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हरियाणा सरकार ने बनाई कार्रवाई टीम, पराली जलाने पर कड़ा कानून लागू

हरियाणा  हरियाणा सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार पराली जलाने वालों पर कड़ी नजर रखने के लिए अकेले फरीदाबाद जिले में 149 टीमें नियुक्त की जाएंगी। इसके अलावा पूरे मंडल में कुल 592 टीमें सक्रिय रहेंगी, जो लगभग 3,000 किसानों पर पैनी निगरानी रखेंगी। यदि कोई किसान पराली जलाता पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार पूरे राज्य में भी ऐसी टीमें पराली जलाने वालों पर नजर बनाए रखेंगी। इन टीमों का एक और महत्वपूर्ण कार्य फसलों की कटाई एवं बची हुई पराली के अवशेषों की रिपोर्ट तैयार करना होगा। यह रिपोर्ट जिला उपायुक्त के माध्यम से उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा डिप्यूटेशन अधिकारियों की नियुक्ति कर इन टीमों का गठन सुनिश्चित किया जाएगा। बता दें कि ग्रैप के विभिन्न चरणों के अनुसार इन टीमों की संख्या में वृद्धि भी की जा सकती है। कंस्ट्रक्शन साइटों पर भी कड़ी निगरानी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण कार्यों से भी प्रदूषण में भारी वृद्धि होती है। अब केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मान्यता प्राप्त निर्माण साइटें ही संचालित हो सकेंगी। किसी भी साइट के मालिक को संचालन के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेना अनिवार्य होगा। पहले से संचालित साइटों को भी प्रदूषण नियंत्रण के मानकों को पूरा करना होगा। एनओसी जारी करने में एफएमडीए, क्षेत्रीय कार्यालय नगर निगम, और एचएसवीपी जैसे विभागों की मदद ली जा रही है, ताकि ग्रैप के लागू होने से पहले सभी प्रदूषण नियंत्रण मानकों को पूरा किया जा सके।   पराली जलाने पर सख्त जुर्माना और प्रतिबंध पलवल के डिप्टी कमिश्नर डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ के अनुसार, पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उल्लंघन करने वालों पर 5,000 से लेकर 30,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और एफआईआर दर्ज की जाएगी। साथ ही, आने वाले दो वर्षों तक ऐसे किसान अपनी फसल को एमएसपी पर बेचने के पात्र नहीं होंगे। हेल्पलाइन नंबर जारी सरकार किसानों को पराली जलाने की बजाय इसे आय का स्रोत बनाने के विकल्प भी उपलब्ध कराएगी। आम आदमी भी पराली जलाए जाने की सूचना कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को दे सकते हैं। इसके लिए 01275-254060 हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

सीधे मुख्यमंत्री से जुड़ने का तरीका: इस नंबर पर करें कॉल

चंडीगढ़  हरियाणा के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। यदि आप अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों से परेशान हो चुके हैं और सीधे मुख्यमंत्री से संपर्क करना चाहते हैं, तो आपके लिए एक आसान तरीका है। इन तरीकों से आप अपनी समस्याओं को सीधे मुख्यमंत्री के सामने रख सकते हैं और उनका समाधान पा सकते हैं।  मुख्यमंत्री से संपर्क करने के तरीके       मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर: 181      कार्यालय संपर्क नंबर: 0172-2749394 / 2749395      निवास स्थान संपर्क नंबर: 0172-2749394 / 2749395      ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: सीएम विंडो पोर्टल (cmharyana.gov.in) पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।      ईमेल आईडी: cmharyana@nic.in इन तरीकों से आप सीधे मुख्यमंत्री से संपर्क कर सकते हैं और अपनी समस्याओं को उनके सामने रख सकते हैं। इसके अलावा, यदि आपको लाडो लक्ष्मी योजना से संबंधित समस्याएं हैं, तो आप टोल-फ्री नंबर 01724880500 और 18001802231 पर संपर्क कर सकते हैं। सीएम विंडो पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के चरण  1. सीएम विंडो पोर्टल (cmharyana.gov.in) पर जाएं। 2. अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए आवश्यक जानकारी भरें। 3. अपनी शिकायत का विवरण दें और आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। 4. शिकायत दर्ज करने के बाद आपको एक रसीद नंबर मिलेगा, जिसका उपयोग आप अपनी शिकायत की स्थिति जानने के लिए कर सकते हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हरियाणा CET Group-C नॉर्मलाइजेशन वैध

चंडीगढ़ हरियाणा में ग्रुप-सी भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) द्वारा सीईटी (कॉमन पात्रता परीक्षा) 2025 के नतीजों में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन फार्मूले को पूरी तरह वैध और न्यायसंगत ठहराया है। साथ ही, अपील संख्या एलपीए-2890-2025 (राहुल डागर एवं अन्य बनाम एचएसएससी एवं अन्य) को खारिज कर दिया। यहां बता दें कि ग्रुप-सी पदों के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने सीईटी (कॉमन पात्रता परीक्षा) ली थी। यह परीक्षा विभिन्न विभागों में आने वाली भर्ती प्रक्रिया में स्तर सुनिश्चित करने का आधार बनेगी। नॉर्मलाइजेशन फार्मूला इसीलिए जरूरी माना गया ताकि अलग-अलग शिफ्टों या पेपर वेरिएंट्स में कठिनाई अंतर को संतुलित किया जा सके। इस पद्धति पर पहले भी विवाद हुए थे, लेकिन कोर्ट इस पद्धति को कई बार वैध माना गया है। सीईटी का आयोजन 26 एवं 27 जुलाई को दो दिन में चार शिफ्टों में हुआ था। 13 लाख 48 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने इसके लिए आवेदन किया था और नब्बे प्रतिशत से अधिक ने एग्जाम में भाग लिया। अब अभ्यर्थी बेसब्री से नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। चूंकि नतीजे घोषित होने के बाद ही ग्रुप-सी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी, और युवाओं के लिए रोजगार की राह खुलेगी। आयोग ने यह संकेत भी दिया है कि जैसे ही परिणाम घोषित होंगे, आगे की कट-ऑफ, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र आरंभ की जाएगी। सुनवाई में यह सामने आया कि कुछ लोग ‘मामला मैनेज कराने’ के नाम पर हाईकोर्ट के एक कर्मचारी या अन्य माध्यम से क्यूआर कोड द्वारा धन संग्रह करने की कोशिश कर रहे थे। न्यायालय ने इसे न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताते हुए सभी संबंधित दस्तावेज सीलबंद करने का आदेश दिया। मामला हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल को आगे की कार्रवाई और जांच हेतु सौंपा गया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी याचिकाएं न सिर्फ भर्ती प्रक्रिया को लटकाने की चेष्टा हैं, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ भी हैं। भविष्य में यदि कोई इसी तरह की याचिका दायर कर भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयत्न करेगा, तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का दायित्व हो सकता है। भर्ती प्रक्रिया जारी : उम्मीदों की किरण हाईकोर्ट के इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया अब कानूनी अड़चनों से मुक्त हो सकेगी। एचएसएससी को अब सीईटी के नतीजे तुरंत जारी करने और ग्रुप-सी पदों की नियुक्तियों की प्रक्रिया तेजी से शुरू करने की राह खुल गई है। हजारों पदों पर नियुक्ति के लिए युवाओं को अवसर मिलेगा और बेरोजारी की समस्या में राहत मिलने की उम्मीद है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी मेहनत को अब न्याय मिलेगा, अनिश्चितता खत्म होगी।   सक्रियता और पारदर्शिता का कदम पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह निर्णय सिर्फ एक याचिका खारिज करने का मामला नहीं है बल्कि यह न्यायपालिका की सक्रियता और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नॉर्मलाइजेशन की वैधता की पुष्टि से चयन प्रक्रिया विवादों से मुक्त होगी। भर्ती को लटकाने की कोशिश करने वालों पर शिकंजा कसने का स्पष्ट संकेत गया है। अब नतीजों की घोषणा और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होती ही युवाओं की उम्मीदों को नई उड़ान मिलेगी।

स्वच्छता की जंग शुरू! हरियाणा के शहरों में मुकाबला, कौन मारेगा बाज़ी?

करनाल जिला सचिवालय सभागार में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत स्वच्छ शहर जोड़ी-समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह का आयोजन किया गया जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। स्वच्छता के प्रति मार्गदर्शन के लिए करनाल नगर निगम की ओर से प्रदेश के 5 शहरों की नगर पालिकाओं के साथ एमओयू किया गया। केंद्रीय ऊर्जा, आवासन व शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल सोनीपत से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए देश की विभिन्न निकाय संस्थाओं से जुड़े और स्वच्छ शहर जोड़ी पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हम हरियाणा के शहरों के बीच भी स्वच्छता की प्रतियोगिता आयोजित करेंगे। हमने हरियाणा के शहरों की रैंकिंग भी तय की है। उसके लिए कुछ पैरामीटर भी तय किए हैं। नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्र में साफ-सफाई के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि प्रदेश साफ – सुथरा हो, शहर स्वच्छ हों, हरे भरे हों, उसे साकार किया जा सके। पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्वच्छता में बेहतर रैंकिंग पाने वाले शहरों ने आज पांच-पांच अन्य शहरों को गोद लिया है ताकि भविष्य में इन्हें भी स्वच्छ बनाया जा सके। पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में करनाल के साथ-साथ सोनीपत ने भी बेहतर रैंक प्राप्त किया था। आज सोनीपत ने होडल, नारनौल, पटौदी मंडी, फर्रूखनगर व कुंडली को गोद लिया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता से कई प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है। हम सबकी जिम्मेदारी है कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में शुरू किए गए स्वच्छता अभियान को सफल बनाएं। एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि धान की खरीद जारी है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगें। मंडियों में धान की खरीद सही तरीके से हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने एक अधिकारी की नियुक्ति मंडी में धान खरीद की व्यवस्था की निगरानी के लिए की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के समय में तो फसल नुकसान की भरपाई नहीं होती थी। किसान सहायता के लिए ताकता रहता था, एक-दो रुपये का चेक भेजा जाता था। जबकि हमारी सरकार ने फसलों के हुए नुकसान का जल्द भुगतान सुनिश्चित किया है। इस बार भी क्षति-पूर्ति पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों को जल्दी ही जांच के बाद मुआवजा राशि दी जाएगी। इस मौके पर करनाल के विधायक जगमोहन आनंद, असंध के विधायक योगेंद्र राणा, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के महानिदेशक डॉ. पंकज, उपायुक्त उत्तम सिंह, मेयर रेणुबाला गुप्ता तथा विभिन्न नगर पालिकाओं के अधिकारी मौजूद रहे।

अंबाला-राजस्थान के लिए नई रेल लाइन की सौगात, जाने Time Table, यात्रियों को बड़ी सुविधा

अंबाला अंबाला रेल मंडल की तरफ से चंडीगढ़ से राजस्थान के लिए नई ट्रेन चलाई गई है। पिंक सिटी जयपुर के उदयपुर से चंडीगढ़ के लिए चलाई गई विशेष ट्रेन नंबर 09671 का ट्रायल रन सफल रहा। ट्रेन लगभग 1:05 मिनट की देरी से अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंची। यहां पर अंबाला रेल मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक नवीन कुमार झा सहित अन्य विभागीय अधिकारियों ने ट्रेन का स्वागत किया और लगभग सात मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर चंडीगढ़ की तरफ रवाना किया।  वहीं, वापसी में ट्रेन नंबर 09672 सुबह 11:20 बजे चंडीगढ़ स्टेशन से रवाना हुई और ठीक 12 बजे अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंची। यहां पांच मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन को उदयपुर के लिए रवाना कर दिया गया।  अंबाला मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक नवीन कुमार झा ने बताया कि 25 सितंबर को ट्रायल रन के दौरान उदयपुर से ही ट्रेन लगभग एक घंटे की देरी से चली थी और बीच रास्ते ट्रेन का कई जगह स्वागत किया गया। इस कारण ट्रेन लगभग एक घंटा लेट हो गई थी, हालांकि वापसी में ट्रेन अपने निर्धारित समय पर चंडीगढ़ से रवाना होकर अंबाला पहुंची और फिर उदयपुर की तरफ रवाना हो गई। ट्रेन का नए नंबर से संचालन 27 व 28 सितंबर से आरंभ हो जाएगा। 

सैनी सरकार 24 घंटे सक्रिय: 287 गांव हॉटस्पॉट पर कड़ी निगरानी, ये काम किया तो लगेगा जुर्माना!

हरियाणा  हरियाणा की सैनी सरकार प्रदूषण को लेकर अलर्ट हो गई है। जिसके चलते प्रदेश के 287 उन गांवों को चिन्हित किया है, जहां पराली जलाने की सबसे ज्यादा संभावना है। जानकारी के मुताबिक, इन गांवों में 24 घंटे निगरानी रखी अधिकारी को लगाया गया है। वे पराली प्रबंधन के उपायों की निगरानी के साथ किसानों को जागरूक भी करेंगे।एक हिंदी खबर की मानें, तो सबसे अधिक गाँव करनाल में हैं। इस जिले में 65 गांव हैं। कैथल में 58, जींद में 47, कुरुक्षेत्र में 41, सिरसा में 33, फतेहाबाद में 22 और 21-21 गांव अंबाला, यमुनानगर, पानीपत और सोनीपत में हैं। 14 गांव रेड जोन में है, जबकि बाकी येलो जोन में हैं। हरियाणा में इस बार करीब 85.5 लाख मीट्रिक टन पराली का प्रबंधन किया जाना है। रेड जोन में किसानों को जागरूक करने के लिए किसान मित्र भी नियुक्त किए गए हैं। रेड जोन में दो किसान मित्र और यलो जोन में एक किसान मित्र की नियुक्ति की गई है।

गुरुग्राम से पधारें सिर्फ डेढ़ घंटे में सालासर और खाटू श्याम, यात्रियों के लिए राहत की खबर

गुरुग्राम  हरियाणा की साइबर सिटी से एक अच्छी खबर सामने आ रही है। जल्द ही यहां हेलिपोर्ट बनाया जाएगा। जिसके बाद सालासर और खाटू श्याम के लिए हेलिटैक्सी शुरू होगी।  दरअसल, हरियाणा की सैनी सरकार ने हेलिकॉप्टर टैक्सी सेवा शुरू करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। खबरों की मानें, तो गुरुग्राम में बनने वाले हेलिपोर्ट के लिए 23 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है। यह जमीन हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) की है। प्रदेश सरकार ने इस जमीन को नागरिक उड्डयन विभाग को ट्रांसफर करने की कवायद शुरू कर दी है।    जानकारी के मुताबिक, इस हेलिपोर्ट से फिलहाल दो रूट पर सहमति बनी है। पहला, गुरुग्राम से खाटू श्याम व दूसरा सालासर धाम है। इस संबंध में हरियाणा सरकार की राजस्थान सरकार से भी बातचीत हो चुकी है। हरियाणा सरकार के सिविल विमानन विभाग की आयुक्त एवं सचिव अमनीत पी कुमार ने बताया कि एचएसआईआईडीसी से जमीन लेने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द यह जमीन मिल जाएगी। वहीं गुरुग्राम से अन्य रूट भी प्रस्तावित हैं जिनमें चंडीगढ़ और हिसार शामिल है। राजस्थान के तीर्थ स्थान के लिए इस सेवा के शुरू होने से क्षेत्रीय पर्यटन और तीर्थ यात्रियों को काफी फायदा मिलेगा। इसके साथ ही दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।  गुरुग्राम से डेढ़ घंटे में पहुंच सकेंगे सालासर और खाटूश्याम बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर टैक्सी सेवा शुरू होने से श्रद्धालुओं को समय की काफी बचत होगी। मौजूदा समय में गुरुग्राम से सड़क के रास्ते सालासर बालाजी और खाटूश्याम जाने में एक तरफ का करीब छह से सात घंटे का समय लगता है। अगर बीच में जाम की लग जाता है तो एक दो घंटे और ज्यादा लग सकते हैं। वहीं, हेलिकॉप्टर टैक्सी सेवा के माध्यम से सिर्फ सवा से डेढ़ घंटे का समय लगेगा। इसके साथ ही वापसी भी हेलिकॉप्टर टैक्सी से होगी। इस सेवा न सिर्फ गुरुग्राम ही नहीं बल्कि NCR के कई जिलों को फायदा पहुंचेगा।

धान खरीदी में बदलाव: हर मंडी में HCS अधिकारी, किसानों को अब मिलेगा तेज और पारदर्शी काम!

चंडीगढ़ प्रदेश में धान खरीद प्रक्रिया में आ रही लगातार शिकायतों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी किए कि प्रत्येक मंडी में HCS स्तर का एक अधिकारी तैनात किया जाए। यह अधिकारी मंडी में धान की खरीद, उठान और अन्य गतिविधियों पर सीधी निगरानी रखेगा। निर्देशों के अनुसार, जिला उपायुक्त (DC) खुद भी मंडियों का दौरा करेंगे और खरीद व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे। सरकार ने DC को गेट पास, पोर्टल संचालन और उठान से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक, खाद्य एवं आपूर्ति निदेशक, हैफेड, कॉन्फैड और वेयरहाउसिंग निगम के प्रबंध निदेशकों को भी खरीद प्रणाली की व्यक्तिगत निगरानी के निर्देश दिए हैं। इन अधिकारियों को कम से कम 2 मंडियों का दौरा कर वहां की तैयारियों का जायजा लेना होगा और जहां भी कमी मिलेगी, उसे दूर करने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी। 

सरकार ने बढ़ाया निर्माण खर्च, हरियाणा में बदल जाएगा हर निर्माण का अंदाज

चंडीगढ़ हरियाणा में अब शहरों के आसपास लगने वाली कृषि भूमि पर स्कूल-अस्पताल, पेट्रोल पंप बनाना महंगा होगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने कृषि भूमि पर कोई भी कॉमर्शियल काम करने पर एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज लगाने का फैसला किया है। इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए सीएम नायब सैनी के पास भेज दिया है। अभी तक ये चार्ज सिर्फ शहरों की जमीन पर ही लगता था। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही लागू होगा टैक्स इस प्रस्ताव को आने वाली कैबिनेट की मंजूरी के लिए मीटिंग में भी रखा जाएगा। इसके लागू होते ही टाउन कंट्री प्लानिंग के तहत नोटिफाइड एरिया के अंतर्गत आने वाले कृषि क्षेत्र में हर कॉमर्शियल एक्टिविटी में चार्ज वसूला जाएगा।  राज्य में अभी सिर्फ नगर निगमों, परिषदों और पालिका के एरिया में आने वाली लैंड पर ही ईडीसी की वसूली की जाती है। कृषि क्षेत्र में पहले कॉमर्शियल एक्टिविटी के लिए सिर्फ चेंज आफ लैंड यूज का ही चार्ज लगता था। नए प्रस्ताव के मुताबिक अब सीएलयू के साथ ईडीसी भी देना पड़ेगा।  राज्य में ईडीसी की कोई एक निश्चित दर नहीं है। यह एक प्रोजेक्ट के प्रकार और स्थान के आधार पर अलग-अलग होता है। दिसंबर 2024 में हरियाणा सरकार ने संभावित रियल एस्टेट क्षेत्रों के लिए ईडीसी दरों में 20% की वृद्धि को मंजूरी दी और उसके बाद हर साल 10% की वृद्धि तय की गई है। ईडीसी में बढ़ोतरी से रियल एस्टेट पर बड़ा असर देखने को मिलेगा। कई डेवलपर्स ने इस फैसले को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जो इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने का वादा किया गया था, वह अब तक पूरा नहीं हुआ है, जबकि ईडीसी के जरिए बहुत पैसा इकट्ठा किया जा चुका है।

2017 पंचकूला हिंसा और हरियाणा सरकार: हाईकोर्ट में उठे हैं चौंकाने वाले सवाल

चंडीगढ़ डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 25 अगस्त 2017 को पंचकूला में फैली हिंसा में 32 लोगों की मौत हुई थी और 118 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ था। उस समय डेरा प्रमुख के हथियारबंद समर्थक कथित तौर पर पंचकूला पहुंचे थे। 2017 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद हुई हिंसा के मामले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट अब यह जांच करेगा कि क्या हरियाणा सरकार हिंसा रोकने में नाकाम रही थी या फिर समर्थकों की भीड़ जुटाने में उसकी कोई मिलीभगत थी। साथ ही मुआवजा और अन्य मुद्दों पर भी फुल बेंच सुनवाई करेगी। 25 अगस्त 2017 को पंचकूला में फैली इस हिंसा में 32 लोगों की मौत हुई थी और 118 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ था। उस समय डेरा प्रमुख के हथियारबंद समर्थक कथित तौर पर पंचकूला पहुंचे थे। शुक्रवार को चीफ जस्टिस शील नागू, जस्टिस विनोद एस भारद्वाज और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पूर्ण पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने कहा कि 2017 में अदालत की ओर से तय संवैधानिक प्रश्नों पर अब फैसला होना चाहिए।   उन्होंने अदालत से हिंसा के मामलों में अभियुक्तों को बरी किए जाने और हरियाणा सरकार की ओर से डेरा सच्चा सौदा का समर्थन करने की घटनाओं पर गौर करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से डेरे की मदद करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इन दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट को मामले को निपटाने के बजाय सुनवाई जारी रखी। गुप्ता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से डेरा समर्थकों को सहयोग दे रही थी। 240 मामले दर्ज हुए लेकिन 100 से अधिक में बरी हो चुके हैं।   पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता चंचल सिंगला ने कहा कि पंजाब ने हिंसा के दौरान 11 जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती और नियंत्रण पर 169 करोड़ रुपये खर्च किए जिसमें 50 करोड़ रुपये सीआरपीएफ पर खर्च हुए। अदालत ने पंजाब सरकार से यह भी पूछा कि क्या उसने सुरक्षा बलों की तैनाती पर हुए खर्च की भरपाई किसी अन्य संस्था से मांगी है इस पर शपथ पत्र दायर किया जाए। अप्रैल 2025 की पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि इस मामले में अब और स्थगन स्वीकार नहीं होगा।