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ऐप-बेस्ड कैब और डिलीवरी सेवाओं के लिए नया सख्त नियम, सुरक्षा और बीमा व्यवस्था अनिवार्य

चंडीगढ़ हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में अहम फैसले लिए गए. कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 में बदलाव को मंजूरी दी गई.  इसमें मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज़ की ओर से जारी दिशानिर्देश के तहत बदलाव किया गया और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के निर्देशों के चलते भी एग्रीगेटर लाइसेंस देने के लिए नियमों को मंज़ूरी दी गई. हरियाणा कैबिनेट ने यह फैसला राज्य के एनसीआर जिलों में बेहतर परिवहन को बढ़ावा देने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने और वायु गुणवता को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है. संशोधित नियमों के तहत 1 जनवरी, 2026 से राष्ट्रीय राजधानी इलाकों में एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में शामिल सभी गाड़ियां आवश्यक तौर पर सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी से चलने वाली गाड़ियां या किसी दूसरे स्वछ्तम ईंधन पर आधारित होंगी. इसके अलावा,  एनसीआर इलाकों में मौजूदा बेड़े में सिर्फ़ सीएनजी या इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर, ऑटो-रिक्शा को ही शामिल करने की अनुमति सरकार की तरफ से दी जाएगी. कैबिनेट ने राज्य में चल रहे ऐप-बेस्ड पैसेंजर एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने के लिए हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के रूल 86 ए में बदलाव की भी मंज़ूरी दी. नए नियमों में एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए आवश्यक लाइसेंसिंग, ड्राइवरों और गाड़ियों के लिए ऑनबोर्डिंग नियम, पैसेंजर सुरक्षा के उपाय, शिकायत सुलझाने के तरीके, प्रेरणा और पुनरावलोकन प्रशिक्षण कार्यक्रम, ड्राइवरों और पैसेंजर के लिए इंश्योरेंस कवरेज, ऐप्स के लिए साइबर सिक्योरिटी का पालन और किराए का रेगुलेशन शामिल हैं. नियमों अनुसार, एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को यात्रियों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का बीमा कवरेज, ड्राइवरों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थय बीमा और ऑनबोर्डेड ड्राइवरों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य होगा. इन नियमों के तहत गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, पैनिक बटन, फर्स्ट-एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर लगाना भी ज़रूरी है. एग्रीगेटर्स को पैसेंजर की मदद और शिकायत दूर करने के लिए 24×7 घण्टे कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर भी बनाने होंगे. कैबिनेट ने तय किया है कि पारदर्शी और जिम्मेवारी को मज़बूत करने के लिए नियमों में वाहन और सारथी पोर्टल के ज़रिए गाड़ी और ड्राइवर की डिटेल्स के वाहन का डिजिटल प्रमाणीकरण का प्रबंध करना है. एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को ऑनबोर्डेड ड्राइवरों और गाड़ियों का डिटेल्ड डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना होगा. यहां करना होगा रजिस्ट्रेशन बैठक में मंत्रिपरषद को अवगत करवाया गया कि एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रोसेस निर्धारित पोर्टल cleanmobility.haryanatransport.gov.in. के ज़रिए संचालन किया जाएगा. नए फ्रेमवर्क में ड्राइवर वेलफेयर, किराया शेयरिंग, सेफ्टी स्टैंडर्ड, दिव्यांगजन-फ्रेंडली गाड़ियों को शामिल करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने से जुड़े नियम भी शामिल किए हैं. कितना है एनसीआर का इलाका गौरतलब है कि दिल्ली और एनसीआर में हरियाणा के 14 जिले आते हैं. इसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, सोनीपत, जींद, पानीपत और करनाल के कुछ हिस्से शामिल हैं. ऐसे में इस फैसले का असर इन जिलों पर होगा.

अब नानी भी मांग सकती हैं बच्चे का खर्च, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम निर्णय

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई नाबालिग बच्चा अपनी नानी की देखरेख में रह रहा है, तो नानी उसके भरण-पोषण के लिए अदालत में दावा कर सकती है, भले ही बच्चे की मां जीवित हो। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में तकनीकी आपत्तियों के आधार पर बच्चे के अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता। जस्टिस नीरजा के कल्सन ने अपने फैसले में कहा कि कानून केवल विवादों का निपटारा करने के लिए नहीं है, बल्कि उन लोगों की सुरक्षा के लिए भी है जो स्वयं अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं। अदालत ने माना कि वैवाहिक रिश्तों के टूटने के बाद अक्सर नानी ही बच्चे की परवरिश, शिक्षा, दवाइयों और भावनात्मक सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाती है। मामला अंबाला की उस याचिका से जुड़ा था जिसमें पिता ने यह दलील दी थी कि बच्चे की मां जीवित है और वही उसकी प्राकृतिक अभिभावक है, इसलिए केवल मां ही बच्चे की ओर से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। पिता ने यह भी कहा कि तलाक के समय एकमुश्त समझौता राशि दी जा चुकी है, जिससे उसकी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है। हालांकि अदालत ने इन दोनों तर्कों को खारिज कर दिया। जस्टिस कल्सन ने कहा कि अदालत के सामने नानी या मां का अधिकार नहीं, बल्कि बच्चे का अधिकार सर्वोपरि है। बच्चे का भरण-पोषण उसका वैधानिक अधिकार है और उसे केवल तकनीकी आधार पर रोका नहीं जा सकता। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 को सामाजिक न्याय का प्रावधान बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य जरूरतमंदों को उपेक्षा और अभाव से बचाता है। अदालत ने कहा कि “मेंटेनेंस” केवल जीवित रहने भर का साधन नहीं है, बल्कि इसमें भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा, चिकित्सा और सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं शामिल हैं।फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के बीच हुए निजी समझौते बच्चे के स्वतंत्र अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकते। बच्चे की जरूरतें समय के साथ बदलती रहती हैं। शिक्षा का खर्च बढ़ता है, चिकित्सा आवश्यकताएं उत्पन्न होती हैं और महंगाई जीवन-यापन को प्रभावित करती है। ऐसे में तलाक के समय दी गई एकमुश्त राशि को भविष्य की सभी जिम्मेदारियों से मुक्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि समाज की वास्तविकता यही है कि पारिवारिक अस्थिरता के दौरान कई बार नानी ही बच्चे के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का आधार बनती है। वह केवल अस्थायी आश्रय नहीं देती, बल्कि बच्चे के भविष्य को संभालने का दायित्व भी निभाती है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में नानी को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

रेलवे का बड़ा प्लान! आरा जंक्शन से होकर गुजरेंगी चार नई रेल लाइनें

आरा. दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाली दिल्ली-हावड़ा मेन लाइन पर जल्द ही बड़े स्तर पर आधारभूत ढांचे का विस्तार देखने को मिल सकता है। रेल मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरा जंक्शन होकर गुजरने वाले इस अत्यंत व्यस्त रेलखंड को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। योजना के तहत लगभग 3500 से 4000 करोड़ रुपये की लागत से दो नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। इसके साथ ही कोईलवर में सोन नदी पर देश का दूसरा चार लेन रेल पुल भी बनाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान दो लाइन वाले रेलखंड को चार लाइन में विकसित किया जाएगा। इसमें एक लाइन पैसेंजर ट्रेनों के संचालन के लिए, एक लाइन मालगाड़ियों के लिए तथा दो लाइन एक्सप्रेस ट्रेनों की आवाजाही के लिए निर्धारित की जाएगी। इससे ट्रेनों के परिचालन में काफी आसानी होगी और यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवा का लाभ मिल सकेगा। सोन नदी पर बनेगा नया पुल इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कोइलवर में सोन नदी पर नए रेल पुल का निर्माण है। यह पुल मौजूदा रेल पुल के समानांतर बनाया जाएगा। पूर्व मध्य रेलवे ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी से पहले परियोजना की तकनीकी और व्यवहारिकता रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। संभावना जताई जा रही है कि इसी माह जांच रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंप दी जाएगी। नए पुल के निर्माण के बाद पुराने और नए पुल को मिलाकर कुल चार रेल लाइनें उपलब्ध हो जाएंगी। इससे एक ही समय में तीन-तीन ट्रेनों का आवागमन संभव हो सकेगा। वर्तमान में केवल दो लाइन होने के कारण अप और डाउन दिशा में एक-एक ट्रेन ही एक समय में गुजर पाती है, जिससे ट्रेनों के परिचालन पर भारी दबाव बना रहता है। समय पालन में होगी बड़ी राहत हावड़ा-पटना-डीडीयू रेलखंड भारतीय रेल के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस रूट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, पैसेंजर और मालगाड़ियां गुजरती हैं। ट्रेनों का दबाव अधिक होने के कारण अक्सर परिचालन प्रभावित होता है और समय पालन बनाए रखना रेलवे के लिए चुनौती बन जाता है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि चार लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकेगा। इससे मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के कारण एक्सप्रेस ट्रेनों की गति प्रभावित नहीं होगी। वहीं लंबी दूरी की ट्रेनों को भी समय पर चलाने में सहायता मिलेगी।  आरा, पटना और आसपास के क्षेत्रों को मिलेगा लाभ इस परियोजना से आरा, बक्सर, बिहिया, डुमरांव और पटना सहित पूरे शाहाबाद क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। रेल ढांचे के मजबूत होने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। साथ ही यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और कम विलंब वाली ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस परियोजना को अंतिम मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट से मिलनी है। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में पूर्व मध्य रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

छात्रों को ग्लोबल अवसरों से जोड़ने की तैयारी, हरियाणा पॉलिटेक्निक में शुरू होंगी विदेशी भाषाएं

भिवानी/चंडीगढ़. हरियाणा के युवाओं के लिए अब विदेशों में करियर के नए अवसर खुलने जा रहे हैं। प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा को वैश्विक स्तर से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इस शैक्षणिक सत्र से पालिटेक्निक संस्थानों में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने वाली है। इसके तहत जर्मन, जापानी, कोरियन और फ्रेंच जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाएं सिखाई जाएंगी, ताकि युवा विदेशी कंपनियों और इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। योजना के तहत प्रदेश के 39 पालिटेक्निक संस्थानों और 11 सोसायटी संस्थानों में विदेशी भाषा कोर्स संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक संस्थान में 30 से 60 सीटें निर्धारित की गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल तकनीकी डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए भी सक्षम बनाना है। प्रोफेशनल कम्युनिकेशन स्किल्स विकसित कराए जाएंगे विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से भाषा दक्षता और प्रोफेशनल कम्युनिकेशन स्किल्स विकसित कराए जाएंगे। इससे वे सीधे विदेशी कंपनियों, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और इंटरनेशनल इंडस्ट्री की मांग के अनुसार खुद को तैयार कर पाएंगे। इस पहल से प्रदेश के 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी शिक्षा के साथ विदेशी भाषाओं का ज्ञान युवाओं की रोजगार क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा। हरियाणा सरकार की यह पहल प्रदेश के युवाओं के लिए सिर्फ नौकरी के अवसर नहीं, बल्कि विदेशों में करियर बनाने के सपनों को नई उड़ान देने का काम करेगी। अब हरियाणा के युवा स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़कर ग्लोबल मंच पर अपनी प्रतिभा साबित कर सकेंगे।

लिंगानुपात सुधार में लापरवाही पर गिरी गाज, SMO और MO सस्पेंड

 चंडीगढ़ हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में लिंगानुपात में सुधार से संबंधित प्रभावी निगरानी और नियमों के कड़े कार्यान्वयन में विफलता को लेकर बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुमिता मिश्रा ने सख्त रुख अपनाते हुए 3 सीनियर मेडिकल ऑफिसर (SMO) और 1 मेडिकल ऑफिसर (MO) को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। निगरानी और नियमों को लागू करने में रहे विफल मिली जानकारी के अनुसार, इन अधिकारियों पर लिंगानुपात में सुधार से जुड़े उपायों की प्रभावी ढंग से निगरानी न करने और संबंधित कानूनों को जमीन पर सही तरीके से लागू करने में नाकाम रहने का आरोप है। विभाग ने इसे कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही माना है। ये अधिकारी हुए सस्पेंड एसीएम सुमिता मिश्रा द्वारा जारी निलंबन आदेश के तहत जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:     SMO डॉ. टीना आनंद     SMO विजय परमार     SMO सतपाल     MO प्रभा  

सिवाह नहर पुल हादसा: महिला का शव बरामद, पति की तलाश जारी

पानीपत  सिवाह नहर पुल पर सोमवार सुबह पूजा सामग्री प्रवाहित करते वक्त असंध निवासी दंपती का पैर फिसल गया और वह बह गए। महिला का शव करीब 20 किलोमीटर दूर सोनीपत के खूबड़ू झाल से बरामद किया, पति की देर शाम तक तलाश जारी रही। मृतक कमलेश (56) बेटे गौरव के बयान में सामने आया कि दंपती पूजा सामग्री प्रवाहित करने के दौरान हादसे का शिकार हुए। असंध निवासी 60 वर्षीय मुरारी लाल गोयल राइस मिलर थे। उनकी आढ़त की दुकान और फैक्ट्री भी है। सोमवार तड़के वह पत्नी कमलेश के साथ स्कूटी पर पानीपत पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों ने सिवाह नहर पुल के पास स्कूटी खड़ी की, चप्पलें उतारकर स्कूटी पर रखीं और नहर किनारे पहुंचे। इसी दौरान दोनों गहरे पानी में चले गए और तेज बहाव में बह गए। राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। इसराना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू कराया। पंडित ने पूजा सामग्री प्रवाहित करने के लिए कहा था पुलिस को दिए बयान में गौरव ने बताया कि उनके माता-पिता को एक पंडित ने पूजा सामग्री पानीपत के पास नहर में प्रवाहित करने के लिए कहा था। इसी कारण दोनों सुबह घर से निकले थे। पूजा सामग्री प्रवाहित करते समय उनका पैर फिसल गया और वे नहर के तेज बहाव में बह गए। गौरव ने बताया कि परिवार में किसी प्रकार का विवाद या आर्थिक परेशानी नहीं थी। कारोबार भी सही चल रहा था। गौरव के अनुसार सोमवार सुबह जब बच्चे सैर के लिए उठे तो घर के बाहर स्कूटी नहीं थी। माता-पिता भी घर पर नहीं मिले। तलाश शुरू की और बाद में सूचना मिली कि उनकी स्कूटी पानीपत में नहर किनारे खड़ी है। इसराना के थाना प्रभारी हरिराम ने कहा कि लोगों को लगा था कि बुजुर्ग दंपती नहर में नहाने के लिए उतरे हैं, लेकिन बाद में परिवार की ओर से पूजा सामग्री प्रवाहित करने की बात सामने आई है। मामले की जांच की जा रही है। कमलेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल के शवगृह में रखवाया है। मुरारी लाल की तलाश जारी है।

देशभर में दवा संकट नहीं होगा, मेडिकल स्टोर हड़ताल पर सरकार का बड़ा बयान

चंडीगड़ देशभर में 20 मई को प्रस्तावित मेडिकल स्टोर हड़ताल को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. सरकार और दवा नियामक एजेंसियों की ओर से साफ किया गया है कि आम लोगों को दवाओं की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. कई राज्यों के रिटेल फार्मेसी संगठनों ने हड़ताल से दूरी बना ली है और मेडिकल स्टोर खुले रखने का फैसला किया है. दरअसल, ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने 20 मई को देशभर में मेडिकल स्टोर बंद रखने का आह्वान किया है. AIOCD देशभर के करीब 12.4 लाख केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है. संगठन का दावा है कि ई-फार्मेसी और इंस्टेंट मेडिसिन डिलीवरी प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी के काम कर रहे हैं, जिससे दवाओं की बिक्री और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. दवा दुकानों की हड़ताल से कौन-कौन बाहर? हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि इस हड़ताल का असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि कई राज्य स्तरीय फार्मेसी एसोसिएशनों ने इसका समर्थन नहीं किया है. सूत्रों के मुताबिक, सभी बड़े फार्मेसी चेन, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और AMRIT फार्मेसी स्टोर मंगलवार को खुले रहेंगे. सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, केरल, छत्तीसगढ़, सिक्किम और लद्दाख समेत कई राज्यों के फार्मेसी संगठनों ने लिखित रूप से भरोसा दिया है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं होंगे और दवाओं की सप्लाई सामान्य बनी रहेगी. क्यों हड़ताल पर मेडिकल स्टोर? AIOCD का मुख्य विरोध ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म को लेकर है. संगठन का आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना सही प्रिस्क्रिप्शन जांच के दवाएं बेच रहे हैं. इसके अलावा AI से तैयार फर्जी पर्चियों के जरिए एंटीबायोटिक और दूसरी दवाओं के गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, IOCD के महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी अब स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन उनके लिए सख्त नियम जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा नियमों में खामियों की वजह से ई-फार्मेसी कानूनी ‘ग्रे जोन’ में काम कर रही हैं. गठन का कहना है कि इन प्रावधानों के चलते ऑनलाइन फार्मेसी को बिना स्पष्ट नियामक ढांचे के काम करने की छूट मिल गई है. AIOCD चाहता है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी वही नियम लागू हों जो पारंपरिक मेडिकल स्टोर पर लागू होते हैं. क्या कह रही सरकार? वहीं केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कहा है कि ई-फार्मेसी को लेकर उठाई गई चिंताओं की समीक्षा की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, दवा नियामक ने AIOCD प्रतिनिधियों से बातचीत की है और उनके मुद्दों पर विचार जारी है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि मरीजों को दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है. किसी भी प्रकार की हड़ताल या आपूर्ति बाधित होने से खासकर बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और नियमित दवाओं पर निर्भर लोगों को परेशानी हो सकती है. इसी वजह से कई संगठनों ने सार्वजनिक हित को देखते हुए बंद से दूरी बनाई है. स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि डिजिटल हेल्थ सेवाओं और ई-फार्मेसी का विस्तार भविष्य की जरूरत है, लेकिन इसके साथ मजबूत रेगुलेशन भी जरूरी है. फिलहाल सरकार और दवा नियामक एजेंसियां इस मुद्दे पर संतुलित समाधान निकालने की कोशिश कर रही हैं, ताकि मरीजों को बिना किसी बाधा के दवाएं मिलती रहें और दवा कारोबार में पारदर्शिता भी बनी रहे.

बेटी बचाओ अभियान में ढिलाई पर बड़ा एक्शन, स्वास्थ्य विभाग ने 4 अधिकारियों को निलंबित किया

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने प्रदेश में गिरते लिंगानुपात और अवैध भ्रूण लिंग जांच के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में लापरवाही बरतने के आरोप में चार चिकित्सा अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने सोमवार को यह कार्रवाई की। निलंबित अधिकारियों में सोनीपत के सीएचसी पुरखास की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. टीना आनंद, यमुनानगर के सीएचसी रादौर के एसएमओ डॉ. विजय परमार, रोहतक के सीएचसी चिड़ी के एसएमओ डॉ. सतपाल और नारनौल के सीएचसी सेहलंग की मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रभा शामिल हैं। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान इन अधिकारियों को क्रमशः रोहतक, अंबाला, झज्जर और रेवाड़ी के सिविल सर्जन कार्यालयों से संबद्ध किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इनके खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम-7 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी है। आदेश में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया और उन्होंने राज्य में लिंगानुपात सुधारने से जुड़ी योजनाओं की प्रभावी निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं किया। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार पिछले कुछ महीनों से अवैध लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चला रही है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत लगातार छापेमारी, निगरानी और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि बेटियों के जन्म अनुपात में सुधार लाया जा सके और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। ये अधिकारी हुए सस्पेंड एसीएम सुमिता मिश्रा द्वारा जारी निलंबन आदेश के तहत जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं: SMO डॉ. टीना आनंद SMO विजय परमार SMO सतपाल MO प्रभा

सेहत के लिए साथ आएं सभी दल, सुखना लेक पर CM सैनी ने विपक्ष से भी की अपील

चंडीगढ़. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए विशेष सहयोग के आह्वान का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक अनूठी पहल करते हुए साइकिल से सफर तय किया और जनता के बीच 'स्वस्थ भारत, स्वस्थ हरियाणा' का संदेश दिया। मुख्यमंत्री सैनी सुबह-सुबह चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना लेक पहुंचे। वहां उन्होंने न केवल मॉर्निंग वॉक की, बल्कि सैर पर आए आम नागरिकों और युवाओं से मुलाकात भी की। मुख्यमंत्री ने लोगों से बातचीत करते हुए उन्हें स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। विपक्ष से भी मिलकर साथ आने की अपील इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है। उन्होंने विपक्ष को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस राष्ट्रव्यापी आह्वान पर विपक्ष को भी राजनीति से ऊपर उठकर जनता के साथ मिलकर 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में साथ आना चाहिए। हरियाणा सरकार ने जारी की SOP मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए कहा, "हरियाणा में भी हमने केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार अपनी राज्य सरकार के स्तर पर SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी कर दी है।" पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने अब वर्चुअल मीटिंग के साथ-साथ 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) जैसे विकल्पों को भी अपनाने का फैसला किया है, जिससे यातायात और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

पेट्रोल बचाने की पहल, हरियाणा के मंत्री साइकिल चलाकर पहुंचे कैबिनेट मीटिंग में

चंडीगढ़. हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन बचत के आह्वान का असर देखने को मिला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई मंत्री जहां अपने काफिले में गाड़ियोंकी संख्या कम कर चुके हैं, वहीं सोमवार को कैबिनेट मंत्री डा. अरविंद शर्मा और कृष्ण कुमार बेदी तथा राज्य मंत्री गौरव गौतम साइकिल चलाकर मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने के लिए हरियाणा सचिवालय पहुंचे। सहकारिता व पर्यटन मंत्री डा. अरविंद शर्मा पहले भी साइकिल चलाकर सचिवालय पहुंच चुके हैं। सोमवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने के लिए अरविंद शर्मा अपने घर से साइकिल से निकले और सचिवालय पहुंचे। इसी तरह, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने भी साइकिल चलाई और मंत्रिमंडल की बैठक में पहुंचे। खेल एवं युवा सशक्तीकरण राज्य मंत्री गौरव गौतम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के फोटो वाली सफेद रंग की टीशर्ट पहुंची हुई थी, जिसके माध्यम से वे ईंधन बचाने का संदेश दे रहे थे। गौरव गौतम भी साइकिल से कैबिनेट की मीटिंग में भागीदारी करने पहुंचे। हरियाणा सरकार के दो मंत्री रणबीर गंगवा और कृष्ण पंवार अपने काफिले को छोड़ने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। उनके हाल ही में रेल में यात्रा करते हुए फोटो सामने आए थे। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल रेलगाड़ी से दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचे थे। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी भी अधिकारियों से आह्वान कर चुके हैं कि वे ईंधन की बचत के लिए कारों की पूलिंग करें तथा वर्चुअल बैठकों का आयोजन करें।