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दुपट्टा फाड़कर राखी बांधने वाली गुजरात की महिला ने धामी को कर दिया भावुक

धराली, उत्तराखंड उत्तराखंड के धराली में तीन दिन पहले हुई बादल फटने की घटना के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे। इसी दौरान उस वक्त एक अत्यंत भावुक कर देने वाला पल देखने को मिला, जब वहां रेस्क्यू कर लाई गई एक महिला ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए उन्हें अपना दुपट्टा फाड़कर बनी राखी उनकी कलाई पर बांधी। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले हुई इस घटना से सीएम भी भावुक हो गए और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये कोई सामान्य राखी नहीं थी, ये थी भरोसे की, अपनत्व की, और उस रिश्ते की जो खून से नहीं, दिल से जुड़ता है। जिस महिला ने यह प्रतीकात्मक राखी बांधी वह गुजरात की रहने वाली है। सीएम ने कहा- आपकी राखी बहुत स्पेशल इस घटना के दौरान मुख्यमंत्री के साथ महिला का संवाद भी हुआ। राखी बंधवाने के बाद सीएम ने महिला से कहा- 'आपकी ये राखी तो बहुत स्पेशल है'। इसके बाद जब उस महिला ने झुकते हुए सीएम के पैर छूने की कोशिश की तो धामी ने उसे रोकते हुए अपने सीने से लगा लिया। इसके बाद महिला ने फिर आभार जताते हुए सीएम से बहुत-बहुत शुक्रिया कहा। जिसके बाद धामी ने पूछा कि 'सुरक्षित पहुंच गए ना', तो महिला ने कहा- 'हां पहुंच गए'। इसके बाद सीएम ने 'राधे-राधे' और 'जय गंगा मैया कहा'। धामी बोले- मैं आ गया ना आपको लेने महिला ने आगे कहा- 'बहुत बड़ी सुरक्षा मिली हमें मिलिट्री से, कुछ परेशानी नहीं हुई, लेकिन तीन दिन हम गंगोत्री में फंसे रह गए'। तब धामी ने कहा कि 'आ गया ना मैं आप लोगों को लेने के लिए'। इसके बाद महिला ने आगे कहा, 'बस मेरी यही प्रार्थना है कि रक्षाबंधन पर हमको याद करना। हमारा भैया सुखी रहे। यही प्रार्थना है।' सीएम बोले- केवल एक कपड़े का टुकड़ा इस घटना के वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने लिखा, ‘धराली (उत्तरकाशी) में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान एक बहन ने साड़ी का किनारा फाड़ कर मेरी कलाई पर राखी के प्रतीक के रूप में बांधा तो मन अत्यंत भावुक हो उठा। ना थाली, ना चंदन, केवल एक कपड़े का टुकड़ा, लेकिन उसमें रिश्ते का सच्चा एहसास, सुरक्षा का वचन, और मानवता का सबसे सुंदर रूप समाया था। उस राखी में एक बहन की प्रार्थना थी और एक भाई के कंधों पर आया एक नया दायित्व। ये कोई सामान्य राखी नहीं थी, ये थी भरोसे की, अपनत्व की, और उस रिश्ते की जो खून से नहीं, दिल से जुड़ता है।’ बता दें कि जिस महिला ने सीएम को राखी बांधी उसका नाम धनगौरी बरौलिया है, जो कि गुजरात में अहमदाबाद के ईशनपुर इलाके की रहने वाली हैं। वह अपने परिवार के साथ गंगोत्री दर्शन के लिए उत्तराखंड आई थीं, लेकिन 5 अगस्त को आई भीषण आपदा के कारण वे धराली में अपने परिवार सहित फंस गई थीं। रेस्क्यू टीमों ने अपने अथक प्रयासों से महिला और उसेके परिवार को शुक्रवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।  

गडकरी बोले: E20 पेट्रोल से माइलेज कम होने के दावे गलत, जानिए पूरी बात

नई दिल्‍ली हाल के समय में पेट्रोल में एथेनॉल मिले होने की वजह से गाड़ी के कम माइलेज मिलने को लेकर तरह-तरह की बातें चल रही है। इसपर सरकार की तरफ से पहले ही सफाई दी जा चुकी है। अब इस मामले पर भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी खुलकर बात की। उन्होंने तो उन लोगों को खुली चुनौती दे दी है, जो इसको लेकर दावा कर रहे हैं कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से गाड़ी कम माइलेज देगी। आइए विस्तार में जानते हैं कि इस मामले में नितिन गडकरी ने क्या कहा? गडकरी की खुली चुनौती     सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को बिजनेस टुडे के जरिए आयोजित एक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। यहां पर उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (जिसे E20 कहा जाता है) से वाहनों का माइलेज कम होता है, इस तर्क में कोई सच्चाई नहीं है। इसके साथ ही कहा कि इस पर तो कोई चर्चा भी नहीं है। मुझे नहीं पता कि मुझे यह राजनीतिक रूप से कहना चाहिए या नहीं, लेकिन ऐसा लगता है कि पेट्रोलियम लॉबी इसे हेरफेर कर रही है। आप मुझे दुनिया में एक भी ऐसा वाहन दिखाओ जिसे E20 पेट्रोल के कारण समस्या हुई हो! मैं एक खुली चुनौती देता हूँ। E20 से बिल्कुल कोई समस्या नहीं है।     गडकरी ने आगे कहा कि स्थानीय रूप से उत्पादित एथेनॉल का इस्तेमाल भारत के आयात बिल को कम करने में मदद करता है और प्रदूषण को भी कम करता है। मक्के की कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,600 रुपये हो गई हैं, यह सब इसलिए है क्योंकि इससे एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है। इससे बिहार और उत्तर प्रदेश में मक्का के तहत आने वाले क्षेत्र में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों की आय बढ़ रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय कह चुका है ये बात     नितिन गडकरी के इस खुली चुनौती से पहले पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से पेट्रोल में एथेनॉल की वजह से माइलेज पर पड़ने वाले असर के बारे में बता चुका है। पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से कह गया है कि इस फ्यूल के कारण इंजन को कोई बड़ा नुकसान या परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं आती है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि नई कारों में माइलेज 2 प्रतिशत तक और पुरानी कारों में 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है, जिन्हें अपडेटेड पार्ट्स की जरूरत हो सकती है। इसको लेकर मंत्रालय की तरफ से सोमवार को एक सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया गया था, जिसमें बताया गया था कि इसे नियमित रखरखाव के साथ संभाला जा सकता है।     इस पोस्ट में पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल पर पुराने वाहनों में 20,000 से 30,000 किमी के बाद रबर के पुर्जे या गैसकेट जैसे छोटे-मोटे अपडेट की जरूरत हो सकती है, जो सस्ते होते हैं और आमतौर पर नियमित सर्विसिंग के दौरान किए जाते हैं।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को दीं रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन के पावन पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि राखी का पर्व, भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का त्यौहार है। यह हमारी गौरवशाली संस्कृति के गरिमामय उत्कर्ष का प्रतीक है। भाई-बहन के पवित्र प्रेम, पारिवारिक समरसता और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा का उत्सव है। उन्होंने कहा कि राखी के पर्व पर हमें मातृ शक्ति के सम्मान, सहयोग और सशक्तिकरण में सहभागिता का संकल्प लेना चाहिए।  

संसद में खुलासा: भारत के ‘चिकन नेक’ के पास चीन को एयरबेस सौंपने की अफवाहों का सच क्या है?

नई दिल्ली पिछले दिनों बांग्लादेश के लालमोनिरहाट जिले में एक पुराने एयरबेस को फिर से सक्रिय करने की खबरें सामने आई थीं। कहा जा रहा है कि बांग्लादेश ने चीन के साथ मिलकर इस संवेदनशील इलाके में एयरबेस शुरू करने की योजना बनाई है। अब इस मसले पर भारत सरकार का रिएक्शन सामने आया है। भारत ने बांग्लादेश सरकार के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा है कि लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को वर्तमान में सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की कोई योजना नहीं है। एक लिखित सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में ये जानकारी दी। प्रश्न में सांसद कौशलेंद्र कुमार ने पूछा था कि क्या बांग्लादेश ने चीन को लालमोनिरहाट हवाई अड्डे पर संचालन फिर से शुरू करने की अनुमति दी है, और यदि हां, तो क्या इससे भारत की सुरक्षा को कोई खतरा हो सकता है। साथ ही, यह भी पूछा गया कि क्या भारत सरकार ने इस संबंध में बांग्लादेश के साथ कोई आपत्ति जताई है या नहीं। मंत्री ने जवाब में कहा कि भारत सरकार ने बांग्लादेश के लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स और 26 मई 2025 को बांग्लादेश सेना के सैन्य संचालन निदेशक द्वारा दिए गए प्रेस ब्रीफिंग पर ध्यान दिया है। ब्रीफिंग में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित सभी घटनाक्रम पर नजर रख रही है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ कि भारत ने बांग्लादेश के साथ इस मुद्दे पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की है या नहीं। भारत के लिए बहुत संवेदनशील है यह जगह यह एयरबेस भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' के नाम से जाना जाता है, के बेहद करीब है। इस घटनाक्रम ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा गलियारा है। लालमोनिरहाट एयरबेस और उसका रणनीतिक महत्व लालमोनिरहाट एयरबेस बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में स्थित है और यह भारत-बांग्लादेश सीमा से मात्र 12-20 किलोमीटर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से लगभग 135 किलोमीटर दूर है। यह एयरबेस 1931 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों की सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण रहा। वर्तमान में यह बांग्लादेश वायुसेना के नियंत्रण में है, लेकिन कई दशकों से निष्क्रिय पड़ा है। हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इस एयरबेस को फिर से चालू करने के लिए चीन से सहायता मांगी है। मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा और विवाद मार्च में मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा के दौरान इस एयरबेस को फिर से शुरू करने पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के अनुसार, यूनुस ने चीन को लालमोनिरहाट में एयरबेस के निर्माण के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता का प्रस्ताव दिया। इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की एक कंपनी इस प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्टर के रूप में शामिल हो सकती है, जिससे भारत की चिंताएं और गहरी हो गई हैं। यूनुस ने अपनी यात्रा के दौरान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को 'लैंड-लॉक्ड' बताते हुए बांग्लादेश को इस क्षेत्र के समुद्री व्यापार का 'एकमात्र संरक्षक' करार दिया था, जिसे भारत ने आपत्तिजनक माना। भारत के लिए क्यों है खतरा? सिलीगुड़ी कॉरिडोर की चौड़ाई मात्र 22 किलोमीटर है। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पूर्वोत्तर के सात राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है। लालमोनिरहाट में चीन की मौजूदगी से इस क्षेत्र में सैन्य संतुलन बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरबेस भविष्य में न केवल सैन्य ठिकाने के रूप में, बल्कि एक खुफिया केंद्र या कूटनीतिक दबाव बिंदु के रूप में भी इस्तेमाल हो सकता है। चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत बांग्लादेश में बढ़ती गतिविधियां, जैसे मोंगला पोर्ट का विकास और चटगांव में आर्थिक पार्क की स्थापना, भारत के लिए अतिरिक्त चिंता का कारण हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश द्वारा तुर्की से Bayraktar TB2 ड्रोन और चीन-पाकिस्तान निर्मित JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना ने भी क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाया है। भारत की रणनीति पुख्ता भारत ने इस स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को और मजबूत किया है। भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर इस क्षेत्र की रक्षा के लिए राफेल जेट, ब्रह्मोस मिसाइल, और S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस है। हाल ही में भारत ने त्रिपुरा के कैलाशहर में 1971 के युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए एयरबेस को फिर से सक्रिय करने की योजना शुरू की है, जिसे यूनुस के 'चीनी प्लान' की काट के रूप में देखा जा रहा है।  

चुनाव कर्मियों के मानदेय में वृद्धि, निर्वाचन आयोग का बड़ा कदम

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने पीठासीन अधिकारियों, मतदान अधिकारियों, मतगणना कर्मियों, माइक्रो ऑब्जर्वर और चुनाव से जुड़े अन्य कर्मियों के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की है। चुनाव के दौरान अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा को सम्मानजनक तरीके से पुरस्कृत करने के लिए आयोग ने यह बड़ा कदम उठाया है। चुनाव कार्य में केंद्रीय एवं राज्य सरकार के कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, लोक प्राधिकरण के सदस्य, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी आदि शामिल होते हैं। चुनाव के दौरान ये कर्मी कई महीनों से लगातार कई घंटों तक काम करते हैं ताकि मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर सकें और अपनी पसंद के प्रतिनिधि का चुनाव कर सकें। आयोग ने बताया कि इससे पहले 2014 से 2016 के बीच अंतिम बार मानदेय में वृद्धि की गई थी, जिसे अब सुधारते हुए नई दरें लागू की गई हैं। मानदेय में प्रमुख वृद्धि के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: पीठासीन अधिकारी एवं मतगणना पर्यवेक्षक: अब उन्हें प्रतिदिन या इसके भाग के लिए 500 रुपए या 2 हजार रुपए एकमुश्त मानदेय मिलेगा। पहले यह 350 रुपए था। मतदान अधिकारी: अब 400 रुपए प्रतिदिन या उसके हिस्से के लिए 1600 रुपए एकमुश्त, जो पहले 250 रुपए था। मतगणना सहायक: 450 रुपए प्रतिदिन या उसके हिस्से के लिए 1350 रुपए एकमुश्त, पहले 250 रुपए। क्लास-4 कर्मचारी (विभिन्न कर्तव्यों के लिए): अब 350 रुपए प्रतिदिन या उसके हिस्से के लिए 1400 रुपए एकमुश्त, पहले 200 रुपए। कॉल सेंटर / कंट्रोल रूम के क्लास-4 कर्मचारी: 1000 रुपए एकमुश्त, पहले 200 रुपए प्रतिदिन। वीडियो निगरानी टीम, मीडिया मॉनिटरिंग कमिटी, फ्लाइंग स्क्वाड आदि के क्लास I/II कर्मचारी को अब 3 हजार रुपए एकमुश्त (पहले 1200 रुपए)। वहीं, क्लास III के कर्मचारी को 2 हजार रुपए एकमुश्त (पहले 1000 रुपए) माइक्रो ऑब्जर्वर: 2000 रुपए एकमुश्त, पहले 1000 रुपए। मतदान स्थल/मतगणना केंद्र पर तैनात पुलिस, होम गार्ड, वन रक्षक, एनसीसी कैडेट, स्वयंसेवक आदि को भोजन/रिफ्रेशमेंट के लिए अब 500 रुपए प्रतिदिन मिलेंगे। पहले 150 रुपए मिलते थे। डिप्टी जिला निर्वाचन अधिकारी को अब कम से कम संबंधित कर्मचारी के एक महीने के बेसिक वेतन के बराबर भुगतान होगा, जबकि पहले कोई वेतन नहीं दिया जाता था। सीएपीएफ के गजेटेड अधिकारी को 15 दिन या उससे कम के लिए 4 हजार रुपए, 15 दिन से अधिक के लिए प्रति सप्ताह 2 हजार रुपए मिलेंगे। (पहले क्रमशः 2500 रुपए व 1250 रुपए)। अधीनस्थ अधिकारी (इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर आदि) के लिए 3000 रुपए 15 दिन तक, 1500 रुपए प्रति सप्ताह 15 दिन से अधिक (पहले 2000 व 1000 रुपए)। वहीं, अन्य रैंक (हेड कॉन्स्टेबल, कॉन्स्टेबल आदि) के लिए 2500 रुपए 15 दिन तक, 1250 रुपए प्रति सप्ताह 15 दिन से अधिक के लिए।। सहायक व्यय पर्यवेक्षक / सेक्टर अधिकारी / सेक्टर पुलिस अधिकारी: अब पूर्णकालीन चुनाव ड्यूटी के लिए 10,000 रुपए या प्रोराटा आधार पर भुगतान होगा, जो पहले 7,500 रुपए था।  

कर्स्टन ने याद किया किस्सा, क्यों था ईशांत को बल्लेबाजी के लिए बुलाना मुश्किल

जोहांसबर्ग भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच और दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज क्रिकेटर रहे गैरी कर्स्टन ने कहा है कि अपने कार्यकाल के दौरान उनके लिए सबसे कठिन काम ईशान शर्मा को बल्लेबाजी के लिए तैयार करना था। कर्स्टन से जब एक कार्यक्रम में पूछा गया कि भारतीय टीम के कोच के तौर प उनके लिए सबसे कठिन क्या था तो उनके जवाब से भी हैरान रह रहे। सभी को अंदाजा था कि वह विश्वकप की बात करेंगे पर कर्स्टन ने कहा कि उनके लिए सभी कठिन चुनौती इशांत शर्मा को नेट्स में बल्लेबाजी करने के लिए बुलाना होता था।  कर्स्टन ने कहा, ‘सबसे बड़ी चुनौती इशांत को उनके बैट और पैड के साथ नेट्स में लाना होता था.। उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में वीवीएस लक्ष्मण के साथ विजयी साझेदारी के लिए भी तैयार करना था। यह मेरे लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था कि उनकी बल्लेबाजी पर काम किया जाये। ईशांत सोचते थे कि वह अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर सकते हैं, लेकिन हमने उन्हें उस टेस्ट मैच में मदद की और उन्होंने उसमें बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।’ इशांत ने इस साझेदारी में 48 गेंदों का सामना किया था। कर्स्टन जिस मैच की बात कर रहे थे वह भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 1 से 5 अक्टूबर 2010 को मोहाली में खेला गया था। उस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को जीत के लिए 216 रन का लक्ष्य दिया था। इसके जवाब में भारतीय टीम ने 124 रन पर 8 विकेट खो दिये थे पर इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण ने 73 आरे इशांत ने 31 रन बनाकर भारतीय टीम को जीत दिला दी।   

केंद्र सरकार ने ई-बसों, ट्रकों और एम्बुलेंस के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना को 2 साल के लिए बढ़ाया आगे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों, एम्बुलेंस और ट्रकों के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना को दो साल के लिए बढ़ाकर मार्च 2028 कर दिया है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, यह योजना अब मार्च 2026 के बजाय मार्च 2028 में समाप्त हो जाएगी। अधिसूचना के अनुसार, इस योजना के लिए फंड आवंटन 10,900 करोड़ रुपए पर बरकरार रखा गया है और योजना के तहत कोई अतिरिक्त आवंटन नहीं किया जाएगा। अधिसूचना के अनुसार, इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए प्रोत्साहन मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएंगे। पीएम ई-ड्राइव योजना, देश भर में लगभग 5,600 ई-ट्रकों को इलेक्ट्रिक ट्रकों में बदलने के लिए 9.6 लाख रुपए तक के प्रोत्साहन के साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करती है। पिछले महीने, सरकार ने पीएम ई-ड्राइव पहल के तहत इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रकों) के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु एक अभूतपूर्व योजना शुरू की, जिसमें अधिकतम प्रोत्साहन राशि 9.6 लाख रुपए प्रति वाहन निर्धारित की गई है। यह पहली बार है जब सरकार इलेक्ट्रिक ट्रकों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान कर रही है, जिसका उद्देश्य देश में क्लीन, कुशल और सस्टेनेबल फ्रेट मोबिलिटी की ओर ट्रांजिशन को गति प्रदान करना है। इस योजना से देश भर में लगभग 5,600 ई-ट्रकों की तैनाती को समर्थन मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के अनुसार, डीजल ट्रक, कुल वाहन संख्या का केवल 3 प्रतिशत होने के बावजूद, परिवहन से संबंधित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 42 प्रतिशत का योगदान करते हैं और वायु प्रदूषण को काफी बढ़ा देते हैं। इस योजना के तहत, केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (सीएमवीआर) के तहत परिभाषित एन2 और एन3 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर भी मांग प्रोत्साहन लागू किया जाएगा। एन2 श्रेणी में 3.5 टन से अधिक और 12 टन तक के ग्रॉस व्हीकल वेट (जीवीडब्ल्यू) वाले ट्रक शामिल हैं। एन3 श्रेणी में 12 टन से अधिक और 55 टन तक के जीवीडब्ल्यू वाले ट्रक शामिल हैं। आर्टिकुलेटेड वाहनों के मामले में, प्रोत्साहन केवल एन3 श्रेणी के पुलर ट्रैक्टर पर लागू होंगे। ये प्रोत्साहन खरीद मूल्य में अग्रिम कटौती के रूप में दिए जाएंगे और पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पीएम ई-ड्राइव पोर्टल के माध्यम से ओईएम को प्रतिपूर्ति की जाएगी।  

MP में अनुराग जैन की सेवावृद्धि पर फैसला नजदीक, राजौरा-बर्णवाल कतार में खड़े

भोपाल मुख्य सचिव अनुराग जैन इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्हें सेवावृद्धि मिलेगी या नहीं, इस पर फैसला जल्द होगा। यदि सरकार उन्हें रोकने का निर्णय करती है तो फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से सेवावृद्धि का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजना होगा, जो अभी तक नहीं गया है। यदि दूसरे विकल्प पर विचार किया जाता है तो फिर सबसे वरिष्ठ अधिकारी अपर मुख्य सचिव जल संसाधन राजेश कुमार राजौरा को अवसर दिया जा सकता है। वह मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव भी रहे हैं और उज्जैन संभाग के प्रभारी हैं।   अपर मुख्य सचिव जल संसाधन राजेश कुमार राजौरा वहीं, 1991 बैच के अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल भी कतार में है। उनकी छवि तेजतर्रार अधिकारियों में होती है। प्रदेश में मोहन यादव सरकार को 1988 बैच की वीरा राणा प्रभारी मुख्य सचिव के तौर पर मिली थीं । 31 मार्च 2024 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसके पहले आठ मार्च को सरकार ने उन्हें छह माह की सेवावृद्धि दिलाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था, जिसे स्वीकार करते हुए 30 सितंबर 2024 तक सेवावृद्धि मिल गई।   इसके बाद आईएएस संवर्ग के सबसे वरिष्ठ अधिकारी 1989 बैच के अनुराग जैन को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लेकर मुख्य सचिव बनाया गया। उनके साथ-साथ अपर मुख्य सचिव राजेश कुमार राजौरा का नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम निर्णय जैन के पक्ष में हुआ। अब एक बार फिर मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई है। यदि अनुराग जैन की सेवाएं सरकार को आगे भी जारी रखना है तो फिर केंद्र सरकार को प्रस्ताव जल्द भेजना होगा। जैन की छवि ईमानदार और समय से काम कराने वाले अधिकारी की है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सफल आयोजन के साथ 18 नई औद्योगिक नीतियां भी उनके समय में ही आईं। उन्हें छह माह की सेवावृद्धि मिलती है तो फरवरी 2026 तक ही वह काम कर सकेंगे। यदि सरकार दूसरे विकल्प पर काम करती है तो फिर 1990 बैच के राजेश कुमार राजौरा और 1991 बैच के अशोक बर्णवाल प्रदेश में उपलब्ध अधिकारियों में पहली पसंद होंगे। राजौरा मुख्यमंत्री के साथ काम कर चुके हैं और भरोसे के अधिकारी माने जाते हैं तो बर्णवाल भी निर्विवादित हैं। उनकी छवि तेजतर्रार अधिकारी की है। पर्यावरण अनुमतियों को लेकर विवाद होने के बाद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने उन्हें ही पर्यावरण विभाग को पटरी पर लाने का जिम्मा सौंपा था। 

पूर्वोत्तर क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार में एकजुट रणनीति का महत्व: ज्योतिरादित्य सिंधिया की टिप्पणी

नई दिल्ली केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी लाने के लिए यूनिफाइड एप्रोच की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के गैप को भरने के लिए पांच सुझाव दिए, जिसमें एक क्षेत्रीय मास्टर प्लान तैयार करके पूर्वोत्तर क्षेत्र की इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रिड को मिलाना, एनईआर के लिए प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए एक निगरानी तंत्र की स्थापना, विभिन्न कर और अन्य रियायतों की पेशकश के माध्यम से मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क के लिए नीति को आगे बढ़ाना, पड़ोसी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सीमा पार कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना और डिजिटल कनेक्टिविटी और पावर ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना है। ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी’ पर हाई-लेवल टास्क फोर्स (एचएलटीएफ) में बोलते हुए, सिंधिया ने आगे कहा कि भविष्य की परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर मैप किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने सभी पूर्वोत्तर राज्यों से कहा कि वे अपनी स्टेट लॉजिस्टिक्स पॉलिसी को मंत्रालय द्वारा देश भर में सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर तैयार किए गए मानकों के अनुसार, अपटेड करें। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र के तीव्र आर्थिक विकास के लिए परिवहन गलियारों के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा सकते हैं। एचएलटीएफ बैठक में हाईवे, रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल संपर्क जैसे सेक्टर्स में पूर्वोत्तर क्षेत्र में मौजूदा क्रिटिकल गैप पर ध्यान केंद्रित किया गया। पूर्वोत्तर में इन्फ्रास्ट्रक्चर अंतर को पाटने के लिए, एचएलटीएफ बैठक में एक व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर मास्टरप्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया। यह योजना सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के परामर्श से विकसित की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय विकास के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा। बैठक के दौरान चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में राज्य-विशिष्ट बाधाओं और चुनौतियों की पहचान, महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी गैप और प्राथमिकता वाली इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरतें, पूंजी निर्माण के लिए राज्य बजट और राष्ट्रीय निवेश का एकीकरण और 2047 तक विकसित पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक रोडमैप का कार्यान्वयन शामिल था। इस वर्ष की शुरुआत में केंद्र ने आठ हाई-लेवल टास्क फोर्स (एचएलटीएफ) का गठन किया था, जिनमें से प्रत्येक का नेतृत्व पूर्वोत्तर राज्य के एक मुख्यमंत्री द्वारा किया जाता है, जिसमें केंद्रीय मंत्री और अन्य राज्यों के तीन मुख्यमंत्री सदस्य होते हैं।  

MP में HSRP नंबर प्लेट बिना नहीं होंगे वाहन के कई काम, जल्द करें लगवाना जरूरी

इंदौर प्रदेश में पंजीकृत वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाने के लिए विशेष अभियान चलेगा। इसमें बीते छह साल में पंजीकृत हुए सभी वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट की जांच और डीलरों के यहां इसकी पेंडेंसी की पड़ताल भी की जाएगी। परिवहन कार्यालय इंदौर द्वारा सभी डीलरों के पास नंबर प्लेट की पेंडेंसी की पड़ताल की जाएगी और छूटे हुए वाहनों में नंबर प्लेट लगाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। परिवहन विभाग ने सभी जिलों के परिवहन अधिकारियों को निर्देश जारी कर वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाने के निर्देश दिए है। सभी वाहनों में HSRP नंबर प्लेट जरूरी एक अप्रैल 2019 के बाद के सभी वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाई जाना है। हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को इस आशय के आदेश दिए थे। इसके बाद परिवहन विभाग ने सभी आरटीओ को निर्देश जारी कर नंबर प्लेट लगाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इंदौर में भी वाहन डीलरों के यहां पर परिवहन विभाग की टीमें पहुंचकर पेंडेंसी की पड़ताल करेंगी। दल गठित कर संबंधित वाहन डीलरों के माध्यम से एनआईसी वाहन पोर्टल पर अद्यतन स्थिति दर्ज की जाएगी। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।   बगैर नंबर प्लेट के नहीं होंगे कार्य जिन वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट नहीं होगी, उन वाहनों के परिवहन कार्यालय में कार्य नहीं होंगे। एचएसआरपी नहीं होने पर पीयूसी प्रमाण पत्र भी नहीं बनेगा। इसके अलावा आरसी, पता बदलना, आरसी विवरण देखना, स्वामित्व बदलना, नवीन और डुप्लीकेट परमिट, फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं जारी होंगे। परिवहन विभाग की सेवाओं की जानकारी के लिए एचएसआरपी नंबर प्लेट आवश्यक होगी। परिवहन कार्यालय में प्रवेश होगा प्रतिबंधित एआरटीओ राजेश गुप्ता का कहना है कि वाहनों पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है। वाहनों में यह नंबर प्लेट की पेंडेंसी की जांच वाहन डीलरों के यहां पर की जाएगी। वहीं नंबर प्लेट नहीं होने पर परिवहन कार्यालय में भी वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। कार्यालय में नंबर प्लेट होने के बाद ही परिवहन कार्य हो सकेंगे।