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राजनाथ सिंह का डोनाल्ड ट्रंप पर तगड़ा पलटवार, बोले- सबके बॉस तो हम ही हैं

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में रेल कोच फैक्ट्री की आधारशिला रखने पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमला बोला। इशारों में ही सही, राजनाथ सिंह ने टैरिफ वॉर के चलते बढ़ती टेंशन के बीच कहा कि कुछ लोग खुद को दुनिया का बॉस समझते हैं लेकिन उन्हें नहीं पता कि सबके बॉस तो हम हैं। ट्रंप का नाम लिए बगैर रक्षा मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को भारत की तरक्की पसंद नहीं आ रही है। रायसेन में अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें भारत की तेजी से हो रही तरक्की पसंद नहीं आ रही है। वे इसे पसंद नहीं कर रहे हैं। 'सबके बॉस तो हम हैं'। वो सोच रहे हैं कि भारत इतनी तेजी से कैसे आगे बढ़ रहा है और कई लोग यह कोशिश कर रहे हैं कि भारत में बनी, भारतीयों के हाथों से बनी चीजें उन देशों में बनी चीजों से ज्यादा महंगी हो जाएं, ताकि जब चीजें महंगी होंगी तो दुनिया उन्हें नहीं खरीदेगी। यह कोशिश की जा रही है। लेकिन भारत इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि अब दुनिया की कोई भी ताकत भारत को दुनिया की एक बड़ी शक्ति बनने से नहीं रोक सकती। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि जब 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, उस समय भारत के रक्षा उत्पाद की चीजें जो एक्सपोर्ट होती थीं,उनकी कीमत 600 करोड़ रुपये थी। उन्होंने कहा कि आपको जानकर खुशी होगी कि हम लोग अब 24000 हजार करोड़ से ज्यादा के डिफेंस के उत्पाद दूसरे देशों को भेज रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह नए भारत का नया रक्षा क्षेत्र है। यही भारत की ताकत है, यही नए भारत का नया रक्षा क्षेत्र है और निर्यात लगातार बढ़ रहा है। पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पहलगाम की घटना के बाद उन्होंने मान लिया था कि भारत शांत बैठ जाएगा। प्रधानमंत्री का संकल्प था कि हम इसका मुंह तोड़ जवाब देंगे। ऐसी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि धर्म पूछकर मारेंगे। हम किसी की हत्या में विश्वास ही नहीं करते हैं। हमने ठान लिया था कि हम धर्म पूछकर नहीं मारेंगे हम उनका कर्म देखकर मारेंगे और हमने कर्म देखकर मारा।  

सीएम मोहन यादव ने बाढ़ प्रभावितों का हाल-चाल लिया, कहा सरकार और जनता का पारिवारिक संबंध है

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 अगस्त को आपदा प्रभावित लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये चर्चा कर हालचाल जाना। उन्होंने भोपाल में मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से बाढ़ प्रभावितों को 30 करोड़ रुपये की राहत राशि दी। उन्होंने आपदा प्रभावित लोगों से कहा कि सरकार हर संकट में उनके साथ खड़ी है। सरकार और जनता का पारिवारिक रिश्ता है। यही वजह रही कि इतने बड़े संकट का भी सब ने मिलकर सामना किया और जिंदगियां बचा ली गईं। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि सभी जिलों को आपदा से निपटने से लिए अग्रिम राशि भी दी गई है। ताकि, संकट के समय जनता को सरकार का साथ महसूस हो। उन्होंने जनता से बारिश में सावधान रहने की अपील भी की। सीएम डॉ. यादव ने जनता से कहा कि आने वाले सभी त्योहार खासकर स्वतंत्रता दिवस, हर घर तिरंगा को हर्षोल्लास के साथ मनाएं। उन्होंने कबीर दास के दोहे के साथ अपनी बात समाप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे यहां कहा गया है कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। मेरे लिए भी आपकी सेवा ही ईश्वर की सेवा के समान है। सरकार और समाज अलग-अलग नहीं हैं। हम सब संकट की घड़ी में बंधु भाव के साथ एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं। आपको अगर कोई तकलीफ आएगी तो हम चैन से नहीं बैठ सकते। हमारे मन में भी समान पीड़ा होती है। मैंने कल्पना नहीं थी कि इतनी असामान्य बाढ़ आएगी। हम सभी ने बाढ़ के अलग-अलग रूप देखे हैं। इस संकट की घड़ी में कोई जिला ऐसा नहीं है, जो छूट गया हो। हम लगातार जनता के संपर्क में रहे। जहां-जहां जरूरत महसूस हुई वहां-वहां एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सेना के जवानों को सक्रिय किया गया। 24 हजार बाढ़ प्रभावितों के लिए राशि जारी सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आज हमने सिंगल क्लिक के जरिये 24 हजार बाढ़ प्रभावितों के लिए 30 करोड़ की राशि जारी की है। मैंने खुद भी शिवपुरी-गुना-अशोकनगर सहित बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी हम 28 करोड़ की राशि बाड़ पीड़ितों के लिए जारी कर चुके हैं। इस तरह हमने 58 करोड़ की राशि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जारी की है। साल 2025-26 में अभी तक हम 123 करोड़ से ज्यादा की राशि आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए जारी कर चुके हैं। हमारा और आपका पारिवारिक रिश्ता है। इस आपदा की घड़ी में जिन-जिन सामाजिक संगठनों ने जनता की मदद की है, मैं उनका भी आभार मानता हूं। इस बार सामान्य से 37 फीसदी से ज्यादा बारिश हुई है। हमारी सरकार संकट की इस घड़ी में जनता के साथ खड़ी है। सीएम डॉ. यादव ने सुनाए दौरे के किस्से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिवपुरी दौरे का किस्सा सुनाते हुए कहा कि वहां पिता-पुत्र 36 घंटों तक छत पर फंसे रहे। जब हम उनसे मिले तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि हमें लग नहीं रहा कि हम जिंदा हैं। हम बहनों को भी धन्यवाद देते हैं। गुना में उनका पूरा सामान खराब होने के बावजूद जब हम उनसे मिलने गए तो वे राखी लेकर तैयार थीं। इससे पता चलता है कि हमारे संस्कार और आत्मीय भाव कितने गहरे हैं। बहनों ने राखी बांधी, तिलक लगाया और फिर जरा सा कष्ट बताया। इस संकट का हम सभी ने मिलकर सामना किया।  

मध्यप्रदेश में 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता’ अभियान, स्कूलों में 3 चरणों में हो रहा संपन्न

भोपाल  प्रदेश के स्कूलों में देश प्रेम, एकता, देशभक्ति की भावना और राष्ट्रीय ध्वज के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता’ अभियान मनाया जा रहा है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भी जारी किये हैं।  यह अभियान प्रदेश के स्कूलों में 3 चरणों में संपन्न हो रहा है। पहला चरण 2 से 8 अगस्त तक संपन्न हो चुका है। दूसरा चरण 9 अगस्त से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा। अभियान का तीसरा चरण 13 अगस्त से 15 अगस्त तक होगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने दिये गये निर्देशों में कहा है कि जिलों में स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों के नेतृत्व में तिरंगे के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाये। बच्चों को राष्ट्रीय ध्वज के बारे में जानकारी दी जाये। स्कूलों में एनसीसी और एनएसएस यूनिट के माध्यम से ‘हर घर तिरंगा’ कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार किया जाये। तिरंगा पर केन्द्रित बच्चों की रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की जाये। राष्ट्रीय ध्वज एवं इसके इतिहास पर स्कूलों में व्याख्यान के विशेष कार्यक्रम आयेाजित किये जायें। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि स्कूलों में होने वाली तिरंगा रैलियों में बच्चों के साथ अधिक से अधिक नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाये। दिये गये निर्देशों में कहा गया है कि विद्यार्थियों द्वारा तिरंगे के साथ सेल्फी लेकर उसे www.harghartiranga.com वेबसाइट पर अपलोड भी किया जाये। 

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गोवर्धन में मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेन्द्रदास जी महाराज का लिया आशीर्वाद

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल सपरिवार सुरश्याम गौशाला, गोवर्धन पहुंचे। उन्होंने मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेन्द्रदास जी महाराज का दिव्य आध्यात्मिक सान्निध्य प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि महाराज जी के परम पावन सान्निध्य में बिताया गया प्रत्येक क्षण उनके जीवन की अमूल्य धरोहर है, जिसने उन्हें नव आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण किया है। उन्होंने कहा कि पूजनीय संत समाज की कृपा से वे लोकमंगल हेतु निरंतर कार्यरत हैं। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सुरश्याम गौशाला में गौसेवा एवं धार्मिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की और उपस्थित श्रद्धालुओं से आत्मीय संवाद किया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भुजरिया पर्व की दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्नेह एवं समरसता के पर्व भुजरिया (कजरिया) पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी लोक संस्कृति की अनमोल धरोहर, यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली प्रदान करे, यही प्रार्थना है।  

MP में बहन ने दिखाई भाई के लिए अपार मोहब्बत, दिया ऐसा उपहार जो बदल दे जिंदगी

जबलपुर रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर 14 वर्षीय बहन ने अपने पांच वर्षीय भाई को जीवनरक्षक स्टेमसेल का उपहार दिया है। दो साल की उम्र में उसका भाई सिकल सेल (अनुवांशिक रक्त विकार) जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ गया था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सकों ने नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा निवासी किशोरी का स्टेम सेल लेकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट के माध्यम से मासूम को नई जिंदगी दी है। पूरा इलाज आयुष्मान योजना से निश्शुल्क किया गया। एफेरेसिस तकनीक के माध्यम से स्टेम सेल प्राप्त कर ट्रांसप्लांट बीएमटी यूनिट की प्रभारी डॉ. श्वेता पाठक ने बताया कि रोहन (परिवर्तित नाम) को दो वर्ष की उम्र में सिकल सेल की बीमारी की पुष्टि हुई थी और वह नियमित रूप से खून चढ़वाने के लिए अस्पताल में उपचाररत था। संस्थान में सुविधा प्रारंभ होते ही उसके बोन मैरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की गई। रोहन के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए उसकी बहन से स्टेम सेल मैचिंग की गई और एफेरेसिस तकनीक के माध्यम से स्टेम सेल प्राप्त कर ट्रांसप्लांट किया गया।   चिकित्सकों ने टीमवर्क से किया कार्य ट्रांसप्लांट में कालेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना के नेतृत्व में चिकित्सकों ने टीम वर्क से कार्य किया। इसमें अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा, उप अधीक्षक डॉ. ऋचा शर्मा, डॉ. लक्ष्मी सिंगौतिया सुपरिटेंडेंट, कैंसर अस्पताल, डॉ. मोनिका लाजरस (एचओडी पीडियाट्रिक्स) सहित नर्सिंग स्टाफ से पूनम, एलिजाबेथ, रिंकी का विशेष सहयोग रहा। बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट की ऐसी पड़ी नींव महत्वपूर्ण है कि इसी साल फरवरी में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआइ) के दूसरे फ्लोर पर करीब चार हजार वर्गफीट क्षेत्र में अत्याधुनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत हुई थी। इसमें 10 निजी वार्ड बनाए गए हैं जो कि पूरी तरह वातानुकूलित हैं और इस रोग से पीड़ित बच्चों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने की दिशा में एक सफल प्रयास की शुरुआत माना जाता है। यूनिट की प्रभारी डॉ. श्वेता पाठक ने इसको आकार-प्रकार देने में विशेष भूमिका का निर्वाह किया है। 

पीएम जनमन योजना में जनजातीय बसाहटों में बढ़ी आधारभूत सुविधाएं

सहरिया, बैगा, भारिया परिवारों को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ भोपाल  जनजातीय बसाहटों को आधारभूत सुविधाओं से संपन्न बनाने और जनजातीय परिवारों में खुशियां लाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने पीएम जनमन योजना में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पीएम जनमन योजना में 5800 जनजातीय बसाहटों में रह रहे 2 लाख 62 हजार से ज्यादा सहरिया, बैगा और भारिया परिवारों को विभिन्न विभागों की योजनाओं का सीधा लाभ मिला है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान भारत, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि, राशन कार्ड देने में 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। वे हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ लेने में इन दस्तावेज का उपयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, बहुउद्देशीय केंद्र, हर घर नल से जल, हर घर बिजली, सबको पोषण, सबको स्वास्थ्य, सबको शिक्षा, गांव-गांव मोबाइल नेटवर्क, वन धन विकास केंद्र बनाने जैसी परिवर्तनकारी योजनाओं को इन बसाहटों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी योजनाओं से संबंधित विभागों को दी गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। जनजातीय परिवारों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने में शिवपुरी जिला न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में आगे है। यहां 16 हजार से ज्यादा आवास बन चुके हैं। शहडोल में 10711, श्योपुर 7639, उमरिया में 6410, छिंदवाड़ा में 5479 मंडला में 5446 आवास बने हैं। अन्य जिलों में विभिन्न स्तरों पर तेजी से काम चल रहा है। सड़क सुविधा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1570 बसाहटों में 2265 किमी सड़कें बनाने का लक्ष्य है। राष्ट्रीय ग्रामीण अधोसंरचना विकास ऐजेंसी को 269 किमी की 117 सड़कें बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। हाल में 739 किमी लंबाई की 377 सड़कों की स्वीकृति मिल गई है। इनके निर्माण के लिये टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 17 जिलों में 125 बहुउद्देशीय केंद्रों के निर्माण का काम चल रहा है। सबसे ज्यादा 33 शिवपुरी और 24 श्योपुर में बन रहे हैं। हर घर नल से जल हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए 4843 बसाहटों में रह रहे 12 लाख 30 हजार घरों में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य है। अब तक 8,43,258 घरों में नल से जल पहुंच रहा है। शेष घरों में दिसंबर माह तक पहुंच जाएगा। सबको स्वास्थ्य सबको स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से 3132 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं और 1268 में मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं। इस प्रकार 4400 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच गई हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से अब तक 4 लाख से अधिक रोगियों का परीक्षण किया गया है। विशेष रूप से टीबी और सिकल सेल की जांच की गई है। करीब 27000 रोगियों की फिजियोथैरेपी कराई गई। विद्युत सुविधा जनजातीय परिवारों को ग्रिड के माध्यम से हर घर बिजली देने में 24,800 घरों में विद्युत सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। दुर्गम क्षेत्रों में आफग्रिड के माध्यम से नवकरणीय ऊर्जा विभाग के सहयोग से 11 जरूरतमंद जिलों के 2060 गांवों में विद्युत सुविधा देने का काम तेजी से चल रहा है। सभी बसाहटों में पोषण देने के लिए 704 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 628 बन गये हैं और शेष अगले दो महीनों में बन जायेंगे। इसके अलावा 76 नये आंगनवाड़ी केन्द्र खोलने का भी प्रस्ताव है। इन केन्द्रों में बच्चों के पोषण का स्तर लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। सबको शिक्षा सबको शिक्षा सुविधा देने के लिए जिन जनजातीय बसाहटों के पास प्राथमिक शाला की सुविधा दी जा रही है। वर्तमान में 16 जिलों में 106 छात्रावास स्वीकृत किए गये हैं। मोबाइल सुविधाओं को सुदृढ़ बनाते हुए 15 जिला में उपयुक्त स्थान पर 4जी मोबाइल नेटवर्क दिया जा रहा है। टावर के लिये स्थान चिन्हित कर लिये गये हैं। इसके अलावा वन एवं तकनीकी शिक्षा विभागों द्वारा 11 जिलों में 83 वन-धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इससे 5000 जनजातीय हितग्राही जुड़े हैं। सभी को उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम और उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वन-विकास केंद्र का बिजनेस प्लान बनाने में प्रशिक्षण दिया गया है।  

निवेश मित्र नीतियों से हुई मप्र के निर्यात में 6% की बढ़ोतरी

अब तक का सबसे ज्यादा 66,218 करोड रुपए का हुआ निर्यात भोपाल मध्यप्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्यात में अपनी रेंकिंग में सुधार करते हुए अब तक का सबसे ज्यादा 66,218 करोड रुपए का निर्यात किया है। निर्यात में 6% की बढ़ोतरी हुई है जो फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया उत्पादों में निर्यात बढ़ने के फलस्वरूप हुई है। फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मर्केंडाइज एक्सपोर्ट में 66,218 करोड रुपए का योगदान है जबकि स्पेशल इकोनामिक जोन में सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने राज्य के एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो में 4038 करोड रुपए का योगदान दिया है। इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास बढ़ने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात में मध्यप्रदेश की रैंकिंग 15 से 11 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया आधारित कृषि उत्पाद मिलाकर मध्यप्रदेश ने विश्व बाजार के प्रतिमानों के अनुसार निर्यात रैंकिंग में बढ़ोतरी की है। निवेश मित्र औद्योगिक विकास की नीतियां, औदयोगीकरण का बढ़ता आधार मध्यप्रदेश का निर्यात बढ़ने के प्रमुख कारण है। इसके अलावा निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली अधोसंरचना में बढ़ोतरी होना और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों का मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित होने को भी प्रमुख है। पिछले साल तक फार्मास्यूटिकल, एनिमल फीड, मशीनरी, एल्यूमिनियम और टेक्सटाइल पांच ऐसे निर्यात सेक्टर थे जो प्रथम पांच निर्यातकों में शामिल थे। मुख्य रूप से बांग्लादेश, फ्रांस, यूएई और नीदरलैंड में मध्यप्रदेश को निर्यात का बड़ा मार्केट मिला है। फार्मास्यूटिकल और मशीनरी के निर्यात में मध्यप्रदेश के लिए सबसे बड़ा मार्केट यूएस है। मध्यप्रदेश से वर्ष 2024-25 में 11,968 करोड रुपए के फार्मास्यूटिकल्स, 6062 रुपए के एनिमल फीड, 4795 करोड रुपए के एल्युमिनियम, 4656 रुपए का निर्यात और 5497 रुपए की मशीनरी का निर्यात हुआ। पिछले छह वर्षों से मध्यप्रदेश का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019-20 में 37,692 करोड रुपए, 2020-21 में 47,959 करोड रुपए, 2021-22 में 58,407 करोड रुपए, 2022-23 में 65,878 करोड रुपए, 2023-24 में 65,255 करोड़ रुपए और 2024-25 में 66,218 करोड रुपए का निर्यात मध्यप्रदेश से हुआ। इसमें स्पेशल इकोनामिक जोन से हुए निर्यात के आंकड़े भी शामिल है। धार जिला निर्यात में प्रथम है। यहां से 17,830 करोड रुपए का निर्यात हुआ जबकि इंदौर से 13,500 करोड रुपए का निर्यात हुआ। यहां से फार्मास्यूटिकल, ऑटोमेटिक और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से निर्यात हुआ। उज्जैन ने भी अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2,288 करोड रुपए का निर्यात किया, जिसमें इंडस्ट्रियल, कृषि आधारित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास पर फोकस रखते हुए और व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने से यह उपलब्धि हासिल हुई है। इससे न सिर्फ राज्य की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिली है बल्कि देश के कुल निर्यात में भी मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है।  

Bhopal पुलिस ने मछली गैंग पर कसा शिकंजा, अब तक 15 गिरफ्तार और 50 से ज्यादा पूछताछ

भोपाल राजधानी में चर्चित हाई-प्रोफाइल ड्रग्स-हथियार तस्करी मामले में पुलिस ने यासीन मछली और शाहवर मछली के नेटवर्क की परत-दर-परत पोल खोल दी है। यह खुलासा न केवल ड्रग माफिया के काम करने के तरीके को उजागर करता है, बल्कि शहर के पार्टी कल्चर की उस अंधेरी सच्चाई को भी सामने लाता है, जहां नशा मौज-मस्ती से आगे बढ़कर संगठित अपराध का बड़ा जरिया बन चुका है। 15 की गिरफ्तारी, 50 से पूछताछ अब तक क्राइम ब्रांच यासीन के 15 करीबियों को गिरफ्तार कर चुकी है और 50 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है। पूरे रैकेट का पर्दाफाश यासीन और शाहवर के मोबाइलों में मिली ड्रग चैट और फोटो से हुआ है। रिमांड के दौरान पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि इस रैकेट में 50 से ज्यादा लोग काम करते थे, जो दिल्ली और राजस्थान से माल लाकर भोपाल में सप्लाई करते थे। यासीन पब और क्लब में आने वाले युवाओं को टारगेट करता था। शुरुआत में उन्हें मुफ्त ड्रग दी जाती थी ताकि लत लग जाए, फिर महंगे दामों में ड्रग बेचे जाते थे।   अब तक ये 15 हुए गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों में सोहेल खान, समीर उद्दीन, आशू उर्फ शाहरूख, सैफुद्दीन, यासीन उर्फ मिंटू उर्फ मछली, शाहवर मछली, जगजीत सिंह उर्फ जग्गा, अंशुल सिंह उर्फ भूरी, अंकित कहार, अमन दहिया, शुभम शर्मा, शकीर उर्फ छोटू, तौफीक निजामी, थाई महिला बेंचामत मून, नाइजीरियन नागरिक और चार अन्य शामिल हैं।

जनजातीय संग्रहालय में संभावना में नृत्य गायन एवं वादन प्रस्तुति हुई

भोपाल  मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य, गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि "संभावना" का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 10 अगस्त को अग्नेश केरकेट्टा एवं साथी, भोपाल द्वारा उरांव जनजाति नृत्य सरहुल एवं उमाशंकर नामदेव एवं साथी, दमोह द्वारा राई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। अग्नेश केरकेट्टा एवं साथी, भोपाल द्वारा उरांव जनजाति नृत्य सरहुल की प्रस्तुति दी गई। मध्यप्रदेश के जनजातियों में उराँव जनजाति रायगढ़ जिले की जशपुर तहसील के आसपास निवास करती हैं। उराँव जनजातियों का सर्वाधिक प्रसिद्ध नृत्य है सरहुल। उराँव जनजाति शाल सरई वृक्ष में अपने ग्राम देवता का निवास मानती हैं, इसलिए वर्ष में एक बार चैत्र मास की पूर्णिमा को शाल वृक्ष की पूजा करते हैं और शाल वृक्ष के आसपास नृत्य करते हैं। शाल वृक्ष पर सफेद कपड़े का झण्डा फहराया जाता है।  सरहुल एक समूह नृत्य है इसमें युवक-युवतियां और प्रौढ़ उरांव शामिल होते हैं। नृत्य में पद संचलन वाद्य तालों पर नहीं बल्कि गीतों की लय और तोड़ पर होता है। नृत्य धीमी गति के साथ प्रारंभ होता है और अत्यन्त तीव्र गति के चरम पर समापन। इस नृत्य में पुरूष नर्तक एक विशेष प्रकार का साफा बाँधते हैं तथा महिलाएँ अपने जूड़े में बगुला पंख की सफेद कलंगी लगाती हैं। नर्तकों के वस्त्र प्रायः सफेद होते हैं। सरहुल नृत्य के प्रमुख वाद्य मांदर, झाँझ और नगाड़ा है। कहीं-कहीं चौमुखा चकोल भी बजाते हैं। उमाशंकर नामदेव एवं साथी, दमोह द्वारा राई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। बुन्देलखण्ड अंचल की अपनी जातीय परम्परा मूलतः शौर्य और श्रृंगार परक है। यह अकारण नहीं है कि बुन्देलखण्ड के प्रख्यात लोकनृत्य राई में एक ओर तीव्र शारीरिक चपलता, बेग, अंग, मुद्राएं और समूहन के लयात्मक विन्यास है, वहीं दूसरी ओर नृत्य के लास्य का समावेश और लोक कविता के रूप में उद्याम श्रृंगार परक अर्थों की नियोजना। इसमें ऊर्जा, शक्ति और लालित्य एकमेक है। इस नृत्य को बुन्देलखण्ड में मंचीय नृत्य की स्थिति मात्र में सीमित नहीं किया गया है। बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे के जन्म के समय और विवाह के अवसर पर राई नृत्य का आयोजन प्रतिष्ठा मूलक माना जाता है। अनेक बार किसी अभीप्सित कार्य की पूर्ति होने या मनौती होने पर भी राई नृत्य के आयोजन किये जाते हैं। राई एक जीवन्त कलात्मक हिस्सेदारी की तरह ही है। जीवन का अटूट हिस्सा जिसमें आनंद की स्वच्छंद अभिव्यक्ति मनुष्य की जीवनी शक्ति जैसा प्रकट होता है। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय परिसर में प्रत्येक रविवार दोपहर 2 बजे से आयोजित होने वाली गतिविधि में मध्यप्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की बहुविध कला परंपराओं की प्रस्तुति के साथ ही देश के अन्य राज्यों के कलारूपों को देखने समझने का अवसर भी जनसामान्य को प्राप्त होगा।