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राहत कार्यों में तेजी लाएं: लोकसभा अध्यक्ष ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में किया स्थलीय निरीक्षण

कोटा कोटा दौरे पर आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को शहर के अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जलभराव, नालों की क्षतिग्रस्त बाउंड्री और वर्षा जनित समस्याओं से जूझ रहे नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। बिरला ने रानपुर बंधा, धर्मपुरा, बड़ा बस्ती, अनंतपुरा, रायपुरा और देवली अरब समेत कई क्षेत्रों का दौरा किया। उनके साथ ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, ओएसडी राजीव दत्ता, जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि जलभराव की समस्या किन कारणों से उत्पन्न हुई, साथ ही नालों की सीमित क्षमता और जल निकासी के अभाव को भी प्रमुख वजह बताया। रानपुर इलाके में हाल ही में एक युवती की जलभराव में डूबने से मौत हो गई थी। बिरला ने इस मामले में कॉलेज और जिला प्रशासन से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नालों की क्षमता बढ़ाई जाए और वैकल्पिक जलनिकासी मार्गों की तलाश की जाए, जिससे हर साल आने वाली समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने सभी प्रभावित क्षेत्रों का जल्द से जल्द सर्वे करने और आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने को कहा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिरला इसके बाद कोटा ग्रामीण के निमोदा हरीजी गांव पहुंचे, जहां हाल ही में नदी में डूबने से कुछ लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मिलकर शोक संवेदना प्रकट की और उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही अधिकारियों को पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। जिन लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं लगा है, उन्हें खोजने के लिए अतिरिक्त रेस्क्यू टीमें लगाने को भी कहा। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन की लापरवाही की शिकायत भी की। ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय रहते रेस्क्यू टीमें पहुंच जातीं, तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। बिरला ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।  

मुख्यमंत्री साय ने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व चेतना उत्पन्न की है। विमोचन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत  निहारिका बारीक, आयुक्त मनरेगा और संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना तारण प्रकाश सिन्हा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रियता और जनता की स्वप्रेरित भागीदारी के चलते यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों से जुड़ रहे हैं, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका में राज्य की विभिन्न पंचायतों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और नवाचारों को संकलित किया गया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, जिससे लोगों में जल के महत्व को लेकर व्यावहारिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका जल संरक्षण को जन-भागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण रही है, और यह चेतना आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप लेगी। उल्लेखनीय है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन जैसे माध्यमों से व्यापक स्तर पर जनसामान्य को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया गया है। 626 क्लस्टर्स में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56,000 से अधिक प्रतिभागियों को जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए तैयार किया गया है। अभियान में GIS तकनीक का उपयोग कर जल संरक्षण कार्यों की प्रभावी योजना बनाई जा रही है, जबकि जलदूत ऐप के माध्यम से खुले कुओं का जल स्तर मापा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परकोलेशन टैंक, अर्दन डैम, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर जैसे संरचनात्मक उपायों के माध्यम से जल पुनर्भरण और संरक्षण के स्थायी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के यह प्रयास छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करेंगे।

सेपरेट हॉस्टल फॉर फ्रेशर्स: RGPV ने सीनियर्स-जूनियर्स को अलग-अलग आवास में रखा

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) ने वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच रैगिंग और मारपीट की बढ़ती घटनाओं को देखेते हुए इस सत्र से एक नई पहल की है। इस बार कनिष्ठ विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। इसके अलावा इस बार मेरिट के आधार पर नवप्रवेशित विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित किया जाएगा। अब किसी भी छात्र संगठन की सिफारिश पर छात्रावास आवंटित नहीं होंगे। इसके अलावा सख्त नियम भी बनाए गए हैं। विवि प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि छात्र राजनीति, संगठनात्मक दबाव या किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से छात्रावास आवंटन नहीं होगा यह निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुशासित माहौल को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। बता दें, कि प्रदेश में सबसे अधिक आरजीपीवी में रैगिंग और मारपीट की घटनाएं यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी में दर्ज हुई है। पुराने छात्रावास आवंटन को किया गया निरस्त विश्वविद्यालय ने सभी पुराने छात्रावास आवंटन को पूरी तरह निरस्त कर दिसंबर 2024 की परीक्षा में प्राप्त मेरिट और मध्यप्रदेश शासन की आरक्षण नीति के आधार पर नए सिरे से रूम आवंटन की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें लिए द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के बालक छात्रावास के लिए 690 और कन्या छात्रावास के लिए 510 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थी भी इस नई व्यवस्था समर्थन कर रहे हैं। इस बार विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास उन्हीं को मिलेंगे जो वास्तव में अध्ययनरत और पात्र हैं।इसके लिए न केवल आवेदकों की कक्षा व मेरिट आधारित पात्रता तय की जा रही है, बल्कि आवंटन को अस्थायी (प्रोविजनल) रूप में रखा गया है। नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अलग छात्रावास विश्वविद्यालय परिसर में कुल पांच छात्रावासों में लगभग 1460 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था है, जबकि नवप्रवेषित 1200 समेत चार वर्षों के कुल 4500 छात्र-छात्राएं हैं।इस कारण प्रबंधन ने इस बार आवंटन मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया है। इसमें नवप्रवेशित विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। छात्रों के लिए यह व्यवस्था इसमें लड़कों को चंद्रशेखर आजाद छात्रावास में करीब 270 और भास्कराचार्य में 135 छात्रों को कमरे आवंटित किए गए हैं। वहीं लगभग 450 लड़कियों के लिए रानी अहिल्याबाई छात्रावास आवंटित किया गया है। छात्राओं के लिए लक्ष्मीबाई छात्रावास नर्धारित वहीं द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के 370 छात्रों के लिए एपीजे अब्दुल कलाम छात्रावास और 230 छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास निर्धारित किए गए हैं। इसे लेकर प्रो. एस.एस भदौरिया, संचालक, यूआईटी, आरजीपीवी यह ने बताया कि यह व्यवस्था विवि में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। 1200 आवेदन मिले है, नियमों और मेरिट के आधार पर रूम आवंटित किए जा रहे हैं।

वेस्टइंडीज की शर्मनाक हार के बाद सीडब्ल्यूआई ने बुलाई आपात बैठक, दिग्गजों को किया आमंत्रित

किंग्स्टन (जमैका) ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मिली शर्मनाक हार, खासकर अंतिम टेस्ट में महज 27 रन पर ढेर होने के बाद क्रिकेट वेस्टइंडीज (सीडब्ल्यूआई) ने कड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने अपनी क्रिकेट स्ट्रैटेजी कमेटी की एक आपात बैठक बुलाई है, जिसमें सर क्लाइव लॉयड, सर विवियन रिचर्ड्स और ब्रायन लारा को विशेष आमंत्रण भेजा गया है। सीडब्ल्यूआई अध्यक्ष डॉ. किशोर शालो ने एक बयान में कहा, तुरंत प्रभाव से, मैंने क्रिकेट रणनीति और ऑफिशिएटिंग कमेटी के अध्यक्ष को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल की टेस्ट सीरीज, विशेष रूप से अंतिम मैच की समीक्षा हेतु आपात बैठक बुलाने की सलाह दी है। इस बैठक में पहले से ही शामिल पूर्व दिग्गज जैसे डॉ. शिवनारायण चंद्रपॉल, डॉ. डेसमंड हेन्स और इयान ब्रैडशॉ के साथ अब इन महान बल्लेबाजों की भी राय ली जाएगी। पूर्व स्पिनर दिनानाथ रामनाराइन ने बोर्ड की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर एक तीखा लेख साझा किया है। उन्होंने लिखा, बोर्ड के सदस्य खुद को मनमाफिक वेतन देते हैं, खिलाड़ियों का चयन व्यक्तिगत निष्ठा के आधार पर होता है, और राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन को कोई महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने आगे कहा, जहां प्रशंसक खामोशी के साथ इस खेल से दूर होते जा रहे हैं, वहीं अधिकारी कुर्सियों से चिपके हुए हैं। हार के बाद भी कोई आत्मचिंतन नहीं, कोई जवाबदेही नहीं। रामनाराइन ने यह भी याद दिलाया कि यह वही प्रणाली है जिसकी वजह से वेस्टइंडीज को यूएसए जैसी टीम से 100 रन से हार का सामना करना पड़ा और अब 27 रन पर ऑल आउट होने जैसी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। सीडब्ल्यूआई अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह बैठक केवल प्रतीकात्मक नहीं है, ये वही लोग हैं जिन्होंने हमारे क्रिकेट के स्वर्णिम युग को परिभाषित किया है। उनकी दृष्टि हमारे क्रिकेट के भविष्य को आकार देने में बेहद उपयोगी होगी। हमारा उद्देश्य इस बैठक से ठोस और क्रियान्वयन योग्य सुझाव प्राप्त करना है। हालांकि बैठक कब और कहां होगी, इस पर आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मगर इतना तय है कि वेस्टइंडीज क्रिकेट में यह एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है।  

RCB भगदड़ जांच रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक हो: कर्नाटक हाई कोर्ट का आदेश

बेंगलुरु कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह चार जून को हुई भगदड़ की घटना पर अपनी स्थिति रिपोर्ट सार्वजनिक करें, जिसने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई आईपीएल जीत के जश्न को गहरा धक्का पहुंचाया था। इस त्रासदी में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट से इस रिपोर्ट को गोपनीय रखने का अनुरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने सोमवार, 14 जुलाई को स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की गोपनीयता के लिए कोई कानूनी आधार नहीं है, और ये केवल ‘सरकार की दृष्टि में तथ्यों की प्रस्तुति’ है। कोर्ट ने सरकार को यह रिपोर्ट मामले के अन्य पक्षों – आरसीबी, कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) और डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स, जो फ्रेंचाइजी के इवेंट पार्टनर हैं – को सौंपने का भी निर्देश दिया है। इस बीच फ्रेंचाइजी एक विस्तृत सीआईडी जांच और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) की दो सदस्यीय पीठ की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। यह पीठ सरकारी और सार्वजनिक सेवकों से जुड़े मामलों की जांच करने वाला अर्ध-न्यायिक निकाय है। आरसीबी और डीएनए के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले एक महीने में अपने बयान जमा कराए हैं। फैसले की कोई तय तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। एक जुलाई को सीएटी की दो सदस्यीय पीठ ने एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर जुटी भीड़ को लेकर एक अहम टिप्पणी की। ट्रिब्यूनल ने पाया कि आरसीबी ने तीन से पांच लाख लोगों की भीड़ को स्टेडियम के बाहर आकर्षित किया, जब फ्रेंचाइजी ने अपनी पहली आईपीएल खिताबी जीत के तुरंत बाद, तीन जून को, सोशल मीडिया पर विजय जुलूस की घोषणा की। इस मामले की जांच का काम सीएटी को तब सौंपा गया जब बेंगलुरु (पश्चिम) के पुलिस महानिरीक्षक और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकास कुमार ने एक याचिका दायर की। यह याचिका मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा उन्हें भगदड़ की घटना के बाद पद से हटाए जाने के खिलाफ दाखिल की गई थी। विकास और चार अन्य अधिकारियों को “कर्तव्यों में गंभीर लापरवाही” और “निर्देश न लेने” के आरोप में बर्खास्त किया गया था, जिससे हालात “काबू से बाहर” हो गए थे। ट्रिब्यूनल ने कहा किआरसीबी ने बिना जरूरी अनुमति लिए आईपीएल जीत का जश्न मनाकर ‘अव्यवस्था पैदा की।’ ये टिप्पणियां सीएटी के 29-पन्नों के आदेश का हिस्सा थीं। आरसीबी, के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर निखिल सोसले को पिछले महीने गिरफ्तार कर जमानत पर रिहा किया गया था। उन्होंने मृतकों के परिजनों को मुआवजा बढ़ाने और घायलों की मदद की घोषणा के बाद से अब तक कोई नया बयान जारी नहीं किया है। फ्रेंचाइजी ने ‘आरसीबी केयर्स’ नाम से एक फंड बनाने का वादा किया है, जिससे त्रासदी से प्रभावित सभी परिवारों की मदद की जा सके। 4 जून की घटना के बाद से उनके किसी भी सोशल मीडिया चैनल पर कोई नई अपडेट नहीं आई है।  

विधानसभा के बाहर दिखा विरोध का नया रूप, MVA विधायक बने सुर्खियों का कारण

मुंबई महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ द्वारा कैंटीन कर्मचारी की पिटाई मामले में सियासत अपने चरम पर है। इसका नजरा आज (बुधवार को) उस वक्त देखने को मिला जब विपक्षी दलों के गठबंधन महा विकास आघाडी (MVA) के विधायकों ने अनूठे अंदाज में विरोध-प्रदर्शन किया। दरअसल, महाराष्ट्र विधान भवन के बाहर विपक्षी महा विकास आघाड़ी के विधायकों ने ‘बनियान तौलिया’ प्रदर्शन किया। इस दौरान बनियान और कपड़ों के ऊपर तौलिया पहने विधायकों ने सत्तारूढ़ गठबंधन के "गुंडा राज" के खिलाफ जमकर नारे लगाए। तौलिया लपेटे विधायक जोर-जोर से नारे लगा रहे थे कि राज्य में गुंडा राज चल रहा है। राज्य विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने संवाददाताओं से कहा, "विधायक कैंटीन में गायकवाड़ द्वारा किया गया हमला दर्शाता है कि सरकार भी ऐसे तत्वों का समर्थन कर रही है।" उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ऐसे लोगों को संरक्षण दे रही है। गायकवाड़ को निलंबित करने की मांग कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि यह सभी को बताने और दिखाने की जरूरत है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायक कैसे गुंडों की तरह व्यवहार करते हैं। उन्होंने कहा कि गायकवाड़ का यह कृत्य शर्मनाक है और उन्हें सजा मिलनी चाहिए। NCP (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने बताया कि MVA के विधायकों ने यह विरोध-प्रदर्शन इसलिए किया है ताकि जनता को यह पता चल सके कि सत्ता में बैठे लोग किस प्रकार का व्यवहार आम आदमी से करते हैं। विपक्षी विधायकों ने संजय गायकवाड़ को विधानसभा से निलंबित करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आदित्य ठाकरे ने दिया था चड्डी- बनियान गैंग नाम बता दें कि पिछले हफ्ते विधायक हॉस्टल की कैंटीन में 'बासी' खाना परोसे जाने पर एक कर्मचारी को थप्पड़ और घूंसे मारने का शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ का एक वीडियो सामने आया था। इसके बाद सरकार और विपक्ष दोनों ने उनकी आलोजना की है। वीडियो में गायकवाड़ बनियान पहने और कमर पर तौलिया लपेटे कैंटीन ठेकेदार को थप्पड़ व घूंसे मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। दो दिन पहले ही आदित्य ठाकरे ने शिवसेना विधायकों को चड्डी- बनियान गैंग कहकर बुलाया था, जिस पर नीलेश राणे ने रोष जताया था। एमवीए विधायकों का अनूठा प्रदर्शन आदित्य ठाकरे के बयान का समर्थन और सत्ताधारी गठबंधन के विधायक के करतूत और उसे मिल रहे रथित संरक्षण का विरोध है। 

शुभमन गिल का खुलासा, उम्मीद नहीं थी किंग चार्ल्स लॉर्ड्स टेस्ट देखेंगे

नई दिल्ली भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि टीम को उम्मीद नहीं थी कि किंग चार्ल्स लॉर्ड्स टेस्ट मैच देखेंगे। भारत की पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने मंगलवार को लंदन स्थित ‘क्लेरेंस हाउस’ में किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात की। इस दौरान किंग चार्ल्स ने जसप्रीत बुमराह, ऋषभ पंत, शुभमन गिल समेत अन्य खिलाड़ियों से बातचीत की। किंग चार्ल्स तृतीय ने अपनी परंपरा निभाते हुए लंदन दौरे पर आई भारतीय क्रिकेट टीम का क्लेरेंस हाउस में स्वागत किया। यह एक दोस्ताना मुलाकात थी। किंग चार्ल्स तृतीय इंग्लैंड दौरे पर राष्ट्रमंडल क्रिकेट टीमों का स्वागत करने की परंपरा रखते हैं। राष्ट्रमंडल प्रमुख के रूप में मेहमानों की मेजबानी कर रहे किंग चार्ल्स ने भारतीय टीम से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने भारत-इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच की झलकियां देखीं। इस मुकाबले में गिल की अगुवाई वाली भारतीय टीम को महज 22 रन से करीबी हार झेलनी पड़ी थी। गिल ने ‘बीसीसीआई’ के ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा, “किंग चार्ल्स बहुत दयालु और उदार हैं। उन्होंने हमसे बहुत अच्छी बातचीत की। उम्मीद नहीं थी कि वह हमारा मैच देखेंगे। किंग चार्ल्स ने बताया कि उन्होंने हमारे मुकाबले के आखिरी सेशन के कुछ अंश देखे। यह एक शानदार अनुभव था। हम इसके लिए बहुत आभारी हैं।” इस दौरान क्लेरेंस हाउस में इंग्लिश अभिनेता और संगीतकार इद्रिस एल्बा ने भी खिलाड़ियों से मुलाकात की। इद्रिस एल्बा सेंट जेम्स पैलेस में आयोजित यूथ ऑपर्च्युनिटीज समिट के लिए लंदन पहुंचे थे। एल्बा ने भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। इस मुलाकात के दौरान बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराइस्वामी भी मौजूद थे। शुक्ला ने किंग चार्ल्स को अपनी पुस्तक ‘स्कार्स ऑफ 1947’ भेंट की। राजीव शुक्ला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ब्रिटेन के किंग चार्ल्स हम सभी से बहुत ही गर्मजोशी के साथ अपने घर पर मिले। वह खुशमिजाज व्यक्तित्व हैं। मुलाकात से पहले, उन्होंने हम सभी के बारे में काफी जानकारी इकट्ठा की थी।”  

Apple यूज़र्स के लिए खुशखबरी: iPhone और Watch अब करेंगे पहले से कहीं ज़्यादा सिंक और स्मार्ट काम

टेक्नोलॉजी दिनों-दिन आगे बढ़ रही है। आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) काफी चलन में है। ऐसा तय माना जा रहा है कि भविष्य में एआई का खूब इस्तेमाल किया जाएगा। कई कंपनियों ने एआई का इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया है। अभी तक AI का इस्तेमाल बीमारियों का पता लगाने, बीमारियों का इलाज करने या पढ़ाई-लिखाई में मदद करने के लिए किया जाता है। आने वाले वक्‍त में एआई का इस्तेमाल प्रेग्‍नेंसी का पता लगाने के लिए भी किया जाएगा। दुनिया की जानी मानी कंपनी Apple ने ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं। iPhone और Apple Watch से पता चलेगी प्रेग्नेंसी ऐपल के प्रोडक्ट्स जैसे iPhone, iPad, Apple Watch आदि को सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स माना जाता है। इनमें कई ऐसे फीचर्स होते हैं जो इन्हें दूसरे डिवाइस से अलग बनाते हैं। एक नई रिसर्च के मुताबिक Apple ने एक कमाल का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल बनाया है जो अब iPhone और Apple Watch से मिली जानकारी (व्यवहारिक डेटा) का इस्तेमाल करके 92% सटीकता के साथ प्रेग्नेंसी का पता लगा सकता है। कैसे काम करती है यह नई टेक्नोलॉजी? इस रिसर्च का नाम "Beyond Sensor Data: Foundation Models of Behavioral Data from Wearables Improve Health Predictions" है। इस रिसर्च में बताया गया है कि यह नया AI मॉडल कुछ खास स्वास्थ्य संकेतों जैसे नींद की गुणवत्ता, दिल की धड़कन में बदलाव (हार्ट रेट वेरिएबिलिटी), चलने-फिरने की आदतें (मोबिलिटी) और अन्य महत्वपूर्ण बातों को पहचान सकता है। यह वियरेबल बिहेवियर मॉडल (WBM) प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को भी ट्रैक कर सकता है। इस नए फाउंडेशन मॉडल को बनाने के लिए 2.5 बिलियन घंटे से भी ज्यादा वियरेबल डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह पिछले मॉडल्स से बेहतर या उनके बराबर काम कर सके। हालां‍क‍ि अभी यह पता नहीं है क‍ि यह टेक्‍नोलॉजी कबतक ड‍िवाइसेज में ले आएगी जाएगी। रिसर्च में क्या-क्या शामिल था? रिसर्चर्स ने 430 प्रेग्नेंट महिलाओं के डेटा का इस्तेमाल करके एक प्रेग्नेंसी डेटासेट बनाया, जिनकी डिलीवरी नॉर्मल या सिजेरियन हुई थी। WBM ने ऐप्पल हेल्थ ऐप, हेल्थकिट और हार्ट रेट सेंसर डेटा (PPG) से जानकारी इकट्ठा की। रिसर्च में बताया गया है कि डेटा से पता चला कि बच्चे के जन्म से पहले के नौ महीने और डिलीवरी के बाद का एक महीना "पॉजिटिव" हफ्ते थे, क्योंकि महिलाएं प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद ठीक होने के दौरान शारीरिक बदलावों से गुजर रही थीं। बाकी समय को "नेगेटिव" हफ्ते के तौर पर चिन्हित किया गया। नतीजों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए रिसर्चर्स ने 24,000 से ज्यादा उन महिलाओं का डेटा भी इकट्ठा किया जिनकी उम्र 50 साल से कम थी और जो प्रेग्नेंट नहीं थीं।  

पहली कक्षा में एडमिशन को लेकर राज्य सरकार और CBSE के दो अलग-अलग नियम का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

 इंदौर  पहली कक्षा में बच्चों के प्रवेश को लेकर राज्य शासन और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दो अलग-अलग नियम अभिभावकों के लिए परेशानी की वजह बन रहे हैं। मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सीबीएसई स्कूल एसोसिएशन की ओर से पैरवी कर रहे अभिभाषक गौरव छाबड़ा ने बताया कि सीबीएसई स्कूलों में प्रवेश की आयु केंद्रीय शिक्षा नीति में निर्धारित की गई है। इसके हिसाब से एक अप्रैल के पहले छह वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों को ही कक्षा एक में प्रवेश दिया जाता है। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने मार्च में एक आदेश जारी किया है। इसमें 30 सितंबर तक छह वर्ष की आयु पूरी करने वालों को प्रवेश देने के लिए कहा है। इन दोनों नियमों में करीब छह माह का अंतर आ रहा है। ऐसी स्थिति में अभिभावक असमंजस में हैं। कोई छात्र एक साल पढ़ाई के बाद किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित होता है तो नियमों की वजह से उसे दोबारा कक्षा एक में पढ़ना पड़ेगा। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान दो सरकारों के दो नियमों के कारण आने वाली परेशानी को कोर्ट के समक्ष रखा गया। कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा सचिव, अध्यक्ष सीबीएसई बोर्ड, मप्र शासन, संचालक राज्य शिक्षा केंद्र और इंदौर के जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है।

परम वीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा एवं कैप्टन विक्रम बत्रा की शौर्य गाथा एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं के सिलेबस में शामिल

भोपाल  एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की अंग्रेजी पुस्तक 'पूरवी' में अब भारत के वीर सपूतों की कहानियां सुनाई जाएंगी। इस पुस्तक में पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा और कारगिल हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा की शौर्य  कहानियां शामिल की गई हैं।  इस पुस्तक के माध्यम से छात्रों को भारत के इतिहास और संस्कृति के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। नए पाठ्यक्रम में शामिल प्रमुख बिंदु: – मेजर सोमनाथ शर्मा: पहले परमवीर चक्र विजेता, जिन्होंने 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्वितीय साहस दिखाया। – कैप्टन विक्रम बत्रा: कारगिल युद्ध में परमवीर चक्र विजेता, जिन्होंने अपने अदम्य साहस से दुश्मनों को पराजित किया। – आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा: झारखंड के प्रसिद्ध आदिवासी नेता, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी। – महान गणितज्ञ:     – आर्यभट्ट: प्राचीन भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और खगोलशास्त्री।     – वराहमिहिर: ज्योतिष और गणित के प्रसिद्ध विद्वान।     – भास्कराचार्य: गणितज्ञ और खगोलशास्त्री, जिन्होंने बीजगणित और ज्यामिति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। – देश की पहली महिला भौतिक वैज्ञानिक बिभा चौधरी: भारतीय विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली वैज्ञानिक। – भारतीय साहित्यकार:     – तेनाली राम: विजयनगर साम्राज्य के प्रसिद्ध तेलुगु कवि।     – सरोजनी नायडू: प्रसिद्ध भारतीय अंग्रेजी कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी। इन सभी व्यक्तित्वों की कहानियों और योगदानों को शामिल करके, एनसीईआरटी ने छात्रों को भारत के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति से परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया है।