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अनिल विज बनाम सेल इंचार्ज: कैथल की बैठक गरमाई, बहस ने पकड़ा तूल

कैथल  कैथल जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक उस समय गर्मा गई जब एक आर्थिक अपराध से जुड़ी शिकायत को लेकर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज और इकोनॉमिक सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर ओमप्रकाश के बीच तीखी बहस हो गई। बैठक में सीवन गेट निवासी मनजीत सिंह की ओर से की गई शिकायत चर्चा में आई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी बेटी को विदेश भेजने में धोखाधड़ी की गई थी। इस मामले में मंत्री अनिल विज ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) कैथल को निर्देश दिए कि शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ के बजाय कैथल में ही जीरो एफआईआर दर्ज की जाए। हालांकि, संबंधित घटना चंडीगढ़ में घटित हुई थी और मामला वहीं का बनता है। मंत्री और अधिकारी के बीच संवाद हुआ तीखा बैठक के दौरान जब जांच को लेकर मतभेद सामने आया तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मंत्री विज ने जांच अधिकारी को प्रारंभिक रूप से निलंबित करने के आदेश दे दिए। बाद में एसपी उपासना ने जानकारी दी कि संबंधित पुलिसकर्मी का कार्यकाल अच्छा रहा है, जिसके बाद मंत्री ने निलंबन आदेश वापस लेते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दोहराए। शिकायतकर्ता पहले ही इस पर सहमत हो गया था कि मामला चंडीगढ़ में ही निपटाया जाए, और इसके लिए उसने कैथल इकोनॉमिक् सेल में अपना बयान लिखकर दे दिया था लेकिन संचार की कमी (कम्युनिकेशन गैप) के चलते यह तथ्य मंत्री तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुंच सका। बैठक में शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति ने स्थिति को और उलझा दिया। इस दौरान मंत्री और इंस्पेक्टर ओमप्रकाश के बीच हुए संवाद ने सभी का ध्यान खींचा। बैठक में हुई वार्तालाप का सार इंस्पेक्टर ओमप्रकाश ने कहा, “सर, मैं रिक्वेस्ट कर रहा हूं, मैं सही हूं।” मंत्री विज ने जवाब दिया, “तू तो रिक्वेस्ट करेगा ही, क्योंकि मैं तुझे सस्पेंड जो कर दिया है।” ओमप्रकाश ने कहा, “श्रीमान, न्याय कोई चीज नहीं रही।” विज ने प्रत्युत्तर में कहा, “मैं न्याय ही कर रहा हूं।” ओमप्रकाश ने आग्रह किया, “आप मेरी बात भी सुनिए, मैं गलत नहीं हूं। पाप-पुण्य के भागी अधिकारी होंगे।” मंत्री विज ने अपनी बात दोहराते हुए कहा, “तूने क्यों नहीं एफआईआर दर्ज की, जबकि मैंने स्पष्ट निर्देश दिए थे?” बातचीत बढ़ने पर एसपी उपासना ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि ओमप्रकाश अब एफआईआर दर्ज करने को तैयार है। इस पर मंत्री ने नाराज़गी जताई कि एक महीने से कार्यवाही क्यों नहीं हुई गौरतलब है कि इस शिकायत पर पिछली बैठक में भी चर्चा हो चुकी थी, परंतु इस बार भी शिकायतकर्ता उपस्थित नहीं था। फिलहाल मामला लंबित रखा गया है।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी ब्लास्ट केस: इमाम की पत्नी ने बताए बड़े राज, जांच में नया मोड़

फरीदाबाद  दिल्ली बम ब्लास्ट के बाद हिरासत में लिए गए फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मस्जिद के इमाम मोहम्मद इश्तियाक की पत्नी हसीना पहली बार कैमरे के सामने आई। हसीना ने कहा- "डॉ. मुजम्मिल ने पहले उसके पति से मस्जिद में पहचान बनाई और फिर उनसे दूध खरीदना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया, "डॉ. मुजम्मिल ने अपने दोस्त का सामान रखने की बात कहकर उनके फतेहपुरा तगा वाले घर में कमरा किराए पर लिया था। मुजम्मिल ने 1500 रुपए महीने के हिसाब से एक कमरा किराए पर सामान रखने के लिए लिया था। डॉ. मोहम्मद उमर नबी भी रोज मस्जिद में आता था। बता दें कि 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों ने फरीदाबाद में अपना डेरा जमाया हुआ है। इन धमाकों में अल-फलाह यूनिवर्सिटी सबसे ज्यादा चर्चाओं में है। इसी यूनिवर्सिटी के 2 डाक्टरों डॉ. मुजम्मिल, लेडी डॉ शाहीन सईद, यूनिवर्सिटी की मस्जिद के मौलवी इश्तियाक सहित एचआर विभाग में काम करने वाले जमील को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के चलते पकड़ा है। पुलिस ने 2540 किलो विस्फोटक सामाग्री की थी बरामद पुलिस ने इमाम इश्तियाक के फतेहपुर तगा वाले घर से 2540 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। सामग्री को उस कमरे से बरामद किया गया था, जिसको डॉ मुजम्मिल ने करीब 3 महीने पहले ही किराए पर लिया था। जबकि 360 किलो धौज गांव के एक कमरे से मिला था। धौज के कमरे का 2400 रुपए किराया डॉ. मुजम्मिल ने दिया था। इमाम की पत्नी हसीना ने किए ये बड़े खुलासे  इमाम इश्तियाक को हिरासत में लिए जाने के बाद गांव भीमा पहाड़ी की रहने हसीना ने बताया कि इश्तियाक साल 2005 में यहां पर आकर रहने लग गया था। तब यूनिवर्सिटी की तरफ से मस्जिद में रहने और काम करने के 2 हजार रुपए मासिक मिलते थे। साल 2008 में इश्तियाक संग निकाह हुआ। उनके 2 बेटियां और 2 बेटे हैं। सबसे बड़ी बेटी की उम्र 16 साल की है, जबकि सबसे छोटे बेटे की उम्र 7 साल है। हसीना ने बताया कि वह करीब 20 साल से यूनिवर्सिटी की इस मस्जिद में नमाज अदा कराते हैं। वह मूलरूप से नूंह के सिंगार गांव के रहने वाले हैं। उन्हें हाफिज का दर्जा मिला हुआ है, यानी कुरान शरीफ मुंह जुबानी याद है। यूनिवर्सिटी अभी उनको करीब 10 हजार रुपए मासिक वेतन दे रही थी। उन्होंने बताया कि दो-तीन साल से मुलाकात होने के कारण उनके शौहर की डॉ. मुजम्मिल से जान-पहचान हुई। मुजम्मिल ने करीब 5 महीने पहले इश्तियाक से किराए के लिए कमरे की बात की थी। जिस पर इश्तियाक ने अपने गांव में बने घर के कमरे को किराए पर देने की पेशकश की। जिसका कोई किराया तय नहीं किया गया था। उसने बताया कि मुजम्मिल का घर दिखाकर उसकी चाबी दे दी। इसके बाद वो गांव में घर को देखने के लिए नहीं गए। यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों को रोज 5 से 6 किलो दूध होता था सप्लाई  हसीना ने बताया कि उनके घर से यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों को रोजाना 5 से 6 किलो दूध सप्लाई होता था। डॉ. मुजम्मिल भी दूध लेते थे। पिछले करीब 20 दिनों से डॉ. मुजम्मिल दूध लेने के लिए नहीं आ रहा था। बताया जा रहा है कि इस दौरान डॉ. मुजम्मिल छुट्टी लेकर पुलवामा गया था। कई साल पहले उन्होंने 2 हजार रुपए प्रति गज के हिसाब से फतेहपुर तगा में 100 गज जमीन खरीदी थी। साल 2012 में उन्होंने इस मकान का निर्माण कराया था। 10 नवंबर को उनके पति सुबह 6 बजे खेतों में काम करने गए थे, जिसके बाद वह खुद भी खेत गई थी। खेत में आधा किले में काम करने के बाद, वह सुबह साढ़े दस बजे घर लौटी ही थी कि कुछ देर बाद पुलिस की 10 से 12 गाड़ियां आईं और इश्तियाक को अपने साथ ले गईं। जिला प्रशासन ने अल फलाह यूनिवर्सिटी की जमीनों के जांच के दिए आदेश  जिला प्रशासन ने अल फलाह यूनिवर्सिटी की जमीनों के जांच के आदेश दिए हैं। जिसको लेकर जमीन की पैमाइश की जा रही है। शुक्रवार को रेवेन्यू विभाग की कर्मचारी पहुंचे थे। इसके साथ डीटीपी विभाग की टीम भी यूनिवर्सिटी पहुंची थी। रेवेन्यू विभाग के पटवारियों के द्वारा मशीन लगाकर पैमाइश की जा रही है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी 73 एकड़ में बनी हुई है। वहीं दिल्ली ब्लास्ट में कार में विस्फोट करके खुद को उड़ाने वाले डॉ उमर नबी ने 7 मई 2024 को अल फलाह यूनिवर्सिटी में जॉइन किया था। डॉ. नबी भी रोजाना मस्जिद में नमाज अदा करने आता था। डॉ. नबी 30 अक्तूबर से यूनिवर्सिटी से गायब था। 10 अक्टूबर को लाल किला के सामने कार में विस्फोट किया।  

सरकार के इनकार के बाद 21 साल की लड़ाई जीती, 4 HCS अधिकारियों की नियुक्ति रास्ता साफ

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 21 साल से लंबित एक महत्वपूर्ण विवाद का निपटारा करते हुए हरियाणा सिविल सेवा के 4 चयनित उम्मीदवार शक्ति सिंह, कुलदीप मलिक, सुभाष तायल और दीपक कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा इनकी नियुक्ति रोकने के सभी आधारों को अमान्य ठहराते हुए कहा कि चयन और सिफारिश के बाद उम्मीदवारों को दागी मानकर नियुक्ति न देना उचित नहीं है। दरअसल इन चारों अधिकारियों का चयन हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा 24 जनवरी 2004 के विज्ञापन के आधार पर आयोजित परीक्षा में हुआ था। आयोग ने उन्हें योग्य पाकर औपचारिक रूप से राज्य सरकार को नियुक्ति के लिए भेज दिया था, लेकिन 2004 के विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होने से प्रक्रिया रुक गई। बाद में सरकार ने इन्हें नियुक्ति देने से इन्कार कर दिया, जिससे मामला अदालत पहुंचा। हाईकोर्ट के इस निर्णय से इन सभी को अब पुरानी तारीख से नियुक्ति, सांकेतिक वरिष्ठता, और परिणामी सेवा लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले इसी मामले में उम्मीदवार सुरेंद्र लाठर के पक्ष में भी समान फैसला दिया गया था। कोर्ट के इस आदेश ने 2 दशक से अधिक समय से जारी न्यायिक संघर्ष का अंत कर दिया है। 

हरियाणा में शराबखोरी पर कड़ा एक्शन: अब ठेकों के बाहर बैठकर पी तो सीधे कार्रवाई

हरियाणा  हरियाणा में नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया हुआ है। लेकिन शराब ठेकों के बाहर की तस्वीरें अभियान का कुछ और ही मतलब दिखा रही हैं। यहां पर लोग खुलेआम ठेके के सामने शराब पी रहे हैं। इन लोगों पर कोई कार्रवाई करने वाला नहीं हैं। हालांकि कुछ दिन पहले हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने सभी उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए थे कि शराब के ठेकों के बाहर कोई भी बैठकर शराब नहीं पिएगा। ऐसा मिला तो ठेका संचालक और उक्त एरिया के थाना प्रभारी पर कार्रवाई होगी।  शराबी ठेके के बाहर ही पीने शुरु हो जाते हैं शराब  शराब ठेके सुबह छह बजे के करीब खुल जाते हैं। उसके बाद शराब पीने वाले ठेकों पर पहुंच जाते हैं और शराब खरीद कर ठेकों के बाहर ही पीना शुरू कर देते हैं। शराब ठेकों के बाहर की रेहड़ियां लगी होती है जहां पर भी खड़े होकर शराब पीते दिखाई देते हैं। रात के समय शराब ठेके बाहर बैठकर पहले लोग दो-चार पैग शराब पीते हैं, उसके बाद आपस में झगड़ा करते हैं। हालांकि पुलिस की तरफ से गश्त के दौरान शराब पीने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, लेकिन शराब के ठेके सामने बैठकर छलका रहे जाम वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

नगर निगम सख्त: टीम ने हाथों से उखाड़ी हर झोपड़ी, सड़क मार्ग हुआ क्लियर

यमुनानगर यमुनानगर में सड़क किनारे बनी झोपड़ियां अक्सर हादसे का कारण बन रही थी और इसको लेकर नगर निगम पहले भी सख्ती बरत चुका है। उसके बावजूद यह लोग सड़क के किनारे से नहीं हटे और आज नगर निगम का डंडा इन लोगों पर पूरी तरह से चल गया, लेकिन इस बार बुलडोजर की मदद नहीं बल्कि नगर निगम के कर्मचारियों ने अपने हाथों से ही इनकी झोपड़ियां को तोड़ना शुरू कर दिया। यमुनानगर के महाराणा प्रताप चौक से भाई कन्हैया साहिब चौक के बीच में बनी इन सभी झोपड़ियां को आज निगम ने उखाड़ फेंक दिया, हालांकि आज यह कार्रवाई सुबह ही कर दी। ऐसे में इन लोगों ने निगम के कर्मचारियों के सामने हंगामा भी किया, लेकिन पुलिस को पास देख इन लोगों की एक नहीं चली। सड़क के किनारे एक तरफ डेहा बस्ती के लोग तो दूसरी तरफ राजस्थान से आए लोगों ने अपनी झोपड़ियां बना रखी थी जोकि कई बार हादसे का कारण भी बन चुकी है लेकिन आज निगम पूरी तरह से इन पर एक्शन मोड में था और कर्मचारियों ने हर झोपड़ी को अपने हाथों से उखाड़ने का काम किया। ऐसे में इन लोगों का कहना था कि यह राजस्थान के लोग हैं और यहां अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए आए थे। पैसे ना होने के कारण इन लोगों ने अपनी गुजर बसर के लिए यहां पर झोपड़ी बना ली, लेकिन आज निगम ने बिना नोटिस के ही इन्हें यहां से उखाड़ दिया।  बता दें कि कुछ समय पहले भी निगम के अधिकारियों ने इन पर एक्शन लिया था, लेकिन तब इन लोगों को समझ कर और थोड़ा एक्शन कर यहां से टीम वापस चलेगी थी। उसके बावजूद इन लोगों ने यहां से न हटाने में ही अपनी भलाई समझी, लेकिन आज टीम ने एक्शन मोड में आकर इन्हें यहां से उखाड़ फेंक दिया और चेतावनी दी कि भविष्य में अगर सड़क किनारे झोपड़ी बनाई तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। 

कुश्ती जगत में हलचल: WFI ने हटाया दोनों खिलाड़ियों पर लगा बैन, जानें पूरी कहानी

चंडीगढ़  भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत और जूनियर पहलवान नेहा सांगवान पर लगा निलंबन हटा लिया। इन दोनों पहलवानों को इस साल की शुरुआत में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में अधिक वजन का पाए जाने के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस फैसले का मतलब है कि दोनों पहलवान प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) के आगामी चरण की नीलामी में भाग ले सकेंगे। पेरिस खेलों के कांस्य पदक विजेता अमन को सितंबर में क्रोएशिया के जगरेब में विश्व चैंपियनशिप के दौरान अधिक वजन के कारण निलंबित कर दिया गया था जबकि नेहा को अगस्त में बुल्गारिया के समोकोव में जूनियर विश्व चैंपियनशिप से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद निलंबन सामना करना पड़ा था। दोनों पहलवानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अमन को 22 सितंबर और नेहा को 25 अगस्त को भेजे गए नोटिस के जवाब क्रमशः 28 सितंबर और 18 सितंबर को प्राप्त हुए। जगरेब प्रतियोगिता के लिए नियुक्त कोचों को भी नोटिस जारी किए गए थे। डब्ल्यूएफआई के अनुसार पहलवानों ने अपने लिखित बयान में इस घटना को अपनी पहली गलती बताया और महासंघ को आश्वासन दिया कि इस तरह के उल्लंघन दोबारा नहीं होंगे। डब्ल्यूएफआई अनुशासन समिति की 13 नवंबर को हुई बैठक में इन दोनों के जवाबों की जांच की गई और पाया गया कि दोनों पहलवानों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन शानदार रहा है। इसलिए समिति ने उनकी पिछली उपलब्धियों को देखते हुए उनके प्रति नरम रुख अपनाने की सिफारिश की। डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने सिफारिश को स्वीकार करते हुए उनके निलंबन को हटाने और उन्हें भविष्य की सभी प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति देने का आदेश जारी किया। महासंघ ने हालांकि चेताया कि भार प्रबंधन या अनुशासन से संबंधित किसी भी उल्लंघन के बार बार किए जाने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।  

पेंशनरों के लिए खुशखबरी: हरियाणा सरकार ने खत्म किया बैंक का झंझट, 2.41 लाख लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

चंडीगढ़ केंद्र सरकार ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (डीएलसी) अभियान 4.0 की शुरुआत की है, ताकि देशभर के पेंशनर्स आसानी से घर बैठे ही अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा करा सकें। यह सुविधा खासतौर पर बुजुर्गों और दिव्यांग पेंशनर्स के लिए राहत लेकर आई है। अब पेंशनर्स को बैंक या दफ्तरों में लाइनों में लगने की जरूरत नहीं होगी। इस अभियान का लक्ष्य है कि दो करोड़ से ज्यादा पेंशनर्स तक यह डिजिटल सुविधा पहुंचे। सरकार का कहना है कि यह अभियान देश के दो हजार से ज्यादा शहरों और कस्बों में चलाया जा रहा है, ताकि हर पेंशनभोगी तक डिजिटल सशक्तीकरण पहुंच सके।   हरियाणा के 2.41 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को इस सुविधा का लाभ मिलने की संभावना है। उन्हें डिजिटल तरीके से अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा कराने में मदद मिलेगी। हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा 30 नवंबर तक पूरे देश में चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान 4.0 में अपनी भागीदारी की घोषणा की है। पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में आसानी और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान पूरे हरियाणा में चलाया जाएगा। हरियाणा के कोषागार एवं लेखा विभाग के महानिदेशक सीजी रजनीकांथन ने बताया कि अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन और समन्वय के लिए पंचकूला स्थित पेंशन वितरण प्रकोष्ठ (पीडीसी) के संयुक्त निदेशक राकेश राठी को राज्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि हरियाणा (चंडीगढ़ सहित) के सभी कोषागार अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के लिए उप नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। कोषागार अधिकारियों को अभियान के सुचारू और सफल क्रियान्वयन के लिए सभी आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक ने बताया कि इस पहल से लगभग 2.41 लाख हरियाणा सरकार के पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशन भोगी लाभान्वित होंगे, जो ई-पेंशन के माध्यम से कोषागारों/उप-कोषागारों और पेंशन वितरण बैंकों (एसबीआई, पीएनबी, बीओआइ, यूबीआइ, सीबीआई और केनरा बैंक) के माध्यम से पेंशन प्राप्त करते हैं। उन्होंने सभी पेंशनभोगियों से आह्वान किया कि वे इस अभियान का पूरा लाभ उठाएं और अपने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र या तो निकटतम कोषागार कार्यालय में या फिर अपने घर बैठे स्मार्टफोन का उपयोग कर “जीवन प्रमाण” पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से जमा करें।

NIA की बड़ी कार्रवाई: नूंह से खाद विक्रेता हिरासत में, दिल्ली धमाके से जुड़ रहे सुराग

नूंह   दिल्ली विस्फोट मामले में एनआईए की टीम ने बृहस्पतिवार को हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम और मेवात में खाद दुकानें खंगाली। जांच एजेंसी ने नूंह से एक खाद-बीज विक्रेता और एक निजी अस्पताल के डॉक्टर को हिरासत में लिया। माना जा रहा है कि कथित रूप से संदिग्ध डॉक्टरों ने इन जिलों की दुकानों से 26 क्विंटल एनपीके खाद खरीदा था। खाद विक्रेता की पहचान दिनेश सिंगला उर्फ डब्बू के रूप में हुई है। वह मूल रूप से गांव शिकारवा का निवासी है। दूसरे व्यक्ति की पहचान रिहान के रूप में हुई है, जो नूंह का निवासी है। वह तावडू में एक निजी अस्पताल में डॉक्टर है। सूत्रों के अनुसार, उसने अल-फ्लाह यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। इधर, हरियाणा पुलिस ने दिल्ली विस्फोट से जुड़ी तीसरी संदिग्ध ब्रिजा कार को अल-फ्लाह यूनिवर्सिटी से बरामद कर लिया। कार लेडी डॉक्टर शाहीन के नाम पर बताई जा रही है। बुधवार रात को दूसरी ईको इकोस्पोर्ट कार फरीदाबाद के गांव खंदावली से बरामद की गई थी। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के एचआर विभाग से जमील को गिरफ्तार किया है। एक और व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस मामले में पुलिस को चौथी स्विफ्ट डिजायर कार की तलाश है। इसके साथ ही, अल-फ्लाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत एक और कश्मीरी डाक्टर लापता है। फरीदाबाद पुलिस ने कई कालोनियों और झुग्गियों में सर्च ऑपरेशन चलाया।  इस बीच, विस्फोट में घायल एक व्यक्ति की उपचार के दौरान मौत हो गयी। इससे विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गयी है। इधर, डीएनए परीक्षण से पुष्टि हुई है कि डॉ. उमर नबी ही उस कार को चला रहा था, जिसमें विस्फोट हुआ था। साथ ही, विस्फोट स्थल के पास एक दुकान की छत पर एक कटा हुआ हाथ मिला है। इस बीच, यह भी पता चला है कि तीनों अारोपी डॉक्टर ‘थ्रीमा’ नामक एक स्विस संचार एप के जरिए लगातार संपर्क में थे। 

यात्रियों के लिए खुशखबरी! चंडीगढ़ एयरपोर्ट की उड़ान अवधि बढ़ी

हरियाणा  यात्रियों के लिए गुड न्यूज आई है। शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट चंडीगढ़ पर उड़ान सेवाओं का समय और दायरा दोनों बढ़ा दिए हैं। अब यहां से देश के 12 प्रमुख शहरों और दुबई के लिए सीधी उड़ानें होंगी। वहीं एयरपोर्ट अब 18 घंटे तक चालू रहेगा। पहले विमानों का केवल 7 घंटे ही संचालन होता था। यात्रियों को मिलेगा फायदा अब चंडीगढ़ एयरपोर्ट से  हैदराबाद, गोवा, दिल्ली, बंगलूरू, जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद, मुंबई, आबू धाबी, धर्मशाला, श्रीनगर, पुणे और दुबई के लिए सीधी उड़ानें शुरू हो गई हैं। इससे यात्रियों को राहत मिलेगी। पहले फेज में 26 अक्टूबर से 6 नवंबर तक केवल 7 घंटे विमानों का संचालन हुआ था। अब दूसरे फेज में 7 नवंबर से 18 नवंबर तक यह अवधि 18 घंटे तक बढ़ाई गई है।

400 करोड़ के लोन का खेल! हरियाणा के इस गांव में ऐसे चलता था पूरा रैकेट

चंडीगढ़  हरियाणा का डीघल गांव 400 करोड़ के नकद लोन का अड्डा बन गया है. यहां 5% मासिक ब्याज पर कॉर्पोरेट्स को 'ज़ुबान' पर कर्ज़ मिलता है। इस खेल में गैंगस्टर भी शामिल । एक फाइनेंसर के मर्डर और एक सब-इंस्पेक्टर व आईजी की आत्महत्या के बाद इस खूनी मकड़जाल का भंडाफोड़ हुआ। अब गांव में दहशत है और फाइनेंसरों को पुलिस सुरक्षा लेनी पड़ी है।    हर महीने 5% ब्याज पर 400 करोड़ रुपये तक का नकद लोन… वो भी बिना किसी बैंक के, सिर्फ ‘ज़ुबान’ पर. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हरियाणा के झज्जर जिले के डीघल गांव की ज़मीनी हकीकत है। पैसे के इस ‘अदृश्य’ और अरबों रुपये के खेल ने जब अपना खूनी रंग दिखाया, तो एक ऐसा मकड़जाल सामने आया जिसमें बड़े फाइनेंसर, कॉर्पोरेट और गैंगस्टर, सब उलझे हुए हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब रोहतक साइबर सेल के सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार लाठर ने 14 अक्टूबर को आत्महत्या कर ली। मरने से पहले उन्होंने एक वीडियो में आरोप लगाया कि एक मर्डर केस से एक म्यूजिक कंपनी के मालिक राव इंद्रजीत यादव का नाम हटाने के लिए हरियाणा के एक आईजी (वाई पूरन कुमार) ने 50 करोड़ रुपये की घूस मांगी थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ ही समय पहले उन आईजी ने भी आत्महत्या कर ली थी। यह पूरा घटनाक्रम एक ऐसे मकड़जाल की तरफ इशारा कर रहा था, जिसके तार डीघल गांव के करोड़ों रुपये के नकद फाइनेंस के धंधे से जुड़े थे।   क्या है 400 करोड़ का यह ‘नकद’ खेल? डीघल को वहां के लोग ‘फाइनेंसरों का गांव’ कहते है। गांव के लोगों और मामले की जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यहां 20 से 50 साल के करीब 1200 लोग इस धंधे में शामिल हैं।इनमें से ज्यादातर युवा है है। ये लोग आपस में 10 से 20 लाख रुपये तक जमा करके एक बड़ा ‘पूल’ बनाते हैं। इस पूल से बड़े-बड़े कॉर्पोरेट्स और रियल एस्टेट कारोबारियों को अरबों रुपये तक का कर्ज़ दिया जाता है और यह सब कुछ ‘कैश’ यानी नकद में होता है। इस धंधे का सबसे चौंकाने वाला पहलू है इसका ब्याज. यह पूरा सिस्टम 5% मासिक ब्याज दर पर चलता है. यानी, अगर किसी ने एक करोड़ रुपये का लोन लिया, तो उसे हर महीने 5 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के तौर पर चुकाने होंगे. इस पैसे की वसूली के लिए डीघल और आसपास के कई जिलों (रोहतक, सोनीपत, भिवानी) के हज़ारों लड़के लगे हुए हैं. इनके कर्जदार सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यूपी, राजस्थान, गुड़गांव, मुंबई और दिल्ली तक फैले हैं।  यहां ‘ज़ुबान’ और ‘पंच’ पर चलता है धंधा आखिर बिना किसी बैंक या कानूनी प्रक्रिया के करोड़ों का यह लेन-देन कैसे चलता है? दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा सौदा ज़ुबान और ताकत के दम पर चलता है।लोन देने से पहले ये फाइनेंसर 5% ब्याज जोड़कर कर्जदार से मासिक चेक ले लेते हैं. 6 महीने का बैंक खाता और टर्नओवर भी देखा जाता है. अगर मामला थोड़ा भी संदिग्ध लगा, तो ज़मीन, मकान या कंपनी के मालिकाने के असली कागज़ात गिरवी रख लिए जाते हैं। लेकिन इस सौदे में सबसे ज़रूरी चीज़ एक ‘पंच’ (बिचौलिया) होता है। यह कोई राजनीतिक या सामाजिक रूप से रसूखदार व्यक्ति होता है, जो दोनों पक्षों की गारंटी लेता है ।