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सेवा के रंग’ से गूंजा विकसित भारत का संकल्प: अरुण साव

‘सेवा के रंग’ से जन-जन तक पहुंचा रहे विकसित भारत का संकल्प : उप मुख्यमंत्री अरुण साव 'सेवा, स्वच्छता और नारी सशक्तिकरण के संदेशों को रंगोली में उकेर रहीं बेटियां' पौने दो क्विंटल सामग्री से बनी 'विकसित लोरमी, विकसित भारत' की भव्य रंगोली, आठ स्कूलों की बेटियों ने भी दिखाया हुनर ‘सेवा के रंग’ में दिखी विकसित भारत की झलक, जल संरक्षण से नारी सशक्तिकरण का दिया संदेश रायपुर.   उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज लोरमी के मानस मंच में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित विकासखंड स्तरीय ‘सेवा का रंग’ रंगोली का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कलाकारों और विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोलियों की सराहना की। साव ने छात्राओं से चर्चा कर उनकी बनाई रंगोलियों के विषय, उद्देश्य और संदेश की विस्तार से जानकारी ली। छात्राओं ने उन्हें बताया कि उन्होंने जल संरक्षण, विकसित भारत, नारी सशक्तिकरण, डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे विषयों को रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उप मुख्यमंत्री ने छात्राओं की रचनात्मकता और उत्साह की प्रशंसा की। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि रंगोली के माध्यम से सेवा के भाव और विकसित भारत की कल्पना को सुंदर तरीके से अभिव्यक्त किया गया है। कोटा के रंगोली कलाकार रवि पैकरा ने करीब पौने दो क्विंटल सामग्री से विकसित भारत की भव्य रंगोली तैयार की है। यह रंगोली विकसित भारत के संकल्प को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम में आठ विद्यालयों की बेटियों ने अलग-अलग विषयों पर रंगोलियां बनाईं। जल संरक्षण से लेकर डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत और नारी सशक्तीकरण तक सेवा के विभिन्न रंगों को रंगोली के माध्यम से जीवंत किया गया।  साव ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य विकसित भारत की कल्पना को जन-जन तक पहुंचाना है। हर व्यक्ति विकसित भारत क्या है और इसके निर्माण में उसकी भूमिका क्या है, इससे जुड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा भाव और जनकल्याण के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

सरकारी स्कूलों में 6,812 शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, तीन परीक्षाओं की तारीख घोषित

शासकीय शालाओं में 6,812 शिक्षकीय पदों पर भर्ती की तैयारी शुरू, तीन परीक्षाओं की तिथियां घोषित सरकारी स्कूलों में 5,000 नियमित पद और स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1,812 संविदा पद भरे जाएंगे रायपुर  छत्तीसगढ़ के शासकीय और स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में कुल 6,812 शिक्षकीय पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। लोक शिक्षण संचालनालय से प्राप्त जानकारी अनुसार, शासकीय विद्यालयों में 5 हजार नियमित पदों पर सीधी भर्ती परीक्षा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से आयोजित की जाएगी।नियमित भर्ती में सहायक शिक्षक के 2,292, सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के 200, शिक्षक के 1,654 और व्याख्याता के 854 पद शामिल हैं। इनमें ई संवर्ग के 2,227 और टी संवर्ग के 2,773 पद हैं। घोषित कार्यक्रम के अनुसार सहायक शिक्षक की लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर 2026, को आयोजित होगी इसी प्रकार शिक्षक की 25 अक्टूबर 2026 को और व्याख्याता की 29 नवंबर 2026 को होगी। सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के पदों की परीक्षा तिथि अभी निर्धारित नहीं की गई है। सहायक शिक्षक और शिक्षक पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि व्याख्याता पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी । स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1,812 संविदा (शैक्षणिक) पदों पर पहली बार केंद्रीय कृत कंप्यूटर आधारित भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी। इन पदों की भर्ती अधिसूचना सितंबर माह में जारी की जा रही है और ऑनलाइन आवेदन अक्टूबर माह से शुरू करने की तैयारी है।उल्लेखनीय है कि शासकीय एवं उत्कृष्ट विद्यालयों में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से 6812 पदों की भर्तियाँ की जा रही हैं ।

गांवों के विकास की कार्ययोजना में ग्रामीणों की होगी भागीदारी, 2 अक्टूबर से शुरू होगी प्रक्रिया

2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में तैयार होगी विकसित ग्राम पंचायत योजना ग्रामीणों की भागीदारी से तय होगी गांवों के विकास की दिशा गांव की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर बनेगी विकास की कार्ययोजना  अक्टूबर-नवंबर में बस्ती और वार्ड स्तर पर होगा ग्रामीणों से सीधा संवाद रायपुर,   प्रदेश के गांवों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए 2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं के माध्यम से विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। इस पहल के अंतर्गत ग्रामीण स्वयं अपने गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को तय करने में भागीदारी निभाएंगे। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों, स्थानीय संसाधनों और विकास संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर ग्राम पंचायतों की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी।       विकसित ग्राम पंचायत योजना को वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की योजना तैयार करने का प्रमुख माध्यम बनाया गया है। इसके तहत गांवों में उपलब्ध संसाधनों, मौजूदा परिसंपत्तियों और विकास संबंधी कमियों का आकलन कर ग्रामीणों की सहभागिता से आवश्यक कार्यों की पहचान की जाएगी। ग्राम सभा से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद योजनाओं को विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकित किया जाएगा। 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में होगी योजना निर्माण की शुरुआत       प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। इस अवसर पर ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से संबंधित आधारभूत आंकड़ों, मानचित्रों, अनुमेय कार्यों और योजना निर्माण की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।       ग्राम सभाओं में गांव की विकास संबंधी कमियों, जल बजट और ई-जल पोर्टल से प्राप्त अनुशंसित कार्यों की जानकारी भी साझा की जाएगी। इसके साथ ही गांवों में मौजूद ऐसी परिसंपत्तियों की पहचान की जाएगी, जो भौतिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन अभी तक डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं।       ग्राम सभा में बस्ती, वार्ड और ग्राम स्तर पर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन तथा सामुदायिक परामर्श की प्रक्रिया और समय-सीमा भी निर्धारित की जाएगी, ताकि योजना निर्माण में अधिक से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। अक्टूबर-नवंबर में गांव-गांव पहुंचकर लिए जाएंगे ग्रामीणों के सुझाव      विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने के लिए सितंबर माह में प्रारंभिक तैयारियां पूरी की जाएंगी। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण देने के साथ ही युक्तधारा पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न मानचित्र परतों के आधार पर ग्राम पंचायतों का आधारभूत डेटा तैयार किया जाएगा। इसके बाद अक्टूबर और नवंबर माह में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित कर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इन बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों से गांव की समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।       इस दौरान गांवों में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी किया जाएगा। डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं होने वाली परिसंपत्तियों को युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर विकास संबंधी कमियों की पहचान कर प्रस्तावित कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर चिह्नित किया जाएगा। दिसंबर में ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत होगी विकास योजना      दिसंबर माह में भूमि एवं क्षेत्र परिचय के आधार पर तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजना का प्रारूप ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें प्रस्तावित विकास कार्यों, उनके संभावित स्थानों और संबंधित विवरण की जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी। ग्राम सभा में व्यक्तिगत लाभार्थियों से संबंधित प्रस्तावित कार्यों पर भी चर्चा की जाएगी। ग्रामीणों के सुझावों और आवश्यक विचार-विमर्श के आधार पर योजना में संशोधन कर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा द्वारा औपचारिक प्रस्ताव पारित कर विकसित ग्राम पंचायत योजना को अनुमोदित किया जाएगा। ग्राम सभा से अनुमोदित योजना को डिजिटल समेकन की आगामी प्रक्रिया के लिए विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा। 15 जनवरी तक विकासखंड और जिला स्तर पर होगा योजनाओं का समेकन        ग्राम पंचायतों से अनुमोदित योजनाएं प्राप्त होने के बाद 15 जनवरी तक विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विकासखंड स्तर पर विभिन्न ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को एकीकृत करते हुए संबंधित क्रियान्वयन एजेंसियों और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से जुड़ी जानकारी शामिल की जाएगी। इसके बाद विकासखंड स्तर पर तैयार समेकित योजनाओं को जिला स्तर पर एकीकृत किया जाएगा। इस प्रक्रिया से ग्राम पंचायतों की स्थानीय आवश्यकताओं को विकासखंड और जिला स्तर की विकास कार्ययोजनाओं से जोड़ने में सहायता मिलेगी। जल सुरक्षा, आजीविका और ग्रामीण अधोसंरचना पर विशेष ध्यान        विकसित ग्राम पंचायत योजना के अंतर्गत गांवों की आवश्यकताओं के अनुरूप जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से संबंधित अधोसंरचना और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा। योजना निर्माण के दौरान गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों के सुझावों के आधार पर ऐसे कार्यों की पहचान की जाएगी, जिनसे स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके और गांवों के विकास को गति मिल सके। ग्राम सभा की सहमति से तय होंगे विकास कार्य        विकसित ग्राम पंचायत योजना की संपूर्ण प्रक्रिया में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीणों की राय और स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर प्रस्तावित विकास कार्यों में आवश्यकतानुसार नए कार्य शामिल किए जा सकेंगे तथा अनुपयुक्त कार्यों को हटाया जा सकेगा। प्रत्येक प्रस्तावित कार्य का स्थल सत्यापन करने के साथ ही समुदाय के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद कार्यों को अंतिम अनुमोदन के लिए ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।       इस पहल का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को ग्रामीणों की वास्तविक आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार करना है। ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी से योजना निर्माण की प्रक्रिया को अधिक सहभागी एवं पारदर्शी बनाने के साथ ही गांवों के समग्र और सतत विकास को नई दिशा मिलेगी।

महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव एवं गुण्डाधूर सम्मान के लिए आवेदन 30 सितम्बर तक

महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव एवं गुण्डाधूर सम्मान के लिए आवेदन 30 सितम्बर तक उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मान स्वरूप मिलेंगे 1 लाख नगद रायपुर. राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रदान किए जाने वाले महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव सम्मान एवं गुण्डाधूर सम्मान के लिए खिलाड़ियों से अनुशंसाएं आमंत्रित की गई हैं। इच्छुक पात्र खिलाड़ी निर्धारित प्रारूप में 30 सितम्बर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल खेल एवं युवा कल्याण विभाग की वेबसाइट http//sportsyw.cg.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किए गए आवेदन ही मान्य होंगे। निर्धारित प्रारूप एवं नियमों की जानकारी खेल विभाग के जिला स्तरीय कार्यालयों से भी प्राप्त की जा सकती है।        महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव सम्मान विशेष रूप से तीरंदाजी खेल के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को दिया जाएगा। यह सम्मान वर्ष 2025-26 में तीरंदाजी की राष्ट्रीय चैंपियनशिप (सीनियर वर्ग) अथवा राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से भाग लेते हुए स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले अथवा अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के लिए है। सम्मान के अंतर्गत 1 लाख रुपए नगद, अलंकरण फलक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर सम्मिलित रूप से विचार किया जाएगा।        इसी प्रकार गुण्डाधूर सम्मान राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों या एक दल को प्रदान किया जाएगा। इसके अंतर्गत ऐसे खिलाड़ी पात्र होंगे, जिन्होंने वर्ष 2025-26 में ऐसे खेलों में, जिन्हें भारत सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर के खेल अलंकरण के लिए विचार क्षेत्र में लिया जाता है, सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय चौंपियनशिप या राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से भाग लेते हुए स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त किया हो, या अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया हो। सम्मान के अंतर्गत 1 लाख रुपए नगद, अलंकरण फलक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

श्रमिकों के लिए ई-केवायसी शिविर, छात्राओं को करियर एवं साइबर सुरक्षा का मार्गदर्शन, सेवा सेतु शिविरों में समस्याओं का समाधान

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत दुर्ग में जनसेवा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता की अनूठी पहल प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जनसेवा से राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों के सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के माध्यम से जनकल्याण, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान के तहत दुर्ग जिले में श्रमिकों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने, नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने, युवाओं को करियर मार्गदर्शन देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष पहल की जा रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत दुर्ग में जनसेवा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता की अनूठी पहल श्रमिकों के ई-केवायसी और पंजीयन संबंधी त्रुटियों के सुधार के लिए विशेष शिविर श्रम विभाग द्वारा दुर्ग जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में पंजीकृत निर्माण और असंगठित श्रमिकों की सुविधा के लिए विशेष ई-केवायसी शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में सीएससी वीएलई के माध्यम से श्रमिक पंजीयन कार्ड में आधार कार्ड के अनुसार नाम, जन्मतिथि और पते सहित अन्य विवरणों की त्रुटियों का सुधार किया जा रहा है।  सेवा संकल्प अभियान के तहत दुर्ग में जनसेवा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता की अनूठी पहल कृष्ण कुंज में 76 पौधों का रोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश  दुर्ग जिले के रिसाली सेक्टर स्थित कृष्ण कुंज, वार्ड क्रमांक 09 में ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के तहत 76 पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में दुर्ग ग्रामीण विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष  ललित चंद्राकर सहित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने सहभागिता की।  चंद्राकर ने कहा कि वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की नींव हैं। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने पौधों के संरक्षण का संकल्प भी लिया। छात्राओं को करियर मार्गदर्शन के साथ साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासकीय डॉ. वामन वासुदेव पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में करियर काउंसलिंग एवं साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को उच्च शिक्षा के बाद उपलब्ध करियर विकल्पों, ऑनलाइन धोखाधड़ी, सोशल मीडिया सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।  दुर्ग ग्रामीण विधायक  ललित चंद्राकर ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीकी युग में सही मार्गदर्शन और साइबर जागरूकता युवाओं को सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर भविष्य की ओर आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। कार्यक्रम में डीएसपी  भारती मरकाम, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रंजना वास्तव, साइबर क्राइम ऑफिसर  संकल्प राय सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। सेवा सेतु शिविरों में नागरिकों की समस्याओं का हो रहा त्वरित निराकरण सेवा संकल्प अभियान के तहत नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा 23 सितंबर से 8 अक्टूबर तक ‘समस्या का समाधान आपके द्वार’ के उद्देश्य से सेवा सेतु शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुवार को तिलक कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला, शिक्षक नगर और तुलाराम कन्या विद्यालय, आर्य नगर में आयोजित शिविरों में 10 वार्डों के नागरिकों को शासकीय सेवाओं एवं समस्याओं के निराकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। शिविर के दूसरे दिन कुल 16 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें सफाई संबंधी शिकायतों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि अन्य आवेदनों पर संबंधित विभागों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए।  महापौर  अलका बाघमार ने दोनों शिविरों का निरीक्षण कर नागरिकों से प्राप्त आवेदनों की जानकारी ली और अधिकारियों को पात्र प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 26 सितंबर को सिकोला भाठा और कुशाभाऊ ठाकरे विद्यालय में लगेंगे शिविर अभियान के अगले चरण में 26 सितंबर को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिकोला भाठा एवं कुशाभाऊ ठाकरे विद्यालय में सेवा सेतु शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें सिकोला भाठा, सिकोला बस्ती, औद्योगिक नगर, कैलाश नगर, शहीद भगत सिंह नगर, तितुरडीह, स्टेशन पारा, आमदी मंदिर और कातुलबोर्ड सहित संबंधित वार्डों के नागरिक अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।

100 से अधिक विद्यार्थियों का रक्त समूह परीक्षण, 13 यूनिट रक्तदान कर युवाओं ने दिया मानव सेवा का संदेश

रायपुर गौरेला पेंड्रा मरवाही  जिले में सेवा संकल्प अभियान एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्थापना दिवस के अवसर पर डॉ. भंवर सिंह पोर्ते शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पेंड्रा में यूथ रेडक्रॉस सोसायटी के तत्वावधान में रक्त समूह परीक्षण एवं रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। शिविर में महाविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शिविर के दौरान 100 से अधिक प्रतिभागियों का रक्त समूह परीक्षण किया गया। वहीं पात्र एवं इच्छुक विद्यार्थियों और अन्य सहभागियों ने 13 यूनिट रक्तदान किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को रक्तदान के महत्व, जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता तथा मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम.पी. रोहिणी ने शिविर के सफल आयोजन के लिए यूथ रेडक्रॉस सोसायटी, राष्ट्रीय सेवा योजना और सभी सहभागी छात्र-छात्राओं, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में सेवा, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं। शिविर के आयोजन में जिला अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रशांत रात्रे एवं जिला ब्लड बैंक का विशेष सहयोग रहा।

प्रोजेक्ट्स की दीर्घकालिक उपयोगिता तय होगी, बेहतर इस्तेमाल और राजस्व सृजन पर फोकस

रायपुर बिलासपुर में स्मार्ट सिटी के तहत तैयार परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी। हर प्रोजेक्ट के लिए एसओपी तैयार कर उसके बेहतर और दीर्घकालिक उपयोग का खाका तैयार किया जाएगा। नागरिकों के लिए इन परियोजनाओं का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ राजस्व सृजन की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। जहां जरूरत होगी, वहां पीपीपी (PPP) मॉडल पर भी काम किया जाएगा।  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में आज हुई बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 20वीं बैठक में विभिन्न विषयों पर मंथन किया गया। बोरा ने स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं को प्रभावी तरीके से संचालित करने के साथ ही उनके बेहतर उपयोग और दीर्घकालिक स्थायित्व पर जोर दिया। उन्होंने संचालन एवं रखरखाव के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार करने और निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजनाओं के बेहतर उपयोग की संभावनाएं तलाशने के साथ राजस्व सृजन पर भी काम करने को कहा। उन्होंने आवश्यकतानुसार पीपीपी मॉडल की संभावनाओं पर भी आगे बढ़ने के निर्देश दिए। बैठक में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बिलासपुर में चल रहे विकास कार्यों और परियोजनाओं की प्रगति से लेकर उनके भविष्य में संचालन जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन हुआ। नागरिक सुविधाओं के विस्तार और नगरीय अधोसंरचना को बेहतर बनाने से जुड़े विषय भी बोर्ड के सामने रखे गए। परियोजनाओं के संचालन, रखरखाव और भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। प्रमुख विषय बोरा ने परियोजनाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से अधिक लोगों को जोड़ने तथा अधिकारियों-कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण और कार्य अनुभव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। परियोजनाओं में कौन क्या जिम्मेदारी निभाएगा, इसे भी स्पष्ट रखने की बात कही गई। बैठक में एजुकेशन हब में अकादमिक ब्लॉक के निर्माण के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। उपलब्ध बीएससीएल (BSCL) निधि से प्रस्तावित कार्य को संस्थागत स्थायित्व और बेहतर उपयोग की दृष्टि से आगे बढ़ाने पर विचार किया गया। इनके साथ ही जल संबंधी कार्यों को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। मंत्रालय से वर्चुअली आयोजित बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के साथ संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर तथा सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल शामिल हुए। वहीं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध संचालक भीम सिंह कंवर, चिप्स (CHiPS) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल, भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रतिनिधि सुजीत कुमार, बिलासपुर के कलेक्टर संजय अग्रवाल, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक रजनीश सिंह, बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध संचालक प्रकाश कुमार सर्वे और संचालक मंडल के अन्य सदस्य एवं अधिकारी बैठक में ऑनलाइन जुड़े।

‘सेवा, स्वच्छता और नारी सशक्तिकरण के संदेशों को रंगोली में उकेर रहीं बेटियां’

रायपुर सेवा के रंग’ से जन-जन तक पहुंचा रहे विकसित भारत का संकल्प : उप मुख्यमंत्री  अरुण साव उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने आज लोरमी के मानस मंच में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित विकासखंड स्तरीय ‘सेवा का रंग’ रंगोली का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कलाकारों और विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोलियों की सराहना की।  साव ने छात्राओं से चर्चा कर उनकी बनाई रंगोलियों के विषय, उद्देश्य और संदेश की विस्तार से जानकारी ली। छात्राओं ने उन्हें बताया कि उन्होंने जल संरक्षण, विकसित भारत, नारी सशक्तिकरण, डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे विषयों को रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उप मुख्यमंत्री ने छात्राओं की रचनात्मकता और उत्साह की प्रशंसा की। उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि रंगोली के माध्यम से सेवा के भाव और विकसित भारत की कल्पना को सुंदर तरीके से अभिव्यक्त किया गया है। कोटा के रंगोली कलाकार  रवि पैकरा ने करीब पौने दो क्विंटल सामग्री से विकसित भारत की भव्य रंगोली तैयार की है। यह रंगोली विकसित भारत के संकल्प को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम में आठ विद्यालयों की बेटियों ने अलग-अलग विषयों पर रंगोलियां बनाईं। जल संरक्षण से लेकर डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत और नारी सशक्तीकरण तक सेवा के विभिन्न रंगों को रंगोली के माध्यम से जीवंत किया गया।   साव ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य विकसित भारत की कल्पना को जन-जन तक पहुंचाना है। हर व्यक्ति विकसित भारत क्या है और इसके निर्माण में उसकी भूमिका क्या है, इससे जुड़े। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सेवा भाव और जनकल्याण के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।  

लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन के अतिथियों ने ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और हाट-बाजार का लिया अनुभव

रायपुर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ग्रामीण जीवनशैली, लोक संस्कृति और आत्मीय आतिथ्य अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है। पर्यटन के बदलते स्वरूप में अब पर्यटक केवल बड़े शहरों और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे गांवों की मिट्टी की खुशबू, स्थानीय खान-पान, परंपराओं, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव करने में भी रुचि ले रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन से पहुंचे पर्यटकों का प्रवास इसी बदलती पर्यटन तस्वीर की जीवंत मिसाल है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल ब्रिटेन से आए  फ्रैंक रोजर मार्सटन और मती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन का लमना गांव पहुंचने पर ग्रामीणो ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ तिलक लगाकर तथा ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच स्वागत किया। विदेशी अतिथियों ने भी ग्रामीणों के इस आत्मीय स्वागत का आनंद लिया और स्थानीय लोगों के साथ सहजता से घुल-मिलकर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को करीब से महसूस किया। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल लमना विलेज स्टे में अतिथियों का  अनुभव केवल ठहरने तक सीमित नहीं रहा। उन्हें गांव की गलियों, खेत-खलिहानों, पारंपरिक परिवेश और स्थानीय जीवन से परिचित कराने के लिए ‘विलेज वॉक’ कराया गया। इस दौरान अतिथियों ने ग्रामीणों से संवाद किया, स्थानीय जीवनशैली को समझा और गांव के सहज वातावरण का आनंद लिया।  अतिथियों ने ग्रामीण परिवारों, बच्चों, महिलाओं और स्थानीय लोगों के साथ आत्मीय संवाद भी किया।  विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल ग्रामीण हाट बना खास आकर्षण लमना प्रवास के दौरान स्थानीय ग्रामीण हाट का भ्रमण विदेशी मेहमानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। हाट में उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों से बातचीत की तथा मिट्टी के बर्तन, बांस से बने सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, स्थानीय खाद्य सामग्री, सब्जियों और अन्य ग्रामीण उत्पादों को करीब से देखा। ग्रामीण बाजार की चहल-पहल, स्थानीय उत्पादों की विविधता और लोगों के सहज व्यवहार ने अतिथियों को भारतीय गांव के वास्तविक जीवन का अनुभव कराया।   ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ने का अनुभव लमना विलेज स्टे की खासियत यह है कि यहां पर्यटक केवल किसी स्थान को देखने नहीं आते, बल्कि स्थानीय जीवन का हिस्सा बनकर उसे महसूस करते हैं। ब्रिटिश अतिथियों ने ग्रामीण परिवेश में समय बिताया, स्थानीय लोगों के साथ बैठकर बातचीत की और पारंपरिक ग्रामीण वातावरण को नजदीक से जाना। गांव की सादगी, प्राकृतिक परिवेश और लोगों की सहज आत्मीयता ने उनके प्रवास को एक अलग तरह का अनुभव दिया। छत्तीसगढ़ के पर्यटन पहचान में जुड़ रहा नया अध्याय छत्तीसगढ़ में पर्यटन अब प्रकृति और दर्शनीय स्थलों से आगे बढ़कर अनुभव आधारित पर्यटन की ओर विस्तार कर रहा है। छत्तीसगढ़ में प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, होमस्टे और इको-टूरिज्म को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। इससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को जोड़ने वाले पर्यटन मॉडल को महत्व मिल रहा है।  प्रकृति, संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य का संगम है लमना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में मैकल पर्वत श्रृंखला, जंगल, जलप्रपात, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक पर्यटन की विविध संभावनाएं मौजूद हैं। शिवघाट मनौरा, जलेश्वर धाम, लक्ष्मणधारा, झोजा जलप्रपात और धनपुर सहित अनेक प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थल शामिल हैं।  लमना विलेज स्टे जैसे ग्रामीण पर्यटन केंद्र पर्यटकों को  प्रकृति और स्थानीय जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर से लमना तक—छत्तीसगढ़ में अनुभव आधारित पर्यटन की बढ़ती तस्वीर पर्यटक अब केवल पर्यटन स्थलों के दर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय जीवन, खान-पान, हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और समुदाय के साथ जुड़ने वाले अनुभवों को भी महत्व दे रहे हैं। होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं।  लमना में ब्रिटेन के पर्यटकों का अनुभव इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। यहां विदेशी मेहमानों ने किसी पर्यटन स्थल को दूर से देखने के बजाय गांव के बीच जाकर लोगों से मुलाकात की, ग्रामीण हाट में स्थानीय गतिविधियों को समझा और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन की सहजता को महसूस किया। विदेशी मेहमानों के लिए यादगार बना छत्तीसगढ़ का अपनापन लमना प्रवास के दौरान  फ्रैंक रोजर मार्सटन और मती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन ग्रामीणों के साथ तस्वीरें खिंचवाते, बच्चों से बातचीत करते और स्थानीय परिवारों के साथ समय बिताते नजर आए।  वे ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ आत्मीयता से मिले ।  विदेशी पर्यटकों का गांवों तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाएं अब नए क्षेत्रों और नए अनुभवों तक विस्तार पा रही हैं। ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय परिवारों, छोटे व्यवसायों, हस्तशिल्पकारों, ग्रामीण बाजारों, स्थानीय गाइडों और होमस्टे संचालकों के लिए आय एवं रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।  लमना में ब्रिटेन के मेहमानों की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के उस पर्यटन मॉडल की खूबसूरत झलक है, जहां प्रकृति के साथ संस्कृति, गांव के साथ आतिथ्य और पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है। छत्तीसगढ़ की यही सहज, आत्मीय और जीवंत पहचान देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

सुकमा वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के संकेत, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील

रायपुर सुकमा वनमंडल के सुकमा वन परिक्षेत्र में मवेशी के मारे जाने के बाद बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा पशु चिकित्सकों की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके से बाघ के संभावित पगमार्क मिले हैं। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने क्षेत्र में बाघ की संभावित आवाजाही की निगरानी तेज कर दी है। डीएफओ श्री अक्षय भोंसले के नेतृत्व में  संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों का वन विभाग के अमले द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है।    कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी और केरलपाल पंचायत सहित आसपास के वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की निर्धारित SOP के अनुरूप निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं, मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है और कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, ताकि बाघ की गतिविधियों की पुष्टि एवं निगरानी की जा सके। पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।     वन विभाग ने ग्रामीणों से शाम 4 बजे के बाद जंगल में जाने से बचने और आवश्यकता होने पर समूह में ही जाने की अपील की है। बाघ दिखाई देने पर उसके पास जाने, पीछा करने, भीड़ लगाने, उसे भगाने या स्वयं पकड़ने का प्रयास न करने की सलाह दी गई है। बाघ की संभावित गतिविधि अथवा किसी संदिग्ध घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग को देने को कहा गया है। साथ ही अपुष्ट फोटो, वीडियो या सूचनाओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित न करने तथा केवल वन विभाग और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई है।    वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मवेशी की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि होने पर शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाएगा। बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-प् में संरक्षित वन्यजीव है और इसके शिकार, हत्या या शिकार के प्रयास पर कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना शामिल है। विभाग ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और इस संबंध में किसी भी सूचना को तत्काल वन विभाग के साथ साझा करने की अपील की है