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आंवला नवमी के दिन भूलकर भी न करें ये गलती, वरना चली जाएगी घर की लक्ष्मी

आंवला नवमी 2025 का दिन धर्म, स्वास्थ्य और समृद्धि का संगम है। इस दिन श्रद्धा से आंवले के वृक्ष की पूजा करने से जीवन में अक्षय पुण्य और ईश्वरीय आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। यह पर्व हर आयु वर्ग के लिए सरल और पवित्र साधना का अवसर है। जहां प्रकृति, भक्ति और स्वास्थ्य एक सूत्र में बंध जाते हैं। आंवला नवमी का दिन धन, आरोग्य और दीर्घायु का प्रतीक माना गया है। इस दिन आंवले के सेवन और पूजा से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है तथा पापों का क्षय होता है। यह दिन संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि और वैवाहिक सुख प्रदान करने वाला माना गया है। आंवला नवमी मुख्य लाभ विष्णु व शिव की कृपा से घर में धन और शांति बढ़ती है। रोग, दुर्भाग्य और दरिद्रता दूर होती है। वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थिरता आती है। व्यक्ति को मोक्ष और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आंवला नवमी व्रत विधि प्रातःकाल स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। आंवले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और जल से सिंचन करें। रोली, चावल, धूप, पुष्प, दीप, अक्षत और मिठाई से पूजा करें। भगवान विष्णु और भगवान शिव का ध्यान करते हुए आंवले की 7 परिक्रमा करें। परिवार सहित वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करें, इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। आंवला नवमी के विशेष उपाय आंवले के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और विष्णु-लक्ष्मी का ध्यान करें। जरूरतमंदों को आंवले, वस्त्र या मिठाई दान करें। ॐ नारायणाय नमः मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। यदि संभव हो तो आंवला वृक्ष लगाएं, यह अत्यंत शुभ होता है।

29 अक्टूबर का राशिफल: सिंह और तुला राशि के लिए शुभ संकेत, जानें सभी राशियों का भविष्यफल

मेष आज का दिन जिम्मेदारियों से भरा रहेगा, लेकिन मन में आत्मविश्वास रहेगा। कामकाज में सकारात्मक नतीजे मिलेंगे। जो लोग नौकरी बदलना चाहते हैं, उन्हें अच्छी खबर मिल सकती है। रिश्तों में सच्चाई और भरोसा बनाए रखें। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, लेकिन तनाव से दूरी रखें। परिवार के साथ वक्त बिताना मानसिक सुकून देगा। वृषभ दिन वित्तीय रूप से लाभदायक रहेगा। निवेश या किसी पुराने सौदे से फायदा हो सकता है। ऑफिस में सीनियर का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक माहौल खुशनुमा रहेगा। रिश्तों में पारदर्शिता बढ़ेगी। जो लोग कला, मीडिया या डिजाइन से जुड़े हैं, उनके लिए दिन रचनात्मकता से भरपूर रहेगा। शाम का समय मनोरंजन और खुशी लेकर आएगा। मिथुन काम में संतुलन रहेगा, लेकिन किसी सहयोगी के साथ गलतफहमी से बचें। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। प्रेम जीवन में समझ और संवेदनशीलता बढ़ेगी। हेल्थ में सुधार के संकेत हैं, पर नींद का ख्याल रखें। जो लोग स्टूडेंट हैं, उनके लिए पढ़ाई में फोकस बढ़ेगा। कर्क आज का दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। किसी अधूरे काम को पूरा करने का सही समय है। निजी जीवन में प्यार और अपनापन बढ़ेगा। परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर व्यस्तता बढ़ेगी, लेकिन सब संतुलित रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी। शाम का समय आत्ममंथन या ध्यान के लिए अच्छा है। सिंह आज काम के साथ-साथ रिश्तों पर भी ध्यान देना होगा। ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। बॉस या सीनियर आपकी मेहनत से प्रभावित होंगे। प्यार में किसी पुरानी गलतफहमी का अंत होगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। हेल्थ में पेट या डाइजेशन से जुड़ी तकलीफ आ सकती है, सतर्क रहें। कन्या दिन मेहनत और व्यस्तता से भरा रहेगा, लेकिन नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे। टीमवर्क से जुड़े कामों में सफलता मिलेगी। किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है जो मन को हल्का कर देगी। सेहत अच्छी रहेगी। आज जरूरत है खुद को थोड़ा वक्त देने की।संगीत, पढ़ाई या शांति में समय बिताना मानसिक आराम देगा। तुला सूर्य का प्रभाव आपको आत्मविश्वासी बनाए हुए है। आज किसी बड़े निर्णय का दिन है। बिजनेस या करियर से जुड़ी नई दिशा मिल सकती है। परिवार का सहयोग मिलेगा। प्रेम जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी। आर्थिक रूप से स्थिति मजबूत होगी। यात्रा के योग भी बन रहे हैं, जो लाभकारी साबित होंगे। वृश्चिक आज भावनाएं गहरी रहेंगी। किसी पुराने रिश्ते या याद से मन विचलित हो सकता है, लेकिन काम में ध्यान रखें। ऑफिस या बिजनेस में मेहनत का फल जल्द ही दिखाई देगा। सेहत ठीक रहेगी। दिन के दूसरे भाग में कोई अप्रत्याशित खुशखबरी मिल सकती है। धनु दोस्तों और सहकर्मियों से जुड़ाव मजबूत होगा। आज का दिन नेटवर्किंग और नए अवसरों का है। जो लोग मीडिया, पब्लिक रिलेशन या ट्रैवल से जुड़े हैं, उन्हें लाभ मिलेगा। प्रेम जीवन स्थिर रहेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। बस जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। मकर करियर में प्रगति के मजबूत संकेत हैं। बॉस से तारीफ मिल सकती है। मेहनत के बल पर नए अवसर बनेंगे। परिवार और काम के बीच संतुलन बनाए रखें। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन नींद की कमी असर डाल सकती है। रिश्तों में विश्वास बनाए रखें। कुंभ भाग्य का साथ मिलेगा। जो लोग विदेश या किसी बड़ी परीक्षा से जुड़े हैं, उन्हें सफलता के संकेत हैं। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। कोई पुराना विवाद खत्म हो सकता है। सेहत अच्छी रहेगी। ध्यान और मेडिटेशन करने से मन शांत रहेगा। मीन आज का दिन पॉजिटिव रहेगा। आर्थिक मामलों में लाभ होगा। रिश्तों में भावनाएं गहरी होंगी, पर अति संवेदनशीलता से बचें। सेहत को लेकर ध्यान रखें। खासकर खानपान में संतुलन जरूरी है। शाम का समय रिलैक्स करने वाला रहेगा।

सफलता और शुभ फल पाने के लिए सुबह करें ये शक्तिशाली मंत्रों का जाप

सुबह का समय दिन का सबसे पवित्र समय माना जाता है. कहा जाता है कि जिस व्यक्ति की दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और भगवान के स्मरण से होती है, उसके जीवन में खुशियां, शांति और सफलता बढ़ती हैं. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर सुबह मंत्रों का जाप करने से नकारात्मकता दूर रहती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. सुबह उठते ही जाप करने वाले विशेष मंत्र     ॐ सूर्याय नम: माना जाता है कि इस मंत्र के जाप से स्वास्थ्य में सुधार होता है और कामों में सफलता मिलती है.     ॐ नमः शिवाय: यह मंत्र मन को शांत करता है, तनाव कम करता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है.     ॐ गं गणपतये नमः विघ्नहर्ता गणेश जी का यह मंत्र हर कार्य में आने वाली रुकावटों को दूर करने में सहायक होता है.     गायत्री मंत्र सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है, बुद्धि और निर्णय शक्ति का विकास होता है.     हनुमान चालीसा के दोहे साहस, आत्मविश्वास और सुरक्षा का भाव बढ़ता है. क्यों है सुबह मंत्र जाप का महत्व?     सुबह का समय शांत और शुद्ध होता है, जिससे मंत्रों का प्रभाव अधिक होता है.     मन और शरीर दोनों ताजगी से भरे होते हैं.     यह दिनभर सकारात्मक सोच बनाए रखने में मदद करता है.     मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है. मंत्र जाप का सही तरीका सुबह स्नान या हाथ-मुँह धोकर किसी शांत स्थान पर बैठें. दीपक जलाकर भगवान का स्मरण करते हुए मंत्र का जाप करें. क्या सुबह मंत्र जाप करना जरूरी है? सुबह का समय पवित्र माना जाता है. इस समय मंत्र जाप करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है. कितने समय तक मंत्र जाप करना चाहिए? 5 से 10 मिनट भी पर्याप्त हैं. यदि समय हो तो अधिक कर सकते हैं. क्या स्नान से पहले मंत्र जाप कर सकते हैं? बेहतर है स्नान या कम से कम हाथ-मुँह धोकर जाप करें ताकि शरीर और मन दोनों शुद्ध रहें.  

142 दिन बाद श्रीहरि करेंगे जागरण, चातुर्मास का समापन और पैसों की बरकत कुछ राशियों के लिए

देवउठनी एकादशी इस बार 1 नवंबर, शनिवार को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना की जाती है. इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देवुत्थान एकादशी और देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी से सभी मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन की शुरुआत हो जाती है और चार महीने के चातुर्मास का समापन होता है. इस बार देवउठनी एकादशी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन एक खास योग बनने जा रहे हैं. दरअसल, इस दिन रवि योग और रुचक महापुरुष राजयोग का संयोग बनने जा रहा है. देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु लगभग 142 दिन बाद योगनिद्रा से जागेंगे, जिसके कारण कुछ राशियों पर श्रीहरि की कृपा बरसेगी. 1. मेष मेष राशि के जातकों के लिए आर्थिक तौर पर लाभदायक समय आ सकता है. अचानक पैसे मिलने की संभावना बनी हुई है. श्रीहरि की आशीर्वाद से कोई सुखद समाचार आपके जीवन में प्रवेश कर सकता है. खुशियों भरे नए दिन की शुरुआत होने वाली है. 2. कर्क कर्क राशि के जातकों के लिए व्यापार में प्रगति के संकेत मिल रहे हैं. कार्यस्थल पर साथियों का पूरा सहयोग मिलेगा. आर्थिक दृष्टि से यह समय बेहद अनुकूल रहेगा. आप किसी नए प्रोजेक्ट या काम की शुरुआत करने का साहस जुटा सकते हैं. साथ ही, भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा. 3. वृश्चिक देवउठनी एकादशी से वृश्चिक राशि के जातकों का भाग्य प्रबल होने लगेगा. करियर में तरक्की और सम्मान मिलने की संभावना है. निवेश के लिए यह समय शुभ साबित होगा. आर्थिक रूप से स्थिति पहले से अधिक स्थिर और सशक्त बनेगी.  4. कुंभ  कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय उपलब्धियों से भरा रहेगा. अधिकतर प्रयास सफल होंगे. समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगा. वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और प्रेम में वृद्धि होगी. विद्यार्थियों के लिए यह अवधि प्रगति और सफलता लेकर आने वाली है.

धन की कमी नहीं होगी! मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय

नई दिल्ली  दीपावली के महापर्व की श्रृंखला में लाभ पंचमी का दिन अत्यंत विशेष और शुभकारी माना जाता है। इसे सौभाग्य पंचमी, ज्ञान पंचमी या लाभ पंचम के नाम से भी जाना जाता है। लाभ का अर्थ है फायदा या लाभ और सौभाग्य का अर्थ है अच्छी किस्मत। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से व्यापारियों और व्यवसायियों के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस दिन दिवाली के बाद नए बहीखातों का श्रीगणेश किया जाता है और नए व्यावसायिक वर्ष की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किए गए पूजन से साल भर व्यापार में लाभ और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय और पूजा विधि लाभ पंचमी के दिन कुछ विशेष उपाय और सरल पूजा विधि अपनाकर आप मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त कर सकते हैं, जिससे धन का प्रवाह आपकी जेब में सदा बना रहे: यह सबसे महत्वपूर्ण और सरल उपाय है। इस दिन अपने घर या कार्यस्थल के मुख्य द्वार और नए बहीखातों पर रोली या कुमकुम से शुभ, लाभ लिखें और उनके मध्य में स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। शुभ मंगल का प्रतीक है, लाभ धन-वृद्धि का और स्वस्तिक सभी दिशाओं से सौभाग्य के आगमन का प्रतीक है। गणेश-लक्ष्मी का पूजन: लाभ पंचमी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी का एक साथ पूजन करना अत्यंत फलदायी होता है। प्रातःकाल स्नान के बाद, पूजा स्थल को स्वच्छ करें। भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और सिन्दूर अर्पित करें। इसके बाद, मां लक्ष्मी को लाल वस्त्र, कमल या गुलाब के फूल, इत्र और खीर का भोग लगाएं। इस दिन ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः या भगवान गणेश के मंत्र वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।| का कम से कम 108 बार जाप करें। बहीखातों की पूजा: व्यवसायी वर्ग के लिए यह दिन नए खातों की शुरुआत का होता है। नए बहीखातों या अपनी तिजोरी/कैश काउंटर की साफ-सफाई करें। पूजा के समय बहीखातों को भी पूजा स्थल पर रखें और उन पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इससे व्यापार में वृद्धि और लाभ के योग बनते हैं। दान और सेवा का महत्व: शास्त्रों में कहा गया है कि दान से बड़ा कोई लाभ नहीं है। इस शुभ दिन पर अपनी क्षमतानुसार गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान अवश्य करें। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय होता है और मां लक्ष्मी इससे शीघ्र प्रसन्न होती हैं, जिससे धन का प्रवाह हमेशा बना रहता है। घर और कार्यस्थल की शुद्धि: पूजा से पहले पूरे घर और कार्यस्थल को अच्छी तरह साफ करें। घर के कोने-कोने में गंगाजल का छिड़काव करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। शाम के समय घर और कार्यस्थल पर दीपक अवश्य जलाएं। तिजोरी या धन स्थान का उपाय: पूजा के बाद, एक लाल कपड़े में हल्दी की गांठ, एक सिक्का और थोड़े से अक्षत बांधकर अपनी तिजोरी, कैश बॉक्स या धन रखने के स्थान पर रखें। यह उपाय धन को आकर्षित करने और उसे स्थिर रखने में सहायक माना जाता है।  

आज का राशिफल 28 अक्टूबर 2025: सिंह और तुला राशि की किस्मत चमकेगी, जानें सभी राशियों का हाल

मेष राशि- आज का दिन नई ऊर्जा और आत्मविश्वास लेकर आएगा। कार्यस्थल पर आपकी परफॉर्मेंस दूसरों को प्रभावित करेगी। किसी पुराने अटके काम के पूरे होने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन खर्चों पर नज़र रखें। प्रेम संबंधों में ईमानदारी और स्पष्टता ज़रूरी रहेगी। परिवार के किसी सदस्य के साथ बातचीत दिल को सुकून देगी। सेहत के मामले में लापरवाही न करें। सही खानपान और नींद जरूरी है। वृषभ राशि- आज धन लाभ के संकेत हैं। निवेश या किसी बिजनेस डील में फायदा हो सकता है। काम के सिलसिले में दिन उपयोगी रहेगा और वरिष्ठ अधिकारियों से सहयोग मिलेगा। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। प्रेम संबंधों में पारदर्शिता बढ़ेगी। हेल्थ को लेकर थोड़ा ध्यान रखें, खासकर गले या पेट से जुड़ी समस्या परेशान कर सकती है। शाम का समय परिवार के साथ बिताना मन को शांति देगा। मिथुन राशि- आज दिमाग बेहद सक्रिय रहेगा। नई योजनाओं पर काम करने का सही समय है। जो लोग मीडिया, कम्युनिकेशन या लेखन से जुड़े हैं, उनके लिए दिन खास रहेगा। रिश्तों में ईमानदारी और संतुलन बनाए रखें। छोटी बातों पर प्रतिक्रिया न दें। आर्थिक रूप से दिन स्थिर रहेगा। शाम का समय अपने लोगों के साथ बिताना आपको भावनात्मक संतुलन देगा। कर्क राशि- सुबह का समय थोड़ा धीमा रहेगा, मन कुछ बेचैन रहेगा, लेकिन दोपहर के बाद हालात बदल जाएंगे। ऑफिस या कामकाज में किसी सहकर्मी से सहयोग मिलेगा। परिवार में किसी की सलाह काम आ सकती है। पुरानी यादें मन को इमोशनल बना सकती हैं, लेकिन खुद को वर्तमान पर केंद्रित रखें। सेहत में हल्की थकान रह सकती है। जल तत्व से जुड़े कामों या सफर से बचें। सिंह राशि- आज का दिन सफलता देने वाला रहेगा। आपकी लीडरशिप स्किल्स लोगों को प्रभावित करेंगी। नौकरी या व्यवसाय में तरक्की के संकेत हैं। प्रेम जीवन में रोमांस बढ़ेगा और पुराने मतभेद सुलझ सकते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी, लेकिन दिखावे में खर्च करने से बचें। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। कन्या राशि- दिन की शुरुआत सामान्य रहेगी, लेकिन दोपहर के बाद कामकाज में तेजी आएगी। ऑफिस में आपका प्रयास नोटिस किया जाएगा। बॉस या सीनियर की तरफ से तारीफ मिल सकती है। किसी पुराने दोस्त से संपर्क मन को हल्का करेगा। सेहत में सुधार होगा, लेकिन नींद पूरी न होने से थकान रह सकती है। किसी भी तरह के बड़े निर्णय में जल्दबाजी न करें। तुला राशि- सूर्य आपकी ही राशि में है, इसलिए आज आत्मविश्वास उच्च रहेगा। जो भी काम करेंगे, उसमें सफलता के संकेत हैं। लोगों से जुड़ने और नेटवर्क बढ़ाने के लिए दिन बेहतरीन है। प्रेम जीवन में नई शुरुआत संभव है। जो अविवाहित हैं, उनके लिए रिश्ता आने के योग हैं। आर्थिक रूप से दिन स्थिर रहेगा। सेहत अच्छी रहेगी, लेकिन ओवरथिंकिंग से बचें। वृश्चिक राशि- आज भावनात्मक रूप से गहराई महसूस करेंगे। किसी पुराने रिश्ते की याद या अधूरी बात मन में आएगी, पर खुद को उस भावनात्मक दौर में अटकने न दें। कामकाज में सोच-समझकर निर्णय लें। जो लोग नौकरी या कारोबार बदलने का विचार कर रहे हैं, उनके लिए समय अनुकूल है। आध्यात्मिकता और ध्यान से मन को शांति मिलेगी। शाम को कोई अच्छी खबर मिल सकती है। धनु राशि- दिन सामाजिक और व्यावसायिक दृष्टि से सक्रिय रहेगा। दोस्तों या टीम के साथ जुड़ाव मजबूत होगा। जो लोग ट्रैवल, मीडिया या शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। रिश्तों में संवाद और समझदारी बनाए रखें। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। लंबी दूरी की यात्रा का योग भी बन रहा है। मकर राशि- आज करियर में कोई बड़ा अवसर मिल सकता है। मेहनत का सही फल मिलने वाला है। सीनियर से तारीफ मिल सकती है या प्रमोशन की चर्चा हो सकती है। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य थोड़ा कमजोर रह सकता है, इसलिए आराम जरूर करें। दिन के अंत में मानसिक सुकून महसूस होगा। कुंभ राशि- भाग्य का साथ मिलेगा। जो लोग विदेश या उच्च शिक्षा से जुड़े काम कर रहे हैं, उनके लिए दिन लाभदायक है। किसी पुराने विवाद का समाधान मिल सकता है। रिश्तों में संतुलन बनाए रखें और जल्दबाज़ी में कोई बात न कहें। परिवार से जुड़ा कोई शुभ कार्य तय हो सकता है। यात्रा के योग भी बन रहे हैं। मीन राशि- आज इन्ट्यूशन स्ट्रॉन्ग रहेगी। किसी पुराने काम से लाभ मिलने की संभावना है। अटका हुआ पैसा वापस आ सकता है। प्रेम जीवन में स्पष्टता और सच्चाई बनाए रखें। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। सही दिनचर्या अपनाएं। शाम का समय शांति और आत्ममंथन के लिए शुभ है।

मैया की कृपा पाने के लिए जरूर गाएं ये आरती, छठ पूजा होगी सफल

देशभर में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का आज दूसरा दिन है. यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए समर्पित है. खासतौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के क्षेत्रों में इस पर्व का अत्यधिक महत्व है. यह पर्व चार दिनों तक चलता है और इसमें कठोर नियमों, व्रत और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है. छठ की नहाय-खाय से शुरुआत होती है. इस दिन व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं. दूसरे दिन खरना मनाया जाता है, जिसमें व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर, रोटी और केला का प्रसाद बनाकर व्रत खोलती हैं. तीसरे दिन यानी संध्या अर्घ्य के समय भक्त नदी, तालाब या जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं. चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ पर्व का समापन होता है, जब भक्त उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं. साथ ही पूजा के समय हर किसी को छठी मैया की आरती करनी चाहिए. छठी मैया की आरती जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए. मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए.. जय छठी मैया… ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदिति होई ना सहाय. ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए.. जय छठी मैया… मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए. ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय.. जय छठी मैया… अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडरराए. मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए.. जय छठी मैया… ऊ जे सुहनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय. शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए.. जय छठी मैया… मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए. ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय.. जय छठी मैया… ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए. मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए.. जय छठी मैया… ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय. सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए.. जय छठी मैया… मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए. ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय.. जय छठी मैया…

घर में तनाव और कलह की वजह बन सकती हैं बाथरूम की ये वस्तुएं

घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखना हर किसी की इच्छा होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के हर हिस्से की सही व्यवस्था जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। खासकर बाथरूम के बारे में कुछ चीजें हैं जिनका ध्यान रखना बेहद जरूरी है, वरना यह घर की सुख-शांति पर असर डाल सकती हैं। तो आइए जानते हैं घर में सुख-शांति और पॉजिटिव एनर्जी बनाएं रखने के लिए बाथरूम की कौन-कौन सी चीजों को तुरंत हटाना चाहिए। टूटे या दरार वाले फिटिंग्स वास्तु के अनुसार, टूटे हुए टॉयलेट सीट, फटी हुई टब या सीटींग्स बाथरूम में नहीं होनी चाहिए। ऐसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। इसलिए इन्हें बाथरूम से तुरंत हटा देना चाहिए। बाथरूम में अनावश्यक सामान वास्तु के अनुसार, बाथरूम में पुराने टब्स, खाली बोतलें और बेकार सामान जमा करना वास्तु दोष पैदा करता है। घर में पॉजिटिव एनर्जी को बनाएं रखने के लिए चीज़ों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें। बाथरूम में अंधेरा या खराब लाइट वास्तु शास्त्र के अनुसार, कम रोशनी वाला बाथरूम नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। इसलिए हमेशा पर्याप्त रोशनी और हवादार व्यवस्था रखनी चाहिए। टूटी या घिसे चप्पलें वास्तु के अनुसार, बाथरूम में कभी भी टूटी चप्पलें या घिसे हुए जूते नहीं रखने चाहिए। ऐसे जूते घर की शांति और सुख को प्रभावित कर सकती है। टूटा हुआ शीशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर या बाथरूम में कभी भी टूटा हुआ शीशा नहीं लगाना चाहिए। टूटे हुए शीशे से वास्तु दोष पैदा हो सकता है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।

बच्चों के संग ऐसे बना रहेगा प्यारा का गहरा रिश्ता

हम सभी ऐसा मानते हैं कि बच्चे अपने पैरेंट्स से, अपने घर से, बाहरी दुनिया से सीखते हैं। यह सौ फीसदी सच भी है। लेकिन हममें से कितने प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो अपने बच्चों से सीखते हैं, या उनके कहे अनुसार खुद को बदलने की कोशिश करते हैं। जिस दिन आपको ऐसा महसूस होगा कि सिर्फ आप ही अपने बच्चे को नहीं सिखा सकतीं, आपके बच्चे भी आपको सिखाने की ताकत रखते हैं। उस दिन से आप दोनों के बीच के रिश्ते एकदम सहज और सरल हो जाएंगे।   बच्चों को समझें बच्चे को भले ही हम बच्चा समझें, लेकिन यह हकीकत है कि वह जो कुछ भी बाहर की दुनिया से सीखता है, उसे अपने घर में भी आजमाना चाहता है। इस तरह से देखा जाए, तो एक बच्चा बाहरी दुनिया की तरह ही अपने घर में भी बदलाव लाना चाहता है। यही कारण है कि वह अपनी इच्छा से वह सारी अच्छी बातें अपने घर वालों को बताता है कि उसके साथ बाहर क्या हो रहा है, वह क्या नया सीख रहा है।   कई परिवारों में बच्चों की इन बातों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि कुछ परिवारों में उन्हें बेहद अहमियत दी जाती है। वे सभी परिवार बड़े खुश माने जाते हैं, जो अपने बच्चों के साथ बढ़ते तथा विकसित होते हैं। उनकी यही बातें उन्हें रोज बदलने वाली दुनिया और समाज में बड़ा बनाती हैं। उन्हें समाज की बदलती गति के साथ चलने की सीख देती हैं। अपने बच्चों को सावधानी से सुनने का, उनकी सोच और शब्दावली को समझने का माद्दा हम सब में होना चाहिए। जब ऐसा होगा, तभी हम बच्चों पर अपने विचार और सोच थोपने की बजाय उनके अनुसार सोचेंगे और उनके जीवन मूल्यों को भी तरजीह देंगे। निरंतर प्रक्रिया है सीखना अपने माता-पिता की उम्र तक आते-आते हम जीवन के कई सबक सीख चुके होते हैं। यह सबक हमें घर और बाहर दोनों ही वातावरण से मिलते हैं। जब हम किसी चीज को देखते हैं या जो अनुभव करते हैं, वो चीजें स्वाभाविक रूप से हमारे जेहन में बैठ जाती हैं। इस तरह हम सीखते जाते हैं। सीखने की हमारी प्रक्रिया सबसे ज्यादा माता-पिता, विशेषकर मां से जुड़ी होती है, क्योंकि उनके साथ हमारा ज्यादा समय गुजरता है। सीखने की यह प्रक्रिया पशुओं पर भी लागू होती है। लेकिन मनुष्य और पशु में जो सबसे बड़ा अंतर है वह यह कि मनुष्य अपने जीवन में आगे बढ़ने के बाद वापस पीछे मुड़कर देखते हैं और वापस आते हैं, अपने वृद्ध माता-पिता का हाथ पकड़ने के लिए। यह सब कुछ हम अपने पैरेंट्स से ही सीखते हैं। इस तरह देखा जाए तो सीखना एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसे हम जीवन के अलग-अलग चरणों में सीखते हैं। बच्चे भी सिखा सकते हैं हमें बच्चों का पालन-पोषण, शिक्षा, दूसरों से संवाद करने की उनकी योग्यता और उनके व्यक्तित्व पर पड़ने वाले बाहरी प्रभाव, यह सभी हमको उम्र बढ़ने के साथ-साथ सुधार की ओर ले आते हैं। उसे आगे बढ़ने में मदद करते हैं। इसी क्रम में एक समय ऐसा भी आता है, जब माता-पिता अपने बच्चे से सीखते हैं। अपने बच्चों के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं। अपने बच्चे से भावनात्मक रूप से ज्यादा जुड़ाव होने के कारण, एक मां पिता की बनिस्पत अपने बच्चे के ज्यादा नजदीक होती है। असल में पिता हमेशा बच्चे को अनुशासित रखने के लिए चिंतित रहते हैं। यही वजह है कि हम अपने इर्द-गिर्द ऐसी मांओं को देखते हैं, जो अपने बच्चों के साथ न केवल अच्छे से संवाद करती हैं, बल्कि उनके साथ कंप्यूटर, आईपैड, स्मार्टफोन जैसी नवीनतम टेक्नोलॉजी का यूज भी करती हैं और उसमें भी निपुण हो जाती हैं। इसके ठीक उलट, एक पिता को अपने बढ़ते बच्चों से संवाद करने में मुश्किल पेश आती है। समय के साथ बदलाव जरूरी वे पैरेंट्स, जो जमाने के साथ चलते हैं और समाज के बदलते चलन के साथ खुद में बदलाव करते हैं, अपनी जानकारी में इजाफा करते हैं, वे अपने बच्चों के साथ बेहतर रिश्तों को निभा पाने में सक्षम होते हैं। ऐसे पैरेंट्स जो इस नए समाज से अपने आपको अलग रखते हैं, वे अपना समय का सही उपयोग नहीं कर रहे होते हैं। जो समय के साथ अपने में बदलाव नहीं करते, अपने में कुछ जोड़ते या घटाते नहीं हैं, वे बच्चों के साथ अपने बेहतर रिश्ते नहीं बना पाते। वे बढ़ते बच्चों के साथ तकनीक, मीडिया, नई तकनीक के साथ नहीं चल पाते। उनके लिए बच्चों के साथ अपने सहज रिश्ते बना पाना मुश्किल होता है। अगर आप चाहती हैं कि आप अपने बच्चों के करीब रहें, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा अपना समय आपके साथ गुजारें, तो उनके कहे अनुसार खुद में थोड़ा बदलाव लाएं, जमाने के साथ चलें। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी रुचियों को हमेशा जिंदा रखें और गतिशील रहते हुए अपना जीवन गुजारें। अपने दोस्तों और अपनी हॉबीज के लिए समय निकालें। इससे आपको खुशी मिलेगी। बन जाएं बच्चों के दोस्त अपने बढ़ते बच्चों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने के लिए यह जरूरी है कि आप उनके समकक्ष खड़े होने की योग्यता अपने भीतर पैदा करें। उनके टीचर न बनें बल्कि उनके दोस्त बनें। उनकी बातों और कामों को गलत-सही की तराजू में तोलने की बजाय उनके प्रति सहानुभूति रखें। उनकी आलोचना करने की जगह उन्हें उत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहें। इस बात को समझें और स्वीकार करें कि आपका कर्तव्य था उन्हें सिखाना और उन्हें अनुशासित करना। जिसका खाका आपने पहले से तैयार कर रखा है। अब यह समय आ चुका है, जब आपको दुबारा अपने बचपन में लौटकर जाना होगा और खुद बच्चे बनकर अपने बच्चों का दोस्त बनना होगा और उनके साथ नए सिरे से अपना रिश्ता बनाना होगा। जब आपको इस बात का अहसास हो जाएगा कि आपके बड़े बच्चे आपको सिखा सकते हैं, सिखाने का यह काम सिर्फ आप ही नहीं कर सकते तो इसका अर्थ यह है कि अब आप दोनों के बीच बेहतर रिश्ते बन सकते हैं। बेहतर रिश्ते वही होते हैं, जहां परिवार द्वारा एक दूसरे के साथ हिस्सेदारी की जाती है। जहां पैरेंट्स अपने बड़े होते बच्चों का सम्मान करते हैं … Read more

देव दीपावली 2025: इस दिन करें विशेष पूजा, जानें सही समय और मंत्र

नई दिल्ली   कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। यह कार्तिक मास का अंतिम दिन होता है और इसे देव दीपावली तथा गुरु नानक जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवी-देवता धरती पर गंगा स्नान करने के लिए अवतरित होते हैं। कार्तिक मास का यह पवित्र महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे महीने में भक्त पूजा, व्रत और दानधर्म का पालन करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की भी पूजा होती है। देव दीपावली का महत्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा नदी के किनारे हजारों दीप जलाए जाते हैं और इसे देव दीपावली कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भक्तजन इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। साथ ही सत्यनारायण कथा का पाठ करने से मनोकामना पूरी होती है। देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा 2025 का मुहूर्त तिथि का आरंभ: 04 नवंबर 2025, रात 10:36 बजे तिथि का समापन: 05 नवंबर 2025, शाम 6:48 बजे गंगा स्नान मुहूर्त: सुबह 04:52 से 05:44 बजे तक पूजा मुहूर्त: सुबह 07:58 से 09:20 बजे तक इस समय में पूजा, स्नान और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।   कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि स्नान और शुद्धिकरण: सुबह गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करें। पूजा सामग्री: फूल, दीपक, धूप, फल, तिल, चावल, घी और ब्राह्मण को दान। सत्यनारायण कथा: इस दिन कथा का पाठ विशेष फलदायी होता है। दीपदान: गंगा या तालाब में दीपक जलाना अत्यंत शुभ है। व्रत का पारण: पूरे दिन व्रत रखने के बाद संध्याकाल में पारण करें। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन किए गए दान और पूजा का फल अत्यधिक मंगलकारी होता है। क्यों विशेष है कार्तिक पूर्णिमा यह दिन धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि लाता है। गंगा स्नान और दीपदान से पाप नष्ट होते हैं। भगवान विष्णु और शिव की पूजा से आध्यात्मिक उन्नति होती है। व्रत और कथा का पालन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। 5 नवंबर 2025 को मनाई जाने वाली कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और धर्म का प्रतीक है। गंगा स्नान, दीपदान और सत्यनारायण पूजा से न केवल पाप नष्ट होते हैं, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति आती है।