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ग्वालियर में आमखो-कस्तूरबा रोड एक साल तक रहेगा बंद, ट्रैफिक पुलिस ने किया डायवर्जन प्लान का ऐलान

 ग्वालियर  शहर की चिकित्सा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और अस्पतालों के बीच निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हजार बिस्तर अस्पताल को कमलाराजा (KRH) एवं जयारोग्य अस्पताल (JAH) से अंडरपास के जरिए जोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है। लगभग ₹17 करोड़ की लागत वाले इस निर्माण कार्य के कारण आमखो से कस्तूरबा तिराहा रोड को आगामी एक वर्ष के लिए पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया है। अंडरपास की खासियत और निर्माण योजना हजार बिस्तर अस्पताल और जयारोग्य परिसर को जोड़ने वाला यह अंडरपास लगभग 300 मीटर लंबा होगा। इसका डिजाइन अंग्रेजी के 'L' आकार में तैयार किया गया है। अंडरपास में सात-सात मीटर चौड़ाई की दो लेन बनाई जाएंगी। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल पैदल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि वाहनों के लिए भी सुलभ होगा। आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस और डॉक्टरों के वाहन सीधे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंच सकेंगे। पूर्व में सीवर और पानी की लाइनों के कारण काम रुका था, जो अब लाइनों की शिफ्टिंग के बाद पुनः शुरू किया जा रहा है। यातायात डायवर्जन: वाहन चालक ध्यान दें ट्रैफिक पुलिस ने आम जनता की सुविधा के लिए नया डायवर्जन प्लान लागू किया है:     कस्तूरबा चौराहा से अचलेश्वर जाने वाले वाहन: अब कस्तूरबा चौराहा से कंपू थाना, खेल परिसर और हजार बिस्तर अस्पताल के सामने से होते हुए आमखो तिराहा पहुंचेंगे।     अचलेश्वर से कस्तूरबा तिराहा जाने वाले वाहन: आमखो से हजार बिस्तर अस्पताल और खेल परिसर के सामने से होते हुए कंपू थाना तिराहा से अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक देरी से बचने के लिए परिवर्तित मार्ग का ही उपयोग करें।

बालाघाट के 100 गांवों में बिजली, स्कूल और अन्य सुविधाओं की मिलेगी सौगात, बदलेगा माहौल

बालाघाट  मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में बीते 35 सालों से भी अधिक समय से न केवल डर के साये में जीवन बिताने को मजबूर रहे, बल्कि इस लम्बे अरसे के दौरान विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर रह गए. लेकिन नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही यहां के लोगों का जीवन भयमुक्त और खुशहाल नजर आने लगा है. अब यहां विकास की बयार नजर आने लगी है. यह कहना गलत नहीं होगी कि कभी नक्सलवाद का दंष झेलने वाले गांवों में अब विकास का पहिया घूमने लगा है।  100 गांवों में होगा विकास कार्य नक्सलवाद की चपेट में रहे तकरीबन 100 से अधिक गांवों में 300 करोड़ से अधिक की राशि से बिजली पानी, सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराया जायेगा. नक्सलवाद जिले के लिए नासूर की तरह था. जिसके कारण वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों गांव विकास की मुख्य धारा से अलग थलग पड़े रह गए. चूंकि जब भी इन ग्रामीण अंचलों में कार्य किये जाते थे, तो नक्सली उन कार्यों में बाधा उत्पन्न करते थे, कभी मशीनों को जला देते थे, तो कभी ठेकेदारों को डराते धमकाते थे।  नक्सली इन क्षेत्रों का विकास कभी नहीं चाहते थे. नक्सलवाद यहां पर विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था. लेकिन अब समय बदला है और समय के साथ यहां की तस्वीर भी बदलने लगी है. बरसों विकास से दूर रहने वाले गांवों में अब जीवन खुशहाल नजर आ रहा है।  शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि, ''जिले के बैहर, परसवाड़ा, बिरसा, लांजी, किरनापुर सहित बालाघाट विकासखण्ड के सैकड़ों गांव नक्सलवाद की चपेट में रहे. अब उन सभी गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. जहां पर उन इलाकों के सभी जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर विकास का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसे शासन को भेज कर स्वीकृति ली जा सकेगी।  सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर की स्थापना फिलहाल इन वनांचल क्षेत्रों के 16 गांवों में जल संसाधन विभाग द्वारा सिचांई की योजनाएं तैयार कर खेती को बेहतर बनाने काम जारी है. वहीं विद्युत विभाग द्वारा सोलर सेंटर एवं ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए तकरीबन 13.50 करोड़ रूपये के प्रस्ताव तैयार हैं. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की 37 गांवों में उचित मूल्य की दुकान और 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण की योजना है. इसके अलावा तीन करोड़ की राशि से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्य प्रस्तावित हैं।  इसी के साथ सर्व शिक्षा अभियान के तहत शाला भवन निर्माण, उद्योग एवं तकनीकि विभाग द्वारा आईटीआई भवन व छात्रावास, मत्स्य विभाग द्वारा तालाब निर्माण, पशुपालन विभाग द्वारा पशु पेड़, कृषि विभाग द्वारा 1.74 करोड़ की राशि से कृषि विकास कार्य, उद्यानिकी विभाग द्वारा नर्सरी स्थापना, पीएम सड़क योजनांतर्गत 189 किमी लंबाई की 41 सड़कों का निर्माण, स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केन्द्रों का सुधार, आयुष विभाग द्वारा 3.45 करोड़ के औषधालय निर्माण के प्रस्ताव शामिल हैं।  डर से निकल खुशहाली की तरफ बढ़े ग्रामीण इस तरह अब कभी लाल आतंक का गढ़ माने जाने वाले बालाघाट जिले के वनांचल क्षेत्रों में जीवन खुशहाली की ओर है. डर और भयमुक्त माहौल निर्मित होने से लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे हैं. वहीं शासन प्रशासन द्वारा यहां के विकास का खाका तैयार कर जिस तरह से कार्यों का संपादन किया जा रहा है, निश्चित तौर पर आने वाले समय में यहां निवासरत लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में भी बदलाव होगा। 

रायपुर: कई जिलों में बनेंगी फोरलेन सड़कें, लोक निर्माण विभाग ने स्वीकृत किए 708 करोड़

रायपुर : कई जिलों में बनेंगी फोरलेन सड़कें, लोक निर्माण विभाग द्वारा 708 करोड़ स्वीकृत कुल 90.5 किमी लंबाई के 15 फोरलेन सड़कों का होगा निर्माण फोरलेन सड़कों के विस्तार से सुरक्षित यातायात के साथ आर्थिक प्रगति का आधार भी मजबूत होगा – उप मुख्यमंत्री अरुण साव रायपुर प्रदेशवासियों को यातायात के लिए मजबूत और चौड़ी सड़कें उपलब्ध कराने लोक निर्माण विभाग ने 15 फोरलेन सड़कों के निर्माण के लिए 708 करोड़ 21 लाख 35 हजार रुपए मंजूर किए हैं। हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत इस राशि से विभिन्न जिलों में कुल 90.5 किमी फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इनके निर्माण से प्रमुख सड़कों पर सुगम यातायात और जॉम से मुक्ति के साथ ही यात्रा का समय घटेगा। फोरलेन सड़कों से सुरक्षित यातायात के साथ ही आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी। इससे कृषि, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। लोक निर्माण विभाग ने दुर्ग जिले में दुर्ग-धमधा-बेमेतरा अंडर ब्रिज से अग्रसेन चौक तक 0.5 किमी फोरलेन मार्ग के लिए तीन करोड़ 41 लाख रुपए, स्मृति नगर पेट्रोल पंप से आई.आई.टी. जेवरा सिरसा तक 7 किमी फोरलेन सड़क के लिए 20 करोड़ 64 लाख रुपए, मिनी माता चौक से महाराजा चौक-ठगड़ा बांध तक 4.70 किमी फोरलेन मार्ग के लिए 28 करोड़ 58 लाख रुपए तथा महाराजा चौक से बोरसी चौक तक 1.80 किमी फोरलेन सड़क के लिए 23 करोड़ 97 लाख रुपए मंजूर किए हैं।  विभाग ने रायगढ़ में ढिमरापुर चौक से कोतरा थाना चौक तक 2.50 किमी के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 41 करोड़ 49 लाख रुपए, रायगढ़-कोतरा-नंदेली राज्य मार्ग के किमी 1 से किमी 5 तक के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 55 करोड़ 29 लाख रुपए, रायगढ़-लोईंग-महापल्ली मुख्य जिला मार्ग के किमी 1 से किमी 5 तक विद्युतीकरण सहित फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 81 करोड़ 48 लाख रुपए तथा 6 किमी तमनार फोरलेन बायपास के निर्माण के लिए 152 करोड़ 17 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। रायपुर जिले में अभनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 में 2.8 किमी लंबाई के फोरलेन में उन्नयन के लिए 17 करोड़ 9 लाख रुपए, राजिम में नवीन मेला स्थल से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किमी फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए 34 करोड़ 20 लाख रुपए, अंबिकापुर में गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक 5 किमी लंबाई के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 61 करोड़ 34 लाख रुपए, बिलासपुर में 13.40 किमी कोनी-मोपका फोरलेन बायपास मार्ग के लिए 82 करोड़ 80 लाख 26 हजार रुपए एवं कोटा-लोरमी-पंडरिया मार्ग में 21 किमी सड़क के फोरलेन चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 71 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग ने जशपुर जिले में कुल 7.30 किमी लंबाई के तीन सड़कों के फोरलेन में उन्नयन एवं मजबूतीकरण के लिए 36 करोड़ 85 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इनमें 2 किमी लंबा पत्थलगांव के इंदिरा चौक से जशपुर रोड, 1.50 किमी लंबा इंदिरा चौक से अंबिकापुर रोड तथा 3.80 किमी लंबा इंदिरा चौक से रायगढ़ रोड शामिल हैं। विभाग ने कबीरधाम जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के किमी 50 से किमी 57 तक फोरलेन में उन्नयन और डिवाइडर निर्माण के लिए भी 54 करोड़ 21 लाख रुपए मंजूर किए हैं।  “राज्य में बेहतर और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। फोरलेन सड़कों का विस्तार केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार भी तैयार करता है। लोक निर्माण विभाग द्वारा अधोसंरचना विकास में बड़े पैमाने पर निवेश कर कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।” – अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री

ग्वालियर-आगरा का सफर होगा महज 50 मिनट में, केंद्रीय मंत्री ने हाईस्पीड कॉरिडोर से आर्थिक विकास का दिया भरोसा

ग्वालियर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेस-वे निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए बड़ा दावा किया कि इस हाईस्पीड कॉरिडोर के बनते ही ग्वालियर से आगरा की दूरी महज 45 से 50 मिनट में सिमट जाएगी। करीब 5500 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा यह 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई गति देगा। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी मौजूद रहे। यातायात तेज और सुरक्षित सिंधिया ने कहा कि देश में तेजी से विकसित हो रहा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला बन रहा है। उन्होंने कहा, ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे (MP News Gwalior Agra high Speed Corridor) वर्तमान मार्ग से करीब 32 किलोमीटर छोटा होगा और कुल दूरी लगभग 88 किलोमीटर रह जाएगी। मौजूदा 2 लेन सडक़ को अपग्रेड कर 6 लेन हाईस्पीड कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जहां न्यूनतम गति 100 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। कॉरिडोर में सीमित एंट्री-एग्जिट के साथ कुल 4 इंटरचेंज बनाए जाएंगे, जिससे यातायात तेज और सुरक्षित रहेगा। सिंधिया ने कहा कि अब दो-लेन सड़क को अपग्रेड करके छह-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें न्यूनतम गति 100 किमी/घंटा होगी. आगरा से ग्वालियर का सफर अभी 2.5-3 घंटे में पूरा होता है, लेकिन एक्सप्रेस-वे बनने के बाद सिर्फ 45-50 मिनट में पूरा होगा. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लगभग तीन साल में ये एक्सप्रेस-वे जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  आधुनिक सुविधाओं वाला होगा नया एक्सप्रेस-वे सिंधिया ने कहा कि नया एक्सप्रेस-वे पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं वाला बन रहा है. इसमें सिर्फ चार मुख्य एंट्री-एक्जिट पॉइंट होंगे, जिससे ट्रैफिक में कोई दिक्कत नहीं आएगी. हाई-स्पीड कॉरिडोर बिना रुकावट चलेगा. लोग तेज और आराम से सफर कर सकेंगे. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में चंबल नदी पर नया छह-लेन का पुल बनाया जाएगा. यह पुल सबसे आधुनिक तकनीक से बनेगा और डिजाइन में दुनिया के बेहतरीन पुलों जैसा होगा।  उन्होंने कहा कि इसके साथ ही शिवपुरी को जोड़ने के लिए लगभग 28 किलोमीटर लंबा पश्चिमी बाईपास भी डेवलप किया जा रहा है, जिसकी लागत लगभग 1,400 करोड़ रुपये है. इससे दिल्ली, ग्वालियर, शिवपुरी और गुना के बीच यात्रा आसान और तेज होगी।  600 करोड़ रुपये की लागत से नया आधुनिक रेलवे स्टेशन बनेगा केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेस-वे और पश्चिमी बाईपास मिलाकर लगभग 7,000 करोड़ की परियोजनाएं क्षेत्र को मिली हैं. इसके अलावा ग्वालियर में 600 करोड़ रुपये की लागत से नया आधुनिक रेलवे स्टेशन भी बन रहा है. उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स से पूरे ग्वालियर-चंबल इलाके का कायाकल्प होगा और यहां निवेश, रोजगार और व्यापार के नए मौके लोगों को मिलेंगे।  आधुनिक तकनीक से तैयार होगा 6 लेन का विश्वस्तरीय ब्रिज उन्होंने कहा, परियोजना के तहत चंबल नदी पर आधुनिक तकनीक से 6 लेन का विश्वस्तरीय ब्रिज बनाया जाएगा। साथ ही शिवपुरी को जोडऩे के लिए लगभग 28 किलोमीटर लंबा पश्चिमी बायपास विकसित किया जा रहा है, जिसकी लागत करीब 1400 करोड़ रुपए है। इससे दिल्ली, ग्वालियर, शिवपुरी और गुना के बीच आवागमन और अधिक सुगम होगा। 7000 करोड़ के प्रोजेक्ट से बदलेगी तस्वीर सिंधिया ने कहा, हाईस्पीड कॉरिडोर (MP News Gwalior Agra high Speed Corridor) और पश्चिमी बायपास को मिलाकर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को करीब 7000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट मिले हैं। इसके अलावा ग्वालियर में 600 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक रेलवे स्टेशन का निर्माण भी जारी है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने पर क्षेत्र में निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।  

पर्यावरणीय मंजूरी नियमों में बदलाव, 45 दिन में ‘सिया’ ने नहीं दी प्रतिक्रिया तो मुख्य सचिव करेंगे निर्णय

भोपाल  खदान, सड़क निर्माण या अन्य परियोजनाएं हों, इनकी पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़े महत्वपूर्ण नियम में केंद्र सरकार बदलाव करने जा रही है। इसके प्रभावी होने पर यदि किसी परियोजना को राज्य पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) 45 दिन तक स्वीकृति नहीं देती है तो राज्यों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इस पर निर्णय करेगी। इसमें प्रमुख सचिव, पर्यावरण और प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास सदस्य होंगे। इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रारूप की अधिसूचना जारी कर सुझाव मांगे हैं। अभी ऐसी व्यवस्था है कि यदि 45 दिन तक सिया की स्वीकृति नहीं मिलती तो परियोजना अपने आप स्वीकृत मानी जाती है। मध्य प्रदेश में भी वर्ष 2025 में ऐसा मामला सामने आ चुका है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सभी राज्यों में सिया है। वहां भी ऐसे मामले हो सकते हैं। इसी कारण केंद्र सरकार नियम बदलने जा रही है। अपने आप अनुमति मिलने की व्यवस्था में कमी यह है कि बिना मूल्यांकन के परियोजनाएं स्वीकृत होने पर उन्हें भी अनुमति मिल जाती है, जिन्हें पात्रता नहीं होती। यानी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की शर्तों के अनुरूप नहीं होतीं। सामान्यत: 45 दिन में स्वीकृति नहीं मिलने का बड़ा कारण सिया की बैठक नहीं होना है। नई व्यवस्था में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन करने के बाद ही अनुमति मिल पाएगी। इससे विवाद या पक्षपात की स्थिति भी नहीं बनेगी। अभी कई बार यह आरोप लगता है कि 45 दिन तक जानबूझकर बैठकें नहीं की जातीं, जिससे बिना मूल्यांकन अनुमति मिल सके।  

इंदौर के ट्रिपल लेयर ब्रिज से तीन एनएच मार्गों को मिलेगा रास्ता, पचास हजार वाहन होंगे प्रभावित

इंदौर इंदौर के बायपास पर एमआर-10 जंक्शन पर थ्री लेयर फ्लायओवर का काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। हालांकि, दो साल में फ्लायओवर का निर्माण पूरा होना था, लेकिन इसमें देरी हुई। अब यह ब्रिज अक्तूबर तक बनकर तैयार होगा। ब्रिज पर देश का सबसे बड़ा पियर कैप बनाया जा रहा है, जिसकी चौड़ाई 27 मीटर रहेगी। इसी पियर कैप के ऊपर गर्डर रखे गए हैं।  इंदौर के एमआर-10 जंक्शन पर ब्रिज बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि यहां तीन राष्ट्रीय राजमार्ग आकर मिलते हैं। एबी रोड के अलावा इंदौर-अहमदाबाद और इंदौर-नागपुर हाईवे इस जंक्शन से जुड़ते हैं। नागपुर को जोड़ने के लिए इंदौर-हरदा के लिए 25 किलोमीटर लंबा बायपास बनाया गया है। इसका ट्रैफिक अंडरपास से होकर गुजरेगा। वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी इस ब्रिज के निर्माण से हर दिन 50 हजार से ज्यादा वाहन चालकों को फायदा होगा। इसके अलावा इंदौर आने वाले वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी। अभी तक बोगदों के भीतर से वाहनों को आना पड़ता है और इस कारण कई बार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, लेकिन अब इससे भी राहत मिलेगी। बेस्ट प्राइस की तरफ के मार्ग से वाहन इंदौर की ओर ब्रिज के नीचे से आ सकेंगे। फ्लायओवर का एक हिस्सा जंक्शन पर बंगाली चौराहे की तरफ बना है, जबकि दूसरे सिरे का निर्माण बेस्ट प्राइस के पास हुआ है। डेढ़ किलोमीटर लंबे इस ब्रिज के नीचे एक और ब्रिज बन चुका है, जिस पर एबी रोड का ट्रैफिक गुजर रहा है। महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहन इस ब्रिज का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अंडरपास को इंदौर-हरदा मार्ग से जोड़ा गया है। अंडरपास बनकर तैयार हो चुका है। अब सड़क निर्माण स्टार चौराहा तक किया जाएगा। इंदौर-हरदा मार्ग का निर्माण भी अंतिम दौर में है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, मुंबई के सी लिंक की तर्ज पर ब्रिज पर एस्थेटिक केबल से लाइटिंग की जाएगी, ताकि यह आकर्षक दिखे। यह फ्लायओवर इंदौर की एंट्री का मुख्य मार्ग भी बनेगा। यहां से ज्यादातर वाहन शहर में आ-जा सकेंगे। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह प्रदेश का पहला तीन स्तरीय ब्रिज है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ इंदौर की एंट्री को भी आसान बनाएगा।   

404 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे बनेगा कोटा-इटावा के बीच, NHAI 3 जिलों की जमीन लेकर देगा दो गुना पैसा

 भोपाल  कोटा से इटावा के बीच 404 कि.मी लंबे अटल प्रोग्रेस-वे अब पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही बनाने की योजना है। राज्य शासन से संकेत मिलने के बाद नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (NHAI) ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित 90 गांवों की पूर्व में चिह्नित की गई जमीन का सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, श्योपुर के 48 और भिंड के 23 गांव भी इसमें शामिल हैं, जिनके सत्यापन होना है। तीन साल पहले चिन्हित की गई जमीनों का दोबारा सत्यापन कराने के पीछे कारण ये है कि, इस गैप के दौरान किसानों ने अधिग्रहण के लिए चिह्नित जमीनों को कहीं बेच तो नहीं दिया। सत्यापन के बाद जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों के नाम उनके गांव और रकबा प्रकाशित किया जाएगा। दावे-आपत्ति पूरी होते ही खातों ट्रांसफर होगा पैसा दावे-आपत्ति के बाद किसानों के बैंक खातों में उनसे ली गई जमीन का पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा। अटल प्रोग्रेस-वे का पुराना रूट अलाइनमेंट 90 गांव से होकर गुजरेगा। इसमें सबलगढ़ के 11 गांव, जौरा के 29 गांव, मुरैना के 15 गांव, अंबाह के 10 गांव, पोरसा के 25 गांव की जमीन शामिल हैं। नए रूट अलाइनमेंट के विरोध के बाद रोकी गई थी कार्रवाई 6 साल पहले 2020 में जब इस प्रोजेक्ट का सर्वे किया गया तो किसानों की जमीन का अधिग्रहण किए जाने के लिए उनकी सूची तैयार की गई थी। भूमि अधिग्रहण होता उससे पहले केंद्र सरकार ने अटल प्रोग्रेस-वे का रूट अलाइनमेंट चेंड कर दिया। लेकिन, नए रूट अलाइनमेंट के बाद किसानों में असंतोष दिखने लगा, क्योंकि नए रूट अलाइनमेंट में किसानों की ज्यादा जमीनें जा रही थी। इस दौरान सबलगढ़ से पोरसा के बीच किसानों में कड़ा विरोध भी देखने को मिला, जिसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई अप्रैल 2023 में तत्काल प्रभाव से रुकवा दी। 3 साल बाद धरातल पर आया प्रोजेक्ट इसके बाद 3 साल ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन अब एक बार फिर ये धरातल पर आया है। केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 हजार 645 करोड़ रुपए लागत के अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराने के आदेश दिए हैं। कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा मिलेगा इसमें अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण किसानों को उनकी जमीन लेने के बदले कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देगा। पुराने रूट अलाइनमेंट में कम जाएगी किसानों की जमीन अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराए जाने की दशा में 90 गांव के 2089 किसानों की महज 488.01 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। 450 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन बची वहीं, अगर नए रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण होता तो 96 गांव के 14137 किसानों की 935.3 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जाती। अंतर साफ स्पष्ट है कि पुराने रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे बनाने से 12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से अधिक जमीन बच रही है, जो आजीवन उनकी केती के इस्तेमाल में आती रहेगी। फिर सड़कों पर उतरेंगे किसान अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर मप्र किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी का कहना है कि किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा देने के आदेश मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से करने चाहिए। किसान दो गुना मुआवजा में तो अपनी जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए कतई नहीं देंगे। आंदोलन पहले भी हुआ था और अब फिर से सड़कों पर उतरेंगे किसान। मध्य प्रदेश में एंट्री श्योपुर से होगी कोटा से 78 किलोमीटर दूरी के बाद प्रोग्रेस-वे की श्योपुर से प्रदेश में एंट्री होगी। श्योपुर के 48 गांव से ये हाइवे गुजरेगा। यहां के छीताखेड़ी, जालेरा, जुवाड़, सिरसोद, जैनी समेत 26 गांव ऐसे हैं, जो कि बीहड़ क्षेत्र में मौजूद हैं या उससे बिल्कुल सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों में अच्छे पहुंच मार्ग भी अभी नहीं हैं। 43 गांव चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं श्योपुर के बाद मुरैना के सबलगढ़, जौरा, मुरैना, अंबाह, पोरसा से होते हुए 90 गांव से ये हाईवे जुड़ेगा। जिनमें 43 गांव ऐसे हैं जो कि चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं या उसमें ही मौजूद हैं। यहां गढुला, बंथर, अटार, गरजा, डंडोली, गूंज, रछेड़, धोर्रा समेत अन्य गांव बीहड़ के कारण विकास की मुख्य धारा से आज भी पिछड़े हुए हैं। पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा मुरैना के पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा। यहां के 25 गांव से होते हुए इसे उप्र के इटावा से जोड़ा जाएगा। शुरुआत में प्रोग्रेस वे भिंड शहर से सटे बरही और रानीपुरा गांव से गुजरेगा। इसके बाद अटेर क्षेत्र के 23 गांव से प्रोग्रेस-वे गुजरना है। भिंड के 13 गांव ऐसे हैं जो बीहड़ में मौजूद हैं या उससे सटे हुए। 3 राज्यों को कवर कर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से मिलेगा अटल प्रोग्रेस-वे अटल प्रोग्रेस-वे को राजस्थान से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक ले जाया जाएगा। 404 किलोमीटर लंबा ये प्रोग्रेस वे राजस्थान में कोटा के सीमाल्या गांव से शुरू होगा और फिर श्योपुर, मुरैना से भिंड होते हुए इटावा तक पहुंचेगा। वहां इटावा के ननवा गांव से प्रोग्रेस-वे को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। पूरे मार्ग में करीब 150 गांव प्रोग्रेस-वे से कवर होंगे और इमनें से 85 गांव ऐसे हैं जो चंबल के बीहड़ कहलाते हैं या उन बीहड़ों से सटे हैं।

दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन

दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के हुआ पीटीआरआई में प्रशिक्षण भोपाल सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यातायात की नवीन तकनीकों से परिचय कराने के लिये इलेक्ट्रॉनिक इनफोर्समेंट इन एमपी एण्ड टाइम बाउंड इनवेस्टीगेशन फोर रोड़ विषय पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा के निर्देशानुसार पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) भोपाल में किया गया। मध्यप्रदेश में सड़क पर होने वाली वाहन दुर्घटनाओं एवं दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स के माध्यम से दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु में कमी लाने के लिये पीएम राहत योजना (कैशलेस), राहवीर योजना, हिट एण्ड रन पीड़ित प्रतिकर योजना का व्यापक प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया गया। साथ ही यातायात प्रवर्तन की नई तकनीकों जैसे पीओएस, आईटीएमएस, ई-चालन जैसे नव प्रयोगों के बारे में व्यापक अद्यतन रूप से विषय-विशेषज्ञों द्वारा सेमिनार में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया। साथ ही संस्थान के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट-1988, सीएमवीआर-1989, मध्यप्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स-1994 के अद्यतन नवीन प्रावधान तथा वर्तमान में यातायात प्रबंधन में प्रचलित ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ई-डार प्रणाली के बारे में व्यापक रूप से अवगत कराया गया। सड़क सुरक्षा प्रबंधन का उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना, जिसमें पदयात्रियों तथा साइकिल, वाहन चालकों को प्राथमिकता दी गयी है और भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या एवं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करना है। प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई टी.के. विद्याथी द्वारा 4-ई के प्रमुख स्तंभ जैसे एजुकेशन ,इंजीनियरिंग, इनफोर्समेंट एवं इमरजेंसी-केयर की तथा सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को प्रशिक्षणार्थियों के समक्ष रखा। उनके द्वारा यातायात प्रवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए ई-इनफोर्समेंट पर जोर दिया। साथ ही ओवर स्पीडिंग से निवारण के लिये इंटरसेप्टर व्हीकल की उपयोगिता को बढ़ाए जाने का अनुरोध किया। वर्तमान में भारत सरकार की योजनाओं राहगीर एवं कैशलेस उपचार के साथ-साथ गोल्डन ऑवर की अवधारणा से प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया गया। सेमिनार में पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक अभिनीत कुमार रंजन, राजेश मिश्रा, विक्रम सिंह रघुवंशी, उप पुलिस अधीक्षक मनोज खत्री, हिमांशु कार्तिकेय एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी भी उपस्थित रहे। कोर्स के समापन में प्रशिक्षणार्थियों को पीटीआरआई द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये।  

मध्य प्रदेश में नई सड़कें बनाने का बड़ा अभियान, 50 अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर तैयार

ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने तीन महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। कुल 5.80 किलोमीटर लंबाई वाली इन सड़कों पर करीब 7 करोड़ 17 लाख रुपए की लागत आएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अप्रैल माह से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार ये सड़कें मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही हैं। निर्माण कार्य के दौरान सडक़ों पर मौजूद करीब 50 अतिक्रमणों को चिह्नित कर हटाया जाएगा, जिससे सड़कें चौड़ी और सुरक्षित बन सकें। ये हैं प्रस्तावित तीन सड़कें नयागांव रायरू बायपास से रेडियो रूम तक लंबाई: 0.50 किमी अनुमानित लागत: 104.95 लाख रुपए सिकरवार मार्केट से पुरानी छावनी चौराहा मार्ग (नाला निर्माण सहित) लंबाई: 1.30 किमी अनुमानित लागत: 232.95 लाख रुपए रायरू गांव से बॉडन का पुरा होते हुए जोर वाले बाबा गंगापुर वाया प्यारा सिंह का पुरा तक लंबाई: 4.00 किमी अनुमानित लागत: 362.55 लाख रुपए कुल लंबाई 5.80 किमी और कुल अनुमानित लागत 7.17 करोड़ रुपए है। यातायात और जल निकासी में सुधार इन सड़कों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। व्यापारिक गतिविधियों, स्कूल-कॉलेज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। विशेष रूप से सिकरवार मार्केट से पुरानी छावनी मार्ग पर नाला निर्माण से जल निकासी की समस्या भी दूर होगी। 5.80 किमी लंबाई वाली तीन सड़कों को सात करोड़ से ज्यादा की लागत से बनाया जाएगा। अभी सड़कों को लेकर टेंडर लगाए जा चुके हैं, टेंडर ओपन होते ही अप्रैल से निर्माण कार्य शुरू होगा। – देवेंद्र भदौरिया, कार्यपालन यंत्री पीडब्ल्यूडी  

प्रधानमंत्री मोदी ने दी मंजूरी, मध्य प्रदेश में 80 किमी फोरलेन प्रोजेक्ट शुरू होगा

भोपाल  मोदी कैबिनेट ने मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात दी है। मोदी कैबिनेट की बैठक में बदनावर-पेटलावाद-थंदला-तिमारवानी खंड से 80.45 किलोमीटर लंबे चार लेन के कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी है, जिसकी कुल पूंजी लागत 3,839.42 करोड़ रुपये है। स्वीकृत कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा। इस खंड को अपग्रेड करने से उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज तक सीधी 4-लेन कनेक्टिविटी पूरी हो जाएगी, जिस पर गति 80-100 किमी प्रति घंटा होगी। 50 गांवों से होकर 80 किमी लंबा फोरलेन बदनावर से पेटलावद व्हाया टिमरवानी इंटरचेंज नया फोरलेन 80.45 किमी लंबा है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 3839.42 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। संभावना जताई जा रही है कि अगले दो साल में इस प्रोजेक्ट का काम पूरा होगा। शासन-प्रशासन स्तर पर तैयारियां चल रही है। यह फोरलेन करीब 50 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा। जिनमें बदनावर क्षेत्र के 14 गांव भी शामिल हैं। इस फोरलेन रोड के बनने के बाद यात्रा का समय करीब एक घंटे तक कम होने की उम्मीद है। प्रशासनिक सर्वे पूरा, जल्द अवॉर्ड मिलेगा बदनावर से पेटलावद व्हाया टिमरवानी इंटरचेंज फोरलेन निर्माण में कई जगह सरकारी जमीन के साथ ही निजी जमीन का उपयोग होना है। इसके लिए सभी सरकारी विभागों द्वारा एक ज्वाइंट सर्वे किया गया है।  बदनावर एसडीएम प्रियंका मिमरोट द्वारा सभी विभागों के साथ एक मीटिंग की गई है। इसमें सर्वे पर विस्तृत चर्चा हुई। तहसीलदार सुरेश नागर ने बताया कि सड़क निर्माण के संबंध में सभी शासकीय और निजी जमीन का अधिग्रहण होना है। किस गांव में कितनी जमीन का भू-अर्जन किया जाना है। इसकी रिपोर्ट बनाई गई है। किसानों के खेत, कुएं, पेड़-पौधों के साथ बोरिंग आदि की जानकारी जुटाई गई है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट का प्रकाशन किया जाएगा और दावे-आपत्ति बुलाए जाएंगे। ये होगा फायदा     यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) पर स्थित टिमरवानी इंटरचेंज से सीधे जोड़ेगा।     इस फोरलेन के बनने से यात्रा के समय में लगभग एक घंटे की कमी आने की उम्मीद है।     यह मार्ग धार और झाबुआ जिलों के आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिससे अंतरराज्यीय संपर्क मजबूत होगा और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।     इस कॉरिडोर के अपग्रेडेशन से अप्रैल-2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाले यातायात को संभालने में भी मदद मिलेगी।