samacharsecretary.com

मध्य प्रदेश के 60 सरकारी कॉलेज शिक्षकों को AI की ट्रेनिंग, 40 बनेंगे मास्टर ट्रेनर

भोपाल   प्रदेश के सरकारी कालेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की बारीकियां सीखेंगे। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 22 से 26 अक्टूबर तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें प्रदेश के 60 चयनित शासकीय कॉलेजों के शिक्षक शामिल होंगे। आइआइटी गुवाहाटी के प्रोफेसर और तकनीकी विशेषज्ञ इन शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। यह कार्यशाला स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग और आइआइटी गुवाहाटी के बीच 13 अक्टूबर को हुए अनुबंध के आधार पर आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को एआइ आधारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं से परिचित कराना और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना है। शिक्षण प्रक्रिया में होगा एआइ का इस्तेमाल उच्च शिक्षा में तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए शिक्षकों को एआइ आधारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं से परिचित कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके जरिये शिक्षक अध्यापन से जुड़ी गतिविधियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता समझ सकेंगे। विभाग का उद्देश्य कालेजों में शिक्षण प्रक्रिया को तकनीक आधारित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में शिक्षकों की क्षमता विकसित करना है। 40 से अधिक मास्टर ट्रेनर चुने जाएंगे गुवाहाटी से प्रशिक्षण लेकर लौटने वाले प्रोफेसरों में से करीब 40 से अधिक को मास्टर ट्रेनर के तौर पर चयन किया जाएगा। ये ट्रेनर दूसरे चरण में भोपाल में प्रदेश के अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। संभाग स्तर पर भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक प्रशिक्षण लेकर विद्यार्थियों को एआइ के बारे में पढ़ाएंगे।  

महाकाल और बागेश्वर धाम का जलवा, मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड

भोपाल मध्य प्रदेश के प्राकृतिक नैसर्गिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और विरासत ने न केवल देश, बल्कि पूरी दुनिया के सैलानियों का दिल जीता है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश में घरेलू पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आमद में पिछले तीन वर्षों में रिकार्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य में घरेलू पर्यटकों का आंकड़ा तीन साल में दोगुना हो चुका है। वर्ष 2023 में देश के विभिन्न हिस्सों से 11.19 करोड़ पर्यटक मध्य प्रदेश आए थे, जो 2024 में बढ़कर 13.39 करोड़ और वर्ष 2025 में छलांग लगाकर 21.5 करोड़ तक पहुंच गए। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक केवल 2024 और 2025 के बीच ही पर्यटकों की संख्या में 7.64 करोड़ का भारी इजाफा हुआ। इस उछाल की मुख्य वजह राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों, विशेषकर कुबरेश्वर धाम और बागेश्वर धाम की बढ़ती लोकप्रियता रही। सीहोर स्थित कुबरेश्वर धाम में 2025 के दौरान 1.5 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे, जबकि छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम में नौ लाख भक्तों ने हाजिरी लगाई। धार्मिक पर्यटन में सबसे बड़ा आकर्षण उज्जैन रहा, जहां 2025 में रिकार्ड 8.80 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। इससे पहले 2023 में 5.28 करोड़ और 2024 में 7.23 करोड़ भक्त उज्जैन आए थे। अन्य प्रमुख धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति     दतिया (रतनगढ़ माता व पीताम्बरा पीठ): रतनगढ़ माता मंदिर में एक करोड़ और पीताम्बरा पीठ में 40 लाख श्रद्धालु पहुंचे।     मैहर (सतना): मां शारदा धाम में 2025 में 1.61 करोड़ श्रद्धालु आए (2024 में 1.33 करोड़ और 2023 में 1.68 करोड़)।     देवास टेकरी: दस लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।     ऐतिहासिक धरोहरें: मांडू में 8.27 लाख और खजुराहो में 5.47 लाख सैलानी पहुंचे। चीतों का आकर्षण फीका, कूनो देखने पहुंचे मात्र 6,316 पर्यटक- श्योपुर जिले का कूनो नेशनल पार्क, जो अफ्रीकी चीतों का एकमात्र प्राकृतिक ठिकाना है, उम्मीद के मुताबिक पर्यटकों को आकर्षित करने में नाकाम रहा। पूरे देश में एकमात्र चीता स्थल होने के बावजूद 2025 में यहां केवल 6,316 सैलानी पहुंचे, जिनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या महज 45 रही। इसके उलट राज्य के पारंपरिक टाइगर रिजर्व आकर्षण का केंद्र बने रहे।मढ़ई (नर्मदापुरम) में 4.36 लाख, पन्ना में 4.03 लाख, कान्हा में 2.55 लाख और बांधवगढ़ में 1.99 लाख वन्यजीव प्रेमी पहुंचे। पचमढ़ी का आकर्षण घटा, 2023 के मुकाबले कम रहे सैलानी मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी अपना पुराना आकर्षण खोता नजर आ रहा है। वर्ष 2023 में जहां 4.01 लाख सैलानी पचमढ़ी पहुंचे थे, वहीं 2024 में यह संख्या गिरकर 2.88 लाख रह गई। वर्ष 2025 में मामूली सुधार के साथ आंकड़ा 3.11 लाख जरूर पहुंचा, लेकिन यह 2023 के स्तर से काफी कम है। 2025 में यहां सिर्फ 162 विदेशी पर्यटक पहुंचे। विदेशी पर्यटकों की संख्या जस की तस, खजुराहो पहली पसंद घरेलू पर्यटकों के दोगुने होने के बावजूद विदेशी पर्यटकों की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं आया। वर्ष 2023 में 1,82,728 विदेशी सैलानी राज्य में आए थे, जो 2025 में नाममात्र की बढ़ोतरी के साथ 1,83,035 दर्ज किए गए। विदेशी मेहमानों के लिए खजुराहो सबसे पसंदीदा स्थल रहा, जहां करीब 33,000 विदेशी पहुंचे। इसके बाद बांधवगढ़ में 31,390 विदेशी पर्यटकों ने भ्रमण किया। लेजर टूरिज्म ने भी भरी नई उड़ान प्रदेश के आरामदायक एवं अवकाश पर्यटन का लाभ लेने के लिए 3.37 करोड़ पर्यटकों ने प्रदेश के आधुनिक व प्राकृतिक नगरों का भ्रमण किया। इस सेक्टर में देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने 173.8 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज करते हुए रिकार्ड दो करोड़ 80 लाख पर्यटकों की मेजबानी की और मालवा सर्किट के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा।राजधानी भोपाल ने 10.72 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 24.62 लाख पर्यटकों का स्वागत किया, जबकि संस्कारधानी जबलपुर में 23.94 लाख पर्यटक पहुंचे।

UP में शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की तैयारी, प्रशस्त 2.0 से लाखों शिक्षकों को मिला मंच

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को तकनीक, संवेदनशीलता और समावेशन से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की शिक्षा संबंधी प्राथमिकताओं में प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना और उसे सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने से संबंधित डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। समावेशी शिक्षा की समझ विद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अद्यतन प्रदेश के 75 जनपदों में कुल 16,29,945 शिक्षकों में से 9,20,169 शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके थे। वहीं, 8,15,309 शिक्षकों ने प्रशिक्षण से संबंधित सभी वीडियो देख लिए थे। यह पहल डिजिटल माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित करने और समावेशी शिक्षा की समझ को विद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है। जनपदों में डिजिटल सहभागिता अद्यतन आंकड़ों के अनुसार रामपुर में 90.5 प्रतिशत, पीलीभीत में 88.7 प्रतिशत और लखीमपुर खीरी में 86.3 प्रतिशत शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं। इसी प्रकार, सभी प्रशिक्षण वीडियो देखने वाले शिक्षकों का प्रतिशत रामपुर में 88.3, पीलीभीत में 84.6 और लखीमपुर खीरी में 82.5 प्रतिशत दर्ज है। डिजिटल प्रशिक्षण से सशक्त हो रहे शिक्षक शिक्षकों को एप और प्रशिक्षण वीडियो के माध्यम से समावेशी शिक्षा से संबंधित जानकारी दी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कुल शिक्षकों में से 56.5 प्रतिशत शिक्षक पोर्टल पर ऑनबोर्ड हो चुके थे, जबकि 50 प्रतिशत शिक्षकों ने सभी प्रशिक्षण वीडियो देख लिए थे। डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की विविध आवश्यकताओं के प्रति अधिक जागरूक बनाना और शिक्षण प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग की समझ विकसित करना है। समावेशी शिक्षा को व्यवस्थित आधार समावेशी शिक्षा का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे की आवश्यकताओं और क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए उसे सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण देकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप सहयोग की समझ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इस दिशा में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि विद्यालय में बच्चों के साथ नियमित संवाद और शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से उनकी जरूरतों को समझने के अवसर मिलते हैं। तकनीक और संवेदनशीलता से बेहतर शिक्षण परिवेश डिजिटल प्रशिक्षण शिक्षकों तक शैक्षिक जानकारी पहुंचाने का एक माध्यम है। प्रशस्त 2.0 के अंतर्गत उपलब्ध प्रशिक्षण सामग्री शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से जुड़े विषयों को समझने में सहयोग देती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के उपयोग और बच्चों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को महत्व दिया जा रहा है। इस पहल का व्यापक उद्देश्य ऐसा शिक्षण परिवेश विकसित करना है, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी उनकी जरूरतों के अनुरूप शैक्षिक सहयोग मिल सके।     योगी सरकार समावेशी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित कर प्रत्येक बच्चे की शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।”     -संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा     प्रशस्त 2.0 के अंतर्गत शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप सहयोग के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना है।”     -मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा  

मध्य प्रदेश में उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा, परमाणु ऊर्जा और कोल गैसीकरण पर नई नीतियां लाएगी सरकार

भोपाल  ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2027 (जीआइएस) से पहले मध्य प्रदेश सरकार निवेश अनुकूल नीतियां लाएगी। इनमें औद्योगिक आवास, परमाणु, ओडीओपी-जीआइ टैग, कोयला गैसीकरण और कृषि प्रसंस्करण नीति लाई जाएगी। इन नीतियों का ड्राफ्ट जल्द ही कैबिनेट में स्वीकृति के लिए लाया जाएगा। इनका मुख्य उद्देश्य उद्योगों को मध्य प्रदेश की ओर आकर्षित करना और प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश राज्य औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम और मध्य प्रदेश ईज आफ डूइंग बिजनेस नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। इंडस्ट्रियल हाउसिंग और कोल गैसीफिकेशन नीतिइंडस्ट्रियल हाउसिंग नीति के तहत औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर या उनके नजदीक श्रमिकों के लिए कम लागत वाले मकान और हास्टल बनाने वाले विकासकर्ताओं (डेवलपर्स) को विशेष टैक्स छूट और सस्ती जमीन दी जाएगी। कोल गैसीफिकेशन नीति में कोयले से अमोनिया, मेथनाल और अन्य सिंथेटिक गैस बनाने वाले प्लांट लगाने वाली कंपनियों को पूंजीगत सब्सिडी और बिजली शुल्कों में राहत देने का प्रविधान किया जा रहा है। न्यूक्लियर ऊर्जा नीति न्यूक्लियर ऊर्जा नीति के तहत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश के सहयोग से सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और मप्र को क्लीन एनर्जी हब बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और नए विकल्पों के लिए इस क्षेत्र में निजी-सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग, ओडीओपी जीआइ टैग और सीएम का रोड शो एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग और ओडीओपी जीआइ टैग नीतियों में कृषि आधारित उद्योगों और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत आने वाले स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए लाजिस्टिक्स सपोर्ट और वित्तीय मदद दी जाएगी। राज्य में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव इसी माह चेन्नई में रोड शो करेंगे।  

श्योपुर के कूनो में बढ़ रहा चीतों का कुनबा, 5 मादा चीताएं बनीं मां; प्रोजेक्ट चीता को मिली नई कामयाबी

श्योपुर  प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता को बड़ी सफलता मिली है। पार्क में मौजूद 12 प्रजनन योग्य मादा चीतों में से पांच के साथ इस वर्ष नए शावक देखे गए हैं। इस उपलब्धि से वन्यजीव प्रेमियों और चीता प्रबंधन टीम में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। कूनो नेशनल पार्क में दो वर्ष या उससे अधिक उम्र की कुल 12 मादा चीते मौजूद हैं, जो इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। कूनो में चीता कुनबे की स्थिति कूनो नेशनल पार्क में मौजूद 12 मादा चीतों में से पांच ने इस वर्ष शावकों को जन्म देकर चीता परिवार का दायरा बढ़ाया है। शेष सात मादाओं से भी आने वाले समय में नए शावकों के जन्म की पूरी संभावना बनी हुई है। हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से कहना है कि किसी भी मादा चीता का केवल प्रजनन योग्य उम्र में होना यह पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं करता कि वह चालू वर्ष में ही गर्भवती होगी या शावकों को जन्म ही देगी। इसके बावजूद पांच मादाओं का मां बनना इस परियोजना की दीर्घकालिक सफलता को और पुख्ता करता है।  बोत्स्वाना और भारतीय मूल की मादाएं जिन सात मादा चीतों से भविष्य में मां बनने की उम्मीद जताई जा रही है, उनमें विदेशी मेहमानों के साथ-साथ भारतीय मूल की मादाएं भी शामिल हैं। इनमें से चार मादा चीते बोत्स्वाना से कूनो नेशनल पार्क लाई गई हैं। इसके अलावा एक मादा चीता का नाम निर्वा है, जबकि दो अन्य मादा चीते पूरी तरह से भारतीय मूल की हैं। पार्क प्रशासन इन सभी मादा चीतों की सेहत, सुरक्षा और दैनिक गतिविधियों पर लगातार बारीक नजर बनाए हुए है, ताकि उनका बेहतर ढंग से पुनर्वास सुनिश्चित हो सके। परियोजना के लिए सुखद संकेत कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीतों को सफलतापूर्वक बसाने का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। चीता प्रबंधन की विशेष टीम पार्क में मौजूद सभी 12 मादा चीतों की हर हलचल की निगरानी कर रही है। पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में शेष बची मादाओं से भी अच्छी खबर मिल सकती है। इससे भारत की धरती पर चीतों की कुल संख्या में लगातार इजाफा होगा और इस ऐतिहासिक चीता प्रोजेक्ट का दायरा और अधिक मजबूत होगा।

बाबा बागेश्वर पहुंचेंगे मैहर, सनातन संवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे; 50 हजार लोगों के आने की उम्मीद

मैहर  मां शारदा की पावन नगरी मैहर में 23 अक्टूबर को सनातन धर्म और संस्कृति का संदेश गूंजेगा। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मैहर पहुंचकर श्रद्धालुओं के बीच ‘सनातन संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।  कार्यक्रम का आयोजन केजेएस परिसर में किया जाएगा जहां करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, वहीं प्रशासन और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क हैं। सनातन संस्कृति और परंपराओं पर होगा संवाद इस कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विचार सुनने का अवसर मिलेगा। सनातन संवाद के दौरान सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए जाएंगे। आयोजकों की इस पहल को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाबा बागेश्वर के आगमन को लेकर उत्साह पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के देशभर में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। उनके प्रवचनों और धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में मां शारदा की नगरी मैहर में उनके आगमन की खबर से भक्तों में उत्साह का माहौल है। श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होकर बाबा बागेश्वर को सुनने और उनके दर्शन करने के लिए उत्सुक हैं।  सुरक्षा व्यवस्था पर पुलिस की नजर कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भीड़ का व्यवस्थित प्रबंधन, आवागमन और कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा बनाए रखना पुलिस-प्रशासन के लिए प्रमुख जिम्मेदारी होगी। आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए संबंधित स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। मैहर मां शारदा मंदिर के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। ऐसे में 23 अक्टूबर को आयोजित होने वाला सनातन संवाद धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र में भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। अब सभी की नजरें कार्यक्रम पर टिकी हैं, जहां बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री श्रद्धालुओं के बीच सनातन धर्म और संस्कृति का संदेश देंगे।