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₹4.41 करोड़ की लागत से 100 मीटर लंबा पुल बना, 8 गांवों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर

बोकी-आरा मार्ग पर गिरमा नदी में पुल निर्माण पूर्ण, 8 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ 4.41 करोड़ की लागत से 100 मीटर लंबे पुल का निर्माण हुआ पूरा रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में सड़क, पुल-पुलिया सहित अधोसंरचना विकास के कार्यों को गति मिल रही है। पहाड़ी एवं पठारी भौगोलिक क्षेत्र वाले जशपुर जिले में नदी-नालों पर उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ ही लोगों को वर्षभर आवागमन की सुविधा मिल रही है। इसी क्रम में बोकी-आरा मार्ग पर गिरमा नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। करीब 100 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण पर 4 करोड़ 41 लाख 33 हजार रुपये की लागत आई है। पुल के शुरू होने से क्षेत्र के 8 गांवों के 5 हजार से अधिक ग्रामीणों को बारहमासी आवागमन की सुविधा मिलेगी। बारिश में आवागमन की वर्षों पुरानी समस्या का हुआ समाधान गिरमा नदी पर उच्च स्तरीय पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर बोकी-आरा मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो जाता था। तेज बारिश के दौरान पानी का बहाव बढ़ने से ग्रामीणों को नदी पार करने और मुख्य मार्ग तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इससे विद्यार्थियों, किसानों, मरीजों, व्यापारियों और आम नागरिकों को परेशानी होती थी। अब पुल का निर्माण पूरा होने से बारिश के दौरान भी आवागमन सुगम और सुरक्षित रहेगा तथा लंबे समय से चली आ रही संपर्क बाधित होने की समस्या से ग्रामीणों को राहत मिलेगी। 8 गांवों के 5100 से अधिक ग्रामीणों को सीधा लाभ गिरमा नदी पर पुल बनने से बोकी, बालाछपर, कोरमकेरा, बिरोपानी, रनपुर, सालेकेरा, नारायणपुर और झिलमिली सहित 8 गांवों के 5100 से अधिक ग्रामीण सीधे लाभान्वित होंगे। इन गांवों के लोगों को मुख्य मार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। स्कूल, बाजार, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। किसानों एवं व्यापारियों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ ही समय और परिवहन लागत की बचत होगी। बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। रामरेखा धाम की ओर आवागमन होगा सुगम बोकी-आरा मार्ग पर गिरमा नदी में पुल बनने से झारखंड के प्रसिद्ध रामरेखा धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी आवागमन सुगम होगा। रामरेखा धाम झारखंड के सिमडेगा क्षेत्र में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय आवागमन आसान होगी। उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण को मिल रही गति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में नदी-नालों पर उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। जिले में 22 उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें से 2 पुलों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि अन्य पुलों का निर्माण विभिन्न चरणों में प्रगतिरत है। पुल का निर्माण पूर्ण होने पर क्षेत्रवासियों एवं ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन जोखिमपूर्ण हो जाता था और कई बार संपर्क भी बाधित हो जाता था। अब पुल के निर्माण से वर्षभर आवागमन की सुविधा मिलेगी, जिससे समय की बचत के साथ लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

सर्दियों से पहले चंडीगढ़ की सड़कें होंगी चकाचक, काम शुरू

चंडीगढ़. शहरवासियों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि बारिश में बदहाल हुई सड़काें की हालत अब सुधरने लगी है। नगर निगम ने शहर के कई हिस्सों में सड़क निर्माण और री-कारपेटिंग का काम तेज कर दिया है। सर्दियों से पहले सड़कों को चकाचक करने का टारगेट है। सेक्टर-9 में भी सड़क निर्माण का काम शुरू हो चुका है। यहां सड़क को केवल ऊपर से नई लेयर डालकर तैयार नहीं किया जा रहा, बल्कि कई जगह पुरानी सड़क की परतों को हटाकर सड़क को काफी नीचे तक खोदा जा रहा है। सेक्टर-9 में सड़क की ऊंचाई वर्षों से लगातार बिटुमन की लेयर चढ़ाए जाने के कारण आसपास के घरों की सतह से भी ऊपर हो गई थी। इसका असर बरसात के दौरान देखने को मिला। कई जगह घरों से निकलने वाला बरसाती पानी सड़क की ऊंचाई अधिक होने के कारण आसानी से बाहर नहीं निकल पा रहा था। अब निगम ने पुरानी लेयर को हटाकर सड़क का लेवल नीचे करने के बाद नई सड़क बनाने का काम शुरू किया है। 400 किलोमीटर सड़कें दुरुस्त करने का लक्ष्य नगर निगम ने सर्दियों की शुरुआत से पहले करीब 400 किलोमीटर सड़कों का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अलग-अलग हिस्सों के टेंडर जारी कर ठेकेदारों को काम सौंपा जा चुका है। इंजीनियरिंग विभाग की टीमें मौके पर जाकर काम की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। अधिकारियों का फोकस काम की गुणवत्ता के साथ निर्माण की रफ्तार बढ़ाने पर है, ताकि निर्धारित समय में अधिक से अधिक सड़कों को दुरुस्त किया जा सके। डेढ़ साल से बदहाल थीं शहर की सड़कें चंडीगढ़ की सड़कें पिछले करीब एक से डेढ़ साल से लगातार सवालों के घेरे में रही हैं। शहर की कई सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई स्थानों पर सड़क की खराब हालत के कारण हादसे भी हुए। नियोजित और आधुनिक शहर के रूप में पहचान रखने वाले चंडीगढ़ की सड़कों की बदहाली शहरवासियों के लिए बड़ा मुद्दा बन गई थी। अब बारिश के लंबे दौर के बाद जिस तरह से सड़क निर्माण का काम दोबारा शुरू हुआ है, उससे शहरवासियों को सड़कों की हालत सुधरने की उम्मीद जगी है। निगम की ओर से काम में तेजी लाई गई तो आने वाले महीनों में शहर की सड़कों की तस्वीर बदल सकती है।

सरगुजा संभाग के 6 जिलों में सुधरेगा सड़क नेटवर्क, 44 मुख्य सड़क कार्यों को मिली प्रशासनिक स्वीकृति

सरगुजा संभाग में सड़क अधोसंरचना को मिलेगी ऐतिहासिक मजबूती 6 जिलों में 44 मुख्य सड़क कार्यों के लिए 1,093.73 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सरगुजा संभाग के विकास और सुशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। संभाग के सभी छह जिलों सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और जशपुर में सड़कों के जाल को मजबूत करने के लिए 44 मुख्य सड़क कार्यों हेतु कुल 1,093.73 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के तहत नई सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण, डामरीकरण, सुदृढ़ीकरण, फोरलेन निर्माण और आवश्यक स्थानों पर पुल-पुलिया का निर्माण किया जाएगा। सरगुजा जिला         अम्बिकापुर विधानसभा क्षेत्र में लरंगसाय चौक से रामानुजगंज मार्ग के 5 किमी हिस्से के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 69.10 करोड़ रुपए तथा गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक 5 किमी फोरलेन के लिए 61.34 करोड़ रुपए स्वीकृत। लुण्ड्रा और सीतापुर क्षेत्रों में असकला-दोरना मार्ग, सोनतराई-मैनपाट मार्ग (26.33 करोड़) सहित विभिन्न मार्गों और पुलियों के सुदृढ़ीकरण के कार्य शामिल हैं। सूरजपुर जिला           भटगांव विधानसभा क्षेत्र के तारा-प्रेमनगर-रामानुजनगर-कृष्णपुर 63 किमी मार्ग के लिए 64.93 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा कल्याणपुर-लटोरी मार्ग (40.93 करोड़), विशुनपुर-सूरजपुर-ओड़गी मार्ग (32.24 करोड़) और सूरजपुर के 17 किमी रिंग रोड के मजबूतीकरण (16.39 करोड़) सहित कई अन्य मार्ग संवरेंगे। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला          परसवार से चलगली 18 किमी उन्नयन मार्ग के लिए 38.80 करोड़ रुपए, वाड्रफनगर- जनकपुर-बलंगी मार्ग के लिए 35.32 करोड़ रुपए, तथा कामेश्वरनगर-लुरगी मार्ग के लिए 25.69 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी। जशपुर जिला          लुड़ेग-बागबहार-तपकरा-लवाकेरा 55.80 किमी राज्य मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए 40.32 करोड़ रुपए, पत्थलगांव के पहाड़ी भागों के उन्नयन हेतु 36.85 करोड़ रुपए, और बतौली-बगीचा-चरईडांड मार्ग के लिए 34.44 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। सड़कें बनेंगी विकास की जीवनरेखा          इन व्यापक सड़क परियोजनाओं से केवल आवागमन ही सुगम नहीं होगा, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक और सामाजिक लाभ होंगे। कृषि और व्यापार को गति मिलेगी, किसानों के कृषि उत्पाद आसानी से बाजारों तक पहुंच सकेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। बेहतर होगा स्वास्थ्य और शिक्षा, दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों और मरीजों के लिए स्कूल, कॉलेज व स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से गांवों तक सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं का लाभ त्वरित गति से पहुँचेगा।       1,093.73 करोड़ रुपए की लागत वाली ये 44 परियोजनाएं सरगुजा संभाग के समग्र विकास, निवेश और नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मील का पत्थर साबित होंगी।

वार्ड क्रमांक 15 में सड़क नहीं, कीचड़ से गुजरने को मजबूर वार्डवासी

वार्ड क्रमांक 15 में सड़क नहीं, कीचड़ से गुजरने को मजबूर वार्डवासी कई बार पंचायत में शिकायत और सीएम हेल्पलाइन के बावजूद नहीं हुआ समाधान बिलासपुर  उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलासपुर के वार्ड क्रमांक 15 में सड़क नहीं होने के कारण वार्डवासियों को बरसात के दिनों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे रास्ते पर बारिश का पानी और कीचड़ जमा होने से लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत हो रही है। वार्डवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार ग्राम पंचायत में शिकायत की गई, लेकिन हर बार जल्द सड़क बनवाने का आश्वासन दिया जाता है। समस्या के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की गई, इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण नहीं हो सका है। वार्डवासियों ने बताया कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत एवं संबंधित अधिकारियों से वार्ड क्रमांक 15 में जल्द सड़क निर्माण करवाने की मांग की है।  

DMF से बदली खनन प्रभावित गांवों की तस्वीर, ₹1.81 करोड़ की सड़क ने विकास को दी नई रफ्तार

डीएमएफ से बदली खनन प्रभावित गांवों की तस्वीर, 181 लाख की सड़क ने विकास को दी रफ्तार मुढ़ापार-धतूरा-कोरबी-खम्हरिया मार्ग का 4.40 किमी नवीनीकरण डीएमएफ से 180.93 लाख रुपये की लागत से हुआ निर्माण शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा संबल रायपुर, खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) निधि का प्रभावी उपयोग प्रदेश में बदलाव की नई मिसाल बन रहा है। कोरबा जिले में डीएमएफ से निर्मित मुढ़ापार-धतूरा-कोरबी-खम्हरि या सड़क ने वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या दूर कर हजारों ग्रामीणों के जीवन को आसान बना दिया है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत की सुनियोजित कार्ययोजना के तहत डीएमएफ मद से 180.93 लाख रुपये की लागत से 4.40 किलोमीटर लंबी सड़क का नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया गया। 15 अप्रैल 2026 को निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब क्षेत्र के ग्रामीणों को वर्षभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है। पहले बरसात के दौरान सड़क कीचड़ और जलभराव से भर जाती थी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, मरीजों का उपचार, किसानों की उपज का परिवहन और ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं। अब बेहतर सड़क संपर्क से स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंच आसान होने के साथ किसानों को अपनी उपज समय पर बाजार तक पहुंचाने में भी सुविधा मिल रही है। यह सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं बनी, बल्कि खनन प्रभावित गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास की नई आधारशिला साबित हुई है। बेहतर संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच बढ़ी है, जिससे क्षेत्र में विकास की नई गति दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और डीएमएफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी समस्या के समाधान से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि डीएमएफ निधि का योजनाबद्ध और जनहितकारी उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ट्राईसिटी को बड़ी सौगात! अक्टूबर से मोहाली-अंबाला के बीच घटेगा सफर का समय, बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था

मोहाली ट्राईसिटी क्षेत्र (चंडीगढ़, पंचकूला व मोहाली) के यात्रियों को आने वाले महीनों में यातायात जाम से बड़ी राहत मिलने वाली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर तक मोहाली की आईटी सिटी से अंबाला तक का सफर करीब 30 मिनट कम हो जाएगा। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तहत बनने वाला 30 किलोमीटर लंबा अंबाला-आईटी सिटी खंड लगभग 89 प्रतिशत पूरा हो चुका है और इसके अक्टूबर तक शुरू होने की संभावना है। इसके चालू होने से यात्रियों का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। इससे पहले सितंबर तक मोहाली-सरहिंद कॉरिडोर भी जनता के लिए खोल दिया जाएगा। 27.37 किलोमीटर लंबा यह मार्ग 91 प्रतिशत तैयार हो चुका है और इसके शुरू होने पर यात्रियों का लगभग 30 मिनट का समय बचेगा। इस बीच आईटी सिटी-कुराली सेक्शन पहले ही यातायात के लिए खोल दिया गया है। इस मार्ग के शुरू होने से वाहन चालकों को खरड़ और मोहाली एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले जाम से राहत मिली है तथा लगभग 45 मिनट का समय बच रहा है। बठिंडा मार्ग पर सबसे बड़ी राहत का इंतजार NHAI अधिकारियों के अनुसार 106.92 किलोमीटर लंबे सरहिंद-सेहना विस्तार परियोजना को अभी केंद्रीय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद मोहाली/चंडीगढ़ से बठिंडा तक का सफर करीब 90 मिनट कम हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरे रिंग रोड नेटवर्क का सबसे बड़ा समय बचाने वाला हिस्सा होगा। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास को मिली मंजूरी हाल ही में NHAI ने 1,878.31 करोड़ रुपये की लागत वाले जीरकपुर-पंचकूला बाईपास और 1,463.95 करोड़ रुपये की लागत वाले ग्रीनफील्ड स्पर प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी कर दिए हैं। इससे दोनों परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास बनने के बाद यात्रियों को वर्तमान में एनएच-5 और एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले भारी जाम से राहत मिलेगी तथा सफर का समय 30 से 40 मिनट तक कम हो सकता है। वहीं 10.3 किलोमीटर लंबा नया ग्रीनफील्ड स्पर अंबाला-चंडीगढ़ एक्सप्रेसवे को जीरकपुर बाईपास से जोड़ेगा। यह एक सीधा और सिग्नल-फ्री कॉरिडोर होगा, जिससे अंबाला, दिल्ली, चंडीगढ़, जीरकपुर, पंचकूला, बद्दी और शिमला के बीच आवाजाही अधिक सुगम हो जाएगी। गडकरी ने बताई परियोजना की अहमियत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर ट्राईसिटी रिंग रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के प्रमुख शहरी चौराहों पर यातायात का दबाव कम होगा तथा हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र तक तेज और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा। पूरी रिंग रोड से चार घंटे तक की बचत NHAI के अनुसार पिंजौर बाईपास पहले ही चालू हो चुका है, जबकि पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ खंड के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। कुछ अन्य लिंक अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और व्यवहार्यता अध्ययन के चरण में हैं। अधिकारियों का कहना है कि ट्राईसिटी रिंग रोड का पूरा 244 किलोमीटर का नेटवर्क तैयार होने के बाद विभिन्न मार्गों पर यात्रा समय 30 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे तक कम हो जाएगा। पूरे रिंग रोड का उपयोग करने वाले वाहन चालकों को कुल मिलाकर लगभग चार घंटे की बचत होगी। NHAI का मानना है कि परियोजना पूरी तरह शुरू होने के बाद हजारों वाहन प्रतिदिन चंडीगढ़ शहर के अंदरूनी मार्गों के बजाय रिंग रोड का उपयोग करेंगे, जिससे ट्राईसिटी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था काफी बेहतर हो जाएगी।  

मध्य प्रदेश में बन रहे 6 मेगा कॉरिडोर, जानिए आपके जिले को क्या होगा फायदा

 भोपाल  ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे।   मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश को रफ्तार देने वाले ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर कौन से हैं और इनसे प्रदेश को क्या लाभ होगा: 1. मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई: 450 किमी) मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए इस कॉरिडोर को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा। 2. विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई: 676 किमी) करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा। 3. बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई: 330 किमी) बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 330 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी। 4. अटल प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 299 किमी) चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे। 5. नर्मदा प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 867 किमी) नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर इस पूरी योजना का सबसे लंबा (867 किलोमीटर) हिस्सा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा। 6. मध्यभारत विकासपथ (कुल लंबाई: 746 किमी) यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।  

मध्यप्रदेश में सड़क नेटवर्क को मिलेगी नई मजबूती, मंत्री डॉ. शाह ने PM मोदी का जताया आभार

मध्यप्रदेश में और मजबूत होंगी सड़क संरचनाएं प्रधानमंत्री मोदी का मंत्री डॉ. शाह ने जताया आभार कैबिनेट ने हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को अपग्रेड करने की दी मंजूरी चार हजार करोड़ से अधिक लागत से संवरेगी 233 किमी लंबाई की सड़कें भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने मध्यप्रदेश के निमाड़ – अंचल को महत्वपूर्ण सौंगात दी है। मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड (125.01 किमी) की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को पक्की शोल्डर मानक वाली टू लेन में अपग्रेड करने और देशगांव-जुलवानिया खंड (108.643 किमी) की मौजूदा टू लेन को फोर लेन में चौड़ा करने को हाइब्रिड वार्षिकी मोड पर मंजूरी दे दी है। इस पर 4,415.60 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय कुंवर शाह ने उनके विधानसभा क्षेत्र और निमाड़ – अंचल की सड़कों के उन्नयन के लिये प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में आधारभूत संरचनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही हे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी और देशगांव-जुलवानिया खंड के प्रस्तावित उन्नयन से बेतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों के शहरी क्षेत्रों में मौजूद गंभीर ज्यामितीय खामियों, तिरछे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना के अंतर्गत खरगोन जिले के लिए 16.20 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा, जिससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना मध्यप्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी। उन्नत कॉरिडोर 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 कपड़ा क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 1 औद्योगिक पार्क, 2 सुपर थर्मल पावर प्लांट), 5 सामाजिक केंद्रों (2 आकांक्षी जिले – खंडवा और बडवानी, 3 आदिवासी जिले – बैतूल, खंडवा, खरगोन) और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (2 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे, 1 एमएमएलपी) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।  

गर्मी से राहत लेने निकले लोग, मनाली से चारधाम तक सड़कों पर रेंगती दिखीं गाड़ियां

 मनाली/नैनीताल/चमोली उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. कई शहरों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए लाखों लोग पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग से लेकर उत्तराखंड के नैनीताल, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली और जोशीमठ तक इस समय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है।  पहाड़ों में मौसम सुहावना है, कहीं हल्की बारिश हो रही है तो कहीं बर्फबारी के नजारे देखने को मिल रहे हैं. यही वजह है कि लोग लंबा सफर और घंटों का ट्रैफिक जाम झेलने के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं. हालांकि बढ़ती भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. कई पर्यटन स्थलों पर होटल हाउसफुल हैं, पार्किंग की जगह कम पड़ रही है और सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम लग रहे हैं।  मनाली-रोहतांग मार्ग पर थमी रफ्तार हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग दर्रे में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मई का महीना खत्म होने के बावजूद रोहतांग में बर्फ मौजूद है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। भीड़ का असर सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई किलोमीटर लंबा जाम लगने से लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में करीब 50 किलोमीटर का सफर आसानी से पूरा हो जाता है, लेकिन इन दिनों यही दूरी तय करने में 7 से 8 घंटे लग रहे हैं। कोलकाता से आए पर्यटक एस. मित्रा ने बताया कि रास्ते में कई घंटे जाम में फंसे रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए, क्योंकि कुछ वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते, जिससे जाम और बढ़ जाता है। स्थानीय पर्यटन कारोबारी हीरालाल का कहना है कि पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं। इससे ट्रैफिक प्रभावित होता है और जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है। नैनीताल में पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ उत्तराखंड के नैनीताल में भी इस समय पर्यटकों की भारी भीड़ है। वीकेंड के दौरान शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। माल रोड, स्नो व्यू, केव गार्डन और चिड़ियाघर जैसे स्थानों पर दिनभर चहल-पहल बनी हुई है। नैनी झील में बोटिंग के लिए लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से शाम तक झील के आसपास पर्यटकों की भीड़ बनी रहती है। ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम लोगों को आकर्षित कर रहा है। इसका फायदा स्थानीय कारोबार को भी मिल रहा है। होटल, होमस्टे, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट लगभग पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। होटल व्यवसायियों का कहना है कि लंबे समय बाद पर्यटन कारोबार में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है। हालांकि बढ़ती भीड़ के कारण शहर की सड़कों पर लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है। कई लोगों को शहर में प्रवेश करने और बाहर निकलने में काफी समय लग रहा है। कैंचीधाम में भी बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंचीधाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार भीड़ बढ़ रही है। आने वाले दिनों में स्थापना दिवस कार्यक्रम को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए प्रशासन सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है। चारधाम यात्रा मार्गों पर बढ़ा दबाव चारधाम यात्रा के चलते उत्तराखंड के चमोली जिले में भी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, औली और माणा-नीति घाटी जाने वाले मार्गों पर लंबी वाहन कतारें देखी जा रही हैं। जोशीमठ क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई स्थानों पर 15 से 20 किलोमीटर तक लंबा जाम लग रहा है। लोगों को घंटों तक सड़कों पर इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन ने ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए वन-वे सिस्टम लागू किया है, लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है। बारिश और बर्फबारी भी नहीं रोक पा रही भीड़ ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम लगातार बदल रहा है। कई जगह हल्की बारिश हो रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी बर्फबारी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बद्रीनाथ धाम में लाखों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं हेमकुंड साहिब जाने वाले रास्तों पर भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ दिखाई दे रही है। कई बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से बचने के लिए पहाड़ सबसे बेहतर विकल्प हैं। यही वजह है कि लोग लंबी यात्रा और जाम की परेशानी के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।

खंडवा को मिलेगा विकास का नया रास्ता, एक रोड से जुड़ेंगे 3 बड़े ग्रोथ सेंटर

खंडवा शहर की किस्मत एक बायपास रोड से खुलने की संभावना है। खंडवा-इंदौर रोड के बाद रूधि-देशगांव बायपास मार्ग पर सबसे ज्यादा विकास की संभावनाएं देखी जा रही है। इस रोड पर एक निर्माणाधीन, एक प्रस्तावित और एक पूर्व से चल रहा औद्योगिक सेंटर आ रहा है। जिसके चलते खंडवा-रूधि बायपास नए उद्योग धंधों का हब बनने की कगार पर है। इतना ही नहीं, पिछले तीन साल में इस रोड पर जमीन के भाव भी बेतहाशा बढ़े हैं। 521 करोड़ की लागगत से बन रहा फोरलेन देशगांव से रूधि तक बन रहे फोरलेन रोड की लंबाई 28.68 किमी है और इसकी लागत 521.21 करोड़ की है। भविष्य में यह रोड बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी से बड़ोदरा तक जाएगा। जिसमें मप्र में इसकी लंबाई 105.778 किमी की रहेगी। फिलहाल इस रोड का काम लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रोड में दो बड़े रेल ओवर ब्रिज है, जिनका काम रेलवे के सुपरविजन में चल रहा है। चार माइनर ब्रिज में से तीन पूरी तरह से कंपलिट हो चुके हैं और चौथे माइनर ब्रिज का काम भी अंतिम चरण में है। इस रोड पर 12 अंडर पास ब्रिज भी पूरे हो चुके हैं। इंवेस्टर्स की पहली पसंद बन रहा रूधि-देशगांव बायपास पर कुल 15 गांव स्थित है। पिछले तीन-चार में पंजीयक विभाग का रेकॉर्ड देखा जाए तो सबसे ज्यादा बिल्डर्स, इंवेस्टर्स, उद्योगपतियों सहित कॉलोनी डेवलपर्स ने इस रोड पर ही निवेश किया है। इस रोड पर कई उद्योगपतियों, इंवेस्टर्स द्वारा भविष्य में बड़े होटल्स, मॉल, बिजनेस पार्क तक खोले जाने की योजनाएं है। यहां जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए पंजीयक विभाग भी इस रोड पर सिंचित और असिंचित जमीनों के भाव एक समान कर चुका है। दो साल में यहां जमीन के भाव करीब 120 प्रतिशत तक बढ़े हैं। रूधि औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगी ग्रोथ इस रोड पर इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर देशगांव दो नेशनल हाईवे का सेंटर बन रहा है। यहां जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र द्वारा एक लॉजिस्टिक हब प्रस्तावित है। एक कॉलोनाइजर भी यहां बिजनेस पार्क डेवलप करने वाले है। इस मार्ग पर खंडवा के पास सुरगांव निपानी ग्रोथ सेंटर का काम तेजी से चल रहा है, जो इस साल के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इंदौर-महाराष्ट्र से सीधी कनेक्टिविटी के चलते ग्रोथ सेंटर में कई उद्योग आने को तैयार है। वहीं, रूधि ग्रोथ सेंटर जो कई वर्षों से खाली पड़ा है, उसे भी ग्रोथ मिलने की पूरी संभावना है। महाराष्ट्र, गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी एनएचएआइ द्वारा नागपुर-बड़ोदरा मार्ग का काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें सबसे मुख्य रूधि-देशगांव बायपास है। बड़ोदरा-बैतूल हाईवे पर भी पांच चरण में से दो का काम चल रहा है। बैतूल से ये रोड आगे महाराष्ट्र के नागपुर से जुड़ रहा है। बैतूल के हैवारखेड़ी से जुलवानिया (बड़वानी) तक सात चरणों में 286 किमी की रोड बनेगी। इसमें खंडवा जिले अंतर्गत इस मार्ग के पहले चरण का काम रूधि-देशगांव बायपास के रूप में चल रहा है। दिसंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य देशगांव-रूधि फोरलेन हाईवे का काम 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यह रोड महाराष्ट्र और गुजरात के साथ इंदौर-इच्छापुर-एदलाबाद से जुडऩे पर दक्षिण और उत्तर भारत से भी सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। भविष्य में इस मार्ग पर विकास की अपार संभावनाएं हैं। आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ