samacharsecretary.com

शिवलिंग से जुड़ी मान्यताएं, इसलिए शिवलिंग घर में नहीं रखना चाहिए

शिव ने योग की शिक्षा, पहले चरण में अपनी पत्नी पार्वती को दी। दूसरे चरण में सप्त ऋषियों को दी। और उन सप्त ऋषियों ने पूरे संसार को यह ज्ञान दिया। जब हम ‘योग‘ कहते हैं तो सृजन के संपूर्ण विज्ञान की बात कर रहे हैं। ‘शिव‘ शब्द का अर्थ है ‘वह जो नहीं है‘ यानी ‘शून्य‘, और ‘सब कुछ‘ यानी पूरा ब्रह्मांड स्वयं ‘शून्य‘ से निकला है और वह फिर लौट कर ‘शून्य‘ में चला जाता है। यही जीवन का सत्य है। ‘बिग-बैंग‘ सिद्धान्त और आज के भौतिक विज्ञानी भी यही कह रहे हैं। हम जिसे ‘शून्य‘ कहते हैं, वही शिव है। ‘शिव‘ से हमारा मतलब एक और मूर्ति, एक और देवता को स्थापित करना नहीं है, जिससे हम अधिक समृद्धि, बेहतर चीजों की भीख मांग सकें। यहां आपकी बुद्धि कोई काम नहीं आएगी। इसका अनुभव करना होता है, न कि तर्क के आधार पर समझना। शिव बुद्धि और तर्क के परे हैं। तो शिव का यह ऊर्जा-स्वरूप आपके विसर्जन के लिए है, जिससे कि आप अपनी सर्वोच्च ऊंचाइयों तक पहुंच सकें। इसके लिए, आप जो अभी हैं, उसे विसर्जित होना होगा। आपके अहं, आपके इस ‘मैं‘ को नष्ट होना होगा। यह ऊर्जा भीख मांगने के लिए नहीं है, यह ऊर्जा, जीवन से थोड़ा और फायदा उठाने के लिए नहीं है। यह ऊर्जा, सिर्फ उन लोगों के लिए है जिनमें अपनी चेतना के शिखर तक पहुंचने की चाहत है। यह ईश्वर की सत्ता को महसूस करना है। अगर आप अस्तित्व की चरम सत्ता तक पहुंचना चाहते हैं, तो वहां आपको चरम संभावना की याचना के साथ जाना होगा। इसीलिए लोग कहते हैं कि शिव को अपने घर में मत रखो। लेकिन अगर आप सर्वोच्च प्राप्त करना चाहते हैं, तभी आप ऐसा करें।  

इन 3 चीज़ों में शर्म करना पड़ सकता है भारी, जानिए क्यों

आमतौर पर शर्म को महिलाओं का गहना कहा जाता है। लेकिन बिना वजह की शर्म, महिला हो या पुरुष, दोनों के लिए ही गुण बनने की जगह कई बार असफलता की वजह बन जाती है। जीवन में कई बार व्यक्ति सिर्फ संकोच में आकर कुछ ऐसी चीजों को करने में शर्म महसूस करता है, जो उसकी सफलता की राह को और अधिक दूर कर देती है। आज सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी कुछ बातों को लेकर शर्म महसूस करते हैं। ऐसे में चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र में मानव जीवन की सफलता के लिए कई बहुमूल्य सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया है कि पुरुषों और महिलाओं को किन 3 बातों के लिए बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। धन कमाने में आचार्य चाणक्य के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धन के लेन-देन में शर्म महसूस करता है, तो उसे धन की हानि हो सकती है। व्यक्ति को धन कमाने के लिए किसी भी छोटे-बड़े कार्य को करने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। आचार्य चाणक्य का मानना था कि धन से जुड़े मामलों में संकोच करने से व्यक्ति को नुकसान हो सकता है, जैसे कि उधार दिए हुए पैसे वापस मांगने में संकोच करना या धन उधार लेने में शर्म करना, दोनों ही सूरतों में व्यक्ति को नुकसान हो सकता है। याद रखें, एक अच्छे, आरामदायक और समृद्ध जीवन के लिए हर व्यक्ति को धन की आवश्यक पड़ती है। व्यक्ति की हर जरूरत सीधे तौर पर धन से जुड़ी हुई होती है। शिक्षा लेने में शिक्षा प्राप्त करने में भी व्यक्ति को कभी शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कुछ नया सीखने में संकोच करता है, तो वह हमेशा अज्ञानी ही रह जाएगा। इसलिए, कभी भी अपने गुरु से प्रश्न पूछने में संकोच न करें। किसी भी तरह का संदेह मन में उठते ही उसे तुरंत समझने के लिए प्रश्न पूछें। भोजन कई लोग सार्वजनिक रूप से भोजन करने में शर्म महसूस करते हैं। लेकिन भूख मिटाना व्यक्ति का अधिकार और एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। आपको जब भूख लगे तभी खाएं और अपने बगल में बैठे लोगों की चिंता न करें। याद रखें, यदि आप भोजन करने में शर्म महसूस करेंगे, तो आप भूखे रह सकते हैं।  

समृद्धि और शांति के लिए पितृपक्ष में लगाएं ये पौधे

पितृपक्ष के दौरान घर पर तुलसी का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से देवताओं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. पितृपक्ष में तुलसी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. साथ ही, 17 सितंबर को पड़ने वाली इंदिरा एकादशी पर भी तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है. केले का पौधा भी पितृपक्ष के दौरान घर में लगाना शुभ माना गया है. केला भगवान विष्णु का प्रिय भोग है और उन्हें अर्पित किया जाता है. पितृपक्ष में केले का पौधा लगाने से घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती. शमी का पौधा पितृपक्ष में घर पर लगाना बहुत शुभ माना जाता है. शमी का पेड़ पितरों और शनिदेव दोनों को प्रिय है. इस पौधे को लगाने से पितरों की कृपा बनी रहती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं. इसे घर के आंगन, छत या बालकनी में लगाना अच्छा माना जाता है. पीपल का पेड़ पितृपक्ष में विशेष महत्व रखता है. पीपल के पेड़ में देवताओं और पितरों का वास माना गया है. पितृपक्ष के दौरान घर से थोड़ी दूरी पर पीपल का पेड़ लगाना शुभ माना जाता है. साथ ही, पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत पुण्यकारी होता है. ध्यान रहे, घर के आंगन में पीपल का पेड़ लगाने से समस्याओं में वृद्धि हो सकती है, इसलिए इसे घर से दूर ही लगाना चाहिए. आम का पेड़ भी पितृपक्ष में घर लाना शुभ माना गया है. श्राद्ध कर्म में आम के पत्तों का विशेष महत्व है. आम का पेड़ सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.  

आज का राशिफल (17 सितंबर): जानिए आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा दिन – प्यार, पैसा और करियर

मेष राशि- आज धैर्य में कमी रहेगी, इसलिए आत्मसंयत रहना जरूरी है। पढ़ाई-लिखाई या कामकाज में छोटे-छोटे व्यवधान आ सकते हैं। लेकिन किसी मित्र के सहयोग से काम फैलाने और फायदा उठाने के मौके भी मिलेंगे। घर-परिवार का माहौल ठीक रहेगा, बस खर्चे थोड़े बढ़ सकते हैं। कुल मिलाकर मेष राशि वालों के लिए आज का दिन मिलाजुला रहने वाला है। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। धर्म-कर्म के प्रति रुचि बढ़ेगी। पिता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। माता का सहयोग और किसी पुराने मित्र से मदद मिल सकती है। धनलाभ के योग भी बन रहे हैं और नौकरी में बदलाव के अच्छे संकेत भी हैं। मिथुन राशि– मिथुन राशि वालों के लिए सामान्य दिन कहा जाएगा। भावनाओं को वश में रखें। आत्मविश्वास में कमी हो सकती है। क्रोध से बचें। घर-परिवार की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। किसी बड़े बुज़ुर्ग या कुटुंब से धनलाभ संभव है। रुके हुए पैसे की प्राप्ति हो सकती है और नौकरी में अफसरों का सहयोग भी मिलेगा। कर्क राशि- कर्क राशि वालों को मिलेजुले फल मिलेंगे। आत्मविश्वास में कमी रहेगी, लेकिन स्वादिष्ट खाने-पीने में रुचि बढ़ेगी। स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। परिवार में धार्मिक कार्य होंगे। किसी मित्र के सहयोग से संपत्ति या निवेश कर सकते हैं। खर्चें बढ़ सकते हैं, लेकिन साथ ही धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। सिंह राशि- सिंह राशि वालों को आज सावधान रहने की आवश्यकता है। मन में निराशा या असंतोष रह सकता है। पढ़ाई-लिखाई में भी मन लगाएं। आज खर्चों में वृद्धि हो सकती है। अफसरों से मतभेद भी हो सकते हैं, इसलिए संयम से चलें। आज निवेश न ही करें तो अच्छा रहेगा। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए शुभ दिन कहा जाएगा। आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। पढ़ाई-लिखाई में मन लगेगा। संपत्ति में वृद्धि होगी। जीवनसाथी का साथ रहेगा। नौकरी में बदलाव की संभावना है और किसी दूसरे स्थान पर जाना पड़ सकता है। भाइयों का सहयोग रहेगा। मेहनत का फल मिलेगा। तुला राशि- तुला राशि वालों को आज धन लाभ हो सकता है। व्यवसाय को बढ़ाने की योजनाएं पूरी होंगी। भाइयों का सहयोग मिलेगा। घर में मांगलिक कार्य होंगे। आज नया वाहन भी खरीद सकते हैं। इस समय निवेश करने से लाभ ही लाभ होगा। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के आत्मविश्वास में कमी आएगी। परिवार का साथ मिलेगा। धार्मिक यात्रा के योग हैं। खान-पान में सावधानी रखें। किसी पुराने मित्र के सहयोग से रोजगार या नया काम मिल सकता है। खर्च बढ़ेंगे, लेकिन उपहार स्वरूप वस्त्रादि मिलने के योग भी हैं। धनु राशि- धनु राशि वाले आत्मविश्वास से भरे रहेंगे लेकिन आलस्य भी बढ़ेगा। घर-परिवार की सुविधाओं में वृद्धि होगी। जीवनसाथी से मनमुटाव हो सकता है। कार्यक्षेत्र में बदलाव के संकेत हैं। माता का सहयोग मिलेगा और लाभ में वृद्धि संभव है। कुल मिलाकर ये समय आपके लिए शुभ रहेगा। मकर राशि- मकर राशि वालों को थोड़ा सर्तक रहने की आवश्यकता है। बातचीत में कठोरता आ सकती है, इसलिए संयम जरूरी है। कपड़ों व साज-सज्जा के प्रति रुचि बढ़ेगी। माता से मतभेद हो सकते हैं। धन हानि के योग भी बन रहे हैं। संचित धन में भी कमी हो सकती है। कुंभ राशि- कुंभ राशि वाले आज धैर्य से काम लें। वाद-विवाद से दूर रहें। किसी धार्मिक या सत्संग कार्यक्रम में जा सकते हैं। संपत्ति से आय बढ़ेगी, नौकरी में स्थान परिवर्तन और तरक्की के योग बन रहे हैं। आय में वृद्धि के साथ नई जिम्मेदारियां भी आ सकती हैं। कुल मिलाकर कुंभ राशि वालों के लिए दिन शुभ कहा जाएगा। बस थोड़ा सावधानी बरतें। मीन राशि- मीन राशि वालों का मन प्रसन्न रहेगा। क्रोध से बचें। माता से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। नौकरी में दूसरी जगह जाने के योग हैं। आय में वृद्धि होगी लेकिन रहन-सहन पर खर्चा बढ़ सकता है। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

उद्योग-धंधों की तरक्की के लिए विश्वकर्मा पूजा कैसे करें?

हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पकार और वास्तुकला, उद्योग-धंधों तथा तकनीक के देवता माना गया है. हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को विश्वकर्मा जयंती और विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया जाता है. इस दिन कारखानों, दुकानों, उद्योग-धंधों, ऑफिसों और मशीनों की विशेष पूजा की जाती है. मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से कारोबार में तरक्की, कार्यस्थल पर सुख-समृद्धि और मशीनों में कभी कोई खराबी नहीं आती. कौन हैं भगवान विश्वकर्मा? भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के पहले इंजीनियर और वास्तुकार के रूप में जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, उन्होंने देवताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र, महल और नगरों का निर्माण किया. महाभारत काल की द्वारका नगरी, लंका, इंद्रप्रस्थ, और भगवान शिव के त्रिशूल का निर्माण भी उन्होंने ही किया था. यही वजह है कि उन्हें निर्माण और रचना का देवता माना जाता है. विश्वकर्मा पूजा की शुभ तिथि और मुहूर्त     पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 16 सितंबर 2025, रात 09:41 बजे     पूर्णिमा तिथि समाप्त: 17 सितंबर 2025, शाम 07:12 बजे     पूजन का शुभ समय: 17 सितंबर को सुबह 07:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक सर्वश्रेष्ठ रहेगा. विश्वकर्मा पूजन विधि इस दिन सबसे पहले, सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. अपने कार्यस्थल, मशीनों, और औजारों को अच्छी तरह साफ करें. पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. साथ में भगवान विष्णु की मूर्ति भी स्थापित की जा सकती है. हाथ में जल लेकर संकल्प लें और गणेश जी की पूजा से आरंभ करें, क्योंकि हर शुभ कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है. अब भगवान विश्वकर्मा और भगवान विष्णु को रोली, चावल, फूल और प्रसाद चढ़ाएं. कलश पर स्वास्तिक बनाएं और उसे पूजा स्थल पर रखें. अपने औजारों और मशीनों पर रोली-चावल से तिलक लगाएं. धूप और दीपक जलाकर आरती करें. पूजा के बाद, प्रसाद को सभी में बांटें. विश्वकर्मा पूजा के दिन करें ये काम     पूजा के दिन मशीनों और औजारों का उपयोग न करें. उन्हें आराम दें.     इस दिन कार्यस्थल पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.     जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है.     विश्वकर्मा पूजा के दिन ‘ओम विश्वकर्मणे नमः’ मंत्र का जाप करना बहुत ही फलदायी होता है. विश्वकर्मा पूजा का महत्व विश्वकर्मा पूजा का पर्व सृष्टि के निर्माणकर्ता और वास्तु के देवता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है. इस दिन लोग अपने औजारों, मशीनों, और कार्यस्थल की पूजा करते हैं. यह पूजा न केवल भौतिक समृद्धि बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी लाती है. ऐसा माना जाता है कि जो लोग पूरी श्रद्धा से भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं, उनके व्यवसाय में कभी कोई रुकावट नहीं आती और हमेशा लाभ होता है.

इंदिरा एकादशी व्रत 2025: शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और खास नियम

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत बहुत महत्व रखता है. एकादशी का व्रत श्रीहरि विष्णु भगवान के लिए रखा जाता है. साल में कुल 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं. इस व्रत को करने से समस्त पापों का नाश होता है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है. एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है. साल 2025 में आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि यह व्रत पितृपक्ष के दौरान आता है. इंदिरा एकादशी के दिन उन लोगों का श्राद्ध कर्म किया जाता है जिनकी मृत्यु कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन हुई हो. इंदिरा एकादशी के दिन पूरी श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए व्रत करने से पितरों की कृपा के साथ-साथ भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही पितृ ऋण से मुक्ति भी मिलती है. इंदिरा एकादशी 2025 तिथि व समय     एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 सितंबर 2025, बुधवार, रात 12:21 बजे     एकादशी तिथि समाप्त: 17 सितंबर 2025, रात 11:39 बजे व्रत पारण     एकादशी व्रत का पारण 18 सितंबर, गुरुवार को सुबह 6:07 से 8:34 बजे के बीच कर सकते हैं.     व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अनिवार्य है. इस दिन द्वादशी तिथि रात 11:24 बजे समाप्त होगी. पूजन-विधि     इंदिरा एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें.     भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर धूप, फूल, तुलसीदल और पंचामृत से पूजा करें.     श्रीहरि को पीले वस्त्र और मौसमी फल अर्पित करें.     विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करें.     दिनभर उपवास रखते हुए पितरों का स्मरण करें.     शाम को कथा सुनें और भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें. पंचांग के अनुसार एकादशी का व्रत शुभ योगों में रखा जाएगा. इस दिन परिघ योग का निर्माण हो रहा है. साथ ही शिव योग का संयोग रहेगा. इस व्रत को करने से श्राद्ध कर्म के अनुसार पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

श्राद्ध पक्ष में विश्वकर्मा पूजा: नई गाड़ी खरीदना शुभ या अशुभ?

विश्वकर्मा पूजा हर साल 17 सितंबर को मनाई जाती है. यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान विश्वकर्मा के साथ ही पुराने वाहन, औजार, लोहा और मशीन आदि की पूजा करने की परंपरा है. विश्वकर्मा पूजा के दौरान नया वाहन, औजार, कंप्यूटर और सजावटी सामान की खरीदारी करना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भगवान विश्वकर्मा के औजारों और मशीनों के देवता होने का प्रतीक है. यह तिथि नया वाहन खरीदने के लिए बहुत शुभ मानी गई है. श्राद्ध पक्ष में विश्वकर्मा पूजा 2025 धार्मिक मान्यता के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा पर नई गाड़ी खरीदने से भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद मिलता है और वाहन की सुरक्षा व दीर्घायु सुनिश्चित होती है. हालांकि, इस बार 2025 में विश्वकर्मा पूजा पितृ पक्ष के दौरान पड़ रही है, इसलिए अगर आप किसी नई चीज की खरीदारी करने की सोच रहे हैं, तो आपको सावधानी बरतने की जरूरत है. इसकी वजह यह है कि पितृ पक्ष के दौरान किसी भी नई चीज की खरीदारी नहीं की जाती है, खासतौर पर लोहा, जमीन और वाहन. विश्वकर्मा पूजा पर नया वाहन खरीदें? बहुत से लोग नया वाहन खरीदने के लिए साल भर विश्वकर्मा पूजा के दिन का इंतजार करते हैं, क्योंकि यह दिन नया वाहन खरीदने के लिए बेहद शुभ माना जाता है. अब इस साल श्राद्ध पक्ष के दौरान विश्वकर्मा पूजा पड़ रही है, तो ऐसे में जितना हो सके इस बार विश्वकर्मा पूजा पर नया वाहन खरीदने से बचें. वाहन खरीदने से पहले करें यह काम अगर विश्वकर्मा पूजा के दिन ही कोई नया वाहन खरीदना ही हो तो सुबह स्नान कर अपने पितर के नाम से तर्पण और दान करने के बाद ही नया वाहन खरीदने के लिए जाएं. ऐसे में पितर नाराज नहीं होंगे और आप पर उनकी कृपा बनी रहेगी. अगर आपने विश्वकर्मा पूजा के दिन नया वाहन खरीदते समय इन बातों का ध्यान नहीं रखा, तो आपके पितृ नाराज हो सकते हैं, जिससे परिवार के ऊपर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

कल का दिन किसके लिए रहेगा शुभ? जानिए 16 सितंबर का राशिफल और हर राशि की चाल

मेष राशि- मेष राशि वालों का प्रेम जीवन अच्छा रहेगा। रिश्तों की खटास कम होगी। प्यार और भरोसा बढ़ेगा। करियर में प्रमोशन या अच्छे मौके मिल सकते हैं। पढ़ाई और बच्चों पर खर्च करना पड़ेगा। नई योजनाएं बनेंगी। निवेश करने के लिए दिन अच्छा । गाड़ी के रखरखाव पर भी पैसा जा सकता है। जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहेगा। आत्मविश्वास से काम करें। अफसरों का सहयोग मिलेगा। घर में खुशियां रहेंगी। गुस्सा और ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहें। नए लक्ष्यों के लिए मेहनत करें। अनावश्यक बहस से बचें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों को मिलेजुले फल मिलेंगे। व्यापार में फायदा होगा। आर्थिक स्थिति सुधरेगी लेकिन पैसों के फैसले सोच-समझकर लें। खर्च भी सोच-समझकर ही करें। बचत पर ध्यान दें। शादीशुदा जीवन की परेशानियां कम होंगी। जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करें। कर्क राशि- कर्क राशि के लोग आज सुखमय जीवन जिएंगे। प्रेम-संबंधों में मिठास आएगी। धन-संपत्ति में बढ़ोतरी होगी। निवेश सावधानी से करें और बेकार के खर्चों से बचें। नौकरी-कारोबार में माहौल अनुकूल रहेगा। करियर में प्रगति के योग हैं। सिंह राशि- सिह राशि वालो चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जिम्मेदारियां ध्यान से निभाएं। आज मन में कोई अनजाना डर हो सकता है। पॉजिटिव सोच के साथ मेहनत करेंगे तो सफलता मिलेगी। व्यापार बढ़ाने के कई मौके मिलेंगे। कन्या राशि- कन्या राशि वालों को प्रोफेशनल लाइफ में तरक्की के कई मौके मिलेंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। घर में शुभ काम हो सकता है। बोलचाल में मधुरता आएगी। आज के दिन खर्च सोच-समझकर ही करें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। तुला राशि- सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कई स्तोत्रों से धन आगमन होगा, लेकिन खर्च सोच-समझकर ही करें धन से जुड़े फैसले सावधानी से लें। पढ़ाई में अच्छे नतीजे मिलेंगे। जीवनसाथी से अनबन हो सकती है, बहस से बचें। परिजनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वृश्चिक राशि- पुराने साथी या एक्स से मुलाकात हो सकती है। हर काम में सफलता मिलेगी। कारोबार में आंख मूंदकर किसी पर भी भरोसा न करें। दोस्तों की मदद से दिक्कतें दूर होंगी। धन-लाभ हो सकता है। प्रोफेशनल लाइफ में थोड़े उतार-चढ़ाव रहेंगे लेकिन दोपहर के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी। धनु राशि- धनु राशि वालों के जीवन मे्ं प्यार और रोमांस बढ़ेगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। घर में खुशी का माहौल रहेगा। कामकाज में प्रगति होगी। आय के नए साधन मिलेंगे। क्रोध पर कंट्रोल रखें, जल्दबाजी न करें। सोच-समझकर खर्च करें और निवेश पर ध्यान दें। आज स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। मकर राशि- मेहनत करने से सफलता मिलेगी। लिखने-पढ़ने के काम से आय में वृद्धि होगी। नौकरी बदलने के योग बन सकते हैं। किसी दोस्त के सहयोग से नए फायदे मिलेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। संतान से शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। धार्मिक कार्यों में मन लगेगा। माता-पिता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के घर में खुशियां आएंगी। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। बाधाएं दूर होंगी। गुस्से और ऑफिस के विवादों से बचें। मेहनत से नई उपलब्धियां हासिल करेंगे। निवेश सोच-समझकर करें और जल्दबाजी में पैसा न खर्च करें। मीन राशि- मीन राशि वालों का दिन अच्छा रहेगा। मन खुश रहेगा। नए साधनों से धन लाभ होगा। धर्म-कर्म में व्यस्त रहेंगे। नई पहचान बनेगी। पुराने दोस्तों से मुलाकात होगी। मां के सहयोग से फायदे के मौके मिलेंगे। आलस्य से बचें और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें।

रिश्ते में दरार, कारण हैं हजार

कोई रिश्ता परफेक्ट नहीं होता। दोस्तों की बात अलग है। निकट के रिश्तों में दूरियां आते देर नहीं लगती। कैसे संभाले और ताउम्र बचा कर रखें ये रिश्ते। आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा, पहली मुलाकात में आपको अपनी सास, ननद या जेठानी बेहद खुले विचारों की और दोस्ताना लगी होंगी। पर जब आपने साथ रहना शुरू किया, तो छवि बदलते देर नहीं लगी। आपको लगता है कि रिश्ते में दूसरों का पलड़ा हमेशा भारी रहता है और आप हमेशा देने वाली मुद्रा में रहती हैं। अगर आप अपने अंदर झांकें और खुद से कुछ सवाल करें तो पाएंगी कि आप जिस रिश्ते में जितना देती हैं, बदले में आप उतना ही पाती हैं। कैसे संवारें अपने रिश्तों कोः कहते हैं, प्यार में कोई शर्त नहीं होती। इसका मतलब है, जो जैसा है, उसे उसी रूप में प्यार करना। लेकिन यही बात समय बीतने के साथ उसी रिश्ते में दरार का कारण बनती है। प्यार, देखभाल, विश्वास और सम्मान रिश्ते की जरूरत है। साथ ही साथ कुछ रिश्तों में समय भी देना पड़ता है। आप किसी के बारे में भी राय बनाने से पहले अपने आप को भी तौल लें। कई बार आप अपने जरूरत के हिसाब से भी रिश्ते बनाती हैं। नाजुक रिश्ते तभी मजबूत बनते हैं, जब आप दिल से उन्हें अपनाएंगी और उन्हें खुद को अपनाने देंगी। जब एक रिश्ते में सोच, विचार, आकांक्षा, मूल्यों तथा रहन-सहन में कोई सामंजस्य नहीं होता तो देर-सबेर परेशानी आनी तय है। आपको कुछ समय बाद पता चल जाएगा कि आप इस रिश्ते को जितना प्यार दे रही हैं, क्या आपको मिल रहा है? अपनी बात स्पष्ट रूप से रखना भी सीखें। अपनी किसी सहेली या घर वालों की राय लेने से पहले यह भी देख लें कि कहीं आप रिश्ते बनाने या तोड़ने में जल्दबाजी तो नहीं कर रहीं? विवाह सलाहकार डॉक्टर कुसुम शर्मा कहती हैं, ‘आज की तारीख में लगभग पचास प्रतिशत शादियों में टकराव की वजह परिवार होता है। कभी लड़के के परिवार वाले हावी हो जाते हैं, तो कभी लड़की के। पति-पत्नी के लिए जरूरी है कि वे दोनों परिवारों को अपने रिश्ते पर हावी होने ना दें। यह समझना जरूरी है कि कुछ रिश्तों को बनाने में वक्त लगता है।‘ दूसरे को सम्मान न देना कुछ महिलाओं और पुरुषों की यह सोच होती है कि यदि कोई हमसे प्यार करता है या हमारा जीवनसाथी है तो उसे हमारी हर बात माननी ही होगी। ऐसे लोग सारे निर्णय स्वयं लेना चाहते हैं और अपने साथी की बात व विचार को सम्मान नहीं देते हैं। इस स्थिति को भले ही कुछ समय के लिए नजरंदाज कर दिया जाए, पर ऐसे रिश्ते ताउम्र नहीं टिक पाते। कुछ समय बात बिखर जाते हैं। दूसरों पर यकीन करें: मां के घर में भी आपने अपने बहन-भाई, दादा-दादी और दूसरे रिश्तेदारों के साथ सामंजस्य बनाया ही होगा। बहनों की भी आपस में लड़ाइयां होती हैं और मनमुटाव भी। ऐसा ही मनमुटाव अगर सास या ननद से हो जाए, तो आप दिल पर क्यों ले लेती हैं? आप अपने किसी भी रिश्ते की तुलना एक-दूसरे से ना करें। सभी रिश्तों पर यकीन करें। आपका यकीन आपको धोखा नहीं देगा। रिश्तों की मजबूती के लिए वक्त चाहिए। आप अगर अपने आपको नहीं खोलेंगी, तो रिश्ते कभी आपके दिल को नहीं छू पाएंगे। खुलकर विचारों का आदान-प्रदान न करनाः किसी भी रिश्ते में विचारों का आदान-प्रदान व दूसरे के विचारों को सम्मान देना बेहद जरूरी होता है। जिन रिश्तों में संवाद की कमी होती है, उनमें अक्सर मतभेद, मनभेद में बदल जाते हैं, परिणामस्वरूप रिश्ता धीरे-धीरे टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। व्यवहार से जुड़ी परेशानी कोई भी इंसान ऐसे व्यक्ति के साथ वक्त बिताना नहीं पसंद करता जो जरूरत से ज्यादा गुस्से वाला हो या अत्यधिक शांत रहने वाला हो। ऐसे रिश्ते में विचारों, खुशियों व दुखों का आदान-प्रदान नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप साथी कुंठित महसूस करने लगता है। यह कुंठा कुछ समय बाद असहनीय हो जाती है और रिश्ता टूटने का कारण बन जाता है। खुशनुमा रिश्ते के लिए अपने साथी के साथ अपनी भावनाएं, अपने अनुभव, अपनी सोच जरूर साझा करें। रिश्ते में उदासीनता आना अक्सर शादी के कुछ सालों बाद हर रिश्ते में उदासीनता आने लगती है। प्पैसा, घर और गाड़ी पाने की दौड़ में आप रिश्तों की गर्माहट को भूलने लगती हैं। रिश्तों में एक किस्म की प्रतिद्वंद्विता घर करने लगती है। यह वक्त है रिश्तों की ओवर हॉलिंग का। उम्र के इस दौर में आपको भी अपनों का साथ चाहिए। देर नहीं हुई है। आप एक मैसेज करिए, फोन घुमाइए और उन सबको इकट्ठा कीजिए। पहले की तरह मनपसंद खाना और गप्पबाजी के साथ अपने आपको तरोताजा कीजिए। ये वो लोग हैं, जो आपके साथ चलते आए हैं और हमेशा चलेंगे।  

वरात्रि विशेष: नौ दिनों में मां दुर्गा को चढ़ाएं ये नौ भोग, दूर होंगी सारी बाधाएं

इस बार शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से शुरू होने जा रही है, जिसका समापन 1 अक्टूबर के दिन होगा. शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि नवरात्र के इन पावन नौ दिनों में भक्तजन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं . नवरात्र में पूजा-पाठ के साथ-साथ भोग का भी खास महत्व होता है. मान्यता है कि मां दुर्गा को उनके प्रिय भोग अर्पित करने से देवी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर सुख, समृद्धि, शांति और शक्ति की वर्षा करती हैं. हर दिन मां के एक अलग स्वरूप की पूजा की जाती है और हर देवी का प्रिय भोग भी अलग होता है. इसीलिए नवरात्र के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के स्वरूप के अनुसार भोग अर्पित करने की परंपरा है. आइए जानते हैं उन नौ दिव्य भोग के बारे में. शारदीय नवरात्र के नौ दिन और नौ अलग-अलग भोग  पहला दिन – मां शैलपुत्री इस दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है. इस दिन गाय के घी का भोग लगाने से मां दुर्गा की विशेष कृपा भक्तों पर होती है, ऐसी मान्यता है कि इससे  रोग और कष्ट दूर होते हैं. दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी इस दिन मां दुर्गा को मिश्री का भोग लगाने की परंपरा है, इससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है. तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा इस दिन मां दुर्गा मां चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है. इस दिन माता को खीर का भोग लगाने से मानसिक शांति और दुखों से मुक्ति मिलती है. चौथा दिन – मां कूष्मांडा इस दिन मां दुर्गा को मालपुए का प्रसाद चढ़ाने से  जीवन के सभी दुखों का नाश होता है.  पांचवां दिन – मां स्कंदमाता शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन मां को केले का भोग लगाना चाहिए. इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. छठा दिन – मां कात्यायनी इस दिन मां कात्यायनी को शहद का प्रसाद चढ़ाना चाहिए. इससे आकर्षण शक्ति बढ़ाती है और रिश्ते मधुर होते हैं. सातवां दिन – मां कालरात्रि इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजें अर्पित करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. आठवां दिन – मां महागौरी आठवां दिन दुर्गा मां के महागौरी रूप की पूजा होती है, इस दिन देवी को नारियल का भोग चढ़ाना चाहिए. इससे संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती है. नौवां दिन – मां सिद्धिदात्री नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को तिल का प्रसाद चढ़ाना चाहिए. इससे अचानक आने वाली विपत्तियों से सुरक्षा मिलती है.