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जीते जी हक़ के लिए जंग, मौत के बाद मिली प्रोन्नति की जीत

हिसार 
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) की सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्या फोगाट की मौत के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तत्कालीन आयुक्त अशोक कुमार गर्ग की जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध पाया गया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डॉ. फोगाट की पदोन्नति दो साल तक जानबूझकर रोकी गई और उनकी मृत्यु के बाद उसे मंजूरी दी गई। प्रशासन का तर्क था कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही थी। लेकिन 27 अक्तूबर, 2024 को उनकी मृत्यु होते ही प्रशासन ने वह कार्रवाई बंद कर दी और उन्हें पदोन्नति दे दी। जांच अधिकारी ने इस देरी को 'अन्यायपूर्ण' करार दिया है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव ने 18 अगस्त, 2025 को हिसार के तत्कालीन आयुक्त अशांक कुमार गर्ग को जांच के आदेश दिए थे जिसकी रिपोर्ट उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति से पहले नवंबर माह में ही दे दी थी। इस रिपोर्ट की प्रति दैनिक ट्रिब्यून के पास है और इसी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। डॉ. फोगाट ने अपने अंतिम नोट में कुछ अधिकारियों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। तत्कालीन आयुक्त ने विवि की आंतरिक जांच को 'असंगत' माना है और अब इस पूरे मामले की जांच किसी बाहरी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए वैज्ञानिकों के चयन में पारदर्शिता की कमी पाई गई।
 
मैक्सिको ट्रेनिंग के लिए दिव्या की जगह भेज दिया 56 वर्ष का वैज्ञानिक
जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि हकृवि में इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए वैज्ञानिकों की अनुशंसा के लिए पारदर्शी नीति नहीं है। यह मामला दिव्या फोगाट के मामले में स्पष्ट हुआ। हकृवि ने एक सवाल के जवाब बताया कि मैक्सिको में जुलाई, दिसंबर, 2022 और बांग्लादेश में मार्च, 2023 के प्रशिक्षण के लिए दिव्या फोगाट का नाम डिपार्टमेंटल एडवाइजरी कमेटी ने अनुशंसित किया था।

मैक्सिको के प्रशिक्षण के लिए दिव्या फोगाट ने अपना नाम अपने स्तर पर सीधे आईसीएआर से नामित करवा लिया था और नियोक्ता की सहमति नहीं ली थी। इसलिए उन्हें मैक्सिको जाने की अनुमति नहीं दी गई। मैक्सिको के लिए 56 वर्षीय वैज्ञानिक ओपी बिश्नोई को नामित किया गया। आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आईसीएआर राष्ट्रीय बाॅडी है और उसकी अनुशंसा की विश्वसनीयता है। प्रशिक्षण के लिए 40 से कम उम्र के युवा वैज्ञानिक को भेजना था जबकि विवि ने 56 वर्षीय वैज्ञानिक को भेजा जिसकी आईसीएआर ने अनुशंसा नहीं की थी। मनमाने ढंग से उसे प्रशिक्षण के लिए रोका गया।

प्रशासन का पक्ष और विरोधाभास
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि डॉ. फोगाट की मौत स्वास्थ्य कारणों से हुई और कार्यस्थल पर प्रताड़ना का कोई सबूत नहीं मिला। प्रशासन ने दिव्या फोगाट की मौत के लिए उसके पारिवारिक विवाद को भी कारण बताया। हालांकि, जांच अधिकारी ने प्रशासन के जवाबों को संतोषजनक नहीं माना और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

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