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अफगानिस्तान के पकतिया से सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, हथियार और गोला-बारूद जब्त

काबुल अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों ने देश के पूर्वी पकतिया प्रांत से भारी मात्रा में हथियार और सैन्य उपकरण जब्त किए हैं। आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार को बताया कि पूर्वी पकतिया के समकानी और अहमद खेल जिलों के बाहरी इलाकों में कई अभियानों के दौरान भारी मात्रा में हथियार और सैन्य उपकरण बरामद किए गए। इससे पहले, 4 अगस्त को पश्चिमी अफगानिस्तान के फराह प्रांत में स्थित खाक-ए-सकीद जिले में पुलिस ने एक रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी), एक एके-47 राइफल, चार हथगोले, प्रोजेक्टाइल और अन्य सैन्य उपकरण एक घर से बरामद किए थे। प्रांतीय पुलिस कार्यालय ने एक समाचार विज्ञप्ति में इस कार्रवाई की जानकारी दी थी। इसी तरह, 27 जुलाई को दक्षिणी अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत की राजधानी तिरिन कोट में एक गुप्त सूचना के आधार पर अभियान चलाया गया। इस दौरान सुरक्षा बलों ने छह एके-47 राइफल, एक भारी मशीन गन, पीके मशीन गन, रॉकेट लांचर और सैकड़ों हथगोले सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अफगान अंतरिम सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में देश की सुरक्षा स्थिति को स्थिर करने के प्रयासों के तहत हजारों हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किया है। सरकारी मीडिया आउटलेट रेडियो एंड टेलीविजन ऑफ अफगानिस्तान (आरटीए) के अनुसार, 24 जुलाई को पुलिस ने पूर्वी अफगानिस्तान के पकतिया प्रांत में लगभग 200 हल्के और भारी हथियार जब्त किए। हथियारों के इस जखीरे में 97 कलाश्निकोव, सात एम16 असॉल्ट राइफलें, 86 स्टॉक पिस्तौल, सात रॉकेट लॉन्चर और कई अन्य प्रकार के हथियार और गोला-बारूद शामिल हैं। सरकारी मीडिया आउटलेट रेडियो एंड टेलीविजन ऑफ अफगानिस्तान (आरटीए) ने पुलिस के हवाले से कहा कि किसी को भी अवैध रूप से हथियार रखने या ले जाने का अधिकार नहीं है। इसी तरह के एक अभियान में पुलिस ने अफगानिस्तान के उत्तरी समांगन प्रांत में एक एंटी-एयरक्राफ्ट गन सहित हथियार और गोला-बारूद बरामद किया था।

इराक में क्लोरीन गैस लीक, सैकड़ों तीर्थयात्री अस्पताल में भर्ती, हालात गंभीर

इराक इराक में एक जल शोधन केंद्र में क्लोरिन गैस रिसाव के कारण 600 से ज्यादा तीर्थयात्रियों को को अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह घटना इराक के मध्य और दक्षिण में स्थित दो शिया पवित्र शहरों नजफ और कर्बला के बीच के मार्ग पर शनिवार रात में हुई। इस साल लाखों शिया मुस्लिम तीर्थयात्रियों के कर्बला जाने की उम्मीद है। यहां पर इमाम हुसैन और उनके भाई अब्बास की दरगाहें स्थित हैं। इराक के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि कर्बला में क्लोरीन गैस रिसाव के बाद दम घुटने के 621 मामले दर्ज किए गए हैं। सभी को आवश्यक देखभाल प्रदान की गई और वे स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी भी मिल रही है। इस बीच तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षा बलों ने कहा कि यह घटना कर्बला-नजफ मार्ग पर स्थित एक जल स्टेशन से क्लोरीन रिसाव के कारण हुई। बता दें कि दशकों के संघर्ष और भ्रष्टाचार के कारण इराक का अधिकांश बुनियादी ढांचा जर्जर हो चुका है। जुलाई में पूर्वी शहर कुट के एक शॉपिंग मॉल में भीषण आग लगने से 60 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

11 वर्षों में स्मार्टफोन उत्पादन में छः गुना बढ़ोतरी, भारत अमेरिका का सबसे बड़ा सप्लायर बना: अश्विनी वैष्णव

मुंबई केंद्रीय रेल एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा कि भारत, अमेरिका का सबसे बड़ा स्मार्टफोन सप्लायर बन गया है। बेंगलुरु में मेट्रो परियोजनाओं के उद्घाटन के अवसर पर, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन छह गुना बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसी अवधि के दौरान इलेक्ट्रॉनिक निर्यात आठ गुना बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। वैष्णव ने टेक सप्लाई चेन में देश की मजबूत होती स्थिति पर कहा, "भारत दुनिया में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन गया है।" वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में अमेरिका में आयात किए गए सभी स्मार्टफोन में भारत का हिस्सा 44 प्रतिशत था, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के केवल 13 प्रतिशत से एक बड़ी छलांग है। चीन में असेंबल किए गए अमेरिकी स्मार्टफोन शिपमेंट में आई गिरावट का सबसे ज्यादा लाभ भारत ने उठाया है, जिसका मुख्य कारण एप्पल की 'चाइना प्लस वन' रणनीति है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब 300 मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जो 2014 में केवल दो थीं। वित्त वर्ष 14 में भारत में बिकने वाले 26 प्रतिशत मोबाइल फोन की ही स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग की जाती थी, जो अब बढ़कर 99.2 प्रतिशत पर पहुंच गई है। देश में मैन्युफैक्चर हुए मोबाइल फोन की वैल्यू वित्त वर्ष 14 के 18,900 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में 4.22 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी केंद्र बनाने के दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता के अनुरूप है। भारत अब चीन और वियतनाम के साथ ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में एक प्रमुख खिलाड़ी है, जहां कंपनियां सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए उत्पादन को स्थानांतरित कर रही हैं। मोबाइल फोन का शुद्ध निर्यात वित्त वर्ष18 में 0.2 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 24.1 अरब डॉलर हो गया।

आशा मोटवानी कौन हैं? और ट्रंप को धन्यवाद कहने की वजह क्या है?

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ को लेकर दोनों देशों में तनाव गहरा गया है। इस बीच भारतीय मूल की अमेरिकी निवेशक और रिपब्लिकन पार्टी की इकलौती भारतीय-अमेरिकी मेगाडोनर आशा जडेजा मोटवानी ने भारत को सलाह दी है कि वह ट्रंप के इरादों और सोच को समझने के लिए उनसे संपर्क करे। मोटवानी ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव करने के लिए ट्रंप ने अपने दो मंत्रियों को काम पर लगाया, भले ही नतीजा कुछ भी हो, उन्हें थैंक्यू बोलने में बुराई क्या है? मोटवानी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'मैं रिपब्लिकन पार्टी की एकमात्र भारतीय-अमेरिकी मेगाडोनर हूं। मैं भारत को मेरी राय लेने की सलाह देती हूं कि ट्रंप के दिमाग में क्या चल रहा है? हो सकता है मैं सौ प्रतिशत सही न रहूं, लेकिन करीब जरूर रहूंगी। फेडरल इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट देखिए, वहां साफ लिखा है कौन कितना फंड दे रहा है।' थैंक्यू बोलने में बुराई क्या है उन्होंने आगे कहा, ‘ट्रंप ने आधिकारिक रूप से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और मार्को रुबियो को भारत और पाकिस्तान से बात करने और सीज़फ़ायर कराने की अनुमति दी थी। यह प्रयास सफल हुआ या नहीं, यह मुद्दा नहीं है, उनकी नीयत नेक थी। हमें उन्हें एक फूल और अच्छा-सा कार्ड देकर ‘थैंक्यू’ कहना चाहिए। शायद मैं यह भारत की ओर से कर दूं।’ उन्होंने यह भी कहा कि शायद वह भारत की ओर से ट्रंप को धन्यवाद देंगी, खासकर भारत–पाकिस्तान तनाव के दौरान अमेरिका की भूमिका के लिए। उन्होंने ट्रंप के आर्मेनिया-अजरबैजान शांति समझौते की सराहना करते हुए कहा, 'जिस तरह वे दोनों नेताओं के बीच बैठे और उनके हाथ थामे, उससे साफ है कि शांति उनके दिल के करीब है। अगर उन्हें इसके लिए नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो उन्हें इससे ताकत मिल सकती है। वह रूस और यूक्रेन में भी शांति के लिए लगातार काम कर रहे हैं।' ट्रंप से भी अपील उन्होंने ट्रंप से भी अपील की कि भारत के साथ व्यापारिक समझौते को प्राथमिकता दें। उनके मुताबिक, अमेरिका ने जिन अन्य एशियाई देशों से डील की है, उनके चीन और यूरोपीय संघ से भी समझौते हैं, लेकिन भारत के विशाल बाज़ार तक अमेरिका की विशेष पहुंच है। साथ ही, भारत रूस और यूक्रेन के बीच भी शांति के लिए भूमिका निभा रहा है। कौन हैं आशा मोटवानी फ़ेडरल इलेक्शन रिकॉर्ड के अनुसार, आशा मोटवानी ने 31 मई 2024 को रिपब्लिकन नेशनल कमिटी को $123,900 (करीब 1 करोड़ रुपये) का फंड दिया था। वह सिलिकॉन वैली में स्थित एक प्रसिद्ध निवेशक हैं।  

महायुति को लेकर एकनाथ शिंदे का भरोसा, विपक्ष के लिए दिल्ली दौरे हैं मुश्किल

नई दिल्ली महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि दिल्ली की उनकी यात्राओं से राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के सहयोगियों (भाजपा और राकांपा) को कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन विपक्षी दल काफी बेचैन हो जाते हैं। ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक वीडियो साक्षात्कार में शिंदे ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की उनकी यात्राएं महाराष्ट्र के विकास से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने, संसद सत्र के दौरान शिवसेना सांसदों से मिलने और अन्य राज्यों के पार्टी नेताओं के साथ बैठक करने के लिए होती हैं। शिंदे ने कहा, “महायुति को लेकर फिक्र करने की कोई बात नहीं है। चिंता का कोई कारण नहीं है। मेरे दिल्ली दौरे से विपक्षी दल ही असहज हो जाते हैं।” विपक्षी दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और कांग्रेस शिंदे की दिल्ली दौरे को लेकर अक्सर उन पर निशाना साधते रहे हैं। वे दावा करते आए हैं कि शिंदे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। शिवसेना प्रमुख ने कहा, “क्या उन लोगों से मिलना गलत है, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाकर या अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करवाकर बालासाहेब ठाकरे के सपनों को साकार किया?” शिंदे ने लगभग तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (अविभाजित), कांग्रेस और राकांपा (अविभाजित) की महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार से यह कहते हुए बगावत कर दी थी कि उद्धव ने शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व सिद्धांत को त्याग दिया है। उन्होंने जून 2022 में शिवसेना (अविभाजित) के दो-तिहाई से अधिक विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोग से मुख्यमंत्री बने थे। बाद में निर्वाचन आयोग ने उनके नेतृत्व को वाले गुट को ‘असली’ शिवसेना का दर्जा दे दिया था। शिंदे ने कहा, “मैं जब भी अपने गांव जाता हूं या दिल्ली आता हूं, तो विपक्ष को बहुत परेशानी होती है। लेकिन मैं अपना काम करता रहता हूं। वे जो चाहें, सोचने के लिए स्वतंत्र हैं। मैं यहां बिना काम के नहीं आता।” पिछले हफ्ते शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। शिंदे ने कहा कि विपक्षी दल शिवसेना (उबाठा) के लिए उनके दिल्ली दौरे की आलोचना करना आसान है, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि उन्होंने उन लोगों से हाथ मिला लिया है, जिन्होंने बालासाहेब ठाकरे को छह साल तक मताधिकार से वंचित रखकर उनका अपमान किया था। शिवसेना प्रमुख ने कहा, “वही मुख्य चुनाव आयुक्त (एमएस गिल) जिन्होंने बालासाहेब का वोट देने का अधिकार छीन लिया था, उन्हें कांग्रेस ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में मंत्री बनाकर पुरस्कृत किया था।” उन्होंने कहा, “आप (शिवसेना-उबाठा) सत्ता की चाह में दिल्ली की यात्रा करते हैं, लेकिन हम महाराष्ट्र में जन कल्याणकारी योजनाएं लाने और विकास सुनिश्चित करने के लिए यहां आते हैं। हमें इस पर गर्व है।”  

चीन की सेना पर बढ़ता शक, जानिए जिनपिंग की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

बीजिंग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश की सेना को लेकर काफी परेशान हैं। बाहरी तौर पर देखा जाए तो चीन की सेना कभी इतनी मजबूत नहीं रही। नेवी से लेकर हथियार बनाने तक में सेना काफी आगे है। लेकिन अंदरूनी तौर पर कई चीजें हैं जो हाथ से छूटती नजर आ रही हैं। इनमें से एक है चीनी सेना में लगातार बढ़ता भ्रष्टाचार। इस पर लगाम के लिए जिनपिंग लगातार ऐक्शन में हैं, लेकिन अभी भी चीजें कंट्रोल में आती नजर नहीं आ रही हैं। लगातार कम होते टॉप अधिकारी चीन की सबसे बड़ी चिंता शीर्ष स्तर पर लगातार अधिकारियों का कम होते जाना है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में कुल सात सीटें हैं, जिनमें से तीन फिलहाल खाली हैं। इन पदों पर जो अधिकारी थे वह या तो गायब हो गए हैं या फिर गिरफ्तार कर लिए गए हैं। विडंबना यह है कि यह सब तब हो रहा है जब खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग सेना में भ्रष्ट्राचार पर लगाम कसने में लगे हुए हैं। जिनपिंग ने सेना के अत्याधुनिकरण के लिए 2027 का लक्ष्य तय किया है। कुछ अमेरिकी अधिकारी तो यहां तक भी कहते हैं कि चीन खुद को ताइवान पर कब्जा करने में सक्षम बनाना चाहता है। गौरतलब है कि चीन लगातार ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है। क्यों गंभीर है समस्या चीन के लिए यह समस्या इसलिए भी गंभीर हो जाती है क्योंकि जो सैन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में पकड़े गए हैं, वह जिनपिंग के करीबी रहे हैं। ऐसे में जब यही सैन्य अधिकारी गलतियां करते हुए पकड़े जा रहे हैं तो जिनपिंग का गुस्सा बढ़ना भी लाजिमी है। जो अधिकारी गायब हुए हैं उनमें जनरल वीडांग का नाम प्रमुख है। वह चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे। वीडांग काफी अरसे से गायब हैं, जो दिखाता है कि वह जांच के दायरे में हैं। इसी तरह एक अन्य शीर्ष कमांडर एडमिरल मिआवो हुआ भी अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए जांच के दायरे में हैं। वफादारी की चाहत शी जिनपिंग साल 2027 में चौथी बार कम्यूनिस्ट पार्टी के लीडर बनेंगे। वह चाहते हैं कि उनके पास फौज में ऐसे अधिकारी हों, जो उनके प्रति पूरी तरह से वफादार रहें। लेकिन चीनी सेना के अधिकारी एक के बाद एक जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े जा रहे हैं, उसने जिनपिंग की परेशानी बढ़ा दी है। इन सबके बीच अगले महीने शी जिनपिंग बीजिंग में एक मिलिट्री परेड करवाने वाले हैं। इस दौरान वह यह दिखाएंगे कि चीन की सेना पर किस कदर उनका एकाधिकार है।  

मोदी को ‘अच्छा दोस्त’ कहने वाले नेतन्याहू ने ट्रंप से निपटने का दिया संकेत

इजरायल  तेल अवीव में भारतीय पत्रकारों से बातचीत के दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत-इजरायल संबंधों पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके “अच्छे दोस्त” हैं और दोनों देशों के बीच खासतौर पर रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी है। नेतन्याहू ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को इजरायल से मिले सैन्य उपकरण बेहद कारगर साबित हुए, ठीक वैसे ही जैसे कारगिल युद्ध में हुए थे।  अमेरिका और भारत के बीच जारी तनाव पर नेतन्याहू ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने की "सलाह" देंगे, लेकिन यह बातचीत निजी रहेगी क्योंकि मोदी और ट्रंप दोनों उनके “बेहतरीन दोस्त” हैं। उन्होंने अमेरिका-भारत रिश्तों को “बहुत मजबूत” बताया और दोनों देशों से टैरिफ विवाद सुलझाने की अपील की। “रिश्ते की नींव बहुत ठोस है। भारत और अमेरिका के लिए टैरिफ मुद्दे पर आम सहमति बनाना और हल निकालना फायदेमंद होगा। यह इज़राइल के लिए भी अच्छा होगा, क्योंकि दोनों हमारे दोस्त हैं।” नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इजरायल के रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और इससे दोनों देशों को लाभ हो रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में इजरायली हथियार भारतीय सेना के लिए “बड़ी ताकत” बने। इजरायली पीएम ने कहा कि वे मोदी के साथ न सिर्फ राजनीतिक रूप से, बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी अच्छा बॉन्ड साझा करते हैं। उनकी मुलाकातों में कई मुद्दों पर गहन चर्चा होती है।   इससे पहले, ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया, जिससे यह दर 50% हो गई। यह फैसला रूस से कच्चा तेल आयात जारी रखने पर “सज़ा” के तौर पर लिया गया। यह ट्रंप की अब तक की सबसे बड़ी टैरिफ वृद्धि है, ब्राज़ील को छोड़कर।भारत ने इस कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैर-जरूरी” बताया है, जो कपड़ा और समुद्री निर्यात जैसे कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। नेतन्याहू ने कहा- “भारत और इजरायल दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं और आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहे हैं। अगर हम मिलकर सीमा पार आतंकवाद से लड़ें तो बेहतर नतीजे हासिल कर सकते हैं।”नेतन्याहू ने बताया कि उनकी सरकार तेल अवीव और बेंगलुरु के बीच सीधी उड़ान  शुरू करने पर विचार कर रही है। पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों पर सवाल पर उन्होंने कहा कि चिंता की जरूरत नहीं है, क्योंकि वॉशिंगटन में यह समझ है कि भारत उसका “मजबूत साझेदार” है।

पायलटों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ी, एयर इंडिया ने दी करियर बढ़ाने की सौगात

नई दिल्ली  भारत की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया ने अपने कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। कंपनी ने पायलटों सहित अन्य प्रमुख स्टाफ की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) की उम्र सीमा में संशोधन कर दिया है। अब एयर इंडिया के पायलट 58 की बजाय 65 साल की उम्र तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे। यह कदम कंपनी के अंदर जारी संरचनात्मक बदलावों और विस्तारा के साथ हुए विलय के बाद सामने आया है।  65 साल तक उड़ान भरेंगे एयर इंडिया के पायलट पहले एयर इंडिया में पायलटों की रिटायरमेंट की उम्र 58 वर्ष तय थी, लेकिन विस्तारा के साथ कंपनी के मर्जर के बाद इस अंतर को समाप्त करने के लिए नई नीति लागू की गई है। गौरतलब है कि विस्तारा में पहले से ही पायलटों की सेवा अवधि 65 साल तक थी। अब, पूरे एयर इंडिया ग्रुप में यह नियम लागू कर दिया गया है, जिससे 7 वर्षों की सीधी बढ़ोतरी हो गई है।  केबिन क्रू और अन्य स्टाफ को भी राहत पायलटों के साथ-साथ केबिन क्रू और अन्य कर्मचारियों के लिए भी रिटायरमेंट की उम्र में बदलाव किया गया है। अब इनकी सेवा उम्र 58 साल से बढ़ाकर 60 साल कर दी गई है। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों को प्रभावित करेगा, जो लंबे समय से एयर इंडिया से जुड़े हुए हैं। फिलहाल एयर इंडिया के पास लगभग 24,000 कर्मचारी हैं, जिनमें करीब 3,600 पायलट और 9,500 केबिन क्रू शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, केबिन क्रू की सेवा उम्र को भी पायलटों के समान 65 वर्ष तक बढ़ाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।  DGCA से भी मिल गई हरी झंडी एयर इंडिया के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विल्सन ने बताया कि यह फैसला नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की स्वीकृति के बाद लिया गया है। DGCA ने 65 वर्ष तक के पायलटों को कमर्शियल उड़ानें संचालित करने की अनुमति दे दी है, जिससे एयर इंडिया को इस नीति पर आगे बढ़ने का अधिकारिक आधार मिल गया।   विस्तारा मर्जर बना बदलाव की वजह जानकारों के अनुसार, एयर इंडिया और विस्तारा के विलय के बाद कर्मचारियों के सेवा नियमों में अंतर सामने आया था। इस टकराव को खत्म करने और एक समान नीति लागू करने के लिए पायलटों की रिटायरमेंट उम्र में यह परिवर्तन जरूरी था। इससे कंपनी को पायलटों के अनुभव का लाभ लंबे समय तक मिलता रहेगा।  हादसे के बाद उठे सवाल हालांकि, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महज दो महीने पहले एयर इंडिया के एक विमान को गंभीर दुर्घटना का सामना करना पड़ा था। अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट टेक-ऑफ के कुछ मिनटों बाद ही हादसे का शिकार हो गई थी, जिसमें 265 यात्रियों की मौत हो गई। शुरुआती जांच में पायलट की गलती को कारण बताया गया था। ऐसे में पायलटों की उम्र सीमा बढ़ाने को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।

तालिबान-पाकिस्तान मुलाकात पर अमेरिकी ब्रेक, विदेश मंत्री को सीमा पर रोका

वाशिंगटन  अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचल बढ़ गई है। अमेरिका ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी  को पाकिस्तान जाने की अनुमति नहीं दी। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब तालिबान सरकार, पाकिस्तान और चीन के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि वाशिंगटन का यह रुख इसी रणनीतिक चिंता का नतीजा है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि मुत्ताकी का 4 अगस्त को इस्लामाबाद दौरा तय  था, ताकि काबुल और इस्लामाबाद के रिश्तों में सुधार लाने पर चर्चा हो सके। इससे पहले, चीन की मध्यस्थता से पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार  काबुल गए थे। उसी क्रम में मुत्ताकी को अगली बैठक के लिए पाकिस्तान आना था। डॉन अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, मुत्ताकी पर अब भी  अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध  लागू हैं और उन्हें विदेश यात्रा के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति से विशेष छूट लेनी होती है। इस बार अमेरिका ने कथित तौर पर इस छूट को मंजूरी देने से इनकार कर दिया और अंतिम समय तक फैसला टालते रहे। हाल के महीनों में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच कई बार सीमा पर गोलीबारी हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान,  तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देता है, जो खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी हमले करता है और फिर अफगानिस्तान भाग जाता है। तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता  शफकत अली खान ने अमेरिका की भूमिका की सीधी पुष्टि नहीं की, बल्कि कहा कि "कुछ प्रक्रियात्मक मुद्दों" पर काम चल रहा है और यात्रा की तारीख तय नहीं हुई है।वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा-"हम अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करते।"   

कश्मीर घाटी में पहली बार गूंजी मालगाड़ी की सीटी, रसद और विकास को मिले पंख

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर के परिवहन नेटवर्क को एक और बढ़ावा देते हुए, भारतीय रेलवे ने शनिवार को पंजाब के रूपनगर से कश्मीर के अनंतनाग तक पहली बार एक मालगाड़ी चलाई। सीमेंट से लदी यह मालगाड़ी शनिवार दोपहर करीब 12 बजे कश्मीर घाटी के अनंतनाग गुड्स शेड पहुँची, जो कश्मीर क्षेत्र को राष्ट्रीय मालगाड़ी नेटवर्क से जोड़ने में एक बड़ी उपलब्धि है। यह मालगाड़ी इस साल जून में 272 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL), या कश्मीर लाइन के पूरे हिस्से पर यात्री परिचालन के सफल शुभारंभ के दो महीने बाद आई है। इस मालगाड़ी संपर्क से देश भर के बाजारों तक पहुँच आसान होने से कश्मीरी फल और हस्तशिल्प उद्योग को नई जान मिलने की उम्मीद है। रेल मंत्रालय ने एक बयान में इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "कश्मीर घाटी में मालगाड़ी का आगमन रसद और आर्थिक विकास के एक नए युग की शुरुआत करता है।" मंत्रालय ने कहा, "(यह) केवल एक रसद उपलब्धि नहीं है, बल्कि प्रगति और एकीकरण का एक सशक्त प्रतीक है, जो एक अधिक संबद्ध और समृद्ध कश्मीर घाटी का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।" अधिकारियों ने बताया कि मालगाड़ी में बोगी से ढके वैगनों में 1,380 मीट्रिक टन सीमेंट भरा गया था, जिनका उपयोग बैग में बंद सामान ढोने के लिए किया जाता है। सीमेंट का ऑर्डर कश्मीर घाटी में सड़कों, पुलों, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे और आवासीय भवनों सहित विभिन्न निर्माण परियोजनाओं में शामिल निजी संस्थाओं द्वारा दिया गया था। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, "उद्घाटन मालगाड़ी में 21 बीसीएन वैगन सीमेंट भरा गया था। लगभग 600 किलोमीटर की यह यात्रा आज 18 घंटे से भी कम समय में नवनिर्मित अनंतनाग गुड्स शेड पर समाप्त हुई। यह आयोजन विशेष रूप से इस सुविधा के लिए पहली बार सीमेंट लदान का प्रतीक है, जो कश्मीर क्षेत्र में रसद और आर्थिक विकास के एक नए युग का समर्थन करने के लिए इसकी तत्परता को दर्शाता है।" हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया, "इस सीमेंट परिवहन के लिए गुरुवार रात करीब 11 बजे उत्तर रेलवे से अनुरोध किया गया था। इसके बाद रेक की व्यवस्था की गई और शुक्रवार शाम 6 बजे तक लोडिंग पूरी हो गई। ट्रेन शाम करीब 7 बजे पंजाब के रूपनगर स्थित जीएसीएल सुविधा केंद्र से रवाना हुई। मालगाड़ी को इलेक्ट्रिक WAG-9 इंजन से ढोया गया और शनिवार दोपहर करीब 12 बजे कश्मीर पहुँच गई।" अनंतनाग में मालगाड़ी का आना जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों के लिए अच्छी खबर है। इससे घाटी में आने वाले माल की परिवहन लागत कम होगी, साथ ही यह कश्मीर के फल उद्योग, खासकर चेरी, स्ट्रॉबेरी और सेब की कुछ किस्मों जैसे कम समय तक खराब होने वाले फलों के लिए, एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।   देश की दूसरी सबसे बड़ी फल मंडी, सोपोर फल मंडी के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक ने कहा, "इससे फल उत्पादकों को फायदा होगा क्योंकि इससे परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों कम हो जाएगी।" फिलहाल, दिल्ली तक फलों के एक डिब्बे की ढुलाई में 100 रुपये या उससे ज़्यादा का खर्च आता है। इस ट्रेन से हमें उम्मीद है कि यह घटकर 30 रुपये प्रति डिब्बा रह जाएगा। इसी तरह, हमें उम्मीद है कि परिवहन का समय भी 6 दिन से घटकर 30 घंटे रह जाएगा। हालांकि, मलिक ने कहा कि मालगाड़ी का लाभ फल उत्पादकों को तभी मिलेगा जब देश के विभिन्न फल मंडियों जैसे पश्चिम बंगाल, अहमदाबाद और पूर्वोत्तर के लिए सीधी ट्रेनें चलेंगी। यह मालगाड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 6 जून को यूएसबीआरएल के 63 किलोमीटर लंबे कटरा-सांगलदान खंड का उद्घाटन करने और श्रीनगर तथा कटरा के बीच विशेष रूप से डिज़ाइन की गई वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के दो महीने बाद कश्मीर आई है। इस परियोजना के पूरा होने के साथ ही कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली एक परियोजना पूरी हो गई है। 272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल तीन भागों में विभाजित है – 25 किलोमीटर उधमपुर-कटरा, 111 किलोमीटर कटरा-बनिहाल और 136 किलोमीटर बनिहाल-बारामूला लाइन। जम्मू में दो खंड उधमपुर-कटरा और कश्मीर में बनिहाल-बारामूला का निर्माण उत्तर रेलवे द्वारा किया गया था, जो भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा क्षेत्र है, और इसे तीन चरणों में चालू किया गया था – 2009 में 118 किलोमीटर काजीगुंड-बारामूला, 2013 में 18 किलोमीटर बनिहाल-काजीगुंड और 2014 में 25 किलोमीटर उधमपुर-कटरा।