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ट्राईसिटी को बड़ी सौगात! अक्टूबर से मोहाली-अंबाला के बीच घटेगा सफर का समय, बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था

मोहाली ट्राईसिटी क्षेत्र (चंडीगढ़, पंचकूला व मोहाली) के यात्रियों को आने वाले महीनों में यातायात जाम से बड़ी राहत मिलने वाली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर तक मोहाली की आईटी सिटी से अंबाला तक का सफर करीब 30 मिनट कम हो जाएगा। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तहत बनने वाला 30 किलोमीटर लंबा अंबाला-आईटी सिटी खंड लगभग 89 प्रतिशत पूरा हो चुका है और इसके अक्टूबर तक शुरू होने की संभावना है। इसके चालू होने से यात्रियों का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। इससे पहले सितंबर तक मोहाली-सरहिंद कॉरिडोर भी जनता के लिए खोल दिया जाएगा। 27.37 किलोमीटर लंबा यह मार्ग 91 प्रतिशत तैयार हो चुका है और इसके शुरू होने पर यात्रियों का लगभग 30 मिनट का समय बचेगा। इस बीच आईटी सिटी-कुराली सेक्शन पहले ही यातायात के लिए खोल दिया गया है। इस मार्ग के शुरू होने से वाहन चालकों को खरड़ और मोहाली एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले जाम से राहत मिली है तथा लगभग 45 मिनट का समय बच रहा है। बठिंडा मार्ग पर सबसे बड़ी राहत का इंतजार NHAI अधिकारियों के अनुसार 106.92 किलोमीटर लंबे सरहिंद-सेहना विस्तार परियोजना को अभी केंद्रीय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद मोहाली/चंडीगढ़ से बठिंडा तक का सफर करीब 90 मिनट कम हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरे रिंग रोड नेटवर्क का सबसे बड़ा समय बचाने वाला हिस्सा होगा। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास को मिली मंजूरी हाल ही में NHAI ने 1,878.31 करोड़ रुपये की लागत वाले जीरकपुर-पंचकूला बाईपास और 1,463.95 करोड़ रुपये की लागत वाले ग्रीनफील्ड स्पर प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी कर दिए हैं। इससे दोनों परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास बनने के बाद यात्रियों को वर्तमान में एनएच-5 और एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले भारी जाम से राहत मिलेगी तथा सफर का समय 30 से 40 मिनट तक कम हो सकता है। वहीं 10.3 किलोमीटर लंबा नया ग्रीनफील्ड स्पर अंबाला-चंडीगढ़ एक्सप्रेसवे को जीरकपुर बाईपास से जोड़ेगा। यह एक सीधा और सिग्नल-फ्री कॉरिडोर होगा, जिससे अंबाला, दिल्ली, चंडीगढ़, जीरकपुर, पंचकूला, बद्दी और शिमला के बीच आवाजाही अधिक सुगम हो जाएगी। गडकरी ने बताई परियोजना की अहमियत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर ट्राईसिटी रिंग रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के प्रमुख शहरी चौराहों पर यातायात का दबाव कम होगा तथा हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र तक तेज और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा। पूरी रिंग रोड से चार घंटे तक की बचत NHAI के अनुसार पिंजौर बाईपास पहले ही चालू हो चुका है, जबकि पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ खंड के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। कुछ अन्य लिंक अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और व्यवहार्यता अध्ययन के चरण में हैं। अधिकारियों का कहना है कि ट्राईसिटी रिंग रोड का पूरा 244 किलोमीटर का नेटवर्क तैयार होने के बाद विभिन्न मार्गों पर यात्रा समय 30 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे तक कम हो जाएगा। पूरे रिंग रोड का उपयोग करने वाले वाहन चालकों को कुल मिलाकर लगभग चार घंटे की बचत होगी। NHAI का मानना है कि परियोजना पूरी तरह शुरू होने के बाद हजारों वाहन प्रतिदिन चंडीगढ़ शहर के अंदरूनी मार्गों के बजाय रिंग रोड का उपयोग करेंगे, जिससे ट्राईसिटी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था काफी बेहतर हो जाएगी।  

मध्य प्रदेश में बन रहे 6 मेगा कॉरिडोर, जानिए आपके जिले को क्या होगा फायदा

 भोपाल  ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे।   मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश को रफ्तार देने वाले ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर कौन से हैं और इनसे प्रदेश को क्या लाभ होगा: 1. मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई: 450 किमी) मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए इस कॉरिडोर को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा। 2. विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई: 676 किमी) करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा। 3. बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई: 330 किमी) बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 330 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी। 4. अटल प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 299 किमी) चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे। 5. नर्मदा प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 867 किमी) नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर इस पूरी योजना का सबसे लंबा (867 किलोमीटर) हिस्सा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा। 6. मध्यभारत विकासपथ (कुल लंबाई: 746 किमी) यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।  

मध्यप्रदेश में सड़क नेटवर्क को मिलेगी नई मजबूती, मंत्री डॉ. शाह ने PM मोदी का जताया आभार

मध्यप्रदेश में और मजबूत होंगी सड़क संरचनाएं प्रधानमंत्री मोदी का मंत्री डॉ. शाह ने जताया आभार कैबिनेट ने हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को अपग्रेड करने की दी मंजूरी चार हजार करोड़ से अधिक लागत से संवरेगी 233 किमी लंबाई की सड़कें भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने मध्यप्रदेश के निमाड़ – अंचल को महत्वपूर्ण सौंगात दी है। मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड (125.01 किमी) की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को पक्की शोल्डर मानक वाली टू लेन में अपग्रेड करने और देशगांव-जुलवानिया खंड (108.643 किमी) की मौजूदा टू लेन को फोर लेन में चौड़ा करने को हाइब्रिड वार्षिकी मोड पर मंजूरी दे दी है। इस पर 4,415.60 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय कुंवर शाह ने उनके विधानसभा क्षेत्र और निमाड़ – अंचल की सड़कों के उन्नयन के लिये प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में आधारभूत संरचनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही हे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी और देशगांव-जुलवानिया खंड के प्रस्तावित उन्नयन से बेतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों के शहरी क्षेत्रों में मौजूद गंभीर ज्यामितीय खामियों, तिरछे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना के अंतर्गत खरगोन जिले के लिए 16.20 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा, जिससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना मध्यप्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी। उन्नत कॉरिडोर 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 कपड़ा क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 1 औद्योगिक पार्क, 2 सुपर थर्मल पावर प्लांट), 5 सामाजिक केंद्रों (2 आकांक्षी जिले – खंडवा और बडवानी, 3 आदिवासी जिले – बैतूल, खंडवा, खरगोन) और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (2 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे, 1 एमएमएलपी) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।  

गर्मी से राहत लेने निकले लोग, मनाली से चारधाम तक सड़कों पर रेंगती दिखीं गाड़ियां

 मनाली/नैनीताल/चमोली उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. कई शहरों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए लाखों लोग पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग से लेकर उत्तराखंड के नैनीताल, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली और जोशीमठ तक इस समय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है।  पहाड़ों में मौसम सुहावना है, कहीं हल्की बारिश हो रही है तो कहीं बर्फबारी के नजारे देखने को मिल रहे हैं. यही वजह है कि लोग लंबा सफर और घंटों का ट्रैफिक जाम झेलने के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं. हालांकि बढ़ती भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. कई पर्यटन स्थलों पर होटल हाउसफुल हैं, पार्किंग की जगह कम पड़ रही है और सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम लग रहे हैं।  मनाली-रोहतांग मार्ग पर थमी रफ्तार हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग दर्रे में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मई का महीना खत्म होने के बावजूद रोहतांग में बर्फ मौजूद है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। भीड़ का असर सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई किलोमीटर लंबा जाम लगने से लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में करीब 50 किलोमीटर का सफर आसानी से पूरा हो जाता है, लेकिन इन दिनों यही दूरी तय करने में 7 से 8 घंटे लग रहे हैं। कोलकाता से आए पर्यटक एस. मित्रा ने बताया कि रास्ते में कई घंटे जाम में फंसे रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए, क्योंकि कुछ वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते, जिससे जाम और बढ़ जाता है। स्थानीय पर्यटन कारोबारी हीरालाल का कहना है कि पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं। इससे ट्रैफिक प्रभावित होता है और जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है। नैनीताल में पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ उत्तराखंड के नैनीताल में भी इस समय पर्यटकों की भारी भीड़ है। वीकेंड के दौरान शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। माल रोड, स्नो व्यू, केव गार्डन और चिड़ियाघर जैसे स्थानों पर दिनभर चहल-पहल बनी हुई है। नैनी झील में बोटिंग के लिए लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से शाम तक झील के आसपास पर्यटकों की भीड़ बनी रहती है। ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम लोगों को आकर्षित कर रहा है। इसका फायदा स्थानीय कारोबार को भी मिल रहा है। होटल, होमस्टे, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट लगभग पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। होटल व्यवसायियों का कहना है कि लंबे समय बाद पर्यटन कारोबार में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है। हालांकि बढ़ती भीड़ के कारण शहर की सड़कों पर लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है। कई लोगों को शहर में प्रवेश करने और बाहर निकलने में काफी समय लग रहा है। कैंचीधाम में भी बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंचीधाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार भीड़ बढ़ रही है। आने वाले दिनों में स्थापना दिवस कार्यक्रम को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए प्रशासन सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है। चारधाम यात्रा मार्गों पर बढ़ा दबाव चारधाम यात्रा के चलते उत्तराखंड के चमोली जिले में भी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, औली और माणा-नीति घाटी जाने वाले मार्गों पर लंबी वाहन कतारें देखी जा रही हैं। जोशीमठ क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई स्थानों पर 15 से 20 किलोमीटर तक लंबा जाम लग रहा है। लोगों को घंटों तक सड़कों पर इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन ने ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए वन-वे सिस्टम लागू किया है, लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है। बारिश और बर्फबारी भी नहीं रोक पा रही भीड़ ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम लगातार बदल रहा है। कई जगह हल्की बारिश हो रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी बर्फबारी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बद्रीनाथ धाम में लाखों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं हेमकुंड साहिब जाने वाले रास्तों पर भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ दिखाई दे रही है। कई बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से बचने के लिए पहाड़ सबसे बेहतर विकल्प हैं। यही वजह है कि लोग लंबी यात्रा और जाम की परेशानी के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।

खंडवा को मिलेगा विकास का नया रास्ता, एक रोड से जुड़ेंगे 3 बड़े ग्रोथ सेंटर

खंडवा शहर की किस्मत एक बायपास रोड से खुलने की संभावना है। खंडवा-इंदौर रोड के बाद रूधि-देशगांव बायपास मार्ग पर सबसे ज्यादा विकास की संभावनाएं देखी जा रही है। इस रोड पर एक निर्माणाधीन, एक प्रस्तावित और एक पूर्व से चल रहा औद्योगिक सेंटर आ रहा है। जिसके चलते खंडवा-रूधि बायपास नए उद्योग धंधों का हब बनने की कगार पर है। इतना ही नहीं, पिछले तीन साल में इस रोड पर जमीन के भाव भी बेतहाशा बढ़े हैं। 521 करोड़ की लागगत से बन रहा फोरलेन देशगांव से रूधि तक बन रहे फोरलेन रोड की लंबाई 28.68 किमी है और इसकी लागत 521.21 करोड़ की है। भविष्य में यह रोड बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी से बड़ोदरा तक जाएगा। जिसमें मप्र में इसकी लंबाई 105.778 किमी की रहेगी। फिलहाल इस रोड का काम लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रोड में दो बड़े रेल ओवर ब्रिज है, जिनका काम रेलवे के सुपरविजन में चल रहा है। चार माइनर ब्रिज में से तीन पूरी तरह से कंपलिट हो चुके हैं और चौथे माइनर ब्रिज का काम भी अंतिम चरण में है। इस रोड पर 12 अंडर पास ब्रिज भी पूरे हो चुके हैं। इंवेस्टर्स की पहली पसंद बन रहा रूधि-देशगांव बायपास पर कुल 15 गांव स्थित है। पिछले तीन-चार में पंजीयक विभाग का रेकॉर्ड देखा जाए तो सबसे ज्यादा बिल्डर्स, इंवेस्टर्स, उद्योगपतियों सहित कॉलोनी डेवलपर्स ने इस रोड पर ही निवेश किया है। इस रोड पर कई उद्योगपतियों, इंवेस्टर्स द्वारा भविष्य में बड़े होटल्स, मॉल, बिजनेस पार्क तक खोले जाने की योजनाएं है। यहां जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए पंजीयक विभाग भी इस रोड पर सिंचित और असिंचित जमीनों के भाव एक समान कर चुका है। दो साल में यहां जमीन के भाव करीब 120 प्रतिशत तक बढ़े हैं। रूधि औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगी ग्रोथ इस रोड पर इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर देशगांव दो नेशनल हाईवे का सेंटर बन रहा है। यहां जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र द्वारा एक लॉजिस्टिक हब प्रस्तावित है। एक कॉलोनाइजर भी यहां बिजनेस पार्क डेवलप करने वाले है। इस मार्ग पर खंडवा के पास सुरगांव निपानी ग्रोथ सेंटर का काम तेजी से चल रहा है, जो इस साल के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इंदौर-महाराष्ट्र से सीधी कनेक्टिविटी के चलते ग्रोथ सेंटर में कई उद्योग आने को तैयार है। वहीं, रूधि ग्रोथ सेंटर जो कई वर्षों से खाली पड़ा है, उसे भी ग्रोथ मिलने की पूरी संभावना है। महाराष्ट्र, गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी एनएचएआइ द्वारा नागपुर-बड़ोदरा मार्ग का काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें सबसे मुख्य रूधि-देशगांव बायपास है। बड़ोदरा-बैतूल हाईवे पर भी पांच चरण में से दो का काम चल रहा है। बैतूल से ये रोड आगे महाराष्ट्र के नागपुर से जुड़ रहा है। बैतूल के हैवारखेड़ी से जुलवानिया (बड़वानी) तक सात चरणों में 286 किमी की रोड बनेगी। इसमें खंडवा जिले अंतर्गत इस मार्ग के पहले चरण का काम रूधि-देशगांव बायपास के रूप में चल रहा है। दिसंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य देशगांव-रूधि फोरलेन हाईवे का काम 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यह रोड महाराष्ट्र और गुजरात के साथ इंदौर-इच्छापुर-एदलाबाद से जुडऩे पर दक्षिण और उत्तर भारत से भी सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। भविष्य में इस मार्ग पर विकास की अपार संभावनाएं हैं। आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

बस्तर के विकास कार्यों में तेजी लाने की तैयारी, सड़क-पुल परियोजनाओं पर हुई अहम बैठक

बस्तर में सड़कों और पुलों के काम में आएगी तेजी, लोक निर्माण विभाग के सचिव ने अधिकारियों व ठेकेदारों की ली बैठक  प्रगतिरत कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के दिए निर्देश कहा ठेकेदारों को हर महीने करें भुगतान, गुणवत्ता सुनिश्चित करने कार्यों का बारीकी से निरीक्षण भी करें  रायपुर  लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज कोंडागांव में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक लेकर बीजापुर, दंतेवाड़ा और कोंडागांव में सड़कों और पुलों के निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने इन कार्यों में तेजी लाते हुए दी गई समय-सीमा में काम पूरा करने को कहा। उन्होंने बरसात में सड़क संपर्क से कट जाने वाले गांवों के लिए बारहमासी सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए प्राथमिकता से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने के निर्देश दिए। कोंडागांव की कलेक्टर सुनुपुर राशि पन्ना, वन मंडलाधिकारी श्रीमती दिव्या गौतम, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, मुख्य अभियंता भी एम.एल. उरांव और ज्ञानेश्वर कश्यप तथा अधीक्षण अभियंता संजय सूर्यवंशी सहित तीनों जिलों के कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी और उप अभियंता भी बैठक में मौजूद थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने तीनों जिलों के विभागीय अधिकारियों को किसी भी ठेकेदार का भुगतान लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर हर महीने भुगतान करने को कहा। बंसल ने ठेकेदारों से कार्यस्थलों पर आ रही समस्याओं की जानकारी अधिकारियों से साझा करने को कहा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इन समस्याओं का त्वरित समाधान कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रगतिरत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश ठेकेदारों को दिए। विभागीय सचिव ने बैठक में लोगों की जरूरतों और उपयोगिता के आधार पर नई सड़कों और पुलों के निर्माण के प्रस्ताव प्राथमिकता से भेजने के निर्देश दिए। बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद दूरस्थ और पहुंच विहीन गांवों में सड़कों व पुल-पुलियों के निर्माण तेजी से होने चाहिए। उन्होंने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में शामिल द्रुतगामी सड़कों के निर्माण के लिए 15 अगस्त तक इस्टीमेट भेजने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने सभी अधिकारियों को भवन, सड़क एवं पुल के कार्यों और उनकी प्रगति की पूरी जानकारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए भवनों में अच्छी गुणवत्ता के खिड़की, दरवाजे, टाइल्स, सेनेटरी, नल और पेंट्स का उपयोग करने को कहा। उन्होंने केशकाल घाटी बायपास सड़क के कार्यों में तेजी लाने वन मंडलाधिकारी को जल्द से जल्द पेड़ों की कटाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  बंसल ने काम में ढिलाई बरतने वाले तथा गुणवत्ताहीन काम करने वाले ठेकेदारों के प्रति सख्ती करने को कहा। उन्होंने ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने, डिग्रेड करने तथा टर्मिनेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने मुख्यालयों में रहने, फील्ड का नियमित दौरा कर कार्यों का बारीकी से निरीक्षण करने तथा न्यायालयीन प्रकरणों में समय पर शासन का जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने सर्किट हाउसों और विश्राम गृहों का अच्छा रखरखाव सुनिश्चित करने भी कहा। निर्माणाधीन खड़कघाट पुल के कार्यों का किया निरीक्षण लोक निर्माण विभाग के सचिव बंसल ने कोंडागांव में बैठक के बाद जगदलपुर में इंद्रावती नदी पर बन रहे खड़कघाट पुल के कार्यों का निरीक्षण किया। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर 44 करोड़ से अधिक की लागत से इस उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है। बंसल ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और ठेकेदार को पुल का काम पूर्ण गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरा करने को कहा। उन्होंने कार्यस्थल पर मशीनरी और मेन-पॉवर बढ़ाते हुए कार्यों में तेजी लाने को कहा।

राजधानी भोपाल में बड़े बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी, हजारों पेड़ों की कटाई पर बढ़ी चिंता

भोपाल  भोपाल शहर में अभी अरेरा हिल्स की 45 साल पुरानी हरियाली में से 2000 पेड़ों को हटाने का मामला अभी ही रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी 45 हेक्टेयर वनक्षेत्र में से 3200 बड़े व दस हजार छोटे झाड़-झाड़ियों को खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है। पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट में ये हरियाली खत्म करने की पटकथा लिख दी गई है। हालांकि इसके विरोध में आवाजें उठी और सरकार के पास 40 शिकायतें पहुंच गई है। स्थानीय लोगों का दबाव भी है और अब फिर डिजाइन बदलने पर विचार शुरू हो गया है। खासतौर पर समसगढ़ और इससे लगे क्षेत्र में वन व कैचमेंट को बचाने आवाज तेज हुई है। भानपुर केकड़िया से फंदा कलां तक कटेंगे पेड़ जबलपुर राजमार्ग स्थित भानपुर पश्चिम बायपास चार लेन पेव्हड शोल्डर प्रोजेक्ट है। भोपाल केकडिया से शुरू होकर भोपाल देवास मार्ग स्टेट हाईवे 28 के फंदा कलां पर जुड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग 45 व 46 से आंकर इंदौर की ओर जाने वाले भारी वाहन शहरी क्षेत्र में प्रवेश किए बिना आवागमन कर सकेंगे। इसकी लंबाई 35.611 किमी. प्रस्तावित है। बायपास एक लेन पांच किमी लंबाई में वनक्षेत्र है। यहां सात स्थानों पर 610 मीटर लंबाई में वायडक्ट बनाया जाएगा, ताकि वन्यजीव ट्रैफिक से उलझे बिना निकल जाएं। वनक्षेत्र मार्ग निर्माण में 45 हेक्टेयर भूमि के साथ 3200 पेड़ प्रभावित होंगे। ऐसे समझें ग्रामवार जमीन व पेड़ -हेक्टयर निजी भूमि जबकि 7.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। भू अर्जन में चार भवन व 35 पेड़ प्रभावित होंगे। -भानपुर केकड़िया में 8.45 हेक्टेयर निजी व 8.38 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। -झागरिया खुर्द में 19.30 हेक्टेयर निजी जबकि 2.11 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित होगी। यहां आठ भवन व 40 पेड़ हटेंगे। -फंदा कलां में बड़ा तालाब वेटलैंड में पानी पहुंचाने वाले नाले हैं। यहां नालों पर ब्रिज व कल्वर्ट बनाना प्रस्तावित । -फंदाखुर्द में 1.75 हेक्टेयर निजी भूमि व 0.20 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां 20 पेड़ प्रभावित होंगे। -सरवर में 2.04 हेक्टेयर निजी व 0.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां एक भवन हटेगा। -समसपुरा में 7.02 हेक्टेयर निजी भूमि व 3.43 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां तीन भवन व 54 पेड़ हटेंगे। -पिपलिया धाकड़ में 6.62 हेक्टेयर निजी भूमि व 1.01 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित होगी। एक भवन व 23 पेड़ हटेंगे। -थुआखेड़ा में 12.1284 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। -नरेला में 12.89 हेक्टेयर निजी व 0.65 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। दो भवन व 150 पेड़ हटेंगे। -मूंडला में 12.40 हेक्टेयर निजी व 0.75 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। दो भवन व 70 पेड़ हटेंगे। -आंवला में 15.28 हेक्टेयर निजी व 0.34 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। चार भवन व 50 पेड़ हटेंगे। -हताईखेड़ी में 3.85 हेक्टेयर निजी व 0.22 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। 50 पेड़ हटेंगे। -जाटखेड़ी में 7.72 निजी व 0.91 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। पश्चिम बायपास में वन व कैचमेंट का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा। पहले की डिजाइन में कम था। इसे पूरी तरह से वन व कैचमेंट से दूर करना चाहिए। हमने शिकायतें की है। मामले में कोर्ट में भी ले जाएंगे। – राशीदनूर खान, पर्यावरण एक्टिविस्ट  

LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य बना छत्तीसगढ़, आमजन और उद्योगों दोनों को मिलेगा लाभ

बेहतर सड़क, तेज़ परिवहन और बढ़ते रोजगार से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य बना छत्तीसगढ़, आमजन और उद्योगों दोनों को मिलेगा लाभ सुशासन, मजबूत कनेक्टिविटी और जनहितकारी योजनाओं का दिख रहा सकारात्मक असर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर छत्तीसगढ़ ने विकास और सुशासन की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी LEADS 2025 रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य का दर्जा मिला है। यह उपलब्धि राज्य में बेहतर सड़क, परिवहन, व्यापार सुविधा और मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के कारण मिली है, जिसका सीधा लाभ आम जनता, किसानों, व्यापारियों और युवाओं को मिल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल उद्योगों का विकास नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है। बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था से किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंच रही है, व्यापार को गति मिल रही है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और तेज़ निर्णय प्रक्रिया के कारण निवेश बढ़ रहा है। राज्य सरकार गांव से शहर तक कनेक्टिविटी मजबूत करने, वेयरहाउसिंग सुविधाएं बढ़ाने और उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने पर लगातार काम कर रही है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य में लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। इससे उद्योगों को सुविधा मिलने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों, किसानों और स्थानीय उद्यमियों को भी लाभ मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई लॉजिस्टिक्स नीति 2025 के तहत परिवहन लागत कम करने, माल परिवहन को तेज़ बनाने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र को उद्योग का दर्जा दिए जाने से रोजगार और निवेश की नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं। रायपुर के लिए तैयार किए गए सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान से शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और माल परिवहन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। वहीं OneClick Single Window Portal के माध्यम से उद्योगों को अनुमति प्रक्रिया आसान बनाई गई है, जिससे निवेशकों को तेजी से सुविधाएं मिल रही हैं। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से आधुनिक और तकनीक-सक्षम लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित कर रहा है। इससे प्रदेश में व्यापार, उद्योग और रोजगार को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के उभरते औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में नई पहचान दिला रही है। कुल मिलाकर LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य के रूप में मिली यह पहचान केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में तेज़ी से विकसित हो रही अधोसंरचना, सुशासन और जनहितकारी विकास मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति है। बेहतर सड़क, मजबूत परिवहन व्यवस्था, बढ़ते निवेश और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ अब आमजन की सुविधाओं और आर्थिक समृद्धि को केंद्र में रखकर विकास की नई दिशा तय कर रहा है।

ब्यावरा में 21 मीटर चौड़ी फोरलेन सड़क का निर्माण, खाटू श्याम मंदिर पहुंचना होगा आसान

ब्यावरा  नेशनल हाईवे का संगम कहे जाने वाले ब्यावरा शहर को अब नई रफ्तार मिलने जा रही है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और हादसों के चलते अब आधुनिक ग्रेड सेपरेटेड फोरलेन बायपास बनने जा रहा है, जो न सिर्फ ट्रैफिक को व्यवस्थित करेगा बल्कि सुरक्षित सफर भी संभव बनाएंगा। करीब 66 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले उक्त प्रोजेक्ट का काम भी शुरू हो चुका है। खास बात यह है कि इस बार पुराने अनुभवों से सीख लेकर डिजाइन तैयार किया गया है, ताकि हाईवे और लोकल ट्रैफिक पूरी तरह अलग रह सके। बायपास पर हाईवे का ट्रैफिक पूरी तरह सेपरेट रहेगा, यानी फोरलेन बायपास में एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। वहीं लोकल के ट्रैफिक के लिए दोनों तरफ सर्विस रोड बनेगा। जिससे आए दिन होने वाले सड़क हादसों से राहत मिलेगी।  दो हिस्सों में काम, मार्च-2027 डेडलाइन उक्त प्रोजेक्ट को अक्टूबर-2025 में स्वीकृति मिली। जिसकी शुरूआत में लागत 96 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में 66.37 करोड़ रुपए हो गई। प्रोजेक्ट का काम अब शुरू हो चुका है। दो हिस्सो में इसका काम होना है। जिसमें पहला हिस्सा खाटू श्याम मंदिर से गुना बायपास और दूसरा हिस्सा, राजगढ़ बायपास से भोपाल बायपास शामिल है। जिसकी कुल लंबाई करीब करीब 3.5 किमी है। डेढ़ साल में इसका काम पूरा करना है। यानी मार्च-2027 तक बायपास पूरी तरह तैयार हो जाए। 21 मीटर चौड़ा होगा मुख्य फोरलेन खाटू श्याम मंदिर से लेकर भोपाल बायपास तक सेपरेटेड बायपास बनने जा रहा है। जिसमें वर्तमान प्रोजेक्ट में मुख्य सड़क की चौड़ाई करीब 10.5 मीटर होगी, ऐसे में मुख्य फोरलेन करीब 21 मीटर चौड़ा होगा। इनके बीच में 2.5 मीटर चौड़ा डिवाइडर रहेगा। साथ ही पैब्ड शोल्डर भी रहेंगे। फोरलेन के दोनों ओर 7-7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड तैयार की जाएगी। सर्विस रोड के बगल दोनों तरफ 1.5 मीटर की नालियां भी बनेगी। अरनिया और फूंदा बाजार के पास दो अंडरपास हाईवे से लोकल के ट्रैफिक को सीधे मिलने से रोकने के लिए दो जगह अंडरपास निर्माण किया जा रहा है। जिसमें पहला बहुप्रतीक्षित अरनिया जोड़ का शामिल है। वहीं दूसरा अंडरपास फूंदा बाजार और राजगढ़ बायपास के बीच रेलवे अंडरपास के पास बनने जा रहा है। दोनों अंडरपास करीब 12 मीटर चौड़े और 5.5 मीटर ऊंचे होंगे। ऐसे में करीब 250 मीटर तक दोनों अंडरपास के आसपास एलिवेडेट जैसा मार्ग होगा। खाटू श्याम मंदिर तक अलग से बनेगा पूरा मार्ग दरअसल पहले हाईवे पर खाटू श्याम मंदिर नहीं होने से उसी हिसाब से प्रोजेक्ट डिजाइन किया गया था। खाटू श्याम मंदिर तक जाने के लिए अलग मार्ग भी नहीं है। हाईवे से ही मंदिर जाना पड़ता है। भीड़ अधिक होने से हाईवे पर हादसों का डर रहता है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग और कलेक्टर के निर्देश पर अब खाटू श्याम मंदिर तक भी फोरलेन से साइड में अलग से रोड बनाने को योजना बनाई गई है। प्रोजेक्ट लागत बढ़ाकर मंदिर तक सेपरेट रोड बनाया जाएगा। एक नजर में प्रोजेक्ट की स्थिति-     66.37 करोड़ कुल लागत     3.5 किमी लंबाई     10.5 मीटर फोरलेन (एकतरफा)     7-7 मीटर सर्विस रोड     50 मीटर चौड़ाई कुल     02 अंडरपास     मार्च-2027 तक पूरा करना काम (नोट- दो हिस्सो में बन रहा बायपास- अरनिया जोड़ से गुना बायपास और राजगढ़ बायपास से भोपाल बायपास।) बायपास का निर्माण शुरू बायपास निर्माण का काम शुरू करा दिया गया है। जिसमें दो अंडरपास और सर्विस रोड सहित नालियों का काम होना है। फोरलेन बायपास में कई तकनीकी सुधार किए गए है। हाईवे का ट्रैफिक पूरी तरह अलग किया जाएगा।- देवांश नुअल, रीजनल मैनेजर, एनएचएआई, भोपाल दो हिस्सों में होगा काम प्रोजेक्ट का काम दो हिस्सों में होना है। दोनों जगह काम शुरू कर दिए है। मार्च-2027 तक काम पूरा करना है। अभी नालियों का काम कर रहे है, सर्विस रोड के लिए जगह बनाकर मुख्य हिस्से का काम कराएंगे।- निरंजन ठाकुर, प्रोजेक्ट मैनेजर, गोर्डेक निर्माण एजेंसी

मध्यप्रदेश में सड़कों के कायाकल्प के लिए ‘4 करोड़’ का बजट, अधिकारियों को निर्देश

बड़वानी  शहर के करीब सभी वार्ड में नगर पालिका जल्द ही सड़कों का कायाकल्प करने जा रही है। जहां सडक़ें नहीं है। वहां निर्माण किया जाएगा और जहां स्थिति खराब है। वहां सडक़ों का रिपेयर करने का लक्ष्य रखा है। नपा अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि नगर के सभी वार्ड में स्थिति की समीक्षा करके आम लोगों की परेशानी को दूर करें। इन कार्यों के लिए करोड़ों रुपए का आवंटन किया गया है। नपा अधिकारियों ने बताया कि 4 करोड़ से अधिक की लागत से नगर की विभिन्न सड़कों का कायाकल्प किया जाएगा। अधिकारियों ने उन सड़कों का चिह्नित करना शुरू कर दिया है, जहां पर रिपेयर किया जाना है। वहीं नगर के विभिन्न वार्डों की गलियों में सडक़ निर्माण होगा। जहां पर अभी तक सडक़ें नहीं बनाई जा सकी। खास बात है कि जिन सडक़ों की स्थिति खराब हो रही है। वहां डामरीकरण का लक्ष्य रखा है। अभिनव कॉलोनी, श्याम बाजार में डामरीकरण की सफलता से अधिकारी उत्साहित है। कार्य के लिए टेंडर नोटिस जारी किए जा चुके है। परिषद की बैठकों में पार्षदों से की थी चर्चा सूत्रों ने बताया कि नपा के पदाधिकारी और अधिकारियों ने विभिन्न वार्ड के पार्षदों से चर्चा कर सडक़ निर्माण के प्रस्ताव बुलाए है। हालांकि अभी ये जानकारी नहीं दी गई है कि किन वार्डों में निर्माण कार्य होना है और किन वार्डों में रिपेयर कार्य किए जाएंगे। हालांकि अधिकारियों को कहना है कि जहां भी कमी होगी उसे पूरा करेंगे।  पिछले वर्ष भी करोड़ों रुपयों के टेंडर निकाल सडक़ों के कायाकल्प का कार्य किया था, जिससे आम लोगों को राहत मिली थी। वर्तमान में पटेल कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, महावीर नगर, मोतीबाग, देवझिरी, पुराना आरटीओ बेड़ी पर सडक़ निर्माण कार्य हुए है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए दीवारों पर पेंटिंग स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 को लेकर नगर पालिका अपनी तैयारी कर रही है विभिन्न कैटेगरी में ज्यादा से ज्यादा अंक प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। खास बात है कि इस वर्ष दीवारों पर पेंटिंग करने को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चल रहा है। पिछले 5 वर्षों में स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सबसे अधिक वॉल पेंटिंग इसी वर्ष की गई है। सूत्रों ने बताया कि पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में गंदी गलियों की सफाई कैटेगरी में अंक कम मिले थे, जिससे नपा पिछड़ गई थी, लेकिन इस बार नपा अधिकारी उसी तरह ध्यान दे रहे हैं। पेंटिंग के माध्यम से सफाई, कचरा संग्रहण सहित पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जहां गंदी दीवारें थी। अब वहां पेंटिंग बनाने से सुंदरता बढ़ी है।