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त्योहारी सीजन में रेलवे का तोहफा, दिल्ली से पटना के लिए एक और वंदे भारत ट्रेन; जानें शेड्यूल

 नई दिल्ली उत्तर रेलवे ने नई दिल्ली और पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल ट्रेन की दूसरी जोड़ी चलाने की अधिसूचना जारी कर दी है. रेलवे बोर्ड से भी इसे मंजूरी मिल चुकी है. यह ट्रेन नई दिल्ली से 02254 नंबर और पटना से 02253 नंबर के साथ चलेगी. वंदे भारत फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन नई दिल्ली से पटना के लिए 22 अक्टूबर 2026 से यात्रियों को सेवाएं देगी. इस ट्रेन की पटना से नई दिल्ली रिटर्निंग सर्विस 24 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी. इस पूरे त्योहारी सीजन में ट्रेन दोनों दिशाओं में 16-16 फेरे लगाएगी।  02254-वंदे भारत 22 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026 तक हर रविवार, मंगलवार और गुरुवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पटना जंक्शन के लिए चलेगी. वहीं 02253-वंदे भारत 24 अक्टूबर से 28 नवंबर 2026 तक हर शनिवार, सोमवार और बुधवार को पटना जंक्शन से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होगी. बता दें कि एक और जोड़ी वंदे भारत स्पेशल ट्रेन (02252/02251) पहले से ही नई दिल्ली-पटना-नई दिल्ली के बीच अपनी सेवाएं दे रही है. दोनों वंदे भारत स्पेशल ट्रेनों में एसी चेयर कार और एक्जूटिव चेयर कार की सुविधा उपलब्ध होगी।  शुक्रवार छोड़कर रोज सेवा नई दिल्ली-पटना-नई दिल्ली के बीच पहली जोड़ी 02252/02251 वंदे भारत स्पेशल तय दिनों के मुताबिक चलेगी. 02252 सोमवार, बुधवार और शनिवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पटना जंक्शन के लिए रवाना होगी. 02251 मंगलवार, गुरुवार और रविवार को पटना जंक्शन से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए चलेगी. वंदे भारत स्पेशल ट्रेन की दोनों जोड़ियों को मिलाकर हफ्ते में 6​ दिन (शुक्रवार छोड़कर) दोनों दिशाओं में एक वंदे भारत स्पेशल ट्रेन की सर्विस उपलब्ध रहेगी. दूसरी वंदे भारत स्पेशल में 20 कोच का रेक होगा।  कितना लंबा होगा सफर नई दिल्ली और पटना के बीच दूरी करीब 996 किलोमीटर है. वंदे भारत स्पेशल नई दिल्ली से पटना का सफर 12 घंटे 55 मिनट में पूरी करेगी. वापसी में ट्रेन 13 घंटे 30 मिनट का समय लेगी. इन वंदे भारत स्पेशल ट्रेनों का दोनों दिशाओं से अलीगढ़, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा स्पेशन पर स्टॉपेज होगा।  नई दिल्ली-पटना वंदे भारत का समय 02254 वंदे भारत स्पेशल हर रविवार, मंगलवार और गुरुवार को नई दिल्ली (NDLS) से 08:35 बजे रवाना होगी. अलीगढ़ जंक्शन (ALJN) पर इसका आगमन/प्रस्थान 10:21/10:23 बजे होगा. कानपुर सेंट्रल (CNB) पर समय 13:30/13:35 बजे रहेगा. प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) पर समय 15:45/15:50 बजे होगा. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU) पर समय 18:00/18:10 बजे रहेगा. बक्सर (BXR) पर ट्रेन 19:26/19:28 बजे पहुंचेगी और रवाना होगी. आरा (ARA) पर आगमन/प्रस्थान 20:10/20:12 बजे होगा. ट्रेन पटना (PNBE) 21:30 बजे पहुंचेगी।  पटना-नई दिल्ली वंदे भारत का समय 02253 वंदे भारत स्पेशल हर शनिवार, सोमवार और बुधवार को पटना (PNBE) से 10:00 बजे रवाना होगी. आरा (ARA) पर समय 10:38/10:40 और बक्सर (BXR) पर 11:25/11:27 बजे रहेगा. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU) पर समय 13:10/13:20 बजे होगा. प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) पर आगमन/प्रस्थान 15:35/15:40 बजे होगा. कानपुर सेंट्रल (CNB) पर समय 17:50/17:55 और अलीगढ़ जंक्शन (ALJN) पर 20:53/20:55 बजे रहेगा. ट्रेन नई दिल्ली (NDLS) 23:30 बजे पहुंचेगी।  इसी तरह 02252/02251 वंदे भारत स्पेशल (पहली जोड़ी) 21 अक्टूबर से 25 नवंबर 2026 तक हर सोमवार, बुधवार और शनिवार को नई दिल्ली से पटना और 22 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026 तक हर मंगलवार, गुरुवार और रविवार को पटना से नई दिल्ली के बीच चलेगी. इस ट्रेन की टाइमिंग भी दोनों ओर से पहली वाली की तरह ही है. शुक्रवार को दोनों तरफ से किसी भी वंदे भारत स्पेशल ट्रेन की सर्विस उपलब्ध नहीं रहेगी। 

केन्या में भूखे रहकर मरने के लिए उकसाने वाला पादरी दोषी, सामूहिक कब्रों से मिले 400 से ज्यादा शव

 मोम्बासा  केन्या की एक अदालत ने अंधविश्वास और भुखमरी के जरिए सैकड़ों लोगों की मौत से जुड़े चर्चित 'डेथ कल्ट' मामले में स्वयंभू पादरी पॉल मैकेंजी और उसके 28 साथियों को हत्या का दोषी ठहरा दिया है। मोम्बासा की अदालत ने यह फैसला 190 बच्चों और एक वयस्क की मौत से जुड़े मामले में सुनाया। दोषियों को सजा 6 नवंबर को सुनाई जाएगी। अभियोजन के मुताबिक, मैकेंजी अपने अनुयायियों को यह विश्वास दिलाता था कि कयामत आने से पहले भूखे रहकर प्राण त्यागने से उन्हें सीधे स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होगी। शाकाहोला जंगल से मिली थीं सामूहिक कब्रें यह सनसनीखेज मामला वर्ष 2023 में सामने आया था, जब एक स्थानीय नागरिक ने शाकाहोला जंगल में बच्चों की मौत की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद शुरू हुए तलाशी और खुदाई अभियान में सामूहिक कब्रों से अब तक 400 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। जांच और अदालती कार्यवाही में सामने आया कि बच्चों को उनके परिजनों के सामने ही अलग कर भूखा रहने के लिए मजबूर किया गया, जिससे उनकी तड़प-तड़पकर मौत हो गई। तीन चरणों में रची गई थी भुखमरी की योजना जांच अधिकारियों के अनुसार, लोगों को भूख से मारने की साजिश बेहद सुनियोजित तरीके से तीन चरणों में तैयार की गई थी। पहले चरण में बच्चों को निशाना बनाया गया। इसके बाद महिलाओं और युवकों को भूखा रखा गया और अंत में पुरुषों को निशाना बनाने की तैयारी थी। जांच में यह भी सामने आया कि मैकेंजी ने अपने अनुयायियों के बच्चों को स्कूल भेजने पर रोक लगा रखी थी और बीमार पड़ने पर इलाज कराने की भी मनाही कर दी थी। पहले से थी जानकारी, फिर भी बचता रहा अधिकारियों के मुताबिक, मैकेंजी की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी प्रशासन को काफी पहले से थी। पुलिस ने 2017 में उसके ठिकाने पर छापेमारी की थी, जबकि 2019 में उसका चर्च भी बंद करा दिया गया था। इसके बावजूद वह कानून की पकड़ से बचकर शाकाहोला के घने जंगलों में पहुंच गया और वहां बिना किसी रोक-टोक के अपना नेटवर्क चलाता रहा। 52 अन्य हत्याओं का मामला भी लंबित अदालत ने मैकेंजी की सभी दलीलों को खारिज करते हुए उसे और उसके 28 साथियों को दोषी करार दिया। हालांकि बचाव पक्ष ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है। इस मामले में दोषियों को 6 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी। वहीं, मैकेंजी के खिलाफ 52 अन्य लोगों की हत्या से जुड़ा एक अलग मामला भी अदालत में विचाराधीन है, जिसमें उसने खुद को बेकसूर बताया है।  

PM किसान योजना की 24वीं किस्त पर बड़ा अपडेट, पैसा पाने के लिए किसान तुरंत निपटा लें ये काम

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अगली किस्त की आस लगाए बैठे देश के करोड़ों किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। रबी सीजन की फसलों की बुआई, उन्नत बीजों और खाद-उर्वरक की खरीदारी के बीच किसानों को इस आर्थिक मदद का बेसब्री से इंतजार है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि त्योहारों के इस सीजन में दशहरा बीतने के बाद और दीपावली से ठीक पहले किसानों के बैंक खातों में 2,000 रुपये की धनराशि हस्तांतरित की जा सकती है। यद्यपि केंद्र सरकार की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन समय-सीमा और व्यवस्था को देखते हुए इसी माह किस्त जारी होने की प्रबल संभावना है। दीपावली से पहले मिल सकती है सौगात उल्लेखनीय है कि पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त जून 2026 में लाभार्थियों के खातों में भेजी गई थी। नियमानुसार चार महीने की अवधि इस माह पूरी हो रही है। केंद्र सरकार सामान्यतः किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक सिंगल क्लिक के माध्यम से देश भर के किसानों को यह राशि जारी करती है। इस बार भी दिवाली के पावन अवसर पर किसानों को यह तोहफा मिलने के आसार हैं। खाते में किस्त आने से पहले निपटा लें ये जरूरी काम योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में कई अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं। यदि दस्तावेजों में जरा सी भी त्रुटि पाई जाती है, तो राशि अटक सकती है। इसलिए किस्त जारी होने से पूर्व लाभार्थी निम्नलिखित प्रक्रियाओं को अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लें।     e-KYC का सत्यापन: बैंक खाते और योजना पोर्टल पर e-KYC की प्रक्रिया अपडेट होना आवश्यक है।     आधार और बैंक अकाउंट लिंकिंग: सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता आधार कार्ड और NPCI से सही तरीके से लिंक है।     भू-सत्यापन (Land Seeding): कृषि भूमि एवं राजस्व से संबंधित विवरण में कोई विसंगति या अधूरी जानकारी नहीं होनी चाहिए। पोर्टल पर ऐसे जांचें अपना भुगतान स्टेटस     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर मौजूद 'Know Your Status' विकल्प का चयन करें।     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर अथवा आवश्यक क्रेडेंशियल्स दर्ज करें।     स्क्रीन पर अपने भुगतान और दस्तावेज सत्यापन की स्थिति जांचें। यदि कोई त्रुटि दिखे, तो तुरंत स्थानीय कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क करें।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 22 अक्टूबर को मुंबई में करेंगे शिरकत, इंडिया केम-2026 के उद्घाटन सत्र में होंगे शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 22 अक्टूबर को मुंबई में इंडिया केम-2026 के उद्घाटन सत्र में होंगे शामिल रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग के मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को सामने रखने का अवसर तीन दिवसीय सम्मेलन में वैश्विक निवेश संवाद, तकनीकी विकास और औद्योगिक विस्तार से जुड़े विषयों पर होगा मंथन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार, 22 अक्टूबर को मुंबई में होने वाले तीन दिवसीय इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तथा फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 14वें द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़े प्रमुख उद्योगपति, निवेशक, विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल होंगे। इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस सेक्टर में मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश के अवसरों ,अधोसंरचना एवं राज्य की नीति को निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से साझा करेंगे । पहले दिन वैश्विक उद्योग जगत के साथ होगा कारोबारी संवाद इंडिया केम-2026 के पहले दिन उद्घाटन सत्र के बाद प्रदर्शनी का अवलोकन, मुख्य कार्यपालक अधिकारियों का फोरम और कारोबारी नेटवर्किंग के कार्यक्रम होंगे। सम्मेलन में भारत-अमेरिका, भारत-जापान तथा भारत-यूरोपीय संघ के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल फोरम आयोजित किए जाएंगे। इन मंचों पर विभिन्न देशों के उद्योग प्रतिनिधियों के बीच व्यापार, औद्योगिक सहयोग और निवेश की संभावनाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। पहले दिन रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले उद्योगों को पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे। विशेष रसायन से लेकर औद्योगिक अधोसंरचना तक पर चर्चा सम्मेलन के दूसरे दिन, 23 अक्टूबर को विशेष रसायन, पेट्रोकेमिकल, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए अधोसंरचना, पर्यावरणीय विषयों, संयंत्र एवं मशीनरी, पंप और वाल्व तथा कृषि रसायन पर केंद्रित परिचर्चाएं होंगी। इन सत्रों में उद्योगों की जरूरतों, उत्पादन प्रक्रियाओं, तकनीकी सुधार और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। तीसरे दिन, 24 अक्टूबर को भी प्रदर्शनी जारी रहेगी। तीनों दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को क्षेत्र की नई संभावनाओं और व्यावसायिक सहयोग के अवसरों पर संवाद का अवसर मिलेगा। मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश की संभावनाओं पर रहेगा फोकस रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग विनिर्माण, औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला और सहायक उद्योगों के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से उत्पादन गतिविधियों के विस्तार और रोजगार के नए अवसरों की संभावनाएं भी बनती हैं। इंडिया केम-2026 जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद मध्यप्रदेश में रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से संबंधित निवेश अवसरों को सामने रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।  

Bokaro Steel Plant: अधिकारियों के लिए 28 बी-टाइप क्वार्टर आवंटित, पसंदीदा आवास योजना से मिला लाभ

 बोकारो SAIL प्रबंधन बोकारो इस्पात संयंत्र में काम करने वाले अधिकारियों को पसंदीदा आवास योजना के तहत कुल 28 बी टाइप आवास का आवंटन करने जा रहा है। इस बाबत नगर सेवा विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। जारी आदेश में 25 बी टाइप आवास उप महाप्रबंधक को, 2 बी टाइप आवास महाप्रबंधक को तथा 1 बी टाइप आवास मुख्य महाप्रबंधक संवर्ग के अधिकारियों को दिया जाएगा, जो उनके सेवाकाल तथा वरीयता के आधार पर निर्धारित की गई है। हालांकि नगर सेवा विभाग की ओर से पसंदीदा आवास योजना के तहत कुल 33 बी टाइप आवास का आवंटन बीएसएल के डीजीएम, जीएम व सीजीएम को आवंटित किया जाना था लेकिन इनमें खाली पड़े पांच बी टाइप आवास को लेने पर किसी ने अपनी इच्छा नही जतायी। बता दें कि इससे पूर्व अधिकारियों ने मनचाहा बी टाइप आवास लेने के लिए 14 से 16 अक्टूबर तक बीएसएल के इंट्रानेट पर आनलाइन आवेदन दिया था, जिसका अंतिम आवास आवंटन आदेश जारी कर दिया गया है। किन किन अधिकारियों को मिला आवास बोकारो इस्पात संयंत्र में पसंदीदा आवास योजना के तहत सीजीएम दीपक कुमार यादव, जीएम असरफ सिद्दीकी व अमित, डीजीएम महेन्द्र प्रसाद, आनंद वर्मा, मंतोष कुमार, पंकज त्रिपाठी, असगर रजा, विपिन कुमार, विनय आनंद, अनोम प्रियदर्शी, देवेन्द्र कुमार, रुद्रनारायण प्रधान, विकास कुमार, सुशील सिंह, अभिजित लकड़ा, अरुण कुमार, अंशुमन वर्मा, विरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, पंकज कुमार, चंद्रशेखर कुमार, एम दत्ता गुप्ता, नीलम संजय, विवेक अग्रवाल, कनवर सिंह सोरेन, ललित मोहन, संजीव चौधरी तथा अर्जुन चरण साहू को नगर के विभिन्न आवासीय कालोनी में मनचाहा बी टाइप मकान दिया जा रहा है।    

कैंसर मरीज के चेहरे से मौत का अनुमान! नई AI तकनीक पर वैज्ञानिकों का दावा, जानें कैसे करती है काम

 नईदिल्ली  क्या किसी के चेहरे की फोटो को देखकर किसी की मौत की भविष्यवाणी की जा सकती है. सुनने में थोड़ी हैरानी लगे लेकिन विज्ञान के इस युग में ऐसा संभव हो गया है. अमेरिका में बोस्टन के मास जनरल ब्रिघम के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी AI तकनीक विकसित की है जिसके माध्यम से कैंसर के मरीजों की मौत की भविष्यवाणी की जा सकेगी. लगभग 30 हजार फोटो पर अपना प्रयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने ऐसा दावा किया है. इस तकनीकी को FAHR-FaceSurvival और FaceAgeनाम दिया गया है. मास जनरल ब्रिघम ने इससे पहले ही चेहरे देखकर बायलॉजिकल एज को मापने का दावा किया था. यानी किसी व्यक्ति का शरीर अंदर से कितने साल का हुआ, इसका पता लगाने का दावा इस कंपनी ने किया था. अब कैंसर मरीजों की मृत्यु दर का दावा किया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि 4 करोड़ फोटो को देखने के बाद एआई मॉडल को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है. वाशिंगटन पोस्ट ने लैंसेट का हवाला देते हुए यह बात बताई है. इसकी सच्चाई को लेकर हमने मैक्स अस्पताल नई दिल्ली में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रवि शंकर से बात की है।  क्या है रिपोर्ट में  पहले इस रिपोर्ट की बात करते हैं. वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों की फोटो FAHR-FaceSurvival स्कोर सबसे ज्यादा 10 था, वे सब 90 दिनों के अंदर मर गए जबकि 10 प्रतिशत से कम स्कोर वाले 2 प्रतिशत लोगों की भी मौत हुई. इसमें बायलॉजिकल उम्र के हिसाब से भविष्यवाणी की गई. अध्ययन के एक लेखक और मास जनरल ब्रिघम कैंसर इंस्टीट्यूट के रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट रेमंड मैक ने कहा हमने पहली बार इस एआई मॉडल से यह साबित किया है कि तस्वीर से न सिर्फ बायलॉजिकल उम्र का पता लगाया जा सकता है बल्कि इससे हम व्यक्ति की मृत्यु दर का भी पता आसानी से लगा सकते हैं. मैक ने कहा कि एक साल पहले हमने फेस एज पर अध्ययन शुरू किया था।   इसमें एआई के एल्गोरिदम को इस तरह प्रशिक्षित किया कि वह चेहरे की फोटो से बायलॉजिकल उम्र का सटीक पता लगा ले. अब जो रिजल्ट सामने आया वह पहले से और ज्यादा सटीक था. यह कैंसर रोगियों के सीधे मौत के जोखिम का सटीक भविष्यवाणी करता है. मैक ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि चेहरे की एक ही फोटो का विश्लेषण कर यह एआई फाउंडेशन मॉडल हेल्थ के कई मानकों की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम है. इस मॉडल के आधार पर मैक और उनकी टीम 30 हजार से अधिक कैंसर रोगियों की तस्वीरों वाले मौजूदा डेटासेट के साथ-साथ उनकी सेहत की जानकारी का उपयोग करने में सक्षम थे. इसमें यह पता लगा कि जिस व्यक्ति की तस्वीर है उसकी मौत कब हुई या यदि वे जीवित है तो कितने दिनों तक जीवित रह पाएंगे।  शुरुआती दौर के लिए अच्छा कदम डॉ. रवि शंकर ने बताया कि एआई अब हमारे जीवन को आसान और तेज करने में बहुत मदद कर रहा है. इससे हम इंकार नहीं कर सकते है. यह एआई का जमाना है और आने वाले समय में इसके कई बेहतरीन परिणाम सामने आएंगे. इस तरह देखे तो यह रिसर्च मेंडिकल प्वाइंट ऑफ व्यू से चीजों को देखने के लिए बहुत अच्छा कदम है. इससे पहले वैज्ञानिकों ने FaceAge मॉडल बनाया था. इसमें 4 करोड़ से अधिक तस्वीरों का विश्लेषण करके इंसान की जैविक उम्र यानी बायलॉजिकल उम्र का पता लगाया जाता था।   जैविक उम्र का मतलब होता है कि उसके शरीर के अंग जैसे हार्ट, किडनी, लिवर, लंग्स, स्किन, हड्डियां सहित कोशिकाओं की सटीक उम्र क्या हुई है. अब इसी मॉडल को अपग्रेड करके शोधकर्ताओं ने कैंसर मरीजों की संभावित आयु का अनुमान लगाने के लिए AI मॉडल को ट्रेन किया है. बायलॉजिकल रूप से देखा जाए तो बीमारी के दौरान शरीर के अंदर क्या बदलाव आ रहे हैं और कौन से शारीरिक पैरामीटर्स को AI पकड़ रहा है, यह इस रिसर्च पेपर में नहीं बताया गया है. जैसे कोशिकाओं या टिशू या शरीर की कमजोरी को AI किस तरह पकड़ रहा है, इसका पूरा स्पष्टीकरण इस रिसर्च पेपर में नहीं है. यह आगे के अध्ययनों में ही साफ हो सकेगा।  90 दिनों में मौत की भविष्यवाणी से बेहतर संकेत रिसर्च के आंकड़ों को समझाते हुए डॉ. रवि शंकर बताते हैं कि अध्ययन में FAHR-FaceSurvival मॉडल के जरिए ’90-डेज मोर्टिलिटी’यानी 90 दिनों के भीतर मौत की दर को जांचा गया. यह बहुत ही दिलचस्प है और इससे भविष्य के संकेतों को परखा गया है. इसमें पाया गया कि जिन मरीजों का AI रिस्क स्कोर सबसे ज्यादा था, उनमें से 50% मरीजों की मौत 90 दिनों के भीतर हो गई जबकि सबसे कम रिस्क स्कोर वाले समूह में यह दर सिर्फ 2% थी. जैविक रूप से यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ध्यान देने योग्य संकेत है, जिसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. हालांकि यह अभी बेहद शुरुआती (Premature) डेटा है और इसमें कई कमियां (Flaws) हैं, इसलिए इसके आधार पर फिलहाल अस्पतालों में मरीजों का क्लीनिकल इलाज तय नहीं किया जा सकता।  भविष्य में संभावनाएं बेहतर होंगी डॉ. रवि शंकर ने स्पष्ट किया कि इस समय यह AI मॉडल केवल मरीज के जीवित रहने की अवधि का एक मोटा अनुमान भर दे सकता है. इससे कोई ऐसा निश्चित या जैविक रूप से निर्णायक डेटा नहीं मिलता, जिससे मरीज की लाइन ऑफ ट्रीटमेंट या इलाज के तरीकों को बदला जा सके या उसकी उम्र को वास्तव में बढ़ाया जा सके. फिर भी, एक ऑन्कोलॉजिस्ट के नजरिए से चेहरे के बायोमार्कर से स्वास्थ्य का अंदाजा लगाना एक बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक शुरुआत है. भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह AI तकनीक जैविक स्तर पर और कितनी सटीक रूप से विकसित होती है। 

India-US Trade Deal: भारत से जल्द व्यापार समझौता करेंगे ट्रंप, पुराने करारों से अलग होगा स्ट्रक्चर

नई दिल्ली भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक बड़ी अपडेट दे दी है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच समझौता होगा और बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत के साथ ट्रेड डील जल्द होने वाली है, तो उन्होंने कहा, ‘हम समझौता करेंगे, यह काफी करीब है. लेकिन इस बार डील का स्वरूप काफी अलग होगा.’ ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि नई डील में क्या बदलाव होंगे और समझौते पर कब तक मुहर लग सकती है।  हाल ही में, नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अब काफी करीब है. इसे अंतिम रूप देने के लिए कुछ तकनीकी फैक्टर्स पर सहमति बनाना बाकी है. मार्को रूबियो के मुताबिक, किसी भी बड़े समझौते की घोषणा से पहले जरूरी है कि दोनों पक्ष हर छोटी-बड़ी बात पर सहमत हों. ऐसा नहीं होना चाहिए कि डील की घोषणा पहले कर दी जाए और बाद में पता चले कि समझौता अभी पूरा नहीं हुआ है।  जल्द हो सकती है डील मार्को रूबियो ने कहा कि बातचीत अब ऐसे चरण में पहुंच गई है, जहां समझौते की भाषा और उसके मतलब को लेकर दोनों पक्षों की सहमति जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद इस बातचीत में शामिल नहीं हैं, क्योंकि इसकी जिम्मेदारी अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की है. हालांकि, वह पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को पूरा होने में अब महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्ते लगेंगे. इस समझौते से भारत को बेहतर टैरिफ दरें मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक के बाद भारत को तेल रिफाइनरी के क्षेत्र में महाशक्ति बताया।  ट्रेड डील पर हुई कई बैठक इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर से मिलवॉकी और वॉशिंगटन में मुलाकात की थी. इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील की बारीकियों पर चर्चा हुई. दोनों देशों ने फरवरी में अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण का स्ट्रक्चर तैयार करने का ऐलान किया था. हालांकि, बाद में अमेरिका के टैरिफ में बदलाव होने के कारण बातचीत फिर से शुरू करनी पड़ी।  भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा था कि समझौते से जुड़े बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों देश डील के काफी करीब हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बातचीत को लेकर उम्मीद जताई थी। 

मध्य प्रदेश के 60 सरकारी कॉलेज शिक्षकों को AI की ट्रेनिंग, 40 बनेंगे मास्टर ट्रेनर

भोपाल   प्रदेश के सरकारी कालेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की बारीकियां सीखेंगे। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 22 से 26 अक्टूबर तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें प्रदेश के 60 चयनित शासकीय कॉलेजों के शिक्षक शामिल होंगे। आइआइटी गुवाहाटी के प्रोफेसर और तकनीकी विशेषज्ञ इन शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। यह कार्यशाला स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग और आइआइटी गुवाहाटी के बीच 13 अक्टूबर को हुए अनुबंध के आधार पर आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को एआइ आधारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं से परिचित कराना और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना है। शिक्षण प्रक्रिया में होगा एआइ का इस्तेमाल उच्च शिक्षा में तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए शिक्षकों को एआइ आधारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं से परिचित कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके जरिये शिक्षक अध्यापन से जुड़ी गतिविधियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता समझ सकेंगे। विभाग का उद्देश्य कालेजों में शिक्षण प्रक्रिया को तकनीक आधारित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में शिक्षकों की क्षमता विकसित करना है। 40 से अधिक मास्टर ट्रेनर चुने जाएंगे गुवाहाटी से प्रशिक्षण लेकर लौटने वाले प्रोफेसरों में से करीब 40 से अधिक को मास्टर ट्रेनर के तौर पर चयन किया जाएगा। ये ट्रेनर दूसरे चरण में भोपाल में प्रदेश के अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। संभाग स्तर पर भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक प्रशिक्षण लेकर विद्यार्थियों को एआइ के बारे में पढ़ाएंगे।  

महाकाल और बागेश्वर धाम का जलवा, मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड

भोपाल मध्य प्रदेश के प्राकृतिक नैसर्गिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और विरासत ने न केवल देश, बल्कि पूरी दुनिया के सैलानियों का दिल जीता है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश में घरेलू पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आमद में पिछले तीन वर्षों में रिकार्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य में घरेलू पर्यटकों का आंकड़ा तीन साल में दोगुना हो चुका है। वर्ष 2023 में देश के विभिन्न हिस्सों से 11.19 करोड़ पर्यटक मध्य प्रदेश आए थे, जो 2024 में बढ़कर 13.39 करोड़ और वर्ष 2025 में छलांग लगाकर 21.5 करोड़ तक पहुंच गए। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक केवल 2024 और 2025 के बीच ही पर्यटकों की संख्या में 7.64 करोड़ का भारी इजाफा हुआ। इस उछाल की मुख्य वजह राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों, विशेषकर कुबरेश्वर धाम और बागेश्वर धाम की बढ़ती लोकप्रियता रही। सीहोर स्थित कुबरेश्वर धाम में 2025 के दौरान 1.5 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे, जबकि छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम में नौ लाख भक्तों ने हाजिरी लगाई। धार्मिक पर्यटन में सबसे बड़ा आकर्षण उज्जैन रहा, जहां 2025 में रिकार्ड 8.80 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। इससे पहले 2023 में 5.28 करोड़ और 2024 में 7.23 करोड़ भक्त उज्जैन आए थे। अन्य प्रमुख धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति     दतिया (रतनगढ़ माता व पीताम्बरा पीठ): रतनगढ़ माता मंदिर में एक करोड़ और पीताम्बरा पीठ में 40 लाख श्रद्धालु पहुंचे।     मैहर (सतना): मां शारदा धाम में 2025 में 1.61 करोड़ श्रद्धालु आए (2024 में 1.33 करोड़ और 2023 में 1.68 करोड़)।     देवास टेकरी: दस लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।     ऐतिहासिक धरोहरें: मांडू में 8.27 लाख और खजुराहो में 5.47 लाख सैलानी पहुंचे। चीतों का आकर्षण फीका, कूनो देखने पहुंचे मात्र 6,316 पर्यटक- श्योपुर जिले का कूनो नेशनल पार्क, जो अफ्रीकी चीतों का एकमात्र प्राकृतिक ठिकाना है, उम्मीद के मुताबिक पर्यटकों को आकर्षित करने में नाकाम रहा। पूरे देश में एकमात्र चीता स्थल होने के बावजूद 2025 में यहां केवल 6,316 सैलानी पहुंचे, जिनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या महज 45 रही। इसके उलट राज्य के पारंपरिक टाइगर रिजर्व आकर्षण का केंद्र बने रहे।मढ़ई (नर्मदापुरम) में 4.36 लाख, पन्ना में 4.03 लाख, कान्हा में 2.55 लाख और बांधवगढ़ में 1.99 लाख वन्यजीव प्रेमी पहुंचे। पचमढ़ी का आकर्षण घटा, 2023 के मुकाबले कम रहे सैलानी मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी अपना पुराना आकर्षण खोता नजर आ रहा है। वर्ष 2023 में जहां 4.01 लाख सैलानी पचमढ़ी पहुंचे थे, वहीं 2024 में यह संख्या गिरकर 2.88 लाख रह गई। वर्ष 2025 में मामूली सुधार के साथ आंकड़ा 3.11 लाख जरूर पहुंचा, लेकिन यह 2023 के स्तर से काफी कम है। 2025 में यहां सिर्फ 162 विदेशी पर्यटक पहुंचे। विदेशी पर्यटकों की संख्या जस की तस, खजुराहो पहली पसंद घरेलू पर्यटकों के दोगुने होने के बावजूद विदेशी पर्यटकों की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं आया। वर्ष 2023 में 1,82,728 विदेशी सैलानी राज्य में आए थे, जो 2025 में नाममात्र की बढ़ोतरी के साथ 1,83,035 दर्ज किए गए। विदेशी मेहमानों के लिए खजुराहो सबसे पसंदीदा स्थल रहा, जहां करीब 33,000 विदेशी पहुंचे। इसके बाद बांधवगढ़ में 31,390 विदेशी पर्यटकों ने भ्रमण किया। लेजर टूरिज्म ने भी भरी नई उड़ान प्रदेश के आरामदायक एवं अवकाश पर्यटन का लाभ लेने के लिए 3.37 करोड़ पर्यटकों ने प्रदेश के आधुनिक व प्राकृतिक नगरों का भ्रमण किया। इस सेक्टर में देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने 173.8 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज करते हुए रिकार्ड दो करोड़ 80 लाख पर्यटकों की मेजबानी की और मालवा सर्किट के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा।राजधानी भोपाल ने 10.72 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 24.62 लाख पर्यटकों का स्वागत किया, जबकि संस्कारधानी जबलपुर में 23.94 लाख पर्यटक पहुंचे।

UP में शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की तैयारी, प्रशस्त 2.0 से लाखों शिक्षकों को मिला मंच

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को तकनीक, संवेदनशीलता और समावेशन से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की शिक्षा संबंधी प्राथमिकताओं में प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना और उसे सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने से संबंधित डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। समावेशी शिक्षा की समझ विद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अद्यतन प्रदेश के 75 जनपदों में कुल 16,29,945 शिक्षकों में से 9,20,169 शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके थे। वहीं, 8,15,309 शिक्षकों ने प्रशिक्षण से संबंधित सभी वीडियो देख लिए थे। यह पहल डिजिटल माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित करने और समावेशी शिक्षा की समझ को विद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है। जनपदों में डिजिटल सहभागिता अद्यतन आंकड़ों के अनुसार रामपुर में 90.5 प्रतिशत, पीलीभीत में 88.7 प्रतिशत और लखीमपुर खीरी में 86.3 प्रतिशत शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं। इसी प्रकार, सभी प्रशिक्षण वीडियो देखने वाले शिक्षकों का प्रतिशत रामपुर में 88.3, पीलीभीत में 84.6 और लखीमपुर खीरी में 82.5 प्रतिशत दर्ज है। डिजिटल प्रशिक्षण से सशक्त हो रहे शिक्षक शिक्षकों को एप और प्रशिक्षण वीडियो के माध्यम से समावेशी शिक्षा से संबंधित जानकारी दी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कुल शिक्षकों में से 56.5 प्रतिशत शिक्षक पोर्टल पर ऑनबोर्ड हो चुके थे, जबकि 50 प्रतिशत शिक्षकों ने सभी प्रशिक्षण वीडियो देख लिए थे। डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की विविध आवश्यकताओं के प्रति अधिक जागरूक बनाना और शिक्षण प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग की समझ विकसित करना है। समावेशी शिक्षा को व्यवस्थित आधार समावेशी शिक्षा का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे की आवश्यकताओं और क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए उसे सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण देकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप सहयोग की समझ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इस दिशा में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि विद्यालय में बच्चों के साथ नियमित संवाद और शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से उनकी जरूरतों को समझने के अवसर मिलते हैं। तकनीक और संवेदनशीलता से बेहतर शिक्षण परिवेश डिजिटल प्रशिक्षण शिक्षकों तक शैक्षिक जानकारी पहुंचाने का एक माध्यम है। प्रशस्त 2.0 के अंतर्गत उपलब्ध प्रशिक्षण सामग्री शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से जुड़े विषयों को समझने में सहयोग देती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के उपयोग और बच्चों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को महत्व दिया जा रहा है। इस पहल का व्यापक उद्देश्य ऐसा शिक्षण परिवेश विकसित करना है, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी उनकी जरूरतों के अनुरूप शैक्षिक सहयोग मिल सके।     योगी सरकार समावेशी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित कर प्रत्येक बच्चे की शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।”     -संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा     प्रशस्त 2.0 के अंतर्गत शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप सहयोग के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना है।”     -मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा