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वरात्रि विशेष: नौ दिनों में मां दुर्गा को चढ़ाएं ये नौ भोग, दूर होंगी सारी बाधाएं

इस बार शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से शुरू होने जा रही है, जिसका समापन 1 अक्टूबर के दिन होगा. शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि नवरात्र के इन पावन नौ दिनों में भक्तजन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं . नवरात्र में पूजा-पाठ के साथ-साथ भोग का भी खास महत्व होता है. मान्यता है कि मां दुर्गा को उनके प्रिय भोग अर्पित करने से देवी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर सुख, समृद्धि, शांति और शक्ति की वर्षा करती हैं. हर दिन मां के एक अलग स्वरूप की पूजा की जाती है और हर देवी का प्रिय भोग भी अलग होता है. इसीलिए नवरात्र के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के स्वरूप के अनुसार भोग अर्पित करने की परंपरा है. आइए जानते हैं उन नौ दिव्य भोग के बारे में. शारदीय नवरात्र के नौ दिन और नौ अलग-अलग भोग  पहला दिन – मां शैलपुत्री इस दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है. इस दिन गाय के घी का भोग लगाने से मां दुर्गा की विशेष कृपा भक्तों पर होती है, ऐसी मान्यता है कि इससे  रोग और कष्ट दूर होते हैं. दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी इस दिन मां दुर्गा को मिश्री का भोग लगाने की परंपरा है, इससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है. तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा इस दिन मां दुर्गा मां चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है. इस दिन माता को खीर का भोग लगाने से मानसिक शांति और दुखों से मुक्ति मिलती है. चौथा दिन – मां कूष्मांडा इस दिन मां दुर्गा को मालपुए का प्रसाद चढ़ाने से  जीवन के सभी दुखों का नाश होता है.  पांचवां दिन – मां स्कंदमाता शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन मां को केले का भोग लगाना चाहिए. इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. छठा दिन – मां कात्यायनी इस दिन मां कात्यायनी को शहद का प्रसाद चढ़ाना चाहिए. इससे आकर्षण शक्ति बढ़ाती है और रिश्ते मधुर होते हैं. सातवां दिन – मां कालरात्रि इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजें अर्पित करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. आठवां दिन – मां महागौरी आठवां दिन दुर्गा मां के महागौरी रूप की पूजा होती है, इस दिन देवी को नारियल का भोग चढ़ाना चाहिए. इससे संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती है. नौवां दिन – मां सिद्धिदात्री नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को तिल का प्रसाद चढ़ाना चाहिए. इससे अचानक आने वाली विपत्तियों से सुरक्षा मिलती है. 

सर्वविध कल्याणकारी है रुद्राक्ष-कवच

  शिवपुराण के अनुसार जब तारकासुर के पराक्रम से सभी देवगण त्रस्त हो गये तो वे भगवान रूद्र के पास अपनी दुर्दशा सुनाने तथा तारकासुर से त्राण पाने के लिये गये। भगवान शिव ने उनके दुख को दूर करने के लिये दिव्यास्त्र (अधारे अस्त्र) तैयार करने के लिये सोचा और इस दिव्यास्त्र को तैयार करने में उन्हें एक हजार वर्ष तक अपने नेत्रों को खुला रखना पड़ा। नेत्रों के खुल रहने के कारण जो अश्रु (आंसू) बूंद नीचे गिरे, वे ही पृथ्वी पर आकर रुद्राक्ष के रूप में उत्पन्न हो गये। यूं तो रुद्राक्ष नक्षत्रों के अनुसार सताइस मुखों वाला, कहीं-कहीं इक्कीस मुखों वाला तो कहीं पर सोलह मुखों तक का वर्णन मिलता है। परन्तु चैदहमुखी तक का ही रुद्राक्ष अत्यन्त मुश्किल से प्राप्त होता है। इन सभी रुद्राक्षों की मुख के आधार पर अलग-अलग विशेषताएं होती हैं। जिस प्रकार समस्त देवताओं में विष्णु नवग्रहों में सूर्य होते हैं, उसी प्रकार वह मनुष्य जो कंठ या शरीर पर रुद्राक्ष धारण किए होता है अथवा घर में रुद्राक्ष को पूजा-स्थल पर रखकर पूजन करता है, मानवों में श्रेष्ठ मानव होता है- देवानांच यथा विष्णु, ग्रहाणां च रविः। रुद्राक्षं यस्य कण्ठं वा, गेहे स्थितोपि वा।। दो मुख वाला रुद्राक्ष, छह मुख वाला रुद्राक्ष तथा सात मुख वाले रुद्राक्ष को एक साथ मोतियों के साथ जड़कर माला के रूप में पहनने से रुद्राक्ष कवच का रूप बन जाता है। यह कवच सभी अमंगल का नाश करता है तथा इच्छानुसार फल प्रदान करने वाला होता है। दो मुख (द्विमुखी) रुद्राक्ष शिवपार्वती का स्वरुप है। यह अर्ध्दनारीश्वर का प्रतीक है। इसको धारण करने से धन-धान्य, सुत आह्लाद आदि सभी वैभव प्राप्त हो जाते हैं। कुंवारी कन्या प्रभुत्व वाली पति प्राप्त करती है तथा बच्चों में अच्छा संस्कार आ जाता है। छह मुख (षड्मुखी) रुद्राक्ष को भगवान कार्तिकेय का स्वरूप माना जाता है। इसका संचालक शुक्र ग्रह है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से वैवाहिक समस्याएं, रोजगारपरक समस्याएं, भूत-प्रेतादिक समस्याएं त्वरित नष्ट हो जाती हैं। किसी भी प्रकार के अमंगल की संभावना नहीं रहती। सात मुख वाला (सप्तमुखी) रुद्राक्ष अनंगस्वरूप एवं अनंक के नाम से प्रसिध्द है। इस रुद्राक्ष का प्रतिनिधित्व शनिदेव करते हैं। इस रुद्राक्ष को धारण करने से शनिदेव की वक्रदृष्टि समाप्त हो जाती है तथा पारिवारिक कलह, दांपत्य जीवन में वैमनस्यता आदि दूर हो जाती है।  एक माला में द्विमुखी रुद्राक्ष, षड्मुखी रुद्राक्ष तथा सप्तमुखी रुद्राक्ष के एक-एक दाने के साथ ही बीच में मोती को गूंथ देने से रुद्राक्ष कवच का निर्माण हो जाता है। इस माला को स्त्री-पुरुष, युवक-युवती कोई भी इसका अभिषेक करके गले में धारण कर सकता है। जो व्यक्ति जिस किसी भी सात्विक भावना से इस रुद्राक्ष कवच को धारण करता है, उसकी कामना अवश्य ही पूरी होती है। किसी भी सोमवार को मोती जड़ित रुद्राक्ष कवच को अपने पूजा स्थल पर रखकर उसका दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल पंचामृत द्वारा अभिषेक कर दिया जाता है। अभिषेक करते समय अभिषेक करने वाले को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। माला का अभिषेक करके अभिषेककर्ता प्रार्थना की मुद्रा में  नमः शिवाय पञ्चाक्षरी मंत्र का एक सौ आठ बार जाप कर लें। अभिषेक करने से पहले भगवान शंकर का एवं कवच का धूप, दीप, पुष्पादि द्वारा षोडशोपचार विधि से पूजा कर लेना भी त्वरित फलदायी होता है। बिल्वपत्र चढ़ाने से भगवन शिव अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। पूरी विधि समाप्त हो जाने पर रुद्राक्ष कवच को गले में धारण कर लें। विद्येश्वर संहिता के अनुसार रुद्राक्ष कवच धारण करने वाले व्यक्ति की कोई भी ऐसी कामना नहीं होती जो पूरी न हो सके। आज के समय में छात्र-छात्रा, गृहिणी, व्यवसायी नौकरीपेशा आदि सभी के लिये यह कवच अत्यंत ही प्रभावशाली सिध्द हो सकता है। कन्या का विवाह, पुत्र की पढ़ाई, आर्थिक सम्पन्नता, निर्भयता आदि के लिए रुद्राक्ष कवच को अवश्य ही धारण किया जाना चाहिये।  

घर के पूजा स्थल में ये फूल कभी न रखें, हो सकती है बड़ी परेशानी

हमारे घरों में पूजा-पाठ की परंपरा बहुत पुरानी है और पूजा के दौरान फूलों का विशेष महत्व होता है। हर देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग प्रकार के फूल चढ़ाए जाते हैं, जिससे उनकी कृपा प्राप्त होती है। लेकिन कुछ फूल ऐसे होते हैं जिन्हें घर के मंदिर में भूलकर भी नहीं रखना चाहिए? ऐसा करने से न केवल पूजा का प्रभाव कम होता है, बल्कि जीवन में नकारात्मकता बढ़ सकती है। तो आइए जानते हैं कि मंदिर में कौन से फूलों को नहीं रखना चाहिए। बासी या मुरझाए हुए फूल मंदिर में केवल ताजे और सुगंधित फूल ही चढ़ाने चाहिए। बासी या मुरझाए फूल अशुद्ध माने जाते हैं और इन्हें भगवान को अर्पित करना अपशकुन माना जाता है। ऐसे फूल चढ़ाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास हो सकता है। प्लास्टिक के फूल कई लोग सजावट के लिए मंदिर में नकली फूल रखते हैं, लेकिन ये धार्मिक दृष्टिकोण से उचित नहीं माने जाते। पूजा में प्राकृतिक चीजों का उपयोग करना ही शुभ होता है। प्लास्टिक के फूलों में जीवन नहीं होता, इसलिए ये पूजा के लिए अनुपयुक्त माने जाते हैं। कनेर का फूल कनेर का फूल सुंदर होता है, लेकिन यह हर देवी-देवता को अर्पित नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा में इसे वर्जित माना गया है। मान्यता है कि यह फूल नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। अकौड़े का फूल अकौड़े का फूल शिवजी को अर्पित किया जाता है, लेकिन इसे हर रोज मंदिर में नहीं रखा जाना चाहिए। यह फूल बहुत तेज प्रभाव वाला होता है, और अगर सही समय या विधि से न चढ़ाया जाए, तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है।

राशिफल 15 सितंबर: मेष से मीन तक हर राशि का दिन कैसा बीतेगा, पढ़ें पूरी जानकारी

मेष- आज पूजा-पाठ और अच्छे कामों में मन लगेगा। पढ़ाई या विदेश से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। सेहत का ध्यान रखें। पैतृक संपत्ति से फायदा होगा। चुनौतियों को तुम आत्मविश्वास से संभाल लोगे। ऑफिस में आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। धन लाभ के योग भी बनेंगे। वृषभ- स्टूडेंट्स को सफलता मिलने के आसार हैं। नौकरी में प्रमोशन और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। जमीन–गाड़ी से फायदा हो सकता है। लेकिन भावुक होकर जल्दी-जल्दी फैसले न लें। धैर्य से काम करें। आज खर्चों पर भी नजर रखें। मिथुन – काफ़ी समय से रुके काम पूरे होंगे। पैसों की स्थिति सुधरेगी। दुश्मनों पर जीत और ऑफिस में प्रमोशन के योग हैं। घर-परिवार से सहयोग मिलेगा। वैवाहिक जीवन भी बेहतर रहेगा। आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। कर्क – व्यापार में अच्छे रिजल्ट्स मिलेंगे। कला-संगीत में रुचि बढ़ेगी, लेकिन मन किसी अज्ञात डर से परेशान रह सकता है। घर के मामलों को शांति से सुलझाएं। स्वास्थ्य में सुधार होगा। भाई-बहन की मदद करनी पड़ सकती है। सिंह – आज गुस्से पर नियंत्रण रखें। आपके रिश्ते सुधरेंगे। पढ़ाई में सफलता मिलेगी लेकिन खर्चे भी बढ़ सकते हैं। प्रोफेशनल लाइफ में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। आज काम के सिलसिले में बाहर जाना पड़ सकता है। कन्या – लव लाइफ अच्छी रहेगी। रिलेशनशिप की दिक्कतें कम होंगी। नौकरी तलाशने वालों को कॉल आ सकता है। कान, गले या नाक की तकलीफ से बचने के लिए सतर्क रहें। डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान दें। आज आर्थिक स्थिति भी सामान्य रहेगी। तुला – कामकाज में नई उपलब्धियां हासिल होंगी। वाणी में मिठास आएगी। बच्चों की सेहत का ध्यान रखें। घर-परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। पुराने दोस्तों से मुलाकात होगी। स्वास्थ्य में सुधार के योग हैं। आज आपकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी रहेगी। वृश्चिक – दिन सामान्य रहेगा। काम पर फोकस करें। ऑफिस में बेवजह के वाद-विवाद से दूर रहें। कुछ लोग जॉब स्विच कर सकते हैं। कुछ को प्रमोशन मिलेगा। हेल्दी खाना खाएं और जंक फूड से बचें। धनु – काम की जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। जीवनसाथी से हल्की अनबन हो सकती है, इसलिए भावनाओं और गुस्से पर काबू रखें। रहन-सहन और स्वास्थ्य पर ध्यान दें। कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव है लेकिन माहौल ठीक रहेगा। मकर – भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। आत्मविश्वास से लबरेज़ रहेंगे। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। अनियोजित खर्च भी बढ़ सकते हैं। नौकरी और कारोबार के लिए दिन अच्छा रहेगा। माता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। कुंभ – आर्थिक मामलों में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। नए निवेश के लिए शुभ समय, लेकिन जल्दबाज़ी न करें। रिस्क न लें। बजट देख कर ही फैसले करें। हेल्थ और लाइफस्टाइल में पॉजिटिव बदलाव शुरू करने का अच्छा दिन। मीन – काम की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास से करें। जिम्मेदारियों को सावधानी से संभालें। बड़े बदलावों के लिए तैयार रहें। पॉजिटिव माइंडसेट के साथ अपने सपनों पर काम करते रहें। व्यापारियों के लिए दिन अच्छा रहेगा।

विश्वकर्मा पूजा 2025: घर व ऑफिस में वास्तु के ये नियम ज़रूर अपनाएं

विश्वकर्मा पूजा सिर्फ़ औपचारिक पूजा नहीं है बल्कि घर, कार्यस्थल, कारख़ाना, दुकान और औज़ारों में सकारात्मक ऊर्जा व सफलता लाने का एक माध्यम मानी जाती है। इस दिन वास्तु नियमों का ध्यान रखने से पूजा का प्रभाव और भी बढ़ जाता है। ईशान कोण में पूजा, पूर्व या उत्तर मुखी स्थापना, औज़ार व मशीनों को शुद्ध कर स्वस्तिक बनाना, दीपक अग्नि कोण में रखना और उत्तर-पूर्व की स्वच्छता। ये विश्वकर्मा पूजा के प्रमुख वास्तु नियम हैं। आइए, विस्तार से जानें: पूजा का स्थान ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा): वास्तु में इसे सबसे शुभ और पवित्र दिशा माना गया है। यहीं पूजा करना श्रेष्ठ है। यदि घर या कार्यस्थल में यह संभव न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा का चयन करें। कभी भी पूजा दक्षिण-पश्चिम कोने में न करें, इससे कार्यक्षेत्र में रुकावटें आती हैं। मूर्ति / चित्र की स्थापना भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके रखें। पूजक को पश्चिम या दक्षिण की ओर मुख करके बैठना चाहिए। मूर्ति को ज़मीन पर सीधे न रखें, उसके नीचे लकड़ी या स्वच्छ चौकी हो। औजार और मशीनें मशीनें, औज़ार, वाहन, कंप्यूटर आदि को पहले अच्छे से साफ़ करें। इन्हें पूजा के समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। पूजा के बाद उन पर स्वस्तिक का चिह्न बनाकर रोली या हल्दी से तिलक करें। रंग और सजावट वास्तु के अनुसार पीला, लाल और हरा रंग शुभ ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। पूजा स्थल पर इनका प्रयोग करें। पूजा स्थान पर प्रकाश की व्यवस्था पूर्व और उत्तर दिशा में अधिक होनी चाहिए। दीपक और धूप दीपक को पूजा स्थल के दक्षिण-पूर्व कोने (अग्नि कोण) में रखें। धूपबत्ती या अगरबत्ती भी इसी कोने में जलाएं। बैठने की दिशा पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। यदि कई लोग एक साथ पूजा कर रहे हों तो सभी का मुख एक ही दिशा में रहे। स्वच्छता और शुद्धता पूजा से पहले घर/कारख़ाना विशेषकर उत्तर-पूर्व दिशा को अच्छे से साफ करें। गंदगी या अव्यवस्था वास्तु दोष बनाती है और पूजा का प्रभाव घटाती है।

जानिए सूर्य ग्रहण पर दान का महत्व: कौन सी वस्तुएं दान करने से बढ़ता है पुण्य

सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसका वैज्ञानिक महत्व तो है ही, लेकिन भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना भी माना जाता है. हिंदू धर्म में इसे एक अशुभ काल माना गया है, जिसमें नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. इसी वजह से इस दौरान शुभ कार्य और पूजा-पाठ वर्जित होते हैं. हालांकि, सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ ऐसे कार्य भी हैं, जिन्हें बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है. इनमें सबसे प्रमुख है दान करना. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण काल में किया गया दान सामान्य दिनों में किए गए दान से कई गुना अधिक पुण्य देता है. सूर्य ग्रहण के दिन दान का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में वातावरण में नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं. इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने और जीवन में सुख-शांति लाने के लिए दान का सहारा लिया जाता है. ऐसा माना जाता है कि दान करने से इन नकारात्मक ऊर्जाओं का शमन होता है और व्यक्ति पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है. पापों का नाश: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण काल में किए गए दान से पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. यह एक प्रकार का प्रायश्चित्त होता है, जिससे आत्मा की शुद्धि होती है. ग्रह दोषों से मुक्ति: कई बार व्यक्ति की कुंडली में सूर्य या चंद्र से संबंधित दोष होते हैं. ग्रहण के दौरान सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान करने से इन दोषों का निवारण होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है. आर्थिक समृद्धि: ऐसी मान्यता है कि ग्रहण काल में किया गया दान व्यक्ति को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाता है. दान करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती. पुण्य की प्राप्ति: धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि ग्रहण के दौरान किया गया दान हजारों यज्ञों और करोड़ों तीर्थ यात्राओं के बराबर पुण्य देता है. सूर्य ग्रहण के दिन किन चीजों का दान करना है शुभ? सूर्य ग्रहण के दिन विशेष रूप से उन वस्तुओं का दान करना चाहिए, जो सूर्य से संबंधित मानी जाती हैं. इन वस्तुओं का दान करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. गेहूं और गुड़: गेहूं और गुड़ दोनों ही सूर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं. इनका दान करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और नौकरी-व्यापार में तरक्की मिलती है. तांबे के बर्तन: तांबा सूर्य का धातु माना जाता है. तांबे के बर्तन या तांबे के सिक्के दान करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है. लाल वस्त्र: लाल रंग सूर्य का प्रिय रंग है. लाल वस्त्र, विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है. नारियल और बादाम: मान्यता है कि ग्रहण के बाद नारियल और बादाम दान करने से शनि और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से छुटकारा मिलता है. काले तिल और काले कंबल: ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण काल में तिल और काले कंबल का दान करना राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने में मदद करता है. यह दान विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जिनकी कुंडली में ये ग्रह कमजोर हैं. अन्न का दान: ग्रहण के बाद अनाज, जैसे चावल, दाल और अन्य खाद्य सामग्री का दान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है. यह दान गरीबों और भूखों की भूख शांत करता है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है. दान करने का सही समय और तरीका     ग्रहण समाप्त होने के बाद ही दान करना चाहिए.     दान की वस्तुएं साफ होनी चाहिए.     दान हमेशा जरूरतमंदों और गरीबों को ही करना चाहिए.     दान करते समय मन में किसी भी प्रकार का अहंकार नहीं होना चाहिए.  

सोने से पहले अपनाइए ये 5 आदतें, कामयाबी और धन आपके कदम चूमेंगे

जीवन में सफल होना हर कोई चाहता है। और हर कोई यह भी जानता है कि सफलता पानी है तो मेहनत से नहीं बचा जा सकता। लेकिन कई बार सिर्फ मेहनत करने से भी कुछ हाथ नहीं लगता। आप खुद भी अपने आस-पास कई लोगों को पाएंगे जो मेहनत तो खूब करते हैं लेकिन उन्हें सफल दूर-दूर तक नहीं कहा जा सकता। दरअसल जीवन में कुछ करना है तो प्रॉपर प्लानिंग की भी जरूरत होती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में इसी सफलता के सूत्र का जिक्र किया है। उन्होंने कुछ छोटी-छोटी आदतों के बारे में लिखा, जिन्हें आज भी यदि जीवन में उतार लिया जाए तो सफलता और धन दोनों आपके हिस्से आ सकते हैं। आचार्य की बताई इन बातों को रात में सोने से पहले फॉलो करें और अपने जीवन में पॉजिटिव बदलाव देखें। दिन कैसा गया, इसपर विचार करें आचार्य चाणक्य अपनी नीति में कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने कर्मों का हिसाब रखता है, वो जीवन में कभी असफल नहीं हो सकता। इसलिए रोजाना आपने दिन भर में क्या किया, इसका ब्यौरा आपके पास जरूर होना चाहिए। रात में जब भी सोने जाएं, तो कुछ देर जरूर सोचें कि आपका दिन कैसा रहा। क्या कुछ गलतियां आपने की, उनसे क्या सीखा और दिन को बेहतर बनाने के लिए आप क्या कर सकते थे। ऐसे आप आने वाले दिन की बेहतर प्लानिंग कर पाएंगे। अपने ज्ञान का विस्तार करें सोने से पहले कुछ देर अपना समय किताबों के साथ बिताएं। आधा घंटा या कम से कम बीस मिनट भी मिनट भी, कोई अच्छी किताब पढ़ें। कुछ ऐसा जो आपके ज्ञान में वृद्धि करे। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान सबसे बड़ा धन होता है। ऐसे में अगर सफल और धनवान बनना है तो ज्ञान के विस्तार की ओर ध्यान दें। अगले दिन की योजना बनाएं अगला दिन बेहतर और प्रोडक्टिव हो, इसके लिए पहले से ही प्रॉपर प्लानिंग करना जरूरी है। इसलिए रात में सोने से पहले ही एक मोटा-मोटा खाका अपने मन में तैयार कर लें कि आने वाला दिन आप कैसे बिताने वाले हैं। दिन के कुछ खास एजेंडा सेट करें। खासतौर से सुबह क्या करना है; पहले से ही डिसाइड कर लें। इस तरह आपका अगला दिन प्रोडक्टिव होगा और अपने गोल समय पर अचीव कर पाएंगे। अपने लक्ष्य के बारे में सोचें आजकल जिसे विजुलाइजेशन कहा जाता है, वो आचार्य चाणक्य ने सालों पहले अपनी नीति में बता दिया था। आचार्य कहते हैं कि व्यक्ति का मन हमेशा इसके लक्ष्य पर सधा हुआ होना चाहिए। जिसके आगे अपना लक्ष्य एकदम तय है, वो भविष्य में कभी भटकता नहीं और सफलता भी उसे जरूर मिलती है। इसलिए रात में सोने से पहले कुछ देर अपने लक्ष्य के बारे में सोचें। सोचकर देखें कि आपने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है तो उस वक्त आप कैसा महसूस करेंगे। ये बातें आपको और मेहनत के मोटिवेट करेंगे और आपके ब्रेन को भी सफलता के लिए रिप्रोग्राम करेंगी। सकारात्मक सोच से करें दिन समाप्त रात में सोते हुए कभी भी नेगेटिव विचार अपने मन में ना लाने दें। रात में जब आप कुछ नेगेटिव सोचते हैं, तो चीजें और भी ज्यादा नकारात्मक होने लगती हैं। इसलिए दिन की एंडिंग हमेशा हैप्पी रखें। सोने से पहले कुछ पॉजिटिव सोचें। आपकी लाइफ में जो भी कुछ अच्छा है, उसे याद करें और हर चीज के लिए शुक्रिया की भावना रखें। इस तरह आपको नींद भी अच्छी आएगी और जीवन को ले कर आपका नजरिया भी सकारात्मक होगा।  

आज का राशिफल (14 सितंबर): खास राशि वालों के लिए खुशखबरी, सफलता और संपत्ति के संकेत

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आप अपने करियर को लेकर नए से जोश और उत्साह का अनुभव करेंगे। हर कार्य में सफलता मिलेगी। निवेश करने के लिए समय शुभ है। आज के दिन आपको विभिन्न स्तोत्रों से धन लाभ भी हो सकता है। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को आज अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। रिलेशिनशिप में गलतफहमियां पैदा न होने दें। अपनी बातचीत में स्पष्ट और प्रत्यक्ष होने की कोशिश करें। प्रेमी की बातों को ध्यान से सुनें। पैसे कमाने के नए तरीकों खोजें। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के करियर में कुछ अनिश्चित बदलाव हो सकते हैं। जो आपके लिए कुछ रोमांचक और नए अवसर लेकर आ सकता है। इस समय आपको कुछ कठिन निर्णय लेने की आवश्यकता महसूस हो सकती है। अपने खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण रखें। कर्क राशि- कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा कहा जा सकता है। जीवन में चली आ रही परेशानियां दूर होंगी। आपको अपने काम के लिए पहचान मिल सकती है, जो आपके आत्मविश्वास को बढ़ा को बढ़ाने में मदद करेगा और आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा। सिंह राशि- सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन चुनौतियों से भरा रह सकता है। आपके ऊपर अधिक जिम्मेदारियां आ सकती हैं या आप एक नए करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इस समय खुद पर ध्यान केंद्रित करना और रहना बेहद महत्वपूर्ण है। जरूरत से अधिक जिम्मेदारियों का बोझ खुद पर न लें। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक योजना बनाएं। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के दिन अच्छा रहेगा। करियर में तरक्की के कई मौके मिलेंगे। दूसरों के साथ मिलकर काम करने से आप अधिक सफलता हासिल कर सकते हैं। अन्य लोगों के विचारों को स्वीकार करना सीखें और आवश्यकता पड़ने पर समझौता करने के लिए तैयार रहें। हालांकि, अपनी राय साझा करने में संकोच न करें। निवेश के लिए नए अवसर तलाश करने की कोशिश करें। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। तुला राशि- तुला राशि वाले आज अधिक मेहनत करेंगे। मेहनत का फल जरूर मिलेगा। आप अपने करियर को लेकर अधिक महत्वाकांक्षी महसूस कर सकते हैं। अपने लक्ष्यों का निर्धारण कर अपने प्रोफेशनल लाइफ को विकसित बनाने के लिए नए अवसरों का पीछा करें। आर्थिक रूप से दिन अच्छा रहेगा। वृश्चिक राशि- आपके लिए यह दिन बड़े बदलावों वाला हो सकता है। रिस्क ले सकते हैं। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साहसिक कदम उठाएं। काम पूरा करने की ओर ध्यान दें। आज निवेश के नए अवसर तलाशें और अपने वित्त में सुधार करने की कोशिश करें। जीवनसाथी का आज पूरा साथ मिलेगा। धनु राशि- आज का दिन धनु राशि वालों के लिए शुभ रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में सफलता मिलेगी। करियर को आगे बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे। वित्तीय रूप से, यह किसी भी ऋण का भुगतान करने या अपने क्रेडिट स्कोर में सुधार करने के लिए एक अच्छा समय हो सकता है। मकर राशि- मकर राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहेगा। करियर के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। कार्यस्थल पर आपको अतिरिक्त जिम्मेदारियां उठानी पड़ सकती हैं। कड़ी मेहनत का फल मिलेगा। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। इस समय निवेश न करें। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों को थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता होगी। कम्युनिकेशन स्किल्स का फायदा उठाएं। अपने विचारों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से व्यक्त करें। प्रेमी के साथ समय व्यतीत करें। व्यापार में भी सावधानी से फैसले लें। अपने प्रोफेशनल सर्किल का भी विस्तार करें। मीन राशि- आपके जीवन में बड़े बदलाव हो सकते हैं। यह दिन आपके लिए काफी रोमांचक हो सकता है। यह दिन नर्वस करने वाला भी हो सकता है। अपने खर्चों पर नजर रखें। आज स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। दापंत्य जीवन भी खुशियों से भरा रहेगा।

जानें सर्वपितृ अमावस्या पर वो वास्तु टिप्स जो दूर करेंगे सभी पितृ दोष

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। यह दिन उन सभी पूर्वजों को समर्पित होता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध सही तिथि पर नहीं हो सका। यह दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस दिन अगर कुछ विशेष वास्तु उपाय किए जाएं, तो न केवल पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, बल्कि घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति भी बनी रहती है।आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या 2025 पर किए जाने वाले 5 सरल वास्तु उपाय, जो पितृ दोष को दूर कर सकते हैं। तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और यह सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है। पितृ दोष से जुड़ी नकारात्मक शक्तियों को यह दूर करने में सहायक होती है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन सुबह स्नान कर तुलसी के पौधे के पास तिल के तेल का दीपक जलाएं और गायत्री मंत्र या पितरों का तर्पण मंत्र पढ़ें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है। दक्षिण दिशा की सफाई और पितरों की तस्वीर का ध्यान वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को पितृ दिशा कहा गया है। यह दिशा हमारे पूर्वजों से जुड़ी होती है। अगर यह दिशा गंदी या अव्यवस्थित हो, तो पितृ दोष उत्पन्न हो सकता है। इस दिन दक्षिण दिशा की विशेष सफाई करें और वहां पितरों की तस्वीर को साफ कर अगरबत्ती, दीप आदि लगाएं। तिल जल, फूल और अक्षत अर्पण कर श्रद्धा पूर्वक नमस्कार करें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। कौओं को भोजन कराएं कौवे को पितरों का प्रतिनिधि माना गया है। ऐसा माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर कौए को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है। चावल, घी, रोटी या पका हुआ भोजन कौओं को खिलाएं। इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार को मिलता है। भोजन में काले तिल मिलाना और पीपल के पत्ते पर परोसना अत्यंत शुभ माना जाता है। पीपल के वृक्ष की पूजा करें पीपल का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है और यह पितरों को प्रसन्न करने का एक सशक्त माध्यम है। इससे पितृ दोष शांत होता है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं, दीपक जलाएं और सात परिक्रमा करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या पितृ गायत्री मंत्र का जाप करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और पितरों की कृपा बनी रहती है।  ईशान कोण का रखें खास ध्यान इस दिन के बाद से ही नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। यदि आप अपनी इस दिशा को साफ़-सुथरा रखते हैं तो जल्द ही आपको वास्तु दोष से मुक्ति मिलती है। इतना ही नहीं साथ में पूर्वजों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।  

फालतू में मत फेंकें अपनी घड़ी, ये टिप्स कर देंगी समय सही!

नई दिल्ली काल यानी समय कभी नहीं रुकता है। जो समय के साथ चलता है, वही आगे बढ़ता है। जो ठहर जाता है वह खत्म हो जाता है। इसी समय को बताने के लिए हम घड़ी का इस्तेमाल करते हैं, जो हमेशा चलती रहनी चाहिए। मगर, यदि घड़ी बंद हो जाए, तो उसे घर से हटा देना चाहिए। दरअसल, यह निगेटिव एनर्जी पैदा करती है और इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां जीवन में आने लगती हैं। इसीलिए बंद घड़ी को घर से बाहर निकाल दिया जाता है। वास्तु के अनुसार, बंद घड़ी आपके लिए लगातार नुकसान और बुरे समय का कारण भी बन सकती है। करियर पर भी डालती है असर बंद घड़ी को घर में रखने से करियर, आर्थिक स्थिति और रिश्तों में बाधा आ सकती है। ज्योतिष में घड़ी को ग्रहों से जोड़ा जाता है। घड़ी के बंद होने का मतलब है कि समय के फ्लो यानी बहाव में रुकावट आ रही है। इसका असर आपकी तरक्की पर भी पड़ता है। लिहाजा, अगर आपके घर में भी कोई बंद घड़ी पड़ी है, तो अब समय है कि उसे घर से बाहर कर दिया जाए। मगर, इससे पहले आप एक उपाय कर सकते हैं, जो आपकी किस्मत के बंद ताले को खोल सकता है। बंद घड़ी से करें ये उपाय घर में पड़ी खराब घड़ी को घर से बाहर निकालने से पहले आप जिस भी परेशानी से जूझ रहे हैं, उसे एक कागज पर लिख लें। इसके बाद उस कागज के टुकड़े को घड़ी के साथ रखकर काले कपड़े से लपेट दें। इसके बाद इस घड़ी को घर से दूर किसी कचरा फेंकने की जगह पर फेंक आएं। इस उपाय को करते समय आपको यह ध्यान रखना है कि आपको पीछे पलटकर नहीं देखना है। बस इतना करने के बाद आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपके जीवन से वह समस्या दूर हो रही है।