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वन मंत्री कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात

रायपुर वन मंत्री  कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने विकास की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि बस्तर का समग्र विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की राह में आने वाली हर बाधा को दूर करना उनका लक्ष्य है।  मंत्री  केदार कश्यप ने आज नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बस्तर विकासखंड में विकास की नई इबारत लिखी। उन्होंने क्षेत्र के सघन दौरे के दौरान मुरकुची और पखना कोंगेरा में आयोजित भव्य कार्यक्रमों मंस शिरकत की, जहाँ उन्होंने विधायक निधि से स्वीकृत कुल 56 लाख रूपए की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन कर ग्रामीणों को बड़ी सौगात दी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर आवागमन और सामुदायिक सुविधाओं में व्यापक सुधार सुनिश्चित होगा। जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुलियाओं का निर्माण केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। उन्होंने पूर्ववर्ती कठिनाईयों का स्मरण कराते हुए कहा कि बरसात के दिनों में छोटे-छोटे नालों के उफान पर होने के कारण ग्रामीणों, विशेषकर स्कूली बच्चों और मरीजों को जो परेशानियां झेलनी पड़ती थीं, अब ये नई पुलियाएं उन समस्याओं का स्थायी समाधान बनेंगी। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाना ही सुशासन की असली पहचान है। उन्होंने पुल-पुलिया के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ये निर्माण कार्य स्थानीय परिवहन को सुगम बनाएंगे और कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में किसानों की मदद करेंगे। साथ ही तारागांव में सामुदायिक भवन के निर्माण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए गांवों में सुरक्षित और पक्के भवनों का होना अनिवार्य है, ताकि ग्रामीण समाज एकजुट होकर अपनी परंपराओं का निर्वहन कर सके। मंत्री  कश्यप ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए अपील की कि वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर स्वयं भी नजर रखें, क्योंकि यह संपत्ति उनकी अपनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारायणपुर विधानसभा के हर कोने में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार निरंतर जारी रहेगा और धन की कमी को कभी विकास में बाधक नहीं बनने दिया जाएगा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष  संतोष बघेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।    

अंदरूनी इलाकों में लौटी पढ़ाई की रौनक, बस्तर के 123 स्कूलों में फिर गूंजी घंटी

सुकमा। नक्सलवाद के काले साये को पीछे छोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के अंदरूनी इलाकों में शिक्षा का उजाला एक बार फिर तेजी से फैल रहा है। शासन की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सलवा जुडूम आंदोलन के दौरान नक्सलियों के दहशत से बंद हुए सुकमा जिले के सैकड़ों स्कूलों के दरवाजे अब बच्चों के लिए पूरी तरह खुल चुके हैं और छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्लानार योजना से शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। पुनर्जीवित हुई शिक्षा व्यवस्था दस्तावेज के मुताबिक, वर्ष 2006 में माओवादी प्रभाव और सलवा जुडूम आंदोलन के कारण कुल 123 स्कूल बंद हो गए थे। इनमें 101 प्राथमिक और 21 माध्यमिक शालाएं शामिल थीं। प्रशासन के निरंतर प्रयासों से इन सभी स्कूलों को पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वर्तमान में ऐसे स्कूलों की संख्या शून्य है, जो पूर्व में माओवादी प्रभाव के कारण बंद थे। प्रमुख उपलब्धियां और बुनियादी ढांचा शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दूरस्थ इलाकों के छात्रों के भविष्य को देखते हुए आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों का जाल बिछाया गया है। पोटा केबिन (आवासीय विद्यालय) वर्तमान में 16 पोटा केबिन संचालित हैं, जिनमें 6,722 छात्र दर्ज हैं। छात्रावास सुविधा 16 पोटा केबिन छात्रावासों में 1,389 विद्यार्थी रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टाइप-3 (कक्षा 6वीं से 12वीं) के 3 विद्यालयों में 600 छात्राएं और टाइप-4 (कक्षा 9वीं से 12वीं) के 2 छात्रावासों में 200 छात्राएं लाभान्वित हो रही हैं। नियद नेल्लानार योजना से नई शुरुआत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वर्ष 2024-25 में विकास की गति को और तेज करते हुए नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत शामिल गांवों में 07 नवीन प्राथमिक शालाएं खोली गई है। इन स्कूलों में अब तक 210 बच्चों ने प्रवेश लिया है। भविष्य की कार्ययोजना को देखते हुए प्रशासन ने 19 और नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है। जमीनी स्तर पर आ रहे ये बदलाव न केवल बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, बल्कि इन क्षेत्रों में विश्वास की एक नई किरण भी जगा रहे हैं। शासन ने ‘पहले’ और ‘अब’ की तस्वीरों के साथ विकास के इस परिवर्तन को प्रमाणित भी किया है, जो स्पष्ट करता है कि बंदूक की गूंज पर अब स्कूलों में बच्चों के ककहरा की गूंज और किताबों की सरसराहट भारी पड़ रही है।

ग्रामीण स्वच्छता को लेकर बड़ी बैठक: स्वच्छ भारत मिशन की अपेक्स कमेटी ने की समीक्षा

रायपुर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की अपेक्स कमेटी की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की गतिविधियों, वित्तीय वर्ष 2025-26 की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, वित्तीय वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान, स्वच्छता के लिए नवाचार तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) हेतु अंतर्विभागीय अभिसरण पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों को अपशिष्ट प्रबंधन अधोसंरचना के तहत गांवों में कम्पोस्ट पिट, सोखता गडड्ा और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्रामों की स्वच्छता के कार्यों की सर्टिफिकेशन ग्राम सभा द्वारा कराया जाना चाहिए।  मुख्य सचिव ने भारत स्वच्छ मिशन के अंतर्गत राज्य के सभी ग्रामों में स्वच्छता के कार्यों को नियमित रूप से मॉनिटरिंग कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए है। गांवों के हाट-बाजारों में सामूहिक शौचालय का उपयोग एवं स्वच्छता के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसी तरह से आवश्यकतानुसार सामूहिक शौचालय की उपयोगिता एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्थलों पर करीब 14 हजार 279 सामुदायिक शौचालयोें का निर्माण किया जा चुका है। इसी तरह से वर्ष 2026-27 में 2014 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक कार्ययोजना के निर्माण के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया।  मुख्य सचिव ने इस हेतु देश के अन्य राज्यों के सफल प्लास्टिक वेस्ट मैंनेजमेंट के मॉडल को अपनाने की बात कही। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक वेस्ट से सशक्त सड़कों के निर्माण करने की अभिनव एवं सतत् पहल की जा रही है। राज्य के बस्तर, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्लास्टिक मिक्स डामर रोड निर्माण किए जा रहे हैं। रोड निर्माण में करीब 3000 किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता, जल प्रबंधन एवं प्रशासनिक व्यवस्था की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन करने हेतु स्वच्छ पंचायत पोर्टल की शुरूआत की गई है। ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा ग्राम की स्वच्छता, जल आपूर्ति एवं प्रशासन की ऑनलाइन प्रविष्टि की जा रही है। सभी ग्रामों की ब्लॉक स्तर, जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर रैंकिंग की जाएगी। इसके लिए सभी ग्रामों की ऑनलाईन एंट्री का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।  बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मिशन संचालक राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) श्री अश्वनी देवांगन सहित स्कूल शिक्षा, वित्त, जनसम्पर्क, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, यूनिसेफ के अधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

खल्लारी रोप-वे दुर्घटना: मुख्यमंत्री ने सहायता राशि की घोषणा की, दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  महासमुंद जिले के खल्लारी माता मंदिर में हाल ही में हुई रोप-वे दुर्घटना में प्रभावित परिवारों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है। उन्होंने दिवंगत श्रद्धालुओं के परिजनों को 5 लाख रुपए एवं घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है, ताकि इस कठिन समय में उन्हें संबल मिल सके। मुख्यमंत्री  साय ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

अब ऐप से होगी कुली बुकिंग, रेल मंडल ने शुरू की तैयारी

रायपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को जल्द एप के जरिए कुली बुक करने की सुविधा मिल सकती है. रेल मंडल इसके लिए विशेष ऐप तैयार कर रहा है. इसमें कुलियों का पूरा विवरण और तब किराया दर्ज रहेगा. इस व्यवस्था को लागू करने से पहले रेलवे यात्रियों से फीडबैक ले रहा है. इसके लिए क्यूआर स्कैनर जारी कर सर्वे कराया जा रहा है. रायपुर रेल मंडल द्वारा विकसित किए जा रहे एप के शुरू होने के बाद यात्री ट्रेन के रायपुर रेलवे स्टेशन में पहुंचने से पहले ही कुली बुक कर सकेंगे. ट्रेन आते ही कुली संबंधित कोच और सीट तक पहुंचेंगे. इससे यात्रियों को स्टेशन पर कुली खोजने की परेशानी नहीं होगी. साथ ही किराए को लेकर मोलभाव और ओवरचार्जिंग जैसी शिकायतों में भी कमी आ सकेगी. रेलवे के जन- सर्वेक्षण में यात्रियों से पूछा जा रहा है कि वे कितनी बार ट्रेन से यात्रा करते हैं, कुली सेवा लेते हैं या नहीं, स्टेशन पर कुली खोजने में दिक्कत होती है या नहीं. इसके अलावा किराये की जानकारी तय राशि से अधिक वसूली, मोलभाव, ऑनलाइन बुकिंग से समय बचत, सुरक्षा और सुविधा शुल्क जैसे मुद्दों पर भी राय मांगी जा रही है.

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने लॉन्च की नई वेबसाइट, वन क्लिक सिंगल विंडो सिंगल-पोर्टल सेवा

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने एक नई वेबसाइट वन क्लिक सिंगल विंडो सिंगल-पोर्टल किया लॉंच यह प्रणाली 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को जोड़ती है रायपुर  वन क्लिक सिंगल विंडो (OneClick) एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल है, जो निवेशकों को छत्तीसगढ़ में व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक सभी अनुमतियां, मंजूरी, भूमि आवंटन और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा एक ही जगह प्रदान करता है। यह प्रणाली 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को जोड़ती है, जिससे समय की बचत होती है, पारदर्शिता बढ़ती है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस  (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलता है।            उद्योग विभाग से पाप्त जानकारी के अनुसार वन क्लिक सिंगल विंडोका मूल विचार सरल है विभाग के साथ काम करने वाले सभी लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना। चाहे आप एक स्थापित व्यवसाय हों, संभावित निवेशक हों, स्टार्टअप हों या निर्यातक हों, अब आपको सब कुछ एक ही स्थान पर मिलेगा। अनुमोदन के लिए वन क्लिक सिंगल विंडो से लेकर सब्सिडी कैलकुलेटर के साथ प्रोत्साहन का अनुमान लगाने तक, प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और कुशल है।           छत्तीसगढ़ के व्यापार को आसान बनाएं के व्यापक वादे के तहत, वनक्लिक राज्य का नया सिंगल-विंडो पोर्टल है जो व्यापारिक वातावरण में गति, सरलता और पारदर्शिता लाता है। अनुमोदन और मंजूरी से लेकर बिल भुगतान, भूमि आवंटन और अनुपालन तक – एक उद्यमी या निवेशक को जो कुछ भी चाहिए, वह अब सिर्फ एक क्लिक दूर है।          वनक्लिक नाम सहज, यादगार है और पोर्टल के मूल कार्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सुगमता और दक्षता प्रदान करना। टैगलाइन – सीजी इसे आसान बनाता है – शासन को एक सहज अनुभव में बदलने के लिए छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहां उद्यमी कागजी कार्रवाई में कम समय और महत्वपूर्ण कार्यों के निर्माण में अधिक समय व्यतीत करते हैं।

तेंदुए की खाल की तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 9 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर वन्यजीव संरक्षण को लेकर राज्य में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में 19 मार्च 2026 को केशकाल वनमंडल और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तेंदुए की खाल की तस्करी में शामिल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया।            वन्य जीव संरक्षण का अर्थ जंगली जानवरों, पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा करना है, ताकि जैव विविधता बनी रहे और पारिस्थितिक संतुलन न बिगड़े। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अवैध शिकार, व्यापार और आवास विनाश को रोकना और वन्य प्रजातियों की रक्षा करना अनिवार्य है। यह पारिस्थितिक तंत्र के लचीलेपन और भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण है।           यह कार्रवाई मुखबिर की सूचना के आधार पर की गई। वन विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया, जिसमें एक कर्मचारी ने खरीदार बनकर तस्करों से संपर्क किया। जैसे ही आरोपी मोटरसाइकिल और एक वाहन में तेंदुए की खाल लेकर रसगांव-बड़ेडोंगर मार्ग स्थित ग्राम बैलगांव पहुंचे, टीम ने उन्हें घेरकर पकड़ लिया। मौके से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि तेंदुए का शिकार लगभग 7 महीने पहले अवैध हथियार (भरमार बंदूक) से किया गया था। आरोपियों की निशानदेही पर मुख्य आरोपी को अगले दिन नारायणपुर जिले के ग्राम बोरावण्ड से गिरफ्तार किया गया तथा शिकार में प्रयुक्त बंदूक भी जब्त की गई। बरामद तेंदुए की खाल की लंबाई 195 सेंटीमीटर और चौड़ाई 45 सेंटीमीटर पाई गई।           वनमंडलाधिकारी दिव्या गौतम के निर्देशन में आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिलों के निवासी हैं। इस अभियान में राज्य स्तरीय टीम के अधिकारियों एवं वन विभाग के कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार और अवैध व्यापार को रोकने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य शासन की वन एवं वन्यजीव संरक्षण संबंधी योजनाओं के तहत जैव विविधता संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

सरस मेला से महिला समूह के उद्यमिता को मिलेगी व्यापक पहचान- उपमुख्यमंत्री शर्मा

रायपुर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने महिला समूहों को 11.43 करोड़ रुपए की राशि की अंतरित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत सरदार पटेल मैदान कवर्धा में आयोजित चार दिवसीय संभागीय सरस मेला का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला समूहों को विभिन्न योजनाओं के तहत 11.43 रूपये की सहायता राशि के चेक वितरण किए, जो महिला समूहों के आजीविका संवर्धन में सहायक सिद्ध होंगे।    इस दौरान पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद कवर्धा  चन्द्रप्रकाश चन्द्रवंशी, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, जिला पंचायत सीईओं  अभिषेक अग्रवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चन्द्रवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहें।        उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने सभी स्टालों का निरीक्षण कर महिला समूह के सदस्यों से उनके व्यवसाय की जानकारी ली। स्टाल में दीदियों से चर्चा करते हुए व्यवसाय के लिए कच्चे माल उसके उत्पादन और विक्रय की जानकारी ली। लखपति दीदियों से बात करते हुए उन्होंने कहा की ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार का मजबूत आधार स्तंभ बनकर उभरी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर रही है।      उन्होंने बताया कि संभागीय सरस मेला के आयोजन से दुर्ग संभाग के सभी सात जिलो के महिला स्व सहायता की दीदीयां लाभान्वित हो रही हैं। समूह द्वारा बनाये गए दैनिक उपयोग के आकर्षक सामाग्री, जैविक खादय पदार्थ एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं को विक्रय के लिए उचित मंच मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर वोकल फाॅर लोकल को बढ़ावा देने के लिए यह आयोजन राज्य शासन द्वारा निर्धारित किया गया है। इस आयोजन से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक लाभ होगा जिससे वे आत्मनिर्भर होने की दिशा मे आगे बढ़ेगी। हमारा प्रयास है कि ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महिलाओं की पूरी भागीदारी हो और वे अपने लघु व्यवसाय से उद्यमी की पहचान हासिल कर सके। मेले में आए सभी स्व सहायता समूह की दीदियों को उपमुख्यमंत्री ने उनके व्यवसाय के लिए शुभकामनाएं दी और उम्मीद जताई कि इस आयोजन से क्षेत्र की जनता को लाभ होगा। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश में 2 लाख 69 हजार से अधिक महिला स्व सहायता समूह संचालित हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा दीदी के गोठ कार्यक्रम का भी संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने नवाचारी कार्यों को साझा करती हैं। यह कार्यक्रम हिंदी के साथ-साथ गोंडी और हल्बी भाषा में भी संचालित किया जा रहा है, जिससे बस्तर अंचल की महिलाएं भी इसे आसानी से समझ पा रही हैं। इससे प्रदेशभर में महिलाओं द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की जानकारी एक-दूसरे तक पहुंच रही है। प्रदेश में 300 महतारी सदनों का निर्माण भी किया जा रहा है।      उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि सरकार महिलाओं और बुजुर्गों को मिलने वाली पेंशन राशि अब उनके गांव में ही उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रही है। इसके लिए हर ग्राम पंचायत में अटल डिजिटल सेवा केंद्र खोले जा रहे हैं। उन्होंने बनासकांठा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वहां सहकारी (कॉपरेटिव) मॉडल के माध्यम से महिलाएं बड़े उद्योगों से जुड़कर व्यापक स्तर पर दुग्ध उत्पादन कर रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं छोटे बड़े उद्योगों का संचालन कर सकती हैं। उन्होंने आगे बताया कि सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म एप्लीकेशन विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इस एप के माध्यम से आम नागरिक सीधे महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित सामग्री को आसानी से खरीद सकेंगे, जिससे महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा         उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इन आवासों के निर्माण में अब महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं डीलर दीदी के रूप में जुड़कर छड़ और सीमेंट की सब-डीलर बन रही हैं। इसके साथ ही वे सेंट्रिंग प्लेट निर्माण जैसे कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।     उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बताया कि आज सरस मेला में बैंक लिंकेज के तहत 10 करोड़ रुपए की राशि का अंतरण किया जाएगा। 271 महिला स्व सहायता समूहों को 40 लाख 65 हजार रुपए की चक्रीय निधि दी जाएगी। इसी प्रकार 172 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि के तहत सीएफएल के माध्यम से 1 करोड़ 3 लाख 20 हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे। जिससे महिलाएं अपने व्यवसाय को और मजबूत बना सकेंगी।      जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि सरकार का प्रयास है कि महिला समूहों को अधिक से अधिक संख्या में स्व रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए। यह सरस मेला महिला समूहों के उत्पादों के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध करा रहा है।  कलेक्टर  गोपाल वर्मा ने सरस मेला आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इसका 23 मार्च से 26 मार्च तक होगा। मेले में सभी आयु वर्ग के लोगो के लिए महिला समूह द्वारा तैयार किये गये आकर्षक सामान उपलब्ध है। मिलेट से बने अनेकों प्रकार के बिस्कुट, आचार, पापड़, फिनायल, दोना-पत्तल, अगरबत्ती, बिरनमाला एवं हैण्डलूम के बने बैग ईत्यादी स्थानीय स्तर पर तैयार किये गये है।     उल्लेखनीय है कि इस संभागीय सरस मेले में कबीरधाम जिले के साथ-साथ जिला राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, खैरागढ़-छूईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर, अंबागढ़ चौकी के महिला स्व सहायता समूह द्वारा प्रदर्शनी लगायी गई है। बिहान की दीदियों द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार की गई वस्तुओं का व्यापक प्रचार कर विक्रय के लिए मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे की आजीविका संवर्धन की गतिविधियों को बढ़ावा मिले

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 10 समूहों को सौंपी मैजिक वाहन की चाबी, परिवहन व्यवसाय में महिलाओं की एंट्री

रायपुर कबीरधाम में ‘दीदियों’ ने संभाली स्टीयरिंग, उपमुख्यमंत्री  शर्मा बने पैसेंजर कबीरधाम जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अभिनव और प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां अब तक पुरुष प्रधान माने जाने वाले परिवहन व्यवसाय में महिलाओं की भागीदारी का नया अध्याय शुरू हुआ है। इस अवसर पर स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने जब स्टीयरिंग संभाली तो उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा भी उनके पैसेंजर बन गए। पहले परिवहन व्यवसाय केवल पुरूष प्रधान कार्य माना जाता था, जिस मिथक को तोड़ अब समूह की महिलाएं स्टेयरिग थामकर आजीविका का सशक्त साधन तैयार करने के साथ ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी नई गति देने जा रही हैं।           सरस मेले के शुभारंभ के अवसर पर उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने जिले की 10 महिला समूहों को 'आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस' योजना के तहत सीएलएफ मैजिक वाहन वितरित किए। इस दौरान उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि इन वाहनों का वितरण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रत्येक वाहन की लागत लगभग 7.50 लाख रुपये है, जिसमें से 5 लाख रुपये केंद्र सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिए गए हैं। शेष राशि का प्रबंधन संबंधित समूहों द्वारा किया गया है, जिससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।           उन्होंने कहा कि अब स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने क्षेत्रों में यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराकर आय का स्रोत विकसित करेंगी। विशेष रूप से दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में यह पहल आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी, जहां अब तक परिवहन की कमी एक बड़ी समस्या रही है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यह पहल केवल शुरुआत है। यदि महिलाएं इस अवसर का पूरी लगन और समर्पण से उपयोग करें, तो वे “लखपति दीदी” बनने के लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकती हैं। यह योजना महिलाओं की आय में वृद्धि के साथ-साथ उन्हें आत्मसम्मान और समाज में नई पहचान दिलाने का माध्यम बनेगी।          वाहन संचालन के लिए महिलाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग दी गई है। यह वाहन 10 अलग अलग संकुल के महिला समूहों 10 विभिन्न ग्रामीण रूट पर संचालन हेतु प्रदान किया गया है। इस पहल के तहत महिला समूह की सदस्य अब टाटा मैजिक वाहन संचालित कर परिवहन व्यवसाय से जुड़ेंगी। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर उनकी भूमिका को भी सशक्त करेगा। योजना के तहत ये महिलाएं जिले के वनांचल एवं मैदानी क्षेत्रों में, जहां आवागमन के साधन सीमित हैं, वहां यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य करेंगी। इससे न केवल दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में परिवहन सुविधा सुलभ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

चुनावी दौरे पर असम गए कांग्रेस नेता रूपेश ठाकुर का निधन, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

बलौदा बाजार असम में चुनाव की गहमागहमी के बीच एक दुखद खबर सामने आई है. चुनाव प्रचार के लिए छत्तीसगढ़ से गए बलौदा बाजार के पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रूपेश ठाकुर का निधन हो गया. जानकारी के अनुसार, कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के साथ चुनाव प्रचार के लिए रूपेश ठाकुर असम गए थे. इस दौरान तबीयत खराब होने से उन्हें गुवाहाटी के हास्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां आज सुबह हार्ट अटैक आने से निधन हो गया. युवा नेता और युवाओं में लोकप्रिय रुपेश ठाकुर के निधन की खबर आते ही नगर में शोक की लहर दौड़ गई. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने रूपेश ठाकुर के असामायिक निधन पर शोक व्यक्त किया है.