पटना.
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में कई महत्वपूर्ण ब्लड जांच अब सप्ताह में केवल तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ही की जाएंगी। इस संबंध में राजेंद्र सर्जिकल वार्ड स्थित पैथोलाजी विभाग में सूचना चस्पा कर मरीजों और उनके स्वजन को अवगत कराया गया है।
हालांकि, पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने मामले से अन्यभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि शनिवार को समीक्षा करेंगे। सभी बिन्दुओं पर कार्रवाई कर सभी तरह की उपयोगी जांच को हर दिन सैंपल की जांच सुनिश्चित कराई जाएगी। सूचना के अनुसार एफटी3, एफटी4, टी3, टी4, टीएसएच, विटामिन-डी, विटामिन-बी12, एंटी-सीसीपी, प्रोलैक्टिन तथा पीएसए (फ्री व टोटल) जैसी जरूरी जांच अब निर्धारित तीन दिनों में ही होंगी।
पहले ये जांच अधिक दिनों में की जाती थीं। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और चिकित्सकों द्वारा इन जांचों की सलाह भी काफी मरीजों को दी जाती है। ऐसे में तय दिनों के अलावा आने वाले मरीजों को अगली तिथि तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। बताया जाता है कि पैथलाजी विभाग में डॉक्टरों की कमी है, फैकेल्टी की कमी है। मामले से विभाग को भी अवगत कराया जाएगा।
दूर-दराज से आने वालों पर अतिरिक्त बोझ
मरीजों और परिजनों का कहना है कि सीमित दिनों में जांच होने से लंबी कतारें लग रही हैं। खासकर ग्रामीण व दूर-दराज जिलों से आने वाले मरीजों को दोबारा अस्पताल आना पड़ रहा है, जिससे समय और आर्थिक खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। कई मामलों में जांच रिपोर्ट में देरी से उपचार शुरू होने में भी विलंब हो रहा है।
संसाधनों पर दबाव बनी वजह
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मरीजों की बढ़ती संख्या और उपलब्ध संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण जांच की समय-सारिणी सीमित करनी पड़ी है। पीएमसीएच में पुनर्निर्माण के बाद बेड क्षमता और सुविधाओं में विस्तार की प्रक्रिया जारी है, लेकिन मानव संसाधन की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है और कई मामले अभी उनकी संज्ञान में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जांच व्यवस्था को लेकर मिली जानकारी के आधार पर स्थिति की समीक्षा की जाएगी और समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि कई विभागों में मानव संसाधन की कमी है, जिसे दूर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
उम्मीद सुधार की
मरीजों को उम्मीद है कि जांच सेवाएं जल्द सामान्य होंगी, ताकि आवश्यक परीक्षण समय पर हो सकें और उपचार में देरी न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सरकारी अस्पतालों में संसाधन और मानवबल के संतुलन के बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना कठिन होता है।





