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SL vs AFG: दुनिथ वेल्लालागे की विराट-सचिन से क्यों हो रही तुलना?, दुखों का पहाड़ टूटा, फिर भी नहीं छोड़ा मैदान

दुबई  एशिया कप 2025 में 18 सितंबर को श्रीलंका और अफगानिस्तान के बीच मैच हुआ. मुकाबले के बीच श्रीलंकाई खिलाड़ी दुनिथ वेल्लालागे के पिता का निधन हो गया. वो बल्लेबाजी के लिए तैयार थे और पैड पहन चुके थे. हालांकि, टीम को उनकी जरूरत नहीं पड़ी और उन्होंने 6 विकेट से जीत अपने नाम कर ली. दुनिथ वेल्लालागे को मैच के बाद कोच सनथ जयसूर्या ने पिता के निधन की दुखद खबर दी थी. भारतीय दिग्गज विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर ने भी अपने पिता को टूर्नामेंट के बीच खोया था. सोशल मीडिया पर अब दुनिथ के भी उसी दुखद स्थिति में रहने की बात हो रही है. दुनिथ के पिता का कैसे हुआ निधन? श्रीलंकाई ऑलराउंडर दुनिथ वेल्लालागे को अफगानिस्तान के खिलाफ मैच के बाद पता चला कि उनके पिता का निधन हो गया. दरअसल, उनके पिता सुरंगा वेल्लालागे को दिल का दौरा पड़ा था. दुनिथ ने अफगानिस्तान के खिलाफ मैच खेला और उन्हें पता नहीं था कि वो अपने सबसे करीबी व्यक्ति को खो चुके हैं. बाद में कोच सनथ जयसूर्या और सपोर्ट स्टाफ ने उन्हें दुखद खबर दी. वेल्लालागे तुरंत ही घर के लिए रवाना हो गए. अहम टूर्नामेंट के बीच अचानक इतनी दुखद खबर मिलना उन्हें बड़ा झटका दे गया होगा.   वर्ल्ड कप के बीच तेंदुलकर ने अपने पिता को खोया था सचिन तेंदुलकर 1999 का आईसीसी वर्ल्ड कप इंग्लैंड में खेल रहे थे. उस समय उनके पिता रमेश तेंदुलकर का निधन हो गया था. खबर मिलने के बाद सचिन भारत वापस आए और अपने पिता का अंतिम संस्कार किया. इसके बाद उन्होंने बिल्कुल ब्रेक नहीं लिया और दोबारा भारतीय स्क्वाड का हिस्सा बने. उन्होंने इसके बाद केन्या के खिलाफ मैच में शतक लगाया और इसे अपने पिता को समर्पित किया. इस चीज से सचिन को बदल दिया और इसके बाद उन्होंने अपनी कई यादगार पारियों को अपने पिता को डेडिकेट किया. विराट कोहली को बेहद कम उम्र में लगा था झटका विराट कोहली जब 18 साल के थे, तो उनके पिता प्रेम कोहली का दिसंबर 2006 में निधन हो गया था. उस समय वो दिल्ली के लिए रणजी ट्रॉफी खेल रहे थे. वो कर्नाटक के खिलाफ मैच खेल रहे थे और 40 रन पर नॉट आउट थे. उसी के बाद रात में उनके पिता का निधन हो गया. इस दुखद घटना के बावजूद विराट ने अगले दिन आकर बल्लेबाजी की और कुल 90 रन की पारी खेली. खली ने खुद इंटरव्यू में बताया था कि उनके लिए ये बहुत हैरान करने वाली घटना थी और उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था. दुनिथ वेल्लालागे ने भी चलते टूर्नामेंट में अपने पिता को खोया और वो शायद इस दुखद घटना को नहीं भूल पाएंगे. 

आईपीएससी एथलेटिक चैंपियनशिप में जीते 29 मेडल, इंदौर में चमके राई के सितारे

सोनीपत इंदौर के एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल में 14 से 17 सितंबर तक आयोजित आईपीएससी अंडर-14 और अंडर-17 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मोतीलाल नेहरू खेल स्कूल राई के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। देशभर के 500 प्रतिभागियों के बीच स्कूल ने कुल 29 मेडल जीतकर अपनी उत्कृष्टता साबित की, जिसमें 15 गोल्ड मेडल शामिल हैं। अंडर-14 वर्ग में स्कूल ने ओवरऑल चैंपियन ट्रॉफी अपने नाम की। सुमित ने 4 गोल्ड मेडल जीतकर प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ एथलीट का खिताब अपने नाम किया। इसके अलावा ईशांत, संयम, तनिश और प्रत्यक्ष ने भी गोल्ड मेडल जीतकर टीम का मान बढ़ाया। वहीं, अंडर-17 वर्ग में मानव ने 3 गोल्ड और 2 सिल्वर, शुभम ने 2 गोल्ड और 3 सिल्वर, मोक्ष परमार ने 1 गोल्ड और 3 सिल्वर, संसार ने 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते। कार्तिक और कार्तिक देओल ने भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर स्कूल की उपलब्धियों में योगदान दिया। स्कूल लौटने पर प्राचार्य प्रमोद कुमार और खेल अधिकारी चंद्रशेखर शर्मा समेत अन्य स्टाफ ने विजेता खिलाड़ियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

श्रीलंका की दमदार जीत, अफगानिस्तान टूर्नामेंट से बाहर; बांग्लादेश ने भी सुपर-4 में बनाई जगह

दुबई  एशिया कप 2025 में ग्रुप-बी के अहम मुकाबले में गुरुवार को (18 सितंबर) श्रीलंका और अफगानिस्तान की टक्कर हुई. अबू धाबी के शेख जायद स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में श्रीलंका ने अफगानिस्तान को 6 विकेट से हरा दिया. अफगानिस्तान ने श्रीलंका को जीत के लिए 170 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 8 गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. इस जीत के साथ ही श्रीलंकाई टीम सुपर-चार में पहुंच गई है. ग्रुप-बी से बांग्लादेश ने भी सुपर-चार का टिकट पाया. अफगानी टीम सुपर-चार में नहीं पहुंच सकी. ग्रुप-ए से भारत और पाकिस्तान पहले ही सुपर-चार में पहुंच चुका था. अब 20 सितंबर से सुपर-चार स्टेज के मुकाबले शुरू होंगे. टारगेटा का पीछा करते हुए श्रीलंका की शुरुआत कुछ खास नहीं रही और उसके दो विकेट 50 रनों के अंदर ही गिर गए. हालांकि कुसल मेंडिस ने एक एंड से तूफानी बल्लेबाजी करके प्रेशर हटाने का काम किया. कुसल मेंडिस को कुसल परेरा का साथ मिला और दोनों ने मिलकर तीसरे विकेट के लिए 45 रनों की पार्टनरशिप की. परेरा ने तीन चौके की मदद से 20 बॉल पर 28 रन बनाए. कुसल परेरा तो आउट हो गए. लेकिन कुसल मेंडिस अंत तक डटे रहे और मैच जिताकर ही पवेलियन लौटे. कुसल मेंडिस ने 52 गेंदों पर नाबाद 74 रन बनाए. जिसमें 10 चौके शामिल रहे. कप्तान चरिथ असलंका कुछ खास नहीं कर सके और 17 रन बनाए. कामिंदु मेंडिस ने 2 छक्के की मदद से नाबाद 26 रनों की पारी खेली. मोहम्मद नबी ने जड़े लगातार 5 छक्के मुकाबले में अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए 8 विकेट पर 169 रन बनाए. अफगानिस्तान की ओर से मोहम्मद नबी ने तूफानी बैटिंग करते हुए 22 गेंदों पर 60 रन बनाए, जिसमें 6 छक्के और तीन चौके शामिल रहे. नबी ने आखिरी ओवर में डुनिथ वेलालगे को लगातार पांच छक्के लगाए. कप्तान राशिद खान और इब्राहिम जादरान ने 24-24 रनों का योगदान दिया. श्रीलंकाई टीम की ओर से तेज गेंदबाज नुवान तुषारा ने सबसे ज्यादा चार विकेट झटके. दासुन शनााका और दुष्मंथा चमीरा को एक-एक विकेट मिला.

महज 40 सेंटीमीटर से चूके सचिन यादव, WAC फाइनल में नहीं ला सके मेडल

टोक्यो टोक्यो में जारी वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप 2025 के जैवलिन थ्रो फाइनल में नीरज चोपड़ा से भारतीय फैन्स को उम्मीदें थीं, लेकिन उन्होंने निराश किया. पिछली बार के चैम्पियन नीरज आठवें नंबर पर रहे. पेरिस ओलंपिक (2024) के चैम्पियन पाकिस्तानी जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम ने तो दसवां स्थान हासिल किया. इन सबके बीच भारत के लिए उम्मीद बने सचिन यादव. सचिन यादव ने पहले ही प्रयास में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया. पहले प्रयास में सचिन ने 86.27 मीटर की दूरी तय की. देखा जाए तो सचिन एक समय ब्रॉन्ज जीतने की स्थिति में थे, लेकिन केशोर्न वाल्कॉट के शानदार थ्रो ने उन्हें चौथे नंबर पर ला दिया. देखा जाए तो सचिन यादव ब्रॉन्ज जीतने से सिर्फ 40 सेमी दूर रह गए. यूएसए के कर्टिस थॉम्पसन ने ब्रॉन्ज मेडल जीता, जिनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 86.67 मीटर रहा. यानी थॉम्पसन भारतीय खिलाड़ी सचिन से सिर्फ 40 सेमी आगे रहे. सचिन यादव अंत तक मेडल की रेस में बरकरार रहे. सचिन ने कुल छह अटेम्प्ट लिए. सचिन का पहला प्रयास उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ रहा. जबकि दसरे प्रयस में वो फाउल कर बैठे. सचिन ने फिर तीसरा थ्रो शानदार लिया, जहां उन्होंने 85.71 मीटर की दूरी प्राप्त की. चौथे थ्रो में भी वो 85 मीटर से सिर्फ 10 सेमी पीछे रहे. पांचवां थ्रो भी उनका जबरदस्त रहा, जिसमें उन्होंने 85.96 मीटर की दूरी हासिल की. सचिन का छठा प्रयास 80.95 मीटर का ही रहा. तीन थ्रो रहे 85 मीटर से ऊपर देखा जाए तो सचिन यादव ने कुल तीन थ्रो 85 मीटर से ऊपर के लिए. सचिन यादव ने क्वालिफिकेशन राउंड में 83.67 मीटर का थ्रो फेंककरअपने ग्रुप में छठा और कुल दसवां स्थान हासिल किया था, इसके चलते उन्हें फाइनल में एंट्री मिली. फाइनल में कुल 12 खिलाड़ियों ने भाग लिया. जैवलिन थ्रो फाइनल की अंकतालिका सचिन यादव का प्रदर्शन:  पहला थ्रो- 86.27 मीटर दूसरा थ्रो- फाउल तीसरा थ्रो- 85.71 मीटर चौथ थ्रो- 84.90 मीटर पांचवां थ्रो- 85.96 मीटर छठा थ्रो- 80.95 मीटर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप 2025 में गोल्ड मेडल त्रिनिदाद एंड टोबैगो के केशोर्न वाल्कॉट ने जीता. वाल्कॉट का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 88.16 मीटर का रहा. दो बार के वर्ल्ड चैम्पियन ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स ने 87.38 का बेस्ट थ्रो किया और वो सिल्वर मेडल जीतने में सफल रहे. जबकि कर्टिस थॉम्पसन ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रहे.

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की योजना, अफगान सलामी जोड़ी मैदान में उतरी

नई दिल्ली एशिया कप 2025 के 11वें मैच में आज ग्रुप बी की अफगानिस्‍तान टीम का सामना श्रीलंका से हो रहा है। अफगानिस्‍तान के कप्‍तान राशिद खान ने टॉस जीतकर बल्‍लेबाजी करने का फैसला लिया है। मुकाबला अबू धाबी के शेख जायद स्टेडियम में खेला जा रहा है। अफगानिस्‍तान के लिए यह मैच करो या मरो वाला है। एक और हार टीम को सुपर-4 की रेस से बाहर कर देगी। ग्रुप बी की जंग काफी रोमांचक है। श्रीलंका ने 2 में से 2 मैच जीते हैं और उसके 4 अंक (+1.546) हैं। 3 में से 2 जीते साथ बांग्‍लादेश के 4 प्‍वाइंट्स (-0.270) हैं। वहीं अफगानिस्‍तान ने 2 में से 1 मैच जीता है और टीम के 2 अंक (+2.150) हैं। हांगकांग 3 हार के साथ पहले ही बाहर हो चुकी है। अफगान टीम अगर आज जीतती है तो 3 टीमों के 4-4 अंक होंगे। हालांकि, बेहतर नेट रन रेट के चलते श्रीलंका और अफगानिस्‍तान टीम सुपर-4 में पहुंचेगी। 

टी दिलीप ने Asia Cup 2025 के लिए दी फील्डिंग में गेम-चेंजिंग सलाह

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच टी दिलीप ने कहा है कि दुबई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में हवा में लहराने वाले ऊंचे कैच लेने के लिए एक सेकंड के लिए भी गेंद पर से नजर नहीं हटाना जरूरी है। दुबई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में फ्लडलाइट्स की व्यवस्था पारंपरिक व्यवस्था से काफी अलग है। दिलीप ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड द्वारा एक्स पर पोस्ट किए गए वीडियो में ये बात कही। यह आग के वृत्त (रिंग ऑफ फायर) की तरह होती है जो मूल रूप से गुंबद में होती है न कि खंभों पर, जैसा कि हम आमतौर पर देखते हैं। दिलीप ने कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में सबसे बड़ी चुनौती सीमा रेखा पर कैच लेने की होती है। ऐसे में आपको एक पल के लिए भी गेंद से नजर नहीं हटानी होती है।  

टोक्यो में रोमांचक फाइनल: नीरज चोपड़ा चमके, सचिन यादव से चूका पदक, वालकोट ने फेंका यादगार थ्रो

नई दिल्‍ली गत चैंपियन नीरज चोपड़ा का वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्‍पर्धा के फाइनल में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन रहा। नीरज चोपड़ा आठवें स्‍थान पर रहे। वहीं, वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में पहली बार हिस्‍सा लेने वाले एक और भारतीय जेवलिन थ्रोअर सचिन यादव ने अपना निजी सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन किया, लेकिन वो भी मेडल नहीं जीत सके। भारत के जेवलिन थ्रोअर सचिन यादव चौथे स्‍थान पर रहे। वालकोट ने जीता गोल्‍ड मेडल बता दें कि वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में गुरुवार को कोई भी जेवलिन एथलीट 90 मीटर की दूरी का आंकड़ा पार नहीं कर सका। चोपड़ा पांचवें राउंड में बाहर हुए। उनका सर्वश्रेष्‍ठ थ्रो 84.03 मीटर का रहा। वो आठवें स्‍थान पर रहे। 27 साल के चोपड़ा ने पांचवें प्रयास में फाउल किया, जिसके कारण वो प्रतियोगिता से बाहर हुए। याद दिला दें कि नीरज चोपड़ा ने 2021 में इसी जगह ऐतिहासिक गोल्‍ड मेडल जीता था। त्रिनिदाद एंड टोबेगो के केसहोर्न वालकोट (88.16 मीटर) ने गोल्‍ड मेडल जीता। ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स दूसरे व अमेरिका के कर्टिस थांपसन (86.67 मीटर) तीसरे स्‍थान पर रहे।   सचिन यादव ने किया प्रभावित बता दें कि नीरज चोपड़ा के साथ भारत के सचिन यादव ने भी वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में हिस्‍सा लिया था। यादव ने अपना सर्वश्रेष्‍ठ थ्रो पहले प्रयास में किया, जब उनका भाला 86.27 मीटर की दूरी पर जाकर गिरा। यादव ने न सिर्फ नीरज चोपड़ा बल्‍कि जर्मनी के जूनियन वेबर (86.11 मीटर) और ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम (82.75 मीटर) से भी बेहतर प्रदर्शन किया। नीरज का ऐसा रहा प्रदर्शन बता दें कि अरशद नदीम चौथे राउंड में बाहर हो गए थे। वहीं, दो बार के ओलंपिक मेडलिस्‍ट चोपड़ा ने अपने अभियान की शुरुआत 83.65 मीटर की दूरी के थ्रो के साथ की। अगले प्रयास में नीरज ने प्रदर्शन सुधारा और 84.03 मीटर की दूरी पर भाला फेंका। मगर तीसरे प्रयास में उनसे फाउल हो गया। वो आठवें स्‍थान पर खिसक गए। आधे राउंड खत्‍म हो चुके थे और नीरज चोपड़ा आठवें स्‍थान पर ही रहे। नीरज का चौथा थ्रो 82.86 मीटर का रहा। प्रतियोगिता में बने रहने के लिए नीरज को अगले राउंड में 85.54 मीटर से ज्‍यादा दूरी पर भाला फेंकने की जरुरत थी। मगर पांचवें प्रयास में नीरज से फाउल हुआ और वो आधिकारिक रूप से प्रतियोगिता से बाहर हो गए। नीरज के बाहर होने पर भारतीय फैंस का दिल टूट गया। नीरज का प्रदर्शन     पहला थ्रो: 83.65 मीटर     दूसरा थ्रो: 84.03 मीटर     तीसरा थ्रो: फाउल     चौथा थ्रो: 82.86 मीटर     पांचवां थ्रो: फाउल सचिन का प्रदर्शन     पहला थ्रो: 86.27 मीटर     दूसरा थ्रो: फाउल     तीसरा थ्रो: 85.71 मीटर     चौथा थ्रो: 84.90 मीटर     पांचवां थ्रो: 85.96 मीटर     छठवां थ्रो: 80.95 मीटर  

सुपर हिट जोड़ी की कहानी: प्रतीका रावल ने साझा किया स्मृति मंधाना के साथ सफलता का रहस्य

नई दिल्ली  शीर्ष क्रम की बल्लेबाज प्रतीका रावल का मानना ​​है कि स्टार सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना के साथ उनकी स्वाभाविक समझ है। इसके कारण वह दोनों भारत को लगातार अच्छी शुरुआत देने में सफल रही हैं। दिल्ली की इस क्रिकेटर ने पिछले साल दिसंबर में वनडे में पदार्पण किया था और वह बहुत कम समय में शीर्ष क्रम में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली बल्लेबाजों में से एक बन गई हैं। उन्होंने कहा कि मंधाना भी उनकी तरह अंतर्मुखी हैं, लेकिन उनके बीच बहुत अच्छा तालमेल है। प्रतीका ने मुल्लांपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में मंधाना के साथ शतकीय साझेदारी की और दूसरे मैच में भी इस स्टार क्रिकेटर के साथ पहले विकेट के लिए 70 रन जोड़े थे। भारत ने यह मैच रिकॉर्ड 102 रन से जीता। भारतीय टीम में जगह बनाने के बाद से छह अर्धशतक और एक शतक जड़ने वाली इस 25 वर्षीय क्रिकेटर ने जियो हॉटस्टार से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह (समझ) काफी आसान और स्वाभाविक है। हमें पारी के बीच में ज्यादा बात नहीं करनी पड़ती। वह वही करती है जिसमें वह सर्वश्रेष्ठ है और मैं वही करती हूं जिसमें मैं सर्वश्रेष्ठ हूं। हमारे बीच एक समझ है जो स्वाभाविक लगती है, बनावटी नहीं।’’ उन्होंने कहा,‘‘मैदान के बाहर भी, वह (मंधाना) अंतर्मुखी हैं और मैं भी, इसलिए हमें एक दूसरे को समझने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ते हैं। हम पहले से ही एक दूसरे को लेकर अच्छी समझ रखते हैं।’’ प्रतीका ने कहा कि उन्हें मंधाना के साथ बल्लेबाजी करना अच्छा लगता है और दोनों खिलाड़ी गेंद दर गेंद पारी को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘खेलते समय हमारा ध्यान केवल अगली गेंद पर होता है। मुझे उनके साथ बल्लेबाजी करने में मजा आता है। जिस तरह से वह खेलती है उससे काफी प्रेरणा मिलती है।’’  

टीम इंडिया का सख्त रुख: सुपर 4 मुकाबले में नहीं होगा हाथ मिलाना, पाकिस्तान का अगला कदम क्या होगा?

नई दिल्ली एशिया कप में बुधवार को पाकिस्तान बनाम यूएई के मैच से पहले खूब ड्रामा हुआ। पीसीबी की तरफ से टूर्नामेंट के बॉयकॉट की गीदड़भभकी और तमाम नौटंकियों के बाद आखिरकार एक घंटे की देरी में मैच हुआ। जिस रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट को हटाने के लिए पाकिस्तान ने इतना सारा ड्रामा किया, वो टूर्नामेंट से हटना तो दूर, बुधवार के मैच में भी रेफरी की भूमिका में दिखे। खैर मैच हुआ और पाकिस्तान ने आसानी से जीत हासिल कर सुपर-4 में जगह बना ली। अब रविवार यानी 21 सितंबर को दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वी भारत और पाकिस्तान एक बार फिर आमने-सामने होंगे। लीग नहीं, सुपर 4 के मुकाबले में। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान उस मैच में भी ड्रामा करेगा? इसका जवाब है- नहीं। पाकिस्तान ने बुधवार की ड्रामेबाजी के बाद न सिर्फ यूएई से मैच खेलने को तैयार हुआ बल्कि आने वाले सुपर-4 मैच में भारत के 'नो-हैंडशेक' वाले रुख को मानने के लिए भी तैयार हो गया। संयोग से यूएई से मैच जीतने के बाद पाकिस्तानी टीम सुपर 4 में पहुंच गई है जहां उसका मुकाबला भारत से होगा। भारतीय टीम का रुख साफ है। वह सुपर-4 मैच में भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाएगी। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बुधवार को आईसीसी के क्रिकेट महाप्रबंधक वसीम खान ने पीसीबी और पायक्रॉफ्ट के बीच मध्यस्थता की। उस दौरान पायक्रॉफ्ट ने कथित तौर पर पाकिस्तानी अधिकारियों से कहा कि उन्होंने तो सलमान अली आगा को शर्मिंदगी से बचाया क्योंकि भारत ने पहले ही कह रखा था कि सूर्यकुमार यादव उनसे हाथ नहीं मिलाएंगे। पाकिस्तान की इन सारी पैंतरेबाजियों और नौटंकी की शुरुआत 14 सितंबर को भारत के खिलाफ मैच से हुई। टॉस के दौरान दोनों कप्तानों ने हाथ नहीं मिलाए। भारत ने एकतरफा मुकाबले में पाकिस्तान को बुरी तरह पीटा। पाकिस्तानियों को हार का गम तो था ही। गम और बढ़ गया जब मैच जीतने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी टीम से हाथ नहीं मिलाए। वे इंतजार करते रह गए। कप्तान आगा और कोच माइक हेसन भारतीय ड्रेसिंग रूम की तरफ भी बढ़े लेकिन दरवाजा बंद हो गया तो उन्हें लौटना पड़ा। एक तो मैच में हार, ऊपर से भारतीयों का हाथ मिलाने से इनकार। पाकिस्तान इससे बौखला गया। बौखलाहट और बढ़ गई जब मैच के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जीत को पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों और ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारत के जांबाजों को समर्पित कर दिया। फिर क्या था। पाकिस्तान की नौटंकी शुरू हो गई। पहले उसने मैच रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट से भारतीय टीम के हाथ नहीं मिलाने की शिकायत की। फिर रेफरी के खिलाफ ही आईसीसी में शिकायत कर दी। आरोप लगाया कि उन्होंने ही टॉस के दौरान पाकिस्तानी कप्तान को भारतीय समकक्ष से हाथ नहीं मिलाने को कहा था। पायक्रॉफ्ट को टूर्नामेंट से हटाने की मांग करते हुए बहिष्कार की धमकी भी दी। आखिरकार तमाम नौटंकियों के बाद पाकिस्तान की धमकी गीदड़भभकी ही साबित हुई।  

BCCI का नया अध्यक्ष कौन बनेगा? गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद होगा अंतिम निर्णय

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट में 28 सितंबर का दिन बहुत बड़ा दिन होगा, क्योंकि इसी दिन बोर्ड के शीर्ष पदाधिकारियों का चुनाव होना है। सबसे बड़ा मुद्दा अध्यक्ष पद को लेकर है, क्योंकि पूर्व क्रिकेटर रोजर बिन्नी का कार्यकाल पूरा हो गया है। इस समय उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला बीसीसीआई के अंतरिम चेयरमैन बने हुए हैं। इस बीच खबर है कि दिल्ली में इसको लेकर मीटिंग होनी है, जो देश के गृह मंत्री अमित शाह के साथ होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 सितंबर को दिल्ली में सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों के साथ बीसीसीआई के अधिकारियों की मीटिंग होनी है। इसी दिन फैसला हो जाएगा कि कौन अगला चेयरमैन होगा। हालांकि, ऐलान 28 सितंबर को होने की संभावना है। यह अनौपचारिक बैठक गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर होगी, जहां बीसीसीआई के अगले नेतृत्व की अंतिम रूपरेखा तय होने की उम्मीद है। 2022 में भी इसी तरह की एक बैठक में पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने तत्कालीन बीसीसीआई प्रमुख सौरव गांगुली पर पिछले तीन वर्षों के उनके प्रदर्शन को लेकर तीखी आलोचना की थी। गांगुली उस समय एक और कार्यकाल के लिए बीसीसीआई के चेयरमैन पद पर बने रह सकते थे, लेकिन बैठक में अंततः रोजर बिन्नी को इस पद के लिए चुना गया। गांगुली को उस बैठक में फिर से आमंत्रित किया जाएगा या नहीं, यह केवल अनुमान का विषय है, लेकिन अटकलें अभी भी उनके और उनके पूर्व साथी हरभजन सिंह के नाम को लेकर हैं। कर्नाटक के पूर्व भारतीय टेस्ट क्रिकेटर रघुराम भट्ट के बारे में भी कुछ चर्चा हुई है। इसके अलावा पूर्व भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे का नाम भी लिस्ट में शामिल है, जिनको बीसीसीआई अध्यक्ष पद की कुर्सी मिल सकती है। किरण मोरे भले ही एजीएम में शामिल प्रतिनिधियों में शामिल न हों, लेकिन इसके लिए भी प्रावधान है। बीसीसीआई के चुनाव अधिकारी ए.के. जोति की 6 सितंबर की अधिसूचना के अनुसार, "आपत्तियों की जांच और उन पर निर्णय (ii) अंतिम मतदाता सूची जारी करने" की अंतिम तिथि 19 सितंबर है। इसका मतलब है कि राज्य संघ अगले 24 घंटों के भीतर वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में अपने नामांकित व्यक्तियों को बदल सकते हैं। सौरव गांगुली, हरभजन सिंब, रघुराम भट्ट या शायद कोई और नाम पर मुहर लगेगी? यह निर्णय शनिवार रात दिल्ली में होने वाली मीटिंग में हो सकता है। सत्तारूढ़ भाजपा खेल संस्थाओं के दैनिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप करने के लिए नहीं जानी जाती है, लेकिन उसकी यह सुनिश्चित करने की नीति है कि कुशल खिलाड़ी ही राष्ट्रीय खेल संस्थाओं का नेतृत्व करें।