samacharsecretary.com

स्वर्ण पदक के साथ बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई

भोपाल  भुवनेश्वर में 24 से 28 जून 2026 तक आयोजित 65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के प्रथम दिवस सायंकालीन सत्र में मध्यप्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ी देव मीणा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पोल वॉल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। देव ने न केवल नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया, बल्कि आगामी एशियाई खेल 2026 के लिए भी क्वालीफाई कर भारतीय एथलेटिक्स में मध्यप्रदेश की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी इस उपलब्धि ने प्रतियोगिता के पहले ही दिन प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर गौरव का अवसर प्रदान किया। देव मीणा ने बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड पोल वॉल्ट स्पर्धा में देव मीणा ने 5.46 मीटर की ऊंचाई पार करते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किया। देव की इस उपलब्धि ने उन्हें देश के शीर्ष पोल वॉल्टरों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है। एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाले देव मीणा ने आगामी एशियाई खेल 2026 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की बड़ी सफलता है, बल्कि मध्यप्रदेश और देश के लिए भी गर्व का विषय है। प्रदेश की एथलेटिक्स प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन देव मीणा का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनकी सफलता खिलाड़ियों की मेहनत, समर्पण और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। खेल मंत्रीसारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने देव मीणा को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाना और एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करना प्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देव आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा देव मीणा की यह उपलब्धि प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रशिक्षण के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया जा सकता है।  

एमडी ड्रग निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़

भोपाल  मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरूद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में मंदसौर पुलिस ने सिंथेटिक ड्रग्स के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से संचालित एमडी (MD) ड्रग निर्माण फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है।कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 13 किलो 850 ग्राम एमडी (MD) ड्रग, 09 किलो 109 ग्राम रासायनिक पदार्थ (केमिकल)एवंड्रग निर्माण में प्रयुक्त उपकरण जब्‍त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक मंदसौर  विनोद कुमार मीना के निर्देशनथाना नई आबादी पुलिस की विशेष टीम ने ग्राम बाजखेड़ी स्थित एक खेत पर बने पक्के मकान पर दबिश देकर अवैध ड्रग निर्माण फैक्‍ट्री का खुलासा किया। प्रारंभिक पूछताछ में प्राप्त तथ्यों के आधार पर सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण, परिवहन एवं तस्करी से जुड़े अन्य व्यक्तियों और नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस द्वारा इस अवैध कारोबार से जुड़े संपूर्ण नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में संलिप्त तत्वों के विरुद्ध कठोर एवं निरंतर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

9 दिन की देरी के बाद प्रदेश पहुंचा मानसून, दो सीमाओं से हुई दमदार दस्तक

भोपाल  इस बार दक्षिण–पश्चिम मानसून की जोरदार एंट्री प्रदेश की दो सीमाओं से हुई है। प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी इलाकों से मानसून बुधवार को दाखिल हुआ। अहम बात यह है कि राजधानी भोपाल की दहलीज पर मानसून पहुंच गया है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नर्मदापुरम तक मानसून पहुंच गया है, जो इस बात का संकेत है कि मानसून भोपाल से काफी करीब है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अलीराजपुर, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और अनूपपुर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसके चलते राजधानी समेत प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जोरदार आंधी–तूफान के साथ कहीं हल्की तो कहीं तेज वर्षा हुई। 9 दिन की देरी से हुई एंट्री मौसम केंद्र के पूर्वानुमान अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि प्रदेश में मानसून के कदम रखने की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। लेकिन इस बार मानसून तय समय से 9 दिन की देरी से पहुंचा। अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के पूरे मध्य प्रदेश को कवर कर लेगा। वर्ष 2020 में 15 जून को पहुंचा था मानसून दस साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मानसून वर्ष 2020 में 15 जून को पहुंचा था। उसके बाद से अब तक एक भी बार तय समय में मानसून नहीं आया। पिछले साल 16 जून को प्रदेश में दाखिल हुआ था और राजधानी भोपाल में इसकी एंट्री 18 जून को हुई थी। राजधानी में शाम को हुई झमाझम वर्षा प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी भोपाल में बुधवार शाम को गरज–चमक के साथ झमाझम वर्षा हुई । दिन में तीखी धूप से राजधानीवासी बेहाल थे, शाम को अचानक आसमान पर काले बादल छाए और तेज हवा चलने के साथ वर्षा हुई। इससे राजधानीवासियों को गर्मी और उमस से राहत महसूस हुई। अब तक सामान्य से 50 प्रतिशत कम हुई वर्षा एक जून से 24 जून तक प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे कम वर्षा पूर्वी मध्य प्रदेश हुई। जहां वर्षा सामान्य से 70 प्रतिशत कम दर्ज की गई। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से 32 प्रतिशत कम है। केंद्र ने 45 जिलों के लिए जारी किया अलर्ट ऑरेंज अलर्ट– भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, सतना, अनुपपूर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, पांढ़ुर्णा। येलो अलर्ट– सीहोर। पिछले 10 सालों में मानसून प्रदेश में कब–कब पहुंचा वर्ष — प्रदेश — भोपाल 2016 — 19 — 19 2017 — 22 — 26 2018– 24 — 27 2019 — 24 –28 2020 — 15 –23 2021 — 10 –11 2022 — 16 –26 2023 — 24 –24 2024 — 21 — 23 2025 — 16 — 18 2026 — 24 — 00 सुबह साढ़े आठ बजे से लेकर शाम साढ़े पांच बजे तक कहां कितनी हुई वर्षा शहर का नाम — वर्षा मिलीमीटर में बैतूल — 9.0 भोपाल — 2.0 धार — 4.0 इंदौर — 2.0 खरगौन — 8.0 रायसेन — 2.0 उज्जैन — 1.0 छिंदवाड़ा — 0.8  

सालों के इंतजार के बाद बुरहानपुर के केले को GI टैग, किसानों में खुशी की लहर

बुरहानपुर   बुरहानपुर का केला पूरे देश के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर है. अब बुरहानपुर में उत्पादित केले को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है. हाल ही में बुरहापुर के केले को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication) यानि जीआई टैग मिला है. इससे केला उत्पादक किसानों में खुशी की लहर है. बीते 15 सालों से बुरहानपुर के केले को जीआई टैग दिलाने की कोशिशें चल रही थीं।  सालाना औसतन 18 लाख मैट्रिक टन उत्पादन बुरहानपुर जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर रकबे में केला फसल लगाई जाती है. 18 हजार 640 किसान केला फसल लगाते हैं. 18 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा उत्पादन होता है. अब केले को जीआई टैग मिलने से इसकी विशिष्टता को आधिकारिक मान्यता मिल गई है. अब किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम, व्यापक बाजार और निर्यात के नए अवसर मिलेंगे. इसके अलावा केला आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा. बुरहानपुर जिले में केला फसल का इतिहास पुराना है. सन् 1960 से यहां केले की फसल उगाई जा रही है।  खाड़ी देशों तक बुरहानपुर के केले की मिठास बुरहानपुर जिला प्रशासन के मुताबिक यहां की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि सहित विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां उत्पादित केला अपनी मिठास, आकर्षक रंग सहित उच्च स्तरीय क़्वालिटी के लिए देश-प्रदेश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी विशेष पहचान रखता है. बुरहानपुर के केले की मिठास न सिर्फ देश में, बल्कि खाड़ी देशों में भी अपने स्वाद का जादू बिखेरती है. हर साल बड़ी मात्रा में केला यहां से विदेशों में सप्लाई किया जाता है।  बुरहानपुर में 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग इकाइयां बुरहानपुर के केला व्यवसाय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग जुड़े हैं. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत बुरहानपुर जिले में 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की गई हैं. इन इकाइयों में केले से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं. विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया "बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिल गया है. विभिन्न विभागों, कृषि एवं उद्यानिकी विशेषज्ञों सहित संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने के बाद ये उपलब्धि मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वोकल फोर लोकल‘ और ‘लोकल टू ग्लोबल‘ विजन को बढ़ावा दिया है. इसी का ये परिणाम है।  क्या है जीआई टैग और क्या हैं इसके लाभ जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication) यानि जीआई टैग एक प्रकार से उस उत्पाद के लिए प्रमाणपत्र है. जीआई टैग मिलने से उत्पाद को विशेष पहचान स्थान से जोड़कर मिलती है. जीआई टैग मिलने के बाद उत्पादकों की आय में वृद्धि होती है. क्योंकि उत्पाद की प्रामाणिकता साबित होती है. इस कारण उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अच्छी कीमत मिलती है। 

449 महिला एवं 123 पुरुष नव आरक्षक प्राप्त करेंगे आधुनिक पुलिसिंग, कानून, साइबर अपराध एवं जनसेवा आधारित प्रशिक्षण

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस पेशेवर , संवेदनशील एवं जनोन्मुखी पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए अपने मानव संसाधनों के क्षमता विकास पर निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी परिसर स्थित पुलिस प्रशिक्षण शाला (पीटीएस), भौंरी, भोपाल में 23 जून को5वें नव आरक्षक बैच के 572 नव आरक्षकों के बुनियादी प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ पुलिस उप महानिरीक्षक (ग्रामीण), भोपाल राजेश सिंह चंदेल के मुख्‍य आतिथ्‍य मेंहुआ। इस बैच में 449 महिला एवं 123 पुरुष नव आरक्षक शामिल हैं, जो पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता और सशक्त उपस्थिति को भी रेखांकित करता है। मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के मार्गदर्शन में संचालित यह प्रशिक्षण सत्र नव आरक्षकों को शारीरिक दक्षता, विधिक ज्ञान, पुलिसिंग कौशल, तकनीकी समझ, नेतृत्व क्षमता तथा जनसेवा के मूलभूत मूल्यों से परिचित कराएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बदलते अपराध परिदृश्य, साइबर अपराध, महिला एवं बाल सुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग तथा नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के विभिन्न आयामों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।ताकि वे आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप प्रभावी, संवेदनशील एवं जनोन्मुखी पुलिसिंग के लिए तैयार हो सकें। कार्यक्रम में उपनिदेशक मध्यप्रदेश अकादमी, भोपाल डॉ. संजय कुमार अग्रवाल, सहायक निदेशक प्रशिक्षण श्रीमती रश्मि पाण्डेय, उप पुलिस अधीक्षक नीरज नामदेव, राजीव त्रिपाठी, एडीपीओ श्रीमती सुचित्रा वर्मा, जितेंद्र अग्निहोत्रीसहित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी एवं पुलिस प्रशिक्षण शाला के वरिष्ठ अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित थे।

दुग्ध संग्रहण एवं विपणन की व्यवस्था को मजबूत करें

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को दुग्ध संग्रहण एवं विपणन की मजबूत व्यवस्था उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाए। उन्होंने कहा कि हितग्राही को उत्पादित दुग्ध का उचित मूल्य दिलाने के लिए परिवहन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। विभागीय अथवा थर्ड पार्टी समन्वय से आवश्यक वाहनों की उपलब्धता पर विचार किया जाए। राज्यपाल पटेल बुधवार को लोक भवन में आयोजित पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। बैठक में प्रदाय पशुओं के स्वास्थ्य, देखभाल एवं मॉनिटरिंग व्यवस्थाओं, हितग्राहियों को पशुपालन प्रशिक्षण, वनाधिकार पट्टा धारकों को लाभान्वित करने और हितग्राही अंशदान के संबंध जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना अति-गरीब के पोषण और सतत् आजीविका की पहल है। योजना की सफलता के लिए अति-गरीब को प्राथमिकता वितरण पद्धति का आधार होना चाहिए। उन्होंने अति-पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहरिया के अति-गरीब को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आबादी के अनुपात में वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। योजना की जानकारी के लिये अति-पिछड़ी जनजातियों के बीच प्रचार-प्रसार किया जाए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि पशु वितरण कार्यक्रम में लाभान्वित महिला हितग्राहियों के माध्यम से पशुपालन व्यवस्थाओं और परिवार की आय में बढ़ोतरी के संबंध में जानकारी प्रदान करने की पहल करें। योजना की उपलब्धियों का वर्षवार चित्रात्मक विवरण संधारित किया जाए। राज्यपाल पटेल ने गुजरात राज्य में जनजातीय बहुल क्षेत्र में दुग्ध संजीवनी योजना के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को परिवार के बच्चों के लिए दुग्ध की उपलब्धता को सुनिश्चित करने की समझाइश दी जाए। विभाग के द्वारा 2 महिला, 2 पुरुष अधिकारियों को बनासकांठा के डेयरी उद्योग का अध्ययन करने के लिए गुजरात राज्य भेजने के निर्देश दिए हैं। राज्यपाल पटेल को प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी दी जा रही है। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है। यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है। इसके लिए नेट की भी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ब्रीडर एसोसिएशन का विकास किया जा रहा है। इसमें एक ही नस्ल के 20 से अधिक पशुओं के प्रमाणीकरण के द्वारा उन्नत नस्ल के पशुओं की राज्य में ही आपूर्ति के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने बताया कि योजना क्रियान्वयन के लिए 5 वर्षों के प्रावधान और बजट वृद्धि की गई है। प्रति इकाई पशु कीमत को भी बढ़ाया गया है। बीमा की भी व्यवस्थाएं की गई है। कार्य क्षेत्र 12 से बढ़ाकर 24 जिलों में किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। उमरिया जिले के समस्त हितग्राहियों को 2 पशु प्रदान करने की उपलब्धि हासिल की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजना अंतर्गत 100 लीटर दुग्ध संकलन क्षेत्रवार दुग्ध सहकारी संस्थाएं बनाई जा रही हैं। इन समितियों के सचिव के रूप में हितग्राहियों को अतिरिक्त आय भी उपलब्ध होगी। उन्होंने प्रदाय पशुओं के स्वास्थ्य देखभाल के संबंध में बताया कि वितरण पश्चात् तीन माह तक पुन: आकलन कर हितग्राहीवार समीक्षा की जा रही है। पशु चिकित्सक द्वारा साप्ताहिक भ्रमण कर आवश्यक उपचार, टीकाकरण एवं डीवर्मिंग कराई जा रही है। नोडल अधिकारी द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया जाता है। इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव  मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

जबलपुर एयरपोर्ट का नाम होगा रानी दुर्गावती के नाम पर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रानी दुर्गावती, अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की प्रतिमूर्ति थीं। नारी शक्ति का पराक्रम मां दुर्गावती के व्यक्तित्व में नजर आता है। मुगलों को युद्धों में धूल चटाने वाली ऐसी वीरांगना रानी दुर्गावती का आज 463वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना साम्राज्य में 52 गढ़ों पर शासन किया। पति की असमय मृत्यु के बाद 5 साल के बेटे को सिंहासन पर बैठाया और 15 साल तक जनता की सेवा के लिए और क्षेत्र की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 500 वर्ष पूर्व रानी दुर्गावती का जन्म हुआ, लेकिन आज पूरा देश और प्रदेश उन्हें आदर के साथ स्मरण करता है। हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश सरकार के गठन के बाद मंत्रि-परिषद की पहली बैठक जबलपुर में रानी दुर्गावती को समर्पित कर आयोजित की गई थी। इसके बाद दूसरी कैबिनेट बैठक रानी दुर्गावती के गौंडवाना साम्राज्य की राजधानी संग्रामपुर में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने के लिए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उनकी समाधि स्थल नर्रई नाला जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती को समर्पित नवीन संस्थान जबलपुर में 100 करोड़ रूपए की लागत से मदन महल के पास तैयार हो रहा है, जिसका लोकार्पण बहुत जल्द किया जाएगा। इस संस्थान से प्रदेश की भावी पीढ़ी रानी दुर्गावती के गौरवशाली अतीत और कार्यों से परिचित होंगी। जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक चिड़ियाघर (जू) और वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर बन रहा है। इसके साथ ही 35वीं बटालियन मंडला का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नायकों की वीरता और समृद्ध विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए 'विरासत से विकास' अभियान शुरू किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती का शासन काल, गौंड साम्राज्य का स्वर्णिम युग था। रानी दुर्गावती ने किसान कल्याण के लिए उस दौर में बीज संग्रह, फसल चक्रण और जल संचय के महत्वपूर्ण कार्य कराए थे। उनके प्रबंधन के परिणाम स्वरूप अनाज के भंडार भरे हुए थे। किसानों के कल्याण के लिए ठोस निर्णय ले रही है सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए संकल्पित है और पूरा वर्ष किसानों को समर्पित करते हुए ठोस निर्णय ले रही है। अब किसान बंधुओं के लिए शून्य ब्याज दर पर 31 मार्च तक कर्ज चुकाने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। किसान जिस तारीख को लोन लेंगे, तब से एक वर्ष की समयावधि में कर्ज चुकाया जा सकेगा। राज्य सरकार 880 करोड़ रुपए का भुगतान वित्तीय संस्थाओं को करेगी। राज्य सरकार पर्यटन, उद्योगों और अधोसंरचना विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने पर सरकार किसानों को अब चार गुना मुआवजा देगी। प्रदेश में संचालित रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना से कोदो-कुटकी पैदा करने वाले किसानों को लाभ मिल रहा है। प्रदेश की लाड़ली बहनों को हर माह जारी हो रहे 1500 रुपए से उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है। किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। रानी दुर्गावती द्वारा किसानों के कल्याण के लिये चलाये गये कार्यक्रमों से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार भी निरंतर कृषक हित में कार्य कर रही है। हमारी सरकार के पास किसान कल्याण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी लगातार कार्य कर रहे हैं। देश में पहली बार जनजातीय वर्ग श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर रही हैं। राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास के भाव से काम कर रही है। हमारी सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने वीरांगना रानी दुर्गावती के संबंध में ओजपूर्ण कविता से अपने उदबोधन की शुरूआत करते हुये ‘’अड़े खड़ी दीवार बने, सदैव से प्रेम की दीवानी, तूफानों से हार न मानी, मरकर हुई अमर रानी, मरकर हुई अमर रानी’’ये पंक्तियों पढ़ी। उन्होंने वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के चरणों को नमन करते हुये कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय समाज के सम्मान, उत्थान, भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जल संरक्षण, वन संरक्षण, जनजातीय अंचलों के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। उन्होंने जनजातीय समाज से अपनी भाषा, बोली, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि रानी दुर्गावती के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती का नाम लेते ही महाकौशल और मध्यप्रदेश के कण-कण में श्रद्धा का भाव जाग उठता है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती केवल एक वीर योद्धा नहीं थीं, बल्कि जल प्रबंधन, कृषि व्यवस्था, आत्मसम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की अद्भुत प्रतिमूर्ति थीं। उनके द्वारा बनाए गई तालाबों की श्रृंखला, जल संचयन और संसाधनों के उपयोग की उनकी व्यवस्था आज भी बड़े-बड़े जल विशेषज्ञों को चकित करती है। मंत्री सिंह ने कहा कि जबलपुर की धरती के लिए यह गर्व का विषय है कि यह वही भूमि है, जहाँ वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आग्रह किया कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम भी वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के नाम पर किया जाए। यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक अस्मिता और गौरव को राष्ट्रीय पहचान देने वाला निर्णय होगा। वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि रानी दुर्गावती का बलिदान स्वतंत्रता, संस्कृति, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सम्मान के साथ मृत्यु, अपमानजनक जीवन से कहीं श्रेष्ठ होती है। खंडेलवाल ने कहा कि जनजातीय समाज का योगदान भारत के इतिहास में अमूल्य है और रानी दुर्गावती उसी गौरवशाली परंपरा की सबसे उज्ज्वल प्रेरणाओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि नई … Read more

सीएम हेल्पलाइन और लोकसेवा गारंटी के प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण करने के दिये निर्देश

भोपाल  मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे आमजन को सीधे राहत पहुंचाने वाली लोकसेवा गांरटी योजना और सी.एम हेल्पलाइन के प्रकरणों का समय-सीमा में संतुष्टिदायक निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने विभागाध्यक्षों से वार्षिक कार्य-योजना भी शीघ्र देने के लिए कहा है। मुख्य सचिव जैन बुधवार को मंत्रालय में विभागीय कार्यों और योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी योजना के प्रकरणों का विभागाध्यक्ष साप्ताहिक रिव्यू और मानीटरिंग करें। निचले स्तर के अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा हो और समय-अवधि में ही प्रकरण निराकृत हों। उन्होंने कहा कि विभागाध्यक्ष कार्यालय तक तो प्रकरण आना ही नहीं चाहिए। इस दौरान विभिन्न न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई और समय-सीमा में जबाव-दावा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागाध्यक्ष सुनिश्चित करें कि केबीनेट से स्वीकृत प्रकरणों में शत-प्रतिशत आदेश आदि हो जाएं। बैठक में वर्ष 1947 से पूर्व के कानूनों में पुन:संशोधन अथवा निरसन किए जाने की कार्यवाही की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि ऐसे कानून जिनकी अब जरूरत नहीं हैं- ठीक से परीक्षण कर लें और यथोचित प्रस्ताव प्रस्तुत करें। इस दौरान विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में आने वाले विधेयक और एक्ट आदि पर भी गहन चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने शीघ्र ही इस तरह के विधेयकों को तैयार कर केबीनेट के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है जिससे आगामी सत्र में उन्हें प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि पूर्व सत्रों के शून्यकाल, अपूर्ण प्रश्न, आश्वासन और लोकलेखा समिति की सिफारिशों संबंधी उत्तर विधानसभा को समय-सीमा में प्रस्तुत कर दिए जाएं। मुख्य सचिव जैन ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी शासकीय भवनों की छत पर सोलर पैनल लगाने के काम में तेजी लाएं और राज्य स्तर पर समन्वय के लिए जिलावार नोडल आफीसर नियुक्त करें। इस दौरान उद्योग विभाग से संबंधित डी रेगुलेशन के 12 प्रकरणों पर भी चर्चा हुई। बैठक में गृह विभाग के साइबर धोखाधड़ी, पाक्सो एक्ट के प्रकरणों, मादक और विस्फोटक पदार्थों की रोकथाम तथा नवीन न्याय संहिता पर विमर्श किया गया। इस दौरान राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की गई।  

सायबर धोखाधड़ी होने पर अविलंब 1930 पर करें शिकायत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है , जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण सूत्र 'जागरूकता, सावधानी और सहभागिता' के बारे में बताकर कहा कि जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान’ के तहत "सेफ क्लिक 2.0'' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांव में एक साथ चलेगा। इस अभियान के तहत सायबर ठगी और अन्य अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सायबर जागरूकता अभियान के पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई सायबर जागरूकता बुकलेट्स तथा अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर जागरूकता रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। समापन पर प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका में रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। अब अभियान का विस्तार पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सायबर खतरे अदृश्य रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर के माध्यम से होने वाले सायबर अपराधों से बचाव के लिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अपराधों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरुक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का "सेफ क्लिक 2.0'' सायबर जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभियान से प्रदेश के सभी नागरिक जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ सेंधमारी और डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के सायबर अपराध संचालित हैं। लेकिन सायबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है। मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश किया था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अपने सायबर जागरुकता अभियान के माध्यम से लगभग 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क किया था। इस वर्ष 15 दिन तक चलने वाले "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में हर दिन अलग थीम रखी गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग, महिला सुरक्षा, ग्रामीण इलाकों में जागरुकता के बारे में बताया। यह अभियान बैंकों, बाजारों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। सायबर सुरक्षा को जागरूकता, सावधानी और सहभागिता के माध्यम से प्रभावी बनाया जाएगा। सायबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। यह नंबर सायबर अपराध के मामले में सबसे पहले पीड़ितों की ढ़ाल बनता है। लालच और जल्दबाजी कर सकती है आर्थिक नुकसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अगर आपको कोई अनजान लिंक मिले या डराने धमकाने की कॉल आए तो "रुको, सोचो और फिर एक्शन लो''। लालच और जल्दबाजी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस के अभियान को जन जागरुकता अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हम सभी सहभागी बनें। राज्य सरकार ने सायबर अपराध के विरुद्ध मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट को भारत सरकार ने लागू किया है। प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। राज्य शासन के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यह एक प्रशंसनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में बैकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों सबको जोड़ा गया है। अभियान को शुरू करने का यही सही समय है, क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों में प्रवेश ले रही है। जागरुकता ही सायबर क्राइम से बचने का है सुरक्षा कवच : डीजीपी मकवाना पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई तक सेफ क्लिक 2.0 सायबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सायबर अपराध केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह समाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा के भी जुड़ा गंभीर विषय है। पिछले कुछ वर्षों में सायबर अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और करीब 80 प्रतिशत शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित होती हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिमकार्ड, म्यूल बैंक अकाउंट, महिला एवं बच्चों के जुड़े अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। मध्यप्रदेश पुलिस सायबर अपराध पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है- रोकथाम, अनुसंधान और जागरुकता। इसी दिशा में 25 दिसंबर 2025 से प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर की शुरुआत की गई है। वर्तमान में 1 लाख रुपए तक की सायबर धोखाधड़ी की … Read more

गुणवत्ता की निगरानी के लिए मानक मापदंड तय किए जाएं: राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल  राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।       राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।