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हीट वेव की चुनौती को देखते हुए पूरे प्रदेश में लागू होगी एक समान अवकाश व्यवस्था

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और हीट वेव की परिस्थितियों को देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि बढ़ाकर 24 जून तक कर दी गई है।  अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब प्रत्येक वर्ष 20 मई से 24 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा तथा 25 जून से विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन प्रारंभ होगा। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों को भीषण गर्मी से सुरक्षित रखते हुए नए शैक्षणिक सत्र की बेहतर और व्यवस्थित शुरुआत सुनिश्चित करना है। प्रदेश सरकार ने यह निर्णय पिछले वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए लिया है, जब हीट वेव की स्थिति के कारण जिलाधिकारियों को स्थानीय स्तर पर बार-बार अवकाश बढ़ाना पड़ता था। नई व्यवस्था से पूरे प्रदेश में एकरूपता सुनिश्चित होगी और विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा शिक्षकों को स्पष्ट शैक्षणिक कैलेंडर उपलब्ध हो सकेगा। 22 जून से विद्यालय पहुंचेंगे शिक्षक, नए सत्र की तैयारियां होंगी पूरी योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विद्यालय खुलने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। इसके लिए 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस अवधि में लेसन प्लान तैयार करने, मध्याह्न भोजन व्यवस्था को अंतिम रूप देने, पाठ्यपुस्तक वितरण की तैयारी, विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक, बाल वाटिका संचालन की तैयारी, विद्यालय परिसर, रसोईघर एवं शौचालयों की साफ-सफाई, खेल सामग्री की उपलब्धता तथा स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब को क्रियाशील बनाने जैसे कार्य संपन्न किए जाएंगे। 220 कार्यदिवस और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर रहेगा विशेष जोर अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 220 कार्यदिवस और नियमित पठन-पाठन सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारियों को भी स्थानीय स्तर पर अवकाश घोषित करने से पूर्व इस विधिक प्रावधान को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं। योगी सरकार का मानना है कि बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना आवश्यक है। योग, स्वच्छता और बेहतर अधिगम वातावरण पर फोकस आदेश में विद्यालयों में बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुचारु रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं की सहभागिता से सामूहिक योगाभ्यास आयोजित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन और सकारात्मक सोच से जोड़ना भी है।

जनसुनवाई में छात्रा ने रखी परिवार की पीड़ा, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर उठाए सवाल

 इंदौर स्कूल चले हम अभियान के अंतर्गत कलेक्टर शिवम वर्मा ने मंगलवार को शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बाल विनय मंदिर में विद्यार्थियों से संवाद किया। संवाद के दौरान मुसाखेड़ी क्षेत्र की रहने वाली छात्रा सानिया ने कलेक्टर वर्मा से सवाल पूछा कि उज्जैन और इंदौर में विकास के लिए घर तोड़े जा रहे हैं, यह जरूरी है? लोगों को इसके लिए मुआवजा या रहने की जगह नहीं दी जाती। इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी सड़क बनती है तब इस तरह की परिस्थिति बनती है। इसके लिए लोगों को मुआवजा भी दिया जाता है और रहने की जगह भी दी जाती है। छात्रा ने बताया कि रामनगर पालदा में चौड़ीकरण के दौरान मकान तोड़ने की कार्रवाई की गई, लेकिन कई लोगों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला। जब घर पर इस तरह की बातें सुनीं तो यह सवाल किया। संवाद के दौरान कलेक्टर वर्मा ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल अकादमिक शिक्षा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि प्रभावी संवाद कौशल (कम्युनिकेशन स्किल) और नेतृत्व क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं है, बल्कि यह जीवन के अनेक महत्वपूर्ण कौशल सीखने का मंच भी है। मित्रों, शिक्षकों और सहपाठियों के साथ संवाद करते हुए बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति क्षमता, टीमवर्क और नेतृत्व जैसे गुण विकसित होते हैं, जो आगे चलकर उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ स्वयं को करें अपडेट कलेटर वर्मा ने कहा कि समय के साथ तकनीक में कितने बड़े बदलाव आए हैं और आने वाले वर्षों में भी यह परिवर्तन लगातार जारी रहेगा। विद्यार्थियों को नई तकनीकों, नए उपकरणों और नई जानकारियों को सीखने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। जो लोग समय के साथ स्वयं को अपडेट रखते हैं, वही भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो पाते हैं। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी भार्गव, प्राचार्य पूजा सक्सेना आदि मौजूद रहीं। जिन स्कूलों को मरम्मत की जरूरत, वहां नहीं गए अधिकारी डीपीसी कार्यालय से जारी सूची के अनुसार 154 स्कूलों में कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को पढ़ाने के लिए जाना था। लेकिन कार्यालय से सिर्फ उन्हीं स्कूलों को चिह्नित किया जो हाईटेक हैं और वहां समस्याएं नहीं हैं। जबकि जर्जर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई नहीं गया। हर वर्ष की तरह वे राह देखते रह गए कि कोई अधिकारी आए और व्यवस्थाओं में सुधार लाए। एसडीएम, सीएमएचओ नहीं गए पढ़ाने एसडीएम प्रिया वर्मा, सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी सहित 20 प्रतिशत अधिकारी विद्यार्थियों को स्कूल में पढ़ाने के लिए ही नहीं पहुंचे। विद्यार्थी सुबह से इनकी राह देखते रहे कि कोई अधिकारी आएगा, जिनसे वे अपने सवाल पूछ सकेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि एसडीएम वर्मा अवकाश पर होने के कारण नहीं जा पाईं। विद्यार्थियों ने कलेक्टर से पूछे सवाल सवाल: अच्छे लीडर की क्या खूबियां होती हैं? – अदिति, कक्षा 12वीं जवाब: एक अच्छा लीडर वही होता है जो अपने साथ काम करने वाले लोगों के लक्ष्य, उनकी आवश्यकताओं और उनकी सोच को समझकर उन्हें प्रेरित कर सके तथा सही दिशा दिखा सके। सवाल: मुझे डांस, म्यूजिक पसंद है। क्या सिर्फ पढ़ाई करके ही करियर बना सकते हैं? – तपस्या त्रिपाठी, कक्षा 12वीं जवाब: समाज में अक्सर कला, संगीत, नृत्य, चित्रकला गतिविधियों को केवल सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के रूप में देखा जाता है, जबकि वर्तमान समय में ये उत्कृष्ट करियर विकल्प के रूप में भी उभरकर सामने आए हैं। सवाल: करियर के लिए कई विकल्प होते हैं, सही का चयन कैसे करें? – आदित्य शर्मा, कक्षा 11वीं जवाब: जब मैं कॉलेज में था, तब वहां प्रशासनिक अधिकारी आते थे, उन्हें देखकर लगा था कि यह अच्छा करियर है। यदि किसी क्षेत्र में रुचि हो तो उसे पूरे समर्पण और ईमानदारी के साथ अपनाना चाहिए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और हर उपलब्धि के पीछे कठोर परिश्रम छिपा होता है।  

56 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की, युवाओं को दिए क्रिकेट किट

रायपुर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने 5 गांवों में लगाई चौपाल उप मुख्यमंत्री तथा स्थानीय विधायक  अरुण साव ने लोरमी के खेकतरा, कुम्हरौली, मोहतरा कुर्मी, पीपरखुंटा और औराबांधा में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने इन गांवों में 56 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने जनचौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर उनके सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने इस दौरान मोदी सरकार और साय सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने गांववालों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया। उप मुख्यमंत्री  साव ने खेकतरा में महामाया मंदिर में ज्योति कलश भवन का लोकार्पण कर ग्रामवासियों को समर्पित किया। उन्होंने औराबांधा में नवनिर्मित सामुदायिक भवन एवं खाद्यान्न भंडारण भवन का लोकार्पण किया।  साव ने पांचों गांवों के युवाओं को क्रिकेट किट भी प्रदान किया। उन्होंने युवाओं को खेल गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।

79 करोड़ रुपये से अधिक होंगे खर्च, पयर्टन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर टेंपल इकोनॉमी की जाएगी मजबूत

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में पर्यटन विभाग ने 31 मार्च 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं पर तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश के 8 जिलों में 33 पर्यटन एवं धार्मिक विकास परियोजनाओं पर निर्माण कार्य प्रारम्भ कराया जा रहा है, जिन पर लगभग 79.18 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ‘आस्था के साथ विकास’ है। इसी सोच के तहत धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों का सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि जारी कर दी गई है और कार्यदायी संस्थाओं को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को 8 जिलों की 33 परियोजनाओं का दायित्व सौंपा गया है, जिनकी कुल अनुमानित लागत 79.17 करोड़ रुपये से अधिक है। आधुनिक सुविधाओं से जुड़ेंगे आस्था स्थल इन परियोजनाओं में लखनऊ और सीतापुर की एक-एक परियोजना, मिर्जापुर की 7, भदोही की 5, सोनभद्र की 2, हमीरपुर की 2, महोबा की 3, बांदा और चित्रकूट की 6-6 परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के विभिन्न आस्था स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई दी जाए। परियोजनाओं के लिए जारी धनराशि का ब्योरा जयवीर सिंह ने बताया कि लखनऊ स्थित मोहनलाल गंज में हुलासखेड़ा का पर्यटन विकास के लिए 11.99 करोड़, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में बेदारण्यम की स्थापना कार्य के लिए 1.49 करोड़ रुपये, मिर्जापुर की 07 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.04 करोड़, करोड़, 79.64 लाख, 1.94 करोड़, 1.97 करोड़, 83.69 लाख, 88.87 लाख और 2.15 करोड़ रुपये के करीब धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार भदोही जनपद की 05 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.03 करोड़, 1.47 करोड़, 1.45 करोड़ 99.97 लाख, 1.25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। वहीं सोनभद्र जनपद की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.25 करोड़ और 1.16 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गई है। इसी तरह महोबा जनपद के विभिन्न मंदिरों के लिए क्रमशः 1.08 करोड़ रुपये, 45.58 लाख और 71.77 लाख रुपये तीन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत किए गए। हमीरपुर की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 70 लाख और 69.81 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। बांदा की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 53.82 लाख, 1.38 करोड़, 1.14 करोड़, 1.30 करोड़, 3.38 करोड़ और 2.83 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। वहीं चित्रकूट की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.81 करोड़, 2.29 करोड़, 5.25 करोड़, 1.71 करोड़, 1.66 करोड़ और 9.05 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। निविदा की कार्यवाही भी जारी उन्होंने बताया कि लगभग सभी परियोजनाओं पर कार्य प्रारम्भ कराने के लिए निविदा की कार्यवाही प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि पर्यटन सेक्टर की लोकप्रियता एवं निवेश की असीमित संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश सरकार आस्था के साथ विकास के अंतर्गत सभी स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं सुलभ करा रही है।

श्रमिकों के बच्चों के लिए “मेधा छात्र उन्नयन छात्रवृत्ति योजना” प्रारंभ करने का निर्णय

भोपाल श्रमिकों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्रमिक कल्याण से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने यह निर्देश मध्यप्रदेश असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मंडल, मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल तथा मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दिए। मंत्री  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। नई श्रम संहिताएं श्रमिकों को नया संरक्षण प्रदान करते हुए उनके कल्याण के लिए संचालित व्यवस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप श्रम कल्याण संबंधी प्रावधानों को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जाए, जिससे कर्मचारी और नियोक्ता के मध्य बेहतर संबंध स्थापित हों और औद्योगिक विकास को गति मिले। श्रम मंत्री  पटेल की पहल पर श्रमिकों के बच्चों के लिए “मेधा छात्र उन्नयन छात्रवृत्ति योजना”। प्रारंभ करने का बड़ा निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत मध्यप्रदेश और सीबीएसई बोर्ड में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले 100 मेधावी विद्यार्थियों को 7,500 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसके अलावा, श्रमिकों को स्वास्थ्य से जोड़ने के लिए प्रदेश के 422 संस्थानों में योग गतिविधियां चलाई जा रही हैं। बुरहानपुर और नरसिंहपुर में आदर्श श्रम कल्याण केंद्र विकसित किए जा रहे हैं, जबकि इंदौर और ग्वालियर में भी ऐसे केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। बैठक में जानकारी दी गई कि नई श्रम संहिताओं (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं नियम-2026) के माध्यम से श्रमिकों को अधिक सुरक्षा और सुविधाएं मिलेंगी। इसके तहत न्यूनतम वेतन का दायरा सभी वर्गों तक बढ़ाया गया है, मातृत्व अवकाश को 26 सप्ताह सुनिश्चित किया गया है तथा गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्करों की सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही, असंगठित श्रमिकों के उपचार के लिए शीघ्र ही एक नई स्वास्थ्य सहायता योजना शुरू की जाएगी और पंजीकृत श्रमिकों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था की जाएगी। निर्माण श्रमिकों के कल्याण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि मंडल द्वारा प्रसूति सहायता योजना में 190.84 करोड़ रुपये और अनुग्रह सहायता में 23.36 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 92.95 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। बैठक में योजनाओं की बेहतर निगरानी के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और पोर्टल का सिक्योरिटी ऑडिट कराने तथा मोबाइल एप्लीकेशन विकसित करने पर सहमति बनी। श्रमिकों तक सीधी मदद पहुंचाने के लिए 'श्रम साथी योजना' के तहत स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी। नई शिक्षा नीति के अनुरूप भोपाल के पांच महाविद्यालयों में श्रम एवं कौशल आधारित शिक्षा की पायलट परियोजना भी शुरू की जाएगी। इस अवसर पर संबंधित अधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।  

72 जिलों के 1011 केंद्रों पर पारदर्शी और नकलविहीन तरीके से सम्पन्न हुई बी.एड. प्रवेश परीक्षा

लखनऊ मंगलवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पुस्तकालय भवन में उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 का परिणाम घोषित किया गया। उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 के टॉपर्स से उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, राज्यमंत्री रजनी तिवारी, कुलपतिगण तथा प्रमुख सचिव एवं सचिव द्वारा वीडियो कॉल पर वार्ता कर शुभकामनाएं दी और उनकी भविष्य की योजनाओं को जाना। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि परीक्षा में उत्तीर्ण होकर अभ्यर्थियों ने अपने भविष्य की दिशा तय की है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के त्याग और गुरुओं के मार्गदर्शन से ही यह मुकाम हासिल हुआ है। 'गुरु देवो भव, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' की भावना के साथ हमें राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना चाहिए। देशभक्ति केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। समाज ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका ईमानदारी, परिश्रम और समर्पण से पालन करना ही सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने टेक्नोलॉजी और एआई को जोड़कर अभेद्य सिस्टम से परीक्षा कराई। यह उदाहरण प्रस्तुत करता है कि परीक्षाएं कैसे शुचिता, पारदर्शिता और गोपनीयता के साथ कराई जाएं। योगी सरकार के आने के बाद लखनऊ, बरेली और अब झांसी विश्वविद्यालय ने बी.एड. परीक्षाएं कराकर शिक्षा के स्तर को सुधारा है। पहले नकल को बढ़ावा देने की बात होती थी, लेकिन अब टेक्नोलॉजी से जुड़कर परीक्षाएं नकलविहीन हो रही हैं। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज बी.एड. करने वाले छात्रों के लिए हर्ष का दिन है। उन्होंने सभी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपका ज्ञान, अनुभव और समर्पण आपको अलग पहचान दिलाएगा। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और उसकी टीम को परीक्षा के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य: उत्तर प्रदेश शासन द्वारा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी को राज्य स्तरीय संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 आयोजित कराने का दायित्व सौंपा गया था। विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 31 मई 2026 को दो पालियों में प्रातः 9.00 से 12.00 बजे तक तथा अपराह्न 2.00 से 5.00 बजे तक प्रदेश के 72 जिलों के 1011 परीक्षा केंद्रों पर पूर्ण शुचिता, पारदर्शिता एवं गोपनीयता के साथ परीक्षा आयोजित कराई गई। बी.एड. प्रवेश परीक्षा में 4,44,958 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 2,72,659 महिलाएं, 1,72,297 पुरुष तथा 2 ट्रांसजेंडर शामिल थे। श्रेणीवार 2,36,272 सामान्य, 1,32,217 अन्य पिछड़ा वर्ग, 72,128 अनुसूचित जाति, 1341 अनुसूचित जनजाति तथा 2448 विकलांग अभ्यर्थी पंजीकृत थे। प्रथम पाली में 4,00,499 तथा द्वितीय पाली में 4,00,756 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए। कुल उपस्थिति लगभग 90 प्रतिशत रही। कासगंज एवं पीलीभीत में सबसे अधिक 95 प्रतिशत तथा गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सबसे कम 84 प्रतिशत उपस्थिति रही। तकनीक का हुआ अभूतपूर्व प्रयोग:   परीक्षा में हाईटेक कमांड कंट्रोल रूम स्थापित कर आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर) के माध्यम से 72 जिलों के 1011 केंद्रों की लाइव मॉनिटरिंग की गई। 22000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 5651 बायोमेट्रिक्स मशीनें लगाई गईं। एआई और रियल टाइम बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से सभी अभ्यर्थियों की फेस रिकॉगनीशन एवं फिंगर प्रिंट अटेंडेंस कराई गई। स्ट्रांग रूम, परीक्षा कक्ष एवं प्रवेश/निकास स्थान की एआई युक्त सीसीटीवी से निगरानी की गई। वीओआईपी आधारित सिस्टम से सभी केंद्रों से रियल टाइम संपर्क स्थापित किया गया। विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों को जीपीएस आधारित बॉडी बॉर्न कैमरे दिए गए। परीक्षा के दौरान 04 अभ्यर्थी अनुचित साधन प्रयोग करते पाए गए, जिनका परिणाम निरस्त कर दिया गया। परीक्षाफल: परीक्षा के दौरान ओएमआर उत्तर पत्रकों की डबल स्कैनिंग एवं इमेज स्कैनिंग के माध्यम से स्कोरिंग की गई। कुल 4,00,107 अभ्यर्थियों को रैंक जारी की गई, जिनमें 1,53,612 पुरुष, 2,46,494 महिला तथा 01 ट्रांसजेंडर हैं। कला वर्ग के 2,48,452, विज्ञान वर्ग के 1,28,018, वाणिज्य वर्ग के 20,514 एवं कृषि वर्ग के 3771 अभ्यर्थी शामिल हैं। टॉपर्स: प्रथम 10 में स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में 04 पुरुष तथा 06 महिला हैं। जनपद अलीगढ़ की सुश्री वन्दना सिंह (विज्ञान वर्ग) ने प्रदेश में प्रथम, अलीगढ़ के श्री नितिन पचौरी (विज्ञान वर्ग) ने द्वितीय तथा जौनपुर की सुश्री मिश्रा खुशी अजय (विज्ञान वर्ग) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।  इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडे, आरएमएल विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा  एम.के. अग्रवाल, प्रमुख सलाहकार प्रो. एस.पी. सिंह, राज्य समन्वयक प्रो. सौरव श्रीवास्तव, सह राज्य समन्वयक प्रो. डी.के. भट्ट एवं प्रो. काव्या दुबे, कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

जुलाई में सभी विद्यार्थियों के लिए चलेगा 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण कार्यक्रम

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा सुधार के अगले चरण में प्रवेश करते हुए अब बच्चों के सीखने के अंतराल (लर्निंग गैप) को समाप्त करने के लिए प्रदेशव्यापी ‘कैच-अप शिक्षण अभियान’ शुरू करने जा रही है। निपुण भारत मिशन के माध्यम से आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के बाद सरकार का फोकस अब उन विद्यार्थियों तक पहुंचने पर है, जो किसी कारणवश अपेक्षित अधिगम स्तर से पीछे रह गए हैं। इसी उद्देश्य से जुलाई 2026 में सभी विद्यार्थियों के लिए 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा, जबकि अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक विद्यालयों में प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का विशेष कैच-अप शिक्षण सत्र आयोजित होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एनसीएफएसई-2023 की भावना के अनुरूप तैयार की गई इस कार्ययोजना का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी सीखने की आवश्यकता के अनुसार शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराना है। योगी सरकार का मानना है कि यदि समय रहते अधिगम अंतराल को दूर नहीं किया गया तो बच्चों की आगे की शैक्षणिक प्रगति प्रभावित हो सकती है। इसलिए विद्यालय स्तर पर सुनियोजित, व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी रणनीति लागू की जा रही है। अधिगम परिणामों पर केंद्रित शिक्षा सुधार का नया चरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधार अब नामांकन और आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ बच्चों के वास्तविक अधिगम परिणामों पर केंद्रित हो चुका है। निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल अनुश्रवण और अब कैच-अप शिक्षण अभियान के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है कि कोई भी बच्चा सीखने की दौड़ में पीछे न रह जाए। यह पहल गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अनुभव आधारित और रुचिकर होगा शिक्षण कैच-अप शिक्षण को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए स्थानीय परिवेश, दैनिक जीवन के अनुभवों और गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़ा जाएगा। शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम), गणित किट, पुस्तकालय पुस्तकों, चार्ट, पोस्टर और स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। खेल आधारित गतिविधियों, कहानी, चित्र, लेखन, समूह कार्य तथा सहभागितापूर्ण शिक्षण के माध्यम से बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ाई जाएगी। त्रुटि विश्लेषण और पीयर लर्निंग पर रहेगा जोर कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की कठिनाइयों की पहचान कर उनका समाधान किया जाएगा। त्रुटि विश्लेषण के माध्यम से यह समझा जाएगा कि बच्चे कहां और क्यों पिछड़ रहे हैं। ‘मैं करूं-हम करें-तुम करो’ रणनीति, पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और कोऑपरेटिव लर्निंग जैसी पद्धतियों का उपयोग कर बच्चों में आत्मविश्वास, सहयोग और समस्या समाधान क्षमता विकसित की जाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी विद्यार्थी स्वयं को कमजोर या उपेक्षित महसूस न करे। आकलन, अनुश्रवण और अभिभावक सहभागिता बनेगी सफलता की कुंजी कार्यक्रम को परिणाममुखी बनाने के लिए विद्यार्थियों का बेसलाइन और एंडलाइन आकलन किया जाएगा तथा उनकी प्रगति का नियमित अभिलेखीकरण किया जाएगा। एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर और खंड शिक्षा अधिकारी समय-समय पर कार्यक्रम की समीक्षा करेंगे। वहीं विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चों को विद्यालय और घर दोनों स्थानों पर सीखने के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके।

सीएम योगी की मंशा के अनुरूप स्थानीय स्तर पर विकसित होंगे छोटे उद्योग

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने गोशालाओं की क्षमता का राज्यव्यापी मूल्यांकन पूरा कर लिया है। इसके आधार पर अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में स्थानीय संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप एक प्रमुख गो आधारित उद्योग विकसित करने की तैयारी है। इस पहल को "एक जनपद-एक नवाचार" मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा। गोशालाओं की भूमि, गोवंश, जल संसाधन और स्थानीय बाजार के आधार पर आकलन योजना का उद्देश्य गोशालाओं को केवल निराश्रित गोवंश के संरक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पादन, रोजगार, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए प्रदेशभर की गोशालाओं में उपलब्ध भूमि, गोवंश, जल संसाधन, पंचगव्य इकाइयों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का विस्तृत आकलन किया गया है। किसी जिले में बायोगैस उत्पादन तो कहीं इको पेंट निर्माण को मिलेगा बढ़ावा उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि निरीक्षण और अध्ययन के बाद प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग नवाचार मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। किसी जिले में बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा तो कहीं इको पेंट निर्माण, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर आधारित उत्पाद, पंचगव्य उत्पादों को प्राथमिकता मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर छोटी उद्योग इकाइयों का विकास होगा और ग्रामीण युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। ऐसा होगा जिला विशेष नवाचार मॉडल जिला विशेष नवाचार मॉडल के माध्यम से संसाधनों को आय और रोजगार में बदलने की रणनीति तैयार की गई है। योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को प्रशिक्षण देकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जाएगा। यह मॉडल सफल होने पर गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, प्राकृतिक खेती को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। साथ ही प्रत्येक जिले की एक विशिष्ट गो-आधारित पहचान विकसित होगी, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी।

24 जून से 8 जुलाई तक प्रदेशभर में आयोजित होंगी विभिन्नो गतिविधियां

भोपाल  प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम तथा नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 दिवसीय प्रदेशव्यापी साइबर वृहद जन-जागरूकता अभियान 24 जून से 8 जुलाई तक "Safe Click 2.0" नाम से प्रारंभ किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य साइबर सुरक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक साइबर अपराधों से बचाव संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना है। पुलिस मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्‍यम से समस्‍त जोनल पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि इस अभियान को अधिक व्यापक, प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित स्वरूप में संचालित किया जाए। डीजीपी ने कहा कि फरवरी 2025 में संचालित साइबर जागरूकता प्रयासों में सभी इकाइयों द्वारा सराहनीय कार्य किया गया, जिसके परिणामस्वरूप डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों की घटनाओं में कमी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए जनता को निरंतर जागरूक करना आवश्यक है तथा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलकर इस अभियान को सफल बनाना होगा। अभियान के दौरान प्रदेशभर में विभिन्न स्तरों पर व्यापक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें संस्थागत गतिविधियों के अंतर्गत विद्यालयों, महाविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, शासकीय कार्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य संस्थानों में साइबर सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सामुदायिक जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से ग्राम पंचायतों, नगरीय क्षेत्रों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों को साइबर अपराधों के नए तौर-तरीकों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी। अभियान के अंतर्गत जागरूकता वाहन के माध्यम से जनसंदेश प्रसारित किए जाएंगे, साइबर सुरक्षा मेले आयोजित होंगे तथा युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए "स्कैम हैकथॉन" जैसे नवाचार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति प्रतिबद्ध करने हेतु साइबर सुरक्षा शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही "मानव क्यूआर कोड" जैसी अभिनव गतिविधियों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संदेशों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। अभियान अवधि में साइबर जागरूकता श्रृंखला के तहत विभिन्न विषयों पर नियमित जनसंपर्क एवं संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि, साइबर ठगी अथवा फर्जी संदेश की सूचना तत्काल पुलिस एवं साइबर हेल्पलाइन को दें तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाकर साइबर सुरक्षित मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें।  

केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों से बदली प्रदेश की तस्वीर, सुरक्षित बेटी, सशक्त महिला एवं आर्थिक सशक्तीकरण का मॉडल बना यूपी

लखनऊ  वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद प्रदेश में विकास की नई धारा देखने को मिली। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा लाभ यदि किसी वर्ग को मिला है तो वह प्रदेश की महिलाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित नीतियों ने महिला सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है। केंद्र की योजनाओं और राज्य सरकार के प्रभावी क्रियान्वयन ने लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। प्रदेश में महिलाओं के लिए सुरक्षा, सम्मान और अवसरों का वातावरण  आज उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए सुरक्षा, सम्मान और अवसरों का वातावरण पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत दिखाई देता है। उज्ज्वला योजना, मिशन शक्ति, स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी, कन्या सुमंगला योजना जैसी पहलों ने महिलाओं को न केवल सामाजिक रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया है। महिलाओं की सुरक्षा है योगी सरकर की प्राथमिकता महिला सशक्तीकरण की पहली शर्त सुरक्षा है, महिलाओं को सुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा तो शिक्षा, रोजगार और स्वावलंबन के अवसर भी सीमित रह जाएंगे। योगी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन किया गया, महिला हेल्पलाइन 1090 को मजबूत किया गया, महिला डेस्क की स्थापना की गई तथा मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता पैदा की गई। महिला सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस भर्ती में महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़कर 44 हजार से अधिक हो गई, जबकि वर्ष 2017 तक यह संख्या लगभग 10 हजार के आसपास थी। महिला पुलिस बल में इस वृद्धि ने महिलाओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण और संवेदनशील मामलों में बेहतर पुलिसिंग को सुनिश्चित किया है। आज प्रदेश के लगभग हर जिले में महिला बीट पुलिसिंग, पिंक पेट्रोलिंग और महिला हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा रहीं हैं। उज्ज्वला योजना से बदला जीवन, गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से मिली राहत ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ महिला सशक्तीकरण की सबसे प्रभावशाली योजनाओं में से एक मानी जाती है। उत्तर प्रदेश इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य रहा है। प्रदेश में लगभग 1.86 करोड़ परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। इस योजना ने महिलाओं को धुएं से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाई है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं लकड़ी, उपले और कोयले से खाना बनाती थीं, जिससे उन्हें आंखों और फेफड़ों की बीमारियों का सामना करना पड़ता था। उज्ज्वला योजना ने न केवल उनके स्वास्थ्य की रक्षा की बल्कि समय और श्रम की भी बचत की। आज लाखों महिलाएं गैस चूल्हे का उपयोग कर रही हैं, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है और उन्हें अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है। कन्या सुमंगला योजना से बेटियों को मिला संबल योगी सरकार ने बेटियों के जन्म से लेकर शिक्षा तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना शुरू की। इस योजना के अंतर्गत अब तक 27.37 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ दिया जा चुका है। योजना के तहत विभिन्न चरणों में कुल 25 हजार रु…