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बेंगलुरु के ‘बार कैपिटल’ में छाया नया ट्रेंड, दो बार्स ने दिल्ली-मुंबई को पीछे छोड़ा

बेंगलुरु 

शाम ढलते ही जब शहर की बत्तियां जगमगाती हैं, तो अक्सर मन में दिल्ली की चकाचौंध या मुंबई की नाइटलाइफ़ का ख्याल आता है. लेकिन अगर आप अब भी यही सोच रहे हैं कि देश का सबसे बेहतरीन कॉकटेल या बार इन्हीं दो बड़े शहरों में मिलेगा, तो अब अपनी ट्रैवल लिस्ट अपडेट करने का समय आ गया है. भारत की बार संस्कृति ने एक ऐसी करवट ली है जिसने बरसों पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ दिया है. गोवा में सजे एक शानदार अवॉर्ड समारोह ने यह साफ कर दिया कि अब दिल्ली के रुतबे और मुंबई की रफ्तार को पछाड़कर बेंगलुरु ने बाजी मार ली है. तो चलिए जानते हैं, देश के उस नए 'बार कैपिटल' के बारे में जहां के दो बार्स ने दिल्ली-मुंबई को पछाड़ते हुए शीर्ष दो स्थानों पर कब्जा कर लिया है.

बेंगलुरु का जलवा और दिल्ली-मुंबई की विदाई 

'30 बेस्ट बार्स इंडिया' के ताजा नतीजों ने इस बार सबको हैरान कर दिया. यह इन पुरस्कारों के छह साल के इतिहास में पहली बार हुआ है जब टॉप-4 की लिस्ट से दिल्ली और मुंबई पूरी तरह गायब हैं. इस बार की पूरी महफिल बेंगलुरु के नाम रही, जहां के 'स्पिरिट फॉरवर्ड' (Spirit Forward) ने नंबर-1 और 'सोका' (Soka) ने नंबर-2 स्थान हासिल कर पूरे देश में अपनी धाक जमा दी. बेंगलुरु अब सिर्फ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर का शहर नहीं रहा, बल्कि यह भारत का नया अड्डा बनकर उभरा है. टॉप-30 की लिस्ट में इस शहर के 6 बार शामिल हैं, जिनमें से 4 तो सीधे टॉप-10 में अपनी जगह बनाए हुए हैं.

गोवा का स्टाइल और नए शहरों की एंट्री

घूमने-फिरने वालों के लिए गोवा हमेशा से पहली पसंद रहा है और इस बार गोवा ने भी अपनी ताकत दिखाई है. 'आउट्रिगर' और 'बॉइलरमेकर' जैसे बार्स ने तीसरा और चौथा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि गोवा सिर्फ समंदर किनारे मस्ती के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन ड्रिंक्स के लिए भी जाना जाता है. इस रेस में दिल्ली का 'लेयर' पांचवें स्थान पर रहकर किसी तरह टॉप-5 में अपनी जगह बचाने में कामयाब रहा. सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि अब इस रेस में कोलकाता जैसे शहर भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. दो साल पहले तक जहां बार कल्चर की इतनी चर्चा नहीं थी, आज वो शहर बड़े-बड़े केंद्रों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.

आजकल के मुसाफिर सिर्फ एक गिलास जाम नहीं चाहते, उन्हें चाहिए एक अच्छा माहौल और नया अनुभव. यही वजह है कि अब बार्स में पुराने घिसे-पिटे मेनू की जगह देश की अपनी चीजों और स्थानीय मसालों का इस्तेमाल बढ़ गया है. छिपे हुए छोटे कॉकटेल बार से लेकर छतों पर बने शानदार रूफटॉप बार तक, हर जगह अब मेहमानों को कुछ नया देने की कोशिश की जा रही है.

इस साल 1,200 से ज्यादा नामांकन यह बताते हैं कि भारतीय बार मालिक अब दुनिया भर के बार्स के साथ मुकाबला करने के लिए तैयार हैं. इस तरक्की की गूंज अब विदेशों में भी सुनाई दे रही है. पिछले साल एशिया के 50 सबसे अच्छे बारों में पांच भारतीय नाम शामिल थे. दिल्ली के 'लेयर' ने तो दुनिया के 100 बेहतरीन बारों में अपनी जगह बनाकर भारत का मान बढ़ाया है. तो अगली बार जब आप घूमने का प्लान बनाएं, तो इन शहरों की उन गलियों का भी रुख करें जहां कुछ नया और खास पक रहा है.
 

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