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बस्तर के विकास कार्यों में तेजी लाने की तैयारी, सड़क-पुल परियोजनाओं पर हुई अहम बैठक

बस्तर में सड़कों और पुलों के काम में आएगी तेजी, लोक निर्माण विभाग के सचिव ने अधिकारियों व ठेकेदारों की ली बैठक  प्रगतिरत कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के दिए निर्देश कहा ठेकेदारों को हर महीने करें भुगतान, गुणवत्ता सुनिश्चित करने कार्यों का बारीकी से निरीक्षण भी करें  रायपुर  लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज कोंडागांव में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक लेकर बीजापुर, दंतेवाड़ा और कोंडागांव में सड़कों और पुलों के निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने इन कार्यों में तेजी लाते हुए दी गई समय-सीमा में काम पूरा करने को कहा। उन्होंने बरसात में सड़क संपर्क से कट जाने वाले गांवों के लिए बारहमासी सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए प्राथमिकता से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने के निर्देश दिए। कोंडागांव की कलेक्टर सुनुपुर राशि पन्ना, वन मंडलाधिकारी श्रीमती दिव्या गौतम, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, मुख्य अभियंता भी एम.एल. उरांव और ज्ञानेश्वर कश्यप तथा अधीक्षण अभियंता संजय सूर्यवंशी सहित तीनों जिलों के कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी और उप अभियंता भी बैठक में मौजूद थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने तीनों जिलों के विभागीय अधिकारियों को किसी भी ठेकेदार का भुगतान लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर हर महीने भुगतान करने को कहा। बंसल ने ठेकेदारों से कार्यस्थलों पर आ रही समस्याओं की जानकारी अधिकारियों से साझा करने को कहा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इन समस्याओं का त्वरित समाधान कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रगतिरत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश ठेकेदारों को दिए। विभागीय सचिव ने बैठक में लोगों की जरूरतों और उपयोगिता के आधार पर नई सड़कों और पुलों के निर्माण के प्रस्ताव प्राथमिकता से भेजने के निर्देश दिए। बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद दूरस्थ और पहुंच विहीन गांवों में सड़कों व पुल-पुलियों के निर्माण तेजी से होने चाहिए। उन्होंने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में शामिल द्रुतगामी सड़कों के निर्माण के लिए 15 अगस्त तक इस्टीमेट भेजने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने सभी अधिकारियों को भवन, सड़क एवं पुल के कार्यों और उनकी प्रगति की पूरी जानकारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए भवनों में अच्छी गुणवत्ता के खिड़की, दरवाजे, टाइल्स, सेनेटरी, नल और पेंट्स का उपयोग करने को कहा। उन्होंने केशकाल घाटी बायपास सड़क के कार्यों में तेजी लाने वन मंडलाधिकारी को जल्द से जल्द पेड़ों की कटाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  बंसल ने काम में ढिलाई बरतने वाले तथा गुणवत्ताहीन काम करने वाले ठेकेदारों के प्रति सख्ती करने को कहा। उन्होंने ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने, डिग्रेड करने तथा टर्मिनेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने मुख्यालयों में रहने, फील्ड का नियमित दौरा कर कार्यों का बारीकी से निरीक्षण करने तथा न्यायालयीन प्रकरणों में समय पर शासन का जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने सर्किट हाउसों और विश्राम गृहों का अच्छा रखरखाव सुनिश्चित करने भी कहा। निर्माणाधीन खड़कघाट पुल के कार्यों का किया निरीक्षण लोक निर्माण विभाग के सचिव बंसल ने कोंडागांव में बैठक के बाद जगदलपुर में इंद्रावती नदी पर बन रहे खड़कघाट पुल के कार्यों का निरीक्षण किया। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर 44 करोड़ से अधिक की लागत से इस उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है। बंसल ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और ठेकेदार को पुल का काम पूर्ण गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरा करने को कहा। उन्होंने कार्यस्थल पर मशीनरी और मेन-पॉवर बढ़ाते हुए कार्यों में तेजी लाने को कहा।

राजधानी भोपाल में बड़े बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी, हजारों पेड़ों की कटाई पर बढ़ी चिंता

भोपाल  भोपाल शहर में अभी अरेरा हिल्स की 45 साल पुरानी हरियाली में से 2000 पेड़ों को हटाने का मामला अभी ही रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी 45 हेक्टेयर वनक्षेत्र में से 3200 बड़े व दस हजार छोटे झाड़-झाड़ियों को खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है। पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट में ये हरियाली खत्म करने की पटकथा लिख दी गई है। हालांकि इसके विरोध में आवाजें उठी और सरकार के पास 40 शिकायतें पहुंच गई है। स्थानीय लोगों का दबाव भी है और अब फिर डिजाइन बदलने पर विचार शुरू हो गया है। खासतौर पर समसगढ़ और इससे लगे क्षेत्र में वन व कैचमेंट को बचाने आवाज तेज हुई है। भानपुर केकड़िया से फंदा कलां तक कटेंगे पेड़ जबलपुर राजमार्ग स्थित भानपुर पश्चिम बायपास चार लेन पेव्हड शोल्डर प्रोजेक्ट है। भोपाल केकडिया से शुरू होकर भोपाल देवास मार्ग स्टेट हाईवे 28 के फंदा कलां पर जुड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग 45 व 46 से आंकर इंदौर की ओर जाने वाले भारी वाहन शहरी क्षेत्र में प्रवेश किए बिना आवागमन कर सकेंगे। इसकी लंबाई 35.611 किमी. प्रस्तावित है। बायपास एक लेन पांच किमी लंबाई में वनक्षेत्र है। यहां सात स्थानों पर 610 मीटर लंबाई में वायडक्ट बनाया जाएगा, ताकि वन्यजीव ट्रैफिक से उलझे बिना निकल जाएं। वनक्षेत्र मार्ग निर्माण में 45 हेक्टेयर भूमि के साथ 3200 पेड़ प्रभावित होंगे। ऐसे समझें ग्रामवार जमीन व पेड़ -हेक्टयर निजी भूमि जबकि 7.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। भू अर्जन में चार भवन व 35 पेड़ प्रभावित होंगे। -भानपुर केकड़िया में 8.45 हेक्टेयर निजी व 8.38 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। -झागरिया खुर्द में 19.30 हेक्टेयर निजी जबकि 2.11 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित होगी। यहां आठ भवन व 40 पेड़ हटेंगे। -फंदा कलां में बड़ा तालाब वेटलैंड में पानी पहुंचाने वाले नाले हैं। यहां नालों पर ब्रिज व कल्वर्ट बनाना प्रस्तावित । -फंदाखुर्द में 1.75 हेक्टेयर निजी भूमि व 0.20 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां 20 पेड़ प्रभावित होंगे। -सरवर में 2.04 हेक्टेयर निजी व 0.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां एक भवन हटेगा। -समसपुरा में 7.02 हेक्टेयर निजी भूमि व 3.43 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां तीन भवन व 54 पेड़ हटेंगे। -पिपलिया धाकड़ में 6.62 हेक्टेयर निजी भूमि व 1.01 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित होगी। एक भवन व 23 पेड़ हटेंगे। -थुआखेड़ा में 12.1284 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। -नरेला में 12.89 हेक्टेयर निजी व 0.65 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। दो भवन व 150 पेड़ हटेंगे। -मूंडला में 12.40 हेक्टेयर निजी व 0.75 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। दो भवन व 70 पेड़ हटेंगे। -आंवला में 15.28 हेक्टेयर निजी व 0.34 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। चार भवन व 50 पेड़ हटेंगे। -हताईखेड़ी में 3.85 हेक्टेयर निजी व 0.22 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। 50 पेड़ हटेंगे। -जाटखेड़ी में 7.72 निजी व 0.91 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। पश्चिम बायपास में वन व कैचमेंट का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा। पहले की डिजाइन में कम था। इसे पूरी तरह से वन व कैचमेंट से दूर करना चाहिए। हमने शिकायतें की है। मामले में कोर्ट में भी ले जाएंगे। – राशीदनूर खान, पर्यावरण एक्टिविस्ट  

LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य बना छत्तीसगढ़, आमजन और उद्योगों दोनों को मिलेगा लाभ

बेहतर सड़क, तेज़ परिवहन और बढ़ते रोजगार से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य बना छत्तीसगढ़, आमजन और उद्योगों दोनों को मिलेगा लाभ सुशासन, मजबूत कनेक्टिविटी और जनहितकारी योजनाओं का दिख रहा सकारात्मक असर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर छत्तीसगढ़ ने विकास और सुशासन की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी LEADS 2025 रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य का दर्जा मिला है। यह उपलब्धि राज्य में बेहतर सड़क, परिवहन, व्यापार सुविधा और मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के कारण मिली है, जिसका सीधा लाभ आम जनता, किसानों, व्यापारियों और युवाओं को मिल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल उद्योगों का विकास नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है। बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था से किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंच रही है, व्यापार को गति मिल रही है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और तेज़ निर्णय प्रक्रिया के कारण निवेश बढ़ रहा है। राज्य सरकार गांव से शहर तक कनेक्टिविटी मजबूत करने, वेयरहाउसिंग सुविधाएं बढ़ाने और उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने पर लगातार काम कर रही है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य में लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। इससे उद्योगों को सुविधा मिलने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों, किसानों और स्थानीय उद्यमियों को भी लाभ मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई लॉजिस्टिक्स नीति 2025 के तहत परिवहन लागत कम करने, माल परिवहन को तेज़ बनाने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र को उद्योग का दर्जा दिए जाने से रोजगार और निवेश की नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं। रायपुर के लिए तैयार किए गए सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान से शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और माल परिवहन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। वहीं OneClick Single Window Portal के माध्यम से उद्योगों को अनुमति प्रक्रिया आसान बनाई गई है, जिससे निवेशकों को तेजी से सुविधाएं मिल रही हैं। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से आधुनिक और तकनीक-सक्षम लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित कर रहा है। इससे प्रदेश में व्यापार, उद्योग और रोजगार को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के उभरते औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में नई पहचान दिला रही है। कुल मिलाकर LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य के रूप में मिली यह पहचान केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में तेज़ी से विकसित हो रही अधोसंरचना, सुशासन और जनहितकारी विकास मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति है। बेहतर सड़क, मजबूत परिवहन व्यवस्था, बढ़ते निवेश और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ अब आमजन की सुविधाओं और आर्थिक समृद्धि को केंद्र में रखकर विकास की नई दिशा तय कर रहा है।

ब्यावरा में 21 मीटर चौड़ी फोरलेन सड़क का निर्माण, खाटू श्याम मंदिर पहुंचना होगा आसान

ब्यावरा  नेशनल हाईवे का संगम कहे जाने वाले ब्यावरा शहर को अब नई रफ्तार मिलने जा रही है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और हादसों के चलते अब आधुनिक ग्रेड सेपरेटेड फोरलेन बायपास बनने जा रहा है, जो न सिर्फ ट्रैफिक को व्यवस्थित करेगा बल्कि सुरक्षित सफर भी संभव बनाएंगा। करीब 66 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले उक्त प्रोजेक्ट का काम भी शुरू हो चुका है। खास बात यह है कि इस बार पुराने अनुभवों से सीख लेकर डिजाइन तैयार किया गया है, ताकि हाईवे और लोकल ट्रैफिक पूरी तरह अलग रह सके। बायपास पर हाईवे का ट्रैफिक पूरी तरह सेपरेट रहेगा, यानी फोरलेन बायपास में एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। वहीं लोकल के ट्रैफिक के लिए दोनों तरफ सर्विस रोड बनेगा। जिससे आए दिन होने वाले सड़क हादसों से राहत मिलेगी।  दो हिस्सों में काम, मार्च-2027 डेडलाइन उक्त प्रोजेक्ट को अक्टूबर-2025 में स्वीकृति मिली। जिसकी शुरूआत में लागत 96 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में 66.37 करोड़ रुपए हो गई। प्रोजेक्ट का काम अब शुरू हो चुका है। दो हिस्सो में इसका काम होना है। जिसमें पहला हिस्सा खाटू श्याम मंदिर से गुना बायपास और दूसरा हिस्सा, राजगढ़ बायपास से भोपाल बायपास शामिल है। जिसकी कुल लंबाई करीब करीब 3.5 किमी है। डेढ़ साल में इसका काम पूरा करना है। यानी मार्च-2027 तक बायपास पूरी तरह तैयार हो जाए। 21 मीटर चौड़ा होगा मुख्य फोरलेन खाटू श्याम मंदिर से लेकर भोपाल बायपास तक सेपरेटेड बायपास बनने जा रहा है। जिसमें वर्तमान प्रोजेक्ट में मुख्य सड़क की चौड़ाई करीब 10.5 मीटर होगी, ऐसे में मुख्य फोरलेन करीब 21 मीटर चौड़ा होगा। इनके बीच में 2.5 मीटर चौड़ा डिवाइडर रहेगा। साथ ही पैब्ड शोल्डर भी रहेंगे। फोरलेन के दोनों ओर 7-7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड तैयार की जाएगी। सर्विस रोड के बगल दोनों तरफ 1.5 मीटर की नालियां भी बनेगी। अरनिया और फूंदा बाजार के पास दो अंडरपास हाईवे से लोकल के ट्रैफिक को सीधे मिलने से रोकने के लिए दो जगह अंडरपास निर्माण किया जा रहा है। जिसमें पहला बहुप्रतीक्षित अरनिया जोड़ का शामिल है। वहीं दूसरा अंडरपास फूंदा बाजार और राजगढ़ बायपास के बीच रेलवे अंडरपास के पास बनने जा रहा है। दोनों अंडरपास करीब 12 मीटर चौड़े और 5.5 मीटर ऊंचे होंगे। ऐसे में करीब 250 मीटर तक दोनों अंडरपास के आसपास एलिवेडेट जैसा मार्ग होगा। खाटू श्याम मंदिर तक अलग से बनेगा पूरा मार्ग दरअसल पहले हाईवे पर खाटू श्याम मंदिर नहीं होने से उसी हिसाब से प्रोजेक्ट डिजाइन किया गया था। खाटू श्याम मंदिर तक जाने के लिए अलग मार्ग भी नहीं है। हाईवे से ही मंदिर जाना पड़ता है। भीड़ अधिक होने से हाईवे पर हादसों का डर रहता है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग और कलेक्टर के निर्देश पर अब खाटू श्याम मंदिर तक भी फोरलेन से साइड में अलग से रोड बनाने को योजना बनाई गई है। प्रोजेक्ट लागत बढ़ाकर मंदिर तक सेपरेट रोड बनाया जाएगा। एक नजर में प्रोजेक्ट की स्थिति-     66.37 करोड़ कुल लागत     3.5 किमी लंबाई     10.5 मीटर फोरलेन (एकतरफा)     7-7 मीटर सर्विस रोड     50 मीटर चौड़ाई कुल     02 अंडरपास     मार्च-2027 तक पूरा करना काम (नोट- दो हिस्सो में बन रहा बायपास- अरनिया जोड़ से गुना बायपास और राजगढ़ बायपास से भोपाल बायपास।) बायपास का निर्माण शुरू बायपास निर्माण का काम शुरू करा दिया गया है। जिसमें दो अंडरपास और सर्विस रोड सहित नालियों का काम होना है। फोरलेन बायपास में कई तकनीकी सुधार किए गए है। हाईवे का ट्रैफिक पूरी तरह अलग किया जाएगा।- देवांश नुअल, रीजनल मैनेजर, एनएचएआई, भोपाल दो हिस्सों में होगा काम प्रोजेक्ट का काम दो हिस्सों में होना है। दोनों जगह काम शुरू कर दिए है। मार्च-2027 तक काम पूरा करना है। अभी नालियों का काम कर रहे है, सर्विस रोड के लिए जगह बनाकर मुख्य हिस्से का काम कराएंगे।- निरंजन ठाकुर, प्रोजेक्ट मैनेजर, गोर्डेक निर्माण एजेंसी

मध्यप्रदेश में सड़कों के कायाकल्प के लिए ‘4 करोड़’ का बजट, अधिकारियों को निर्देश

बड़वानी  शहर के करीब सभी वार्ड में नगर पालिका जल्द ही सड़कों का कायाकल्प करने जा रही है। जहां सडक़ें नहीं है। वहां निर्माण किया जाएगा और जहां स्थिति खराब है। वहां सडक़ों का रिपेयर करने का लक्ष्य रखा है। नपा अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि नगर के सभी वार्ड में स्थिति की समीक्षा करके आम लोगों की परेशानी को दूर करें। इन कार्यों के लिए करोड़ों रुपए का आवंटन किया गया है। नपा अधिकारियों ने बताया कि 4 करोड़ से अधिक की लागत से नगर की विभिन्न सड़कों का कायाकल्प किया जाएगा। अधिकारियों ने उन सड़कों का चिह्नित करना शुरू कर दिया है, जहां पर रिपेयर किया जाना है। वहीं नगर के विभिन्न वार्डों की गलियों में सडक़ निर्माण होगा। जहां पर अभी तक सडक़ें नहीं बनाई जा सकी। खास बात है कि जिन सडक़ों की स्थिति खराब हो रही है। वहां डामरीकरण का लक्ष्य रखा है। अभिनव कॉलोनी, श्याम बाजार में डामरीकरण की सफलता से अधिकारी उत्साहित है। कार्य के लिए टेंडर नोटिस जारी किए जा चुके है। परिषद की बैठकों में पार्षदों से की थी चर्चा सूत्रों ने बताया कि नपा के पदाधिकारी और अधिकारियों ने विभिन्न वार्ड के पार्षदों से चर्चा कर सडक़ निर्माण के प्रस्ताव बुलाए है। हालांकि अभी ये जानकारी नहीं दी गई है कि किन वार्डों में निर्माण कार्य होना है और किन वार्डों में रिपेयर कार्य किए जाएंगे। हालांकि अधिकारियों को कहना है कि जहां भी कमी होगी उसे पूरा करेंगे।  पिछले वर्ष भी करोड़ों रुपयों के टेंडर निकाल सडक़ों के कायाकल्प का कार्य किया था, जिससे आम लोगों को राहत मिली थी। वर्तमान में पटेल कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, महावीर नगर, मोतीबाग, देवझिरी, पुराना आरटीओ बेड़ी पर सडक़ निर्माण कार्य हुए है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए दीवारों पर पेंटिंग स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 को लेकर नगर पालिका अपनी तैयारी कर रही है विभिन्न कैटेगरी में ज्यादा से ज्यादा अंक प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। खास बात है कि इस वर्ष दीवारों पर पेंटिंग करने को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चल रहा है। पिछले 5 वर्षों में स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सबसे अधिक वॉल पेंटिंग इसी वर्ष की गई है। सूत्रों ने बताया कि पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में गंदी गलियों की सफाई कैटेगरी में अंक कम मिले थे, जिससे नपा पिछड़ गई थी, लेकिन इस बार नपा अधिकारी उसी तरह ध्यान दे रहे हैं। पेंटिंग के माध्यम से सफाई, कचरा संग्रहण सहित पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जहां गंदी दीवारें थी। अब वहां पेंटिंग बनाने से सुंदरता बढ़ी है।

ग्वालियर में आमखो-कस्तूरबा रोड एक साल तक रहेगा बंद, ट्रैफिक पुलिस ने किया डायवर्जन प्लान का ऐलान

 ग्वालियर  शहर की चिकित्सा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और अस्पतालों के बीच निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हजार बिस्तर अस्पताल को कमलाराजा (KRH) एवं जयारोग्य अस्पताल (JAH) से अंडरपास के जरिए जोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है। लगभग ₹17 करोड़ की लागत वाले इस निर्माण कार्य के कारण आमखो से कस्तूरबा तिराहा रोड को आगामी एक वर्ष के लिए पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया है। अंडरपास की खासियत और निर्माण योजना हजार बिस्तर अस्पताल और जयारोग्य परिसर को जोड़ने वाला यह अंडरपास लगभग 300 मीटर लंबा होगा। इसका डिजाइन अंग्रेजी के 'L' आकार में तैयार किया गया है। अंडरपास में सात-सात मीटर चौड़ाई की दो लेन बनाई जाएंगी। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल पैदल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि वाहनों के लिए भी सुलभ होगा। आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस और डॉक्टरों के वाहन सीधे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंच सकेंगे। पूर्व में सीवर और पानी की लाइनों के कारण काम रुका था, जो अब लाइनों की शिफ्टिंग के बाद पुनः शुरू किया जा रहा है। यातायात डायवर्जन: वाहन चालक ध्यान दें ट्रैफिक पुलिस ने आम जनता की सुविधा के लिए नया डायवर्जन प्लान लागू किया है:     कस्तूरबा चौराहा से अचलेश्वर जाने वाले वाहन: अब कस्तूरबा चौराहा से कंपू थाना, खेल परिसर और हजार बिस्तर अस्पताल के सामने से होते हुए आमखो तिराहा पहुंचेंगे।     अचलेश्वर से कस्तूरबा तिराहा जाने वाले वाहन: आमखो से हजार बिस्तर अस्पताल और खेल परिसर के सामने से होते हुए कंपू थाना तिराहा से अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक देरी से बचने के लिए परिवर्तित मार्ग का ही उपयोग करें।

बालाघाट के 100 गांवों में बिजली, स्कूल और अन्य सुविधाओं की मिलेगी सौगात, बदलेगा माहौल

बालाघाट  मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में बीते 35 सालों से भी अधिक समय से न केवल डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर रहे, बल्कि इस लम्बे अरसे के दौरान विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर रह गए. लेकिन नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही यहां के लोगों का जीवन भयमुक्त और खुशहाल नजर आने लगा है. अब यहां विकास की बयार नजर आने लगी है. यह कहना गलत नहीं होगी कि कभी नक्सलवाद का दंष झेलने वाले गांवों में अब विकास का पहिया घूमने लगा है।  100 गांवों में होगा विकास कार्य नक्सलवाद की चपेट में रहे तकरीबन 100 से अधिक गांवों में 300 करोड़ से अधिक की राशि से बिजली पानी, सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराया जायेगा. नक्सलवाद जिले के लिए नासूर की तरह था. जिसके कारण वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव विकास की मुख्य धारा से अलग थलग पड़े रह गए. चूंकि जब भी इन ग्रामीण अंचलों में कार्य किये जाते थे, तो नक्सली उन कार्यों में बाधा उत्पन्न करते थे, कभी मशीनों को जला देते थे, तो कभी ठेकेदारों को डराते धमकाते थे।  नक्सली इन क्षेत्रों का विकास कभी नहीं चाहते थे. नक्सलवाद यहां पर विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था. लेकिन अब समय बदला है और समय के साथ यहां की तस्वीर भी बदलने लगी है. बरसों विकास से दूर रहने वाले गांवों में अब जीवन खुशहाल नजर आ रहा है।  शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि, ''जिले के बैहर, परसवाड़ा, बिरसा, लांजी, किरनापुर सहित बालाघाट विकासखण्ड के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में रहे. अब उन सभी गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. जहां पर उन इलाकों के सभी जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर विकास का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसे शासन को भेज कर स्वीकृति ली जा सकेगी।  सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर की स्थापना फिलहाल इन वनांचल क्षेत्रों के 16 गांवों में जल संसाधन विभाग द्वारा सिचांई की योजनाएं तैयार कर खेती को बेहतर बनाने काम जारी है. वहीं विद्युत विभाग द्वारा सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए तकरीबन 13.50 करोड़ रूपये के प्रस्ताव तैयार हैं. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की 37 गांवों में उचित मूल्य की दुकान और 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण की योजना है. इसके अलावा तीन करोड़ की राशि से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्य प्रस्तावित हैं।  इसी के साथ सर्व शिक्षा अभियान के तहत शाला भवन निर्माण, उद्योग एवं तकनीकि विभाग द्वारा आईटीआई भवन व छात्रावास, मत्स्य विभाग द्वारा तालाब निर्माण, पशुपालन विभाग द्वारा पशु पेड़, कृषि विभाग द्वारा 1.74 करोड़ की राशि से कृषि विकास कार्य, उद्यानिकी विभाग द्वारा नर्सरी स्थापना, पीएम सड़क योजनांतर्गत 189 किमी लंबाई की 41 सड़कों का निर्माण, स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केन्द्रों का सुधार, आयुष विभाग द्वारा 3.45 करोड़ के औषधालय निर्माण के प्रस्ताव शामिल हैं।  डर से निकल खुशहाली की तरफ बढ़े ग्रामीण इस तरह अब कभी लाल आतंक का गढ़ माने जाने वाले बालाघाट जिले के वनांचल क्षेत्रों में जीवन खुशहाली की ओर है. डर और भयमुक्त माहौल निर्मित होने से लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे हैं. वहीं शासन प्रशासन द्वारा यहां के विकास का खाका तैयार कर जिस तरह से कार्यों का संपादन किया जा रहा है, निश्चित तौर पर आने वाले समय में यहां निवासरत लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में भी बदलाव होगा। 

रायपुर: कई जिलों में बनेंगी फोरलेन सड़कें, लोक निर्माण विभाग ने स्वीकृत किए 708 करोड़

रायपुर : कई जिलों में बनेंगी फोरलेन सड़कें, लोक निर्माण विभाग द्वारा 708 करोड़ स्वीकृत कुल 90.5 किमी लंबाई के 15 फोरलेन सड़कों का होगा निर्माण फोरलेन सड़कों के विस्तार से सुरक्षित यातायात के साथ आर्थिक प्रगति का आधार भी मजबूत होगा – उप मुख्यमंत्री अरुण साव रायपुर प्रदेशवासियों को यातायात के लिए मजबूत और चौड़ी सड़कें उपलब्ध कराने लोक निर्माण विभाग ने 15 फोरलेन सड़कों के निर्माण के लिए 708 करोड़ 21 लाख 35 हजार रुपए मंजूर किए हैं। हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत इस राशि से विभिन्न जिलों में कुल 90.5 किमी फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इनके निर्माण से प्रमुख सड़कों पर सुगम यातायात और जॉम से मुक्ति के साथ ही यात्रा का समय घटेगा। फोरलेन सड़कों से सुरक्षित यातायात के साथ ही आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी। इससे कृषि, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। लोक निर्माण विभाग ने दुर्ग जिले में दुर्ग-धमधा-बेमेतरा अंडर ब्रिज से अग्रसेन चौक तक 0.5 किमी फोरलेन मार्ग के लिए तीन करोड़ 41 लाख रुपए, स्मृति नगर पेट्रोल पंप से आई.आई.टी. जेवरा सिरसा तक 7 किमी फोरलेन सड़क के लिए 20 करोड़ 64 लाख रुपए, मिनी माता चौक से महाराजा चौक-ठगड़ा बांध तक 4.70 किमी फोरलेन मार्ग के लिए 28 करोड़ 58 लाख रुपए तथा महाराजा चौक से बोरसी चौक तक 1.80 किमी फोरलेन सड़क के लिए 23 करोड़ 97 लाख रुपए मंजूर किए हैं।  विभाग ने रायगढ़ में ढिमरापुर चौक से कोतरा थाना चौक तक 2.50 किमी के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 41 करोड़ 49 लाख रुपए, रायगढ़-कोतरा-नंदेली राज्य मार्ग के किमी 1 से किमी 5 तक के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 55 करोड़ 29 लाख रुपए, रायगढ़-लोईंग-महापल्ली मुख्य जिला मार्ग के किमी 1 से किमी 5 तक विद्युतीकरण सहित फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 81 करोड़ 48 लाख रुपए तथा 6 किमी तमनार फोरलेन बायपास के निर्माण के लिए 152 करोड़ 17 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। रायपुर जिले में अभनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 में 2.8 किमी लंबाई के फोरलेन में उन्नयन के लिए 17 करोड़ 9 लाख रुपए, राजिम में नवीन मेला स्थल से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किमी फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए 34 करोड़ 20 लाख रुपए, अंबिकापुर में गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक 5 किमी लंबाई के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 61 करोड़ 34 लाख रुपए, बिलासपुर में 13.40 किमी कोनी-मोपका फोरलेन बायपास मार्ग के लिए 82 करोड़ 80 लाख 26 हजार रुपए एवं कोटा-लोरमी-पंडरिया मार्ग में 21 किमी सड़क के फोरलेन चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 71 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग ने जशपुर जिले में कुल 7.30 किमी लंबाई के तीन सड़कों के फोरलेन में उन्नयन एवं मजबूतीकरण के लिए 36 करोड़ 85 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इनमें 2 किमी लंबा पत्थलगांव के इंदिरा चौक से जशपुर रोड, 1.50 किमी लंबा इंदिरा चौक से अंबिकापुर रोड तथा 3.80 किमी लंबा इंदिरा चौक से रायगढ़ रोड शामिल हैं। विभाग ने कबीरधाम जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के किमी 50 से किमी 57 तक फोरलेन में उन्नयन और डिवाइडर निर्माण के लिए भी 54 करोड़ 21 लाख रुपए मंजूर किए हैं।  “राज्य में बेहतर और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। फोरलेन सड़कों का विस्तार केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार भी तैयार करता है। लोक निर्माण विभाग द्वारा अधोसंरचना विकास में बड़े पैमाने पर निवेश कर कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।” – अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री

ग्वालियर-आगरा का सफर होगा महज 50 मिनट में, केंद्रीय मंत्री ने हाईस्पीड कॉरिडोर से आर्थिक विकास का दिया भरोसा

ग्वालियर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेस-वे निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए बड़ा दावा किया कि इस हाईस्पीड कॉरिडोर के बनते ही ग्वालियर से आगरा की दूरी महज 45 से 50 मिनट में सिमट जाएगी। करीब 5500 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा यह 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई गति देगा। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी मौजूद रहे। यातायात तेज और सुरक्षित सिंधिया ने कहा कि देश में तेजी से विकसित हो रहा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला बन रहा है। उन्होंने कहा, ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे (MP News Gwalior Agra high Speed Corridor) वर्तमान मार्ग से करीब 32 किलोमीटर छोटा होगा और कुल दूरी लगभग 88 किलोमीटर रह जाएगी। मौजूदा 2 लेन सडक़ को अपग्रेड कर 6 लेन हाईस्पीड कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जहां न्यूनतम गति 100 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। कॉरिडोर में सीमित एंट्री-एग्जिट के साथ कुल 4 इंटरचेंज बनाए जाएंगे, जिससे यातायात तेज और सुरक्षित रहेगा। सिंधिया ने कहा कि अब दो-लेन सड़क को अपग्रेड करके छह-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें न्यूनतम गति 100 किमी/घंटा होगी. आगरा से ग्वालियर का सफर अभी 2.5-3 घंटे में पूरा होता है, लेकिन एक्सप्रेस-वे बनने के बाद सिर्फ 45-50 मिनट में पूरा होगा. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लगभग तीन साल में ये एक्सप्रेस-वे जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  आधुनिक सुविधाओं वाला होगा नया एक्सप्रेस-वे सिंधिया ने कहा कि नया एक्सप्रेस-वे पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं वाला बन रहा है. इसमें सिर्फ चार मुख्य एंट्री-एक्जिट पॉइंट होंगे, जिससे ट्रैफिक में कोई दिक्कत नहीं आएगी. हाई-स्पीड कॉरिडोर बिना रुकावट चलेगा. लोग तेज और आराम से सफर कर सकेंगे. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में चंबल नदी पर नया छह-लेन का पुल बनाया जाएगा. यह पुल सबसे आधुनिक तकनीक से बनेगा और डिजाइन में दुनिया के बेहतरीन पुलों जैसा होगा।  उन्होंने कहा कि इसके साथ ही शिवपुरी को जोड़ने के लिए लगभग 28 किलोमीटर लंबा पश्चिमी बाईपास भी डेवलप किया जा रहा है, जिसकी लागत लगभग 1,400 करोड़ रुपये है. इससे दिल्ली, ग्वालियर, शिवपुरी और गुना के बीच यात्रा आसान और तेज होगी।  600 करोड़ रुपये की लागत से नया आधुनिक रेलवे स्टेशन बनेगा केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेस-वे और पश्चिमी बाईपास मिलाकर लगभग 7,000 करोड़ की परियोजनाएं क्षेत्र को मिली हैं. इसके अलावा ग्वालियर में 600 करोड़ रुपये की लागत से नया आधुनिक रेलवे स्टेशन भी बन रहा है. उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स से पूरे ग्वालियर-चंबल इलाके का कायाकल्प होगा और यहां निवेश, रोजगार और व्यापार के नए मौके लोगों को मिलेंगे।  आधुनिक तकनीक से तैयार होगा 6 लेन का विश्वस्तरीय ब्रिज उन्होंने कहा, परियोजना के तहत चंबल नदी पर आधुनिक तकनीक से 6 लेन का विश्वस्तरीय ब्रिज बनाया जाएगा। साथ ही शिवपुरी को जोडऩे के लिए लगभग 28 किलोमीटर लंबा पश्चिमी बायपास विकसित किया जा रहा है, जिसकी लागत करीब 1400 करोड़ रुपए है। इससे दिल्ली, ग्वालियर, शिवपुरी और गुना के बीच आवागमन और अधिक सुगम होगा। 7000 करोड़ के प्रोजेक्ट से बदलेगी तस्वीर सिंधिया ने कहा, हाईस्पीड कॉरिडोर (MP News Gwalior Agra high Speed Corridor) और पश्चिमी बायपास को मिलाकर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को करीब 7000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट मिले हैं। इसके अलावा ग्वालियर में 600 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक रेलवे स्टेशन का निर्माण भी जारी है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने पर क्षेत्र में निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।  

पर्यावरणीय मंजूरी नियमों में बदलाव, 45 दिन में ‘सिया’ ने नहीं दी प्रतिक्रिया तो मुख्य सचिव करेंगे निर्णय

भोपाल  खदान, सड़क निर्माण या अन्य परियोजनाएं हों, इनकी पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़े महत्वपूर्ण नियम में केंद्र सरकार बदलाव करने जा रही है। इसके प्रभावी होने पर यदि किसी परियोजना को राज्य पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) 45 दिन तक स्वीकृति नहीं देती है तो राज्यों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इस पर निर्णय करेगी। इसमें प्रमुख सचिव, पर्यावरण और प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास सदस्य होंगे। इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रारूप की अधिसूचना जारी कर सुझाव मांगे हैं। अभी ऐसी व्यवस्था है कि यदि 45 दिन तक सिया की स्वीकृति नहीं मिलती तो परियोजना अपने आप स्वीकृत मानी जाती है। मध्य प्रदेश में भी वर्ष 2025 में ऐसा मामला सामने आ चुका है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सभी राज्यों में सिया है। वहां भी ऐसे मामले हो सकते हैं। इसी कारण केंद्र सरकार नियम बदलने जा रही है। अपने आप अनुमति मिलने की व्यवस्था में कमी यह है कि बिना मूल्यांकन के परियोजनाएं स्वीकृत होने पर उन्हें भी अनुमति मिल जाती है, जिन्हें पात्रता नहीं होती। यानी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की शर्तों के अनुरूप नहीं होतीं। सामान्यत: 45 दिन में स्वीकृति नहीं मिलने का बड़ा कारण सिया की बैठक नहीं होना है। नई व्यवस्था में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन करने के बाद ही अनुमति मिल पाएगी। इससे विवाद या पक्षपात की स्थिति भी नहीं बनेगी। अभी कई बार यह आरोप लगता है कि 45 दिन तक जानबूझकर बैठकें नहीं की जातीं, जिससे बिना मूल्यांकन अनुमति मिल सके।