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बरेली को मिलेगी नई पहचान! सप्तनाथ ईको सिटी में बनेंगे महाकाल, त्रिशूल और डमरू चौक

बरेली
 शहर के विकास को गति देने को पीलीभीत बाइपास रोड पर प्रस्तावित आवासीय योजना को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भूमि खरीद की प्रक्रिया तेज करने के साथ विकास कार्यों की कार्ययोजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। संभावना जताई जा रही है कि नव वर्ष के पहले विकास कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।

रामगंगा नगर, ग्रेटर बरेली के बाद बीडीए अब तक की अपनी सबसे बड़ी 269 हेक्टेयर में ‘सप्तनाथ ईको सिटी’ आवासीय योजना का विकास कर रहा है।

योजना में प्रवेश द्वार-चौराहों-तिराहों, पार्क, लैंडस्केप और सार्वजनिक स्थलों की डिजाइन अवधारणा से जोड़ने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।

बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय के अनुसार परियोजना में त्रिशूल, त्रिनेत्र, डमरू और अर्धचंद्र जैसे भगवान शिव से जुड़े प्रतीक चिह्र को समकालीन वास्तुशिल्पीय भाषा में प्रस्तुत की जाएगी।

टाउनशिप में सात नाथ थीम पार्क, कैनाल फ्रंट और अन्य लैंडस्केप सुविधाओं को एकीकृत डिजाइन से विकसित करने की योजना है। परियोजना में सात अलग-अलग नाथ थीम पार्कों काे एक-एक नाथ मंदिर से जोड़ा जाएगा और लैंडस्केप डिजाइन में विशिष्टता रखी जाएगी।

नाथ पार्कों की विशिष्टता
    अलखनाथ पार्क: छायादार पौधों के साथ बैठने के स्थान, पैदल पथ और शांत वातावरण पर बल।
    वनखंडीनाथ पार्क: प्रकृति, पौधारोपण और जैव विविधता से प्रेरित लैंडस्केप।
    मढ़ीनाथ पार्क : सांस्कृतिक कलाकृति, व्याख्यात्मक तत्वों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए स्थान।
    त्रिवटीनाथ पार्क: पौधों से घिरे पैदल मार्ग और विश्राम के लिए शांत वातावरण।
    पशुपतिनाथ पार्क: तकनीकी व्यवहार्यता के अनुरूप जल-प्रेरित लैंडस्केप और विश्राम स्थल।
    धोपेश्वरनाथ पार्क: सांस्कृतिक पहचान के साथ पर्यटकों के मनोरंजन एवं गतिविधियों के लिए स्थान।
    तपेश्वरनाथ पार्क: ध्यान, शांत वातावरण, छायादार पौधा रोपण और बैठने के स्थान।

महाकाल चौक, त्रिशूल चौक और डमरू चौक बनेंगे विशिष्ट पहचान के केंद्र
बीडीए उपाध्यक्ष के अनुसार सप्तनाथ ईको सिटी में प्रमुख चौराहों में- महाकाल चौक, त्रिशूल चौक और डमरू चौक को भगवान शिव के प्रतीकों से प्रेरित विशिष्ट पहचान दी जाएगी। चौराहे यातायात प्रबंधन संग टाउनशिप की वास्तुशिल्पीय पहचान के महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे।

इसके लिए वास्तुकार सुमित अग्रवाल व उनकी टीम की ओर से डिजाइन तैयार किया जा रहा। परियोजना में कैनाल फ्रंट विकास के माध्यम से नहर क्षेत्र के आसपास उपलब्ध संभावनाओं के अनुरूप हरित पट्टी, पैदलपथ, लैंडस्केप और सार्वजनिक स्थलों के विकास की योजना है।

इसके अतिरिक्त डीपीआर में मिनी गोल्फ अथवा नौ-होल पैरा-थ्री एग्जीक्यूटिव गोल्फ कोर्स, वार्षिक महादेव फ्लावर शो, मौसमी पुष्प सज्जा, जटा से प्रेरित स्मार्ट बस शेल्टर, कापर कलश आधारित प्याऊ, डिजिटल ज्योतिर्लिंग और इको टेंपल पिलर जैसी अवधारणाएं भी शामिल हैं।

थीम आधारित डिजाइन के साथ परियोजना में सड़क नेटवर्क, जलापूर्ति, सीवरेज, जल निकासी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, हरित अवसंरचना और आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के समन्वित विकास का खाका खींचा जा रहा है।

शिव तत्वों पर आधारित डिजाइन बनेंगे पहचान
बीडीए की उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने बताया कि सप्तनाथ ईको सिटी आवासीय योजना में स्थानीय विरासत, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और आधुनिक नागरिक सुविधाओं का समन्वय बनाया जा रहा है। सात नाथ मंदिरों से प्रेरित थीम पार्क, शिव-तत्वों पर आधारित शहरी डिजाइन इस परियोजना की विशिष्ट पहचान बनेंगे।

हमारा लक्ष्य बरेली के लिए ऐसा सुव्यवस्थित शहरी वातावरण विकसित करना है, जो वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो।

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