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एक करोड़ की रिश्वत डील: नारकोटिक्स अधिकारी और दलाल CBI के हत्थे चढ़े

चित्तौड़गढ़ सीबीआई की टीम ने चित्तौड़गढ़ जिले के एक अफीम किसान से रिश्वत के मामले में नारकोटिक्स के एक अधिकारी सहित दलाल को गिरफ्तार किया है। सीबीआई जयपुर टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। एक किसान को झूठे तथ्यों के आधार पर डोडा चूरा तस्करी में फंसाने के नाम पर एक करोड़ रुपये रिश्वत की मांग की थी। किसान की शिकायत पर नारकोटिक्स के अधिकारी और दलाल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया क्षेत्र में अंजाम दी गई है। सीबीआई की दर्ज एफआईआर के अनुसार गत 15 जुलाई को डूंगला तहसील के आलाखेड़ी गांव के किसान मांगीलाल पुत्र ऊंकार लाल गुर्जर निवासी सांगरिया ने शिकायत दी थी। इसमें बताया कि डूंगला तहसील के आलाखेड़ी निवासी जगदीश मेनारिया ने नारकोटिक्स के अधिकारी महेन्द्र सिंह से संपर्क करने के लिए सूचित किया था। जगदीश मेनारिया से जब किसान ने संपर्क किया तो उसने बताया कि नारकोटिक्स अधिकारी महेन्द्रसिंह ने उसकी कृषि भूमि से 400 किलो डाेडा चूरा जब्त किया है। जगदीश मेनारिया के माध्यम से ही महेन्द्र सिंह ने बताया कि उसके परिवार के सदस्यों को मादक पदार्थ के मामले में नहीं फंसाने के लिए एक करोड़ रुपए देने होंगे। रिश्वत नहीं दिए जाने पर आपराधिक मामलों में फंसा कर उसे जेल भेज दिया जाएगा। नारकोटिक्स अधिकारी ने नशीले पदार्थों के मामले में प्रार्थी व उसके परिवार को न फंसाने के एवज में 9 लाख रुपए भी प्राप्त कर लिए। इसी मामले में गुरुवार रात को आलाखेड़ी निवासी दलाल जगदीश मेनारिया काे एसीबी ने गिरफ्तार किया। इसके बाद नारकोटिक्स के अधिकारी महेन्द्रसिंह को भी गिरफ्तार कर मंडफिया लेकर आए। यहां शुक्रवार को स्वास्थ्य केंद्र पर उसका मेडिकल कराया गया। इस मामले में सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 7A के साथ धारा 61 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। 44 लाख दिए फिर भी नहीं पसीजा दिल प्रार्थी मांगीलाल गुर्जर ने शिकायत में बताया कि सीकर निवासी व नीमच में कार्यरत नारकोटिक्स अधिकारी महेन्द्र सिंह उसके सांगरिया स्थित निवास पर पहुंचा। 27 मार्च को जगदीश मेनारिया से सम्पर्क करने की बात कही थी। जगदीश मेनारिया ने अपने नम्बर भी दिए। इसी दिन जगदीश मेनारिया ने वाट्सएप कॉलिंग कर बताया कि महेन्द्र सिंह ने उसके खेत से 400 किलो डोडा चूरा जब्त किया है। प्रार्थी ने बताया कि उसके खेत पर कोई डोडा चूरा नहीं था। लेकिन जगदीश मेनारिया ने कहा कि एक करोड़ रुपए देने होंगे, नहीं तो जेल जाना पड़ेगा। प्रार्थी ने शिकायत में बताया कि जगदीश मेनारिया के मार्फत 44 लाख रुपए की राशि 2-3 माह में 3 किश्ताें में दी। बाद में उसे सीबीआई के शिकायत नम्बर मिले। इधर, 13 जुलाई को जगदीश मेनारिया ने गांव में आकर उससे 9 लाख रुपए की और मांग की। परेशान होकर उसने सीबीआई को पत्र लिखा और उसके बाद सीबीआई ने जाल बिछा बीती रात उसे गिरफ्तार किया है। अवैध सम्पत्तियों की होगी जांच प्रार्थी मांगीलाल गुर्जर ने शिकायत में बताया कि महेन्द्र सिंह नारकोटिक्स का भ्रष्ट अधिकारी है। इसने जयपुर, सीकर और नीमच में बहुत सम्पत्तियां बनाई है और प्रदेश में कई स्थानों पर एजेन्ट बना रखे है। इसके माध्यम से वह रिश्वत की राशि लेता है। 15 जुलाई को हुई शिकायत के बाद सीबीआई के पुलिस अधीक्षक ने अधिकारी को नियुक्त किया और उसके बाद टीम बना कार्यवाही की गई है। पुलिस उपाधीक्षक को सौंपी जांच सीबीआई ने अपनी एफआईआर में नारकोटिक्स अधिकारी महेन्द्र सिंह व दलाल जगदीश मेनारिया को गिरफ्तार करने का हवाला देते हुए मामले की जांच जयपुर सीबीआई के भ्रष्टाचार अनुभाग के पुलिस उपाधीक्षक कमलेश चन्द्र तिवारी को सौंपी है। गौरतलब है कि नारकोटिक्स विभाग में पूर्व में भी भ्रष्टाचार के मामलाें में सीबीआई कार्यवाही कर चुकी है और कई अधिकारियों को धर लिया गया है। पहले भी लगे लूट के आरोप नारकोटिक्स विभाग में फैले भ्रष्टाचार और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों के विरूद्ध झूठी कार्यवाही करने के मामले में पहले भी कई आरोप लगे है। पिछले दिनों रूद गांव में एक किसान के खेत से एक केटली से अफीम निकाल कर मुकदमा बनाने के मामले में किसानों ने प्रदर्शन किया था और पूरा मामला झूठा बताया था। अब सीबीआई ने कार्यवाही किए जाने के बाद नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों की पोल खुल कर सामने आ गई है।  

लेटरहेड पर पीएम की तस्वीर, संगठन का नाम… छांगुर बाबा ने जनता को ऐसे किया गुमराह

लखनऊ  धर्मांतरण रैकेट के मामले में यूपी एटीएस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर खुद को भारत प्रतीकार्थ सेवा संघ नामक संस्था का अवध प्रांत महासचिव बताता था. इस संस्था को ईदुल इस्लाम नाम का शख्स नागपुर से चला रहा था, जिसे भी एफआईआर में नामजद आरोपी बनाया गया है. छांगुर को बनाया अवध प्रांत का महासचिव   ईदुल इस्लाम ने संस्था के फर्जी लेटर पैड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो लगा रखी थी. संस्था का मुख्यालय नागपुर दिखाकर दावा किया जाता था कि इसका संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से है. जांच में पता चला कि ईदुल इस्लाम ने छांगुर को बाकायदा अवध प्रांत का महासचिव नियुक्त किया था.  छांगुर बाबा ने खुद को "भारत प्रतिकार्थ सेवा संघ" नामक संस्था का अवध प्रांत महासचिव बताया। यह संस्था ईदुल इस्लाम नामक एक दूसरे आरोपी द्वारा चलाई जा रही थी। इतना ही नहीं, इस्लाम ने नागपुर में भी एक फर्जी सेंटर खोलकर संस्था को वैध दिखाने की कोशिश की। आपको बता दें कि नागपुर में ही आरएसएस का हेडक्वार्टर है। अधिकारियों से मिलने के दौरान छांगुर बाबा और इस्लाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो वाले लेटरहेड का इस्तेमाल करते थे। साथ ही दोनों RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों का नाम लेकर खुद को प्रभावशाली और मान्यता प्राप्त संगठन का हिस्सा बताते थे। मुस्लिम देशों से फंडिंग ATS की FIR के अनुसार, छांगुर बाबा ने विदेशी फंडिंग के जरिए आतंकी प्रशिक्षण केंद्र बनाने की योजना बनाई थी। उसे पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों से 500 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग मिली होने का संदेह है। जांच में सामने आया है कि 22 बैंक खातों के जरिए 60 करोड़ रुपये का मनी लॉन्ड्रिंग किया गया। ईडी ने किए कई खुलासे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यूपी और महाराष्ट्र में छांगुर बाबा के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां हैं, जिनमें अधिकतर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर बनाई गई हैं। मुंबई में ‘रनवाल ग्रीन्स’ नाम की एक बहुमूल्य संपत्ति संदिग्ध सौदे के जरिए खरीदी गई। छांगुर बाबा का एक कनेक्शन पनामा स्थित कंपनी ‘Logos Marine’ से भी मिला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय फंडिंग की पुष्टि होती है। फिलहाल छांगुर बाबा हिरासत में है और उसकी भूमिका की जांच एटीएस, एसटीएफ और ईडी द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। मामले में धार्मिक भावना को आहत करने, आतंकी गतिविधियों की साजिश, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों की धाराएं लगाई गई हैं। खुद को बताते थे RSS का करीबी   वे दोनों अफसरों और स्थानीय नेताओं के साथ मुलाकातों व बातचीत में खुद को आरएसएस के बड़े नेताओं का करीबी बताते थे. यही नहीं, एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि ईदुल इस्लाम ने स्थानीय प्रशासन से साठगांठ कर ग्राम समाज और तालाब की जमीनें फर्जी तरीके से खरीदवाने में भी मदद की.  वह अफसरों को जमालुद्दीन उर्फ छांगुर को आरएसएस के नागपुर सेंटर से जुड़ी संस्था का पदाधिकारी बताता था. धर्मांतरण केस की तफ्तीश के दौरान एटीएस थाने में दर्ज एफआईआर में ईदुल इस्लाम को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है.

‘शक और दूरी’ बनी तलाक की वजह, हाईकोर्ट ने कहा- यह वैवाहिक क्रूरता है, पत्नी ने 1 लाख महीने मांगे थे

मुंबई  बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तलाक के एक केस में कहा- यदि पत्नी अपने पति को शारीरिक संबंध से इनकार करती है। फिर उस पर किसी और महिला से संबंध होने का शक करती है तो इसे क्रूरता माना जाएगा। इस तरह की स्थिति तलाक का वैध आधार है। जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोखले ने यह टिप्पणी करते हुए पुणे फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को सही ठहराया। साथ ही महिला की तलाक को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। महिला की मांग थी कि उसके पति को उसे हर महीने 1 लाख रुपए मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया जाए। अब समझिए पूरा मामला… दरअसल, कपल की 2013 में शादी हुई थी। अगले ही साल दिसंबर 2014 से दोनों अलग रहे थे। पति ने 2015 में फैमिली कोर्ट में क्रूरता के आधार पर तलाक की अर्जी दी थी, जिसे मंजूरी मिल गई। पत्नी ने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और पति से 1 लाख रुपए प्रति महीने गुजारा भत्ता की मांग भी की थी। पत्नी बोली- पति से प्रेम करती हूं, पति ने कहा- बेवफाई के आरोप लगाए महिला ने अपनी याचिका में कहा था- मेरे ससुराल वालों ने मुझे प्रताड़ित किया, लेकिन फिर भी मैं अपने पति से प्रेम करती हूं और तलाक नहीं चाहती। पति ने अपनी याचिका में कहा कि पत्नी ने शारीरिक संबंधों से इनकार किया और बेवफाई के आरोप लगाए। साथ ही परिवार, दोस्तों और कर्मचारियों के सामने शर्मिंदा किया। पति ने यह भी कहा कि पत्नी ने उसे छोड़कर अपने मायके चली गई थी। कोर्ट ने फैसले में कहा- शादी में अब सुलह की कोई संभावना नहीं है। पति के तलाक के आधार कानूनी रूप से जायज हैं। लिहाजा, पत्नी की याचिका को खारिज किया जाता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 अप्रैल को दिए एक फैसले में नाबालिग से रेप (POSCO) के आरोप में 3 साल से जेल में बंद 22 साल के युवक को जमानत दे दी थी। जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच ने कहा कि 15 साल की नाबालिग को पता था वह क्या कर रही है, वह इसके परिणाम भी जानती थी।

बैंकिंग इतिहास में पहली बार बोनस शेयर, डिविडेंड से निवेशकों को दोहरी कमाई

मुंबई  मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देश के सबसे बड़े बैंक ने अपने निवेशकों को डबल खुशखबरी दी है. HDFC Bank ने निवेशकों को डिविडेंड और बोनस शेयर देने का ऐलान किया है. प्राइवेट बैंक अपने इतिहास में पहली बार बोनस देने जा रहा है, जिसके रिकॉर्ड डेट का भी ऐलान कर दिया गया है. वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के नतीजे के साथ ही इसकी घोषणा की गई है.  बैंक का कैसा रहा रिजल्‍ट?  HDFC Bank ने शनिवार को वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में साल-दर-साल 12% की ग्रोथ दिखाई है और 18,155 करोड़ रुपये का स्‍टैंडलोन नेट प्रॉफिट (PAT) दर्ज किया. वहीं पिछले वर्ष की इसी तिमाही में ये आंकड़ा 16,175 करोड़ रुपये था.  भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक की इंटरेस्‍ट से इनकम 77,470 करोड़ रुपये की हुई है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 73,033 करोड़ रुपये से 6 फसीदी ज्‍यादा है. HDFC Bank का नेट इंटरेस्‍ट इनकम (NII) 5.4% फीसदी बढ़कर 31,440 करोड़ रुपये हो चुका है. कोर नेट इंटरेस्‍ट मार्जिन 3.35% दर्ज किया गया.  पहली बार बोनस का ऐलान  मार्केट कैपिटल के हिसाब से सबसे बड़ा बैंक पहली बार अपने निवेशकों को बोनस शेयर देने जा रहा है. HDFC Bank ने शनिवार को 1:1 अनुपात में अपने पहले बोनस इश्यू की घोषणा किया है. इसका मतलब है कि अगर आपके पास 1 शेयर है तो आपको 1 शेयर मुफ्त मिलेंगे यानी अब आपके पोर्टफोलियों में उतनी ही कीमत में दो शेयर हो जाएंगे.  रिकॉर्ड डेट का भी ऐलान  बीएसई फाइलिंग में बैंक ने कहा, 'बैंक ने 1:1 के अनुपात में बोनस इक्विटी शेयर जारी करने को मंजूरी दे दी है. अब निवेशकों के अप्रूवल के बाद यह बोनस शेयर डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा.' बोनस इक्विटी शेयरों के लिए रिकॉर्ड डेट बुधवार, 27 अगस्‍त 2025 तय किया गया है.  डिविडेंड भी देगा बैंक  इसके अलावा, एचडीएफसी बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए हर इक्विटी शेयर पर 5 रुपये (यानी 500 प्रतिशत) का अंतरिम डिविडेंड देगी. बैंक ने कहा कि इसके लिए रिकॉर्ड डेट 25 जुलाई 2025 तय किया गया है. पात्र निवेशकों को डिविडेंड का भुगतान 11 अगस्‍त 2025 को किया जाएगा.  15 लाख करोड़ का है ये बैंक  बैंक का ब्याज व्यय 6.6 प्रतिशत बढ़कर 46,032.23 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 43,196 करोड़ रुपये था. इसके अलावा, HDFC Bank शुक्रवार को 1957.40 रुपये पर बंद हुए, जिससे बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 15 लाख 917.42 करोड़ रुपये हो चुका है. 

बैंकिंग इतिहास में पहली बार बोनस शेयर, डिविडेंड से निवेशकों को दोहरी कमाई

मुंबई  मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देश के सबसे बड़े बैंक ने अपने निवेशकों को डबल खुशखबरी दी है. HDFC Bank ने निवेशकों को डिविडेंड और बोनस शेयर देने का ऐलान किया है. प्राइवेट बैंक अपने इतिहास में पहली बार बोनस देने जा रहा है, जिसके रिकॉर्ड डेट का भी ऐलान कर दिया गया है. वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के नतीजे के साथ ही इसकी घोषणा की गई है.  बैंक का कैसा रहा रिजल्‍ट?  HDFC Bank ने शनिवार को वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में साल-दर-साल 12% की ग्रोथ दिखाई है और 18,155 करोड़ रुपये का स्‍टैंडलोन नेट प्रॉफिट (PAT) दर्ज किया. वहीं पिछले वर्ष की इसी तिमाही में ये आंकड़ा 16,175 करोड़ रुपये था.  भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक की इंटरेस्‍ट से इनकम 77,470 करोड़ रुपये की हुई है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 73,033 करोड़ रुपये से 6 फसीदी ज्‍यादा है. HDFC Bank का नेट इंटरेस्‍ट इनकम (NII) 5.4% फीसदी बढ़कर 31,440 करोड़ रुपये हो चुका है. कोर नेट इंटरेस्‍ट मार्जिन 3.35% दर्ज किया गया.  पहली बार बोनस का ऐलान  मार्केट कैपिटल के हिसाब से सबसे बड़ा बैंक पहली बार अपने निवेशकों को बोनस शेयर देने जा रहा है. HDFC Bank ने शनिवार को 1:1 अनुपात में अपने पहले बोनस इश्यू की घोषणा किया है. इसका मतलब है कि अगर आपके पास 1 शेयर है तो आपको 1 शेयर मुफ्त मिलेंगे यानी अब आपके पोर्टफोलियों में उतनी ही कीमत में दो शेयर हो जाएंगे.  रिकॉर्ड डेट का भी ऐलान  बीएसई फाइलिंग में बैंक ने कहा, 'बैंक ने 1:1 के अनुपात में बोनस इक्विटी शेयर जारी करने को मंजूरी दे दी है. अब निवेशकों के अप्रूवल के बाद यह बोनस शेयर डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा.' बोनस इक्विटी शेयरों के लिए रिकॉर्ड डेट बुधवार, 27 अगस्‍त 2025 तय किया गया है.  डिविडेंड भी देगा बैंक  इसके अलावा, एचडीएफसी बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए हर इक्विटी शेयर पर 5 रुपये (यानी 500 प्रतिशत) का अंतरिम डिविडेंड देगी. बैंक ने कहा कि इसके लिए रिकॉर्ड डेट 25 जुलाई 2025 तय किया गया है. पात्र निवेशकों को डिविडेंड का भुगतान 11 अगस्‍त 2025 को किया जाएगा.  15 लाख करोड़ का है ये बैंक  बैंक का ब्याज व्यय 6.6 प्रतिशत बढ़कर 46,032.23 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 43,196 करोड़ रुपये था. इसके अलावा, HDFC Bank शुक्रवार को 1957.40 रुपये पर बंद हुए, जिससे बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 15 लाख 917.42 करोड़ रुपये हो चुका है. 

केंद्र के बाद MP सरकार का बड़ा फैसला, मध्यप्रदेश ने भी तय की गेहूं की स्टॉक लिमिट

भोपाल  गेहूं के भाव को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने अधिकतम भंडारण की सीमा निर्धारित कर दी है। मध्य प्रदेश में भी इसके अनुरूप अब व्यापारी और थोक विक्रेता तीन हजार टन से अधिक गेहूं का भंडारण(wheat stock MP) नहीं कर पाएंगे। फुटकर व्यापारियों के लिए यह सीमा 10 टन की रहेगी। यह भंडारण सीमा 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी। प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि थोक और फुटकर व्यापारियों के साथ चेन रिटेलर के लिए भी अधिकतम भंडारण की सीमा तय की गई है। चेन रिटेलर के प्रत्येक आउटलेट के लिए 10 टन की सीमा इस आधार पर निर्धारित की गई है कि सभी आउटलेट पर अधिकतम मात्रा आउटलेटों की कुल संख्या के 10 गुना से अधिक भंडारित नहीं होना चाहिए।  प्रोसेसर के लिए भंडारण की मात्रा उसकी मासिक स्थापित क्षमता के 70 प्रतिशत को वर्ष 2025-26 के शेष महीनों से गुणा करने के आधार पर निर्धारित होगी। यह शेष अवधि की मात्रा से अधिक नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार ने तय की स्टॉक की सीमा  इसी तरह चेन रिटेलर के प्रत्येक आउटलेट के लिये 10 मीट्रिक टन की सीमा इस आधार पर निर्धारित की गई है कि सभी आउटलेट पर अधिकतम मात्रा आउटलेटों की कुल संख्या के 10 गुना मीट्रिक टन से अधिक भण्डारित नहीं होना चाहिये। प्रोसेसर के लिये स्टॉक की मात्रा उसकी मासिक स्थापित क्षमता के 70 प्रतिशत मात्रा को वर्ष 2025-26 के शेष महीनों से गुणा करने पर आने वाली मात्रा से अधिक नहीं होना चाहिये। 29 लाख मीट्रिक टन अधिक गेहूं की खरीद  उल्लेखनीय है कि इस साल प्रदेश सरकार ने करीब 9 लाख किसानों से 77 लाख 74 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जो पिछले साल की तुलना में 29 लाख मीट्रिक टन अधिक है, पिछले साल 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ था। इस साल 2600 रुपये MSP पर मप्र सरकार ने खरीदा गेहूं यहाँ बताना जरूरी है कि इस बार केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये निर्धारित किया था लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने इस पर 175 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस दिया जिसके बाद गेहूं की खरीदी 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की गयी, परिणाम स्वरुप किसानों ने सरकार को गेहूं बेचा जिसका लाभ किसानों और सरकार दोनों को ही हुआ।  

राजस्व कामकाज में सख्ती, तहसीलदार-नायब तहसीलदार को अब पूरे दिन ऑफिस में रहना होगा

जबलपुर  वीआइपी दौरे और लॉ एंड ऑर्डर के चलते प्रभावित होने वाले राजस्व प्रकरणों की समस्या को हल करने के लिए जिले में नई पहल की गई है। कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जिले में राजस्व अधिकारियों का नया सेटअप तैयार किया गया है। अब राजस्व न्यायालय का कामकाज संभालने वाले अधिकारियों को वीआइपी दौरे और लॉ एंड आर्डर की जिमेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अब अदालती काम में लगाए गए तहसीलदार और नायब तहसीलदार केवल अदालत का काम ही देखेंगे। वे सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तहसीलों में बैठकर राजस्व प्रकरणों का निपटारा करेंगे। प्रोटोकॉल देखेंगे 14 अधिकारी नए आदेश में प्रोटोकॉल और कानून व्यवस्था संबंधी कार्यों के लिये पृथक से 14 राजस्व अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। शहरी क्षेत्र के मामले में अपर जिला दंडाधिकारी शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मामले में संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को थाना क्षेत्र का आवंटन करने के निर्देश दिये हैं। गैर न्यायालयीन कार्यों के लिए नियुक्त प्रभारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, प्रभारी अधीक्षक भू-अभिलेख एवं प्रभारी सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। पक्षकार होते थे परेशान दरअसल, वीआइपी दौरों के प्रोटोकॉल और अचानक उत्पन्न होने वाली लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को संभालने की जिमेदारी का असर राजस्व प्रकरणों के निपटारे पर पड़ता था। इससे न केवल आम पक्षकार परेशान होते हैं, बल्कि राजस्व विभाग की छवि पर गंभीर असर पड़ता है। इससे निपटने के लिए कलेक्टर दीपक सक्सेना ने दो तरह का सेटअप तैयार कराया। राजस्व कोर्ट की बढ़ी संख्या नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरणों के निराकरण में गति लाने तथा समय सीमा के भीतर उनका निराकरण करने के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों की संया 22 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है। इन अधिकारियों की ड्यूटी प्रोटोकॉल, कानून व्यवस्था आदि कार्यों में नहीं लगाई जा सकेगी। संवाद पर जोर नए सेटप के साथ आम जनमानस से संवाद पर भी जोर दिया गया है। अदालती काम संभालने वाले राजस्व अधिकारी अब सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कोर्ट में बैठेंगे। इससे अवगत कराने पूरे जिले में 22 जुलाई को एक साथ सभी तहसीलों में बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

राजस्व कामकाज में सख्ती, तहसीलदार-नायब तहसीलदार को अब पूरे दिन ऑफिस में रहना होगा

जबलपुर  वीआइपी दौरे और लॉ एंड ऑर्डर के चलते प्रभावित होने वाले राजस्व प्रकरणों की समस्या को हल करने के लिए जिले में नई पहल की गई है। कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जिले में राजस्व अधिकारियों का नया सेटअप तैयार किया गया है। अब राजस्व न्यायालय का कामकाज संभालने वाले अधिकारियों को वीआइपी दौरे और लॉ एंड आर्डर की जिमेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अब अदालती काम में लगाए गए तहसीलदार और नायब तहसीलदार केवल अदालत का काम ही देखेंगे। वे सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तहसीलों में बैठकर राजस्व प्रकरणों का निपटारा करेंगे। प्रोटोकॉल देखेंगे 14 अधिकारी नए आदेश में प्रोटोकॉल और कानून व्यवस्था संबंधी कार्यों के लिये पृथक से 14 राजस्व अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। शहरी क्षेत्र के मामले में अपर जिला दंडाधिकारी शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मामले में संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को थाना क्षेत्र का आवंटन करने के निर्देश दिये हैं। गैर न्यायालयीन कार्यों के लिए नियुक्त प्रभारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, प्रभारी अधीक्षक भू-अभिलेख एवं प्रभारी सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। पक्षकार होते थे परेशान दरअसल, वीआइपी दौरों के प्रोटोकॉल और अचानक उत्पन्न होने वाली लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को संभालने की जिमेदारी का असर राजस्व प्रकरणों के निपटारे पर पड़ता था। इससे न केवल आम पक्षकार परेशान होते हैं, बल्कि राजस्व विभाग की छवि पर गंभीर असर पड़ता है। इससे निपटने के लिए कलेक्टर दीपक सक्सेना ने दो तरह का सेटअप तैयार कराया। राजस्व कोर्ट की बढ़ी संख्या नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरणों के निराकरण में गति लाने तथा समय सीमा के भीतर उनका निराकरण करने के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों की संया 22 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है। इन अधिकारियों की ड्यूटी प्रोटोकॉल, कानून व्यवस्था आदि कार्यों में नहीं लगाई जा सकेगी। संवाद पर जोर नए सेटप के साथ आम जनमानस से संवाद पर भी जोर दिया गया है। अदालती काम संभालने वाले राजस्व अधिकारी अब सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कोर्ट में बैठेंगे। इससे अवगत कराने पूरे जिले में 22 जुलाई को एक साथ सभी तहसीलों में बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

इंदौर-मुंबई तेजस ट्रेन: फुल स्पीड में सफर, देखें स्टेशन व समय का पूरा शेड्यूल

इंदौर   ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को रेलवे ने बड़ा तोहफा दिया है। पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा तथा विशेष रूप से यात्रा की मांग को ध्यान में रखते हुए मुंबई सेंट्रल और इंदौर स्टेशनों के बीच विशेष किराये पर सुपरफास्ट तेजस स्‍पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। बता दें कि, ऐसा पहली बार होगा जब तेजस स्पेशल ट्रेन मध्य प्रदेश में दौडे़गी। अब तक तेजस ट्रेन लखनऊ-नई दिल्ली, अहमदाबाद-मुंबई, और मुंबई-मडगांव जैसे मार्गों पर चलती है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने इस स्‍पेशल ट्रेन की जानकारी दी है। ट्रेन संख्या 09085 मुंबई सेंट्रल इंदौर स्‍पेशल प्रत्येक सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को मुंबई सेंट्रल से रात 11.20 बजे प्रस्थान करेगी तथा अगले दिन दोपहर 1 बजे इंदौर पहुंचेगी। यह ट्रेन 23 जुलाई से 29 अगस्त तक चलेगी। ट्रेन संख्या 09086 इंदौर मुंबई सेंट्रल स्‍पेशल प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार को इंदौर से शाम 5 बजे प्रस्थान करेगी तथा अगले दिन 7.10 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी। यह ट्रेन 24 जुलाई से 30 अगस्त तक चलेगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में बोरिवली, वापी, सूरत, वडोदरा, दाहोद, रतलाम तथा उज्जैन स्टेशनों पर रुकेगी।इस ट्रेन में फर्स्ट एसी, एसी 2-टियर एवं एसी 3-टियर कोच होंगे। 21 जुलाई से बुकिंग शुरू ट्रेन संख्या 09085 एवं 09086 की बुकिंग 21 जुलाई से सभी पीआरएस काउंटरों एवं आईआरसीटीसी वेबसाइट पर प्रारंभ होगी। ट्रेनों के ठहराव, समय और संरचना के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए यात्री कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कवि स्व. गोपालदास नीरज को अर्पित की श्रद्धांजलि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रसिद्ध गीतकार, साहित्यकार एवं पद्म भूषण से सम्मानित स्व. गोपालदास 'नीरज' की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकप्रिय कविताओं के रचियता नीरज जी की कृतियों में देश, समाज और समकालीन परिस्थितियों के साथ संवेदनाओं के सम्मोहक मिश्रण की अनुभूति होती है। उनके द्वारा लिखे गए गीत प्रशंसकों के जीवन को सदैव आनंदित और प्रेरित करते रहेंगे।