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नोरोवायरस का हमला, 115 यात्रियों की तबीयत बिगड़ी, 3116 लोगों से भरी क्रूज शिप प्रभावित

बैंकॉक कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर नोरोवायरस का बड़ा संक्रमण फैल गया है. इस जहाज पर कुल 3116 यात्री सवार थे, जिनमें से 102 यात्रियों और 13 क्रू सदस्यों को बीमारी हो गई. कुल मिलाकर 115 लोग इस संक्रमण की चपेट में आए हैं. यह यात्रा 28 अप्रैल से 11 मई तक की थी, जो फोर्ट लॉडरडेल से शुरू होकर पोर्ट कैनावेरल पर खत्म होने वाली है।  यात्रा के दौरान जहाज अरूबा, बोनेर, प्यूर्टो रिको और बहामास जैसे सुंदर स्थानों पर रुका था. सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, बीमारी के मुख्य लक्षण उल्टी और दस्त था. प्रिंसेस क्रूज कंपनी ने इसे पेट संबंधी बीमारी बताया है।  नोरोवायरस क्या है और यह कैसे फैलता है? नोरोवायरस एक संक्रामक वायरस है जो पेट और आंतों को संक्रमित करता है. यह तेजी से उल्टी और दस्त पैदा करता है. यह वायरस बंद जगहों और लोगों के संपर्क वाली जगहों पर तेजी से फैलता है. क्रूज शिप जैसी जगहें खासतौर पर जोखिम भरी होती हैं क्योंकि यहां हजारों यात्री और कर्मचारी लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, एक ही भोजन का सेवन करते हैं. सामान्य सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं।  संक्रमित व्यक्ति के हाथों, खाने-पीने की चीजों, पानी या छुई हुई सतहों के जरिए यह वायरस दूसरों तक आसानी से पहुंच जाता है. क्रूज शिप पर होने वाली पेट की बीमारियों का सबसे आम कारण नोरोवायरस ही है।  इस यात्रा में क्या हुआ? यह प्रकोप पूरी यात्रा के दौरान धीरे-धीरे फैला. सभी यात्री एक साथ बीमार नहीं हुए, बल्कि केस पूरे सफर में लगातार बढ़ते रहे. जब बीमार लोगों की संख्या कुल यात्रियों के 3 प्रतिशत से अधिक हो गई, तब CDC को सार्वजनिक सूचना जारी करनी पड़ी. स्वास्थ्य अधिकारी अब जहाज का पूरा निरीक्षण कर रहे हैं. वेसल सैनिटेशन प्रोग्राम के तहत गहन जांच चल रही है।  कंपनी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे जहाज पर सख्त सफाई और डिसइंफेक्शन बढ़ा दिया है. बीमार यात्रियों और क्रू सदस्यों को अलग-अलग रखा गया है. उनके स्टूल सैंपल लेकर जांच की जा रही है. CDC के साथ मिलकर हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।  बीमारी के लक्षण क्या हैं? नोरोवायरस संक्रमण के प्रमुख लक्षण अचानक शुरू होने वाली उल्टी और पानी जैसे दस्त हैं. इसके साथ पेट में दर्द, जी मिचलाना, हल्का बुखार, सिरदर्द और शरीर में कमजोरी भी हो सकती है. ज्यादातर मामलों में ये लक्षण 1 से 3 दिन तक रहते हैं. ज्यादातर लोग बिना किसी गंभीर समस्या के ठीक हो जाते हैं।  हालांकि, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है. इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. इस प्रकोप में प्रभावित लोगों को हल्की बीमारी बताई गई है।  क्रूज शिप पर नोरोवायरस क्यों फैलता हैं? क्रूज शिप बंद और भीड़-भाड़ वाली जगह होती है, जहां एक संक्रमित व्यक्ति पूरे समूह को आसानी से संक्रमित कर सकता है. अक्सर कोई यात्री बिना लक्षण दिखे जहाज पर चढ़ जाता है. फिर बुफे खाना, स्विमिंग पूल, लिफ्ट, हैंड्रेल जैसी साझी चीजों के जरिए वायरस फैलने लगता है।  अमेरिका में हर साल लाखों लोग नोरोवायरस से संक्रमित होते हैं, लेकिन क्रूज शिप वाले मामले कुल आंकड़ों का बहुत छोटा हिस्सा होते हैं. फिर भी इनकी चर्चा ज्यादा होती है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग एक साथ प्रभावित होते हैं।  प्रिंसेस क्रूज कंपनी ने कहा कि उन्होंने पूरे जहाज को अच्छी तरह साफ किया. पूरे सफर के दौरान अतिरिक्त सैनिटाइजेशन जारी रखा. हाथ धोने, सैनिटाइजर इस्तेमाल करने और बीमार लोगों से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया है. कंपनी CDC के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है।  नोरोवायरस कितना खतरनाक है? नोरोवायरस आमतौर पर जानलेवा नहीं होता. ज्यादातर लोग कुछ दिनों में आराम से ठीक हो जाते हैं. गंभीर जटिलताएं बहुत कम होती हैं. वे भी मुख्य रूप से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में देखी जाती हैं. इस प्रकोप में भी ज्यादातर मामलों में स्थिति हल्की बताई गई है. यात्रा के दौरान यात्रियों में तनाव और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। 

ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में शपथ, शुभेंदु अधिकारी ने संभाली बंगाल की कमान

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की राजनीति ने शनिवार को रवींद्र जयंती पर नया इतिहास लिख दिया. कोलकाता के विशाल ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने शपथ ली. शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों के एनडीए सरकारों के मुखिया की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए देश भर के नेता तो आये ही, बंगाल के कोने-कोने से आम लोग भी ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे। शुभेंदु अधिकारी बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदीराम टुड्डू ने मंत्री पद की शपथ ली है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में कम से कम 20 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बीजेपी के दिग्गज नेता पहुंचे हैं। बीजेपी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हारने वाले दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया था। उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा कल ही पेश कर दिया था। मशहूर ब्रिगेड परेड ग्राउंड ने भव्य शपथ ग्रहण समारोह की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही टीएमसी के 15 साल का शासन खत्म हो गया है और पहली बार बंगाल में बीजेपी का सियासी सूर्योदय हुआ है। पहली बार लोक भवन के बाहर लोकतंत्र का उत्सव आजादी के बाद यह पहली बार है, जब बंगाल की किसी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह राजभवन (अब लोक भवन) के बंद कमरों से निकलकर खुले मैदान में आयोजित हो रहा है. बंगाली पंचांग के अनुसार, बैसाख के 25वें दिन पूरा राज्य रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मना रहा है. इसी दौरान रवींद्र संगीत की धुन के बीच राज्यपाल आरएन रवि ने शुभेंदु अधिकारी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी. उनके साथ 5 मंत्रियों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक को भी राज्यपाल ने शपथ दिलायी।  ब्रिगेड परेड ग्राउंड में खुली जीप में पीएम मोदी, शुभेंदु और शमिक अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुली जीप में बंगाल के नये चीफ मिनिस्टर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नये चीफ मिनिस्टर के साथ ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आये लोगों का अभिवादन स्वीकार किया. पीएम मोदी हाथ हिला रहे थे और शुभेंदु अधिकारी तालियां बजा रहे थे. थोड़ी देर बाद पीएम मोदी, शुभेंदु और शमिक जीप से उतरकर पैदल ही स्टेज की तरफ बढ़े. इस दौरान वह लोगों से मिलते रहे. कभी हाथ जोड़कर, तो कभी दोनों हाथ हिलाकर प्रधानमंत्री ने लोगों का अभिनंदन किया।   शहीद परिवारों को सम्मान भाजपा ने राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले अपने 200 से अधिक कार्यकर्ताओं के परिजनों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है. उनके बैठने के लिए मंच के पास अलग व्यवस्था की गयी थी. मैदान में आने वाले समर्थकों और मेहमानों के लिए बंगाल के पारंपरिक जायके ‘झालमुड़ी’ और ‘रसगुल्ले’ के स्टॉल लगाये गये थे।  निशीथ प्रमाणिक ने ली मंत्रिपद की शपथ माथाभांगा सीट से विधायक निशीथ प्रमाणिक ने मंत्री पद की शपथ ली है। उन्होंनेन राजनीति की शुरुआत टीएमसी से की थी और 2019 मेंबीजेपी में शामिल हुए थे। वह उत्तर बंगाल से आते हैं। वह केंद्र में राज्य मंत्री रह चुके हैं। वह कूचबेहार से सांसद थे। क्षुदीराम टुड्डू बने मंत्री क्षुदीराम टुड्डू ने मंत्री पद की शपथ ली है। वह बंगाल का आदिवासी चेहरा हैं। पेशे से शिक्षक हैं और सरकारी स्कूल में अध्यापन करते थे। वह रानीबांध से चुनकर आए हैं। उन्होंने संथाली भाषा में शपथ ली है। अशोक कीर्तिनिया ने मंत्री पद की शपथ ली है।  वह बनगांव उत्तर से विधायक हैं। वह मुतआ समुदाय के लिए ऐक्टिव रहते हैं। सामाजिक कार्यों में उनके योगदान को सराहा जाता है। वह लगातार दो बार विधायक बन चुके हैं। इस बार भी बनगांव से उन्हें जीत हासिल हुई है।  अग्निमित्रा पॉल ने ली मंत्रिपद की शपथ  अग्निमित्रा पॉल ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। उन्हें भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। वह आसनसोल दक्षिण से विधायक हैं और 2019 में बीजेपी में शामिल हुई थीं। वह बंगाल में मजबूत महिला चेहरा हैं। वह फैशन डिजाइनर से नेता बनी हैं।  दिलीप घोष बने मंत्री दिलीप घोष ने मंत्री पद की शपथ ली है। जानकारों का कहना है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री भी बनाया जा सकता है। वह लंबे समय से आरएसएस से जुड़े हैं और बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। वह खड़गपुर सदर से विधायक हैं ब्रिगेड परेड ग्राउंड की खास बातें     900 एकड़ में फैला ‘कोलकाता लंग्स’ : ब्रिगेड परेड ग्राउंड का अपना एक गौरवशाली इतिहास है. इसे दुनिया के सबसे बड़े शहरी पार्कों में गिना जाता है।      सेना का प्रबंधन : लगभग 900 एकड़ में फैले इस विशाल मैदान का रखरखाव भारतीय सेना की पूर्वी कमान के हाथ में है।      क्रिकेट का जन्मस्थान : कहा जाता है कि भारत में सबसे पहले क्रिकेट के बैट-बॉल इसी मैदान पर चले थे, जहां इयोनिया और कोलकाता के बीच मैच हुआ था।      राजनीति का मक्का : 18वीं सदी में जंगलों को साफ कर बनाये गये इस मैदान में 7 लाख से भी अधिक लोगों की रैलियां हो चुकी हैं. माकपा, कांग्रेस, टीएमसी और अब भाजपा, सभी ने यहां से अपनी सांगठनिक ताकत का लोहा मनवाया है।  सुरक्षा का अभेद्य किला ब्रिगेड परेड ग्राउंड कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा के लिए 4000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था. पूरे मैदान में 1500 सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से नजर रखी जा रही थी. वीवीआईपी मेहमानों के लिए कार्यक्रम स्थल के पास ही अस्थायी हेलीपैड बनाया गया था. मैदान में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के लिए 100 से अधिक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगायी गयी है, ताकि हर कोई इस पल को लाइव देख सके। 

ईंधन के दाम में इजाफा संभव, सरकार को हर दिन उठाना पड़ रहा 1000 करोड़ का भार

 नई दिल्‍ली ईरान अमेरिका तनाव और होर्मुज के बंद होने से ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखने को मिली है. कुछ ही समय में कच्‍चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे हैं, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि ईंधन की कीमतें जल्‍द बढ़ सकती हैं।  क्‍यों सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका पूरा भार या तो कंपनी के ऊपर या सरकार के खजाने पर पड़ रहा है. इस कारण, पेट्रोल-डीजल के दाम में हफ्ते भर के दौरान बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।  सूत्रों ने बिजनेस टुडे को बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  को प्रति माह लगभग 30,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई टेंशन  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे होकर दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हफ्तों से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. कई देशों में ईंधन की समस्‍या आई है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।  हांगकांग में पेट्रोल की कीमत लगभग 295 रुपये प्रति लीटर है, सिंगापुर में लगभग 240 रुपये, नीदरलैंड में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारत में कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें बिना किसी बड़े संशोधन के लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं।  कई देशों में इमरजेंसी लागू  कई देशों ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए पहले ही आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, श्रीलंका ने चार दिन का कार्य सप्ताह शुरू किया, पाकिस्तान ने सरकारी कार्यालयों के कार्य दिवस कम किए, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा लागू की. हालांकि, भारत में ईंधन की कमी, लंबी कतारें या राशनिंग जैसी समस्याएं नहीं हुईं।  भारत ने उठाए सख्‍त कदम  सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए. घरेलू एलपीजी उत्पादन को कुछ ही दिनों में 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भी भारी कमी की।  सरकार और तेल कंपनियां उठा रहीं भार  उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों के चरम पर, सरकार और तेल उत्पादक कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार प्रभावी रूप से वहन कर रही थीं।  उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद भी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।  100 फीसदी अधिक क्षमता पर काम  भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर आपूर्ति को स्थिर करने में भी कामयाबी हासिल की है. खबरों के मुताबिक, ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं. हालांकि, वेस्‍ट एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। 

नौसेना की कमान संभालेंगे वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, 31 मई से नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली   सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नया नौसेना प्रमुख (Chief of Naval Staff) नियुक्त किया है। वह एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की जगह लेंगे, जो 31 मई को सेवा से रिटायर होने वाले हैं। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने पिछले साल 31 जुलाई को पश्चिमी नौसेना कमान के 34वें फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला था। इस फ्लैग ऑफिसर को 1 जुलाई, 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था और वह संचार (Communication) और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) के विशेषज्ञ हैं। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला, जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, श्रिवेनहैम, यूनाइटेड किंगडम; कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर, करंजा; और यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट, रोड आइलैंड के पूर्व छात्र हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित इस एडमिरल ने अपने नौसेना करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल, स्टाफ और प्रशिक्षण पदों पर काम किया है। इनमें मिसाइल वेसल INS विद्युत और विनाश; मिसाइल कॉर्वेट INS कुलिश; गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS मैसूर और विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य की कमान संभालना शामिल है। रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि के मुख्यालय में मुख्य स्टाफ अधिकारी (traning) के रूप में कार्य किया और पूरी भारतीय नौसेना में प्रशिक्षण के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंत्रालय ने बताया कि वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने भारतीय नौसेना सुरक्षा टीम (Indian Naval Safety Team) की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई, जो नौसेना के सभी विभागों में ऑपरेशनल सुरक्षा की देखरेख करती है। इसके बाद उन्होंने फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग के रूप में नौसेना के 'वर्क अप ऑर्गनाइजेशन' का नेतृत्व किया, और बाद में उन्हें पश्चिमी बेड़े का फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया। 'स्वॉर्ड आर्म' (Sword Arm) की कमान संभालने के बाद, उन्हें फ्लैग ऑफिसर ऑफशोर डिफेंस एडवाइजरी ग्रुप और भारत सरकार के लिए ऑफशोर सुरक्षा और रक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद, यह फ्लैग ऑफिसर पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ, कार्मिक सेवाओं के नियंत्रक (Controller of Personnel Services) और नौसेना मुख्यालय (NHQ) में कार्मिक प्रमुख (Chief of Personnel) रहे। अपनी वर्तमान नियुक्ति से पहले, उन्होंने नौसेना मुख्यालय में नौसेना स्टाफ के उप-प्रमुख के रूप में कार्य किया। वाइस एडमिरल स्वामिनाथन की शैक्षणिक योग्यताओं में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से BSc की डिग्री; कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्चि से दूरसंचार में MSc  किंग्स कॉलेज, लंदन से रक्षा अध्ययन में MA मुंबई विश्वविद्यालय से रणनीतिक अध्ययन में MPhil  और मुंबई विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में PhD शामिल हैं।   

सुप्रीम कोर्ट में बोहरा मुस्लिम लड़कियों के खतना पर बहस, 7 साल की बच्ची की स्थिति गंभीर

नई दिल्ली मुस्लिमों के दाऊदी बोहरा समुदाय में छोटी बच्चियों का खतना किए जाने की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को बहस हुई। इस प्रथा पर सवाल उठाते हुए एक दाऊदी बोहरा महिला ने कहा कि इसके तहत बच्चियों के जननांग के एक हिस्से को काटा जाता है। इस दौरान उन्हें बेहद पीड़ा से गुजरना होता है। यह ट्रॉमा ऐसा होता है कि उन्हें पूरी जिंदगी इससे होने वाली शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरना होता है। उन्होंने कहा कि इस खतना के दौरान हजारों नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। महिला ने कहा कि इससे स्वास्थ्य को खतरा होता है और उनकी गरिमा से भी समझौता है। महिला ने कहा कि इस प्रथा को तो पॉक्सो ऐक्ट के तहत अपराध घोषित किया जाना चाहिए। दाऊदी बोरा समुदाय की महिला मासूमा रानालवी की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ लूथरा ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच से कहा कि खतना की यह प्रथा 7 साल की बच्चियों के साथ होती है। उन्होंने कहा कि जब 7 साल की बच्ची के साथ इसे अंजाम दिया जाता है तो फिर सहमति का तो सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि बच्ची की सहमति की बात नहीं हो सकती और उसके परिजन सामाजिक दबाव में रहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि वे विरोध करेंगे तो उनके सामाजिक बहिष्कार का खतरा रहता है। लूथरा ने कहा कि परिजन चुप रहते हैं क्योंकि यदि उनका बहिष्कार हुआ तो फिर वे ऐसी स्थिति में आ जाते हैं, जहां उनको समाज से बॉयकॉट झेलना पड़ा है। समाज के साथ उनके आर्थिक और सामाजिक रिश्ते खत्म हो जाते हैं। लूथरा ने कहा कि इस विषय को भले ही सामाजिक प्रथा कहा जा रहा है, लेकिन जिस तरह से एक बच्ची को पीड़ा झेलनी पड़ती है वह मामला संवैधानिक और आपराधिक दायरे में चला जाता है। ऐसे में इस पर उसी आलोक में विचार किया जाना चाहिए। जज ने जताई हैरानी- अब तक कोई कानून क्यों नहीं बना इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अलावा जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार समेत 9 जज शामिल हैं। इस केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने हैरानी भी जताई कि आखिर इसके खिलाफ कोई कानून क्यों नहीं बना है। उन्होंने कहा कि इस तरह से बच्चियों का जो खतना होता है, उससे उनके अंग प्रभावित होते हैं। ऐसे में कोई कानून जरूर बनना चाहिए, जिससे इस पर रोक लग सके। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले में कानून बनाकर रोक लगाने का अधिकार तो सरकार के पास ही है।

PF पैसा आसानी से निकालेगा EPFO, ATM और UPI सुविधा जल्द उपलब्ध

नई दिल्ली ईपीएफओ के करीब 8 करोड़ सब्सक्राइबर्स के लिए गुड न्यूज है। आप अपने प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा ATM और UPI के जरिए निकाल सकेंगे। यह सुविधा मई के अंत तक लाइव होने की उम्मीद है, जिससे पीएफ पैसे तक पहुंच और भी आसान और तेज हो जाएगी। ईटी नाउ के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। ईपीएफओ डैशबोर्ड के मुताबिक ईपीएफओ में करीब 7,98,24,491 मेंबर हैं। इनमें 7.74 करोड़ से अधिक सदस्यों की आधार सत्यापित KYC हो चुकी है। इनमें से 82,11,182 पेंशनर हैं। क्या है EPFO 3.0 कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पिछले साल EPFO 3.0 लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य डिजिटल ढांचे और प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना है। यह नया सिस्टम मिड-2026 तक पूरी तरह लागू हो जाएगी। इससे पीएफ से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं यूजर-फ्रेंडली हो जाएंगी। क्या होगा फायदा इस नए सिस्टम से ईपीएफओ के सदस्यों को पीएफ तक आसान पहुंच होगी। ऑटो-क्लेम सेटलमेंट और पसंद के बैंक खाते में फंड ट्रांसफर हो सकेगा। सबसे अहम अपग्रेड एटीएम और यूपीआई के जरिए पीएफ निकासी की सुविधा को लेकर होगा। कितना पैसा निकाल सकते हैं: EPFO निकासी की अधिकतम सीमा तय करेगा। इसके मुताबिक कुल पीएफ बैलेंस का 50% तक ही यूपीआई या एटीएम से निकाला जा सकेगा। कैसे काम करेगी यह सुविधा: EPFO सब्सक्राइबर्स को डेडिकेटेड एटीएम कार्ड जारी करेगा। यह कार्ड सीधे पीएफ अकाउंट से लिंक होगा। आप किसी भी एटीएम से जाकर अपना पीएफ पैसा निकाल सकेंगे। इसके अलावा, UPI के जरिए भी पीएफ बैलेंस ट्रांसफर किया जा सकेगा। कौन कर सकता है इस सुविधा का इस्तेमाल: ईपीएफओ सदस्यों को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। जैसे, एक्टिव UAN होना चाहिए। UAN से KYC डॉक्यूमेंट्स आधार, PAN, बैंक खाता नंबर और IFSC कोड लिंक होने चाहिए। रिकॉर्डतोड़ क्लेम श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले महीने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में EPFO ने 8.31 करोड़ क्लेम सेटल किए हैं, जो FY25 के 6.01 करोड़ से कहीं अधिक है। इनमें से 5.51 करोड़ क्लेम एडवांस या आंशिक निकासी के थे। यह पीएफ तक आसान पहुंच का बड़ा उदाहरण है। 71.11% एडवांस क्लेम ऑटो मोड में 3 दिनों के भीतर प्रोसेस हुए (पिछले साल 59.19%)। 6.68 करोड़ सदस्यों ने चेक लीफ अपलोड किए बिना ही क्लेम दायर किए। 1.59 करोड़ सदस्यों ने बिना एम्प्लॉयर की मंजूरी के अपने बैंक अकाउंट सीड किए। 70.55 लाख ट्रांसफर क्लेम ऑटोमेटिक प्रोसेस हुए। 24.84 लाख ट्रांसफर रिक्वेस्ट सदस्यों द्वारा बिना एम्प्लॉयर के हस्तक्षेप के की गईं।

पश्चिम बंगाल फतह के बाद अमित शाह का बड़ा बयान, कार्यकर्ताओं को दी श्रद्धांजलि; ममता पर भी साधा निशाना

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी भाजपा की पहली सरकार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। विधायक दल के नेता के रूप में उनके चयन की घोषणा के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के संघर्ष को याद किया और उन 321 कार्यकर्ताओं को श्रेय दिया जिन्होंने राज्य में भगवा पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि यह जीत जितनी आनंददायक है, उसका रास्ता असहनीय पीड़ा से भरा हुआ है। शाह ने भवानीपुर से ममता बनर्जी की हार पर भी चुटकी ली और कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें घर में हराया है। अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मत की अभिव्यक्ति लगभग असंभव थी। सैकड़ों उदाहरण हिंसा और क्रूरता के, उसके बीच में भाजपा और हमारे नेता नरेंद्र मोदी पर जो भरोसा करके बंगाल की जनता ने जो प्रचंड विजय हमें दी है उसके लिए जनता का आभार है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने जो अपेक्षाएं रखी हैं, पूरा प्रयास होगा कि विश्वास को तनिक भी ठेस ना पहुंचे। शाह ने कहा कि बंगाल की संस्कृति और बंगाल की परंपरा को 5 दशक से विदेशी विचाराधारा से प्रेरित शासन से मुक्त करके फिर से एक बार रामकृष्ण ठाकुर, विवेकानंद, महर्षि अरविंद और कविगुरु टैगोर की कल्पना का बंगाल बनाने की दिशा में काम करेंगे। शाह ने कहा कि जिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में जिस विचारधारा की शुरुआत 1950 में हुई, 2026 में उनकी जन्मभूमि में उनकी पार्टी की सरकार बनी है। जब धारा 370 हटी तो देशभर के कार्यकर्ताओं के मन में खुशी की लहर थी। कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा कि कसक बाकी है। उन्होंने कहा था कि बंगाल में भाजपा का झंडा लहराना बाकी है। श्यामा प्रसाद जी जहां भी होंगे मुक्त मन से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को आशीर्वाद देते होंगे कि उनके नृत्व ने भाजपा को गंगोत्री से गंगासागर तक पहुंचाया। इस जीत के लिए 321 कार्यकर्ताओं ने जान गंवाई: अमित शाह बंगाल में भाजपा के खाता खुलने से सरकार बनने तक की यात्रा को याद करते हुए अमित शाह ने उनक कार्यकर्ताओं को भी नमन किया जो राजनीतिक हिंसा का शिकार हो गए। उन्होंने कहा, ‘2014 के उपचुनाव में समिक भट्टाचार्य ने उपचुनाव जीतकर हमारा खाता खोला। 16 में तीन हुए। 21 में 77 हुए और 2026 में 207 के साथ हमारा मुख्यमंत्री है। यह यात्रा जितनी भव्य है, आनंददायक है, यात्रा का मार्ग असहनीय पीड़ा से भरा हुआ है। मैं भूल नहीं सकता कि भाजपा के 321 देवतुल्य कार्यकर्ताओं ने अपनी जान इस जीत के लिए गंवाई है। केरल और बंगाल के अलावा कहीं हिंसा का क्रूर तांडव नहीं देखा। मैं हृदय के भाव के साथ उन सभी कार्यकर्ताओं के परिवार को भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं की तरफ से भावपूर्वक नमन करता हूं। आपके परिवार के स्वजन ने बलिदान करके हमारी विचारधारा को तो मजबूत किया ही है, पश्चिम बंगाल की सीमा को मजबूत करके पूरे भारत को मजबूत किया है।’ अब घुसपैठ असंभव: अमित शाह शाह ने घुसपैठ और गो तस्करी को असंभव बनाने का वादा करते हुए कहा, ‘त्रिपुरा में हमारी सरकार है, असम में सरकार है और बंगाल में भी हमारी सरकार बनी है, घुसपैठ असंभव होने वाली है। गो तस्करी असंभव होने वाली है। बंगाल सरकार और भारत सरकार सीमा को राष्ट्र की सुरक्षा के अभेद्य किले के रूप में परिवर्तित करेगी।’ गृहमंत्री ने शांतिपूर्वक चुनाव के लिए चुनाव आयोग, सुरक्षाबलों और बंगाल पुलिस की तारीफ की। ममता बनर्जी की हार पर ली चुटकी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि 9 जिले ऐसे हैं जहां सभी सीटें भाजपा ने जीतीं और टीएमसी का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। 23 जिलों में से 20 में भाजपा नंबर एक पार्टी है। एक भी जिला ऐसा नहीं जहां हमारा विधायक नहीं है। उन्होंने भवानीपुर से ममता बनर्जी की हार पर चुटकी ली। शाह ने कहा, 'मैं भवानीपुर की जनता का भी मैं बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं। शुभेंदु दा ने पिछले चुनाव में दीदी को नंदीग्राम में हराया था। मैंने दीदी का एक इंटरव्यू देखा था, वह कहती थीं कि मैं उनके घर में लड़ने के लिए चली गई। दीदी इस बार तो शुभेंदु दा ने आपके घर में आकर हराया है। मैं भवानीपुर की जनता का भी हृदयपूर्वक धन्यवाद करना चाहता हूं।'

सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने लिखा लेख, बताया भारत की अदम्य शक्ति

अहमदाबाद   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उन्होंने यह जानकारी देते हुए एक लेख में भव्य-दिव्य सोमनाथ धाम को समर्पित अपनी भावनाएं भी व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपना लेख शेयर किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, "पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 11 मई को मुझे एक बार फिर वहां जाने का सौभाग्य मिलने वाला है। यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया।" सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि 2026 की शुरुआत में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा, जो मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया गया था। उन्होंने लिखा, "वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था।" पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि 11 मई को वे एक बार फिर सोमनाथ जाएंगे, जहां वे पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, "अब 11 मई को मुझे एक बार फिर सोमनाथ जाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस बार यह यात्रा पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है। मैं उस क्षण को फिर जीने जा रहा हूं, जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का लोकार्पण किया था। उस दिन, सोमनाथ में विध्वंस से सृजन तक की यात्रा फिर से जीवंत होगी। छह महीनों के भीतर सोमनाथ के इतिहास से जुड़े इन दो अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।" अपने लेख में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और उसकी निरंतरता का प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा, "सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प है। इसके सामने लहराता विशाल समुद्र अनंत काल की अनूभूति कराता है। इसकी लहरें हमें सिखाती हैं कि तूफान चाहे कितने भी विकराल क्यों न हों, मनुष्य का साहस और आत्मबल हर बार फिर से उठ खड़ा होने में सक्षम है। तट से टकराती लहरें सदियों से यह उद्घोष कर रही हैं कि मानवीय चेतना को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता है।" उन्होंने प्राचीन ग्रंथों के उल्लेख के साथ सोमनाथ की आध्यात्मिक महत्ता को भी रेखांकित किया और इसे शैव परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। पीएम मोदी ने कहा, "हमारे प्राचीन शास्त्रों में लिखा है, 'प्रभासं च परिक्रम्य पृथिवीक्रमसंभवम्।' अर्थात दिव्य प्रभास (सोमनाथ) की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है। जब लोग यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, तब उन्हें उस सभ्यता की अद्भुत निरंतरता का भी अनुभव होता है, जिसकी ज्योति कभी बुझाई नहीं जा सकी। कई साम्राज्य आए और गए, समय बदला और इतिहास ने ढेरों उतार-चढ़ाव देखे, फिर भी सोमनाथ हमारे हृदय में हमेशा बना रहा।" प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "यह समय उन असंख्य महान विभूतियों के स्मरण का भी है, जो क्रूर आक्रांताओं के सम्मुख अडिग रहे। लकुलीश और सोम शर्मा जैसे मनीषियों ने प्रभास को शैव दर्शन का महान केंद्र बनाया। चक्रवर्ती महाराज धारसेन चतुर्थ ने सदियों पहले वहां दूसरा मंदिर बनवाया था। समय की कठिन परीक्षा के बीच भीम प्रथम, जयपाल और आनंदपाल जैसे शासकों ने आक्रमणों के विरुद्ध अपनी सभ्यता की ढाल बनकर मंदिर की रक्षा की थी। ऐसा माना जाता है कि महान राजा भोज ने भी इस पावन स्थल के पुनर्निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया था। कर्णदेव सोलंकी और जयसिंह सिद्धराज ने गुजरात की राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।" उन्होंने आगे लिखा, "भाव बृहस्पति, कुमारपाल सोलंकी और पाशुपताचार्यों ने इस तीर्थ को आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। विशालदेव वाघेला और त्रिपुरांतक ने इसकी बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा की। महिपाल चूड़ासमा और राव खंगार चूड़ासमा ने विध्वंस के बाद पूजा-पाठ की परंपरा को पुनर्जीवित किया। पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर, जिनकी 300वीं जयंती मनाई जा रही है, उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भक्ति की परंपरा को जीवंत रखा। बड़ौदा के गायकवाड़ों ने तीर्थयात्रियों के अधिकारों की रक्षा की। इसके साथ ही हमारी यह धरती वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील जैसे पराक्रमियों से धन्य हुई है। उनके साहस और बलिदान को आज भी याद किया जाता है।" प्रधानमंत्री ने 20वीं सदी के पुनर्निर्माण आंदोलन का भी उल्लेख किया, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया। अपने लेख में पीएम मोदी ने लिखा, "1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी। सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में एक बात जो उन्हें बहुत व्यथित करती थी, वह थी- सोमनाथ की दुर्दशा। 13 नवंबर 1947 को, दिवाली के समय, उन्होंने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर, समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया, 'इस (गुजराती) नववर्ष पर हमारा निश्चय है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। सौराष्ट्र के लोगों को इसके लिए हर तरह से अपना योगदान देना होगा। यह एक पावन कार्य है, जिसमें हर किसी को भागीदारी निभानी होगी।' उनके इस आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नए उत्साह से भर दिया।" उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्यवश, सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बावजूद, प्रभास पाटन की पावन धरती पर … Read more

पटाखा प्लांट विस्फोट चीन: 37 की मौत, पांच गंभीर रूप से घायल, राहत कार्य जारी

चांग्शा   चीन के हुनान प्रांत में एक पटाखा प्लांट में हुए भीषण धमाके में हुई मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। धमाके में मरने वालों की संख्या अब 37 हो गई है। स्थानीय अधिकारी की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, धमाके के बाद एक व्यक्ति लापता है और 51 लोग घायल हुए हैं। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 51 घायलों में से पांच की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय समयानुसार, यह घटना सोमवार को दिन के चार बजकर 43 मिनट पर ये धमाका हुआ, जिसे 2019 से अब तक का सबसे बड़ा ब्लास्ट माना जा रहा है। हुनान का लियुयांग चीन की पटाखों की राजधानी के तौर पर जाना जाता है। यह डिवाइस की घरेलू सप्लाई का 60 फीसदी और एक्सपोर्ट का लगभग 70 फीसदी बनाता है। 2019 में पूर्वी चीन के जिआंगसु प्रांत में एक केमिकल प्लांट में बड़ा धमाका हुआ था, जिसमें लगभग 78 लोग मारे गए थे। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, हुनान प्रांत के लिउयांग में हुए धमाके के बाद के हालात की निगरानी के लिए वाइस-प्रीमियर झांग गुओकिंग को भेजा है। झांग ने कहा कि स्टेट काउंसिल, यानी चीन की कैबिनेट, हादसे के कारणों की जांच करने और क्रिमिनल सजा दिलाने में मदद के लिए एक जांच टीम बनाएगी। झांग ने सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले पटाखे बनाने वालों को सजा देने का वादा किया है। इसके साथ ही उन रेगुलेटर्स को भी सजा देने का वादा किया है जो कंपनियों की निगरानी करने के बजाय उन पर जुर्माना लगाते हैं। सबसे ज्यादा उम्र के पीड़ित की उम्र 68 साल थी, जबकि सबसे कम उम्र के पीड़ित की उम्र बीस साल के आस-पास थी। ज्यादातर घायलों को इमरजेंसी इलाज के लिए लियूयांग पीपल्स हॉस्पिटल और लियूयांग ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन हॉस्पिटल ले जाया गया। इससे पहले चांग्शा शहर के स्वास्थ्य आयोग के कम्युनिस्ट पार्टी सेक्रेटरी लियू जियायोंग ने कहा कि घायलों में से छह इंटेंसिव केयर में हैं। चेन ने कहा कि मौके पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन काफी हद तक पूरे हो चुके हैं। ऑपरेशन में फायर, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, पब्लिक सिक्योरिटी और स्वास्थ्य विभाग के 1,500 से ज्यादा लोग शामिल थे।

बहुमत का आंकड़ा जुटाने के बाद विजय ने राज्यपाल से की मुलाकात, सरकार गठन की तैयारी तेज

तमिलनाडु  TVK प्रमुख विजय ने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। तीन दिनों में विजय की राज्यपाल से यह तीसरी मुलाकात है। पहले दो बार में राज्यपाल ने विजय को जरूरी बहुमत का आंकड़ा लाने के लिए कहा था। पहले सिर्फ कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया था। अब सीपीआई, सीपीआईएम, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने विजय की टीवीके का समर्थन करने का फैसला किया है। इसके बाद, विजय के पास 120 की संख्या हो गई है। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल दोनों वामपंथी दलों- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने कहा कि यह (समर्थन देने का) निर्णय भाजपा को राज्य में पिछले दरवाजे से प्रवेश करने से रोकने के लिए लिया गया है। हालांकि, राज्य के अधिकारों के मामले में वे (वाम दल) डीएमके के साथ बने रहेंगे। वाम दलों ने घोषणा की कि वे टीवीके मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनेंगे। दोनों के दो-दो विधायक हैं। उन्होंने दिनभर की चर्चा के बाद अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी को अपना समर्थन देने की घोषणा की। उनके समर्थन के साथ, टीवीके प्रमुख ने बाद में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने के अपने दावे को दोहराया। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की 108 सीटें हैं, लेकिन यह बहुमत के आंकड़े से 10 कम है। टीवीके ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के सहयोगी वामदलों, और विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) से संपर्क किया था तथा 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन मांगा था। सीपीआई, सीपीआईएम और वीसीके, प्रत्येक के दो-दो विधायक हैं। वाम दलों ने राज्यपाल को संबोधित पत्र में टीवीके को अपना समर्थन देने की जानकारी दी। पांच विधायकों वाली कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थन दे दिया है। विधानसभा चुनावों में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, पार्टी संस्थापक विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक को छोड़ना होगा। विजय को चेन्नई के पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीटों में से एक को छोड़ना पड़ेगा।