जयपुर
भजनलाल सरकार ने तबादलों से प्रतिबंध हटा दिया है । 19 जून से 5 जुलाई तक यह प्रतिबंध हटाया गया है । प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के मुताबिक शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी के वेतन श्रृंखला के शिक्षकों और वर्षा काल में संभावित बीमारियों के दृष्टिगत चिकित्सा विभाग के कार्मिकों के लिए स्थानांतरण पर प्रतिबंध अग्रिम आदेशों तक यथावत रहेगा ।यह आदेश प्रदेश के सभी निगमों, मंडलों, बोर्ड और स्वायत्तशाषी संस्थाओं पर भी लागू होगा ।
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर लंबे समय से लागू प्रतिबंध को अस्थायी रूप से हटा दिया है. सरकार के इस फैसले के बाद राज्यभर के हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए तबादलों का रास्ता खुल गया है. प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 19 जून से 5 जुलाई 2026 तक तबादले किए जा सकेंगे. इस अवधि के दौरान विभिन्न विभागों में प्रशासनिक आवश्यकताओं और कर्मचारियों की मांग के आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे।
हालांकि सरकार ने कुछ श्रेणियों को इस प्रक्रिया से फिलहाल बाहर रखा है. शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी अध्यापकों पर तबादला प्रतिबंध जारी रहेगा. इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों के तबादलों पर भी अग्रिम आदेश तक रोक बरकरार रखी गई है. ऐसे में इन दोनों वर्गों के कर्मचारियों को अभी तबादला प्रक्रिया का लाभ नहीं मिल सकेगा।
इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता
सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा. इसके साथ ही राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी विशेष वरीयता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें एक ही स्थान या निकटवर्ती क्षेत्र में पदस्थापित करने पर विचार किया जा सके. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, बोर्डों, मंडलों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा।
सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी
भाजपा विधायक दल की बैठक में भी उठा था तबादले का मुद्दा
तबादला बैन हटाने का फैसला अचानक नहीं लिया गया है. पिछले कुछ समय से जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की ओर से लगातार इस मुद्दे को उठाया जा रहा था. हाल ही में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में भी तबादलों का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था. कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रशासनिक जरूरतों का हवाला देते हुए कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक हटाने की मांग की थी. विधायकों का कहना था कि लंबे समय से तबादले बंद होने के कारण कई विभागों में कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों को भी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक कारणों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले मंत्रिमंडल की बैठकों में भी कई मंत्रियों ने तबादला बैन हटाने की पैरवी की थी।
लगातार मंथन और विभिन्न विभागों से फीडबैक लेने के बाद लिया निर्णय
सरकार स्तर पर लगातार मंथन और विभिन्न विभागों से फीडबैक लेने के बाद आखिरकार प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया गया. सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे विभागों में रिक्त पदों के संतुलन, कार्यकुशलता बढ़ाने और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान में मदद मिलेगी. अब 5 जुलाई तक राज्यभर में तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है और विभिन्न विभागों में स्थानांतरण संबंधी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।





