samacharsecretary.com

प्राचीन माँ बीजासन मंदिर में बुजुर्गों-महिलाओं-दिव्यांगों को रहत देने बनेगा रोप-वे

बूंदी.

हाड़ौती की आराध्य देवी माँ बीजासन के दरबार में अब भक्तों को 750 से अधिक सीढ़ियां चढ़ने की मजबूरी नहीं रहेगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इन्द्रगढ़ में 18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रोप-वे का शिलान्यास किया। इन्द्रगढ़ (बूंदी) स्थित माँ बीजासन मंदिर राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र का एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी शक्तिपीठ है। यह मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है।

इन्द्रगढ़ माताजी: रोप-वे से सुगम होंगे दर्शन

  1. इन्द्रगढ़ की पहाड़ी पर स्थित माँ बीजासन मंदिर सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वर्तमान में यहाँ पहुँचने के लिए भक्तों को कड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।
  2. रोप-वे बनने से सबसे अधिक लाभ बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को होगा। अब वे मिनटों में पहाड़ी के शिखर पर स्थित मंदिर तक पहुँच सकेंगे।
  3. ओम बिरला ने कहा कि इस सुविधा के आने से श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और गाइडों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  4. इन्द्रगढ़ की पहाड़ी पर स्थित माँ बीजासन मंदिर

पर्यावरण और पर्यटन का अद्भुत तालमेल

  1. चूंकि बीजासन माता मंदिर अभयारण्य क्षेत्र (रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के पास) में स्थित है, इसलिए विकास कार्यों में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है।
  2.     इको-फ्रेंडली प्रोजेक्ट: रोप-वे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों और वन संपदा को न्यूनतम नुकसान हो।
  3.     पर्यटन मानचित्र पर इन्द्रगढ़: बिरला ने विश्वास जताया कि आगामी कुछ वर्षों में इन्द्रगढ़ राजस्थान के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरेगा।

दो बार हो चुकी रोप-वे की घोषणा
बीजासन माता मंदिर पर पूर्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी रोपवे की घोषणा हुई थी, लेकिन रोप-वे की घोषणा केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई। और धरातल पर नहीं आ पाई।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

  1. प्राचीनता: माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सिद्ध संत बाबा कृपानाथ जी महाराज ने यहाँ कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने स्वयं पर्वत की चट्टान चीरकर दर्शन दिए थे।
  2. नाम का रहस्य: 'बीजासन' नाम देवी दुर्गा के उस स्वरूप को दर्शाता है जो राक्षस रक्तबीज का संहार करने के बाद उसके ऊपर आसन लगाकर विराजमान हुई थीं।
  3. स्थापना: कहा जाता है कि बूंदी के शासक राव शत्रुसाल के भाई इंद्रसाल ने इन्द्रगढ़ नगर बसाया था और पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर को भव्य रूप दिया।

मंदिर की भौगोलिक स्थिति और वास्तुकला

  1. स्थान: यह मंदिर बूंदी जिले की इन्द्रगढ़ तहसील में स्थित है। यह जयपुर से लगभग 160 किमी और कोटा से करीब 75 किमी दूर है।
  2. पहाड़ी और सीढ़ियाँ: मंदिर पहाड़ी की चोटी पर एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बना हुआ है। वर्तमान में भक्तों को माता के दर्शन के लिए करीब 750 से 1000 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
  3. प्रवेश: गुफा के अंदर माता की स्वयंभू (स्वयं प्रकट) प्रतिमा विराजमान है। मंदिर परिसर से अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।

धार्मिक महत्व और मान्यताएँ

  1. नवदुर्गा स्वरूप: यहाँ माँ बीजासन को दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में सात बहनों (नवदुर्गा के स्वरूप) की पूजा का भी विधान है।
  2. मनोकामना पूर्ण: भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। विशेष रूप से निःसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहाँ आते हैं।
  3. अखंड ज्योति: मंदिर में एक अखंड ज्योति 24 घंटे प्रज्वलित रहती है, जिसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है।

प्रमुख उत्सव और मेले

  1. नवरात्रि मेला: साल में दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) के दौरान यहाँ विशाल मेला लगता है। इस समय राजस्थान ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं।
  2. धार्मिक आयोजन: नवरात्रि में यहाँ विशेष मंगल आरती, भोग आरती और संध्या आरती का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होना पुण्यदायी माना जाता है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here