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AERB लाइसेंस के बाद रीवा अस्पताल में शुरू होगी कैंसर यूनिट, इलाज होगा आसान और नजदीकी

रीवा  नए साल से पहले रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल को बड़ी राहत मिली है। अस्पताल में बनने वाली कैंसर यूनिट को चलाने की मंजूरी मिल गई है। अब AERB से लाइसेंस मिलने के बाद कैंसर के इलाज में काम आने वाली मशीनें चालू की जा सकेंगी।  अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने बताया कि अब रेडिएशन थेरेपी जैसी नई और जरूरी मशीनें इस्तेमाल में लाई जा सकेंगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो मार्च या अप्रैल 2026 तक विंध्य इलाके में कैंसर का अच्छा इलाज शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल काफी समय से इस मंजूरी का इंतजार कर रहा था। मशीनें पहले ही लग चुकी थीं, लेकिन लाइसेंस न मिलने की वजह से उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। अब यह परेशानी खत्म हो गई है और कैंसर मरीजों को बड़ा फायदा मिलेगा। संजय गांधी अस्पताल में कैंसर के इलाज के लिए अलग से एक नई और आधुनिक यूनिट बनाई जा रही है। इसके शुरू होने से विंध्य क्षेत्र के लाखों लोगों को राहत मिलेगी। अब मरीजों को इलाज के लिए भोपाल, जबलपुर या दिल्ली जैसे दूर शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये अस्पताल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे मरीजों के लिए यह उम्मीद की नई शुरुआत मानी जा रही है।  

देश का पहला ‘रेड कार्पेट’ रोड एमपी में, वाहनों की गति पर नियंत्रण और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए तैयार

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे के जंगली इलाके से गुजरने वाले हिस्से पर एनएचएआई ने देश का पहला वाइल्डलाइफ-सुरक्षित रोड कॉरिडोर बनाया है। यह 12 किलोमीटर का खास हिस्सा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से होकर निकलता है। यहां स्पीड कंट्रोल डिजाइन, फेंसिंग, एनिमल अंडरपास और इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग का पूरा इंतजाम है। इसका मकसद जानवरों की सड़क हादसों में मौत को कम करना है।  एनएचएआई ने भारत का पहला 'वाइल्डलाइफ-सेफ' रोड कॉरिडोर बनाया है। यह कॉरिडोर खास तौर पर जानवरों को सड़क पार करते समय होने वाली मौतों को रोकने के लिए बनाया गया है। यह NH-45 के 12 किलोमीटर लंबे हिस्से पर है, जो मध्य प्रदेश के एक महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्य, वीरंगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है। इस कॉरिडोर में स्पीड कम करने वाले डिजाइन, फेंसिंग, जानवरों के लिए अंडरपास और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जैसी कई चीजें शामिल हैं। इसका मकसद सिर्फ यह देखना नहीं है कि जानवर कहां से सड़क पार करते हैं, बल्कि यह भी देखना है कि गाड़ियां कैसे चलती हैं। गाड़ियों की स्पीड है अधिक इस सड़क पर गाड़ियों की संख्या और रफ्तार काफी बढ़ गई है। पहले यह दो-लेन वाली सड़क थी, जिसे अब चार-लेन का बना दिया गया है। इस पर तेज रफ्तार वाली गाड़ियां, भारी सामान ले जाने वाले ट्रक और ऐसे वाहन चलते हैं जो रास्ते में रुकना पसंद नहीं करते। इसी को ध्यान में रखते हुए एनएचआई ने इसे देश की पहली 'वाइल्डलाइफ-सेंसिटिव' 'रेड रोड' बताया है। दो किमी है रेड रोड इस नई डिजाइन के बीचों-बीच एक 2 किलोमीटर का जोन है, जो पहली नजर में सजावटी लगता है। इस जोन में सड़क के ऊपर लाल रंग की थर्मोप्लास्टिक मार्किंग की गई है। यह 5mm मोटी है और सड़क पर एक लगातार पट्टी की तरह बिछाई गई है। एनएचआई के क्षेत्रीय अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि इस खतरे को कम करने के लिए, NHAI ने टाइगर रिजर्व के अंदर खतरे वाले जोन में सड़क पर 5mm मोटी लाल सतह वाली परत 'टेबल-टॉप' बिछाई है। यह चमकीला लाल रंग ड्राइवरों को संकेत देता है कि वे एक ऐसे हिस्से में प्रवेश कर रहे हैं, जहां वन्यजीवों का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही, इसकी थोड़ी उठी हुई सतह अपने आप ही गाड़ी की रफ्तार कम कर देती है। उन्होंने आगे कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार, यह देश में लागू किया गया पहला ऐसा कॉन्सेप्ट है। मार्किंग के हैं दो फायदे इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन मार्किंग के दो फायदे हैं। पहला, यह देखने में ड्राइवरों को यह बताता है कि वे जंगल वाले हिस्से में जा रहे हैं, जहां सड़क के नियम थोड़े बदल जाते हैं। दूसरा, यह सड़क पर एक हल्का कंपन पैदा करता है, जो ड्राइवरों को स्पीड ब्रेकर की तरह अचानक झटका दिए बिना, धीरे-धीरे अपनी गाड़ी की रफ्तार कम करने के लिए प्रेरित करता है। स्पीड ब्रेकर को तेज रफ्तार वाली हाईवे पर असुरक्षित माना जाता है। यह तरीका दूसरे देशों में काफी इस्तेमाल होता है, लेकिन भारत के नेशनल हाईवे पर, खासकर वन्यजीवों वाले इलाकों में, यह बहुत कम देखने को मिलता है। जानवरों के लिए है यह सुरक्षित वन्यजीव संरक्षण वैज्ञानिक लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि गाड़ी की रफ्तार ही यह तय करती है कि सड़क पार कर रहे जानवर को समय पर देखा जा सकेगा या नहीं, और ड्राइवर के पास रुकने या मुड़ने के लिए पर्याप्त दूरी होगी या नहीं। अंडरपास और फेंसिंग यह तय करते हैं कि जानवर कहां से सड़क पार करेंगे, लेकिन जब कुछ गलत होता है तो रफ्तार ही सब कुछ तय करती है. NH-45 पर, लाल रंग से चिह्नित यह हिस्सा गाड़ियों को उन जगहों पर पहुंचने से काफी पहले धीरे-धीरे धीमा करने के लिए बनाया गया है, जहां जानवरों के निकलने की सबसे ज्यादा संभावना होती है। लाल पट्टी का अनोखा आइडिया इस कॉरिडोर में सबसे खास है 2 किलोमीटर की लाल रंग वाली सड़क। यहां एस्फाल्ट पर 5 मिलीमीटर मोटी लाल थर्मोप्लास्टिक लेयर बिछाई गई है। यह पट्टी दूर से चमकती दिखती है और ड्राइवर को अलर्ट करती है कि वे वाइल्डलाइफ जोन में प्रवेश कर रहे हैं। एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर एस.के. सिंह कहते हैं, "यह लाल सरफेस हल्की ऊंचाई वाली है। इससे गाड़ी के टायरों में हल्का कंपन होता है, जिससे स्पीड अपने आप कम हो जाती है। स्पीड ब्रेकर जैसा झटका नहीं लगता, जो हाई-स्पीड हाईवे पर सुरक्षित नहीं होता।" उनका दावा है कि देश में यह पहला ऐसा प्रयोग है। विदेशों में यह तरीका काफी इस्तेमाल होता है। यह डिजाइन दो काम करता है। एक तो विजुअल अलर्ट देता है, दूसरा स्पीड को धीरे-धीरे कम करता है। इससे ड्राइवर को जानवर दिखने पर ब्रेक लगाने या स्वर्व करने का मौका मिल जाता है। दो किमी है रेड रोड इस नई डिजाइन के बीचों-बीच एक 2 किलोमीटर का जोन है, जो पहली नजर में सजावटी लगता है। इस जोन में सड़क के ऊपर लाल रंग की थर्मोप्लास्टिक मार्किंग की गई है। यह 5mm मोटी है और सड़क पर एक लगातार पट्टी की तरह बिछाई गई है। एनएचआई के क्षेत्रीय अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि इस खतरे को कम करने के लिए, NHAI ने टाइगर रिजर्व के अंदर खतरे वाले जोन में सड़क पर 5mm मोटी लाल सतह वाली परत 'टेबल-टॉप' बिछाई है। यह चमकीला लाल रंग ड्राइवरों को संकेत देता है कि वे एक ऐसे हिस्से में प्रवेश कर रहे हैं, जहां वन्यजीवों का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही, इसकी थोड़ी उठी हुई सतह अपने आप ही गाड़ी की रफ्तार कम कर देती है। उन्होंने आगे कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार, यह देश में लागू किया गया पहला ऐसा कॉन्सेप्ट है। मार्किंग के हैं दो फायदे इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन मार्किंग के दो फायदे हैं। पहला, यह देखने में ड्राइवरों को यह बताता है कि वे जंगल वाले हिस्से में जा रहे हैं, जहां सड़क के नियम थोड़े बदल जाते हैं। दूसरा, यह सड़क पर एक हल्का कंपन पैदा करता है, जो ड्राइवरों को स्पीड ब्रेकर की तरह अचानक झटका दिए बिना, धीरे-धीरे अपनी गाड़ी की रफ्तार कम करने के … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल और क्रिकेट स्टेडियम का करेंगे लोकार्पण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 दिसम्बर को सतना जिले को 652 करोड 54 लाख रूपये लागत के विकास कार्यो की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतना शहर में 31 करोड़ 15 लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल और 8 करोड़ 39 लाख रूपये लागत के नवनिर्मित धवारी क्रिकेट स्टेडियम का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आई.एस.बी.टी. सतना में आयोजित कार्यक्रम में सतना शहर के 168 लाख 33 हजार रूपये लागत के 6 कार्यो का लोकार्पण और 484 करोड़ 21 लाख रूपये लागत के 6 विकास कार्यो का भूमिपूजन भी करेंगे। साथ ही विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण करेंगे। 650 बिस्तरीय नवीन चिकित्सालय भवन का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय मेडीकल कॉलेज सतना में आयोजित कार्यक्रम में 383 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले 650 बिस्तरीय नवीन चिकित्सालय भवन के निर्माण का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतना में आयोजित विंध्य व्यापार मेला के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। 

रामपुर बाघेलान में सर्राफा व्यापारी के ठिकानों पर GST रेड, जांच दूसरे दिन भी जारी

सतना मुख्य बाजार स्थित प्रसिद्ध श्री विदुर सर्राफा शो-रूम एवं सुखनंदन सराफा में शुक्रवार दोपहर राज्य जीएसटी विभाग की वृत्त-1 की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छापा मारा। करीब 3 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में सतना से पहुंची 22 सदस्यीय जीएसटी टीम ने दोनों प्रतिष्ठानों के दस्तावेजों और स्टॉक की गहन जांच शुरू की, जो देर रात तक जारी रही। जीएसटी की इस कार्रवाई से स्थानीय सर्राफा बाजार में हड़कंप मच गया है। बाजार के अन्य व्यापारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जानकारी के अनुसार यह पूरी कार्रवाई उपायुक्त उमेश तिवारी के निर्देशन एवं सहायक आयुक्त मनोरम तिवारी के मार्गदर्शन में की जा रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक छापे के दौरान व्यापारियों से आवश्यक कर दस्तावेज, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और ट्रेडिंग एकाउंट प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन फिलहाल व्यापारी द्वारा ट्रेडिंग एकाउंट उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद टीम ने शो-रूम में उपलब्ध सोना-चांदी व अन्य आभूषणों का भौतिक सत्यापन शुरू किया।   टीम ने स्टॉक रजिस्टर, बिल-बुक, टैक्स इनवॉइस, जीएसटी रिटर्न और अन्य संबंधित कागजात की भी बारीकी से जांच की। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कुछ विसंगतियों की आशंका के चलते कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया है। इसी कारण देर रात तक टीम शो-रूम में मौजूद रही और हर पहलू की पड़ताल की गई। जीएसटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है। शनिवार को दूसरे दिन भी जांच जारी रहेगी, जिसमें बचे हुए दस्तावेजों की समीक्षा और स्टॉक मिलान का कार्य किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कर चोरी या नियमों के उल्लंघन का मामला बनता है या नहीं।

अटल वयो अभ्युदय योजना अंतर्गत 31 हज़ार 590 वरिष्ठजन होंगे लाभान्वित

निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन सहित परिवहन के लिए 63 लाख से अधिक राशि का आवंटन भोपाल  उप संचालक राष्ट्रीय अंधत्व एवं दृष्टि बाधिता नियंत्रण कार्यक्रम (एनएचएम मध्यप्रदेश) ने बताया कि भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में वरिष्ठजनों के मोतियाबिंद ऑपरेशन उपरांत उनके आवागमन के लिए प्रति हितग्राही 200 रुपए की दर से राशि आवंटित की गई है। यह राशि ई-वित्त प्रवाह के माध्यम से जिलों को सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के मद में प्रदाय की गई है। योजना से दिसम्बर माह में प्राप्त विवरण के आधार पर 31 हजार 590 वरिष्ठजनों को लाभ मिलेगा। इसके लिए कुल 63 लाख 18 हज़ार रुपये की राशि आवंटित की गई है। यह राशि केवल वरिष्ठ नेत्र रोगियों के लिए उपयोग की जाएगी। योजना का उद्देश्य वरिष्ठजनों को निःशुल्क मोतियाबिंद उपचार के साथ-साथ परिवहन सुविधा प्रदान कर स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी सुगम पहुंच सुनिश्चित करना है। योजना के अंतर्गत मोतियाबिंद ऑपरेशन कराने वाले वरिष्ठजनों का विवरण एनपीसीबी एंड वीआई के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा और ऑपरेशन के 15 दिवस के भीतर परिवहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में अंतरित की जाएगी। इसके लिए आधार, फोटोयुक्त पहचान पत्र, मोबाइल नंबर एवं बैंक विवरण अनिवार्य होगा।  

भोपाल में बनेगा सिम्युलेटरी स्पेस सेंटर, “शौर्य संकल्प” से सुरक्षा बलों तक पहुंचेंगे युवा : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शुक्रवार को विंध्याचल भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के अंतर्गत भोपाल में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सिम्युलेटरी स्पेस सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जा रहा है। यह प्रस्ताव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के समन्वय से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र का उद्देश्य मध्यप्रदेश के युवाओं को स्पेस टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक, प्रेरित और वैज्ञानिक सोच से जोड़ना है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि प्रस्तावित स्पेस सेंटर में मिसाइल और सैटेलाइट के क्रमिक विकास के डिजाइनों का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही अंतरिक्ष के समान जीरो ग्रेविटी वातावरण में स्पेस स्टेशन का सिम्युलेटरी अनुभव देने के लिये विशेष अधोसंरचना विकसित की जाएगी, जिससे बच्चे यह देख और महसूस कर सकें कि उपग्रह के भीतर अंतरिक्ष यात्री किस तरह रहते और कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र प्रदेश के युवाओं में वैज्ञानिक जिज्ञासा जगाएगा और स्पेस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उन्हें प्रेरित करेगा। राज्यमंत्री ने कहा कि यह नवाचार उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर होगा, जो अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासु हैं और भविष्य में इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। इसके माध्यम से ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के शैक्षणिक एवं सामाजिक उन्नयन के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पत्रकार वार्ता में मंत्री श्रीमती गौर ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए प्रस्तावित ‘शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना–2025’ को भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत हर वर्ष करीब 4000 युवाओं को आवासीय प्रशिक्षण देकर सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस, होमगार्ड एवं निजी सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए तैयार किया जाएगा। शारीरिक प्रशिक्षण के साथ सैद्धांतिक मार्गदर्शन देकर युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यबोध विकसित किया जाएगा। आदर्श छात्रावास और पहली बार मेस सुविधा राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि प्रदेशभर में ओबीसी छात्रावासों को आदर्श छात्रावास के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिम, वाचनालय, पुस्तकालय, वाई-फाई, कंप्यूटर कक्ष और खेल सुविधाओं से युक्त इन छात्रावासों के उन्नयन पर करीब 16 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभाग बनने के बाद पहली बार छात्रावासों में निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था की जा रही है, जिसका शुभारंभ 26 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कर कमलों से होने की संभावना है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत साढ़े सात लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति वितरित की गई है। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना को पारदर्शी बनाकर हर वर्ष 50 विद्यार्थियों को लाभ दिया जा रहा है। वहीं बेरोजगार युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार दिलाने की पहल की जा रही है। सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड के तहत आगामी समय में 600 युवाओं को विदेश भेजा जाएगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए जन अभियान परिषद के माध्यम से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इनकी गणना तीन माह में पूर्ण की जाएगी, जिससे योजनाओं का लाभ लक्षित रूप से पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि ऐसी पहल करने में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि डॉ. कलाम सिम्युलेटरी स्पेस सेंटर जैसे नवाचार और शौर्य संकल्प जैसी योजनाओं के माध्यम से हम प्रदेश के युवाओं को विज्ञान, सुरक्षा और राष्ट्रनिर्माण की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। यही विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा है।  

महिला सशक्तिकरण से बाल संरक्षण तक: मध्यप्रदेश ने दो वर्षों में रचा विकास का नया अध्याय

महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बतायी विभाग की उपलब्धियां भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरोन्द्र मोदी के विकसित भारत-2047 विजन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण और पोषण के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने पत्रकार वार्ता में विभाग की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि प्रदेश में Women Led Development की अवधारणा को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया गया है। इसका सकारात्मक प्रभाव समाज के अंतिम व्यक्ति तक दिखाई दे रहा है। लाड़ली बहना योजना बनी आर्थिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिला सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। जून 2023 से दिसंबर 2025 तक योजना की 31 किस्तों का नियमित भुगतान किया गया है। वर्तमान में 1 करोड़ 26 लाख से अधिक महिलाएं योजना से लाभान्वित हैं और अब तक 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है। इस योजना को देश भर में सराहा जा रहा है और कई राज्यों ने मध्यप्रदेश के मॉडल को अपनाया है। बेटियों के भविष्य को सुरक्षित कर रही लाड़ली लक्ष्मी योजना मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 52 लाख से अधिक बालिकाओं का पंजीयन किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में 6.40 लाख बालिकाओं को 350 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। आगामी वर्षों में लाखों और बालिकाओं को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से बदली सोच, सशक्त हुई बेटियां प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत मध्यप्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में व्यापक स्तर पर प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा योजना के अंतर्गत महिलाओं और बालिकाओं के लिए पिंक ड्राइविंग लाइसेंस अभियान चलाया गया, जिसके तहत अब तक 6,134 महिलाओं एवं बालिकाओं को लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस प्रदान किए गए हैं। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और सुरक्षित परिवहन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। समाज में बेटियों को प्रेरित करने के उद्देश्य से विभाग ने 1,794 सफल बालिकाओं एवं महिलाओं को ‘जेंडर चैंपियन’ के रूप में चिन्हित किया है। ये जेंडर चैंपियन न केवल अन्य बालिकाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही हैं, बल्कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश देकर समाज में जागरूकता भी फैला रही हैं। योजना के अंतर्गत सशक्त वाहिनी कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। विगत वर्षों में 7 हजार से अधिक बालिकाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षित किया गया है, जिससे उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इसके साथ ही आगामी तीन वर्षों में शाला त्यागी बालिकाओं को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। इसके तहत इच्छुक बालिकाओं को मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड के माध्यम से 10वीं एवं 12वीं की परीक्षा दिलाकर उनकी स्कूली शिक्षा पूर्ण कराई जाएगी। वहीं जो बालिकाएं आगे पढ़ाई जारी नहीं रखना चाहतीं, उनके लिए कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। महिलाओं की सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर और हेल्पलाइन 181 प्रदेश में संचालित 57 वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए सुरक्षा और सहारे का मजबूत केंद्र बन चुके हैं। बीते दो वर्षों में 54,627 से अधिक संकटग्रस्त महिलाओं को यहां स्वास्थ्य, परामर्श, विधिक एवं पुलिस सहायता उपलब्ध कराई गई। वहीं, महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से 2.36 लाख से अधिक महिलाओं को त्वरित सहायता दी गई। कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास की बड़ी सौगात मंत्री ने बताया कि कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में पहली बार 284 करोड़ रुपये की लागत से 5121 सीट क्षमता वाले 8 नए वर्किंग वूमन हॉस्टल बनाए जा रहे हैं, जो अगले तीन वर्षों में पूरी तरह संचालित होंगे। बाल विवाह और कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण समन्वित प्रयासों से प्रदेश में बाल विवाह के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। NFHS-4 में जहां बाल विवाह की दर 32.4 प्रतिशत थी, वहीं NFHS-5 में यह घटकर 23.1 प्रतिशत रह गई है। कुपोषण के खिलाफ चलाए गए अभियानों का भी सकारात्मक असर दिखा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार कम वजन, ठिगनापन, दुबलापन और गंभीर कुपोषण — सभी संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। डिजिटल नवाचारों से सेवाओं में पारदर्शिता आंगनवाड़ी सेवाओं में सम्पर्क ऐप, पोषण ट्रैकर और फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम जैसे डिजिटल नवाचारों से निगरानी और पारदर्शिता को नई मजबूती मिली है। प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां इन तकनीकों का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया है। विकसित मध्यप्रदेश 2047 की ओर निर्णायक कदम महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई भी महिला या बच्चा विकास से वंचित न रहे। महिला सशक्तिकरण, सुरक्षित बचपन और सुपोषण के माध्यम से मध्यप्रदेश विकसित भारत 2047 में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यातायात पुलिस का रोड सेफ्टी 4E’s आधारित दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स संपन्न

सड़क दुर्घटनाओं में कमी एवं संवेदनशील यातायात प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल भोपाल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री शाहिद अबसार के मार्गदर्शन एवं विशेष पहल पर पुलिस परिवहन शोध संस्थान (PTRI) द्वारा 23 दिसंबर से 24 दिसंबर तक यातायात पुलिस रिफ्रेशर कोर्स का राज्य स्तरीय आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेशभर के यातायात पुलिस निरीक्षक से आरक्षक स्‍तर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को “रोड सेफ्टी 4E’s मॉडल”—Education (शिक्षा), Engineering (अभियांत्रिकी), Enforcement (प्रवर्तन) और Emergency-Care (आपातकालीन देखभाल) पर आधारित आधुनिक, व्यावहारिक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में उप पुलिस महानिरीक्षक श्री टी.के. विद्यार्थी द्वारा 4E’s के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए गोल्डन आवर के दौरान घायल व्‍यक्ति को बचाये जाने के लिए राहवीर एवं कैशलैस उपचार योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ डॉ. आशीष शर्मा द्वारा CPR/BLS (बेसिक लाइफ सपोर्ट) का लाइव प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) कर व्यावहारिक रूप से जीवन-रक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के समापन सत्र में डॉ. मयंक दुबे एवं श्री एस.एस.लल्‍ली द्वारा यातायात प्रबंधन से संबंधी सड़क अभियांत्रिकी व प्रवर्तन की कार्यवाही एवं संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में पुलिस की भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर PTRI के सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री अभिजीत कुमार रंजन, श्री विक्रम रघुवंशी, उप पुलिस अधीक्षक श्री हिमांशु कार्तिकेय सहित अन्य प्रशिक्षण टीम के अधिकारी उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश के छात्रों को राहत, 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित

भोपाल प्रदेश के विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए शीतकालीन अवकाश को लेकर बड़ी और स्पष्ट जानकारी सामने आई है। राज्य शासन के निर्देशों के अनुसार इस वर्ष प्रदेश भर के सरकारी और निजी स्कूलों में 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। यह अवकाश सभी बोर्डों से संबद्ध स्कूलों पर लागू होगा, जिससे छुट्टियों को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति अब समाप्त हो गई है। शासन के निर्देशों के अनुसार ही होगी छुट्टी इस बार राज्य सरकार ने शीतकालीन अवकाश को लेकर सख्ती बरती है और साफ निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूल शासन द्वारा घोषित तिथियों का ही पालन करेंगे। इसी कारण मिशनरी स्कूलों सहित कई निजी स्कूलों ने अपने पुराने नियमों में बदलाव किया है और अब अवकाश की अवधि शासन के आदेश के अनुरूप रखी गई है।   मिशनरी स्कूलों ने बदला पुराना पैटर्न दरअसल, प्रदेश में CBSE से संबद्ध स्कूलों में मिशनरी संस्थानों की संख्या अधिक है। बीते वर्षों में अधिकांश मिशनरी और सीबीएसई स्कूलों में शीतकालीन अवकाश 23 दिसंबर से 2 जनवरी तक घोषित कर दिया जाता था, जो कि शासन द्वारा निर्धारित छुट्टियों से अलग था। लेकिन इस बार शिक्षा विभाग की सख्ती और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के चलते मिशनरी स्कूलों ने भी अपने पुराने लंबे अवकाश के नियम को बदल दिया है और शासन की घोषित तारीखों के अनुसार ही छुट्टी देने का निर्णय लिया है। 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक रहेगा अवकाश राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में एपमी बोर्ड (MP Board) से संबद्ध स्कूलों और सभी सरकारी स्कूलों में 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। इसके अलावा 4 जनवरी रविवार होने के कारण सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस तरह छात्रों को लगातार पांच दिनों की छुट्टी का लाभ मिलेगा। 5 जनवरी से खुलेंगे स्कूल शीतकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद प्रदेश के सभी स्कूल 5 जनवरी (सोमवार) से दोबारा नियमित रूप से खुलेंगे। शिक्षण कार्य पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार शुरू होगा। अभिभावकों और छात्रों को राहत एक समान अवकाश व्यवस्था लागू होने से अभिभावकों और छात्रों दोनों को राहत मिली है। अब अलग-अलग बोर्डों और स्कूलों की छुट्टियों को लेकर भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे शैक्षणिक कैलेंडर में भी अनुशासन बना रहेगा और पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। कुल मिलाकर, इस बार शीतकालीन अवकाश को लेकर शासन का रुख साफ है सभी स्कूलों के लिए एक समान नियम और एक समान तारीखें।

कस्‍तूरबा छात्रावास अधीक्षकों का प्रशिक्षण

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के आधार पर तैयार की गई प्रशिक्षण मार्गदर्शिका भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बालिकाओं की स्‍कूली शिक्षा के लिए संचालित कस्‍तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की पहचान केवल आवासीय विद्यालय के रूप में ही नहीं है, ये छात्रावास सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समुदायों की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिये विशेष छात्रावास के रूप में पहचाने जाते हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के सुचारू संचालन के लिए इन दिनों यहॉ की छात्रावास अधीक्षकों को सशक्तिरण के लिये राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र द्वारा गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। केन्द्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा राष्ट्रीय शैक्षणिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा) के सहयोग से केजीबीवी वार्डन के सशक्तिकरण के लिये राष्‍ट्रव्‍यापी प्रशिक्षण प्रारंभ किया है। नीपा नई दिल्‍ली ने इसके लिए राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों और मूल भावनाओं के अनुरूप एक प्रशिक्षण मार्गदर्शिका भी तैयार की है, जिसमें वार्डन की भूमिका, वित्तीय प्रबंधन एवं उपयोग, लैंगिक संवेदनशीलता, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं सुरक्षा तथा सामाजिक भावनात्मक विकास जैसे प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है। राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र के अपर संचालक डॉ. अरूण सिंह ने बताया कि प्रत्येक कस्‍तूरबा गांधी बालिका विद्यालय केन्द्र में वार्डन होती है, वार्डन छात्रावास में रह कर अध्‍ययन कर रही बालिकाओं की एक मार्गदर्शक, अभिभावक, संरक्षक, प्रशासक के रूप में छात्राओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रशिक्षण के बाद वार्डन की कार्यक्षमता में और वृद्धि होगी और वे कुशलतापूर्वक कार्य कर सकेंगी। 207 कस्तूरबा छात्रावास प्रदेश में वर्तमान में 207 कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें लगभग 40 हजार बालिकाएं लाभान्वित हो रही हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में छात्राओं को आवास सुविधा के साथ भोजन, स्पोटर्स, आत्मरक्षा, उपचारात्मक शिक्षा, करियर कॉउंसिल भी शामिल हैं।