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श्रद्धा की राह पर हादसा: ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर ट्रक पलटा, तीन कांवड़ियों ने गंवाई जान

देहरादून ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर बुधवार सुबह ताछला के पास कांवड़ियों को ले जा रहा ट्रक सड़क पर पलट गया। इस दर्दनाक हादसे में तीन कांवड़ियों की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल पांच यात्रियों को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है। सभी कांवड़िए बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और भंडारे के लिए हर्षिल जा रहे थे। हादसा उस वक्त हुआ जब ट्रक (संख्या UP-13-बीटी-8739) फकोट से आगे ताछला के पास अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन में कुल 19 यात्री सवार थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और घायलों को ट्रक से निकालकर फकोट और नरेंद्रनगर अस्पताल में भर्ती कराया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने व घायलों को हरसंभव उपचार देने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी टिहरी ने बताया कि दुर्घटना स्थल पर युद्ध स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाया गया और सभी घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने बताया कि पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों ने किसी तरह सभी को बाहर निकाला है। 5 घायलों को एम्स ऋषिकेश भेजा गया है अन्य को नरेंद्रनगर उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। थानाध्यक्ष नरेंद्रनगर संजय मिश्रा ने बताया कि फकोट और जाजल के बीच ताछला के पास यह दुर्घटना हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। घायलों की सूची: 01- ईश्वर सैनी पुत्र फूल सिंह सैनी आयु 49 वर्ष 02- अतर सिंह पुत्र यादराम आयु 60 वर्ष 03- रवि पुत्र अतर सिंह आयु 30 वर्ष 04- कुलदीप गिरी पुत्र मुकेश आयु 35 वर्ष 05-झम्मन सिंह पुत्र बुद्धु आयु 70वर्ष 06- बनवारी पुत्र किशनलाल आयु 55 वर्ष 07- मुकेश पुत्र मुरारी लाल मित्तल आयु 59 वर्ष 08- प्रेम सिंह पुत्र सोहन आयु 50 वर्ष। 09- जुगनू पुत्र देवी सिंह आयु 35 वर्ष। 10- तुषार पुत्र सुनील प्रजापति आयु 17 वर्ष। 11- भजन लाल पुत्र बाबूलाल आयु 45 वर्ष। 12- लेखराज पुत्र गोपी सिंह आयु 40 वर्ष 13-टिंकू पुत्र रुद्रप्रकाश आयु 29 वर्ष 14- मूलचंद पुत्र लक्ष्मण आयु 40 वर्ष 15-राहुल पुत्र किन्चित आयु 28 वर्ष 16- नकुल पुत्र राहुल आयु 04 वर्ष ये कुल लोग 16 चोटिल है, जिनका उपचार चल रहा है। मृतकों की पहचान: विक्की पुत्र महेंद्र 30 वर्ष सुनील सैनी पुत्र मूलचंद 45 वर्ष तीसरे मृतक की शिनाख्त प्रक्रिया जारी है।  

कुछ राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, कैसा रहेगा अगले 5 दिनों के मौसम का हाल?

नई दिल्ली मानसून लगभग पूरे देश में पहुंच चुका है। मानसून की एंट्री के साथ ही कई राज्यों में जोरदार बारिश भी देखी जा रही है। खासकर पहाड़ी राज्यों में कहर बरसा रहे मानसून से बाढ़ की स्थिति बन गई है। आईएमडी ने भी कुछ राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। IMD के अनुसार, राजस्थान में बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हाल भी अभी सुधरते हुए नजर नहीं आ रहे है। ऐसे में आइए जानते है कि अगले पांच दिनों में कैसा रहेगा आपके यहां का मौसम…   स्काईमेटवेदर के अनुसार, अगले 24 घंठे की करें तो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, कोंकण और गोवा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, बंगाल, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में भारी बारिश और अधिकतर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। इधर, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, सौराष्ट्र और कच्छ, राजस्थान, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, दिल्ली और केरल में हल्की से मध्यम बारिश के अनुमान लगाए जा रहे है। हालांकि सभी जगहों पर आसमान में बादल बने रह सकते है। कैसा रहेगा अगले पांच दिन का मौसम IMD के अनुसार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा के कई इलाकों में भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। वहीं, उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में मानसून के सक्रिय रहने की बात कही गई है। इधर, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और झारखंड में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है लेकिन कुछ इलाकों में हल्की बारिश भी रह सकती है।

सीएम पेमा खांडू का बड़ा दावा – अरुणाचल प्रदेश बना भारत का टॉप कार्बन सिंक

ईटानगर भारत का उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश देश का सबसे बड़ा कार्बन सिंक बनकर उभरा है। इस बात की जानकारी अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने खुद दी है। उन्होंने बताया कि हिमालय की गोद में बसा अरुणाचल प्रदेश भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य में अहम भूमिका निभा रहा है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने अरुणाचल प्रदेश को भारत का सबसे बड़ा कार्बन सिंक बताया। साथ ही कुछ डेटा भी शेयर किया है, जिसमें वन क्षेत्र, कार्बन अवशोषण और नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के बारे में बताया गया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने एक्स पर लिखा, “भारत का सबसे बड़ा कार्बन सिंक: अरुणाचल प्रदेश। यहां 79 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जो भारत के कुल कार्बन अवशोषण में 14.38 प्रतिशत योगदान दे रहा है। इसके अलावा, यहां 1,021 मिलियन टन कार्बन स्टॉक है, जो देश में सबसे अधिक है। हिमालय की गोद में बसे अरुणाचल प्रदेश की 2070 तक भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य में बेहद अहम भूमिका है।” राज्य के घने जंगल और जैव-विविधता न केवल जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी बनाए रख रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। बता दें कि अरुणाचल प्रदेश की सीमाएं असम, नागालैंड, म्यांमार,भूटान और उत्तर में तिब्बत से मिलती हैं। अरुणाचल प्रदेश, अपने विशाल वन क्षेत्र और कई हजार वर्ग किलोमीटर के भौगोलिक क्षेत्र के साथ भारत के पर्यावरणीय संतुलन का आधार है। यहां के जंगल न केवल कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र पर चीन और ताइवान के दावों के कारण भू-राजनीतिक चुनौतियां भी हैं।  

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने घोषणा की कि उनकी मृत्यु के बाद भी दलाई लामा की संस्था चलती रहेगी

धर्मशाला तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने बुधवार को घोषणा की कि उनकी मृत्यु के बाद भी दलाई लामा की संस्था चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि गदेन फोडरंग ट्रस्ट को ही उनके पुनर्जन्म को मान्यता देने का एकमात्र अधिकार होगा। गदेन फोडरंग ट्रस्ट की स्थापना तिब्बती संस्कृति को संरक्षित करने और तिब्बती लोगों के साथ-साथ अन्य जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए की गई थी, चाहे उनकी राष्ट्रीयता, धर्म या पृष्ठभूमि कुछ भी हो। धर्मशाला के पास मैकलियोडगंज में तीन दिवसीय बौद्ध धार्मिक सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान दलाई लामा ने यह महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा, “24 सितंबर 2011 को तिब्बती आध्यात्मिक परंपराओं के प्रमुखों की बैठक में मैंने तिब्बत के अंदर और बाहर रहने वाले तिब्बतियों, तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुयायियों और तिब्बत से जुड़े लोगों के सामने यह स्पष्ट किया था कि दलाई लामा की संस्था को जारी रखने का फैसला लिया गया है।” तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि उनकी मृत्यु के बाद भी दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पुनर्जन्म को मान्यता देने का अधिकार केवल गदेन फोडरंग ट्रस्ट को होगा। 6 जुलाई को 90 वर्ष के होने जा रहे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा ने धर्मशाला के मैकलियोडगंज में एक बौद्ध सम्मेलन के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने बताया कि 1969 में उन्होंने कहा था कि दलाई लामा के पुनर्जन्म को जारी रखने का फैसला तिब्बती लोगों और संबंधित समुदायों को करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 90 वर्ष की आयु के आसपास वे तिब्बती बौद्ध परंपराओं के प्रमुख लामाओं, तिब्बती जनता और बौद्ध धर्म के अनुयायियों से इस पर चर्चा करेंगे। हालांकि, पिछले 14 वर्षों में तिब्बती आध्यात्मिक नेताओं, निर्वासित तिब्बती संसद, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन, गैर-सरकारी संगठनों, हिमालयी क्षेत्र, मंगोलिया, रूस के बौद्ध गणराज्यों और चीन के बौद्धों ने उन्हें पत्र लिखकर दलाई लामा की संस्था को जारी रखने की मांग की। खासकर तिब्बत में रहने वाले लोगों ने भी विभिन्न माध्यमों से यही अपील की। इन सभी अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए दलाई लामा ने पुष्टि की कि उनकी संस्था भविष्य में भी चलेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सितंबर 2011 में दिए गए बयान के अनुसार, भविष्य के दलाई लामा को मान्यता देने की जिम्मेदारी केवल उनके कार्यालय और गदेन फोडरंग ट्रस्ट की होगी। यह ट्रस्ट तिब्बती संस्कृति को संरक्षित करने और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए बनाया गया है। तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने अपनी संस्था और पुनर्जन्म की प्रक्रिया पर स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके पुनर्जन्म को मान्यता देने का एकमात्र अधिकार गदेन फोडरंग ट्रस्ट को होगा। किसी अन्य व्यक्ति या समूह को इसमें हस्तक्षेप की अनुमति नहीं होगी। दलाई लामा ने कहा कि पुनर्जन्म की प्रक्रिया तिब्बती बौद्ध परंपराओं के प्रमुख लामाओं और शपथबद्ध धर्म रक्षकों के परामर्श से होगी। यह प्रक्रिया दर्शन, संकेत और आध्यात्मिक अनुष्ठानों पर आधारित होगी, जैसा कि तिब्बती परंपरा में होता है। उन्होंने जोर दिया कि दलाई लामा का पुनर्जन्म नियुक्त नहीं किया जाता, बल्कि इसे पवित्र प्रक्रिया के जरिए मान्यता दी जाती है। इस प्रक्रिया में केवल दलाई लामा ही अपने उत्तराधिकारी की पहचान कर सकते हैं।  

भारतीय सेना, भूटान की इस परिवर्तनकारी पहल में हर संभव सहयोग करती रहेगी: थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली भारत के थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी भूटान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। बुधवार को वह भूटान के जम्तशोलिंग स्थित ग्यालसुंग अकादमी पहुंचे। इस अवसर पर उन्हें भूटान के सैन्य अधिकारियों ने पंचम राजा की दूरदर्शी राष्ट्र निर्माण एवं युवा सशक्तीकरण योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जनरल द्विवेदी ने भारत और भूटान के बीच की गहरी और ऐतिहासिक मित्रता को दोहराते हुए आश्वस्त किया कि भारतीय सेना, भूटान की इस परिवर्तनकारी पहल में हर संभव सहयोग करती रहेगी। जनरल द्विवेदी ने अकादमी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान भूटान के युवाओं के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने अकादमी की आधुनिक अधोसंरचना एवं भावी योजनाओं की भी प्रशंसा की, जो कि महामहिम राजा के भव्य दृष्टिकोण को साकार करेंगी। इससे पूर्व, भूटान के महामहिम राजा और महामहिम रानी ने ताशीछो जोग में जनरल उपेंद्र द्विवेदी को आमंत्रित किया। यहां राजा का कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और कई मंत्रालय है। भारतीय सेनाध्यक्ष का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। अपने चार दिवसीय आधिकारिक दौरे के दौरान, सेना प्रमुख ने ताशीछो जोग स्थित नेशनल मेमोरियल चोर्टेन में भूटान के तीसरे राजा महामहिम जिग्मे दोरजी वांगचुक को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने यहां एक प्रभावशाली गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया। भारतीय सेनाध्यक्ष ने यहां रॉयल भूटान सेना के मुख्य परिचालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल बट्टू शेरिंग से भी मुलाकात की है। थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सोमवार को भूटान की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए थे। सेनाध्यक्ष का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण है। यह यात्रा भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे गहरे व विश्वासपूर्ण रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि जनरल द्विवेदी की यह यात्रा भारत-भूटान के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी और पारस्परिक विश्वास को दर्शाती है। भारतीय सेना के मुताबिक यह दौरा भारत की अपने पड़ोसी देश भूटान के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराता है। सेना प्रमुख का यह दौरा दोनों राष्ट्रों के बीच पारंपरिक मित्रता तथा सहयोग को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। गौरतलब है कि इसी वर्ष रॉयल भूटान सेना के मुख्य परिचालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल बट्टू शेरिंग भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए थे। उनकी भारत यात्रा के दौरान भारत ने भूटान को रक्षा तैयारियों में मदद देने की बात की थी।  

मणिपुर में बढ़ा सुरक्षा बलों का एक्शन, पांच उग्रवादी गिरफ्त में

इंफाल मणिपुर में पुलिस और सुरक्षा बलों ने तलाशी और घेराबंदी अभियान के तहत प्रतिबंधित भूमिगत समूहों से जुड़े पांच सक्रिय उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बुधवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में किए गए इन प्रयासों के तहत विभिन्न प्रतिबंधित भूमिगत समूहों से जुड़े पांच सक्रिय उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि इरिलबुंग पुलिस स्टेशन के अंतर्गत केराओ खुनौ इलाके से एक प्रतिबंधित संगठन के सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया गया। यह व्यक्ति जबरन वसूली की गतिविधियों में शामिल था। इसी तरह पोरोमपत पुलिस स्टेशन के अंतर्गत खुरई कोंगखम लेइकाई से एक अलग गुट के सक्रिय उग्रवादी को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से एक मोबाइल फोन जब्त किया गया। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों ने खुरई चैथाबी लेइराक से एक और उग्रवादी को पकड़ा। इस व्यक्ति के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया। एंड्रो खुमान इलाके से सुरक्षा बलों ने दूसरे प्रतिबंधित समूह के एक संदिग्ध सदस्य को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान अधिकारियों ने एक मोबाइल डिवाइस बरामद किया। उन्होंने बताया कि केकरुपट के पास एक हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में ज़ेलियानग्रोंग विद्रोही गुट के एक स्वयंभू वरिष्ठ कमांडर को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों ने कहा है कि सुरक्षा बलों द्वारा राज्य भर में जबरन वसूली रैकेट और सशस्त्र उग्रवादियों को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ रणनीतिक स्थानों पर तलाशी अभियान और निगरानी गतिविधियाँ जारी रहेंगी।  

हिमाचल में कुदरत का कहर! बादल फटने और भूस्खलन में 10 मौतें, राहत-बचाव जारी

शिमला/मंडी हिमाचल प्रदेश में मंगलवार को भूस्खलन और बादल फटने की कईं घटनाओं में मंडी जिले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है जबकि 34 लोग लापता हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा अभियान केन्द्र ने यह जानकारी दी है। पिछले तीन वर्षों से राज्य में लगातार कहर बरपा रहे मानसून के कारण एक बार फिर से मंडी के कई क्षेत्रों, खासकर करसोग, थुनाग, पधर और गोहर उप-मंडलों में तबाही मची हुयी है। इस बीच 20 जून से 1 जुलाई के बीच राज्य में मौसम संबंधी घटनाओं में लगभग 90 लोगों की मौत या लापता होने की सूचना है। बुधवार सुबह 8 बजे जारी 32 घंटे की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार मंडी के विभिन्न हिस्सों से 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और आधिकारिक तौर पर 34 लोगों के लापता होने की सूचना है। कई लोगों के मलबे में दबे होने या अचानक आई बाढ़ में बह जाने की आशंका है। इस दौरान पांच लोगों के घायल होने की भी सूचना है और 370 से अधिक लोगों को बचाया लिया गया है । हालांकि 11 लोग अभी भी फंसे हुए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की बचाव टीमों को करसोग, गोहर और थुनाग में तैनात किया गया है जहां बादल फटने से घरों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सियांज, गोहर शामिल हैं जहां नौ लोग बह गए। यहां दो शव बरामद किए गए जबकि सात अभी तक लापता हैं। परवाड़ा और तलवाड़ा गांव में एक ही परिवार के दो लोग लापता बताए गए हैं जिनमें से एक का शव बरामद हुआ है। थुनाग और पकरायर इलाकों में कुल 17 लोग लापता हैं जबकि दो लोगों की मौत हो गई है। कुट्टी बाईपास, ओल्ड बाजार करसोग और गोहर के बाड़ा समेत कई जगहों पर भी लोगों की मौत और कई लोगों के लापता होने की खबरें हैं। मानसून से होने वाली तबाही के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-305 के अवरुद्ध होने और 24 घरों, 12 गौशालाओं और एक जलविद्युत परियोजना को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है। इस बीच राहत अभियान जारी हैं लेकिन पहाड़ी इलाकों में दूर दराज के क्षेत्रों तक पहुंचने की चुनौतियों के कारण इसमें बाधा आ रही है।  

महिला-बाल कल्याण में क्रांति ला रही हैं पोषण ट्रैकर और DBT स्कीमें: प्रधानमंत्री कार्यालय

नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बुधवार को कहा कि पोषण ट्रैकर और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी पहलों ने देश में महिलाओं और बच्चों के कल्याण में बड़ा बदलाव लाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की गई एक पोस्ट में पीएमओ ने कहा कि ये योजनाएं देश भर में वास्तविक समय में प्रभावशाली बदलाव ला रही हैं। पीएमओ ने यह बात एक मीडिया लेख साझा करते हुए कही, जिसमें बताया गया है कि किस तरह सरकार ने महिलाओं और बच्चों के कल्याण में बदलाव लाने के लिए टेक्नोलॉजी का लाभ उठाया है। पीएमओ ने एक्स पर कहा, "केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के लेख में पोषण ट्रैकर, एक समर्पित शिकायत निवारण मॉड्यूल और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी पहलों के बारे में बात की गई है, जो पूरे देश में वास्तविक समय में, प्रभावशाली बदलाव ला रही हैं।" एक्स पर केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा, "पोषण और शिक्षा से लेकर न्याय और सम्मान से सच्चे सशक्तिकरण तक, टेक्नोलॉजी महिलाओं और बाल कल्याण में परिवर्तनकारी बदलाव में अहम भूमिका निभा रही है।" लेख में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि लाभ तेजी से अंतिम मील तक पारदर्शी और कुशलता से पहुँचें, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने अपने कार्यक्रमों में टेक्नोलॉजी को शामिल किया है। इसका एक प्रमुख उदाहरण मंत्रालय की पोषण ट्रैकर पहल है और इसका उद्देश्य स्वस्थ भारत, सुपोषित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है। इस पहल के तहत, आंगनवाड़ी केंद्र शहरी-ग्रामीण विभाजन को पाटने वाले डिजिटल रूप से सशक्त सामुदायिक केंद्रों के रूप में कार्य करते हैं। प्राइम मिनिस्टर अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (2025) से सम्मानित, यह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बचपन की शिक्षा के लिए डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल भी प्रदान करता है। केंद्रीय मंत्री ने आगे लिखा, "पोषण ट्रैकर वास्तविक समय के डैशबोर्ड, जियो-टैग किए गए आंगनवाड़ी केंद्रों और टेक होम राशन वितरण के लिए चेहरे की पहचान के साथ पोषण निगरानी को बदल रहा है और पूरे भारत में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित कर रहा है।" इसके अलावा, सक्षम आंगनवाड़ी पहल के तहत, देश भर में 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण ट्रैकर के साथ एकीकृत किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, छह साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरियों सहित 10.14 करोड़ से अधिक लाभार्थी अब पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत हैं, जिससे अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित हो रही है।

श्रद्धा और आस्था की शुरुआत: सिन्हा ने अमरनाथ यात्रियों के पहले जत्थे को दी हरी झंडी

जम्मू जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को भगवती नगर आधार शिविर श्री अमरनाथ पवित्र गुफा की तीर्थयात्रा के लिए श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई और सुरक्षित और आनंदमय यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। उपराज्यपाल ने कहा, 'यह पवित्र तीर्थयात्रा आस्था और आत्म-खोज की यात्रा है। सभी आध्यात्मिक साधकों को भगवान शिव के पवित्र निवास और गहरी आत्मा को झकझोर देने वाले अनुभव की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा की शुभकामनाएं।' उन्होंने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि प्रशासन, जम्मू-कश्मीर के लोग श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने तीर्थयात्रियों के लिए व्यापक व्यवस्था की है। उपराज्यपाल ने कहा 'आज बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहले जत्थे में 4,500 से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा मंदिर के लिए रवाना हुए। जम्मू शहर एक नई जीवंतता के साथ जीवंत हो उठा है। तीर्थयात्रियों का उत्साह बहुत अधिक है। आतंकवादी घटनाओं से बेपरवाह, भोले बाबा के भक्त भारी संख्या में पहुंच रहे हैं, जो अपनी अपार आस्था का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि इस साल की यात्रा पिछले वर्षों की तुलना में और भी ऐतिहासिक होगी।' कार्यक्रम में नागरिक प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।  

प्रतिष्ठित स्कूल की महिला शिक्षक पर 16 वर्षीय नाबालिग छात्र के साथ एक साल से अधिक समय तक यौन शोषण करने का आरोप लगा

मुंबई  देश के शीर्ष पांच स्कूलों में से एक माने जाने वाले मुंबई एक प्रतिष्ठित स्कूल की शिक्षक को नाबालिग छात्र से बलात्कार के आरोप में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है. दादर पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ POCSO एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, और न्याय संहिता की अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस के अनुसार, पीड़ित छात्र पर यह यौन उत्पीड़न पिछले एक वर्ष से अधिक समय से हो रहा था. इस दौरान साउथ मुंबई के कई फाइव स्टार होटलों में भी छात्र को ले जाकर यौन शोषण किया गया. आरोपी शिक्षक छात्र को एंटी डिप्रेसेंट दवाएं भी देती थी ताकि वह चुप रहे. पुलिस ने बताया है कि यौन शोषण का यह सिलसिला एक साल से ज्यादा समय तक चला। जब परिवार ने छात्र के व्यवहार में बदलाव देखा, तो उसने कथित तौर पर खुलकर यौन शोषण की बात बताई। हालांकि, परिवार को लगा कि स्कूल पास करने में कुछ ही महीनों का समय बाकी है, तो वो चुप रहे। उन्हें उम्मीद थी कि टीचर बच्चे का पीछा छोड़ देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिस ने बताया कि इस साल छात्र बोर्ड की परीक्षा पास कर गया, लेकिन वह डिप्रेशन में था। मामले ने दोबारा तूल तब पकड़ा, जब टीचर ने घरेलू नौकर के जरिए बच्चे से फिर संपर्क साधने की कोशिश की। उसने संदेश भिजवाया कि वह मिलना चाहती है। पुलिस ने कहा, 'तब परिवार ने हमारे पास आने का फैसला किया और केस दर्ज कराया।' ऐसे शुरू हुई हैवानियत टीचर की उम्र 40 साल बताई जा रही है और वह शादीशुदा है। साथ ही उसका एक बच्चा भी है। जबकि, पीड़ित छात्र 11 कक्षा में था और 16 साल का था। शिकायत में कहा गया है कि वह दिसंबर 2023 में हाई स्कूल के वार्षिक समारोह के दौरान डांस ग्रुप बनाने के समय वह कई बार छात्र के संपर्क में आई। तब ही वह उसके प्रति आकर्षित हुई। जनवरी 2024 में उसने पहली बार छात्र के सामने संबंधों का प्रस्ताव रखा। सहेली को बनाया जरिया छात्र ने शुरुआत में दूरी बनाना शुरू कर दी। इसके बाद टीचर ने स्कूल से अन्य उसकी एक महिला मित्र का सहारा लिया और बात आगे बढ़ाई। इस मामले में दोस्त के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। उसने कथित तौर पर पीड़ित छात्र से कहा था कि वो दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं और उम्रदराज महिलाओं और लड़कों के बीच रिलेशनशिप आम बात है। दोस्त से बातचीत के बाद छात्र ने टीचर से मिलने का फैसला किया। एक अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, 'वह (टीचर) छात्र को अपनी कार में लेकर एक सूने स्थान पर गई और जबरन कपड़े उतरवा दिए और शोषण किया।' उन्होंने कहा, 'अगले कुछ दिनों में छात्र परेशान रहने लगा, तो उसने उसे एंटी एन्जाइटी पिल्स भी दीं।' इसके बाद टीचर ने उसे दक्षिण मुंबई के अलग-अलग पांच सितारा होटल ले जाना शुरू किया और शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस ने बताया है कि संबंध बनाने से पहले कई बार टीचर छात्र को शराब पिलाती थी। आरोपी टीचर को बुधवार तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। छात्र ने अपनी HSC परीक्षा पूरी करने के बाद माता-पिता को उस भयावह अनुभव के बारे में बताया, जब आरोपी शिक्षक ने अपना नौकर भेजकर उससे मिलने का संदेश भिजवाया. इसके बाद पीड़ित के परिजनों की सूचना के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज हुई और त्वरित कार्रवाई में शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया.