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क्राइम कंट्रोल में टेक्नोलॉजी की एंट्री: बदमाशों के फिंगरप्रिंट अब ऑनलाइन रिकॉर्ड

भिलाई नगर. दुर्ग जिले की पुलिस व्यवस्था इतनी हाईटेक हो रही है कि अब बस एक क्लिक में किसी भी अपराधी की जन्मकुंडली खुल जाएगी. इससे अपराधियों का बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. पुलिस ने बायोमैट्रिक डिवाइस इस्तेमाल से 385 गुंडा व 182 निगरानी बदमाशों फिंगर प्रिंट सिस्टम में अपलोड कर लिया है. भविष्य में कोई भी अपराधी अगर किसी भी अपराध में संलिप्त होता है तो उसकी पहचान की जा सकेगी. ऑनलाइन डाटा रखने के लिए गिरफ्तार अपराधियों का फिंगर प्रिंट लेकर उनकी डिजिटल कुंडली तैयार की जा रही है. फिंगर प्रिंट को ऑनलाइन कर दिए जाने के बाद अगर कोई अपराधी किसी घटना में गिरफ्तार होता है तो उसकी पहचान करना आसान हो जाएगा. इसके साथ ही मौके पर मिले फिंगर प्रिंट से मिलान कर भी उसे पहचाना जा सकेगा. डीआईजी व दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और इससे उन्हें छुपने के लिए भी पर्दा मिल रहा है. पुलिस के लिए जरूरी है कि उनसे आगे बढ़कर तकनीक का इस्तेमाल करें. इसलिए आने वाले समय में अपराधी अपराध कर किसी भी देश में छिपा हो उस पकड़ने में आसानी होगी.

हेल्पलाइन, मातृ-शिशु देखभाल, सर्पदंश प्रबंधन से लेकर आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे तक-हर स्तर पर मिल रहा लाभ

रायपुर आरोग्य जशपुर अभियान: सुदूर वनांचल में स्वास्थ्य क्रांति, नवाचार और सुविधाओं से बदल रही तस्वीर सुदूर वनांचल एवं अनुसूचित जिला जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और सुलभ बनाने के उद्देश्य से संचालित “आरोग्य जशपुर अभियान” एक व्यापक और प्रभावी पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। भौगोलिक चुनौतियों एवं सीमित संसाधनों के बावजूद जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक सुव्यवस्थित रोडमैप के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत न केवल गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं आमजन तक पहुंच रही हैं, बल्कि नवाचारों को राज्य स्तर पर भी सराहना मिल रही है। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर  रोहित व्यास जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में नियमित रूप से स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा भी करते है। स्वास्थ्य मितान हेल्पलाइन एक कॉल पर स्वास्थ्य सेवाएं – जिले में शुरू की गई स्वास्थ्य मितान हेल्पलाईन 07763-299030 आमजन के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। इस निःशुल्क सेवा के माध्यम से आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 3180 से अधिक कॉल प्राप्त कर सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें 5 मिनट के भीतर रिस्पांस दिया जाता है और प्रत्येक कॉल पर 1 से 3 फॉलोअप सुनिश्चित किया जाता है। ओला-उबर की तर्ज पर एम्बुलेंस ट्रैकिंग लिंक उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी हैं। पहाड़ी कोरवा हेल्पडेस्कः विशेष पिछड़ी जनजाति तक पहुंच – पीवीटीजी समुदायों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए बगीचा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेष पिछड़ी जनजाति सहायता केन्द्र स्थापित किया गया है। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित हेल्पडेस्क स्थानीय भाषा में संवाद कर जागरूकता बढ़ा रहा है। इस पहल से 1450 से अधिक मरीजों को ओपीडी, 900 से अधिक को आईपीडी सेवाएं तथा 140 से अधिक सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से दूरस्थ बसाहटों में नियमित स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। स्वस्थ महतारी सबकी जिम्मेदारी मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष फोकस – रिचिंग एवरी डिलीवरी (रेड) कॉल सेंटर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी की जा रही है। अब तक 44,000 से अधिक कॉल के माध्यम से माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल सुनिश्चित की गई है। इससे संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई है और उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान एवं उपचार संभव हुआ है। सर्पदंश प्रबंधनः जीवन बचाने की प्रभावी पहल – जिले के सभी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वर्ष में 626 सर्पदंश मामलों में से 616 का सफल उपचार किया गया है। गूगल शीट के माध्यम से केस-टू-केस मॉनिटरिंग, व्हाट्सएप ग्रुप द्वारा विशेषज्ञ परामर्श, तथा स्थानीय बैगा-गुनिया को प्रशिक्षित कर त्वरित अस्पताल भेजने की पहल से मृत्यु दर में कमी आई है। रक्त उपलब्धता डैशबोर्ड समय पर जीवन रक्षक सुविधा- जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलगांव, कुनकुरी, बगीचा, फरसाबहार, कांसाबेल और दुलदुला में रक्त भंडारण इकाइयों की स्थापना की गई है। इसके साथ ही जिला जशपुर के अधिकारिक वेबसाइट एनआईसी पोर्टल पर रियल टाइम डैशबोर्ड विकसित किया गया है। इससे आम जनों को स्वास्थ्य केंद्रों में रक्त की उपलब्धता की सटीक जानकारी मिल रही है, जिससे आपात स्थिति में समय पर उपचार संभव हो पा रहा है। स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तारः  मजबूत हो रहा नेटवर्क – जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए कई नई संस्थाओं की स्वीकृति एवं संचालन किया जा रहा है। इनमें 220 बिस्तरीय अस्पताल कुनकुरी, नवीन एमसीएच, 3 नए सीएचसी, 7 नए पीएचसी, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, एनआरसी, क्रिटिकल केयर ब्लॉक, बीपीएचयू, नर्सिंग एवं फिजियोथेरेपी कॉलेज, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र शामिल हैं। साथ ही 50 सीटों का मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित है। आरोग्य जशपुर अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में आई यह व्यापक सुधार न केवल जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव ला रहा है। यह पहल स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार, समर्पण और प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है।

नक्सल सन्नाटे से विकास की रफ्तार तक: ककनार घाटी में लौटी सामान्य जिंदगी

रायपुर बस्तर की भौगोलिक विषमताओं और कठिन परिस्थितियों के बीच विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी गई है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन थी। ककनार घाटी के नीचे बसे सुदूर गांव कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम जो कभी वामपंथी आतंक के गढ़ माने जाते थे, आज मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। इन गांवों के निवासियों के लिए पक्की सड़क का निर्माण एक ऐसा सपना था, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था, क्योंकि घाटी की दुर्गम ढलान और माओवाद के साये ने विकास के हर रास्ते को अवरुद्ध कर रखा था। लेकिन आज उन्हीं संकरी पगडंडियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर बनी नई सड़क में बस का दौड़ना बस्तर की बदलती तस्वीर का सबसे सशक्त प्रमाण है। ज्ञात हो कि बस्तर जिले में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना की शुरूआत बीते 04 अक्टूबर 2025 को केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के द्वारा की गई थी। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के माध्यम से जिले के चार चयनित मार्गों पर बस सेवा संचालित की जा रही है।          मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत शुरू हुई यह बस सेवा केवल एक वाहन नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की एक कड़ी है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार रायपुर द्वारा स्वीकृत समय-सारणी के अनुसार यह बस प्रतिदिन कोण्डागांव जिले के मर्दापाल से अपनी यात्रा शुरू करती है और ककनार घाटी के नीचे बसे उन गांवों को जोड़ती है जहाँ कभी पैदल चलना भी जोखिम भरा था। घाटी के इन दुर्गम अंचलों से होते हुए बस धरमाबेड़ा और ककनार जैसे पड़ावों को पार कर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचती है। इससे उन लोगों का सफर अब सुगम हो गया है जिन्होंने दशकों तक केवल सड़क और बस का इंतजार किया था।          वामपंथी समस्या के कमजोर पड़ने और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते अब इन संवेदनशील इलाकों में सड़कों का निर्माण संभव हो पाया है। पक्की सड़कों के इस जाल ने न केवल परिवहन को आसान बनाया है, बल्कि ककनार घाटी के नीचे बसे ग्रामीणों के मन से अलगाव का डर भी खत्म कर दिया है। अब शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए ग्रामीणों को मीलों का सफर तय नहीं करना पड़ता। यह निरंतर बस सेवा इस बात का प्रतीक है कि बस्तर का वह हिस्सा जो कभी अंधेरे में खोया हुआ माना जाता था, अब पूरी रफ्तार के साथ प्रगति की राह पर अग्रसर है। घाटी की ऊंचाइयों से उतरकर यह बस आज हर ग्रामीण के घर तक शासन की योजनाओं और खुशहाली का संदेश पहुँचा रही है। इस बारे में चंदेला के सरपंच  तुलाराम नाग कहते हैं कि करीब दो साल पहले तक इस ईलाके में माओवादी समस्या के कारण विकास थम सी गई थी लेकिन आज सड़क बन जाने के साथ ही विकास को एक नई दिशा मिल चुकी है। इस ईलाके में स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र की सेवाओं के साथ ही उचित मूल्य दुकान में खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी सामग्री सुलभ हो रही है वहीं समीपस्थ ग्राम ककनार में साप्ताहिक बाजार की रौनक देखते ही बनती है। क्षेत्र के ककनार सरपंच  बलीराम बघेल बताते हैं कि पहले उन्हे अपने तहसील मुख्यालय लोहण्डीगुड़ा और जिला मुख्यालय तक जाने मे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब सड़क के बन जाने से बारहमासी आवागमन की सुविधा मिल रही है।

ट्राइबल गेम्स में ओडिशा का दबदबा, जगदलपुर में झारखंड रहा रनर-अप

रायपुर बस्तर के हृदय स्थल जगदलपुर स्थित धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में आयोजित प्रथम श्खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्सश् की एथलेटिक्स स्पर्धाओं का गुरुवार को भव्य समापन हो गया। 30 मार्च से शुरू हुए इस चार दिवसीय खेल महाकुंभ ने देशभर की जनजातीय प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान किया, जहाँ एथलीटों ने अपने अदम्य साहस और उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन जैसे ही अंतिम दौर के मुकाबले समाप्त हुए, पदक तालिका की तस्वीर साफ हो गई। इस रोमांचक खेल आयोजन में ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों ने अपनी खेल परंपरा और श्रेष्ठता को बरकरार रखते हुए शीर्ष स्थानों पर कब्जा जमाया।        ​ पदक तालिका के आंकड़ों पर गौर करें तो ओडिशा की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 8 स्वर्ण, 7 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ अंक तालिका में पहला स्थान हासिल किया। ओडिशा को झारखंड से कड़ी टक्कर मिली, जिसने भी 8 स्वर्ण पदक अपने नाम किए, लेकिन अन्य पदकों के समीकरण के आधार पर वह दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, कर्नाटक की टीम 5 स्वर्ण पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रही, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र के खिलाड़ियों ने क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर रहकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। मेजबान छत्तीसगढ़ के एथलीटों ने भी घरेलू मैदान पर दर्शकों के भारी उत्साह के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और 1 स्वर्ण, 4 रजत व 1 कांस्य पदक जीतने में सफलता प्राप्त की।         खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ​प्रतियोगिता के समापन सत्र के दौरान खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के लिए क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य रूप से वन मंत्री  केदार कश्यप, जिला पंचायत में खेल एवं युवा समिति के सभापति  बनवासी मौर्य, कमिश्नर  डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक  सुन्दरराज पी, कलेक्टर  आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा ने कार्यक्रम में शिरकत की। अतिथियों ने विजेता प्रतिभागियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। इस आयोजन ने न केवल जनजातीय युवाओं के खेल कौशल को निखारा है, बल्कि बस्तर की धरती पर खेल संस्कृति को एक नई दिशा भी प्रदान की है।

​रफ्तार और शक्ति का महासंग्राम बस्तर की धरा पर संपन्न हुई खेलो इंडिया एथलेटिक्स स्पर्धाएं

रायपुर बस्तर की पावन धरा जगदलपुर के धरमपुरा स्थित आधुनिक क्रीड़ा परिसर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत गुरुवार को एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के अंतिम दिन ट्रैक पर रफ्तार, शक्ति और अटूट संकल्प का अद्भुत संगम देखने को मिला। बीते 30 मार्च से भव्यता के साथ शुरू हुए इस खेल महाकुंभ के समापन अवसर पर देश के कोने-कोने से आए जनजातीय एथलीटों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कई रोमांचक पदक अपने नाम किए। दिन की सबसे चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में से एक, पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में नागालैंड के धावक वेडे टमेरो ने शुरू से ही अपनी लय बरकरार रखी और 32ः28.46 के शानदार समय के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उनके ठीक पीछे महाराष्ट्र के जुझारू एथलीट कमलाकर लक्ष्मण देशमुख रहे, जिन्होंने रजत पदक जीता, जबकि जम्मू-कश्मीर के हंस राज ने कांस्य पदक जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।            इसी स्पर्धा के महिला वर्ग में पश्चिम बंगाल की संजीता ओरांव ने अपनी सहनशक्ति का परिचय देते हुए 40ः21.18 के समय के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया, जहाँ ओडिशा की संध्या मुर्मू को रजत और मेघालय की बलारिशा थिरनियांग को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।           मैदान पर रोमांच तब और बढ़ गया जब एथलेटिक्स के इस अंतिम पड़ाव पर लघु दूरी की स्पर्धाओं में धावकों ने अपनी बिजली जैसी तेजी दिखाई। पुरुषों की 200 मीटर दौड़ में झारखंड के धावक शिव कुमार सोरेन ने 21.51 सेकंड के रिकॉर्ड समय के साथ फिनिशिंग लाइन पार कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के अर्पण ताई और राजस्थान के जगदीश मीणा ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए।           महिला वर्ग की 200 मीटर स्पर्धा में कर्नाटक की ऋतुश्री ने 25.87 सेकंड की रफ्तार से स्वर्ण पदक अपने नाम कर राज्य का गौरव बढ़ाया। मध्यम दूरी की 1500 मीटर दौड़ में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहाँ महिला वर्ग में कर्नाटक की नागिनी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, वहीं पुरुष वर्ग में झारखंड के राहुल उरांव ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उल्लेखनीय है कि मेजबान छत्तीसगढ़ के मनीष कुमार ने घरेलू मैदान पर दर्शकों के भारी समर्थन के बीच तीसरा स्थान हासिल कर राज्य की झोली में कांस्य पदक डाला।          शक्ति और तकनीक के संगम वाली भाला फेंक (जैवलीन थ्रो) स्पर्धा में मध्य प्रदेश के गुलाब सिंह ने 62.80 मीटर की प्रभावशाली दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के प्रमोद हागजेर मात्र कुछ ही फासले से पीछे रहकर रजत पदक के हकदार बने। टीम वर्क और बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन करते हुए महिला 4×400 मीटर रिले दौड़ में झारखंड की आशा किरण बारला और तनीषा कुमारी की टीम ने स्वर्ण पदक जीता, वहीं पुरुषों की इसी स्पर्धा में ओडिशा की टीम ने चौंपियन बनकर अपनी धाक जमाई। मेजबान छत्तीसगढ़ की पुरुष रिले टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। एथलेटिक्स मुकाबलों के इस अंतिम दिन की अंतिम रोमांचक स्पर्धाओं में महिला लंबी कूद शामिल रही, जहाँ झारखंड की प्रीति लकड़ा ने 5.54 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। केंद्रीय खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित यह महाकुंभ न केवल पदक तालिका में उलटफेर कर रहा है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को एक सशक्त राष्ट्रीय मंच प्रदान कर बस्तर के खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है।

मल्लखंभ प्रतियोगिता के प्रथम दिन छत्तीसगढ़ की पुरूष टीम 124.35 अंक के साथ रही विजेता

रायपुर खेलो इंडिया ट्राईबल गेम्स 2026 के अंतर्गत आज सरगुजा जिले के अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में डेमो खेल मल्लखंभ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। प्रतियोगिता में आज रोप मल्लखंभ, पोल मल्लखंभ, हैंगिंग मल्लखंभ का आयोजन हुआ। जिसमें खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। हिस्सा ले रहे 14 राज्यों की टीम में से राजस्थान, तमिलनाडु उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र झारखंड, मध्य प्रदेश,दिल्ली ,गुजरात, छत्तीसगढ़ के पुरुष टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा हुई।              आज हुई स्पर्धा में छत्तीसगढ़ की मल्लखंभ टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय खेल खेलो इंडिया एवं बीच गेम्स आदि के दोनों वर्गों में विजेता रहे। छत्तीसगढ़ ने 124.35 अंक के साथ प्रथम, महाराष्ट्र ने 118.35 अंक के साथ द्वितीय एवं झारखंड ने 86.95 अंक के साथ तृतीय स्थान हासिल किया।

मुख्यमंत्री से उत्तरप्रदेश के राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने सौजन्य मुलाकात की

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में उत्तरप्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जलशक्ति विभाग  रामकेश निषाद ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए  निषाद का राज्य में स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट का प्रतीक चिन्ह और बस्तर पंडुम की पुस्तिका भेंट की।  मुख्यमंत्री  साय को  निषाद ने छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के सफल आयोजन पर हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने  निषाद से छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

महात्मा गांधी नरेगा योजना के अलग-अलग पैरामीटर्स पर जिले ने हासिल की कई उपलब्धियां

रायपुर सर्वाधिक परिवारो को रोजगार, सर्वाधिक मानव दिवस का रोजगार सहित सर्वाधिक दिव्यांगजनों को रोजगार देने के मामले में कबीरधाम प्रदेश में प्रथम स्थान पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत कबीरधाम जिले ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना का बेहतर क्रियान्वयन कर कई उपलब्धियां हासिल करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में कबीरधाम जिले ने ग्रामीणों को सर्वाधिक मानव दिवस का रोजगार देने, सर्वाधिक परिवारों को रोजगार, सर्वाधिक दिव्यांग जनों को रोजगार देने सहित अनेको पैरामीटर पर कई उपलब्धियां अपने नाम की। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा लगातार विभागीय समीक्षाओं के दौरान शासकीय योजनाओं से ग्रामीणों को लाभान्वित करने प्रोत्साहित किया जाता रहा है। और आज इसी का परिणाम है कि कबीरधाम जिले ने मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में एक बार फिर अपना नाम प्रथम पंक्ति में स्थापित किया है। लगातार प्रयास के मिले सुखद नतीजे- कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा कलेक्टर कबीरधाम श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए निरंतर समीक्षा की गई। ग्राम पंचायतो की मांग पर बहुत से निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए और कार्य प्रारंभ कर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। वनांचल क्षेत्र से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बड़ी मात्रा में निर्माण कार्य चल रहे हैं। समय पर मजदूरी भुगतान हो यह सुनिश्चित किया गया। वर्तमान में ग्रामीणों के लिए पर्याप्त मात्रा में रोजगार उपलब्ध है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11 हजार 466 परिवारों को 100 दिवस का रोजगार मिला है और वे आर्थिक रूप से लाभान्वित हुए है।हमारा सतत प्रयास है कि मनरेगा योजना से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को लाभान्वित किया जाए। जल संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन एवं आजीविका जैसे प्रमुख घटकों के क्षेत्र में योजना से पर्याप्त कार्य हो रहे है।  रोजगार के साथ आजीविका को बढ़ाना प्रमुख उद्देश्य – सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया की ग्रामीणों के मांग पर रोजगार उपलब्ध कराना, समय पर निर्माण कार्य की स्वीकृति एवं सभी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो इन बातों पर विशेष ध्यान दिया। इसीलिए जिले के सभी क्षेत्रों में ग्रामीणों को पर्याप्त रोजगार मिला और हम प्रदेश में बेहतर कर पाए। आजीविका डबरी, नया तालाब निर्माण, कच्ची नाली निर्माण, पुराने तालाबों का गहरीकरण जैसे अनेक जल संरक्षण के कार्याे के साथ आजीविका के लिए कुकुट पालन शेड, पशुपालन शेड जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। मार्च माह के अंतिम सप्ताह में प्रारंभ हुए नए कार्यों से जिले की उपलब्धि और बढ़ेगी तथा हमारे ग्रामीणों को और अधिक लाभ होना अपेक्षित है। उल्लेखनीय है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से ग्रामीणों को बड़ी मात्रा में रोजगार का अवसर मिलता है। योजना से ग्रामीणों को रोजगार के साथ गांव में विभिन्न परिसंपत्तियों का निर्माण होता है। योजना के क्रियान्वयन में कबीरधाम जिला लगातार कई वर्षों से प्रदेश में अग्रणी बना हुआ है ग्रामीणों को इसका लाभ मिल रहा है। मनरेगा योजना के पैरामीटर्स जिसमें कबीरधाम ने हासिल की उपलब्धि सर्वाधिक मानव दिवस रोजगार का सृजन-जिले के ग्रामीणों को 58 लाख 54 हजार 40 मानव दिवस का रोजगार मिला। जो प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। सर्वाधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार- जिले के 1 लाख 42 हजार 482 ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला, जो प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। सर्वाधिक दिव्यांग जनों को रोजगार- जिले में 2 हजार 538 दिव्यांग जनों को 58 हजार 493 मानव दिवस का रोजगार दिया गया। जो प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। ग्रामीण महिलाओं को भी मिला रोजगार का बेहतर अवसर- योजना अंतर्गत 1 लाख 30 हजार 160 महिलाएं पंजीकृत है और इन्हें 29 लाख 33 हजार 959 मानव दिवस का रोजगार मिला है। महिलाओं को रोजगार देने के मामले में कबीरधाम जिला पूरे प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। 124 करोड़ 53 लाख से अधिक का मजदूरी भुगतान- मनरेगा में रोजगार पाने वाले जिले के ग्रामीणों को 124 करोड़ 53 लाख 46 हजार रुपए का मजदूरी भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में जारी किया गया। मजदूरी भुगतान के मामले में कबीरधाम जिला प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। ग्रामीणों को मिला मजदूरी भुगतान से उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

गांधी स्टेडियम अंबिकापुर में मल्लखंभ का भव्य शुभारंभ, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पारंपरिक खेलों का दमदार प्रदर्शन

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत सरगुजा जिले के गांधी स्टेडियम अंबिकापुर में पारंपरिक भारतीय खेल मल्लखंभ का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर खिलाड़ियों ने अपने अद्भुत संतुलन, शक्ति एवं लचीलापन का शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।                  मल्लखंभ जो कि भारत की प्राचीन खेल परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, को इस प्रतियोगिता में डेमो खेल के रूप में शामिल किया गया है। इसके माध्यम से पारंपरिक खेलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतियोगिता में देश के 14 राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं, जिससे आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की गरिमा प्राप्त हो रही है। मल्लखंभ प्रतियोगिता के अंतर्गत विभिन्न स्पर्धाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बालक एवं बालिका वर्ग में टीम चौंपियनशिप (पोल एवं रोप मल्लखंभ), पिरामिड चौंपियनशिप तथा पुरुष एवं महिला वर्ग में पिरामिड, पोल एवं रोप मल्लखंभ, हैंगिंग मल्लखंभ शामिल हैं। टीम स्पर्धाओं में अधिकतम 6 खिलाड़ियों की भागीदारी निर्धारित की गई है।              गांधी स्टेडियम में आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने पोल एवं रस्सी मल्लखंभ पर आकर्षक करतब प्रस्तुत किए। खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना एवं युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना है। इस आयोजन से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से तेलंगाना एवं अन्य प्रांतो में प्रवासित परिवारों के लिए पुर्नवास के लिए बनेगी कार्ययोजना

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के ऐसे विस्थापित परिवार जो किन्ही कारणों बस्तर संभाग के सीमावर्ती तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश में प्रवासित है, ऐसे परिवारों के पुनर्वास की कार्ययोजना बनायी जा रही है। मंत्रालय महानदी भवन में आज अपर मुख्य सचिव गृह  मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में पुनर्वास हेतु गठित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के संबंध में कार्ययोजना तैयार करने विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।               बैठक में बताया गया कि जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के लोग तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश राज्य में प्रवासित हो गए है। इसके लिए प्रवासित परिवारों की ओर से राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में याचिका दायर किया गया है। इसके तहत माननीय आयोग द्वारा एक माह के भीतर सर्वे कर प्रवासित परिवारों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके परिपालन में बस्तर संभाग के संभागायुक्त द्वारा एक समयबद्ध कार्यक्रम के तहत कलेक्टर दंतेवाड़ा, सुकमा एवं जिला बीजापुर को प्रवासित परिवारों के सर्वे किया जाकर 15 दिन के भीतर प्रतिवेदन प्रेषित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वे अनुसार जिला दंतेवाड़ा से तेलंगाना प्रदेश के 60 ग्राम में 618 परिवार के 2654 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से तेलंगाना प्रदेश के 293 ग्राम में 2733 परिवार के 12026 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से तेलंगाना प्रदेश के 114 ग्राम में 994 परिवार के 5029 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से तेलंगाना राज्य के 467 ग्राम में 4345 परिवार के 19709 व्यक्ति प्रवासित है।               इसी तरह जिला दंतेवाड़ा से आंध्रप्रदेश के 25 ग्राम में 125 परिवार के 568 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से आंध्रप्रदेश के 155 ग्राम में 2462 परिवार के 10787 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से आंध्रप्रदेश के 04 ग्राम में 07 परिवार के 34 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह से छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से आंध्रप्रदेश राज्य के 184 ग्राम में 2594 परिवार के 11389 व्यक्ति प्रवासित है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के 667 ग्राम से तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश राज्य के 651 ग्राम में 6939 परिवार के 31098 व्यक्ति प्रवासित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव  पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बस्तर संभाग  डोमन सिंह एवं पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज  सुन्दरराज से चर्चा कर अन्य प्रांतों में प्रवासित परिवारों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए एक बार और सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर लें।               अपर मुख्य सचिव गृह  पिंगुआ ने कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों से अन्य प्रांतों में प्रवासित लोगों के बारे में उनके मूल ग्राम एवं निवास स्थान से आवश्यक जानकारी तैयार कर लें। जिससे पुनर्वास योजना बनाने आसानी होगी। इसी तरह से पुनर्वास योजना बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित दिए गए है कि वे शीघ्र ही अपने-अपने विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त कर दें, जिससे शीघ्र पुनर्वास योजना बनाने में आसानी होगी।                वीडियो कॉन्फ्रेंस में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव मती शहला निगार, गृह विभाग की सचिव मती नेहा चम्पावत, आईजी बस्तर  सुन्दरराज, कमिश्नर बस्तर  डोमन सिंह सहित कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा शामिल हुए। इसी तरह से बैठक में सामान्य प्रशासन, वित्त विभाग, राजस्व, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, वाणिज्य एवं उद्योग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।