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30 नवंबर को BSF प्रमुख दलजीत सिंह चौधरी का कार्यकाल पूरा, IPS प्रवीण कुमार संभालेंगे अतिरिक्त जिम्मेदारी

नई दिल्ली 
केंद्र सरकार की ओर से सीमा सुरक्षा बल (BSF) के नेतृत्व में बदलाव किया गया है। इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक प्रवीण कुमार (ITBP chief IPS Praveen Kumar) को BSF DG का अतिरिक्त भार सौंपा गया है। प्रवीण कुमार 30 नवंबर से यह अतिरिक्त पदभार संभालेंगे। बता दें कि बीएसएफ के वर्तमान डीजी दलजीत सिंह चौधरी (BSF DG Daljit Singh Chaudhary) के 30 नवंबर 2025 को रिटायर हो रहे हैं। जिसे देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से यह फैसला लिया गया है। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, स्थायी नियुक्ति होने तक या अगले निर्देश जारी होने तक प्रवीण कुमार BSF की कमान भी संभालेंगे। सरकार की ओर से प्रवीण कुमार की नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक अनुभव पर भरोसा जताया गया है।
 
1993 बैच के IPS अधिकारी हैं प्रवीण कुमार
बता दें कि ITBP के वर्तमान डीजी प्रवीण कुमार पश्चिम बंगाल कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। प्रशासन के कार्य में उन्हें लंबा अनुभव है, जिसे देखते हुए सरकार की ओर से उन्हें यह अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी ऑफिस मेमोरेंडम में कहा गया है कि दलजीत सिंह चौधरी के रिटायरमेंट के बाद BSF DG का अतिरिक्त प्रभार प्रवीण कुमार को सौंपा जा रहा है। यह व्यवस्था 30 नवंबर से प्रभाव में आ जाएगी।

इंटेलिजेंस ब्यूरो में लंबे समय तक दी सेवाएं
प्रवीण कुमार ने 1 अक्टूबर 2025 को ITBP के DG का पदभार संभाला था। इससे पहले वे दो दशक से अधिक समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में विभिन्न अहम जिम्मेदारियों में जुड़े रहे। खुफिया संचालन और फील्ड ऑपरेशन के अनुभव के कारण उन्हें BSF जैसे बड़े सीमा सुरक्षा बल की कमान संभालने के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

BSF सबसे बड़ा बॉर्डर-गार्डिंग फोर्स
पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा संभालने की जिम्मेदारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स या बीएसएफ की है। यह देश का सबसे बड़ा बॉर्डर-गार्डिंग फोर्स है। ऐसे में करीब 2.70 लाख से अधिक जवानों वाली इस फोर्स के DG का पद देश की सुरक्षा व्यवस्था में अत्यंत रणनीतिक और महत्वपूर्ण माना जाता है। ITBP और अब BSF दोनों की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रवीण कुमार पर देश की दो अहम सीमाई एजेंसियों का नेतृत्व एक साथ संभालने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे दोनों बलों के बीच बेहतर समन्वय और सुरक्षा प्रबंधन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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