्यक्रम में शामिल किया है। साथ ही एक सितंबर से स्कूलों में इसकी पढ़ाई भी शुरू हुई लेकिन अभी छात्रों की रुचि इसमें बहुत कम ही है। लेकिन धीरे-धीरे उनका रुझान एआइ की तरफ बढ़ रहा है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय मुरार में कक्षा नौ से 12वीं के बीच की कुल 39 छात्राएं ही इसे पढ़ रही है। इसी तरह पागनवीसी हायरसेकेंडरी स्कूल में भी 106 छात्र इसे पढ़ रहे है। यही हाल तकरीबन जिले के उन 31 स्कूलों में है, जहां पर एआई असिस्टेंट को व्यावसायिक पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया गया है। इसलिए 31 स्कूलों में ही शुरू हो पाया है एआई असिस्टेंट का पाठ्यक्रम नई शिक्षा नीति के तहत यूं तो सभी सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होने है। इसके तहत हर स्कूल में व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए प्रयोगशाला होना जरूरी है। जहां तक एआई असिस्टेंट पाठ्यक्रम की बात है तो यह केवल उन 31 स्कूलों में ही शुरू हो पाया है, जिनमें आइसीटी यानि इंफोरमेशन टेक्नोलाजी प्रयोगशाला है। साथ ही यहां पर जो आइसीटी इंस्ट्रक्टर नियुक्त किए गए थे, वही इसे पढ़ा रहे है। हालांकि पूरे जिले में 120 से अधिक हाईस्कूल व हायर सेकेण्डरी स्कूल है। इसलिए एक सितंबर से केवल इन्हीं 31 स्कूलों में ही एआइ असिस्टेंट का पाठ्यक्रम शुरू हो पाया है। यह पढ़ाया जाना है एआई असिस्टेंट के तहत छात्रों को कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए यह एआइ व्यावसायिक पाठ्यक्रम मुख्य रूप से पायथन प्रोग्रामिंग, डेटा एनालिसिस और मशीन लर्निंग की बुनियादी समझ पर केंद्रित है। इसे छात्रों को साल में 240 घंटे पढ़ाने का माड्यूल है। इसके तहत छात्रों को कंप्यूटर सिस्टम के मुख्य घटकों की पहचान और आपरेटिंग सिस्टम का बेसिक कान्फ़िगरेशन, पायथन भाषा की मूल अवधारणाएं, कोडिंग स्किल्स, सिंटैक्स, डेटा वेरिएबल्स और कंट्रोल फ्लो, डेटा को प्रोसेस और विश्लेषण करने के लिए पायथन की मुख्य लाइब्रेरीज़ का व्यावहारिक उपयोग। लाइब्रेरी के माध्यम से ग्राफ, चार्ट्स और डेटा को विज़ुअली प्रदर्शित करना, एआई, मशीन लर्निंग मॉडल और डेटा एनोटेशन के शुरुआती सिद्धांतों की समझ को पढ़ाया जाना है।     एआई असिस्टेंट के कोर्स को व्यावसायिक शिक्षा के रूप में शामिल किया गया है और एक सितंबर से जिले के 31 स्कूलों, जिनमें आइसीटी लैब है, वहां पर शुरू किया गया है। हालांकि एआई असिस्टेंट का कोर्स को शुरू हुए कुछ ही दिन हुए है, इसलिए इसमें प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या कम है। लेकिन अगले सत्र से इसमें अधिक छात्र प्रवेश लेंगे। – राजीव सिंह, नोडल अधिकारी, व्यावसायिक शिक्षा  

खील-बताशों के बिना अधूरी मानी जाती है लक्ष्मी पूजा, जानें क्या है धार्मिक मान्यता

 Diwali 2026: दीवाली पर दीयों को रोशनी में और मिठाइयों की रौनक देखते ही बनती है। दीपावली का पर्व मां लक्ष्मी के स्वागत और सुख-समृद्धि की कामना का पर्व होता है। इस दिन लोग घरों में विधि-विधान से माता लक्ष्मी की पूजा गणपति के साथ करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग तरह के भोग लगाते हैं। दीयों की रोशनी में डूबी हुई दीवाली की रात वास्तव में कुछ खास होती है। पूजा की थाली में दीपक, फूल, मिठाई और फल के साथ खील-बताशे भी विशेष रूप से सजाए जाते हैं और माता लक्ष्मी को खील बताशों का भोग लगाया जाता है आपने भी गौर किया होगा कि दिवाली पर खील-बताशे खरीदने और उन्हें पूजा में चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर माता लक्ष्मी की पूजा में खील-बताशे ही क्यों चढ़ाए जाते हैं? आइए आपको बताते हैं इससे जुड़ी कुछ मान्यताओं के बारे में। खीर-बताशे क्या होते हैं? खील और बताशे एक पारंपरिक मिठाई हैं जो सदियों से दीवाली के पर्व का एक अहम हिस्सा हैं। इसमें मुख्य रूप से दो चीजें होती हैं खीर यानी कि धान का लावा और बताशे यानी चीनी से तैयार की गई एक पारंपरिक मिठाई। खील तैयार करने के लिए कच्चे चावल को रेत या नमक में भूना जाता है, जिससे वो फूल जाते हैं और खील का रूप ले लेते हैं। वहीं, बताशे बनाने के लिए चीनी को पानी में तब तक उबाला जाता है जब तक कि वह गाढ़ी न हो जाए, फिर इसे सिक्के के आकार में ढाला जाता है। माता लक्ष्मी को क्यों चढ़ता है खील-बताशे का भोग दीवाली के दौरान, पूजा-पाठ के अहम हिस्से के रूप में माता लक्ष्मी को खील-बताशे का भोग लगाया जाता है। खील को पवित्रता और नई फसल से जोड़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान धान की नई फसल तैयार होती है, इसलिए नई फसल को सम्मान देने और माता लक्ष्मी का आभार दिखाने का एक अच्छा तरीका माना जाता है। वहीं सफेद बताशे पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही, इसे शुक्र ग्रह का प्रतीक भी माना जाता है जो शीतलता और संतुलन बनाए रखने वाली ऊर्जा को भी दिखाते हैं। माता लक्ष्मी को खील-बताशे चढ़ाने का महत्व खील को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, जबकि बताशे मिठास और शुभता को दर्शाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनका भोग लगाने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और धन, समृद्धि तथा सफलता का आशीर्वाद मिलता है। खील यानी धान मुख्य रूप से चावल का ही एक रूप हैं और मुख्य रूप से उत्तर भारत में खाया जाने वाला सबसे प्रमुख अनाज है। वहीं दीवाली के ठीक पहले चावल की फसल तैयार होती है इसी वजह से सबसे पहले खील माता लक्ष्मी को चढ़ाया जाता है। साथ ही, माता लक्ष्मी से धन वैभव और समृद्धि की कामना भी की जाती है। शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने और धन-वैभव पाने के लिए माता लक्ष्मी को खील चढ़ाई जाती है। वास्तव में यह सिर्फ एक परंपरा नहीं है बल्कि माता लक्ष्मी की कृपा पाने का एक तरीका है, जो समृद्धि की देवी का सम्मान व्यक्त करने का एक माध्यम भी है।