samacharsecretary.com

अमृत सरोवर से रिझोरा में लौटी हरियाली और खुशहाली

भोपाल

ग्वालियर जिले की ग्राम पंचायत दौलतपुर के ग्राम रिझोरा ने जल संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। कभी पानी की कमी से जूझता ग्वालियर जिले का यह गांव आज “अमृत सरोवर” के कारण समृद्धि और खुशहाली की नई कहानी लिख रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बनकर तैयार हुए इस सरोवर ने न केवल गांव की तस्वीर बदली है, बल्कि भू-जल स्तर में अभूतपूर्व वृद्धि कर किसानों के जीवन में नई ऊर्जा भर दी है। ग्राम रिझोरा में पहले जल संचय के लिए कोई प्राकृतिक स्रोत नहीं था, जिससे भू-जल स्तर लगातार गिरता जा रहा था। खेती, पेयजल और पशुओं के लिए पानी की समस्या गंभीर होती जा रही थी। इस चुनौती से निपटने के लिए ग्राम सभा ने सामूहिक निर्णय लेकर तालाब निर्माण का संकल्प लिया।

ग्रामीणों की दो वर्षों की मेहनत और सरकार की विभिन्न योजनाओं के संयोजन से लगभग 16.77 लाख रुपये की लागत से यह सरोवर बनकर तैयार हुआ है। पिछले साल की अच्छी बारिश में यह सरोवर लबालब भर गया। सरोवर के भरने के साथ ही गांव का भू-जल स्तर तेजी से बढ़ा। जो कुएं सूखने की कगार पर थे, वे फिर से जल से भर गए और बंद पड़े बोरवेल भी पुनः चालू हो गए। इससे सिंचाई के साधन मजबूत हुए और खेती को नई दिशा मिली। रिझोरा का यह अमृत सरोवर साबित करता है कि सामूहिक प्रयास, सही योजना और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है। यह पहल अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

खेती में आया बदलाव, बढ़ी किसानों की आय

भू-जल स्तर में सुधार के बाद अब किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती भी करने लगे हैं। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

मांगलिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बना सरोवर

अमृत सरोवर अब केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक-मांगलिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां पक्के घाट, सीढ़ियां और सुरक्षा के लिए रेलिंग का निर्माण किया गया है, जिससे लोग आसानी से पूजा-पाठ और आयोजन कर पा रहे हैं। सरोवर के किनारे लगने वाला मोरछट का मेला अब आसपास के गांवों के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण शामिल होते हैं।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here