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एम्स दिल्ली की तर्ज पर भोपाल में ट्रामा सेंटर, रोबोटिक सर्जरी से मिलेगा इलाज

भोपाल
 एम्स भोपाल में करीब एक हजार करोड़ रुपये के विस्तार की योजना को लेकर सोमवार को दिल्ली में भारत सरकार की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (एसएफसी) की बैठक हुई। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को विस्तार का पूरा प्लान सौंपा। इस महायोजना के तहत एम्स परिसर में ही हेलीपैड बनाया जाएगा, जिससे एयर एम्बुलेंस का संचालन सुलभ हो सकेगा।

कैंसर अस्पताल और ट्रामा सेंटर का निर्माण

सांसद शर्मा ने बताया कि एम्स में 200 बेड का अत्याधुनिक अपेक्स आन्कोलॉजी सेंटर (कैंसर अस्पताल) बनाया जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, एम्स भोपाल में हर साल 36 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज आते हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत मरीज भोपाल के बाहर के जिलों जैसे आगर मालवा, रायसेन और विदिशा से होते हैं। इसके साथ ही एम्स दिल्ली के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा 'लेवल-1 अपेक्स ट्रामा सेंटर' भी भोपाल में तैयार होगा। 150 बेड वाले इस सेंटर के पहले चरण के लिए 295 करोड़ रुपये का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है।

रोबोटिक सर्जरी और हाई-टेक सुविधाएं

एम्स भोपाल का यूरोलॉजी विभाग अब दुनिया की सबसे उन्नत 'द विंची रोबोट 4.0' प्रणाली से लैस होगा। लगभग 30 करोड़ की लागत वाले इस सिस्टम के लगने के बाद एम्स भोपाल सेंट्रल इंडिया का पहला सरकारी संस्थान बनेगा, जहां रोबोटिक तकनीक से प्रोस्टेट कैंसर और किडनी ट्यूमर जैसे जटिल ऑपरेशन न्यूनतम चीर-फाड़ के साथ हो सकेंगे। इसके अलावा वर्चुअल ऑटोप्सी और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सुविधाओं के विस्तार पर भी प्रेजेंटेशन दिया गया।

मरीजों की बढ़ती संख्या और बजट की उम्मीद

बता दें कि एम्स में मरीजों का भार तेजी से बढ़ रहा है। साल 2022 में जहां 36 हजार मरीज आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 85 हजार से अधिक हो गई है। बैठक में एम्स निदेशक डॉ. माधवानंद कर और डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन सहित मंत्रालय के आला अधिकारी मौजूद रहे। इन प्रोजेक्ट्स के लिए बजट जल्द ही स्वीकृत हो जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश सहित पूरे मध्य भारत के मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।

 

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