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अयोध्या के बाद अब बंगाल! भव्य राम मंदिर और भाजपा कनेक्शन पर सियासी हलचल

कोलकाता
ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासित राज्य पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं लेकिन उससे पहले वहां मंदिर-मस्जिद के बहाने ध्रुवीकरण की कोशिशें तेज हो गई हैं। पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य के मुर्शीदाबाद जिले के बेलदांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया था। उसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद दुर्गा आंगन और महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया और अब नादिया जिले के शांतिपुर में ‘बंगाली राम’ थीम पर भव्य राम मंदिर बनाने की योजना सामने आई है, जो इन दिनों चुनावी राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।
 
क्या है ‘बंगाली राम मंदिर’ की योजना?
यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का स्थल नहीं होगा, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक बड़ा केंद्र बनेगा। मंदिर की अवधारणा 15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि कृतिबास ओझा की परंपरा पर आधारित है। कृतिबास ओझा ने ही संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली’ लिखा था, जिसे आज भी बंगाल के घर-घर में पढ़ा जाता है। इसी वजह से भगवान राम के इस रूप को ‘बंगाली राम’ या ‘हरा राम’ कहा जाता है।

कौन बना रहा है मंदिर?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट करवा रहा है। यह ट्रस्ट 2017 से ही इस परियोजना पर काम कर रहा है। रविवार को ट्रस्ट ने इस बात की जानकारी दी है कि मंदिर के लिए जमीन का अंतिम सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसे परियोजना की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।

भाजपा से क्या कनेक्शन?
इस ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व तृणमूल विधायक अरिंदम भट्टाचार्य हैं, जो अब भाजपा में हैं। हालांकि, उनका कहना है कि यह कोई चुनावी परियोजना नहीं है। उन्होंने बताया कि शांतिपुर भक्ति आंदोलन की धरती रही है और कृतिबास ओझा ने राम को बंगाली संस्कृति से जोड़ा। इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए यहां भव्य राम मंदिर के निर्माण की योजना बनाई गई है, जो निर्माण के शुरुआती दौर में पहुंच चुका है।

कितनी जमीन और कितनी लागत?
उन्होंने बताया है कि इस मंदिर के लिए 15 बीघा जमीन स्थानीय निवासी लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी ने दान की है। इस परियोजना को करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मंदिर परिसर में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र होगा, जहां सांस्कृतिक केंद्र, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और शोध केंद्र भी होंगे। नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को इस मंदिर का संरक्षक बनाया गया है।

क्यों उठ रहे हैं सवाल?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शांतिपुर का संबंध कृतिबास ओझा की रामायण से जुड़ा है, इसलिए यहां राम मंदिर बनना चाहिए। कई लोग आगे भी जमीन दान करने की इच्छा जता रहे हैं लेकिन कुछ लोग इसकी टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण ऐसे समय में सामने आया है जब बंगाल में मंदिर-मस्जिद की राजनीति तेज है, लेकिन ट्रस्ट का कहना है कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजना है।

शांतिपुर का ऐतिहासिक महत्व
वहीं, अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि अगर सरकार सहयोग करना चाहे तो उसका स्वागत किया जाएगा। हुगली नदी के तट पर स्थित शांतिपुर भक्ति आंदोलन, चैतन्य महाप्रभु की परंपरा और कीर्तन संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में ‘बंगाली राम मंदिर’ इस क्षेत्र को एक नई धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दे सकता है।

 

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