भिवानी.
मुक्केबाजी के रिंग में भिवानी की बेटी 54 किलोग्राम भार वर्ग में प्रीति पंवार ने ऐसा पंच लगाया, जिसकी गूंज एशिया तक सुनाई दी। भारतीय सेना में नायब सूबेदार बनने के बाद पहली ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि सेना में भर्ती के बाद इतना बड़ा मुकाम हासिल करना हर खिलाड़ी के लिए सपना होता है। प्रीति ने न सिर्फ उस सपने को पूरा किया, बल्कि देश का मान भी बढ़ाया। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अप्रैल 2026 में मंगोलिया में आयोजित एशियन बाक्सिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय सेना के मुक्केबाजों को सम्मानित किया। टीम के कोच सूबेदार मोहम्मद ऐतेशामुद्दीन को भी खिलाड़ियों के उत्कृष्ट मार्गदर्शन और अहम योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पदक विजेता को 75 हजार रुपये की सम्मान राशि भी प्रदान की गई।
परिवार का साथ, चाचा से मिली राह
गांव बड़ेसरा की रहने वाली प्रीति की सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान है। पिता सोमबीर सिंह हरियाणा पुलिस में एएसआइ हैं और मां सलीन देवी गृहिणी हैं। 2017 में आठवीं कक्षा के दौरान चाचा व कोच विनोद पंवार से प्रेरित होकर उन्होंने बाक्सिंग शुरू की। बेटी के सपनों को उड़ान देने के लिए परिवार महम शिफ्ट हो गया। यही समर्पण आज उनकी सफलता की मजबूत नींव बना। प्रीति रोजाना करीब पांच घंटे कड़ी ट्रेनिंग करती हैं। सुबह और शाम दोनों समय रिंग में अभ्यास करते हुए वे अपनी तकनीक को निखारती हैं। हर दिन अपनी कमजोरियों को दूर करना और बेहतर बनना ही उनका लक्ष्य रहता है। यही मेहनत और अनुशासन उन्हें दूसरों से अलग बनाता है और इंटरनेशनल स्तर पर जीत दिलाता है।
जुलाई में कामनवेल्थ और बाद में एशियन गेम्स
प्रीति अब जुलाई में स्काटलैंड के ग्लासगो में होने वाले कामनवेल्थ गेम्स और इसके बाद जापान में एशियन गेम्स की तैयारी में जुटी हैं। उनका लक्ष्य साफ है कि हर बड़े मंच पर गोल्ड जीतना। उनकी इस उपलब्धि से भिवानी के युवा खिलाड़ियों में नई ऊर्जा आई है और खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। खेल प्रेरक व अधिवक्ता राजनारायण पंघाल ने कहा कि प्रीति पंवार ने दिखा दिया कि अगर जुनून और मेहनत हो तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं। उनकी जीत पूरे भिवानी और हरियाणा के लिए गर्व की बात है। वे आने वाले समय में देश के लिए और बड़े पदक जीतेंगी।





