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बिहार में ‘नीरा’ को बढ़ावा, समस्तीपुर में 157 बिक्री केंद्रों से मिलेगी प्राकृतिक ड्रिंक

 समस्तीपुर
 जिले में नीरा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जिले में एक व्यापक योजना बनायी गई है। इसके तहत कुल 5300 ताड़ पेड़ों की पहचान की गई है।मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और जीविका के संयुक्त प्रयास से इस सीजन में लगभग 17 लाख लीटर नीरा के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसे जिले में 157 विक्रय केंद्रों के माध्यम से बेचा जाना है।

इस पहल का उद्देश्य न केवल नीरा उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, बल्कि टैपर्स और ताड़ पेड़ मालिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। फिलहाल जिले में 25 स्थानों पर इसे खोल दिया गया है। पिछले वर्ष 11 लाख 22 हजार 122 लीटर नीरा का उत्पादन किया गया था।

जानकारी के अनुसार, अप्रैल से जुलाई तक के ताड़ी उत्पादन सत्र के दौरान जिले के 561 टैपर्स को प्रति लीटर आठ रुपये की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे लाभुकों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।

टैपर्स का सत्यापन जीविका के माध्यम से किया जाएगा, जिसके बाद विभाग द्वारा उन्हें आवश्यक लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। पिछले वर्ष 780 टैपर्स को जीविका द्वारा प्रशिक्षण दिया गया था। इसके माध्यम से 60 रुपये प्रति लीटर की दर पर नीरा को बेचा गया था।

157 नीरा बिक्री केंद्र किए जाएंगे स्थापित

वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में जिले में 157 नीरा बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें जीविका समूहों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। 60 रुपये लीटर या 10 रुपये ग्लास की दर से नीरा की बिक्री होगी।

नीरा उत्पादन को और अधिक बढ़ावा देने के लिए ताड़ पेड़ मालिकों को भी प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। विभागीय जानकारी के अनुसार, प्रति लीटर नीरा पर उन्हें तीन रुपये की दर से अधिकतम दस पेड़ों तक लाभ दिया जाएगा।

इस आधार पर एक पेड़ के लिए 585 रुपये तथा दस पेड़ों के लिए अधिकतम 5850 रुपये तक की राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, यदि कोई टैपर एक साथ दस पेड़ों की टैपिंग करता है, तो उसे 15,600 रुपये की प्रोत्साहन राशि जीविका समूह द्वारा प्रदान की जाएगी।

जिन टैपर्स के पास दस से कम पेड़ हैं, उन्हें भी उसी अनुपात में प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही, चिह्नित पेड़ों की मार्किंग के लिए प्रति पेड़ 30 रुपये अलग से दिए जाएंगे।

    यह योजना जिले में ताड़ी से जुड़े परंपरागत रोजगार को संरक्षित करने के साथ-साथ आर्थिक मजबूती देने की दिशा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नीरा उत्पादन से न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, और लोगों को स्वास्थ्यवर्द्धक पेय होने के कारण आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय है।

आलोक कुमार, फार्म प्रबंधक, जीविका समस्तीपुर

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