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जैन समाज ने की मुख्यमंत्री साय से मुलाकात, सामाजिक विषयों पर हुई चर्चा

विधानसभा भ्रमण पर आए प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव, मानव सेवा के कार्यों में समाज की भूमिका की दी जानकारी रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर में दुर्ग जिले से आए जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को जैन समाज द्वारा मानव सेवा एवं सामाजिक उत्थान के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के भ्रमण और सदन की कार्यवाही के अवलोकन के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक प्रेरणादायक अवसर रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को निकट से देखने का अवसर मिलना गौरवपूर्ण अनुभव है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सकारात्मक गतिविधियाँ प्रदेश के समावेशी विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को उनके सामाजिक कार्यों के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर दुर्ग विधायक श्री गजेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।

राज्य में 1,79,000 बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारी

रायपुर,  राज्य में रासायनिक उर्वरको कोई कमी नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 के लिए सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक सहकारी समितियों एवं नीजि विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वैश्विक परिस्थिति के चलते डीएपी खाद के आयात में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरकों की भरपूर आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य में डीएपी की आपूर्ति में कमी से किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में 179000 बॉटल नैनो डीएपी, एनपीके उर्वरक का लक्ष्य से 25 हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का निर्धारित लक्ष्य से 50 हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। पोटाश के निर्धारित लक्ष्य 60 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 77 हजार मेट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश का भंडारण किया गया है। नैनो डीएपी जो कि ठोस डीएपी के विकल्प के रूप में बीज/थरहा, जड़ उपचार एवं बोआई/रोपाई के पश्चात खड़ी फसल में छिड़काव के लिए  उपयोगी है। नैनो डीएपी की निरंतर आपूर्ति राज्य में सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है। चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी उर्वरक के निर्धारित 3.10 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1 लाख 63 मेट्रिक टन से अधिक का भंडारण हो चुका है। डीएपी की आपूर्ति निरंतर जारी है। अभी जुलाई माह में 48 हजार मेट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति राज्य को होगी। राज्य के सहकारी क्षेत्र में उर्वरकों का भंडारण प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। राज्य के सहकारी क्षेत्र में डीएपी उर्वरक की उपलब्धता राज्य की कुल उपलब्धता का 62 प्रतिशत है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 13.18 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि में भंडारित 12.79 लाख मेट्रिक टन से लगभग 38 हजार मेट्रिक टन अधिक है। इस वर्ष एनपीके और एसएसपी का लक्षित मात्रा से क्रमशः 25,266 मेट्रिक टन एवं 71,363 मेट्रिक टन अधिक भंडारण किया गया है, जो डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राज्य में यूरिया 6 लाख मेट्रिक टन अधिक का भंडारण हुआ है। जुलाई एवं आगामी माह में यूरिया के शेष मात्रा की आपूर्ति होगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि धान में यूरिया का उपयोग तीन बार किया जाता है। प्रथम बार बोआई/रोपाई के समय में, दूसरी बार कंसा निकलने के समय में बोआई/रोपाई से तीन चार सप्ताह बाद एवं तीसरी बार गभोट अवस्था में बोआई/रोपाई के 7 से 8 सप्ताह बाद, इस प्रकार यूरिया का सितम्बर माह के मध्य तक उपयोग किया जाता है। डीएपी उर्वरक का 1.63 लाख मेट्रिक टन भंडारण हुआ है। जुलाई माह के सप्लाई प्लान के अनुसार राज्य को 48 हजार 850 मेट्रिक टन डीएपी और मिलेगी। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई माह में 25 हजार टन एनपीके की आपूर्ति संभावित है। एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति को मिलाकर कुल अतिरिक्त एनपीके 50 हजार 266 मेट्रिक टन से 22 हजार मेट्रिक टन डीएपी प्रतिपूर्ति होगी। इसी तरह एसएसपी की कुल अतिरिक्त आपूर्ति 1.47 लाख मेट्रिक टन से 50 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति होगी। इस प्रकार राज्य में एनपीके और एसएसपी के अतिरिक्त आपूर्ति से 72 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित होगी।      मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे- नैनो डीएपी, एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है।

खाद संकट पर विपक्ष का वार, मानसून सत्र में गूंजा हंगामा

रायपुर विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शून्यकाल के दौरान नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य में खाद-बीज संकट का मुद्दा उठाया. विपक्ष की ओर से खाद-बीज की कमी के मुद्दे पर स्थगन लाया गया, लेकिन मंत्री के वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष के स्थगन को अग्राह्य करने पर वेल में आकर कांग्रेस के विधायकों की जमकर नारेबाजी की. विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित की गई. स्थगन की सूचना देते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि पूरे राज्य में खाद की भारी किल्लत है. किसान इससे दुःखी हैं, आक्रोशित हैं. इस पर स्थगन स्वीकार कर चर्चा कराई जाए. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खाद संकट से किसान हलाकान है. सरकार खाद उपलब्ध कराने में नाकाम है. किसान बाहर बाजार से दोगुने भाव मे खाद खरीदने में मजबूर हैं. कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूक कर रहे हैं, वैकल्पिक खाद के उपयोग की भी जानकारी प्रशिक्षण के जरिए दी गई. फास्फेटिक खाद की आपूर्ति प्रभावित हुई, इसलिए हमने बहुत पहले से वैकल्पिक व्यवस्था की. नैनो उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसा की गई है. बड़ी तादाद में इसका भंडारण भी किया जा चुका है. मंत्री ने बताया कि वैश्विक कारणों से रासायनिक खाद की आपूर्ति प्रभावित हुई. एनपीके उर्वरक का भंडारण लक्ष्य से ज्यादा हुआ है. पोटाश सहित अन्य खाद का भी भंडारण हुआ है. 28 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोअनी हो चुका है, जो पहले से ज्यादा है. मंत्री के वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विपक्ष का स्थगन अग्राह्य किया, स्थगन अग्राह्य होने और मंत्री के वक्तव्य से असंतुष्ट कांग्रेस के विधायकों ने वेल में आकर जमकर नारेबाजी. विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई.

दलहन, तिलहन की फसल लेने पर भी किसानों को मिलेगा कृषक उन्नति योजना का फायदा

प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि मिलेगी कृषि विभाग ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश   बिलासपुर, राज्य सरकार की कृषक उन्नति योजना का फायदा धान के अलावा दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसल, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास फसल लेने वाले किसानों को भी मिलेगा। उन्हें प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। राज्य शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग ने योजना के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए है।     कृषि विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार राज्य का अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित होने से मौसमीय प्रतिकूलता एवं कृषि आदान लागत में वृद्वि के कारण कृषि आय में अनिश्चितता बनी रहती है। इसके फलस्वरूप कृषक फसल उत्पादन के लिए आवश्यक आदान जैसे उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, यांत्रिकीकरण एवं नवीन कृषि तकनीकी में पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते है। राज्य सरकार द्वारा कृषि में पर्याप्त निवेश एवं काश्त लागत मंे राहत देने के लिये कृषक उन्नति योजना प्रारंभ की गई गई है। फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन देने, दलहन तिलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार तथा इनके उत्पादन में आत्म निर्भरता के लक्ष्य के साथ चिन्हित अन्य फसलों पर आदान सहायता राशि दिये जाने का निर्णय लिया गया है।   कृषक उन्नति योजना का लाभ केवल उन्ही कृषकों को मिलेगा जिन्होने एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन कराया है। विगत खरीफ मौसम में एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे कृषक जिन्होने धान फसल लगाये हों तथा प्रदेश की सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया हों, धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल हेतु किसान पोर्टल में पंजीकृत किसानों का पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राशि रूपये 11000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जावेगी। खरीफ मौसम में दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसल, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास फसल लेने वाले किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि उपरान्त मान्य रकबे पर राशि 10000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जावेगी। योजना के दिशा-निर्देश अनुसार विधिक व्यक्तियों जैसे ट्रस्ट, मण्डल, प्राईवेट लिमिटेड, समिति, केन्द्र एवं राज्य शासन के संस्था, महाविद्यालय आदि संस्थाओं को योजना से लाभ लेने की पात्रता नहीं होगी। जो कृषक प्रमाणित धान बीज उत्पादन कार्यक्रम लेते हैं, और सामान्य धान भी सहकारी समितियों में विक्रय करते है, उनके द्वारा कुल विक्रय की जाने वाली धान की मात्रा, उनके कुल धारित रकबे की सीमा से अधिक नही होना चाहिये। इसे छ.ग. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्या. एवं छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमि. द्वारा आपसी समन्वय से सुनिश्चित किया जाएगा। कृषकों को आदान सहायता राशि का भुगतान कृषि भूमि सिलिंग कानून के प्रावधानों के अध्याधीन किया जाएगा। कृषकों को आदान सहायता राशि कृषकों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से की जावेगी । खरीफ 2025 में प्रदेश के किसानों से उपार्जित धान की मात्रा पर धान (कॉमन) पर राशि रू. 731 प्रति क्वि. की दर से अधिकतम राशि रू. 15351 प्रति एकड़ तथा धान (ग्रेड-ए) पर राशि रू. 711 प्रति क्वि. की दर से अधिकतक राशि रू. 14931 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान किया जाएगा।  बीज उत्पादक कृषकों द्वारा छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड को विक्रय किये गये धान बीज पर निर्धारित आदान सहायता राशि की कृषकवार मांग का विवरण बीज निगम द्वारा संचालक कृषि को प्रेषित किया जाएगा। संचालक कृषि द्वारा मांग अनुसार राशि छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड को उपलब्ध कराई जाएगी। उप संचालक कृषि श्री पी.डी. हथेश्वर ने बताया कि जिले में धान के अलावा अन्य फसलों में खेती लिए अरहर, कोदो, उड़द, आदि फसलों के बीजों का भंडारण समितियों में किया गया है। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा कृषि विभाग के विकास खण्डों में स्थित कार्यालयों से जानकारी प्राप्त कर सकते है।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों हेतु आंकलन शिविर 21 से

बिलासपुर, समावेशी शिक्षा अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के चिन्हांकन, आवश्यक उपकरण एवं उपचार का आकंलन एवं प्रमाणीकरण के लिए 21 जुलाई से 29 जुलाई तक शिविर का आयोजन किया जा रहा है। विकासखण्ड स्तरीय शिविर के तहत विकासखण्ड स्त्रोत केंद्र मस्तूरी में 21 जुलाई, कोटा में 22 जुलाई, तखतपुर में 23 जुलाई को शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार बिल्हा ग्रामीण एवं शहरी के लिए 25 जुलाई को पंडित देवकीनंदन दीक्षित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलासपुर में एवं समस्त विकासखण्ड हेतु 29 जुलाई को पंडित देवकीनंदन दीक्षित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलासपुर में जिला स्तरीय मेगा शिविर का आयोजन किया जाएगा। उक्त शिविर निर्धारित तिथियों को सवेेरे 9 बजे से प्रारंभ होगी। शिविरों में दिव्यांगता प्रमाण पत्र, नवीनीकरण एवं यूडीआईडी कार्ड जारी किये जायेंगे।

जैविक धरोहर का संरक्षण: मुख्यमंत्री साय ने किया वेटलैण्ड मित्र बनने का आह्वान

नवा रायपुर में वेटलैण्ड एवं जैव विविधता संरक्षण पर उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन रायपुर, जैव विविधता एवं आर्द्रभूमियों (वेटलैण्ड्स) के संरक्षण के उद्देश्य से आज नवा रायपुर स्थित दण्डकारण्य अरण्य भवन में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा सहित कैबिनेट के सभी मंत्री एवं विधायकगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना केवल आधारभूत ढांचे के विकास से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जैविक विविधता की रक्षा से ही पूर्ण होती है। उन्होंने आह्वान किया कि हर जनप्रतिनिधि व नागरिक जैव विविधता एवं वेटलैण्ड संरक्षण के लिए व्यक्तिगत दायित्व समझें और 'वेटलैण्ड मित्र' बनकर इस अभियान को जनांदोलन में परिवर्तित करें। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि जैव विविधता और वेटलैण्ड्स का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का सवाल भी है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से जैव विविधता के संरक्षण में भागीदारी सुनिश्चित करने और “वेटलैण्ड मित्र” बनकर जनजागरण फैलाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश चतुर्वेदी ने व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने 1992 के अर्थ सम्मिट, जैव विविधता अधिनियम 2002, राष्ट्रीय जैव विविधता बोर्ड की भूमिका और जैव विविधता प्रबंधन समितियों की संरचना एवं कार्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य है, जहां जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं। आर्द्रभूमि संरक्षण के संदर्भ में प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वेटलैण्ड्स पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और जिला स्तरीय आर्द्रभूमि संरक्षण समितियों के गठन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि इन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर वेटलैण्ड्स की निगरानी एवं संरक्षण को मजबूती मिल रही है। कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि राज्य का गिधवा-परसदा पक्षी अभ्यारण्य अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित रामसर साइट बनने की पात्रता रखता है। इसके अतिरिक्त, बलौदाबाजार जिले के खोखरा ग्राम को छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट के रूप में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। कार्यशाला के अंत में सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से “वेटलैण्ड मित्र” के रूप में जुड़कर जैव विविधता और आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। यह भागीदारी राज्य में पर्यावरणीय चेतना को जनआंदोलन का रूप देने में सहायक होगी। इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव (वन)  ऋचा शर्मा, छत्तीसगढ़ वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव राजेश कुमार चंदेले सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे।

महंगी लेकिन असरदार: खेखसी के चमत्कारी फायदे जानकर चौंक जाएंगे आप!

रायपुर बरसात का मौसम लगते ही राजधानी समेत पूरे प्रदेश में अब सबसे ताकतवर सब्जी खेखसी दिखाई देने लगी है. पौष्टिकता से भरपूर और मौसमी सब्जी होने की वजह से इसकी डिमांड बढ़ गई है. राजधानी के अलग-अलग बाजारों में खेखसी 400 रुपए प्रति किलो बिक रही है. बारिश के दिनों में यह उस जगह पर उगती है, जहां पर घने कटीले पेड़-पौधे होते हैं. यह साल में सिर्फ एक से दो महीने तक ही बाजार में दिखाई देती है. भरपूर प्रोटीन और जिंक  खेखसी पूरी तरह से ऑर्गेनिक सब्जी है. इसमें किसी भी प्रकार के कीटनाशक और रासायन का छिड़काव नहीं किया जाता. विशेषज्ञों की माने तो प्रारंभिक अनुसंधान से पता चला है कि खेखसी में प्रोटीन और जिंक प्रचुर मात्रा में होता है. इसके अतिरिक्त इसमें आयरन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, कार्बोहाइड्रेट, कॉपर और पोटेशियम भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. ये बीमारियां होंगी दूर ऐसा माना जाता है कि खेखसी में मौजूद खनिज तत्व और औषधीय गुणों के कारण ब्लड प्रेशर, मधुमेह और कैंसर जैसी गंभीर चौमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है. यह सर्पदंश के बाद होने वाले नुकसान से बचाव में भी सहायक माना गया है. खेखसी लकवा, पीलिया, बवासीर, बेहोशी, बुखार, पेट के संक्रमण को खत्म करने में मदद करती है. सिरदर्द, कान का दर्द, खांसी और खुजली जैसी समस्याओं की रोकथाम में भी इसके सेवन को उपयोगी माना गया है.

गेवरारोड-रायपुर ट्रेन सेवा बहाल, दो साल की परेशानी खत्म

रायपुर गेवरारोड-रायपुर-गेवरारोड पैसेंजर ट्रेन दो साल और 169 दिन के बाद एक बार फिर बहाल की जा रही है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन ने 13 डेमू और मेमू पैसेंजर ट्रेनों को बहाल करने की घोषणा की है, जिसमें गेवरारोड-रायपुर-गेवरारोड मेमू पैसेंजर भी शामिल है. यह ट्रेन 16 और 17 जुलाई से फिर से परिचालन शुरू करेगी, जिससे कोयलांचल क्षेत्र के यात्रियों समेत दिन में सफर करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी. रायपुर-गेवरारोड मेमू पैसेंजर (गाड़ी क्रमांक 68746) रायपुर रेलवे स्टेशन से दोपहर 1:50 बजे रवाना होगी और रात 7:30 बजे गेवरारोड पहुंचेगी. वहीं, अगले दिन गेवरारोड से सुबह 6:30 बजे प्रस्थान करने वाली गेवरारोड-रायपुर मेमू पैसेंजर (गाड़ी क्रमांक 68745) सुबह 11:25 बजे रायपुर पहुंचेगी. इस ट्रेन को 29 जनवरी 2023 को विभिन्न कारणों से रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद से यात्री इसे बहाल करने की मांग कर रहे थे. इस ट्रेन के शुरू होने से गेवरारोड से रायपुर तक सफर करने वाले यात्रियों के लिए पहली सुबह की गाड़ी उपलब्ध होगी. साथ ही, दिन के समय रायपुर और बिलासपुर से गेवरारोड आने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी. अभी तक रायपुर जंक्शन से कोरबा तक दिन में 10 घंटे की अवधि में कोई यात्री ट्रेन नहीं थी. सुबह 7:20 बजे लिंक एक्सप्रेस के बाद यात्रियों को शाम 6:00 बजे रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस का इंतजार करना पड़ता था, जो सफर को मुश्किल बनाता था. अब मेमू लोकल के शुरू होने से दोपहर में गाड़ी उपलब्ध होगी, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी. लंबे इंतजार के बाद मानी गई मांग गेवरारोड से रायपुर तक कोई सीधी यात्री ट्रेन न होने के कारण यात्रियों को कोरबा रेलवे स्टेशन तक 15-20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी. केवल बिलासपुर तक चलने वाली एक गाड़ी ही उपलब्ध थी. कोयलांचल के लोगों ने लंबे समय से इस ट्रेन की बहाली की मांग की थी, जो अब पूरी हो गई है. यह कदम नियमित रूप से रायपुर और बिलासपुर से सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगा.

सावन सोमवार के पहले दिन हटकेश्वरनाथ मंदिर में शिवभक्तों की भक्ति का सागर

रायपुर 11 जुलाई से श्रावण महीने की शुरुआत हो चुकी है। सावन के पहले सोमवार को रायपुर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। सुबह 5 बजे से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। राजधानी के पूरे शिवालय हर-हर महादेव की जयघोष से गूंज रहे हैं। रायपुर के महादेवघाट स्थित हटकेश्वरनाथ मंदिर में सावन के पहले दिन भारी संख्या में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान भगवान हटकेश्वरनाथ महादेव की मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। हरिद्वार के लक्ष्मण झूला की तर्ज पर यहां बने लक्ष्मण झूला और खारून नदी में नाव की सवारी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पास में बने गॉर्डन यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। रायपुर सहित अन्य जिलों के सैलानी यहां बड़ी संख्या पहुंचकर इसका आनंद लेते हैं। शहर की जीवनदायिनी नदी 'खारुन' तट पर स्थित ऐतिहासिक हटकेश्वरनाथ मंदिर का विशेष महत्व है। कल्चुरी राजाओं ने कराया था मंदिर का निर्माण 1402 ई में कल्चुरी वंश के राजा रामचंद्र के पुत्र ब्रह्मदेव राय के शासन काल में हाजीराज नाइक ने मंदिर का निर्माण करवाया था। ऐसी मान्यता है कि यहां नंदी महाराज के कानों में जो भक्त फरियाद या मन्नत मांगते हैं, उसकी भगवान शिव मुरादें जरूर पूरी करते हैं। सावन के महीने में यहां रायपुर और प्रदेश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ के कई जिलों से श्रद्धालु कांवर लेकर पहुंचते हैं। हर साल कांवर पदयात्रा भी निकाली जाती है। ये है धार्मिक मान्यता धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, जहां भगवान श्रीराम लंका पर चढ़ाई के लिए रामेश्वरम में समुंद्र पर पुल बनाने की योजना बनाई तो उस समय बजरंग बली को शिवलिंग लाने के लिए कहा गया था। इस पर बजरंग बली शिवलिंग लाने गए। इस दौरान शिवलिंग लाने में काफी देर हुई, तो भगवान राम ने रामेश्वरम में रेत से ही विधि-विधान से पूजा अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना कर दी थी। बजरंग बली को किसी नदी के किनारे उस शिवलिंग को रखने के लिए कहा गया। कहा जाता है कि भगवान हनुमान ने रायपुर में खारून नदी के तट पर शिवलिंग रखकर चले गए, जो कालांतर में हटकेश्वर नाथ, महादेव घाट के  नाम से विख्यात हुआ। सावन सोमवार व्रत का महत्व सावन सोमवार व्रत रखने से विवाह के योग बनते हैं। इस व्रत को करने से माता पार्वती को शिवजी पति स्वरूप में प्राप्त हुए। इस वजह से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए सावन सोमवार व्रत रखा जाता है। इसके अलावा शिव कृपा प्राप्ति के लिए सावन सोमवार व्रत रखते हैं। सावन सोमवार व्रत और पूजा विधि जो लोग सोमवार व्रत पूरे साल रखना चाहते हैं, वे सावन के पहले सोमवार से इसकी शुरूआत कर सकते हैं। सावन सोमवार व्रत के नियमों का पालन करते हुए शिव पूजा करते हैं। शिव जी को बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, गाय का दूध, गंगाजल, भस्म, अक्षत्, फूल, फल, नैवेद्य आदि चढ़ाते हैं। सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ करते हैं। शिव चालीसा, शिव रक्षा स्तोत्र पढ़ते हैं। शिव मंत्रों का जाप करते हैं। सावन के सभी सोमवार व्रत रखना चाहिए। इससे आपकी मनोकामना पूरी होगी।

नक्सली हिंसा का शिकार बने निर्दोष ग्रामीण, IED विस्फोट में घायल

बीजापुर छत्तीसगढ़ के कोर नक्सल क्षेत्र बीजापुर जिले में नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर IED ब्लास्ट होने से 3 ग्रामीण घायल हो गए. रविवार की शाम तीनों ग्रामीण थाना मद्देड़ अंतर्गत धनगोल गांव के जंगल में मशरूम (फुटु) इकट्ठा करने गए हुए थे. इसी दौरान वे माओवादियों द्वारा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने लगाए गए प्रेशर IED की चपेट में आ गए. इस हादसे में 1 बालिका सहित 3 ग्रामीण बुरी तरह घायल हो गए. घायल ग्रामीण का विवरण – 1. कविता कुड़ियम (उम्र 16 वर्ष), पिता- नागैया, निवासी- धनगोल, थाना– मद्देड़, जिला– बीजापुर. 2. कोरसे संतोष, पिता- लच्छा, उम्र 26 वर्ष, निवासी- धनगोल, थाना – मद्देड़, जिला – बीजापुर. 3. चिड़ेम कन्हैया, पिता- किस्टैया, उम्र- 24 वर्ष, निवासी- धनगोल, थाना – मद्देड़, जिला – बीजापुर. जानकारी के मुताबिक, प्रेशर IED विस्फोट में घायल ग्रामीणों के पैर एवं चेहरे में चोटें आई हैं. सूचना मिलते ही उन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल बीजापुर भर्ती किया गया है जहां इनका उपचार जारी है. प्रशासन की जनता से अपील प्रशासन ने जनता से अपील की है कि जंगल क्षेत्रों में भ्रमण करते समय विशेष सतर्कता बरतें और किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस थाना या निकटतम सुरक्षा कैम्प को दें.