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आठ भ्रष्ट अधिकारियों की 4.14 करोड़ की संपत्ति होगी राजसात

पटना.

राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी की है। ब्यूरो ने आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लगभग 4.14 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों को राजसात करने का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने सोमवार को बताया कि भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को राजसात करने की प्रक्रिया लगातार तेज की जा रही है। वर्ष 2025 में आठ मामलों में प्रस्ताव भेजे गए हैं, और प्रस्ताव पारित होते ही कार्रवाई की जाएगी।

8 लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा

ब्यूरो के अनुसार, जिन आठ लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें दो तत्कालीन मुखिया, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक अधीक्षण अभियंता, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), एक टैक्स दारोगा और एक सीडीपीओ शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ वर्ष 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज किए गए थे। इनमें लखीसराय के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार के खिलाफ 2012 में मामला दर्ज हुआ था, जिनकी 88.25 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है। हथुआ (गोपालगंज) के तत्कालीन एसडीओ विजय प्रताप सिंह के खिलाफ 2015 में तीन भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए थे, जिनकी 62.35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है।

प्रस्ताव में तत्कालीन अधिकारियों के नाम

पटना ग्रामीण की तत्कालीन एसडीपीओ फूलपरी देवी की 12.76 लाख रुपए की संपत्ति, मोतिहारी नगर परिषद के तत्कालीन टैक्स दरोगा अजय कुमार गुप्ता की 34.62 लाख रुपए की संपत्ति और समस्तीपुर की जितवारिया ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया प्रमोद कुमार राय की 3.71 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है।

ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी की 90.75 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है, जिन्हें पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। पश्चिम चंपारण की राज मारहिया पकड़ी पंचायत, लौरिया के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव की 1.70 करोड़ रुपए की संपत्ति राजसात करने की अनुशंसा की गई है। दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय के खिलाफ 2019 में मामला दर्ज हुआ था, जिनकी 41.12 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है।

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