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सेवानिवृत्त हुए प्रकाश सिंह, कलेक्ट्रेट सभागार में हुआ भावभीना विदाई समारोह

राजगढ़  जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में लंबे समय से कार्यरत एवं स्टे नंबर-2 और शस्त्र लाइसेंस शाखा के वरिष्ठ कर्मचारी प्रकाश सिंह की सेवानिवृत्ति के अवसर पर आज एक भावभीना विदाई समारोह कलेक्टर सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी, उनके परिजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह में श्री प्रकाश सिंह को उनके उत्कृष्ट सेवाभाव, विनम्र आचरण और कर्तव्यनिष्ठा के लिए पुष्पमालाओं, साफा एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। साथी कर्मचारियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी और उनके साथ बिताए गए क्षणों को साझा किया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि श्री सिंह के परिजनों ने भी समारोह में भाग लेकर उनके सेवा-जीवन पर गर्व व्यक्त किया। समारोह के दौरान माहौल आत्मीयता और भावनाओं से भरा रहा। श्री प्रकाश सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “यह सेवा मेरे लिए सम्मान का विषय रही। कार्यालय मेरे परिवार जैसा रहा है, और आप सभी मेरे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।” उन्होंने सभी सहकर्मियों का आभार जताते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक अलविदा कहा। समारोह में मौजूद सभी लोगों ने उनके स्वस्थ, सुखद एवं समृद्ध सेवानिवृत्त जीवन की कामना की।

नक्सल नेटवर्क पर शिकंजा कसने उतरी ED, संयुक्त अभियान में होगी भागीदारी

रायपुर नक्सलियों के खिलाफ ज्वाइंट एक्शन में अब ED भी शामिल होगी. टेरर फंडिंग को लेकर रायपुर में हुई बड़ी बैठक में “प्लान ऑफ एक्शन टू नक्सल” पर चर्चा के दौरान इस संबंध में फैसला लिया गया. बैठक में छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना,आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के आईजी, और डीआईजी शामिल थे. इस दौरान ED और NIA के अफसर से हाल में टेरर फंडिंग को लेकर हुए खुलासे पर चर्चा हुई. इसके साथ ED और NIA के ज्वाइंट ऑपरेशन पर जोर दिया गया. पूरी बैठक IB के स्पेशल डायरेक्टर ऋत्विक रूद्र ने ली. वित्तीय लेन-देने रोकने का काम करेगी ED इस संबंध में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ED का काम अगर ऐसे मामलों में वित्तीय लेनदेन है, तो उसे रोकना है. ये IB की भी सूचना हो सकती है कि लेनदेन की जानकारी निकाल लें. विभिन्न एजेंसियां ये काम करती हैं. ये दिखता है कि मामला ईडी को दिए जाने लायक है तो दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि चाहे नक्सलियों का अर्बन, लीगल, फाइनांसियल या रूरल बेस हो, सब पर एजेंसियां काम कर रही हैं.

एम.पी. ट्रांसको देवास में हुआ सी.पी.आर. प्रशिक्षण सत्र

सब-स्टेशन स्टाफ ने सीखी जीवन बचाने की तकनीक भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा देवास व आसपास के सब-स्टेशनों में तैनात आउटसोर्स कर्मियों सहित अन्य कार्मिकों के लिए सी.पी.आर. (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और आपातकालीन चिकित्सा तकनीकों पर केंद्रित एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन सिविल हॉस्पिटल देवास में किया गया। डॉ. बी.आर. शुक्ला (मेडिसिन विशेषज्ञ) और डॉ. कुलदीप एवं उनकी टीम द्वारा कर्मचारियों को जीवन रक्षक प्राथमिक चिकित्सा के व्यावहारिक गुर सिखाए गए। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा सी.पी.आर. की तकनीकी जानकारी और उसका लाइव प्रदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि हृदयगति रुकने की स्थिति में शुरुआती तीन मिनट के भीतर दी गई सी.पी.आर. सहायता से मरीज के जीवित बचने की संभावना तीन गुना तक बढ़ जाती है। डॉ. शुक्ला ने कहा कि “हर व्यक्ति को जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी होनी चाहिए, सी.पी.आर. जैसी सरल विधि भी किसी की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। बिजली व्यवस्था से जुड़े स्टाफ अगर यह ज्ञान रखते हैं तो वे केवल अपने परिवार ही नहीं, समाज के लिए भी मददगार बन सकते हैं। स्वास्थ्य शिविर में देवास, चापड़ा, सोनकच्छ, शंकरगढ़, बरोठा, मक्सी, किशनगढ़ सहित 9 सबस्टेशनों के आउटसोर्स कर्मियों सहित लगभग 40 कर्मियों ने हिस्सा लिया।  

महाराष्ट्र में सुरक्षा एजेंसियों का एक्शन, नकली बर्थ सर्टिफिकेट के जरिये रह रहे बांग्लादेशी बेनकाब

मुंबई  महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य के कैबिनेट मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को बताया कि सरकार ने विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करेगी। इसके साथ ही सभी जिलों को आदेश दिया गया है कि 15 अगस्त तक फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों की जांच पूरी कर उन्हें रद्द कर दिया जाए। सरकार ने साफ किया है कि अब किसी को भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी सुविधाएं नहीं दी जाएंगी। अवैध बांग्लादेशियों की पहचान की जाएगी बावनकुले ने कहा कि अब तक जिन अवैध घुसपैठियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है, उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा। उन्होंने बताया कि जिनके पास फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट हैं, उनकी पूरी लिस्ट तैयार की जा रही है और उन सभी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले इन लोगों को पहचान पत्र, स्कूल दाखिला, आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता का भ्रम पैदा कर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा था। महाराष्ट्र में फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट पर कार्रवाई, अवैध बांग्लादेशियों की पहचान तेज फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनने की प्रक्रिया में स्थानीय अधिकारियों, एजेंटों और नेताओं की मिलीभगत सामने आई है। कई मामलों में नगरपालिका या पंचायत कार्यालय के कर्मचारियों ने बिना किसी दस्तावेज सत्यापन के पैसे लेकर प्रमाणपत्र जारी किए। कुछ ने स्कूलों के फर्जी रिकॉर्ड का सहारा लिया तो कुछ ने किराए के पते और जाली पहचान के जरिए यह फर्जीवाड़ा किया। डिजिटल रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों की क्रॉस वेरिफिकेशन की कमी ने इस गड़बड़ी को बढ़ावा दिया। अब टास्क फोर्स हर बर्थ सर्टिफिकेट की फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए जांच करेगी। कांग्रेस पर बोला हमला बावनकुले ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि संसद में ‘ऑपरेशन महादेव’ को लेकर जो बयान दिए गए, वे सेना और देश के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि जब देश आतंकवादियों पर सख्त कार्रवाई करता है, तो कांग्रेस सवाल उठाने लगती है, जिससे उसकी मानसिकता साफ होती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब ‘महादेव’ से भी नफरत करने लगी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर दी गई जानकारी को पूरी तरह तथ्यात्मक और पारदर्शी बताया। फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस इस सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रही है और पाकिस्तान जैसी भाषा बोल रही है, जिससे उसकी असलियत सामने आ गई है।

प्रकृतिक आपदा से पिड़ित व्यक्ति को उपलंब्ध कराई गई राहत राशि

प्रकृतिक आपदा से पिड़ित व्यक्ति को उपलंब्ध कराई गई राहत राशि कलेक्टर ने व्हीसी के माध्यम से अनुभागवार राहत राशि वितरण की समीक्षा    सिंगरौली प्रकृतिक आपदा अतिवृष्टि से पिड़ित जिले के ऐसे नागरिक जिनके आवास, फसल, पशु हानि सहित आकाशीय बिजिली की चपेट में आने से पिड़ित व्यक्तियो के राहत राशि वितरण की समीक्षा कलेक्टर श्री चन्द्र शेखर शुक्ला ने व्हीसी के माध्यम से की। एवं अनुभागवार राहत राशि वितरण की जानकारी ली। जिसके तहत सभी राजस्व अधिकारियो द्वारा अवगत कराया गया कि अपने अपने अनुभागो में पिड़ित व्यक्तियो के सम्पत्तियो का सर्वे कराकर उन्हे राहत राशि उपलंब्ध करा दी गई है।  कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियो को निर्देश दिए कि अपने  क्षेत्रो के  पटवारियो द्वारा एक बार फिर से सर्वे कराये कि कोई पिड़ित व्यक्ति छूट तो नही है अगर त्रृटिवस कोई पिड़ित छूट गया है तो उसके क्षतिग्रस्त सम्पत्ति का  आकलन कर राहत राशि उपलंब्ध कराये। उन्होने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित करे कि कोई भी पिड़ित व्यक्ति राहत राशि से वंचित न रहे।

सभी 55 जिलो में लागू होंगे सड़क सुरक्षा के उपाय : मुख्य सचिव जैन

भोपाल सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जस्टिस श्री अभय मनोहर सप्रे ने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आव्हान किया है। उन्होंने मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर बैठक की। जस्टिस श्री सप्रे ने बैठक में उपस्थित समस्त अधिकारियों से आम आदमी के जीवन को सुरक्षित रखने का दायित्व निभाने की अपील भी की। उन्होंने सड़क सुरक्षा की गंभीरता के दृष्टिगत अधिकारियों को सलाह और मार्गदर्शन भी दिया। उन्होंने कहा कि स्वीडन में सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत अच्छा काम हुआ है। वैसा काम हमारे देश में और मध्यप्रदेश में हम भी कर सकते हैं। सड़क दुर्घटना से प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु होती है। उनके जीवन को बचाने के लिए मिशन की शुरूआत मध्यप्रदेश से की है। उन्होंने बताया कि रोड सेफ्टी की मैदानी स्थिति जानने के लिए वे सड़क से ही अपनी यात्रा कर रहे है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के लिए दीर्घकालीन एवं तात्कालिक नीति तैयार की जाकर क्रियान्वयन किया जाये। अच्छे काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जाये तथा खराब सड़क बनाने वालों को ब्लैक लिस्ट करें। सड़कों पर इतनी सुरक्षा होनी चाहिये कि एक भी व्यक्ति की जान नहीं जाये। जस्टिस श्री सप्रे ने अधिकारियों से कहा कि लोगों की जान बचाने की आपको जिम्मेदारी दी गयी है और इस कार्य पर सुप्रीम कोर्ट पूरे समय ध्यान दे रहा है। जस्टिस सप्रे ने कहा कि जैसे मध्यप्रदेश के इंदौर ने स्वच्छता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, वैसे ही प्रदेश के शहर सड़क सुरक्षा में अपना स्थान बनायेंगे। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की है कि प्रदेश के अधिकारी लोगों की जान बचाने के लिए अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करेंगे। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि भारत सरकार की ही तरह तात्कालिक एवं दीर्घकालीन उपाय प्रदेश के सभी 55 जिलों में लागू किये जायेंगे। प्रदेश के 9 जिलों में सड़क सुरक्षा के लिए आई.आई.टी. मद्रास की मदद ली जायेगी और बाद में 6 और जिलों में यह किया जायेगा। सड़क सुरक्षा के लिए सभी एजेंसियों में समन्वय स्थापित किया जायेगा। पुलिस, नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की टीम बनायी गयी है। इंजीनियरों को केपिसिटी बिल्डिंग के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा तथा सड़कों एवं ब्रिज की मरम्मत की जायेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि हर जिले मे आटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन शुरू किया जायेगा। ड्राइविंग इंस्टीट्यूट की संख्या बढ़ायी जायेगी। यातायात नियमों का पालन कराया जायेगा। लोगों को हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित किया जायेगा। सभी वाहनों का इंश्योरेंस किया जायेगा। चालान जनरेशन एवं पेमेण्ट सिस्टम दुरूस्त किया जायेगा। सड़क दुर्घटना में गोल्डन ऑवर में जान बचाने के प्रयास किये जायेंगे। एम्बुलेंस की व्यवस्थाएं सुधारी जायेंगी। इमरजेंसी रिस्पांस टाइम को बेहतर किया जायेगा। यातायात नियमों एवं सड़क सुरक्षा की जागरूकता के लिए स्कूलों में बताया जायेगा। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें नियमित तौर पर आयोजित की जायेंगी। सड़क सुरक्षा कोष का उपयोग किया जायेगा। राहवीर योजना का भी व्यापक प्रचार-प्रसार करने की भी जानकारी दी गई। मुख्य सचिव श्री जैन ने जस्टिस श्री अभय मनोहर सप्रे को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश के अधिकारी उनके निर्देश और मार्गदर्शन से बेहतर कार्य करेंगे। एक्शन प्लान से सड़क दुर्घटनाओं में तथा मृत्यु में कमी लाने के प्रयास सफल हो सकेंगे। नोडल अधिकारी एवं परिवहन आयुक्त श्री विवेक शर्मा ने राज्य के एक्शन प्लान का प्रस्तुतीकरण किया। बैठक में प्रमुख सचिव श्री संदीप यादव, परिवहन सचिव श्री मनीष सिंह, गृह सचिव श्रीमती कृष्णा वेणी-देशावतु, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, लोक निर्माण, मध्यप्रदेश सड़क निगम विकास निगम, एवं रेल्वे के अधिकारी उपस्थित रहे। समिति करेगी जिलों का भ्रमण सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति भोपाल, नर्मदापुरम एवं नरसिंहपुर जिलों का भ्रमण कर जिला सड़क सुरक्षा समिति के साथ बैठक करेगी। इसके पूर्व समिति ने इंदौर जिले का भ्रमण कर बैठक की थी।  

महापौर की अध्यक्षता में मेयर इंन काउसिल की बैठक आयोजित

सिंगरौली   नगर पालिक निगम सिंगरौली की महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल की अध्यक्षता एवं  मेयर इंन काउसिल के सदस्य खुर्शिद आलम, श्रीमती अंजना शाह, श्रीमती शिवकुमारी कुशवाहा, श्रीमती श्यामला, श्रीमती रीता देवी जापति, श्रीमती बबली शाह,, श्रीमती रूकमन प्रजापति,नगर निगम आयुक्त श्री डी.के शर्मा  के उपस्थिति में मेयर इंन काउसिल की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्व प्रथम चर्चा उपरांत मेयर इंन काउसिल की पूर्व  बैठक के कार्यवाही विवरण का सर्वसम्मति  से पुष्टि की गई।  तत्पश्चात नगर निगम सिगरौली के वार्ड क्रमांक 32 में स्थित कादम्बरी काम्प्लेक्स के दुकानदारों द्वारा दुकानों के व्यवस्थापन किए जाने हेतु  प्राप्त आवेदन पत्र एवं पूर्व में जिन्हे दुकान आवटित की गई थी ऐसे आवंटियों के संबंध में विस्तार से चर्चा कर निर्णय लिया गया। मेयर इंन काउसिल की बैठक में म.प्र. अचल सम्पत्ति अन्तरण नियम 2016 में संशोधित नियम 2023 के तहत 5 वर्ष से  अधिक समय तक किराएदार के रूप में दुकानों में व्यवसायरत किराएदार को व्यवस्थापन  पद्यति से दुकानों का आंवटन किया जा सकता है। उपरोक्त सभी दुकानदार 5 वर्ष से अधिक समय से दुकानों में काबिज है। उपरोक्त सभी दुकानदार अप्रैल 2020 से दुकानों का किराया जमा करना बन्द कर दिया है। वर्ष 2025-26 के कलेक्टर गाइडलाईन अनुसार प्रति दुकान रूपये 5,90,58 लागत मूल्य निर्धारित हो रही है। अतः उपरोक्त वर्णित सभी किराएदारों से बकाया किराया मांह अप्रैल 2020 से वर्तमान तक का जमा कराते हुए म०प्र० अचल सम्पत्ति अन्तरण नियम 2023 के प्रावधान अनुसार व्यवस्थापन पद्यति से दुकानों के आवंटन के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान उपायुक्त आर पी बैस,  सहायक आयुक्त रूपाली द्विवेदी, सहाय आयुक्त  एच एम श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री प्रदीप चडार, लेखाधिकारी अनुपम दुबे,  सहायक यंत्री प्रवीण गोस्वामी, अभयराज सिंह, आलोक टीरु, एस एन द्विवेदी, सहायक विधि अधिकारी अक्षत उपाध्याय, आदि उपस्थित रहे।

दिल्लीवालों को बड़ी राहत: एक दशक बाद सबसे स्वच्छ हवा, देखें ताजा AQI रिपोर्ट

नई दिल्ली पिछले एक दशक में जुलाई का महीना दिल्ली के लिए सबसे स्वच्छ रहा, जहां औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 79 दर्ज किया गया, जो 2015 के बाद का सबसे कम आंकड़ा है. हाल ही में हुई रुक-रुक कर बारिश ने दिल्ली की वायु को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे पूरे सप्ताह के दौरान वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है. AQI में सुधार के पीछे बारिश का एक महत्वपूर्ण कारण है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पिछले दस वर्षों में जुलाई का महीना सबसे अधिक स्वच्छ रहा. लगातार हो रही बारिश के कारण वायु गुणवत्ता में सुधार होता रहा, जिससे दिल्ली की हवा ने पिछले एक दशक के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. बीते सालों में जुलाई के महीने में दिल्ली की हवा बीते वर्षों में जुलाई के दौरान दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) विभिन्न स्तरों पर रहा है. 2015 में यह 138.13, 2016 में 145.64, 2017 में 98.39, 2018 में 103.83, 2019 में 134, 2020 में 83.80, 2021 में 110.06, 2022 में 87.29, 2023 में 83.67, 2024 में 96 और 2025 में 79 दर्ज किया गया है. यह 2025 का AQI पिछले वर्षों की तुलना में सबसे कम है, जो वायु गुणवत्ता में सुधार का संकेत देता है. सामान्य से अधिक हुई बारिश जुलाई महीने में बारिश की मात्रा औसत से अधिक रही है, और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश की संभावना जताई है. इसके साथ ही, 31 जुलाई को बारिश के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया गया है. AQI कितना बेहतर दिल्ली और एनसीआर में लगातार बारिश के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार हुआ है. जुलाई महीने में औसत AQI 79 दर्ज किया गया, जो 2015 के बाद से सबसे कम है. यह AQI संतोषजनक श्रेणी में आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, AQI को 0 से 50 के बीच अच्छा, 51 से 100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच मध्यम, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है. वायु प्रदूषण विशेषज्ञ ने क्या कहा? विशेषज्ञ इस दावे को लेकर संदेह में हैं. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की वायु प्रदूषण विशेषज्ञ और कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने बताया कि वायु गुणवत्ता में सुधार मौसम की परिस्थितियों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण प्रदूषक पानी में मिल जाते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर घटता है. इस वर्ष लगातार हो रही तीव्र बारिश को इस स्थिति का मुख्य कारण माना गया है. रॉयचौधरी ने सरकार के योगदान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सीमित समय में सभी उत्सर्जन डेटा की तुलना करना संभव नहीं है. मानसून के मौसम में इस तरह के आकलन करना उचित नहीं होगा. सर्दियों के महीनों में प्रदूषण के स्तरों का विश्लेषण करना आवश्यक है, ताकि यह पता चल सके कि सरकार की पहल सही दिशा में प्रगति कर रही हैं या नहीं. सामान्य से अधिक हुई बारिश जुलाई में बारिश की मात्रा पहले के औसत से अधिक रही है. दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र ने बुधवार सुबह 8:30 बजे तक 220.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की, जबकि इसका लंबा अवधि का औसत 209.7 मिमी है. इसी दिन शाम 5:30 बजे तक इस केंद्र ने 15 मिमी और बारिश दर्ज की. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई. पालम मौसम केंद्र ने बुधवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में 4.6 मिमी और सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे के बीच 28.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की. इसी समय में पूसा स्टेशन पर क्रमशः 37.5 मिमी और 12.5 मिमी बारिश हुई, जबकि जनकपुरी स्टेशन में देर दोपहर 11.5 मिमी बारिश हुई. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक अधिकारी के अनुसार, गुरुवार को भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी, जबकि शुक्रवार से बहुत हल्की से हल्की बारिश, गरज और बिजली गिरने की घटनाएं देखी जा सकती हैं.

अब संपत्ति खरीद के लिए पैन-आधार लिंक जरूरी, OTP से होगी जांच

नई दिल्ली देश में संपत्ति खरीद और पंजीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण परिवर्तन की योजना बनाई जा रही है. नए पंजीकरण विधेयक-2025 के मसौदे में प्रस्तावित है कि हर संपत्ति खरीद के समय स्टांप के लिए OTP आधारित सत्यापन अनिवार्य होगा. इससे सभी संपत्तियों की जानकारी आयकर विभाग के पास पहुंच जाएगी. इसके अलावा, बैनामी संपत्ति और भूमि खरीद पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार आधार और पैन नंबर का सत्यापन बैनामे से पहले अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है. ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने नए पंजीकरण विधेयक-2025 का मसौदा तैयार किया है. वर्तमान में संपत्ति खरीदने के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड नंबर देना अनिवार्य है, लेकिन इनका सत्यापन नहीं किया जाता. सभी राज्यों के स्टांप एवं निबंधन विभागों के लिए यह आवश्यक है कि 30 लाख रुपये से अधिक के बैनामे की जानकारी आयकर विभाग को प्रदान करें, लेकिन कई मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती. इसके परिणामस्वरूप, बैनामी संपत्तियों का पता लगाना कठिन हो जाता है. खरीदार का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा इस प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद, आयकर विभाग का एआई आधारित प्रणाली यह मूल्यांकन करेगी कि खरीददार कौन है, उसकी पिछले पांच से छह वर्षों में वार्षिक आय कितनी रही है, और उसने कुल कितनी संपत्तियां खरीदी हैं. यदि किसी व्यक्ति द्वारा उसकी शुद्ध आय से अधिक मूल्य की संपत्ति खरीदी जाती है, तो यह प्रणाली स्वतः नोटिस जारी करेगी. इससे संदिग्ध मामलों की पहचान और त्वरित समाधान में सहायता मिलेगी. आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत संपत्तियों का संपूर्ण विवरण हमारे पास उपलब्ध रहेगा. किसी भी भूमि या संपत्ति की खरीद से पूर्व, खरीदार और विक्रेता के पैन कार्ड का ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद आधार नंबर से भी इसकी पुष्टि की जाएगी. सत्यापन के बाद सभी रजिस्ट्रार अपने अधिकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के माध्यम से बैनामे को मंजूरी देंगे. जैसे ही रजिस्ट्रार द्वारा पोर्टल पर बैनामे को ओटीपी से सत्यापित किया जाएगा, उसकी एक डिजिटल कॉपी हमारे पास उपलब्ध हो जाएगी, जिससे खरीदने और बेचने वाले का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा. वर्तमान में, आयकर विभाग और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों के पास बैनामी संपत्तियों से संबंधित तीन लाख से अधिक शिकायतें लंबित हैं. उत्तर प्रदेश में पैन आधारित सत्यापन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. दान-गिफ्ट पर नजर नई प्रणाली के तहत दान और गिफ्ट में दी गई संपत्तियों पर निगरानी रखी जाएगी. विभाग के पास ऐसी कई शिकायतें आई हैं, जिनमें यह पाया गया है कि किसी व्यक्ति के नाम पर संपत्ति खरीदी गई और कुछ वर्षों बाद उसे दान या गिफ्ट के रूप में किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया गया. इन मामलों की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि संपत्ति के वास्तविक खरीदार वही व्यक्ति था, जिसे बाद में संपत्ति का दान या गिफ्ट दिया गया.

201 देशों में 120 ईसाई बहुल, मात्र दो हिंदू बहुल देश – आंकड़े बता रहे धार्मिक संतुलन की कहानी

नई दिल्ली भारत में कई नेता अकसर बदलती हुई आबादी का मसला उठाते रहे हैं। हाल ही में तमिलनाडु के गवर्नर और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने भी यह मसला उठाया था। हिमंत बिस्वा सरमा का तो कहना है कि 2041 तक असम में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे। इसके अलावा राज्यपाल एन. रवि ने भी असम, पश्चिम बंगाल, यूपी और बिहार के कुछ सीमांत इलाकों को लेकर चिंता जाहिर की। लेकिन दुनिया भर में ऐसी चर्चाएं और चिंताएं अकसर जाहिर की जाती रही है। अब प्यू रिसर्च के एक सर्वे में आया है कि 2010 से 2020 की अवधि में दुनिया में ईसाई बहुल देशों की संख्या में कमी आई है। ईसाई बहुल देशों की संख्या दुनिया में 2010 में 124 थी, जो 2020 में घटकर 120 पर आ गई है। इसकी वजह यह है कि कई देशों में ईसाई आबादी का अनुपात कम हुआ है। जनसंख्या वृद्धि दर में कमी और अपने धर्म को छोड़कर नास्तिक बनना या किसी और मजहब को स्वीकार करना इसकी अहम वजह है। जिन देशों में ईसाई आबादी अब बहुसंख्यक नहीं रही है, वहां कमी का कारण यह है कि बड़ी संख्या में लोगों ने धर्म को छोड़ दिया। ये लोग खुद को अब किसी भी धर्म से नहीं जोड़ते हैं। ये खुद को नास्तिक, अज्ञेयवादी अथवा अनीश्वरवादी मानते हैं। कुल मिलाकर ईसाई देशों की संख्या में 10 सालों के अंतराल में ही बड़ी कमी आ गई और 4 देश नक्शे से घट गए। कुल 5 फीसदी देश दुनिया के ऐसे हैं, जहां बहुसंख्यक आबादी किसी भी धर्म को ना मानने वालों की है। अब बात करते हैं कि आखिर वे कौन से देश हैं, जहां की अब बहुसंख्यक आबादी ईसाई नहीं रही। इन देशों में यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और उरुग्वे जैसे बड़े देश हैं। अब यूके में ईसाई आबादी 49 फीसदी ही बची है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में 47 फीसदी, फ्रांस में 46 और उरुग्वे में 44 फीसदी ही ईसाई जनसंख्या बची है। उरुग्वे में किसी भी धर्म को ना मानने वालों की संख्या 52 फीसदी हो गई है। एक और तथ्य यह है कि नीदरलैंड में भी बहुमत (54 फीसदी) अब किसी मजहब को न मानने वालों का है। इसके अलावा न्यूजीलैंड में यह नंबर 51 पर्सेंट है। हिंदुओं का दुनिया में क्या हाल, बहुमत वाले सिर्फ 2 देश दुनिया के 201 मान्यता प्राप्त देशों में अब 120 ही ईसाई बहुल बचे हैं। इसके अलावा सिर्फ दो देश ही हिंदू बहुल हैं। इन देशों में एक भारत है और दूसरा नेपाल। दिलचस्प फैक्ट है कि 95 फीसदी हिंदू आबादी अकेले भारत में ही बसती है। इसके अलावा बाकी 5 फीसदी जनसंख्या पूरी दुनिया में बिखरी हुई है। यही नहीं दुनिया की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। कुल मिलाकर दुनिया के 60 फीसदी देश अब भी ईसाई बहुल है। हालांकि आने वाले दशकों में इस स्थिति में और बदलाव हो सकता है। कुछ और देश ईसाई बहुल होने का तमगा खो सकते हैं।