samacharsecretary.com

बक्सर से साहिबगंज तक विकसित होगा गंगा कॉरिडोर, तटबंधों पर लगेंगे सोलर पैनल

 पटना
 बिहार की सबसे बड़ी समस्या मानी जाने वाली बाढ़ की त्रासदी को अब राज्य की आर्थिक ताकत में बदलने की तैयारी है। राज्य सरकार गंगा, कोसी और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के प्रबंधन, गाद के सदुपयोग और तटबंधों के विकास की कार्ययोजना पर काम कर रही है

फरक्का समझौते और गंगा जल संधि में बिहार के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को होटल चाणक्या में ‘गंगा जल संधि: बिहार की जल सुरक्षा’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में ये बातें कहीं।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव और राज्यसभा सदस्य संजय झा ने कलश में जल अर्पित कर किया।

14 करोड़ की आबादी को रोजगार देना सरकार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के अलग होने के बाद बिहार के हिस्से में 54 प्रतिशत भूभाग रहा, जबकि दो-तिहाई आबादी बिहार में रह गई।

आज राज्य की आबादी करीब 14 करोड़ है। सरकार का लक्ष्य इस बड़ी आबादी को व्यवस्थित करते हुए एक करोड़ लोगों को रोजगार और नौकरी देना है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष सामान्य से 32 प्रतिशत कम वर्षा होने के बावजूद मध्य प्रदेश से सोन नदी के रास्ते 15.5 लाख क्यूसेक पानी बिहार पहुंचा।

इससे गंगा का पानी उल्टा बहने लगा और पुनपुन व गंडक के क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बनी। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर 25 साल से लंबित बाणसागर समझौते के सुलझने को बड़ी उपलब्धि बताया। इसके तहत तीन-चौथाई पानी बिहार और एक-चौथाई झारखंड को मिला है।

फरक्का समझौते से बिहार को हो रहा नुकसान
दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के साथ हुई बैठक का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फरक्का समझौते के कारण बिहार को काफी परेशानी हो रही है। फरक्का में पानी रोके जाने से गाद भागलपुर और कटिहार जैसे निचले क्षेत्रों में जमा होती है।

उन्होंने कहा कि बक्सर में बिहार को केवल 300 क्यूसेक पानी मिलता है, जबकि राज्य इससे पांच गुना अधिक पानी छोड़ता है।

नदियों में गाद जमा होने और जल प्रवाह प्रभावित होने से बाढ़ की समस्या बढ़ती है। सरकार इस समस्या का समाधान निकालने के लिए केंद्र के साथ बातचीत कर रही है।

बक्सर से साहिबगंज तक बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बाढ़ से बचाव को विकास से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) मॉडल अपनाया जा रहा है

बक्सर से साहिबगंज तक गंगा के दोनों तटबंधों पर फोरलेन सड़क और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में लोग समुद्र के किनारे यानी ‘सी-फेसिंग’ घर पसंद करते हैं। बिहार में बाढ़ से बचाई गई लाखों एकड़ जमीन पर ‘गंगा-फेसिंग’ घर और बड़े टाउनशिप विकसित किए जा सकते हैं। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

10 रुपये में मिलेगी गंगा की मिट्टी, तटबंधों पर लगेंगे सोलर पैनल
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गाद प्रबंधन की नई नीति बनाई है। इसके तहत ईंट-भट्ठा संचालकों और आम लोगों को मात्र 10 रुपये में गंगा की मिट्टी उपलब्ध कराई जा रही है। जबकि खेतों से मिट्टी लेने के लिए 300 से 400 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।

नदियों के तटबंधों का इस्तेमाल ग्रीन एनर्जी के उत्पादन में भी किया जाएगा। करीब 400 किलोमीटर लंबी गंगा, 300 किलोमीटर से अधिक गंडक और 287 किलोमीटर लंबी कोसी नदी के तटबंधों पर फ्लोटिंग सोलर प्लेट लगाने की योजना है। इससे सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा और पानी का भी बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

उत्तर बिहार में गाद और दक्षिण बिहार में बालू का होगा अलग प्रबंधन
मुख्यमंत्री ने उत्तर और दक्षिण बिहार की नदियों के प्रबंधन को लेकर अलग-अलग रणनीति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तर बिहार की नदियों में गाद निकालने के लिए एनएचएआई के साथ समझौता किया जा रहा है।

वहीं, दक्षिण बिहार की नदियों में ऐसा समझौता नहीं होगा, क्योंकि वहां की बालू राज्य के लिए ‘पीला सोना’ है और राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण बिहार के गया, नवादा, जमुई और बांका जैसे जिलों में भीषण जल संकट है। इससे निपटने के लिए नदियों को जोड़ने यानी रिवर लिंकिंग और टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

बिहार के हितों की रक्षा के बाद ही दूसरे देशों को मिले पानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के 80वें वर्ष में भी हर साल बाढ़ से निपटने के लिए ‘फ्लड फाइटिंग’ करना चिंता का विषय है। नदियों का पाट लगातार चौड़ा हो रहा है। बक्सर में गंगा का पाट करीब छह किलोमीटर है, जो भागलपुर पहुंचते-पहुंचते 40 किलोमीटर तक फैल जाता है।

गंगा जल संधि पर बिहार का रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश बांग्लादेश को पानी मिलना चाहिए, लेकिन पहले बिहार के हितों की रक्षा होनी चाहिए।

सिंचाई, पेयजल और उद्योगों की जरूरत पूरी करने के बाद जो पानी बचेगा, वही आगे जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के जल संसाधनों पर राज्य के लोगों का अधिकार और उनकी जरूरतें सर्वोपरि हैं।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here